अब बस्तर में विकास बनेगा हथियार
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 2022 का टार्गेट तय किया है। नक्सलवाद के नासूर को खत्म करने के लिए सरकार ने तीन स्तर पर काम शुरू किया है और करोड़ों स्र्पए का फंड भी दिया है।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद सरकार का विशेष फोकस बस्तर में रोड कनेक्टिविटी से लेकर है। इसके लिए सरकार ने विशेष रूप से फंड की व्यवस्था की है। सरकार विकास, कनेक्टिविटी और आपरेशन की मदद से बस्तर में शांति लाने के लिए प्रयास कर रही है।

सरकार के कदम को पूरा करने के लिए हर विभाग अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहा है। नक्सल मामलों के जानकारों की मानें तो इस बजट में विकास की राशि को बढ़ाने की जरूरत है। केंद्र और राज्य के बजट से सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, जवानों पर होने वाले खर्च को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की आस लगाई जा रही है।

सरकार को उम्मीद है कि बस्तर में मोबाइल नेटवर्क खड़ा होने के बाद इंटेलिजेंस को नक्सलियों के मूवमेंट के बारे में जानकारी मिलनी तेज हो जाएगी। इस बजट में मोबाइल टावर को पूरा करने के लिए राशि की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों की मानें तो बस्तर के अंदस्र्नी इलाकों में अब भी सड़क का नेटवर्क नहीं है। मुख्य मार्ग तो बन गए हैं, लेकिन अंदस्र्नी इलाकों में सड़क नहीं होने के कारण स्थानीय आदिवासी पुलिस की मदद पूरी तरह नहीं कर पा रहे हैं।

सड़क के अभाव में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचनाएं पुलिस कैंप तक तीन से पांच दिन में पहुंच रही हैं। जब तक पुलिस उन नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन प्लान करती है, तब तक वे दूसरे गांव में ठिकाना बना लेते हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो अंदस्र्नी इलाकों में सड़क, पुल और पुलिया के लिए विशेष प्रावधान करने की जरूरत है। पिछले बजट में सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कैंप स्थापित करने के लिए विशेष प्रावधान किया गया था।

इसमें 2110 बैरक, 3985 शौचालय, 2837 बाथरूम की स्वीकृति दी गई है। 800 करोड़ की लागत से 6168 आवासीय भवनों का निर्माण शुरू भी हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बस्तर के हर जिले में हेलिकाप्टर को रात में उतारने के लिए नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध हो। अब तक सात जिलों में 15 हैलिपैड को नाइट लैंडिंग की सुविधा से लैस किया गया है। फोर्टिफाइड थानों की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ में 202 हल्के, 63 मध्यम और 372 भारी वाहन, 854 मोटरसाइकिल उपलब्ध थी। जो अब बढ़कर 1994 हल्के, 521 मध्यम, 335 भारी वाहन और 2096 मोटरसाइकिल तक पहुंच गई है। सरकार ने पहली बार नक्सल क्षेत्रों में पदस्थ जवानों की सुरक्षा के लिए 42 माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल104 हल्के वाहन और 15 मध्यम वाहन की खरीदी की गई है।

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि बजट में सरकार ने सड़क, बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए विशेष प्रावधान किया है। नए वित्तीय वर्ष के लिए भी इसके लिए अलग से राशि का प्रावधान का प्रस्ताव दिया गया है।

पैकरा ने कहा कि केंद्र सरकार ने बस्तर के लिए विशेष पैकेज दिया है। अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी नक्सल मोर्चे पर तैनात किया गया है। प्रदेश की रमन सरकार ने सुरक्षा के लिए कभी भी बजट से समझौता नहीं किया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों की भर्ती सहित स्थानीय लोगों को रोजगार का इंतजाम किया गया है। पैकरा ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी सरकार की ओर से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें जिले के कलेक्टर और एसपी को अधिकार दिया गया है।