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साँची बौद्ध विश्वविद्यालय में होगी पाँच फेकल्टी
साँची बौद्ध विश्वविद्यालय में होगी पाँच फेकल्टी
लगभग 100 एकड़ में बनेगा विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के साँची में राज्य शासन द्वारा स्थापित किये जा रहे साँची बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में मुख्य रूप से पाँच फेकल्टी होंगी। विश्वविद्यालय में बौद्ध-दर्शन, सनातन-धर्म और भारतीय ज्ञान-अध्ययन, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध-अध्ययन, तुलनात्मक धर्मों और भाषा, साहित्य एवं कला फेकल्टी होंगी। विश्वविद्यालय भवन एवं परिसर के लिये साँची में लगभग 100 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। भवन के निर्माण पर 200 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया है कि अपने तरह के पहले एवं अनूठे साँची बौद्ध एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय का भूमि-पूजन साँची में 21 सितम्बर को प्रातः 11.30 बजे होगा। भूमि-पूजन समारोह श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री म्हिन्दा राजपक्षे, भूटान के प्रधानमंत्री श्री जिग्मे वाय. थिनले, राज्यपाल श्री रामनरेश यादव, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, सांसद एवं नेता प्रतिपक्ष लोकसभा श्रीमती सुषमा स्वराज, श्री प्रकाश अम्बेडकर, स्वामी दयानंद सरस्वती और श्री वेन. बानगल उपतिस्स नायक थेरो की गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न होगा।विश्वविद्यालय में भारत तथा विदेशों में अन्य भारतीय पद्धतियों के साथ-साथ बौद्ध धर्म के समस्त पहलुओं का अध्यापन एवं शोध किया जाएगा। यहाँ पर बुद्धिज्म शिक्षा, सम-सामयिक दर्शन एवं परम्पराओं में शिक्षा दी जाएगी। विश्वविद्यालय धर्म, दर्शन तथा संस्कृति जैसे क्षेत्रों में ज्ञान के सशक्त ऐतिहासिक समानताओं से जुड़े एशिया के देशों के बीच पारस्परिक संव्यवहार बढ़ायेगा। एशिया की संस्कृति और सभ्यता को साथ लाकर विश्व-शांति और सौहार्द बढ़ाने, शिक्षा की वैकल्पिक पद्धतियों का उपयोग कर शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने में योगदान देने के साथ ही विश्वविद्यालय में एशिया को सुसंगत कला, शिल्प और कौशल में शिक्षण और प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए एशिया तथा विश्व के विद्वानों और अन्य इच्छुक व्यक्तियों के बीच भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।शिलान्यास समारोह के अगले दिन 22 सितम्बर को विधानसभा भवन, भोपाल में दो दिवसीय धर्म-धम्म सम्मेलन का शुभारंभ होगा। सम्मेलन के प्रथम दिन के मुख्य वक्ता प्रो. आनंद गुरुगे हैं। श्री गुरुगे यू.एस.ए. में प्रोफेसर हैं। दूसरे दिन यू.एस.ए., न्यू मेक्सिको, सान्ता फे के वेदाचार्य डॉ. डेविड फ्रॉले (वामदेव शास्त्री) मुख्य वक्ता होंगे। इनके अतिरिक्त लोक सभा सांसद एवं विचारक डॉ. मुरली मनोहर जोशी, श्री अरुण शौरी, श्री लोकेश चन्द्रा, श्री प्रकाश अम्बेडकर, श्री रामा जोईस, श्री एस.एल. भ्यरप्पा, श्री मकरंद परांजपे, श्री एम.बी. अथ्रेय, श्री जेशे सैमटेन, श्री तुल्कू तसोरी रिनपोचे, लाला लोबजैंग, श्री जेशे लखदोर, स्वामी परमात्मानंद, यू.के. से श्री जी.एम. बैमफोर्ड, थाईलैण्ड से भिवकुनी धम्मानंद, श्रीलंका से श्री बानगला थेरो, श्री असंगा तिलकरत्ने, कम्बोडिया से श्री सन सौबर्ट, फ्रांस से श्री कमलेश्वर भट्टाचार्या, जापान से श्री यासूओ कमाटा, भूटान से श्री हरका बी. गुरुंग, नेपाल से श्री त्रि रत्ना मनान्धर, नार्वे से श्री इगिल लोथे, कोरिया से श्री जियो ल्योग ली, वियतनाम से श्री थिच टैम ड्यूक, नीदरलैण्ड से सुश्री एलिजाबेथ डेन बोएर, ताइवान से श्री शिह लिएन हई और चीन से श्री जियानसीन ली की भी भागीदारी रहेगी।
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