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रोशन होंगे अब देशभर के सभी सरकारी स्कूल.   मशहूर एक्ट्रेस रीता भादुड़ी का निधन.   गुजरात के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात .   पुनिया का आरोप -कांग्रेस नेताओं पर नक्सली हमले में था अजीत जोगी का हाथ .   ममता पर मोदी का कटाक्ष -बंगाल में सिंडिकेट सरकार.   पिछली सरकारों ने किसानों की नहीं की चिंता:मोदी .   विदिशा, खंडवा और रतलाम मेडिकल कॉलेज को मान्यता.   भोपाल के एमपी नगर में इमारत में लगी भीषण आग.   विकास यात्रा में योजना का पैसा खर्च करना वित्तीय अनियमितता .   सपा, बसपा और कांग्रेस नेताओं में मध्यप्रदेश को लेकर मंथन.   जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया समाचार पत्र के संस्करण का शुभारंभ.   प्रशासन का दिल और अंतर्रात्मा हैं शासकीय कर्मचारी: मुख्यमंत्री .   रायपुर परियोजना से जुड़ेंगे नौ शहर, दुर्ग तक बनेगा नया एक्सप्रेस वे.   अगवा युवक की नक्सलियों ने की हत्या.   मुठभेड़ में दो बीएसएफ जवान शहीद, तीन घायल.   छत्तीसगढ़ में 47% OBC तय करते हैं चुनावी खेल.   दो साल से शिक्षक नहीं, गुस्साए ग्रामीणों ने जड़ा ताला.   अदालत ने पूछा- अफसर बताएं बिलासपुर में कब शुरू होगी हवाई सेवा.  

देश की खबरें

स्कूलों को स्मार्ट बनाने में जुटी केंद्र सरकार ने पहली खेप में देशभर के सभी स्कूलों को बिजली से लैस करने का फैसला लिया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये राज्यों के साथ बातचीत में यह निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्यों के बजट को भी बढ़ाया गया है। ऐसे में सभी राज्य यह सुनिश्चित करें कि उनके सभी स्कूलों में बिजली उपलब्ध हो। साथ ही उन्होंने राज्यों से शिक्षा में सुधार को लेकर उठाए गए कदमों को भी अपनाने के लिए कहा है। जावड़ेकर सोमवार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ 117 पिछड़े जिलों में शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को लेकर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। साथ ही बताया कि गुणवत्ता के साथ सरकार स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजूबत बनाने का काम कर रही है। इस दौरान उन्होंने स्कूल भवनों के निर्माण सहित उन्हें बिजली से लैस करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों को व्यवसायिक कनेक्शन के बजाय घरेलू कनेक्शन से जोड़ने का सुझाव दिया। इसके लिए सभी राज्यों से अपने यहां की बिजली कंपनियों से बातचीत करने को भी कहा है। जावड़ेकर ने कहा कि सरकारी स्कूलों का संचालन कोई फायदा कमाने के लिए नहीं हो रहा, ऐसे में स्कूलों के लिए व्यवसायिक कनेक्शन लेना ठीक नहीं है। इससे खर्च बढ़ेगा। राज्यों की ओर से शिक्षकों की कमी को लेकर उठाए गए मुद्दों पर उन्होंने अपने पुराने दावों को फिर दोहराया और कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को कोई कमी नहीं है। इनकी तैनाती में ही खामी है। उन्होंने पिछड़े जिलों के कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को जल्द पूरा करने के भी निर्देश दिए।    

Madhya Bharat Madhya Bharat 17 July 2018

देश की खबरें

  कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में वर्ष 2013 में हुए नक्सली हमले के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हाथ होने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने जोगी की कांग्रेस में वापसी के दरवाजे बंद होने का ऐलान करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या के पीछे वही थे। पुनिया ने एक साक्षात्कार में कहा कि बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले की दरभा घाटी के नक्सल हमले में राज्य में कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व का सफाया कर दिया गया था। जोगी पर इस हमले के पीछे होने का हाथ है। यह आरोप सार्वजनिक हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि सुकमा जिले में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हुए नक्सली हमले में कम से कम 27 लोग मारे गए थे। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ला समेत राज्य के पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रमुख नंद कुमार पटेल भी शामिल थे। सालों पहले उत्तरप्रदेश में मायावती के सहयोगी रह चुके पुनिया ने यह भी दावा किया कि जोगी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच कोई गठबंधन नहीं हो सकता है। उन्होंने ऐसी अफवाहों के लिए जोगी और भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह लोग अफवाहें उड़ाने के विशेषज्ञ हैं। पुनिया छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बसपा के गठजोड़ के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि मायावती की पार्टी से गठजोड़ करने पर चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बेहतर होगी। इस विषय पर उचित स्तर पर चर्चा की जा रही है। पुनिया के आरोप पर अजीत जोगी का पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। उनके पुत्र और विधायक अमित जोगी का कहना है कि एजेंसी से जारी खबर को देखने के बाद ही कोई बयान दिया जा सकेगा।  

Madhya Bharat Madhya Bharat 16 July 2018

मध्यप्रदेश की खबरें

मध्यप्रदेश सरकार को आखिरकार इसी सत्र से तीन और मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक सत्र शुरू करने में कामयाबी मिल गई। विदिशा, खंडवा और रतलाम मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से मान्यता मिल गई। इससे प्रदेश में एमबीबीएस की सीटों की संख्या 800 से बढ़कर 13 सौ हो जाएगी। इसी साल दतिया मेडिकल कॉलेज भी शुरू हुआ है। इसकी सूचना चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कैबिनेट को दी। केंद्र सरकार ने प्रदेश में सात मेडिकल कॉलेज बनाने को मंजूरी दी थी। एमसीआई ने छिंदवाड़ा, शिवपुरी और शहडोल को मान्यता देने के लिए दौरा ही नहीं किया। दतिया मेडिकल कॉलेज को न सिर्फ मान्यता मिल चुकी है, बल्कि इसके भवन का लोकार्पण भी हो गया है। वहीं, विदिशा, खंडवा और रतलाम मेडिकल कॉलेज का एमसीआई की टीम ने दो बार दौरा भी किया पर छुट-पुट खामियोें के चलते मान्यता नहीं दी। इसको लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एमसीआई के सामने बार-बार प्रस्तुतिकरण दिया पर जब बात नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के निर्देश पर एमसीआई की टीम फिर से दौरा करने पर सहमत हो गई और अंतत: प्रदेश के इन तीनों कॉलेजों को मान्यता देने की सिफारिश केंद्र सरकार से कर दी। जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री दिल्ली गए थे और प्रदेश के इन तीन मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने का विषय उठाया था। इन मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को प्रवेश इसी सत्र से मिलेगा। नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने से एमबीबीएस की सीटें 800 से बढ़कर 13 सौ हो जाएंगी।  

Madhya Bharat Madhya Bharat 17 July 2018

मध्यप्रदेश की खबरें

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने गैर भाजपाई महागठबंधन की कवायद तेज हो गई है। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गैर भाजपाई महागठबंधन की कवायद तेज हो गई है। आगामी 2 अगस्त को आधा दर्जन छोटे दलों के भोपाल में होने वाले सम्मेलन में शिरकत को लेकर कांग्रेस और बसपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन गठबंधन के सूत्रधार पूर्व जदयू अध्यक्ष शरद यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की कांग्रेस दिग्गजों से अलग-अलग मुलाकातें हो चुकी हैं। महागठबंधन की स्क्रिप्ट तैयार करने में जुटे समाजवादी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस कर्नाटक के अनुभव के बाद ज्यादा सतर्कता से कदम आगे बढ़ा रही है। उसकी चिंता है कि चुनाव बाद गठबंधन की स्थिरता पूरी विश्वसनीयता के साथ बनी रहे। मप्र के अलावा छत्तीसगढ़ और राजस्थान के लिए भी सैद्धांतिक चर्चा हुई है, लेकिन अभी सीटों की कोई बात नहीं हुई। मायावती की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के अलावा अशोक गेहलोत से भी चर्चा हुई है। उधर, शरद यादव की भी कांग्रेस के दिग्गजों से मुलाकात में इसी मुद्दे पर लंबी चर्चा हो चुकी है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव गोविंद यादव का कहना है कि छग में कांग्रेस के साथ गोंगपा के हीरासिंह मरकाम मंच साझा कर चुके हैं। भोपाल सम्मेलन में मरकाम और फूलसिंह बरैया सहित राष्ट्रीय समानता दल को मिलाकर छह क्षेत्रीय दल शामिल होंगे। कांग्रेस और बसपा से अभी इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई है। इस सम्मेलन के बहाने गैर आदिवासी, गैर दलित और गैर कांग्रेसी हिन्दू वोटों पर फोकस किया जा रहा है। गठबंधन से जुड़े नेताओं का कहना है कि भाजपा के जनाधार में बड़ी संख्या ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग से है। इनमें से एक हिस्सा कांग्रेस के पास भी है। इनके अलावा गैर कांग्रेसी हिन्दू में ज्यादातर कम आबादी वाले समाज और गरीब-ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। इस वर्ग को रिझाने के बाद ही महागठबंधन का उद्देश्य पूरा होगा।  

Madhya Bharat Madhya Bharat 17 July 2018

छतीसगढ़ की खबरें

  रायपुर के विस्तार को देखते हुए आगामी वर्षों की योजना बनने लगी है। नया रायपुर से दुर्ग तक कई शहर रायपुर से जुड़ चुके हैं। अब सरकार रायपुर से दुर्ग तक एक नई एक्सप्रेस सड़क बनाने की तैयारी कर रही है। इस एक्सप्रेस वे से वृहद रायपुर परियोजना में शामिल नौ शहर जुड़े रहेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाइवे अथारिटी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को नए एक्सप्रेस वे का डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का निर्देश दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस एक्सप्रेस वे के निर्माण की घोषणा मार्च 2016 में की थी। इसके निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है। रायपुर से दुर्ग तक 26.60 किमी सड़क एक्सप्रेस वे के रूप में विकसित की जाएगी। इस मार्ग पर वाहन निर्बाध गति से चलेंगे। रायपुर से होकर गुजरने वाले एनएच 53 के साथ-साथ यह सड़क चलेगी। नया रायपुर, रायपुर, चरोदा, जामुल, कुम्हारी, भिलाई-3, दुर्ग आदि शहर ग्रेटर रायपुर परियोजना में शामिल होंगे। इन शहरों की नगर पालिका सीमाओं को छूता हुआ एक्सप्रेस वे निकलेगा और इन सभी शहरों को आपस में जोड़ेगा। राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि सरकार रायपुर महानगर के विकास की योजना पर काम रही है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ की पांच हजार किमी सड़कों के उन्नयन और चौड़ीकरण का प्लान एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) को भेजा है। इसकी कुल लागत 10 हजार 500 करोड़ रूपए होगी। इससे पहले प्रदेश में एडीबी की मदद से 1249 किमी स्टेट हाइवे का उन्नयन किया जा चुका है। 916 किमी स्टेट हाइवे का प्लान अलग से भेजा गया है। प्रदेश में स्टेट रोड डवलपमेंट प्रोजेक्ट 2002-03 में बना था। इसी योजना के तहत सड़कों का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर से जोड़ने के लिए एनएच 6, एनएच 16 और एनएच 78 सड़कें हैं जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। नार्थ-साउथ कॉरीडोर में बिलासपुर से रायपुर और रायपुर से जगदलपुर तक एनएच 200 और एनएच 43 को भी विकसित किया जा रहा है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 17 July 2018

छतीसगढ़ की खबरें

चुनाव के मुहाने पर खड़े छत्तीसगढ़ में राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। एक तरफ कांग्रेस 15 वर्षों का वनवास खत्म करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। दूसरी तरफ सत्तारुढ़ भाजपा हर हाल में चौथी बार सरकार बनाने की कोशिश में है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी गणित का पूरा तानाबाना अनुसूचित जनजाति (एसटी) को वोटरों के ईर्दगिर्द बुना जा रहा है। माना जाता है कि छत्तीसगढ़ में सत्ता की चॉबी एसटी वर्ग के पास ही है। इसी वजह से दोनों प्रमुख दलों ने दो दर्जन से अधिक सीटों को प्रभावित करने की ताकत रखने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को फिलहाल नजरअंदाज कर रखा है। एसटी वर्ग की सर्वाधिक आबादी व आरक्षित सीटें बस्तर व सरगुजा संभाग में है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस का पूरा संगठन इन दोनों संभागों की बार- बार परिक्रमा कर रहा है। प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेत कई केंद्रीय नेता व मंत्री बस्तर व सरगुजा का दौरा कर चुके हैं। कांग्रेस के प्रदेश संगठन से जुड़े राष्ट्रीय नेता भी इन्हीं दोनों संभागों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। ओबीसी नेताओं का दावा है कि 2013 में ओबीसी वर्ग के दम पर ही भाजपा की सरकार बन पाई। इस वर्ग के एक बड़े सामाजिक नेता ने कहा कि पिछले चुनाव में जब आदिवासियों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया था, तब मैदानी क्षेत्रों से ओबीसी ने ही भाजपा को गद्दी तक पहुंचाया। छत्तीसगढ़ में अब तक तीन चुनाव हो चुके हैं। 2003 के पहले और 2008 के दूसरे चुनाव में एसटी वर्ग ने ही भाजपा को सत्ता सुख दिया। 2003 में 34 में से 25 सीटें भाजपा के खाते में गईं, जबकि 2008 में 29 में से 19 सीटें भाजपा को मिलीं। लेकिन 2013 के चुनाव में इस वर्ग ने पाला बदल लिया। इससे 18 सीटें सीधे कांग्रेस के खाते में चली गईं। प्रदेश में दोनों प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की कमान ओबीसी वर्ग के हाथों में है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल इसी वर्ग से आते हैं। दोनों ही कुर्मी समाज से आते हैं। प्रदेश में ओबीसी की आबादी और उसके अंदर अलग-अलग जातियों की आबादी को लेकर काफी विवाद है। ओबीसी की आबादी 47 फीसद मानी जाती है, लेकिन यह वर्ग 52 फीसद का दावा करता है। इसी तरह इसमें शामिल 95 से अधिक जातियों के दावे भी अलग- अलग हैं। ओबीसी में भी साहू की आबादी 11 से 12 फीसद के बीच है। यादव आठ से नौ फीसद, मरार, निषाद व कुर्मी की आबादी करीब चार से पांच फीसद अनुमानित है। राज्य की आबादी का 32 फीसद हिस्सा अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग का है। इसमें करीब 42 जातियां शामिल हैं। एसटी वर्ग का सर्वाधिक प्रभाव बस्तर, सरगुजा व रायगढ़ क्षेत्र में हैं। अन्य क्षेत्रों में भी इनकी आबादी 10 फीसद से कम नहीं है। राज्य की 29 विधानसभा सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित है, लेकिन करीब 35 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां एसटी की आबादी 50 फीसद से अधिक है। राज्य की आबादी का 12.81 फीसद हिस्सा अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग है। इस वर्ग के लिए 10 सीटें आरक्षित हैं। लेकिन करीब आठ से दस सामान्य सीटों पर भी इनका प्रभाव अच्छा है। छत्तीसगढ़ में ओबीसी में 95 से अधिक जातियां शामिल हैं। आबादी में इनका हिस्सा 47 फीसद है, लेकिन दावा 52 फीसद से अधिक का किया जाता है। 49 सामान्य सीटों में से ज्यादातर में विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में इनका प्रभाव अधिक है।  

Madhya Bharat Madhya Bharat 14 July 2018

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