सामूहिक आत्महत्या पर क्यों अब तक खुलासा नहीं
atmhatya

 

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत से इलाके के लोग सकते में हैं वहीं पुलिस भी फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, सोमवार को बचे हुए 6 शवों का भी पोस्टमार्टम हो गया और सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसमें सभी की मौत फांसी से होने की बात सामने आई है।

क्राइम ब्रांच के जेसीपी आलोक कुमार के अनुसार सभी 11 शवों का पोस्टमार्टम हो चुका है। इनमें से 6 शवों की रिपोर्ट के अनुसार उनकी मौत फांसी से हुई है। रिपोर्ट के अनुसार परिवार की वरिष्ठ सदस्य और मां नारायण देवी का गला घोंटने का शक था लेकिन उनकी मौत भी फांसी से ही हुई है।

वहीं दूसरी तरफ फोरेंसिक जांच भी पूरी होने की सूचना है। दावा है कि इस रिपोर्ट में भी घर के अंदर किसी बाहरी शख्स के फिंगरप्रिंट नहीं मिले हैं। इसके बाद किसी अन्य द्वारा परिवार की हत्या के कयास कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं.

जांच के दौरान घर में मिले एक रजिस्टर ने अहम खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार उन्हें घर से ऐसे कुछ नोट्स मिले हैं जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि सभी 11 लोगों की मौत तंत्र-मंत्र के चक्कर में हुई है। इसके बाद पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

पड़ोसियों ने भी बताया है कि यह परिवार काफी धार्मिक विचारों वाला था और रात की कीर्तन करने के बाद ही सोता था। इतना ही नहीं, यह भी पता चला है कि दुकान पर हर दिन बोर्ड पर घर की बहू सुविचार लिखती थीं।

पुलिस की मानें तो भाटिया परिवार के घर से मिले सबूत इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि मृतकों का अध्यात्म की ओर ज्यादा झुकाव था। यही नहीं परिवार तांत्रिक विद्या पर भी विश्वास करता था, इसलिए माना जा रहा है कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए अंधविश्वास में सभी ने स्वेच्छा से मौत को गले लगा लिया। पुलिस अधिकारी भी इस घटना को अध्यात्म से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पुलिस की जांच अभी जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आनी बाकी है। इसके बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी।

दरअसल मरने वाले सभी लोगों में नारायण देवी के छोटे बेटे ललित और पुत्रवधू टीना के हाथ खुले मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि ललित और टीना को छोड़कर सभी ने पहले कोई नशीला पदार्थ खाया होगा। उनके अचेत होने के बाद ललित और टीना ने सभी के मुंह पर पहले कपड़े व टेप लपेटे और बाद में उन्हें फंदे से लटका दिया। अंत में पति और पत्नी ने भी फांसी लगा ली।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक घर से कुछ धार्मिक किताबें और हाथ से लिखी अध्यात्मिक बातें मिली हैं। जो इनके अंधविश्वास में जान देने की बात की ओर इशारा कर रहे हैं। भाटिया परिवार के पड़ोसी भी परिवार के धार्मिक रुझान से परिचित हैं।

परिवार के सभी सदस्य नियमित पूजा-पाठ करते थे। वहीं, समय-समय पर भंडारे का आयोजन भी किया जाता था। नारायण देवी के छोटे बेटे ललित ने गत पांच वर्ष से मौन व्रत धारण कर रखा था। उनकी घर के भूतल पर ही लकड़ी व प्लाई की दुकान थी। जबकि बगल में बड़े भाई भुवनेश परचून की दुकान चलाते थे। इन दोनों दुकानों के बीच एक प्लाई का बोर्ड लगा था। उसपर अक्सर प्रियंका अन्यथा परिवार का कोई अन्य सदस्य रोजाना कोई-कोई न कोई आध्यामिक विचार अथवा श्लोक इत्यादि लिखता था। उनकी दुकान पर आने वाले लोग सहित इस गली से गुजरने वाले उसे बड़े ध्यान से पढ़ते थे।

मालूम हो कि भाटिया परिवार में तीन बेटे व दो बेटियों में अब सबसे बड़े बेटे दिनेश और बेटी सुजाता भाटिया जीवित हैं। दिनेश परिवार के साथ राजस्थान के कोटा में रहते हैं। जबकि सुजाता अपने परिवार के साथ पानीपत रहती हैं। परिवार शनिवार की रात भाटिया परिवार रात 11.30 बजे तक जगा हुआ था। लोगों ने कुछ सदस्यों को तो गली में घूमता भी देखा था। भुवनेश की दुकान भी रात 11.30 तक खुली हुई थी। वे ग्राहकों को पहले की तरह सामान बेच रहे थे। लिहाजा लोगों को किसी अनहोनी होने की आशंका का आभास तक नहीं हुआ। पुलिस को आशंका है कि खाना खाने के बाद देर रात दो से तीन बजे के बीच सारी घटनाएं घटीं।

एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत के मामले की संजीदगी को देखते हुए, रविवार का दिन होने के बावजूद मेडिकल बोर्ड की निगरानी में रात में ही शवों का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के लिए दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल ने फारेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टरों के दो मेडिकल बोर्ड गठित किए हैं। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी करवाई गई है। रविवार को छह शवों को पोस्टमार्टम किया गया, शेष पांच का सोमवार को होगा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार प्राथमिक तौर पर डॉक्टरों ने मौत का कारण आत्महत्या बताया है। फांसी लगाने के कारण उन लोगों की मौत हुई। सभी शवों का पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद डॉक्टर अपनी फाइनल रिपोर्ट पुलिस को सौपेंगे।

एक घर में ग्रिल से लटके हुए नौ शवों को लेकर सभी के दिमाग में पहला सवाल यही है कि यह कैसे संभव हुआ होगा। आखिर कैसे संभव है कि एक ही परिवार के 11 लोगों ने फांसी लगाकर खुदकशी कर ली। दिल्ली पुलिस की जांच टीम व फॉरेंसिक टीम की पूरी जांच इसी गुत्थी को सुलझाने पर टिकी है।

फॉरेंसिक टीम ने मौके पर शवों का हर एंगिल से न सिर्फ माप लिया, बल्कि फोटोग्राफी भी कराई। टीम ने जांच के दौरान बारीकी से देखा कि एक शव से दूसरे शव के बीच की दूरी कितनी थी? शवों के पैर जमीन से कितने ऊपर थे? हाथों को कैसे बांधा गया था? इतना ही नहीं, अगर घटना खुदकशी की है तो क्या एक साथ नौ लोग इस तरह से खुदकशी कर सकते हैं या नहीं?

बरामदे में मिले 10 शवों में से दो के हाथ खुले मिले हैं, जबकि आठ के हाथ बंधे मिले। इस पहलू पर भी टीम जांच कर रही है। माप के साथ ही टीम ने अलग-अलग एंगिल से पूरे क्राइम सीन की फोटोग्राफी कराई, ताकि हर पहलू की जांच की जा सके।