एमपी में डेंटल कॉलेजों की 722 सीटें खाली
एमपी में डेंटल कॉलेजों की 722 सीटें खाली

 

मध्यप्रदेश के निजी डेंटल कॉलेजों में इस साल 722 सीटें खाली रह गई हैं। अब इन सीटों के भरने के आसार नहीं हैं। पहली बार इतनी सीटें खाली बचीं हैं। अनरिजर्व कैटेगरी सीटें भी खाली रह गई हैं। पिछले साल तक निजी कॉलेजों में बीडीएस की करीब 400 सीटें ही बचती थीं। प्रदेश के 14 डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की 1340 सीटें हैं।

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि इस साल पांच नए डेंटल कॉलेजों को मान्यता मिल गई। इसके अलावा दाखिले के लिए न्यूनतम अंक भी इस साल कम कर दिए गए थे। पिछले साल तक रिजर्व कैटेगरी के लिए 40 फीसदी व अनरिजर्व कैटेगरी के लिए 50 फीसदी अंक जरूरी होते थे। इसका असर यह हुआ कि बीडीएस में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों ने एमबीबीएस में प्रवेश ले लिया। शनिवार को दो छात्रों ने निजी कॉलेजों में ज्यादा फीस लेने की शिकायत भी की है।

भोपाल के जीएमसी में सरकारी और निजी मेडिकल/डेंटल कॉलेजों के लिए चल रही काउंसलिंग खत्म हो गई है, लेकिन विवाद अभी ठंडा नहीं पड़ा है। 35 उम्मीदवारों ने अलग-अलग दिन शिकायत कर काउंसलिंग में गड़बड़ी की बात कही है। कोहेफिजा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

सबसे पहले 30 सितंबर को उम्मीदवारों ने एमपी ऑनलाइन के खिलाफ शिकायतें की। तीन अलग-अलग शिकायतें में कहा गया है कि एमपी ऑनलाइन के सर्वर में कोई खराबी नहीं आई थी। जानबूझकर साफ्टवेयर में गड़बड़ी की गई थी। इस वजह से काउंसलिंग नहीं हो पाई थी। तीन दिन तक उम्मीदवार कॉलेज परिसर में पड़े रहे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में इन सीटों को ऑल इंडिया के उम्मीदवारों से भरने के लिए कह दिया था।