Since: 23-09-2009

  Latest News :
मोदी ने कैसे विपक्ष को घेरा ,कांग्रेस को सेना पर भरोसा नहीं.   दिग्विजय सिंह को चाहिए एयर स्ट्राइक के सबूत.   स्टार्टअप के लिए हम दुनिया का सबसे बड़ा ईकोसिस्टम.   उत्तर प्रदेश में गरीब सवर्णों को मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण.   ममता की मेगा रैली, राहुल गांधी ने भी दिया समर्थन.   यूपी में NIA के 16 जगह छापेमारी , कई गिरफ्तार .   कमल नाथ को एयू. बैंक ने सौंपा 10 लाख का चेक.   मजबूत देश एवं समाज की आधारशिला है सशक्त नारी : राज्यपाल .   देश एवं समाज की आधारशिला है सशक्त नारी : राज्यपाल .   देश एवं समाज की आधारशिला है सशक्त नारी : राज्यपाल.   देश एवं समाज की आधारशिला है सशक्त नारी : राज्यपाल.   देश एवं समाज की आधारशिला है सशक्त नारी : राज्यपाल .   90 विधानसभा में निकली बाइक रैली, रमन सिंह ने दिखाई हरी झंडी.   बम बनाने का सामान छोड़कर भागे नक्सली.   यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम अक्टूबर में लागू होगी.   ऊर्जा, राजस्व और खनिज मंत्रालय मुख्यमंत्री बघेल के पास .   साक्षर इलाकों के नामांकन-पत्र ज्यादा होते हैं खारिज.   गिर सकता है 20 फीसद सराफा कारोबार.  
अटल जी ने पूरा जीवन देश के लिए जिया
शिवराज सिंह चौहान

 

शिवराज सिंह चौहान

मैं बचपन से ही अपने गाँव से भोपाल पढ़ने चला गया था। भोपाल में मैंने सुना कि भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की एक सभा चार बत्ती चौराहे बुधवारे में है। मैंने सोचा चलो भाषण सुन के आएं। अटल जी को जब बोलते सुना तो सुनते ही रह गया।ऐसा लग रहा था कि जैसे कविता उनकी जिव्हा से झर रही है। वो बोल रहे थे,“ये देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, एक जीता जागता राष्ट्र-पुरुष है, हिमालय इसका मस्तिष्क है, गौरी-शंकर इसकी शिखा हैं, पावस के काले- काले मेघ इसकी केश राशि हैं, दिल्ली दिल है, विंध्यांचल कटि है, नर्मदा करधनी है, पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट इसकी दो विशाल जंघाएँ हैं, कन्याकुमारी इसके पंजे हैं, समुद्र इसके चरण पखारता है, सूरज और चन्द्रमा इसकी आरती उतारते हैं, ये वीरों की भूमि है, शूरों की भूमि है, ये अर्पण की भूमि है, तर्पण की भूमि है, इसका कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु हमारे लिए गंगाजल है, हम जियेंगे तो इसके लिए और कभी मरना पड़ा तो मरेंगे भी इसके लिए और मरने के बाद हमारी अस्थियाँ भी अगर समुद्र में विसर्जित की जाएंगी तो वहां से भी एक ही आवाज़ आएगी –“भारत माता की जय, भारत माता की जय”...

 

इन शब्दों ने मेरा जीवन बदल दिया। राष्ट्र प्रेम की भावना हृदय में कूट-कूट कर भर गई और मैंने फैसला किया कि अब ये जीवन देश के लिए जीना है। ये राजनीति का मेरा पहला पाठ था। इसके बाद से राजनीति में मैं माननीय अटल जी को गुरू मानने लगा. जब भी कभी अटल जी को सुनने का अवसर मिलता, मैं कोई अवसर नहीं चूकता। बचपन में ही भारतीय जनसंघ का सदस्य बन गया, और मैं राजनीति में सक्रिय हो गया। आपातकाल में जेल चला गया, और जेल से निकल कर जनता पार्टी में काम करने लगा, फिर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गया। अटल जी से मेरी पहली व्यक्तिगत बातचीत भोपाल में एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान तब हुई जब मेरी ड्यूटी एक कार्यकर्ता के नाते उनकी चाय नाश्ते की व्यवस्था के लिए की गई।मैं अटल जी के लिए फल, ड्राई फ्रूट इत्यादि दोपहर के विश्राम के बाद खाने के लिए ले गया। तो वे बोले,“क्या घास- फूस खाने के लिए ले आए, अरे भाई, कचौड़ी लाओ, समोसे लाओ, पकोड़े लाओ या फाफड़े लाओ” और तब मैंने उनके लिए नमकीन की व्यवस्था की। एक छोटे से कार्यकर्ता के लिए उनके इतने सहज संवाद ने मेरे मन में उनके प्रति आत्मीयता और आदर का भाव भर दिया। उनके बड़े नेता होने के नाते मेरे मन में जो हिचक थी, वो समाप्त हो गई।

 

84 के चुनाव में वे ग्वालियर से हार गए थे, लेकिन हारने के बाद उनकी मस्ती और फक्कड़पन देखने के लायक था। जब वो भोपाल आए तो उन्होंने हँसते हुए मुझे कहा, “अरे शिवराज, अब मैं भी बेरोजगार हो गया हूँ”। 1991 में उन्‍होंने विदिशा और लखनऊ, दो जगह से लोकसभा का चुनाव लड़ा, और ये तय किया कि जहां से ज्यादा मतों से चुनाव जीतेंगे, वो सीट अपने पास रखेंगे। मैं उस समय उसी संसदीय क्षेत्र की बुधनी सीट से विधायक था। बुधनी विधानसभा में चुनाव प्रचार की ज़िम्मेदारी तो मेरी थी ही, लेकिन युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते, मुझे पूरे संसदीय क्षेत्र में काम करने का मौक़ा मिला था। उस समय अटल जी से और निकट के रिश्ते बन गए। जब मैं उनके प्रतिद्धन्‍दी से उनकी तुलना करते हुए भाषण देता था, तो मेरे एक वाक्य पर वो बहुत हंसते थे। मैं कहता था,“कहाँ मूंछ का बाल और कहाँ पूंछ का बाल”, तो वो हंसते हुए कहते थे “क्या कहते हो भाई, इसको छोड़ो”।

 

विदिशा लोकसभा वो एक लाख चार हजार वोट से जीते और लखनऊ एक लाख सोलह हजार से। ज्यादा वोटों से जीतने के कारण उन्होंने लखनऊ सीट अपने पास रखी और विदिशा रिक्त होने पर मुझे विदिशा से उपचुनाव लडवाया। उपचुनाव में जीत कर जब मैं उनसे मिलने गया तो उन्होंने मुझे लाड़ से कहा, “आओ विदिशा-पति”. और तब से वो जब भी मुझसे मिलते तो मुझे विदिशा-पति ही कहते और जब भी मैं विदिशा की कोई छोटी समस्या भी लेकर जाता तो उसे भी वो बड़ी गम्भीरता से लेते। एक बार गंजबासौदा में एक ट्रेन का स्टॉप समाप्त कर दिया था। जब मेरे तत्कालीन रेल मंत्री श्री जाफर शरीफ जी से आग्रह करने बाद भी ट्रेन को दोबारा स्टॉपेज नहीं दिया गया तो मैं अटल जी के पास पहुंचा, और मैंने कहा कि आप इस ट्रेन का स्टॉप फिर से गंजबासौदा में करवाइए। उन्होंने संसद भवन में ही पता लगवाया कि श्री जाफर शरीफ जी कहाँ हैं संयोग से वे संसद भवन में ही थे, अटल जी चाहते तो फोन कर सकते थे। लेकिन फोन करने की बजाय उन्होंने कहा कि चलो सीधे मिल के बात करते हैं। इतने बड़े नेता का एक ट्रेन के स्टॉप के लिए उठकर रेल मंत्री के कक्ष में जाना मुझे आश्चर्यचकित कर गया और तब मैंने जाना कि छोटे-छोटे कामों को करवाने के लिए भी अटल जी कितने गम्भीर थे कि जनता की सुविधा के लिए उन्हें वहां जाने में कोई हिचक नहीं है। मैं भी उनके साथ श्री जाफर शरीफ जी के पास गया और तत्काल जाफर शरीफ जी ने रेल का स्टाफ गंजबासौदा में कर दिया।

 

2003 में मध्यप्रदेश में विधान सभा के चुनाव थे। उस समय तत्कालीन कांग्रेस की सरकार द्वारा सूखा राहत के लिए राशि केंद्र सरकार से मांगी जा रही थी। हम भाजपा के सांसदों का एक समूह यह सोचता था कि विधान सभा के चुनाव आने के पहले यदि यह राशि राज्य शासन को मिलेगी तो सरकार इस राशि का दुरूपयोग चुनाव जीतने के लिए करेगी, इसलिए कई सांसद मिलकर माननीय अटल जी, जो उस समय प्रधानमंत्री थे, के पास पहुंचे, और उनसे कहा कि इस समय राज्य सरकार को कोई भी अतिरिक्त राशि देना उचित नहीं होगा, तब अटल जी ने हमें समझाते हुए कहा कि लोकतन्त्र में चुनी हुई सरकार किसी भी दल की हो, उस सरकार को मदद करने का कर्त्‍तव्‍य केंद्र सरकार का है, इसलिए ऐसे भाव को मन से त्याग दीजिये।

 

1998 के अंत में मेरा एक भयानक एक्सीडेंट हुआ। मेरे शरीर में 8 फ्रैक्चर थे। उसी दौरान एक वोट से माननीय अटल जी की सरकार गिर गई। मैं भी स्ट्रेचर पर वोट डालने गया था। तब फिर से चुनाव की घोषणा हुई। मुझे लगा ऐसी हालत में मेरा चुनाव लड़ना उपयुक्त नहीं होगा। मैंने अटल जी से कहा कि इस समय विदिशा से कोई दूसरा उम्मीदवार हमें ढूँढना चाहिए, मेरी हालत चुनाव लड़ने जैसी नहीं है, तब उन्होंने स्नेह से मुझे दुलारते हुए कहा, “खीर में इकट्ठे और महेरी में न्यारे, ये नहीं चलेगा. ...जब तुम अच्छे थे तब तुम्हें चुनाव लड़वाते थे। आज तुम अस्वस्थ हो तब तुम्हें न लड़वाएं, ये नहीं होगा। चुनाव तुम ही लड़ोगे, जितना बने जाना, बाक़ी चिंता पार्टी करेगी”. और मैं अस्वस्थता की अवस्था में भी चुनाव लड़ा और जीता। ऐसे मानवीय थे अटल जी। ऎसी कई स्मृतियाँ आज मस्तिष्क में कौंध रही हैं।

 

हमारे प्रिय अटल जी नहीं रहे।

 

सबको अपना मानने वाले, सबको प्यार करने वाले, सबकी चिंता करने वाले, सर्वप्रिय अजातशत्रु राजनेता, उनके लिए कोई पराया नहीं था, सब अपने थे।पूरा जीवन वे देश के लिए जिए। भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और परम्पराओं के वे जीवंत प्रतीक थे। भारत माता के पुजारी. उनकी कविता, “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ”, साहस के साथ हमें काम करने की प्रेरणा देती है।उनके चरणों में शत-शत नमन – प्रणाम |[लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं ]

 

 

MadhyaBharat 18 August 2018

Comments

Be First To Comment....
Video

Page Views

  • Last day : 2183
  • Last 7 days : 12598
  • Last 30 days : 39041

Advertisement

All Rights Reserved ©2019 MadhyaBharat News.