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इंदौर News


स्वच्छता ही सेवा

"स्वच्छता ही सेवा'' अभियान समारोह में मुख्यमंत्री  चौहान   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  इंदौर में 'स्वच्छता ही सेवा'' अभियान के उपलक्ष्य में ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2016 में इंदौर प्रथम स्थान पर आया है। इसके लिये इंदौर की जनता बधाई की पात्र है। मध्यप्रदेश शासन के लिये भी यह गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छता में नंबर वन आना आसान नहीं है। इसलिये नम्बर वन बने रहने के सतत प्रयास किये जायें। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम आये हैं। वर्ष 2019 तक मध्यप्रदेश के सभी ग्रामों और शहरों को खुले में शौच से मुक्त करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता एक आंदोलन है। जनता की सोच में बदलाव लाकर जनता के सहयोग से ही यह आंदोलन सफल हो सकता है।  श्री चौहान ने इंदौर शहर में स्वच्छता अभियान की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण-2016 में देश के 100 चयनित शहरों में से 22 शहर मध्यप्रदेश के हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बन जाने से ही काम नहीं चलेगा, उसका उपयोग करना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में प्लास्टिक की समस्या पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि प्लास्टिक से सर्वाधिक कचरा फैलता है और प्लास्टिक जल्दी नष्ट भी नहीं होता है। इसलिए प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि इंदौर मध्यप्रदेश के विकास का इंजन है। उद्योग, व्यापार और साफ-सफाई सहित हर क्षेत्र में इंदौर नंबर वन रहा है। इंदौर में नरसीमुंजी, टीसीएस और इंफोसिस जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं आ गई हैं और अपना व्यापार-व्यवसाय फैला रही हैं। इस अवसर पर महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ ने कहा कि इंदौर स्वच्छता सर्वेक्षण के सभी बिन्दुओं पर खरा उतरा है। नवंबर 2016 से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन से इंदौर में साफ-सफाई विशेष रूप से परिलक्षित हुई है। इस अभियान में विद्यार्थियों, शिक्षकों, व्यापारियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, समाजसेवी संगठनों आदि का भरपूर सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इंदौर में गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग कलेक्शन किया जा रहा है। गीले कचरे से जैविक खाद बनाई जा रही है। औसतन रोज 50 टन कचरा इकट्ठा हो रहा है। गीले कचरे से आने वाले समय में जैविक खाद के अलावा मिथेन गैस भी इकट्ठा की जाएगी, जिससे नगरीय सेवा की बसें चलेंगी और बिजली का उत्पादन किया जाएगा। इसके अलावा परमाणु तकनीकी से स्लज कचरे से खाद बनाई जाएगी। पिछले डेढ़ वर्ष में विशेष साफ-सफाई अभियान से वायु प्रदूषण 50 प्रतिशत तक घट गया है। खान और सरस्वती नदी की सफाई का अभियान जारी है। खान नदी में गिरने वाले गंदे नालों की टेपिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। उत्कृष्ट कार्य के लिये सम्मान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर स्वच्छता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिये समाजसेवियों, व्यापारी संगठनों और सरपंचों को सम्मानित किया गया। समारोह में हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री कृष्णमुरारी मोघे, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता पाटीदार, विधायकगण सर्वश्री महेन्द्र हार्डिया, राजेश सोनकर, सुदर्शन गुप्ता, सुश्री उषा ठाकुर तथा अपर मुख्य सचिव श्री राधेश्याम जुलानिया, गणमान्य नागरिक, समाजसेवी और सरपंच सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। 

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 MadhyaBharat  18 September 2017

आतंकवाद, भ्रष्टाचार

केवल सफल नहीं सार्थक जीवन जरूरी, शिवराज ने प्रेरणादायी संस्मरण सुनाये  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं से आतंकवाद, भ्रष्टाचार, गरीबी, गंदगी, सम्प्रदायवाद और जातिवाद मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे भारत के निर्माण में ही जीवन की सार्थकता है। केवल सफल नहीं सार्थक जीवन जरूरी है। वे आज आकाशवाणी और दूरदर्शन पर “दिल से” कार्यक्रम में युवाओं से संवाद कर रहे थे। कार्यक्रम की श्रंखला की दूसरी कड़ी है। इसका शुभारंभ किसानों के साथ संवाद से हुआ था। श्री चौहान ने कहा कि युवाओं का भविष्य खराब नहीं होने देंगे क्योंकि वे प्रदेश और देश का भविष्य हैं। युवाओं को दी सीख मुख्यमंत्री ने युवाओं को कई अनमोल सीख दी। हमेशा माता-पिता का सम्मान करें। आदर करें। माता-पिता जीवन देते हैं तो गुरू जीवन बनाता है इसीलिये गुरू का सम्मान करें। भारतीय संस्कृति अद्भुत है। पूर्वजों के प्रति आदर व्यक्त करने की परम्परा है। सरकार हमेशा सहयोगी भूमिका में होती है आगे बढ़ने के लिये स्वयं कदम बढ़ायें। सरकार हमेशा साथ रहेगी। सबमें प्रतिभा है। कोई छोटा-बड़ा नहीं है। सवाल केवल प्रतिभा के प्रगटीकरण का है। जो जैसा सोचता है और करता है वह वैसा ही बन जाता है। हमारी सोच ही हमारे व्यक्तित्व को बनाती है। ब्लू व्हेल गेम के काल्पनिक संसार से बचो श्री चौहान ने ब्लू व्हेल जैसे गेम से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि इस काल्पनिक संसार से दूर रहो। यह जिन्दगी खराब कर देते हैं। अपनी शक्ति और अपनी क्षमता पहचानो। कभी निराश मत हो। ऊर्जा से भरे रहो। जिन्दगी में उतार-चढ़ाव से घबराओ मत। सरकार से भी अपनी समस्याएँ साझा कर सकते हैं। बड़ा बनने की पाँच बातें श्री चौहान ने कहा कि बड़ा बनने के लिये सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा रखना। आत्म-विश्वास से भरे रहना। स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए श्री चौहान ने कहा युवाओं की क्षमता और प्रतिभा में कोई कमी नहीं है। जो चाहोगे कर गुजरोगे। दूसरी जरूरी बात है कि लक्ष्य तय करो। तीसरा लक्ष्य तय करने के बाद उसे प्राप्त करने के लिये दृढ़ संकल्प करो। चौथी बात लक्ष्य प्राप्त करने का रोडमैप बनाओ और पाँचवीं बात रोडमैप पर चलने के लिये कठिन परिश्रम करो। केवल सफल जीवन नहीं, सार्थक जीवन जरूरी है। श्री चौहान ने महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन के प्रेरक संस्मरण सुनाये। 'थ्री इडियट' फिल्म का उदाहरण श्री चौहान ने कहा कि अच्छी शिक्षा जिन्दगी बना देती है। इसलिये मन लगाकर पढ़ों। रटने का काम मत करो। उन्होंने “थ्री इडियट” फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि विषय को रटना नहीं, समझना है। अपनी प्रतिभा का स्वाभाविक विकास होने देना चाहिये। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि बच्चों से स्नेह से पेश आयें। केवल रटवाने से काम नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पढाई को आसान बनाने के लिये कई पहल की गई है जैसे पहली से बारहवीं तक की किताबें, आठवीं कक्षा तक गणवेश, स्कूल जाने के लिये साइकिल, स्कालरशिप, बारहवीं में 85 प्रतिशत अंक लाने पर लेपटाप, कॉलेज में एडमिशन लेने पर स्मार्ट फोन। स्मार्ट फोन का उपयोग ज्ञान के लिये करें। गाँवों में जो बेटिया 60 प्रतिशत अंक लाती है वो गाँव की बेटी कहलाती है। कालेज की पढ़ाई के लिये अलग से 5 हजार रूपये सालाना मिलते हैं। श्री चौहान ने कहा हर ब्लाक में उत्कृष्ट विद्यालय खोले गये हैं। कन्या शिक्षा परिसर बन रहे हैं। ज्ञानोदय विद्यालय, उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। मजदूरों के बच्चों के लिये श्रमोदय विद्यालय अगले साल शुरू हो जायेंगे। मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि बारहवीं बोर्ड में 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने और राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश लेने पर सरकार फीस भरेगी। उन्होंने कई ऐसे विदयार्थियों का उल्लेख लिया जिनकी फीस सरकार भरेगी। इनमें अनूपपुर जिले के केल्होरी के श्री सुयश नामदेव-आई.आई.टी. खड़गपुर, श्री पवन मंडलोई -श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, इंदौर, भोपाल की कुमारी शुभांगी बागरे -स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर, भोपाल, इंदौर की कुमारी अनुज्ञा मुकाती -एनएलआईयू, भोपाल, रीवा के गोरगांव की कुमारी जस्मिन पटेल -एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर में चयन हुआ है। बैतूल जिले के गाँव ओहर की कुमारी किरन आप्टे इंडियन इंस्टीट्यूट इनफार्मेशन टेक्नालॉजी भोपाल में है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं का परिश्रम व्यर्थ नहीं जायेगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे लगन और मेहनत से पढ़कर इन योजनाओं का लाभ उठायें। श्री चौहान ने ऐसे बच्चों का भी उल्लेख किया जो गरीबी और अभावों में रहने के बावजूद परीक्षा में अव्वल रहे। उन्होंने बैगा जनजाति की सुश्री गीता टेकाम एकलव्य विद्यालय मंडला, दसवीं में 93.4 प्रतिशत नंबर लाने वाली माधुरी वारासिया, 92.34 प्रतिशत अंक लाने वाली कु. कुसुम कांजले हरदा, 91.01 प्रतिशत अंक लाने वाली छिंदवाड़ा की कु. प्रियाशु बारंगे का उल्लेख किया। खंडवा जिले के 94.83 प्रतिशत अंक लाने वाले श्री अभिषेक पटेल और उनके अभिभावकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार में रहते हुए इन बच्चों ने चमत्कार कर दिया और अन्य युवाओं के लिये प्रेरणा बन गये। श्री चौहान ने सीहोर की प्रीति मैथिल का भी जिक्र किया जिन्होंने टयूशन पढ़ाकर खुद पढ़ाई की और यू.पी.एस.सी. में 92वाँ स्थान कर रीवा जिले की कलेक्टर की जिम्मेदारी सम्हाल रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि थोड़ी सी लगन और परिश्रम से आसमान छू सकते हैं। मुख्यमंत्री ने खेल अकादमियों से निकली खेल प्रतिभाओं की भी चर्चा की जिन्होंने गरीब परिवारों से आने के बावजूद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्किल डेवलपमेंट मिशन की चर्चा करते हुए कहा कि एक तरफ बेरोजगारों की संख्या है और दूसरी तरफ हुनरमंद लोग नहीं मिलते। यदि युवाओं को हुनर दे दें तो और रोजगार की कोई कमी नहीं है। उन्होंने मध्यप्रदेश स्किल डेवलपमेंट मिशन और आईटीआई को उन्नत बनाने के प्रयासों की चर्चा करते हुए बताया कि संभागीय मुख्यालयों पर उत्कृष्ट आईटीआई स्थापित किये जा रहे हैं। हर साल साढ़े सात लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार प्राप्त करने योग्य बनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि सिंगापुर के सहयोग से ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल में बन रहा है जिसमें हजारों युवा उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहाकि नौकरी देने वाले बनें। इसके लिये मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना का लाभ उठायें। लघु और कुटीर उद्योगों का विस्तार करने में युवाओं की मुख्य भूमिका है। लोन की गारंटी सरकार लेगी। उन्होंने ऐसे कई युवा उदयमियों का उल्लेख किया जो आज सफल उद्यमी हैं और कई लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इनमें सिवनी के श्री रजत ताम्रकार, सीहोर के श्री अनुराग सोडानी, जबलपुर की श्रीमती मधुराज, ग्वालियर के श्री राजीव भिलवारे, जबलपुर के श्री दुर्गेश धुर्वे और नीमच के श्री शैलेन्द्र धाकड़ प्रमुख हैं। समाज के लिये भी काम करें श्री चौहान ने युवाओं से कहा कि उनका जीवन देश और समाज के लिए भी है। उन्होंने आव्हान किया कि हर युवा कोई न कोई काम समाज के लिये जरूर करे। उन्होंने भोपाल की 11 वर्षीय मुस्कान का उल्लेख किया जो झुग्गी बस्ती में लायब्रेरी चला रही है। गरीब बच्चों के लिये खिलौने इकट्ठे कर सकते हैं। पेड़ लगाने, पर्यावरण बचाने के काम में योगदान दे सकते हैं। नर्मदा बचाने, नदियाँ बचाने का काम कर सकते हैं। नर्मदा सेवक बन सकते हैं। उन्होंने सदगुरू जग्गी वासुदेव द्वारा शुरू किये गये नदियों को बचाने के अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसे अभियान से जुड़ सकते हैं। समाज को नशा मुक्त बनाने का अभियान चला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्म-दिन की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता को समर्पित कर हम उनका जन्म-दिन मना सकते हैं। नये भारत के लिये नया मध्यप्रदेश बनाना सबका काम है। सब मिलकर मध्यप्रदेश बनायें। कार्यक्रम, नीतियाँ बनाने में सहयोग करें। श्री चौहान ने युवाओं से एमपी माय गव एमपी एप पर सुझाव माँगे। अच्छे सुझाव देने वाले युवाओं का भी उल्लेख किया। इनमें राजगढ़ (ब्यावरा) के श्री अनिल सिरिया ने सुझाव दिया कि बी-1 खसरा की नकल एमपी ऑनलाईन से निकालना चाहिए। भोपाल के मिलिन नामदेव ने सुझाव दिया कि दूरदराज के स्कूलों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से अध्यापन होना चाहिये। विदिशा के ग्राम कुल्हार के श्री अजीत ओझा ने सुझाव दिया कि कुल्हार में पर्यावरण और जल सुधार में अच्छा कार्य हुआ है इसे ईको टूरिज्म की दृष्टि से प्रचारित करना चाहिये। उदयपुरा (रायसेन) के श्री आशीष बिलथिरिया ने सुझाव दिया कि सम्पत्ति की ऑनलाईन रजिस्ट्री को देखते हुए सॉफ्टवेयर में ऐसी व्यवस्था करें कि नामांतरण, सीमांकन करना है या नहीं इसकी पुष्टि समय पर हितग्राही से हो जाये। इससे समय और धन बचेगा। विदिशा के श्री योगेश राठौर ने बरसाती नदियों और मुख्य नदियों को एक किलोमीटर तक 40 फीट गहरा करने सुझाव दिया। गायक पलक मुछाल की मानवीय पहल का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि उन्होंने ‘‘पलक मुछाल हार्ट फाउण्डेशन’’ के माध्यम से पिछले 16 वर्षों में लगभग 1000 गरीब बच्चों को हृदय के इलाज के लिए तीन करोड़ से अधिक की राशि दान में दी है। इस उदाहरण से प्रेरणा लेना चाहिये। उन्होंने युवाओं को समाज के लिए जीने का संकल्प दिलाया। मुख्यमंत्री आई टी कौशल केन्द्र मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला मुख्यालयों पर आईटीआई, पॉलिटेक्निक और उत्कृष्ट स्कूल में मुख्यमंत्री आई टी कौशल केन्द्र की स्थापना की जायेगी। इन केन्द्रों से बच्चे कौशल भी प्राप्त कर सकेंगे और इन केन्द्रों का उपयोग ऑनलाईन परीक्षा के लिए भी किया जा सकेगा। उत्कृष्ट विज्ञान संस्थानों के भ्रमण की योजना मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और विज्ञान में रूचि जाग्रत करने के लिये उत्कृष्ट विज्ञान संस्थानों जैसे इसरो, भाभा एटामिक सेंटर, हिन्दुस्तान एयरोनाटिक, विभिन्न एम्स, आईआईटी का शैक्षणिक भ्रमण करने की योजना प्रारंभ की जायेगी। राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में प्रदेश के लिये पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाडियों को सीधे शासकीय नौकरी में नियुक्ति दी जायेगी। उन्होंने युवाओं से प्रदेश की योजनाओं में सुधार करने, नई योजनाएँ बनाने, प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार के लिये सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि ट्वीटर, फेसबुक, शिवराज सिंह चौहान एप्प, एम.पी.माय गव.इन पर सुझाव दिये जा सकते हैं।  

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 MadhyaBharat  11 September 2017

कुसुम महदेले

मप्र की पीएचई मंत्री कुसुम महदेले ने रेलवे की बदइंतजामी की पोल खोल कर रख दी है। 28 अगस्त को रेवांचल एक्सप्रेस से सफर करने के बाद कुसुम महदेले ने रेल मंत्री को ट्वीट कर ट्रेन की खराब हालत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रेवांचल एक्सप्रेस की फर्स्ट एसी में कंबल बदबूदार बांटा जा रहा है। टॉयलेट पेपर नहीं है। तकिए किसी काम के नहीं हैं। क्या रेलवे विभाग मुसाफिरों की चिंता नहीं करता? सिर्फ रेवांचल ही नहीं, भोपाल से खजुराहो चलने वाली महामना एक्सप्रेस में बैठने की खराब व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने रेल मंत्री और रेल मंत्रालय से शिकायत की। महदेले के इस ट्वीट पर रेल मंत्रालय की तरफ से उनके पीएनआर की जानकारी भी मांगी गई। सड़कें चलने लायक नहीं महदेले ने रेल की खराब व्यवस्थाओं को लेकर ही नहीं, बल्कि सतना के आसपास की खराब सड़कों को लेकर नितिन गडकरी को भी ट्वीट किया। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट किया था कि केंद्र सरकार वर्ल्ड क्लास स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पर कुसुम महदेले ने जवाब देते हुए कहा कि सतना के आसपास के हाइवे की हालत बहुत खराब है। सड़कें चलने लायक नहीं हैं। उन्होंने हाइवे के नाम भी गिना दिए। महदेले ने कहा कि सतना से पन्ना, पन्ना से छतरपुर, रीवा से सतना हाइवे और खजुराहो से लवकुशनगर की सड़क की हालत बहुत खराब है। महामना एक्सप्रेस के नाम पर भी सवाल? महदेले ने भोपाल-खजुराहो महामना एक्सप्रेस ट्रेन के नाम पर भी आपत्ति जता दी। उन्होंने कहा कि महामना एक्सप्रेस का नाम खजुराहो या चंदेल एक्सप्रेस होना चाहिए। बुंदेलखंड के साथ हमेशा भेदभाव होता है। गडकरी से बोलीं- सड़कें चलने लायक नहीं, जल्दी ठीक कराएं महदेले ने सतना के आसपास की खराब सड़कों को लेकर नितिन गडकरी को भी ट्वीट किया। महदेले ने लिखा कि सतना के आसपास के हाइवे की हालत बहुत खराब है। सड़कें चलने लायक नहीं हैं। कुसुम मेहदेले ने कहा ये मेरा निजी मामला है निजी मामलों में दखल न दें ,मैंने ट्वीट किए तो आपको क्या आपत्ति है? ये मेरा निजी मामला है।

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 MadhyaBharat  1 September 2017

दिल्ली में MP का नया भवन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राजधानी दिल्ली में प्रदेश के नये भवन का निर्माण कार्य निश्चित समय में हो जाये। इस बात का निर्माण एजेंसी चयन में विशेष ध्यान दिया जाये। उन्होंने डिजाईनिंग और कार्य की उत्कृष्ट गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने निर्देश दिये। श्री चौहान आज मंत्रालय में केन्द्र सरकार द्वारा राजधानी दिल्ली में आवंटित भूखण्ड पर भवन निर्माण की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान को बैठक में बताया गया कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्य को 1.5 एकड़ भूखण्ड का आवंटन किया गया है। शीघ्र ही भूमि का आधिपत्य राज्य को मिल जायेगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए.पी. श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री प्रभांशु कमल, प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री प्रमोद अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिवद्वय श्री अशोक बर्णवाल और श्री एस.के. मिश्रा, सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री मनीष रस्तोगी, मध्यप्रदेश भवन के आवासीय आयुक्त श्री आशीष श्रीवास्तव भी मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  29 August 2017

एमपी रियल एस्टेट रेगयूलेटरी एक्ट (रेरा)

एमपी रियल एस्टेट रेगयूलेटरी एक्ट (रेरा) के अध्यक्ष  एन्टोनी डिसा ने कहा है कि एक मई, 2017 के बाद नई परियोजनाओं को और नये होम लोन आवेदनों में रेरा पंजीयन की माँग बैंक द्वारा आवश्यक की जाये। श्री डिसा ने बताया कि रेरा अधिनियम की धारा-3 के प्रभावशील होने की तिथि एक मई, 2017 के पूर्व स्वीकृत ऋणों में सिर्फ यह सुनिश्चित करें कि रेरा पंजीयन क्रमांक के लिए प्रमोटर द्वारा आवेदन प्रस्तुत किया है या नहीं। यह स्पष्टीकरण रेरा ने बैंकों को इसलिए जारी किया है ताकि प्रचलित रियल एस्टेट परियोजनाओं की निर्माण प्रगति में अनावश्यक रूप से वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण बाधा न आये। उल्लेखनीय है कि रेरा द्वारा लीड बैंक समन्वयक श्री अजय व्यास को पत्र लिखकर इस संबंध में अवगत कराया है।  

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 MadhyaBharat  23 August 2017

गणेश प्रतिमा प्रशिक्षण

    पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) द्वारा 20 से 23 अगस्त तक मध्यप्रदेश के 5 संभागीय मुख्यालयों पर आम लोगों और छात्र-छात्राओं को मिट्टी से गणेश बनाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और रीवा के 2 सार्वजनिक स्थलों एवं 4 विद्यालयों में ग्रीन गणेश-2017 के तहत प्रशिक्षित मूर्तिकार प्रशिक्षण देंगे। विद्यार्थी और लोग मूर्ति बनाने के बाद अपनी-अपनी मूर्ति अपने घर भी ले जा सकेंगे। एप्को टीम विद्यार्थियों को जहाँ प्रात: 9 बजे से प्रशिक्षण देगी, वहीं सार्वजनिक स्थलों पर आम लोगों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम अपरान्ह 3 से 6 बजे तक होगा। इंदौर प्रशिक्षण-20 एवं 21 अगस्त इंदौर में 20 अगस्त को प्रात: 11 से 2 बजे तक पलासिया चौराहा, अपरान्ह 3 से 6 बजे तक अन्नपूर्णा परिसर महू नाका, 21 अगस्त को प्रात: 9 से 10 बजे तक अहिल्या आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाणगंगा, प्रात: 10.30 से 11.30 बजे तक शासकीय अत्रीदेवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महू नाका, 12 से 1 बजे तक शासकीय मालव कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोती तबेला और दोपहर 2.30 बजे से 3.30 बजे तक रेलवे स्टेशन के पास शासकीय बाल विनय मंदिर में मूर्ति प्रशिक्षण होगा। उज्जैन प्रशिक्षण-22 एवं 23 अगस्त उज्जैन में 22 अगस्त को प्रात: 9 से 10 बजे तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सराफा, 10.30 से 11.30 बजे मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सांवेर रोड और अपरान्ह 3 से 6 बजे तक लोकमान्य तिलक स्मृति मंदिर क्षीरसागर में मिट्टी से गणेश बनाने का प्रशिक्षण होगा। दूसरे दिन 23 अगस्त को प्रात: 9 से 10 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फ्रीगंज, 10.30 से 11.30 बजे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दशहरा मैदान और आम लोगों के लिये अपरान्ह 3 से 6 बजे तक पीपली नाका चौराहा में गणेश की मूर्ति बनाना सिखाया जायेगा। भोपाल प्रशिक्षण-21 से 23 अगस्त भोपाल में 21 अगस्त को प्रात: 10 से 11 बजे तक शासकीय राजा भोज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, 1100 क्वाटर्स, अपरान्ह 3 से 6 बजे तक बिट्टन मार्केट में मूर्ति प्रशिक्षण होगा। 22 अगस्त को प्रात: 9 से 10 बजे तक शासकीय माध्यमिक शाला बोर्ड कॉलोनी और अपरान्ह 3 से 6 बजे तक कोलार रोड के मंदाकिनी मैदान में आम लोगों के लिये प्रतिमा प्रशिक्षण होगा। 23 अगस्त को प्रात: 9 से 10 बजे तक शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अरेरा कॉलोनी, 10 से 1 बजे तक शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैरागढ़ और अपरान्ह 3 से 6 बजे तक गणेश मंदिर पिपलानी में मूर्ति प्रशिक्षण होगा। जबलपुर प्रशिक्षण-22-23 अगस्त जबलपुर में 22 अगस्त को प्रात: 9 से 11 बजे तक शासकीय तमराई स्कूल मिलौनीगंज और दोपहर 3 से 6 बजे तक शहीद स्मारक गोल बाजार में गणेश प्रतिमा प्रशिक्षण होगा। 23 अगस्त को प्रात: 9 से 11 बजे तक पंडित लज्जाशंकर झा मॉडल हाई स्कूल और दोपहर 3 से 6 बजे तक कल्चरल स्ट्रीट भंवरताल में प्रशिक्षण होगा। रीवा प्रशिक्षण-22-23 अगस्त रीवा में प्रात: 9 से 10 बजे तक केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1 में प्रात: 10.30 से 11.30 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मार्तण्ड क्रमांक-2, दोपहर 3 से 6 बजे तक महिला समिति कला मंदिर अस्पताल चौराहा में प्रशिक्षण होगा। इसी तरह 23 अगस्त को सुबह 9 से 10 बजे तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किला रोड, 10.30 से 11.30 बजे तक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मार्तण्ड क्रमांक-3 और दोपहर 3 से 6 बजे तक व्यंकट भवन पुरातत्व संग्रहालय कोठी कम्पाउण्ड में मिट्टी से गणेश बनाना सिखाया जायेगा।  

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 MadhyaBharat  19 August 2017

नगरीय निकायों में मतदान

    मध्यप्रदेश शासन ने 11 अगस्त को नगरीय निकायों में होने वाले मतदान के दिन संबंधित नगरीय निकायों में सामान्य अवकाश घोषित किया है। इन नगरीय निकायों में निगो‍शिएबल इन्स्ट्रूमेंट एक्ट के तहत भी सार्वजनिक अवकाश रहेगा। जिन नगरीय निकायों में 11 अगस्त को मतदान होगा, उनमें खंडवा जिले की नगर परिषद् छनेरा, रतलाम जिले की नगर परिषद् सैलाना, बैतूल जिले की नगरपालिका परिषद् सारनी, नगर परिषद आठनेर और चिचोली, झाबुआ जिले की नगरपालिका परिषद झाबुआ, नगर परिषद् रानापुर, थांदला और पेटलावद, अलीराजपुर जिले का नगर परिषद् भांभरा और जोबट, नगर पालिका परिषद् अलीराजपुर, खरगोन जिले की नगर परिषद् भींकनगाँव, महेश्वर और मण्डलेश्वर, बुरहानपुर जिले की नगर पालिका परिषद् नेपानगर, छिन्दवाड़ा जिले की नगरपालिका परिषद् जुन्नारदेव, दमुआ, पाण्ढ़ुर्ना, सौंसर, नगर परिषद् मोहगाँव और हर्रई शामिल हैं। सिवनी जिले की नगर परिषद् लखनादौन, मण्डला जिले की नगर परिषद निवास, बम्हनीबंजर, बिछिया, नगर पालिका परिषद् नैनपुर और नगर पालिका परिषद् मंडला शामिल हैं। डिण्डोरी जिले की नगर परिषद् डिण्डोरी, शहपुरा, बालाघाट जिले की नगर परिषद् बैहर, शहडोल जिले की नगर परिषद जयसिंह नगर, बुढ़ार और नगर पालिका परिषद् शहडोल, अनूपपुर जिले की नगर पालिका परिषद् कोतमा, नगर पालिका परिषद् बिजुरी और उमरिया जिले की नगर पालिका परिषद् पाली शामिल है। इस संबंध में जिला कलेक्टर को निर्देश जारी किये किये गये है।

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 MadhyaBharat  9 August 2017

पुलिस और एम.आई.टी. के मध्य हुआ एम.ओ.यू

मुख्यमंत्री चौहान के समक्ष पुलिस और एम.आई.टी. के मध्य हुआ एम.ओ.यू. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के समक्ष मध्यप्रदेश पुलिस और विश्व के उत्कृष्टतम विश्वविद्यालयों में से एक मैसाच्यूसेट इस्टीट्यूट ऑफ टैक्नॉलाजी के मध्य समझौता आज मुख्यमंत्री निवास में हस्ताक्षरित हुआ। प्रदेश पुलिस को और अधिक जनोन्मुखी बनाने के लिये संस्थान द्वारा शोध कार्य किया जायेगा। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला और मैसाच्यूसेट इस्टीट्यूट ऑफ टैक्नॉलाजी शोध संस्थान के श्री अब्दुल लतीफ ज़मील, गरीबी उन्मूलन एक्शन लैब की दक्षिण एशियाई प्रमुख सुश्री शोभनी मुखर्जी ने समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर पुलिस अधिकारी, संस्थान के प्राध्यापक और शोधकर्ता उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में सामुदायिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। इस दिशा में वर्ष 2009 से जनसुनवाई शुरू की गई। प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रभावी पहल के लिए पुलिस बल में उनके लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने संस्थान के साथ हुये एम.ओ.यू. पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शोध कार्य निष्पक्ष और निरपेक्ष रूप से किया जाये। अध्ययन के निष्कर्ष पुलिस व्यवस्था को अधिक बेहतर और मजबूत बनाने में सहयोगी हों। पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को और अधिक बेहतर तथा मज़बूत बनाने के लिये शोध का कार्य-क्षेत्र जनता एवं पुलिस के मध्य संवाद, पुलिस प्रतिक्रिया-प्रक्रिया और पुलिस बल में महिलाओं के एकीकरण पर केन्द्रित होगा। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह श्री के. के. सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री राजीव टंडन और श्रीमती अनुराधा शंकर सिंह, प्रोफेसर वर्जीनिया विश्वविद्यालय श्री संदीप सूथांकर, प्रोफेसर हावर्ड विश्वविद्यालय श्री अक्षय मंगला, प्रोफेसर विज़नर वर्जीनिया सुश्री ग्रैब्रीला क्रूक्स, प्रोजेक्ट ऑफीसर जे.पी.ए.लैब दक्षिण एशिया श्री विष्णु पदमाभन, शोध सहायक श्री अंशुमान भार्गव उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  27 July 2017

 शिवराज और नंदकुमार सिंह का पुतला जलाया

  ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान द्वारा की गई टिप्पणी के विरोध में प्रदेशभर में प्रदर्शन हुआ। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी दफ्तर के सामने कार्यकार्ताओं ने सीएम शिवराजसिंह चौहान और नंदकुमार सिंह चौहान का पुतला जलाया। इस दौरान वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। इंदौर में राजवाड़ा पर कांग्रेसियों ने सीएम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पुतला फूंका और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दतिया में कांग्रेसियों ने किला चौक से पहले तांगा स्टैंड पर पुतलों में आग लगा दी। इस दौरान पुलिस ने पुतला छीनने की भी कोशिश की। जबलपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन में एक युवक बंदूक लेकर पहुंचा था, पुलिस उसे पकड़कर ले गई।

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 MadhyaBharat  25 July 2017

दिव्यांगजन अधिनियम

भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांगजन अधिनियम प्रकाशित किया गया है। अधिनियम के तहत राज्य सरकारों से नियम बनाने की अपेक्षा की गई है। यह जानकारी दिव्यांगजन अधिनियम पर हुई कार्यशाला में दी गयी। कार्यशाला में राज्य सरकार द्वारा बनाये जाने वाले दिव्यांगजन अधिनियम के नियमों में जिन विभागों को शामिल किया गया है। उन्हें उनकी भूमिका से अवगत कराया गया। कार्यशाला में मुख्य रूप से स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, गृह, पुलिस, महिला एवं बाल विकास, राजस्व एवं अन्य उत्तरदायी विभाग के अधिकारी उपस्थित हुए। सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती नीलम शमी राव द्वारा कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में सेवा निवृत्त अपर मुख्य सचिव श्री एम.एम. उपाध्याय एवं सेवा निवृत्त प्रमुख सचिव श्री व्ही.के. बाथम ने दिव्यांगजन अधिनियम के नियम बनाने की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

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 MadhyaBharat  25 July 2017

सलीना सिंह

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती सलीना सिंह ने कहा है कि लोकतंत्र की सफलता में निर्वाचकों की भूमिका को देखते हुए निर्वाचन नामावली का शुद्ध और पारदर्शी होना जरूरी है। इसके लिये निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और प्रोग्रामर को विशेष ध्यान देना होगा। श्रीमती सिंह आज निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के ईआरओ नेट प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में सभी 51 जिलों के अधिकारी उपस्थित थे। श्रीमती सलीना सिंह ने कहा कि ईआरओ नेट के माध्यम से अब सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बेहतर समन्वय से कार्य कर सकेंगे। इससे कार्य निष्पादन में और तत्परता आयेगी। इस अवसर पर संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री एस.एस. बंसल सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  23 July 2017

खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल

खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल रेत खनिज विपणन प्रक्रिया निर्धारण बैठक में  खनिज साधन मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश में नदियों से रेत के वैज्ञानिक उत्खनन तथा विपणन की प्रभावी पारदर्शी व्यवस्था के लिये हुई कार्यशाला की अनुशंसाओं को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाये। नीति को बेहतर से बेहतर बनाने के लिये 15 दिवस में प्रस्ताव तैयार किया जाये। श्री शुक्ल आज मंत्रालय में प्रदेश में रेत खनिज के उत्खनन और विपणन के संबंध में गठित समिति की अध्यक्षता कर रहे थे। श्री शुक्ल ने कहा कि नर्मदा तथा अन्य नदियों से खनिज के उत्खनन के संबंध में स्थायी समाधान होना चाहिये। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के सभी निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए रेत खनिज की उत्खनन और विपणन की पारदर्शी व्यवस्था की नीति तैयार की जाये। खनिज मंत्री ने कहा कि नर्मदा नदी से रेत के उत्खनन के लिये सभी प्रभावी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समग्र प्रतिवेदन शीघ्र तैयार किया जाये। श्री शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला के निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश में आदर्श रेत खनिज नीति बनेगी। उन्होंने कहा कि इससे देश के अन्य राज्यों को भी लाभ मिलेगा। बैठक में सचिव खनिज साधन श्री मनोहर दुबे ने कार्यशाला में विभिन्न सत्र में हुई चर्चा के निष्कर्षों की जानकारी दी। बैठक में प्रमुख सचिव नगरीय विकास श्री मलय श्रीवास्तव, उप सचिव खनिज श्री राकेश श्रीवास्तव, आई.आई.टी. खड़गपुर, (पश्चिम बंगाल) के प्रोफेसर श्री के.पाठक तथा प्रोफेसर श्री अभिजीत मुखर्जी, विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल श्री प्रदीप श्रीवास्तव, संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म श्री व्ही.के. ऑस्टिन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  22 July 2017

रक्षाबंधन पर्व

मुख्यमंत्री  चौहान ने रक्षा रथ को किया रवाना  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश जब सरहद पर तैनात जवानों को मिलेगे, तब उनका मनोबल और आत्मबल कई गुना बढ़ जायेगा। इस भावनात्मक प्रयास के लिये नव दुनिया परिवार बधाई का पात्र है। श्री चौहान ने यह बात आज मुख्यमंत्री निवास में नवदुनिया की पहल पर भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ की फ्लैग ऑफ सेरेमनी में कही। इस अवसर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह भी मौजूद थीं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम अपने घरों में चैन से सोते हैं क्योंकि देश की सीमाओं पर हमारे जवान मुस्तैद रहते हैं। हमारे जवान सीमाओं की रक्षा के लिये होली, दीपावली और रक्षा बंधन आदि त्यौहार भी घर पर नहीं मनाते हैं। सदैव जान हथेली पर लेकर देश भक्ति के जज्बे के साथ सरहद की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन पर्व पर जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की हजारों बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश लेकर नवदुनिया का रक्षा रथ उनके पास पहुंचेगा, तब जवानों को अपार हर्ष होगा, भावनात्मक प्रसन्नता की अनुभूति होगी। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि विधान से रक्षा रथ को रवाना किया। इस अवसर पर बताया गया कि नवदुनिया द्वारा भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ के माध्यम से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भ्रमण कर बहनों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और मैसेज का संकलन किया जा रहा है। संकलित सामग्री सेना के माध्यम से सीमा पर तैनात जवानों को उपलब्ध करवाई जायेगी। इस अवसर नवदुनिया के संपादक श्री सुनील शुक्ला, स्टेट ब्यूरो हेड श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री राजीव सोनी, हेड श्री विनित कौशिक सहित मॉडल स्कूल के एन.सी.सी.के छात्र एवं नव दुनिया के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  21 July 2017

 मध्यप्रदेश बदनामी

मुझे लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। कुछ अच्छा घटित नहीं हो रहा है। कृषि बेहतर उत्पादन के बाद भी बेहाल, अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है। नौकरशाही की नाफरमानियां और भ्रष्टाचार तो यहां पहले से ही खूंटा गाड़ के बैठे हुए हैैं। बदनामी के व्यापमं और गड़बडियों के सिहंस्थ की स्याही सूख नहीं पा रही है। ऐसे में नर्मदा माई समेत नदियों में रेत के डाकों ने प्रायश्चित स्वरूप मुख्यमंत्री से नर्मदा परिक्रमा करा डाली। मगर बदनामी है कि पीछा ही नहीं छोड़ रही है। प्रदेश के पराक्रमी किसानों ने प्याज की बंपर पैदावार की तो उसकी खरीदी में शिवराज सरकार के भी आंसू निकल पड़े। खुश हैं तो अफसर और व्यापारी। प्याज खरीदी में घाटालों की आशंकाओं का घटाटोप है। भ्रष्टाचार के बादल छाये हुए हैैं। मैदान में कप्तान के स्वरूप में शिवराज सिंह चौहान तो हैैं मगर मंत्रियों की गैरहाजिरी सियासी हालात को संजीदा बना रही है। ब्यूरोकेसी पर निर्भर सरकार उसी के सेबोटेज की शिकार है और अपनी बिगड़ती छवि से सदमें  में है। एक जून से शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद एक महीना बीत चुका है, लेकिन खेती-किसानी को लेकर हर दिन कोई नई समस्या लेकर आ रही है। औसतन हर दो दिन में एक किसान कर्ज और उससे पैदा परेशानी के कारण आत्महत्या कर रहा है। कृषि मंत्री, कृषि अधिकारी इन मुसीबतों भरे दिन दिनों में गायब है। सीएम अकेले पड़ गए लगते हैं । उनकी कृषि हिमायती छवि पर बट्टा लग गया है। घबराहट में उन्होंने टॉप करने वाले विद्यार्थियों से कह दिया कि वे खेती ना करें क्योंकि वह किसानों को मरते और खेती को बर्बाद होते नहीं देख सकते। ग्यारह बरस से कृषि को लाभ का धंधा बनाने का वादा करने वाले शिवराज सिंह की खेती ना करें कि सलाह अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। वे शायद जीवन में पहली बार इस कदर असहाय महसूस कर रहे हैं। जनता से संवाद कर समर्थन पाने में जितने वे कुशल हैं शायद प्रशासनिक पकड़ में उतने ही लचर, कमजोर। उनके खाटी शुभचिंतक भी थोड़ी अगर-मगर के साथ इसे स्वीकार करते हैं। भाजपा नेतृत्व इससे परेशान हैं। मगर इसका हल खुद मुख्यमंत्री को ही लगातार ईमानदार, तर्कसंगत, उच्च कोटि के कठोर निर्णय से खोजना होगा। अभी तो पूरा प्रदेश इससे जूझ रहा है। विरोधियों के लिए यह बड़ा हथियार है। राज्य की हालत यह है कि मुख्यमंत्री जब प्याज 8 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी का एलान करते हैं तो उसी क्षण कृषि, सहकारिता और नागरिक आपूर्ति विभाग को एक साथ सक्रिय हो जाना चाहिए था। खरीदी के साथ-साथ प्याज के बारिश से सुरक्षित भंडारण के लिए। उदाहरण के लिये जब आंख में धूल कंकड़ जाता है तो पलक झपकने और हाथ बचाव के लिए किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करते। उसी तरह प्याज के लिए गोदाम, वेयरहाउस और मंडी में शेड के नीचे- ऊपर तिरपाल, पालिथिन का प्रबंध युद्धस्तर पर करना चाहिए था। यदि अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है तो यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ सेबाटेज भी है। नौकरशाही की नाफरमानियों के बाद यह भीतरघात गंभीर है। यह सब वह अफसरशाही कर रही है जो कृषि उत्पाद का अनुमान लगाने में बुरी तरह फ्लॉप रही। इस वजह से सरकार को पता ही नहीं है कि कितनी प्याज खरीदनी है। स्थिति यह है कि गत वर्ष की तुलना में खरीदी के लिए दोगुनी राशि याने 200 करोड़ रुपए तय हुए थे। अब कहा जा रहा है कि 800 करोड़ रुपए की खरीदी होगी। यह हैरतअंगेज है। यहीं से बड़े घोटाले के साफ  संकेत मिलते हैं। कागज़ पर खरीदी और भुगतान हो जाएगा, जितनी खरीदी हुई है उससे अधिक प्याज सडऩा बता दिया जाएगा। यह सडऩा ही घोटाले के सबूतों को नष्ट करने के प्रबंध के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री-अधिकारी कोई मैदान में नहीं है। किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होना सरकार की प्रशासनिक कमजोरी का भयावह पक्ष माना जा रहा है। इसी तरह प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं। अफसरों की रुचि नहीं है। मंत्री अस्पतालों में सुधार के लिए सक्रिय नहीं हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में 24 घंटे में 17 लोगों की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो जाती है। हिला देने वाली इस घटना पर मंत्री जी का पता नहीं है। स्कूल खुल गए हैं, 60 हजार मास्टरों की कमी है। पच्चीस हजार प्रतिनियक्ति पर होने से और 35 हजार पहले से ही कम है। नई भर्ती के लिए वित्त विभाग ने धन की तंगी के कारण रोक लगा दी है, लेकिन जून में शिक्षा मंत्री गप्प हांकते हुए करीब 35 हजार  से अधिक शिक्षकों की भर्ती कराने की बात करते हैं, जबकि जून में घोषणा नहीं नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। विभाग में अफसर लापरवाह हैं और ऐसे में मंत्री की नींद जून में शिक्षण सत्र के दौरान खुल रही है।  पढ़ाई के बाद नगरीय प्रशासन को ही देखें। बारिश के समय शहर के नाले-नालियां साफ नहीं हुए। मगर मंत्री स्तर पर न तो कठोरता से वर्षा पूर्व तैयारियां कराईं और ना अब सजगता दिख रही है। हालात चिंताजनक हैं। चल रहे हैं गप्पों के तीर... राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता और प्रतिपक्ष गप्पों के तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के ऐलान पर सरकार व भाजपा जनता के साथ मिलकर दो दौर में प्रदेश में 12 करोड़ से अधिक पेड़ पौधे लगाने जा रही है। करीब 7 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में पहले दौर में दो जुलाई को छह करोड़ पौधे 24 जिलों में लगाने का दावा किया गया। एक अनुमान के अनुसार नर्मदा घाटी के दो दर्जन जिलों में साढ़े तीन करोड़ की आबादी है। इनमें बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं भी हैं। सभी आ जाएं तो भी एक-एक, दो-दो पेड़ लगाने पड़ेंगे,  जो कि संभव नहीं है। फिर पौधे, स्थान और लगाने के लिए गड्ढा खोदना जरूरी है, लेकिन व्यवहारिक पक्ष पर किसी का ध्यान नहीं है। पूरी सरकार इवेंट के रूप में चल रही है। मसलन कृषि कर्मण अवार्ड ले लो भले ही, जमीनी हकीकत में किसान आत्महत्या कर रहा है। वैसे ही दावा होगा पेड़ लगाने का रिकॉर्ड पूरा करने का। भले ही पेड़ नजर नहीं आए। अगला वर्ष चुनावी है 2018 में पेड़ लगाने की राशि पौधारोपण के हिसाब से ग्रामीणों को अदा की जाएगी। इसके बदले में पेड़ भले ना दिखें, मगर वोटों की फसल तो काटी ही जा सकती है। गप्पों और योजनाओं के ख्याली पुलाव के बीच इस तरह के इवेंट आगे भी देखने को मिलेंगे। जवाब में आलस-प्रमाद और गुटबाजी में डूबी कांग्रेस आरोपों की झड़ी लगा सकती है। मगर अभी तो उसके हाथ से भी समय की रेत की तरह से फिसल रहा है। नेतृत्व परिवर्तन की बातें कांग्रेस कैंप में गप्पों की तरह तारीख और महीने के साथ आती हैं। मगर होता कुछ नहीं है। हालात यह है कि कांग्रेस कुछ नहीं करने के लिए बदनाम है और भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन होने के बाबजूद इवेंट आधारित कामों के लिए मशहूर हो गई है। ऐसे में पार्टियों के कार्यकर्ताओं और जनता का भगवान भला करे... सब उल्टा-पुल्टा कहां तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पांव -पांव वाले भैया थे, किसान पुत्र और नर्मदा पुत्र थे, लेकिन अब किसान भी परेशान है और मां नर्मदा समेत प्रदेश की नदियां रेत चोरों की वजह से संकट में है। नैतिकवादी पार्टी भाजपा में अनुशासन और नैतिक मूल्यों की गिरावट आ रही है। कर्ज में डूबे किसान ज्यादा उत्पादन करने के बाद भी मौत को गले लगा रहे हैैं। शांति का टापू मध्यप्रदेश अशांत हो रहा है। आजादी के लिये संघर्ष करने वाली कांग्रेस मध्यप्रदेश में शिथिल पड़ी हुई है। जनसेवक कहे जाने वाले सरकारी कर्मचारी मनमानी कर रहे हैैं। ऐसा लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। जितनी ठीक करने कोशिश हो रही है उतनी ही उल्टा-पुल्टा हो रहा है...

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 MadhyaBharat  7 July 2017

शहला मसूद हत्याकांड

आरटीआई एक्टविस्ट शहला मसूद हत्याकांड की दोषी जाहिदा परवेज और सबा फारूकी को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सशर्त जमानत दी है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने जनवरी में इन दोनों सहित चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के बाद दोनों को एक ही जेल में रखा गया था, जहां दोनों का बाकी कैदियों के साथ झगड़ा होता था। इसके बाद ही दोनों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता शहला मसूद की हत्या के मामले में पांच साल, पांच महीने 13 दिन तक जाँच चली थी, पेशी, गवाही के बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। यह उन चंद मामलों में शामिल है, जो घटना के महज 17 दिन बाद ही सीबीआई को सौंप दिया गया था। फिर भी अफसरों के हाथ इसका एक भी ऐसा सिरा हाथ नहीं लगा था, जिससे वे हत्यारे और साजिश रचने वालों तक पहुंच जाएं। बाद में एक-एक सबूत और गवाह जोड़े गए तो इश्क, ईर्ष्या, इंतकाम, जुनून और जज्बातों से भरे रिश्तों के रहस्यों भरी कत्ल की यह कहानी कदम-कदम पर अंत तक उलझती रही। इसी कसमकश के बीच चार्जशीट के अध्ययन, पांच साल तक कोर्ट में बहस चली।  

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 MadhyaBharat  6 July 2017

सुशासन शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समाधान ऑन लाईन में कलेक्टरों को दिये निर्देश   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सुशासन से आमजनों को सेवाओं का लाभ समय से मिले, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आमजनों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिये परेशान नहीं होना पड़े। उन्हें लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा में सेवाओं का प्रदाय हो, यह सुनिश्चित किया जाये। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहां समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के तहत कलेक्टरों को यह निर्देश दिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समय पर आम जनता के काम होना चाहिए। राजस्व प्रकरण के निराकरण पर विशेष ध्यान दें। खसरे की नकलें किसानों तक पहुंचाने का अभियान सभी जिलों में पारदर्शी तरीके से चलायें। समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, मसूर की खरीदी पूरी संवेदना के साथ हो। विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों के बैंक खाते में भुगतान करने की सूचना समय से मिले, इसकी व्यवस्था बनायें। शासकीय मंदिरों के पुजारियों को मानदेय का भुगतान समय से हो, यह सुनिश्चित किया जाये। आकाश और बादल को पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज समाधान ऑन लाईन के दौरान हरदा जिले ग्राम बड़झिरी नेत्रहीन दंपत्ति श्री जयराम और ललिता के बेटों आकाश और बादल के लिये मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से पच्चीस-पच्चीस हजार रुपये की राशि स्वीकृत की। हरदा जिले के जयराम ने शिकायत की थी कि उन्होंने सामूहिक विवाह में शादी की है परन्तु उन्हें मुख्यमंत्री विवाह सहायता और विकलांग विवाह प्रोत्साहन योजना की राशि नहीं मिली है। इस पर कलेक्टर हरदा ने जानकारी दी कि इनकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुये उन्हें 63 हजार रुपये की राशि दी जा चुकी है। जब जयराम ने बताया कि उनके दो बेटे बादल और आकाश हो गये हैं। तब मुख्यमंत्री ने इन दोनों बच्चों के लिये सहायता राशि स्वीकृत की। समाधान ऑनलाइन के तहत आज ग्यारह हितग्राहियों की शिकायतों का निराकरण किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिये। कटनी जिले के ग्राम कटौह के श्री दर्शनलाल चौधरी द्वारा इन्दिरा आवास योजना की प्रथम किश्त देर से मिलने और दूसरी किश्त का भुगतान नहीं होने के प्रकरण में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपद पंचायत रीठी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निलंबित करने तथा पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिये। रतलाम जिले की ग्राम पंचायत बिरमावल के सरपंच श्री कन्हैयालाल द्वारा कराये गये कार्यों का भुगतान नहीं मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने जनपद पंचायत रतलाम के संबंधित सहायक यंत्री, उपयंत्री, सहायक लेखाधिकारी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निलंबित करने और जांच करने के निर्देश दिये। सागर जिले के ग्राम इटवा में वन विभाग द्वारा तालाब निर्माण, पिचिंग और कूप निर्माण का कार्य होने के बाद भी आवेदकों को भुगतान नहीं मिलने की शिकायत पर संबंधित रेंजर और वनरक्षक को निलम्बित करने के निर्देश दिये। समाधान ऑनलाइन में आज शिवपुरी जिले के ग्राम सिलपुरा के श्री विश्वनाथ पाल की पत्नी को दुर्घटना में विकलांग होने पर सहायता राशि प्राप्त नहीं होने, दमोह जिले के ग्राम सासा के श्री रामसेवक घोषी की भूमि शासकीय अभिलेख में अंकित होने संबंधी, सीहोर जिले के ग्राम नजरगंज की श्रीमती कमला भूतिया के पति की मृत्यु के बाद मीसाबंदी पेंशन नहीं मिलने, हरदा जिले के ग्राम बड़झिरी के श्री जयराम को विकलांग विवाह प्रोत्साहन की राशि नहीं मिलने, सतना जिले के ग्राम मउहट श्रीमती गुलबसिया पटेल को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि नहीं मिलने, देवास जिले के ग्राम बेडगांव के श्री गबू मनसौरे की पत्नी की मृत्यु के बाद बीमा राशि नहीं मिलने, इन्दौर जिले के ग्राम भालौदा के श्री संतोष शर्मा और ग्राम बलधारा के श्री सोहन उपाध्याय के पुजारी का मानदेय नहीं मिलने की और बालाघाट जिले ग्राम कारंजा के श्री झामसिंह नाईक को नलकूप खनन योजना की राशि दूसरे खाते में जाने की शिकायत का निराकरण किया गया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को बधाई इस दौरान सीएम हेल्प लाईन की संशोधित ग्रेडिंग प्रणाली के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया। सीएम हेल्प लाईन की शिकायतों के निराकरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों, जिला पंचायतों और नगर निगमों को मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बधाई दी। बताया गया कि सीएम हेल्प लाईन की शिकायतों के निराकरण में नरसिंहपुर, इन्दौर, होशंगाबाद, मंदसौर और बालाघाट जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। झाबुआ, बुरहानपुर, नरसिंहपुर, जबलपुर और होशंगाबाद जिला पंचायतों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रीवा, भोपाल, छिंदवाड़ा, इन्दौर और उज्जैन नगर निगमों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। समाधान ऑनलाइन के तहत संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  5 July 2017

शिवराज सिंह चौहान

मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में दो जुलाई को वृहद वृक्षारोपण का इतिहास रचा जायेगा। इस दिन नर्मदा बेसिन में जन-सहभागिता से 6 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाये जायेंगे। इसकी तैयारियाँ युद्ध स्तर पर चल रही है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस महत्वाकांक्षी जन-अभियान की तैयारियों की आज वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने नर्मदा बेसिन से संबंधित जिलों में वृक्षारोपण की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि इस जन-अभियान को जन-महोत्सव का रूप दिया जाये। इसमें सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक एवं सभी संगठनों तथा किसान, व्यापारी, विद्यार्थी, सरकारी कर्मचारी आदि सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाये। पौधों, गड्डे एवं लोगों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाये। श्री चौहान ने कहा कि इस महाभियान से नर्मदा सेवा मिशन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा होगा। यह पर्यावरण बचाने का महायज्ञ है। इससे जन-संगठनों और जनता को जोड़ने के लिये अभिनव प्रयोग किये जाये। प्रत्येक जिला अपना लक्ष्य पूरा करेगा। उन्होंने वृक्षारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पौधे निर्धारित स्थान पर पहुँच जाये तथा इसमें सहयोग के लिये लोगों का पंजीयन भी बढ़ाया जाये। मुख्यमंत्री ने जनता की सहभागिता बढ़ाने के लिये जिलों में किये गये नवाचारों पर प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया। श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं अमरकंटक, जबलपुर एवं खंडवा जिलों में वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण महाअभियान का शुभारंभ मॉ नर्मदा के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं नर्मदा गीत से किया जाये। इसमें जन-संगठनों, जनता और जन-प्रतिनिधियों की भागीदारी हो। उन्होंने प्रत्येक जिले के कलेकटर से लक्ष्य पौधों की उपलब्धता, गड्डों की स्थिति और जन-सहभागिता की जानकारी ली। समीक्षा के दौरान वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह, मुख्य सचिव श्री बी.पी.सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही जिलों में सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।

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 MadhyaBharat  29 June 2017

दीपक जोशी

पूर्व क्रिकेटर श्रीकांत और  चेतन चौहान भी होंगे शामिल मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान भोपाल में बनने वाले देश के सबसे बड़े ग्लोबल स्किल पार्क का शिलान्यास 3 जुलाई को करेंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजीव प्रताप रुड़ी, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान श्री के.श्रीकांत और पूर्व क्रिकेटर तथा उत्तर प्रदेश के कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत प्रभार) श्री चेतन चौहान भी शामिल होंगे। प्रदेश के कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दीपक जोशी ने आज कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। स्किल पार्क का निर्माण 645 करोड़ की लागत से 37 एकड़ में किया जायेगा। पार्क में हर साल एक हजार विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रशिक्षक विश्व स्तर के होंगे। प्रशिक्षित विद्यार्थियों का प्लेसमेंट भारत एवं भारत के बाहर इंटरनेशनल स्तर पर किया जायेगा। 'इंडस्ट्री के साथ एवं इंडस्ट्री के लिये' की भावना पर पार्क संचालित होगा। अन्तर्राष्ट्रीय संयुक्त प्रमाणीकरण का प्रावधान भी होगा। समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, संचालक कौशल विकास श्री संजीव सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  27 June 2017

shivraj singh

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का भाषण हो या अफसरों की फाइलें किसानों से संबंधित योजनाओं की फेहरिस्त खासी लंबी होती है। लेकिन ये योजनाएं किसान के खेत-खलियान तक क्यों नहीं पहुंच पाती ये शायद वही सवाल है जिसका जवाब जानने मध्यप्रदेश का किसान सड़कों उतर आया है। मध्यप्रदेश में किसानों के नाम पर करीब 30 से ज्यादा योजनाएं चल रही हैं। इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों की योजनाएं शामिल है लेकिन जमीन पर इनका लाभ बहुत कम किसानों को मिल पाता है। यदि ढूंढा जाए तो पूरी तहसील में सिर्फ 5 या 10 ही प्रगतिशील किसान मिलते हैं। मध्यप्रदेश सरकार का इस साल का कृषि बजट 33 हजार 564 करोड़ रुपए है। सरकार अगर कृषि पर करोड़ों रुपए फूंक रही है तो भी किसान आगे क्यों नहीं बढ़ रहा है। किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी ग्राम सेवकों की है लेकिन कई जगह ग्राम सेवक गांव में जाते ही नहीं हैं। इनके बहुत कम किसानों से संपर्क होते है। इनके जरिए ही बीज, खाद या दवा किसानों तक पहुंचती है जिसकी कीमत बाजार से आधी होती है। कई किसान शिकायत भी करते हैं कि ग्राम सेवकों से मिलने वाली कीटनाशक या दूसरी तरह की दवाईयां बहुत कम प्रभावी होती हैं। इस कारण किसान मजबूरी में बाजार से ही कीटनाशक दवा लेता है जिससे उसकी लागत बढ़ जाती है। योजनाएं  राज्य सरकार कृषि उपकरण,खेत में पाइपलाइन,पंपसेट स्प्रिंकलर, ट्रेक्टर के लिए कीमत में 25 से 50 फीसदी तक की सबसिडी देती है। उद्यानिकी विभाग भी पॉलीहाउस,फल-फूल की खेती, मधुमक्खी पालन, सरंक्षित खेती और सूक्ष्म सिंचाई के लिए सबसिडी देता है।सबसिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन अपने बैंक खाते की जानकारी के साथ एमपीएफटीएस (मध्यप्रदेश फार्मर सबसिडी ट्रेकिंग सिस्टम) पर रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। ज्यादातर योजनाओं में सबसिडी का पैसा सालभर तक नहीं मिलता है। लिहाजा किसान इसका फायदा नहीं उठा पाता।यदि किसान कुआं खुदवाता है बोरिंग करवाता है तो उसे पंप पर 50 फीसदी की सबसिडी मिलती है। लेकिन यह सबसिडी आवेदन के एक साल बाद मिलती है। सरकार पॉलीहाऊस लगाने के लिए भी 50 फीसदी सबसिडी देती है। लेकिन यहां भी सबसिडी काफी देर से मिलती है और किसान साहूकार से कर्ज लेकर उसके चंगुल में फंस जाता है  

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 MadhyaBharat  14 June 2017

kisan andolan

 मध्यप्रदेश में जिसका डर था वही होने लगा। जान देता किसान जान लेने पर उतारू हो गया। किसान पुत्र मुख्यमंत्री होने के बावजूद सीआरपीएफ या पुलिस की गोली से सात किसानों की मौत चौतरफा सवाल करती है। सरकार उत्तर देने के बजाए अनशन कर पॉलिटिकल इवेंट का हथकंडा अपनाती है। फौरी तौर पर असंतोष और आंदोलन की आग पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अनशन से ठंडक के छींटे पड़े हैं। अगर सरकार संभली नहीं तो ये आंदोलनों का आरम्भ  है अंत कैसा होगा पता नहीं। लेकिन अच्छा तो नहीं ही होगा। असल में यह असंतोष की आग बरास्ते मंत्री, विधायक, संगठन से होती हुई किसानों से आगे कर्मचारियों और जनता के बीच दावानल बनने के संकेत दे रही है। प्रदेशों में किसान आंदोलन की वजह राज्यों की सरकारें कम केंद्र की किसान हितैषी नीति नहीं होना भी है। उद्याेगों की प्रति समपर्ण और किसानों की उपेक्षा ने भी शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, देवेन्द्र फडनवीस, वसुंधरा राजे और विजय रूपाणी जैसे मुख्यमंत्रियों के लिए मुसीबत पैदा कर दी है। किसानों की खुशहाली के बिना देश कैसे मुस्कुरा सकता है। किसानों की अंसतोष्ा की बड़ी वजह कृषि उत्पादों के लागत मूल्य तय नहीं होना और वादे के मुताबिक लागत मूल्य में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर बाजार मूल्य घोषित नहीं होना भी खास है। अन्नदाता का गुस्सा प्रदेश भाजपा के गढ़ मालवा के मंदसौर-नीमच से शुरू होकर भेापाल तक पहुंच गया। राजस्थान की सीमा से लगा यह इलाका मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए भी आने वाले समय में दिक्कतें पैदाकर सकता है। मंदसौर किसानों की छाती में गोली मार पहले ही दिन छह को मार दिया। उस पर प्रशासन ने सरकार को गुमराह कर कह दिया कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई। पूरे एक दिन सरकार की फजीहत हुई और बाद में गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई। यहं खास बात यह है कि गृहमंत्री को पुलिस अधीक्षक ने गलत जानकारी दी। जिससे सरकार की किरकिरी हुई। और हैरत की बात यह है कि गृहमंत्री गुमराह करने वाले अधिकारी का कुछ नहीं बिगड़ा। जबकि गलत जानकारी ने सरकार की किसान हितैषी छबि का पूरा गणित ही गड़बड़ा दिया। पूरी सरकार उसकी संवेदना दांव पर लग गई। मीडिया मेनेजर चाहे जितनी सांत्वना दे मगर हालात को काबू पाने के सीएम को मंत्रालय छोड़कर दशहरा मैदान में दो दिन का अनशन करना पड़ा। ऐसा पहली बार हुआ। सियासत में इमेज का बड़ा महत्व होता है इस घटना ने शिवराज सिंह की किसान पुत्र की छबि को दागदार कर दिया है। प्रशासन ने इतना नुकसान किया जो कि उनके विरोधी भी नहीं कर पाये। असल में यह अफसरों के उपर निर्भर रहने के नतीजे है। अफसर चाहते है कि वे प्रशासन के साथ-साथ सियासी सलाह भी दे। और अपने मुताबिक फैसले भी कराये। इससे में उनकी पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में होता है। सरकार नहीं समझी तो यह दौर आगे भी जारी रहने वाला है। अफसरों के चश्मे से देखने और उनके कानों से सुनने की वजह से अकसर मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता बेईमान और आम जनता गलत काम कराने वाली दिखने लगती है। ऐसे में जो काम सरकारी स्तर पर होते है वे जन हित में कम अहसान के तौर पर ज्यादा किये जाते हैं।  नौकरशाही का हावी होना इस बात का प्रमाण है कि सात किसानों की मौत्ा के बाद भी एक भी अधिकारी न तो निलंबित हुआ और न किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इतनी बड़ी घटना के बाद भी कठोर निर्णय तो दूर की बात एस.पी. कलेक्टर को हटाने जैसे शब्दों से भी परहेज कर उन्हंे विड्रा करने जैसे शब्दों का इस्तेमान किया गया। ऐसा इसलिए कि हटाये गये अफसर आहत न हो जाये। ये एक और सबूत है कि नौकरशाही सरकार पर किस कदर हाव्ाी है। सरकार और प्रशासन कि स्थिति पर पत्रकार अमिताम बुधौलिया के फेसबुक वाल से ली गई चंद लाईने पेश है .... “ घोड़े हैं स्वतंत्र और सवारों पे लगाम है। आपके राज्य का बढि़या इंतजाम है, मरती है तो मरे पब्लिक, इनकी बला से  जश्न से फुरसत नहीं, घूमना ही बस काम है। इससे अच्छे दिन और क्यों आएंगे दोस्ताें  स्वच्छ भारत में नेताओं पे थूकना भी अब हराम है।।” असल में अफसरों के जरिये मंत्रियों पर नकेल कसने का यह खालिस नुस्खा है जिसे कुछ सालों के बाद हर मुख्यमंत्री अपना ही लेता है। अफसर मुखिया को हर पाकञसाफ और भाग्य विधाता बना देते है। छोटे बड़े अफसर सीधे सीएम के मुह लग जाते हैं। गिरोह बना कर बाकायदा खुसामत करते हैं। हर असफलता का ठीकरा दूसरों के सर फोड़ते हैं। मंदसौर गोली कांड भी इसी का प्रमाण है। ऐसे में मुख्यमंत्री को बिन मांगी सलाह कि वे आत्म चिंतन करें। और जिन तरीकों और संगठन की मदद् से सरकार में आये हैं उसे फिर से जीवंत करें। चंपू नेता, पालतू मीडिया और चापलुस नौकरशाहों से बचें। दोषियों पर कठोर कार्रवाई जैसा कि वे कहते हैं उसे कर डाले। नही तो जनता उन्हें कमजोर मुख्यमंत्री के तौर पर देखेगी। अनशन के जरिये एक बार फिर इवेंट मैनेजरी जन नेता शिवराज सिंह चौहान को लगता है डेमेज कंट्रोल करने के लिए अवेंट कराने का चस्का लग गया है। नर्मदा माई से लेकर नदियों से रेत लूटने का मामला हो तो डेमेज कंट्रोल के नर्मदा सेवा यात्रा निकालों अलग बात है इसका नतीजा उल्टा पड़ा। इस विश्वव्यापी अभियान में देशव्यापी थू-थू हुई। अभी इससे उन्हें निजात भी नहीं मिली थी कि मंदसौर कांड ने उनसे मंत्रालय छुड़वा कर दशहरा मैदान में अनशन करवा दिया। इवेंट के लिए जम्बूरी मैदान के बाद दशहरा मैदान एक नई खोज है। वास्कोडीगामा बने मैनेजरों को इसके लिए बधाई। कुछ करोड़ ही खर्च आएगा 2018 के चुनाव तक जिसमें कुछ मैनेजर करोड़पति और कुछ दर्जन सहायक लखपति तो हो ही जायेंगे। अभी से उनके लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं। क्योंकि नर्मदा यात्रा से लेकर मुख्यमंत्री के अनशन तक हुए खर्च का लोग अनुमान भ्ाी लगा रहे हैं और हिसाब भी मांग रहे हैं। जानकारों के मुताबिक यह आंकड़ा अरबों में है। दो दिन के अनशन के प्रबंधन का खर्च ही करोड़ों का बताया जा रहा हैं।  बहरहाल, इससे अलग भाजपा में सत्ता संगठन को लेकर हो रही गुटबाजी मुख्यमंत्री के अनशन से एकता का मेगा-शो करती दिखाई दी। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय से लेकर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सब एक मंच पर दिखाई दिये। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने श्री चौहान को नारियल पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया। इसी तरह कांग्रेस एकता टाॅनिक मंदसौर कांड दे गया। उसके युवराज राहुल बाबा से लेकर महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पीसीसी चीफ अरूण यादव और  सबके बड़े भाई कमनलाथ सब एकजुट नजर आये।  अगले साल चुनाव के पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस को संजीवनी से कम नहीं हैं।  प्रदेश के सियासी-नौकारशाही के हालात पर सच के आस-पास लिखने और बोलने वालों के लिए दो लाईनें खास है... मैं दीया हूँ... मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अंधेरे से है  हवा ताे बेवजह ही मेरे खिलाफ है।

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 MadhyaBharat  12 June 2017

इंदौर -बारिश और तूफान

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  इंदौर में भारी बारिश और तूफान के कारण कार्यक्रम स्थल के क्षतिग्रस्त होने से घायल लोगों को देखने यूनिक अस्पताल पहुँचे। मुख्यमंत्री ने सभी घायलों से बातचीत की और उन्हें बताया कि घटना स्थल पर उपस्थित सभी लोग सकुशल हैं। घायलों का पूरा इलाज मध्यप्रदेश सरकार द्वारा करवाया जायेगा। श्री सिंह ने चिकित्सकों को सभी घायलों का तुरंत समुचित इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री श्री चौहान के आज इंदौर में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर अचानक तूफान बारिश के कारण जब अफरा-तफरी मची, तब मुख्यमंत्री घटना स्थल पर ही डटे रहे और स्वयं ने वहाँ सभी लोगों को पंडाल से बाहर निकलवाकर अस्पताल पहुँचवाया। सबसे आखिर में मुख्यमंत्री श्री चौहान तुरंत अस्पताल पहुँचे और घायलों के उपचार की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की।

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 MadhyaBharat  6 June 2017

खिलाड़ियों का सम्मान

  इंदौर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खिलाड़ियों का सम्मान करने से प्रोत्साहन मिलता है। राज्य शासन खेलों के विकास के लिये कृत-संकल्पित है। भारत में पिछले एक दशक में खेलों का तेजी से विकास हुआ है। क्रिकेट और अन्य क्षेत्रों में हमने अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियाँ हासिल की हैं। प्रदेश सरकार खेल और खिलाड़ियों के साथ है। समय-समय पर खिलाड़ियों का सम्मान जरूरी है। सम्मान से खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलती है। श्री चौहान ने आज मध्यप्रदेश ओलम्पिक संघ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा खेल प्रशासकों, खेल संगठनों के पदाधिकारियों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर श्री अभय छजलानी, श्री अनिल थूपर, श्री बलवीर सिंह चौहान, श्री ओम सोनी और श्री आलोक खरे का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शॉल-श्रीफल और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में प्रतिभाशाली खिलाड़ी श्री प्रकाश मिश्रा, गणेशवरी धुर्वे, नमिता चन्देल, अंजुल नामदेव, लतिका भण्डारी, प्रिंस परमार, कुलदीप सिंह कोर, शालू रायकवार, आरती खकाल, सतीश को सम्मानित किया गया। समारोह में श्री के.एस. गिल, श्री वीरेन्द्र सिंह, श्री बी.एस. राजपूत, श्री ओम सोनी, श्री संतोष त्रिपाठी, श्री के.बी. अग्रवाल, श्री बी.डी. विद्यार्थी, श्री एस.एन. मुखर्जी, श्री सुमेर सिंह गढ़ा, श्री अर्जुन सिंह धूपर, श्री जी.के. श्रीवास्तव, श्री अभय राहुल, श्री प्रीतपाल सिंह, श्री लोक बहादुर, श्री मदन यादव, श्री संजय यादव, श्री विनोद पोतदार, श्री चन्दूराव शिंदे, श्री प्रशांत वैशाली, श्री महेश आदि को शॉल-श्रीफल और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, आईडीए अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री रमेश मेंदोला, सुश्री उषा ठाकुर, श्री सुदर्शन गुप्ता, श्री राजेश सोनकर, श्री कैलाश शर्मा, श्री दिग्विजय सिंह और श्री ओम सोनी आदि मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  6 June 2017

kisan hadtal

किसान हड़ताल का असर ,दूध-सब्जी की सप्लाई रुकी  मध्यप्रदेश में किसानों की हड़ताल के तीसरे दिन शनिवार को एक बार फिर आम लोगों को दूध और सब्जी की किल्लत का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में पुलिस की सुरक्षा में दूध और सब्जी की दुकानें खुलीं, लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा कीमत पर बेचा गया। उधर कई जगह आंदोलन कर रहे किसानों ने दूध और सब्जी की सप्लाई रोकने के लिए निजी वाहनों और बसों में भी चेकिंग शुरू कर दी है। भारतीय किसान संघ भी अब इस हड़ताल में शामिल होगा। किसान के आंदोलन पर सरकार हरकत में आ गई है। शनिवार दोपहर मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग के अधिकारियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की। इस दौरान तीनों संभागों के आईजी, कलेक्टर, एसपी और दुग्ध संघ के अधिकारी भी उपस्थित थे। देवास के पास कन्नौद में खेत से 2 लीटर दूध लेकर घर आ रहे किसान को आंदोलनकारियों ने सुबह 8.15 बजे सरकारी अस्पताल के सामने रोक लिया, उन्होंने पहले दूध बहाया इसके बाद किसान के साथ मारपीट की। मामले में रिपोर्ट लिखाई गई। राजोदा में कैलोद चौराहे पर निजी वाहनों को रोक कर किसानों ने चेकिंग की, सुबह से खुली दूध डेयरियां भी बंद करवा दी गईं। खंडवा में बसों की चेकिंग में मिली सब्जी किसानों ने सड़क पर फेंकी। महाराष्ट्र से आया दूध का वाहन भी रोका, जिसके बाद ड्राइवर वाहन को थाने ले गया। वहां पुलिस के संरक्षण में दूध ज्यादा कीमत में बिका। शाजापुर में सांची दूध की सप्लाई होने से स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन खुला दूध अब भी नहीं मिला। यहां सब्जी की सप्लाई बंद रही। शाजापुर में करीब बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। मंदसौर में 300 लीटर दूध एक कार से जब्त हुआ, जिसके बाद जिला अस्पताल में इसे बांट दिया गया। कई जगह किसानों का विरोध जारी रहा उन्होंने रोक-रोकर वाहनों की चेकिंग की। दूध और सब्जी की किल्लत के चलते कई जगह आम लोगों ने किसानों का विरोध किया। लोगों का कहना है कि यह तरीका बिल्कुल गलत है। झाबुआ और आलीराजपुर में हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा, यहां सामान्य रूप से मंडी खुली और दूध की सप्लाई भी सामान्य रही। हालांकि मंड़ि‍यों में सब्जी की आवक पहले की अपेक्षा कम रही। खरगोन सब्जी मंडी में हालत सामान्य रहे लेकिन सब्जियों के भाव आसमान पर रहे। इंदौर और धार में किसानों आंदोलन के चलते व्यापारी खरगोन नहीं पहुंचे। यहां दूध की सप्लाई भी सामान्य रही। रविवार को सब्जी मंडी बंद रह सकती है। जिले के भीकनगांव में सब्जी का व्यापार जारी। यहां सांची के दूध की सप्लाई भी हुई, गड़बड़ी की आशंका के चलते अमूल का दूध नहीं मंगवाया गया। जानकारी के मुता‍बिक सांची का 10 हजार लीटर दूध यहां सप्लाई हुआ। बड़वानी में किसान आंदोलन का असर नहीं रहा।  

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 MadhyaBharat  3 June 2017

 डॉ.बाबा साहब अम्बेडकर

हमारा सौभाग्य कि डॉ. अम्बेडकर जैसे महापुरूष ने प्रदेश की धरती पर जन्म लिया    मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि हम सबका सौभाग्य है कि भारत रत्न बाबा साहब डॉ.भीमराव अम्बेडकर जैसे महापुरूष ने प्रदेश की धरती पर जन्म लिया। बाबा साहब प्रखर बुद्धिमान और प्रतिभा के धनी थे। वे व्यक्ति नहीं पूरी संस्था थे। अभाव और कठिनाइयों में भी उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगे बढ़े। उनका जीवन हम सबके लिये प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान अम्बेडकर नगर (महू) में डॉ. अम्बेडकर की जयंती महाकुंभ में राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 'ग्रामोदय से भारत उदय अभियान'' की शुरूआत भी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि महाकुंभ में देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रद्धालु सरकार के मेहमान हैं। सरकार आज मेजबान की भूमिका में है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब वे पहली बार महू आये थे, तो देखा कि कुंभ की तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ बाबा साहब के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने आते हैं, किंतु उनके रुकने, खाने-पीने के कोई प्रबंध नहीं हैं। तभी तय किया कि डॉ.अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को हर साल महाकुंभ होगा और सरकार महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करेगी।  मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें बाबा साहब की जन्म-स्थली पर स्मारक बनवाने का सौभाग्य मिला। महाराष्ट्र सरकार ने भी इन्दु मिल की जमीन को बाबा साहब की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के लिये सौंप दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र और भारत सरकार ने लंदन में उस भवन को भी स्मारक बनाने के लिये खरीद लिया है, जिसमें रहकर बाबा साहब ने पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि बाबा साहब के जीवन से जुड़े पाँच स्थान पंच तीर्थ के रूप में बनेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारी सरकार सभी वर्गों की सरकार है, किंतु पहले उनकी है जो सबसे गरीब हैं, जो सबसे नीचे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने गरीबों के उत्थान के लिये सतत् प्रयास किये। वे हमेशा शिक्षित बनने की बात कहते थे। सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बच्चों में शिक्षा को  बढ़ावा देने के लिये नि:शुल्क गणवेश, किताबें, साइकिल जैसी सुविधाओं के साथ छात्रवृत्ति, छात्रावास, विदेश में अध्ययन की व्यवस्था और शहरों में किराये से कमरा लेकर पढ़ने की सुविधा की योजना लागू की है। साथ ही प्रायवेट मेडिकल/इंजीनियरिंग/ प्रबंधन संस्थानों में प्रवेश मिलने पर सरकार की ओर से फीस दिये जाने दिये की भी योजना संचालित है। रोजगार के लिये  मुख्यमंत्री युवा उद्यमी और स्व-रोजगार जैसी योजनाएँ विशेषकर अनुसूचित जाति-जनजाति के युवकों के लिये शुरू की गई हैं। इन योजनाओं में बैंक ऋण की गारंटी राज्य शासन द्वारा दी जाती है। वन, योजना, आर्थिक और सांख्यिकी मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कार्यकाल में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिला है। सामाजिक समरसता के क्षेत्र में भी सर्वाधिक प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की दरों में खासी बढ़ोत्तरी की गयी है। प्रदेश में छात्रावासों की संख्या भी दोगुनी हो गयी है।    महाराष्ट्र की सांसद और भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री पूनम महाजन ने कहा कि बाबा साहब बड़े दूरदृष्टा थे। उन्होंने हमें ऐसा संविधान दिया जो हर परिस्थिति में समीचीन है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने इन्दु मिल की जमीन को बाबा साहब अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापना के लिये दे दी है और यह प्रतिमा जल्द ही बनकर तैयार होगी। सम्मेलन को बौद्ध संत भंते श्री संघशीलजी ने भी संबोधित किया। स्वागत भाषण नर्मदा घाटी विकास, सामान्य प्रशासन और विमानन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लालसिंह आर्य ने दिया। जिला पंचायत की अध्यक्ष सुश्री कविता पाटीदार ने आभार माना। प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बौद्ध संत भंते श्री संघशीलजी का पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया। सम्मेलन में सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक सुश्री उषा ठाकुर सहित अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।  

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 MadhyaBharat  14 April 2017

 पुलिस हाउसिंग बोर्ड

मुख्यमंत्री  द्वारा इंदौर में पुलिस हाउसिंग बोर्ड की 15 मंजिला इमारतों का भूमि-पूजन  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस की सजगता के कारण आज पूरा प्रदेश शांति का टापू बना हुआ है। माताएँ-बहनें निर्भीक रूप से कहीं भी आ-जा सकती हैं। पुलिस के जवान प्रदेश में शांति, कानून और व्यवस्था बनाये रखने में अपना योगदान दे रहे हैं। उनके परिवार के लिये आवास और अन्य सुविधाओं को उपलब्ध करवाने का कार्य प्रदेश सरकार का है। पुलिस जवानों के लिये 25 हजार मकान स्वीकृत किये गये हैं। दो वर्ष में ही यह 15 मंजिला इमारतें तैयार की जायेंगी। आधुनिक तरीके से इन इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें सर्व-सुविधायुक्त व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस हाउसिंग बोर्ड कार्पोरेशन के  महेश गार्ड लाइन इंदौर स्थित 15वीं बटालियन में भूमि-पूजन कार्यक्रम में कही। वन मंत्री श्री गौरीशंकर शेजवार, महापौर श्रीमती मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़, मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमेन श्री कृष्णमुरारी मोघे, विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता, सुश्री उषा ठाकुर, श्री राजेश सोनकर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'यह भवन पुलिस के जवानों के लिये ही नहीं वरन उन भाँजे-भाँजियों के लिये बना रहे हैं जो अपने पिता-पुत्र,भाई-बहन आदि को पुलिस की नौकरी के जरिये समाज-सेवा के लिये क्रियाशील और उर्जावान रखते हैं। मध्यप्रदेश की पुलिस ने अभूतपूर्व कार्य किये हैं। इनमें सबसे प्रमुख कार्य चम्बल के बीहड़ों को डाकूविहीन कर विकास के नये मार्ग तैयार करना है। अब चम्बल में डाकू नहीं विकास का रोडमैप तैयार हो रहा है। मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में नक्सलवाद को फैलने नहीं दिया। नक्सलियों को प्रदेश की सीमा के बाहर ही रोक दिया है। सिमी जैसे आंतकवादी संगठनों के नेटवर्क को ध्वस्त किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पुलिस जवानों के बेटा-बेटी की उच्च-स्तरीय पढ़ाई के लिये आवश्यकता होने पर सरकार संसाधन के साथ राशि भी उपलब्ध करवाने के प्रयास करेगी। पुलिस का जवान अपने कर्म से समाज-सेवा के लिये 24 घण्टे क्रियाशील रहता है। परिवार और बच्चे-बच्चियों को पूरा समय नहीं दे पाता है। पुलिस की नौकरी वास्तव में समाज-सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण है। पुलिस महानिदेशक श्री ऋषि शुक्ला ने पुलिस परिवार के लिये 25 हजार मकान स्वीकृत करवाने के लिये मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 12 हजार से अधिक पुलिस जवानों की भर्ती की जा रही है। कानून-व्यवस्था बनाये रखना एक महती जिम्मेदारी है, जिसे पुलिस जवानों ने बेहतर तरीके से निभाया है। पुलिस हाउसिंग बोर्ड के महानिदेशक श्री सरबजीतसिंह ने कहा कि प्रदेश में पहली बार 15 माले की बहुमंजिला इमारत का निर्माण इंदौर में किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से 944 मकान पुलिस को उपलब्ध करवाये जायेंगे। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह ईको-फ्रेण्डली है, जिसमें सौर उर्जा के माध्यम से विद्युत सप्लाई की व्यवस्था की जायेगी। यह दो वर्ष में पूर्ण होगा। इससे पुलिस जवानों की आवासीय समस्या को हल करने में मदद मिलेगी। इंदौर में मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना में मोनोलेथिक शियर वॉल टेक्नालॉजी का प्रयोग प्रथम बार किया जा रहा है।  

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 MadhyaBharat  14 April 2017

प्रधानमंत्री आवास योजना

गृह प्रवेश में मुख्यमंत्री  चौहान हुए शामिल  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान आज इंदौर जिले के महू-अम्बेडकर नगर के नजदीक ग्राम गवली पलासिया निवासी उदयराज पिता सीताराम द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बनाये गये आवास के गृह प्रवेश में शामिल हुए। गृह प्रवेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को पाकर उदयराज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने उदयराज को शुभकामनाएँ दी। उदयराज का नया पक्का मकान 45 दिनों में बनकर तैयार हुआ है। इसके लिए उन्हें एक लाख 35 हजार रूपये तीन किस्त में दिये गये। वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, नर्मदा घाटी विकास (स्वतंत्र प्रभार) सामान्य प्रशासन और विमानन राज्य मंत्री श्री लालसिंह आर्य, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री कविता पाटीदार एवं अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।  लगभग 45 दिन पहले गवली पलासिया के उदयराज मात्र दो चारपाई लगने वाले अपने कच्चे घर में रहते थे। वे गाँव के ही किशन पटेल के घर ट्रेक्टर चालक के रूप में काम करते रहे। बढ़ती उम्र में उनकी पीठ और हाथ के जोड़ों में एठन होने लगी। उन्होंने बताया कि हर बारिश में उन्हें मकान की चिंता सताती रहती थी। प्रधानमंत्री आवास मिशन में पहला मकान उनका बना, इसलिए उन्हें और भी खुशी है।  मुख्यमंत्री श्री चौहान गृह प्रवेश कार्यक्रम में हवन वेदिका पर बैठे। इसके पहले मुख्यमंत्री ने व्हील-चेयर पर बैठे उदयराज को फूलमाला पहनाई।    

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 MadhyaBharat  14 April 2017

बाबा साहेब की 126वीं जयंती

संविधान निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर की 126वीं  जयंती पर आगामी 14 अप्रैल को अम्बेडकर नगर महू में भव्य कार्यक्रम होगा। बाबा साहब अम्बेडकर की जन्म-स्थली महू में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी राज्य शासन द्वारा अम्बेडकर महाकुंभ आयोजित किया जायेगा। इसी कार्यक्रम में 'ग्रामोदय से भारत उदय'' अभियान का शुभारंभ किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह भी उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आयोजन की सभी तैयारियाँ समय से पूरी की जाये। बाबा साहेब अम्बेडकर के जन्म-दिवस पर महू आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये। श्रद्धालुओं के भोजन तथा आवास की व्यवस्था की जाये। श्रद्धालुओं के लिये खण्डवा से महू तक आने के लिये अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जाये। खण्डवा रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की मदद के लिये स्वागत केन्द्र बनाया जाये। अम्बेडकर स्मारक पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की जाये। आयोजन के दौरान सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाएँ चाक-चौबन्द रहे। व्यवस्थाओं में अशासकीय संगठनों और नागरिकों का सहयोग लिया जाये। मुख्य कार्यक्रम के बाद समरसता भोज का आयोजन किया जायेगा। इस भव्य समारोह में अन्य स्थानों के अलावा बड़ी संख्या में प्रदेश भर के श्रद्धालु शामिल होंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री प्रभांशु कमल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष श्री भंते संघशील, संभागायुक्त इंदौर श्री संजय दुबे, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, कलेक्टर इंदौर श्री पी. नरहरि और स्थानीय समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  10 April 2017

दीपक जोशी

हर साल ढाई लाख युवा होंगे प्रशिक्षित  मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना में हर साल 2 लाख 50 हजार युवा को प्रशिक्षित किया जायेगा। योजना में ऐसे प्रशिक्षण दिये जायेंगे, जिनकी पूर्ति परम्परागत आईटीआई पाठ्यक्रमों से संभव नहीं है। तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दीपक जोशी ने बताया कि योजना में औपचारिक शिक्षा प्रणाली को छोड़ चुके युवा कामगार, जो अपने अनौपचारिक कौशल का प्रमाणीकरण करवाना चाहते हैं और ऐसे व्यक्ति जो अपने कौशल को बढ़ाकर स्व-रोजगार करना चाहते हैं, को प्राथमिकता दी जायेगी। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण दिया जायेगा। विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ वर्ग के युवाओं को भी प्रशिक्षित किया जायेगा। युवाओं को परिधान एवं गृह सज्जा, आटोमोबाइल्स, केपिटल गुड्स, वुडवर्क, टेक्नीशियन, निर्माण, घरेलू काम-काज, इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर, कृषि, ग्रीन जॉब, प्लंबर, फूड प्रोसेसिंग, रिटेल, आई.टी. सुरक्षा, टेलीकॉम, टूरिज्म एण्ड हा‍स्पिटेलिटी एवं वित्त सेवा से संबंधित प्रशिक्षण दिलवाया जायेगा। नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के आधार पर कौशल दक्षता के स्तर निर्धारित किए गए हैं। ऐसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किये जायेंगे, जिनके लिए रोजगार देने वाले सुनिश्चित रोजगार देने के लिए अनुबंध करेंगे।  

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 MadhyaBharat  7 April 2017

अमित शाह पर दिग्विजय सिंह के गंभीर अाराेप

    इंदौर में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि केंद्र सरकार आयकर विभाग के माध्यम से व्यापारियों से वसूली कर रही है।  कोंग्रेस नेता सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि आयकर विभाग के अधिकारियों को वसूली का लक्ष्य दिया गया है, यही वजह है कि आयकर विभाग लगातार व्यापारियों को नोटिस जारी कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि गुजरात में शाह की को-ऑपरेटिव बैंक में सबसे ज्यादा नोट बदले गए हैं, नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा काला कारोबार शाह ने ही किया है। सिंह ने कहा कि शाह ने उत्तरप्रदेश में किसानों को कर्ज माफ करने का सपना दिखाया। पहली केबिनेट में कर्ज माफ करने की बात कही, लेकिन अब बहाने बना रहे हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रटाचार चरम पर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा यात्रा शुरू की है, लेकिन उनका परिवार नर्मदा किनारे रेत कारोबार में लगा है।    

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 MadhyaBharat  25 March 2017

इंदौर में पासपोर्ट सेवा

 इंदौर तथा उज्जैन संभाग के 15 जिलों के लिये आज इंदौर में पासपोर्ट सेवा लघु केन्द्र के रूप में बड़ी सौगात मिली। लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने केन्द्र का उदघाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने की। विदेश राज्य मंत्री डॉ. व्ही.के. सिंह विशेष अतिथि थे। उदघाटन के साथ ही केन्द्र ने अपना काम शुरू कर दिया है। केन्द्र का लाभ 15 जिलों के पासपोर्ट आवेदकों को मिलेगा। शुरू में प्रतिदिन 100 एप्वाइंटमेंट जारी किये जायेंगे। इसके बाद माँग अनुसार इसे लगातार बढ़ाया जायेगा। केन्द्र को 600 से 700 आवेदन प्रोसेसिंग क्षमता का बनाया गया है। यह लघु केन्द्र पासपोर्ट सेवा केन्द्र की तरह ही कार्य करेगा। आवेदन की जाँच के साथ ही स्वीकृति की प्रक्रिया भी एक कार्य दिवस में पूरी हो जायेगी। लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने कहा कि केन्द्र की स्थापना सतत प्रयासों का सुपरिणाम है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की स्थापना में विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज का अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि इंदौर एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने के लिये भी पहल की जा रही है। नागरिकों की लंबे समय की माँग केन्द्र के शुरू होने से आज पूरी हो गयी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्र की स्थापना के लिये लोकसभा अध्यक्ष सहित केन्द्र शासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र के प्रयासों से मध्यप्रदेश को नित नई सुविधाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1978 में जब श्री अटलबिहारी बाजपेयी विदेश मंत्री थे, उनके प्रयासों से भोपाल में पासपोर्ट सेवा केन्द्र की स्थापना की गयी। लंबे अंतराल के बाद इंदौर में लघु पासपोर्ट सेवा केन्द्र केन्द्र शासन के प्रयासों से खुला है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केन्द्र शासन ने निर्णय लिया है कि मध्यप्रदेश के जबलपुर, ग्वालियर, सतना तथा विदिशा में भी पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जायेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि इस तरह के केन्द्र प्रदेश के अन्य शहरों में भी खोले जायें। इन केन्द्रों की स्थापना के लिये राज्य शासन द्वारा हर संभव मदद दी जायेगी। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट सेवा केन्द्रों का विस्तार समय की माँग है। केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री डॉ. व्ही.के. सिंह ने कहा कि पासपोर्ट सेवा अब आम नागरिकों के लिये बड़ी जरूरत बनती जा रही है। प्रयास है कि इन जरूरतों को पूरा करने के लिये पासपोर्ट सेवा केन्द्रों का विस्तार किया जाये। बड़ी संख्या में नये पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जबलपुर, ग्वालियर, विदिशा और सतना में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जायेंगे। जिलों के मुख्य डाक घरों में भी पासपोर्ट सेवाएँ शुरू करने का प्रयास है। पासपोर्ट सेवा के कार्यों में पारदर्शिता लाकर सेवा को जन-हितैषी बनाया गया है। पासपोर्ट बनवाने का कार्य पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है। इसमें लगने वाले समय को बेहद कम कर दिया गया है। विदेश सचिव श्री ज्ञानेश्वर मूले ने बताया कि वर्तमान में पूरे देश में मात्र 6 से 7 करोड़ लोगों के पास ही पासपोर्ट हैं। प्रतिवर्ष एक करोड़ से सवा करोड़ पासपोर्ट बनाये जा रहे हैं। सप्ताहांत के शनिवार और रविवार को भी पासपोर्ट बनाने का कार्य किया जा रहा है। श्रीमती सुमित्रा महाजन और अन्य अतिथियों ने शहीद स्वर्गीय श्री ज्ञानेश्वर नागर की धर्मपत्नी और परिजनों को इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित भवन के सांकेतिक कब्जे के रूप में प्रतीक चाबी दी गयी। अतिथियों ने फीता काटकर केन्द्र का उदघाटन किया। भवन का अवलोकन किया और नागरिकों के लिये उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। इस मौके पर महापौर श्रीमती मालिनी गौड़, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री कविता पाटीदार, इंदौर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, विधायक सर्वश्री सुदर्शन गुप्ता, महेन्द्र हार्डिया, मनोज पटेल विशेष रूप से उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  23 February 2017

मध्यप्रदेश पर्यटन के टीवीसी  एफी अवार्ड

सुरुचिपूर्ण एवं लोकप्रिय एड केम्पेन के लिये देशभर में अपनी अलग ख्याति और पहचान बनाने वाले मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के 'एम.पी. में दिल हुआ बच्चे सा' टीवीसी को प्रतिष्ठित एफी अवार्ड घोषित किया गया है। यह अवार्ड मध्यप्रदेश पर्यटन को बेस्ट ऑन गोइंग केम्पेन के लिये प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जून 2016 में मध्यप्रदेश पर्यटन के इस एड केम्पेन को लॉन्च किया था। अवसर था- मिंटो हॉल के जीर्णोद्धार एवं कन्वेंशन सेंटर के कार्य की शुरूआत का। मध्यप्रदेश पर्यटन के अन्य टीवीसी की तरह 'एमपी में दिल हुआ बच्चे सा' टीवीसी को भी शुरूआत से ही खासी लोकप्रियता हासिल हुई। यह एड लोगों की जुबान पर चढ़ गया था। इस एड में कहा गया है कि बचपन में कुछ नई अनोखी चीजों को देखकर जो खुशी मिलती है, दिल को कुछ ऐसी ही खुशी मिलती है मध्यप्रदेश आकर। जो भी मध्यप्रदेश आता है, उसका दिल बच्चों सा बन जाता है। मध्यप्रदेश के जंगलों में, उसके महलों में, उसकी कला-कृतियों में...। मध्यप्रदेश आने पर दिल करता है कि उसका चप्पा-चप्पा छान मारें। कुछ ऐसा ही दिखता है मध्यप्रदेश। एड में बच्चों के रंग-बिरंगे खिलौने से बने मध्यप्रदेश के पर्यटन-स्थल यह दशाते हैं कि यहाँ आकर दिल बच्चे सा हो जाता है। उल्लेखनीय है कि एफी अवार्ड न्यूयार्क अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन द्वारा अत्यधिक प्रभावी एडवर्टाइजिंग प्रोग्राम के लिय वर्ष 1968 में स्थापित किया गया था। यह अवार्ड प्रभावी मार्केटिंग कम्यूनिकेशन के लिये संचालित कैम्पेन एवं रचनात्मक प्रभावी कार्यों के लिये व्यक्तिगत श्रेणी में भी दिया जाता है।  

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 MadhyaBharat  21 February 2017

श्रमोदय विद्यालय

श्रमिकों के बच्चों को मिलेगी पब्लिक स्कूल जैसी शिक्षा सुविधा मध्यप्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को पब्लिक स्कूल जैसी शैक्षणिक सुविधा को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिये चार श्रमोदय विद्यालय अगले शिक्षण सत्र से शुरू किये जा रहे हैं। यह विद्यालय आवासीय सुविधा के साथ नि:शुल्क भोजन, पुस्तकों सहित नि:शुल्क शिक्षा श्रमिकों के बच्चों को देंगे। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में तैयार हो रहे इन विद्यालयों में 4480 बच्चों के शिक्षण, आवास और खेलकूद की वैसी ही व्यवस्थाएँ की जा रही हैं, जैसी प्राइवेट पब्लिक स्कूल में रहती है। श्रमोदय विद्यालय भोपाल का भवन परिसर 61 करोड़ 59 लाख, इन्दौर का 49 करोड़ 96 लाख, जबलपुर का 49 करोड़ 84 लाख और इतनी ही लागत से ग्वालियर श्रमोदय विद्यालय भवन परिसर का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग 80 प्रतिशत हो चुका है और जल्दी ही इसे पूरा कराया जा रहा है। सभी श्रमोदय विद्यालय केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल(सीबीएसई) से संबद्ध होंगे। इनमें प्रत्येक में 1120 श्रमिकों के बच्चों को हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 6वीं से 12वीं तक की सभी संकाय की शिक्षा दी जायेगी। श्रमोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा होगी जिसमें पंजीकृत श्रमिक के बच्चे शामिल हो सकेंगे। प्रवेश कक्षा 6वीं में दिया जायेगा और कक्षा 6वीं में प्रवेश के पूर्व छात्र को 5वीं परीक्षा पास होना अनिवार्य होगा। श्रमोदय विद्यालय भोपाल से होशंगाबाद और सागर, इंदौर विद्यालय से इन्दौर और उज्जैन, जबलपुर विद्यालय से जबलपुर, रीवा, शहडोल और ग्वालियर श्रमोदय विद्यालय से ग्वालियर और चम्बल में आने वाले जिले संबद्ध रहेंगे। प्रदेश के सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराने को ध्यान में रख चार अलग-अलग क्षेत्र के महानगर में श्रमोदय विद्यालय शुरू किये जा रहे हैं। श्रमोदय विद्यालय का प्रशासनिक, शैक्षणिक और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन श्रमोदय विद्यालय समिति से नियंत्रित होगा। समिति का सोसायटी रजिस्ट्रीकरण एक्ट में पंजीयन कराया जायेगा। मध्यप्रदेश भवन एवं संन्निर्माण कर्मकार मंडल के अनुसार विद्यालय भवनों का निर्माण 2017-18 में पूरा हो जायेगा। इसके साथ ही अन्य व्यवस्थाएँ, फर्नीचर, छात्रावास, प्रयोगशाला के उपकरण, शैक्षणिक और प्रशासनिक स्टाफ आदि को पूरा कर शैक्षणिक सत्र 2018-19 से यह विद्यालय प्रारंभ होंगे। यह पहला अवसर होगा जब नि:शुल्क और पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं के साथ पब्लिक स्कूल की सुविधा राज्य के श्रमिकों के बच्चों को मिलेगी।

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 MadhyaBharat  20 February 2017

 भजन गायक  अनूप जलोटा

प्रसिद्ध भजन गायक  अनूप जलोटा ने कहा है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने माँ नर्मदा को श्रंगारित करने का जो बीड़ा उठाया है, वह पूरे देश के लिये मार्गदर्शन के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रदेश में नदियों को संरक्षित और संवर्धित करने के लिये ऐसी यात्राएँ की जानी चाहिये। इससे आम जनमानस के साथ बच्चे और युवा नदियों के महत्व को समझेंगे। श्री जलोटा आज इंदौर में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। वे 'नमामि देवि नर्मदे''-सेवा यात्रा में शामिल होने आये हैं। श्री जलोटा ने कहा कि नदियों को माँ के समान माना जाता है, फिर भी देश की नदियों की हालत चिन्ताजनक है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा किये जा रहे प्रयासों को पूरे देश में क्रियान्वित किया जाना चाहिये। हम सबके लिये यह प्रश्न है कि भौतिकवादिता के बाद भी टेम्स नदी (लंदन) स्वच्छ है और हम अपनी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के बाद भी नदियों की संरक्षित नहीं रख पाये हैं। श्री जलोटा ने कहा कि माँ नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा है। मध्यप्रेदश के 16 जिलों से यह नदी निकलती है। सीधे तौर पर प्रदेश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसके आस-पास निवास करती है, नर्मदा जल पीती है एवं कृषि कार्य में उपयोग करती है। माँ नर्मदा का पर्यावरण संरक्षण, जीव-जन्तु के पालन-पोषण और विद्युत उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान है। नर्मदा जल के उपयोग से मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन में भी अभूतपूर्व योगदान दिया है। लगातार 4 वर्षों से मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिलना माँ नर्मदा के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है। श्री अनूप जलोटा ने कहा कि गंगा में स्नान करने से पाप मुक्ति होती है पर माँ नर्मदा के दर्शन और स्मरण मात्र से ही कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। माँ नर्मदा के जल में औषधीय गुण है। नर्मदा जल पीने से ही कई बीमारी दूर हो जाती है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान किसान पुत्र है। उनकी प्रगतिशील सोच से आज पूरे भारत के पर्यावरण प्रेमी और विशिष्ट व्यक्ति 'नमामि देवी नर्मदे''-यात्रा से जुड़ने आगे आ रहे हैं। श्री अनूप जलोटा ने कहा कि वे स्वच्छ गंगा मुहिम से भी जुड़े हुए हैं। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरे देश में नदी संरक्षण अभियान बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। श्री जलोटा ने कहा कि नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना के बनने से इस बार सिंहस्थ निर्विवाद सम्पन्न हुआ। कहीं भी पानी की कमी नहीं आई। मुख्यमंत्री की भागीदारी, प्रयास और भविष्य की सोच से निश्चय ही माँ नर्मदा श्रंगारित होगी और प्रदेश को सम्पन्न बनायेंगी।  

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 MadhyaBharat  15 February 2017

मुख्य सचिव श्रम श्री बी.आर. नायडू

  कैशलेस और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के सिलसिले में श्रम विभाग द्वारा भवन एवं अन्य संन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर के भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से करने की सुविधा उपलब्ध करवायी गयी है। ऑनलाइन गेटवे के माध्यम से शुरू की गयी भुगतान प्रक्रिया को पायलेट रूप में भोपाल जिले से शुरू किया गया है। अपर मुख्य सचिव श्रम श्री बी.आर. नायडू ने बताया कि गेटवे के माध्यम से फरवरी माह से भोपाल जिले में उपकर का भुगतान ऑनलाइन किया गया है। एक माह बाद मार्च माह से पूरे प्रदेश में उपकर भुगतान की सुविधा ऑनलाइन दी जायेगी। विशेष परिस्थितियों में, जिनमें ऑफलाइन भुगतान किया जाना जरूरी हो, 31 मार्च, 2017 तक ऑफलाइन उपकर संग्रहण भी मान्य किया जायेगा। एक अप्रैल, 2017 से उपकर का संग्रहण ऑनलाइन ही होगा। मध्यप्रदेश भवन एवं संन्निर्माण कर्मकार मण्डल द्वारा निर्माण कार्यों की कुल लागत का एक प्रतिशत उपकर लिया जाता है। वर्तमान में उपकर की राशि चेक, डी.डी. के माध्यम से दी जा रही है। इस प्रक्रिया को विभाग द्वारा अब डिजिटल बनाया गया है। उपभोक्ता, श्रम विभाग के पोर्टल www.labour.mp.gov.in पर प्रदर्शित लिंक से पोर्टल पर जाकर उपकर जमा कर सकते हैं। उपकर जमा करने की ऑनलाइन पूरी प्रक्रिया को आसान तरीके से समझने का विवरण हेल्प-डेस्क पर दिया गया है। उपभोक्ता इसकी भी मदद ले सकते हैं।  

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 MadhyaBharat  14 February 2017

 सिंचाई

अधिकतम बिजली की माँग के बावजूद प्रदेश के कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिये 10 घंटे और घरेलू व्यावसायिक व औद्योगिक उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित की गई है। प्रदेश में वर्तमान रबी सीजन में 33 दिन बिजली की माँग 11 हजार मेगावाट से ऊपर बनी रही। सर्वोच्च स्तर से कम होने के बाद भी पिछले एक पखवाड़े से बिजली की माँग अभी भी 10 हजार 500 मेगावाट से ऊपर चल रही हैं जिसकी पूर्ति बराबर की जा रही है। रबी सीजन में अभी तक कुल 51 दिन 10 हजार मेगावाट एवं 33 दिन 11 हजार मेगावाट के ऊपर बिजली की माँग बनी रही और इस माँग की सफलतापूर्वक सप्लाई की जा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 33 दिनों में से 20 दिनों तक लगातार 11 हजार मेगावाट या इससे ऊपर बिजली की माँग बनी रही।  

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 MadhyaBharat  11 February 2017

कैथोलिक बिशप सम्मेलन

कैथोलिक बिशप सम्मेलन में मुख्यमंत्री चौहान मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि स्नेह और प्रेम मानवता के मूल हैं। एक दूसरे को सुखी बनाने का प्रयास करते हुए, प्रेम का साम्राज्य कायम करें। श्री चौहान यहाँ कैथौलिक बिशप सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आनंद की अनुभूति जीवन का आधार है। धन-दौलत, पद-प्रतिष्ठा आनंद के आधार नहीं है। दूसरे का दु:ख दूर कर, प्यासे को पानी पिलाकर और निरक्षर को साक्षर बनाकर आनंद मिलता है। इसलिये राज्य सरकार ने आनंदम कार्यक्रम शुरू किया है। आवश्यकता से अधिक जो वस्तुएँ हैं, उन्हें वहाँ रखा जा सकता है। जरूरतमंद उसे वहाँ से प्राप्त कर लेते हैं। इससे दान देने और जरूरत पूरी होने का पारस्परिक आनंद मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार का क्षेत्र चेतना के विस्तार पर आधारित है। भारतीय संस्कृति में समस्त प्राणियों को एक परिवार माना गया है। नदियाँ, पर्वत भी हमारा परिवार है। नदियाँ रहेंगी, तो संस्कृति रहेगी। इसी भाव से नर्मदा नदी संरक्षण का जन अभियान प्रदेश में संचालित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की धरती पर पैदा होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भूमि-स्वामी कानून बनाया जा रहा है। धन के अभाव में प्रतिभा की प्रगति रूके नहीं, इसके लिए प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों की फीस राज्य सरकार भरवायेगी, ऐसी योजना बनाई है। गरीबों को एक रूपये किलो गेहूँ, चावल और नमक भी उपलब्ध करवाया गया है। आर्क बिशप मुम्बई, श्री ओसवाल्ड ग्रेसियस ने सम्मेलन की रूपरेखा बताई। 29वें सम्मेलन में 130 बिशप शामिल हुए हैं। सम्मेलन में परिवारों में आनंद का विस्तार पर चिंतन किया जा रहा है। यह चिंतन कैथोलिक परिवारों के साथ ही संपूर्ण समाज की उन्नति में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश देश का शांतिपूर्ण प्रदेश बना है। प्रदेश में बहुत विकास हुआ है। उन्होंने प्रदेश के तेजी से शांति और विकास पथ पर अग्रसर होने की शुभकामनाएँ दी। भोपाल के आर्क बिशप श्री लियो कार्नेलियो ने स्वागत उदबोधन दिया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा मानव सेवा धर्म के बखूबी पालन करने की सराहना की। गरीब कल्याण की विभिन्न योजनाओं का सफलता संचालन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वे नर्मदा नदी संरक्षण के लिए शुरू की गई यात्रा में शामिल हुए थे। यात्रा के स्वरूप और सरोकारों से वे अत्यधिक प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल आर्कडियोसिस की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री का शॉल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। सेंट जोसफ कान्वेंट की छात्राओं ने प्रार्थना नृत्य की प्रस्तुति दी।  

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 MadhyaBharat  6 February 2017

मिल बाँचे म.प्र.

मुख्यमंत्री  चौहान ने वीडियो कान्फ्रेंस में दिए निर्देश  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कड़े स्पष्ट में कहा है कि अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में कठोरतम कार्रवाई करें। उन्होंने विगत दिनों अवैध गतिविधियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने वाले जिला अधिकारियों को बधाई दी और अन्य जिलों को आगाह किया कि वे भी पूरी ताकत से अवैध उत्खनन और परिवहन के विरूद्ध कड़ी और निर्णायक कार्रवाई करें। माफिया पनपने नहीं पायें। श्री चौहान आज यहाँ मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंस में प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। बैठक में मिल बाँचे मध्यप्रदेश और नर्मदा सेवा यात्रा की भी समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह और मंत्रि-परिषद के सदस्य उपस्थित थे। टास्कफोर्स सुनियोजित कार्रवाई करें मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अवैध उत्खनन और परिवहन की रोकथाम के लिए हर जिले में माईनिंग टास्क फोर्स गठित है। फोर्स द्वारा सुनियोजित रणनीति बनाकर विधि-सम्मत कठोरतम कार्रवाई हर स्तर पर की जाये। अवैध उत्खनन एवं परिवहन में लिप्त वाहनों को राजसात किया जाये। उन्होंने कहा कि माइनिंग विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन और रोजगार का स्त्रोत है। इसलिये यह भी जरूरी है कि वैध उत्खनन और परिवहन कार्य में बाधा भी नहीं आये। वैधानिक उत्खनन करने वाले परेशान नहीं हो। उन्होंने प्रदेश में गुंडा विरोधी अभियान चलाने के भी निर्देश दिए। विद्यालयवार पंजीयन कार्य 10 फरवरी तक पूर्ण हों मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शिक्षा के लोक व्यापीकरण प्रयासों को जन-आंदोलन बनाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि आठवीं तक के छात्र-छात्राओं के भाषाज्ञान को बेहतर बनाने के लिए मिल बाँचे म.प्र. कार्यक्रम 18 फरवरी को किया जा रहा है। इस दिन प्रदेश के सभी एक लाख 18 हजार विद्यालयों में समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधि जायें। उन्होंने विद्यालयवार व्यक्तियों का पंजीयन कार्य 10 फरवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। पंजीयन कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण करने पर मंडला जिले को बधाई दी। उन्होंने प्रदेश अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को कार्यक्रम में शामिल होने के निर्देश दिये। नर्मदा जयंती का प्रभावी आयोजन हो मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा जयंती, नमामि देवी नर्मदे यात्रा के संकल्प पालन की परीक्षा है। जयंती के आयोजन नदी संरक्षण और प्रदूषणमुक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बने। नर्मदा महिमा, संरक्षण, बेटी बचाओ, वृक्षारोपण और नशामुक्ति पर भजन, निबंध, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताओं का नर्मदा तट पर आयोजन किया जाये। भजन प्रतियोगिता में प्रथम आने वाली मंडली को 50, द्वितीय को 30 और तृतीय को 20 हजार रूपये के पुरस्कार दिये जायें। भाषण, निबंध, चित्रकला आदि प्रतियोगिता के प्रथम को 5, द्वितीय को 3 और तृतीय को 2 हजार रूपए के पुरस्कार दिये जायेंगे। उन्होंने नर्मदा नदी से लाभान्वित होने वाले जिलों को भी उप यात्राएँ निकलवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जयंती के आयोजनों में स्वच्छता और प्रदूषणरहित व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाये। पूजन सामग्री कुंड में विसर्जित की जाये। आवश्यकता अनुसार कुंड बन जाये। पूजन सामग्री में प्रदूषण करने वाली वस्तुएँ शामिल नहीं हो। घाट स्वच्छ रहें। प्लास्टिक के दियों का उपयोग नहीं होना चाहिये। कचरा पेटी और शौचालयों की समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने यात्रा के संकल्पों के सतत् अनुपालन के निर्देश दिए।

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 MadhyaBharat  31 January 2017

green builiding

    मध्यप्रदेश गृह निर्माण मण्डल की योजनाओं में पर्यावरणीय संवेदनशीलता और नैसर्गिक वातावरण को समाहित करने के लिये मण्डल और ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हेबिटेट एसेसमेंट (ग्रीहा) के मध्य करारनामा हुआ। इस मौके पर अध्यक्ष श्री कृष्ण मुरारी मोघे और आयुक्त श्री नीतेश व्यास उपस्थित थे। अध्यक्ष  कृष्ण मुरारी मोघे ने कहा कि मण्डल की योजनाओं में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को अपनाने से आम उपभोक्ताओं को इस करारनामे से लाभ पहुँचेगा। ग्रीहा (GRIHA) काउंसिल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय सेठ ने योजना का प्रेजेंटेशन दिया। उल्लेखनीय है कि ग्रीहा GRIHA काउंसिल भारत सरकार के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा TERI द्वारा प्रवर्तित संस्थान है। ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को मण्डल की योजनाओं में अपनाने के लिये संचालक मण्डल की पिछली बैठक में संकल्प पारित किया गया था। करारनामे के बाद अब मण्डल की महत्वपूर्ण आवासीय परियोजनाओं और राज्य शासन के लिये बनायी जाने वाली योजनाओं में ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट को अपनाया जायेगा।

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 MadhyaBharat  14 January 2017

rajmarg

मुख्यमंत्री ने औपचारिकताएँ पूरी करने के दिये निर्देश   मध्यप्रदेश में 2021 किलोमीटर लंबे सात नए मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ मंत्रालय में नए राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल करने के लिये बुलाई गई उच्च-स्तरीय बैठक में नये प्रस्तावों पर केन्द्र से अपेक्षित औपचारिकताएँ पूरी करने के निर्देश दिये। श्री चौहान ने कहा कि नए राष्ट्रीय राजमार्गों के जुड़ने से विकास में गति आयेगी। प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्गों में 264 किमी चापड़ा से निमडी (देवास से झाबुआ), 376 किमी छिंदवाड़ा से खिमलासा, 529 किमी सागर से बरगवाँ, 289 किमी जबलपुर से कालिंजर – (उप्र सीमा,) 249 किमी कुक्षी से जावरा, 205 किमी चाबी से जयसिंहनगर और 195 किमी डबरा से गोरस शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 20 पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग हैं जिनकी कुल लंबाई 4771 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण के लिए 1640 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह,  प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री प्रमोद अग्रवाल,  प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री अशोक वर्णवाल, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री मनीष रस्तोगी, सचिव मुख्यमंत्री श्री हरिरंजन राव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  14 January 2017

  इंदौर मुख्य द्वार

राजेन्द्र  शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश का निवेश के मामले में इंदौर मुख्य द्वार है। उद्योगपति इंदौर और उसके आसपास उद्योग लगाने के इच्छुक रहते हैं। मध्यप्रदेश के अन्य स्थानों पर भी औद्योगिक निवेश के लिये अनुकूल माहौल है। राज्य सरकार ने प्राथमिकता के साथ निवेशकों के लिये अनेक सुविधाएँ दी हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ''मेक इन इंडिया'' मिशन को पूरा करने के लिये ही 'मेड इन एमपी'' भी प्रारंभ किया गया है। उद्योग मंत्री श्री शुक्ल आज इन्दौर में औद्योगिक इंजीनियरिंग एक्सपो-2017 का शुभारंभ कर रहे थे। महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ भी मौजूद थी। श्री शुक्ल ने कहा कि जीआईएस-2016 में भी 5 लाख करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनके जरिये 2500 से अधिक उद्योगपति ने मध्यप्रदेश में निवेश करने की इच्छा जतायी है। उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में एक लाख बीस हजार हेक्टेयर का लैण्ड बैंक है। इसमें से 40 हजार हेक्टेयर विकसित लैण्ड बैंक है। प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिये आकर्षक छूट एवं पर्याप्त सुविधाएँ दी जा रही हैं। प्रारंभिक तौर पर उद्योग निवेश होने पर विद्युत, करों एवं आधारभूत संरचना के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। इंदौर के आसपास और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिये निरंतर प्रयास जारी है। अहमदाबाद-मुंबई रोड पर 350 करोड़ की लागत से 1200 एकड़ जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिये विकसित की जा रही है। उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी देश, प्रदेश और समाज की उन्नति के लिये तीन क्रांति महत्वपूर्ण स्थान रखती है, जिनमें कृषि, पर्यटन और उद्योग हैं। मध्यप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप लगातार चार वर्ष से प्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के लगातार प्रयासों से कृषि सिंचाई रकबा 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर तक हो गया है। घरों एवं उद्योगों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवायी जा रही है। प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य किया गया है। रीवा में देश की पहली टाइगर सफारी, खण्डवा में पर्यटन स्थल हनुवंतिया टापू का विकास, खजुराहो, ग्वालियर, माण्डू जैसी प्रदेश की हमारी ऐतिहासिक धरोहर से पर्यटन में विगत 10 वर्ष में कई गुना वृद्धि हुई है। देश में पर्यटन के क्षेत्र में लगातार पुरस्कार मिलना इसका प्रमाण है।    

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 MadhyaBharat  6 January 2017

शिवराज सिंह चौहान  नरेन्द्र मोदी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा किसान, गरीब, छोटे कारोबारियों, गर्भवती माताओं और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिये की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए इन्हें परिवर्तनकारी बताया है। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम दिये संदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इन वर्गों को राहत देकर संवेदनशीलता और प्रगतिशील सोच का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में घर बनाने के लिये 9 लाख रुपये तक के कर्ज पर ब्याज में 4 प्रतिशत तथा 12 लाख के कर्ज पर 3 प्रतिशत की छूट देने से आवासहीन परिवारों को मदद मिलेगी। छोटे कारोबारियों की क्रेडिट गारंटी एक से बढ़ाकर दो करोड़ करने से सूक्ष्म और लघु उद्योग क्षेत्र में आशातीत विस्तार होगा। श्री चौहान ने कहा कि किसानों द्वारा लिये गये खरीफ और रबी के कर्ज पर 60 दिन का ब्याज केन्द्र सरकार द्वारा वहन करने का फैसला किसानों के व्यापक हित में है। इसी प्रकार गर्भवती माताओं को 6 हजार रुपये की सहायता राशि देने से उनमें आत्मविश्वास आयेगा। वरिष्ठ नागरिकों द्वारा बैंक डिपॉजिट करने पर 8 प्रतिशत ब्याज देने की घोषणा भविष्योन्मुखी है। उन्होंने कहा कि ये घोषणाएँ देश का कायाकल्प करने के मिशन को आगे बढ़ायेंगी। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत के नव-निर्माण का संकल्प लिया है। इस संकल्प को राज्य सरकार अन्य राज्यों के सहयोग से सफल बनायेगी।

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 MadhyaBharat  1 January 2017

shivraj singh pitai

  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इमरजेंसी के दौरान अपने साथ हुई पुलिस मारपीट का खुलासा किया तो जमकर ठहाके लगे । इंदौर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए शिवराज सिंह ने अपनी पुलिस पिटाई का खुलासा किया।  मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि इमरजेंसी के दौरान भोपाल की हबीबगंज पुलिस ने उन्हें लॉकअप में बंद करके रातभर पीटा था। हालांकि उस पिटाई और जेल जाने के बाद वे ऐसे मामलों में पूरी तरह ट्रेंड हो गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि, हम लोग विद्यार्थी परिषद के चुनाव में कॉलेज में लड़वाने के लिए पहलवान लेकर जाते थे। तब जाकर कांग्रेस से मुकाबला कर पाए। शिवराज ने खुलासा किया कि ABVP का काम करते हुए संगठन मंत्री के नाते स्वयंसेवकों के घर जाकर भोजन करना पड़ता था। ऐसे में मराठी परिवारों में रोटी मांगने में बड़ा संकोच होता था। मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह़्वान किया है कि वे जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये आगे आएं और समाज और सरकार के कार्य में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए देश का सबसे बड़ा महा-अभियान 'नमामि देवी नर्मदे''-सेवा यात्रा राज्य सरकार ने शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए प्रदेश की जीवन-रेखा नर्मदा नदी के पानी को न केवल शुद्ध बनाया जाएगा, बल्कि इसके संरक्षण के लिए तटों के दोनों ओर पौधे भी लगाए जाएंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। चौहान ने कहा कि यह अभियान धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक अभियान है। इसके सफल होने से प्राकृतिक आपदाओं से बचने के साथ ही लोगों के जीवन और पर्यावरण में सुधार आएगा। चौहान ने कहा कि अच्छे संगठन में काम करने से नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। साथ ही जीवन में नियोजन, शुचिता और अनुशासन सीखने को मिलता है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि संघर्ष से जीवन में बहुत कुछ सीखा जा सकता है। कार्यक्रम के अध्यक्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र की अनुभूति से समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज जो नेतृत्व देश को मिला है, उससे विश्व में मान-सम्मान और आदर बढ़ा है। कार्यक्रम को सुनील आम्बेकर और शशिरंजन अकेला ने भी संबोधित किया।  

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 MadhyaBharat  27 December 2016

opration

      जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए कई अभियान चलाने के बाद भी प्रदेश के 25 जिलों में प्रजनर दर 3 से ज्यादा है। यानी, एक दपंती औसतन 3 से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। लिहाजा अब इन जिलों में बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार ने मिलकर विशेष रणनीति बनाई है। परिवार कल्याण कार्यक्रम को बढ़ाने के लिए पुरुष नसंबदी पर प्रोत्साहन राशि 2 हजार रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए दी जाएगी। प्रसव के तुरंत बाद महिला नसबंदी कराने पर अभी 2200 रुपए मिलते हैं, इसे बढ़ाकर 3000 रुपए किया जा रहा है। इसी तरह से प्रसव के सात दिन के बाद महिला नसबंदी कराने पर पहले 1400 रुपए मिलते थे अब 2000 रुपए मिलेंगे। निजी संस्थाओं में पुरुष नसबंदी पर 2500, महिला नसबंदी पर 2500 और प्रसव के तुरंत बाद महिला नसबंदी पर 3000 रुपए मिलेंगें। इसके अलावा प्रेरक, सर्जन आदि की प्रोत्साहन राशि भी बढ़ाई गई है। नसबंदी ऑपरेशन में सास अड़ंगा न लगा सकें, इसलिए स्वास्थ्य विभाग सास-बहू सम्मेलन कराएगा। इसमें महिला की सास को बुलाकर काउंसलिंग की जाएगी। प्रचार के लिए सारथी रथ पूरे प्रदेश में चलेगा। पन्ना, शिवपुरी, बड़वानी, विदिशा, छतरपुर, सतना, दमोह, सीहोर, डिंडौरी, गुना, रायसेन, रीवा, सीधी, उमरिया, सागर कटनी, शाजापुर, टीकमगढ़, नरसिंहपुर, राजगढ़, रतलाम, खरगौन, खंडवा, मुरैना और शिवनी। स्वास्थ्य विभाग ने इस साल पूरे प्रदेश में साढ़े 5 लाख नसबंदी का लक्ष्य रखा है, लेकिन अप्रैल से अभी तक सिर्फ डेढ़ लाख नसबंदी हो पाई हैं। पिछले साल इस अविधि में 10 ऑपरेशन ज्यादा हो गए थे। 3 से अधिक सकल प्रजनन दर वाले 25 जिलों को हाई फोकस घोषित किया गया है। यहां आबादी रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आएगी। डॉ. बीएस ओहरी, संचालक परिवार कल्याण  

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 MadhyaBharat  16 December 2016

anand prakesh rane

    लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम ने शनिवार अल सुबह लोक निर्माण विभाग, पीआईयू इंदौर में कार्यपालन यंत्री आनंद प्रकाश राणे के घर सहित अन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। राणे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जमा करने की शिकायत मिली थी।लोकायुक्त पुलिस की अलग-अलग टीमों ने अधिकारी के एबी रोड स्थित शहनाई रेसीडेंसी के फ्लैट और उनके भाई विजय प्रकाश राणे के बालाजी हाईट्स महालक्ष्मी नगर स्थित मकान पर कार्रवाई की। जांच के दौरान अधिकारी के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है। कार्रवाई के दौरान राणे और उनके भाई के घर से ग्वालियर में आदित्य प्लाजा और मोहननगर में दो मकान। भोपाल के चूनाभट्टी सीआई इनक्लेव और कोलार  के कम्फर्ट कॉलोनी में दो मकान। इंदौर की शहनाई रेसीडेंसी में दो फ्लैट, वहीं विजयनगर की स्कीम 114 में मां विमला राणे और पत्नी अनिता राणे के नाम एक-एक प्लाट। भाई के नाम लक्जरी कार, बेटे के नाम एक बाइक। इसके साथ ही बीसीएम हाईट्स इंदौर में एक फ्लैट के कागजात भी मिले हैं। जानकारी के मुताबिक आनंद प्रकाश राणे 21 जुलाई 1992 को सहायक यंत्री के पद पर पदस्थ हुए थे। इस दौरान उनकी पोस्टिंग ग्वालियर, देवास, धार और इंदौर में हुई। इनके पिता जनवेद सिंह वन विभाग से वनपाल के पद से करीब वर्ष 1999 में सेवानिवृत्त हुए हैं, जो कि ग्वालियर के रहने वाले थे। अनावेदक की पत्नी का नाम अनीता राणे है, जो गृहणी हैं। राणे का एक पुत्र अमित राणे है, जो इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से बी.कॉम फस्ट ईयर में पढ़ रहा है और दूसरा पुत्र रोहित राणे है, जो इंदौर के ग्रीन पब्लिक स्कूल में कक्षा 12वीं का छात्र है।

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 MadhyaBharat  3 December 2016

ramnaresh yadav

  मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव का मंगलवार को गृह राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया। राजभवन सूत्रों ने बताया कि यादव का लखनऊ के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। सुबह लगभग नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 89 वर्ष के थे। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री पद समेत अनेक महत्वपूर्ण दायित्व संभाल चुके यादव कुछ समय पहले ही मध्य प्रदेश के राज्यपाल के तौर पर पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करके यहां से लखनऊ के लिए रवाना हुए थे। मध्य प्रदेश के राज्यपाल ओपी कोहली ,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने यादव के निधन पर शोक जताते हुए उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की है। कोहली ने अपने शोक संदेश में यादव के सुदीर्घ राजनैतिक जीवन के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जन और समाज सेवा में अपना जीवन व्यतीत किया। ये था।  जुलाई 1928 में यूपी के आजमगढ़ में जन्मे राम नरेश को पॉलिटिक्‍स का बड़ा खिलाड़ी माना जाता था। राम नरेश पहली बार चौधरी चरण सिंह की मदद से 1977 में जनता पार्टी के सीएम बने थे। वे किसानों की आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे।उनको राजनीतिक माहौल घर से ही मिला था,क्योंकि उनके पिता गया प्रसाद महात्मा गांधी,पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ.राममनोहर लोहिया के अनुयायी थे। उन्‍होंने बीएचयू से बीए,एमए और एलएलबी की पढ़ाई की और यहीं छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे। इसके बाद कुछ समय के लिए वे जौनपुर के पट्टी स्थित नरेंंद्रपुर इंटर कॉलेज में प्रवक्ता भी रहे। 1953 में उन्‍होंने आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की।रामनरेश ने समाजवादी विचारधारा के तहत विशेष रूप से जाति तोड़ो,विशेष अवसर के सिद्धांत,बढ़े नहर रेट,किसानों की लगान माफी,समान शिक्षा,आमदनी और खर्च की सीमा बांधने,वास्तविक रूप से जमीन जोतने वालों को उनका अधिकार दिलाने,अंग्रेजी हटाओ आदि आंदोलनों को लेकर कई बार गिरफ्तारियां दीं।  इमरजेंसी के दौरान वे मीसा और डीआईआर के अधीन जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल और केंद्रीय कारागार नैनी,इलाहाबाद में बंद रहे।रामनरेश 1988 में राज्यसभा सदस्य बने और 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अंदर डिप्टी लीडरशिप,पार्टी के महामंत्री और अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ली।लखनऊ स्थित अंबेडकर यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनि‍वर्सिटी का दर्जा दिलाने में भी उनका अहम योगदान था। इसी साल अगस्‍त महीने में रामनरेश यादव की पहली किताब'मेरी कहानी'सामने आई थी।इस किताब में उन्‍होंने कांग्रेस में आने,सीएम बनने और यूपी में उनके सीएम रहते समय हुए सांप्रदायिक दंगों को सुलझाने के घटनाक्रम के बारे में बताया था। हालांकि,इसमें उन्‍होंने मप्र के गवर्नर रहते हुए उनके दामन पर आए व्यापमं के छींटों का किताब में कोई जिक्र नहीं किया था। रामनरेश यादव 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 तक यूपी के सीएम रहे।जून 2014 से 19 जुलाई 2014 तक छतीसगढ़ के गवर्नर रहे 26 अगस्‍त 2011 से 7 सितंबर 2016 तक मध्‍य प्रदेश के गवर्नर रहे।  पिछले साल बेटे की भी हुई थी मौत पिछले साल व्यापमं घोटाले में आरोपी रामनरेश के बेटे शैलेष(52)की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम करने वाली टीम ने उनकी मौत का कारण जहर बताया था। वहीं,परिवार का कहना था कि शैलेष को ब्रेन हेमरेज हुआ था। बताया जाता है कि शैलेष इस बात से डरे थे कि उनकी प्रॉपर्टी कुर्क की जा सकती है।शैलेष को आरोपी बनाने के बाद एसटीएफ की टीमें डेढ़ महीने में तीन बार यूपी आई थीं। दो बार लखनऊ और एक बार आजमगढ़। शैलेष के बड़े भाई कमलेश का कहना था कि शैलेष व्यापमं मामले में आरोपी बनाए जाने से मानसिक दबाव में थे।  1977 में यूपी के सीएम रहे रामनरेश यादव आजमगढ़ के रहने वाले थे। बड़े बेटे कमलेश ने विधानसभा चुनाव लड़ा था,लेकिन हार गए थे। शैलेष पिता की राजनीतिक गतिविधियों से दूर थे। उनका अपना बिजनेस था। सबसे छोटा बेटा अजय कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में है।            

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 MadhyaBharat  22 November 2016

कानपुर ट्रेन हादसा : मध्यप्रदेश के कई लोग हैं मृतकों और घायलों में

उत्‍तर प्रदेश के कानपुर में पुखरायं में इंदौर-पटना ट्रेन के पटरी से उतर जाने के बाद इस भीषण हादसे में अब तक 91 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है वहीं 150 से ज्‍यादा लोग घायल हैं। घायलों को पास के अस्‍पतालों में इलाज जारी है। इंदौर से रवाना हुई इस ट्रेन में बड़ी संख्‍या में मध्‍य प्रदेश के यात्री सवार थे।मारने वालों की संख्या में और इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।    हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है वहीं इस बीच दुर्घटना में मारे गए और घायल लोगों की पहली लिस्‍ट सामने आई है। इस लिस्‍ट में इंदौर और उज्‍जैन के लोग भी शामिल हैं। जिला अस्‍पताल द्वारा जारी की गई इस लिस्‍ट में देवास के चंदेल परिवार के अलावा इंदौर के मिश्रा और गुजराती परिवार के लोग शामिल हैं जो घायल हैं। वहीं मृतकों में से फिलहाल 7 की पहचान हो पाई है।   मृतकों के नाम   पातीराम पिता महिपाल 19 वर्ष निवासी महानंदा नगर उज्जैन,बृजमोहन पिता मनोहर लाल 40 वर्ष निवासी स्‍नेहलता गंज इंदौर, भन्‍ती देवी शिवपूजन सिंह निवासी सेंट्रल कोतवाली इंदौर,जिवितेश कुमार निवासी अवधपुरी भोपाल,रामेश्‍वर प्रजापति निवासी तोपेवाला मोहल्‍ला ग्‍वालियर, असलम पिता रफीक खान निवासी शाजापुर,उमाशंकर पिता कल्‍लू चंदौली,रत्निका पति सुबोध सिंह निवासी गौतमबुद्धनगर, सिवान, घायल धर्मेंद्र श्‍यामसिंह चंदेल 45 साल देवास,रेखा चंदेल 45 साल देवास,मीरा चंदेल 45 साल- देवास,आकांक्षा धर्मेंद्र चंदेल 9 वर्ष - देवास,अनिकेत धर्मेंद्र सिंह 8 साल - देवास,प्रतिभा रितेश सोनी - इंदौर,नीता जगमोहन गुजराती 50 साल- इंदौर,मालती गुजरात 62 साल - इंदौर,महेश गंगाराम कुशवाह 36- इंदौर,नेहा सतेंद्र सिंह 25 साल - इंदौर,एपी शाह पिता पुरषोत्‍तम शाह 58 साल उज्‍जैन,कुसुमसिंह संजय‍ सिंह 40 साल- भोपाल,पूजा अनिल 36 साल- इंदौर,बबीता सं‍दीप मिश्रा 28 साल- इंदौर ,सोनम संदीप मिश्रा 13 साल- इंदौर,प्‍यारेलाल महाराज सिंह 52 साल इंदौर,ज्योति पुत्री सती प्रसाद (21) कानपुर,राजू पुत्र मेवालाल (31) अंबेडकरनगर,बजरंगी प्रताप राजा पुत्र रामदेव आजमगढ़,आकिब पिता असलम (24) फिरोजाबाद,राजकुमार पुत्र दयापाल (55) फतेहपुर यूपी,नवीन कुमार तिवारी पुत्र नागेंद्र कुमार तिवारी (55) निवासी पालामऊ झारखंड,प्रकाश कुमार पुत्र वीरेंद्र प्रकाश (22) निवासी पटना,रेखा देवी पत्नी प्रमोद कुमार (45) निवासी पटना,परशुराम पुत्र मोहनराम (42) बलिया,मुकेश कुमार पुत्र मुन्ना लाल (45) बलिया, यूपी।रितिका श्रीवास्तव पुत्री एसके श्रीवास्तव (19) लाखनऊ,मदन राम पुत्र अजीत राम (62) पटना, बिहार,मोनू विश्वकर्मा पुत्र जयराम विश्वकर्मा (25) अंबेडकरनगर,वजीर आलम पुत्र वसीर अंसारी (35) मोतिहारी,दीपक पुत्र मार्केंडेय (20) आजमगढ़ किरवा,रजत सिंह पुत्र तेजप्रताप (23) फैजाबाद,प्रमोद पुत्र शिवशंकर (45) महाराजगंज पटना,राजकुमार पुत्र गोविंद सिंह (37) मुज्जफरनगर,प्रवीण चंद्र पुत्र रूद्र नाथ (32) संतकबीरनगर,अभय श्रीवास्तव पुत्र संजय श्रीवास्तव (3) फूलपुर इलाहाबाद,फूलादेवी पत्नी हरीलाल (70) पटना, बिहार,प्रेमकुमार पुत्र कालूराम (54) झांसी,ज्योति यादव पत्नी लालन सिंह (24) झांसी,जयप्रकाश पुत्र भुलनराम (30) मैनपुरी,सुनील पुत्र बीएल दाम (46) पटना बिहार,मालती शर्मा पत्नी दयाराम शर्मा (45) बिहार,रामपुजारी पुत्र जयराम (36) सुल्तानपुर,अशि पुत्री कुमार आनंद (13) पटना,संजय यादव (09) जितेंद्र सिंह पुत्र हरीनारायण (60) आजमगढ़,रविंद्र पंडित पुत्र उपलाल पंडित (35) पटना,ज्ञान प्रकाश पंडित पुत्र श्यामलाल (36) इलाहाबाद,अनुराग पुत्र भुवनेश्वर (30) लखनऊ,आदि पुत्र वाशुनाथ नंदी वाराणसी (23),उत्तम कुमार पुत्र सतीश कुमार (24) बिहार,जीवन लाल पुत्र रामदत्त (71) देवकला बहराइच,अशोक कुमार पुत्र यदुवेंद्र (48) पटना,रामू पुत्र दामू चकर (40) पटना बिहार,अरूण शर्मा पुत्र डीसी (40) गोपालनगर,अहिरनाक सिंह पुत्र शारदा (60) रायबरेली,प्रीति सिंह पत्नी कुमार आनंद (64),मो.इस्लाम अंसारी पुत्र मो.जमील (19) अदलपुर,श्याम दत्त पुत्र अच्छे लाल (74) आलमपुर,मलवा रिंकी पत्नी रामेश्वर प्रजापति (30) ग्वालियर,संजीत कुमार पुत्र सत्यनारायण (26) पटना।  

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 MadhyaBharat  20 November 2016

kaelash vijayvargiy

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और महू विधायक कैलाश विजयवर्गीय को  हाई कोर्ट में उपस्थित होकर चुनाव याचिका में बयान देना थे, लेकिन वे नहीं आए। उनकी ओर से आवेदन देकर कहा गया कि उन्हें संसद सत्र में शामिल होना है इसलिए एक महीने का समय दिया जाए। आवेदन खारिज करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि वे 25 नवंबर को अनिवार्य रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर बयान दर्ज कराएं। ऐसा नहीं किया तो कोर्ट उनका सुनवाई का अधिकार समाप्त कर सकती है। विजयवर्गीय के खिलाफ यह चुनाव याचिका अंतरसिंह दरबार ने दायर की है। उनकी ओर से पैरवी एडवोकेट रविंद्रसिंह छाबड़ा और विभोर खंडेलवाल कर रहे हैं। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से गवाही पूरी हो चुकी है। अब विजयवर्गीय के बयान होना है। पिछली सुनवाई पर भी वे अनुपस्थित रहे थे। याचिका में विजयवर्गीय पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान आचार संहिता का उलंघन किया है। उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाए। याचिकाकर्ता ने अपने समर्थन में दो दर्जन से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं। पिछली सुनवाई पर विजयवर्गीय ने आवेदन देकर दो महीने का समय मांगा था। कहा था कि यूपी चुनाव में व्यस्त रहेंगे कि वजह से वे कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सकेंगे। कोर्ट ने आवेदन खारिज करते हुए गुरुवार की सुनवाई तय की थी। विजयवर्गीय ने गुरुवार आवेदन देकर संसद सत्र में शामिल होने के नाम पर एक महीने का समय मांगा था। याचिकाकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि दोनों आवेदन में विरोधाभासी बातें हैं। कभी चुनाव में व्यस्तता के नाम पर तो कभी संसद सत्र में शामिल होने के नाम पर समय मांगा जा रहा है। कोर्ट ने विजयवर्गीय को 25 नवंबर को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए। विजयवर्गीय के अनुपस्थिति रहने की वजह से कोर्ट अगली सुनवाई पर उनकी ओर से साक्ष्य समाप्त कर सकती है। ऐसा होता है तो विजयवर्गीय इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव याचिका की सुनवाई लंबित होगी और इसका फायदा विजयवर्गीय को मिलेगा।  

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 MadhyaBharat  18 November 2016

डॉलर सा लगा 2000 का नोट

   500 और 1000 रुपए के नोटों पर बैन के बाद गुरुवार से नए नोट मिलने शुरू हो गए। सभी को दो हजार के नए नोट को लेकर उत्सुकता था। जिस-जिस शख्स को नोट मिला, सबसे पहले उसने नोट का निहारा। 2000 रुपए का नोट जिसके भी हाथ में आया तो कइयों मुंह से यही निकला कि यह नोट तो डॉलर जैसा दिखता है। वहीं कुछ लोगों को यह लॉटरी टिकट जैसा लग रहा है। मध्‍यप्रदेश के इंदौर में बैंको में लोग सुबह से ही 500 व 1000 के नोट लेकर पहुंचे। इंदौर के मालव स्थित आईसीआईसीआई बैंक में तो सेकड़ो लोग बैंक के खुलने के पहले ही पहुंच गए थे। लेकिन यहां जब प्रबंधन ने जब लोगो को 500 व 1000 के नोट बदलने के लिये दिए तो उन्हें 50 व 100 के कटे फटे पुराने नोट दिए गए।विजय नगर क्षेत्र में रहने वाले तनवीर पटेल ने विरोध किया। इसके बाद बैंक प्रबंधन से लोगों ने 2000 के नए नोट देने की मांग की। विरोध बढ़ते देख तनवीर पटेल की बात मान ली गई। उसे 2 हजार के 2 नोट दिए गए। तनवीर ने अपनी इस खुशी को सोशल मीडिया में यह शेयर भी किया है।  

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 MadhyaBharat  10 November 2016

madhyprdesh shivraj singh

इंदौर में दो दिवसी ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का समापन होने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्य सचिव अंटोनी डिसा आज अधिकारियों से चर्चा कर इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर लाने के लिए रणनीति को लेकर अधिकारियों से चर्चा की । समिट में आए प्रस्तावों का विश्लेषण कर यह तय किया जाएगा कि कौन से गंभीर निवेश प्रस्ताव है और इन प्रस्तावों के लिए रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में अधिकारियों की तैनाती करने से लेकर इसके फालोअप की रणनीति पर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव चर्चा करेंगे। इन्वेस्टर समिट में 2630 निवेशकों ने 5 लाख 62 हजार 847 करोड़ रुपए के प्रस्ताव  दिए है। इनमें से विभिन्न सेक्टरों में आए निवेश और बड़े उद्योगपतियों द्वारा दिए गए निवेश प्रस्तावों को लेकर मुख्य सचिव अंटोनी डिसा पहले उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान, एमएसएमई के प्रमुख सचिव वीएल कांताराव, नगरीय प्रशासन, राजस्व सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके बाद शाम पांच बजे मुख्यमंत्री निवेश प्रस्तावों को लेकर इन सभी विभागों के अधिकारियों और मुख्यसचिव के साथ चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री पहले बड़े निवेशकों आदित्य बिड़ला, अंबानी समूह, बाबा रामदेव सहित अन्य देशी-विदेशी निवेशकों द्वारा दिए गए निवेश प्रस्तावों का विश्लेषण अधिकारियों के साथ करेंगे। इसमें से बड़े निवेश प्रस्तावों पर पहले बात होगी। इन प्रस्तावों को धरातल पर लाने, निवेशकों को सिंगल विंडो पर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने, जमीन, पानी, बिजली, इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने को लेकर क्या रणनीति हो यह तय किया जाएगा। हर निवेशक के साथ एक-एक आईएएस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। रिलेशनशिप मैनेजर बनाए जाएंगे। निवेश प्रस्तावों को शुरु करने तक उनके अलग-अलग फालोअप किस तरह किया जाए, अधिकारियों की क्या भूमिका हो, विभिन्न विभागों से जुड़ी अनुमतियां देने के लिए विभागवार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। निवेशक को एक स्थान पर आवेदन करने पर सारी सुविधाएं कैसे मिले यह तय किया जाए। इस बार मुख्यमंत्री का फोकस जल्द से जल्द समयसीमा के भीतर इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में होगा। इंदौर में दो दिन चली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश में आए निवेश के प्रस्तावों को अमल में लाने के लिए मुख्यमंत्री चाहते है कि अगले साल मिशन मोड पर काम करना है। प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़े, निवेश ज्यादा हो ताकि प्रदेश का औद्योगिक विकास तेजी से हो इसलिए इन निवेश प्रस्तावों को जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।   डिसिप्लीन & कॉर्डिनेशन का पाठ पढ़ेंगे मंत्री, IAS-IPS एमपी  के 46 जिलों के कलेक्टर, एसपी, सीईओ जिला पंचायत,नौ संभागों के कमिश्नर और पंद्रह नगर निगम आयुक्तों की दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कांफे्रंस मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे से नर्मदा भवन में शुरु होगी। इसमें सभी मंत्रियों को भी बुलाया गया है। मंत्रियों के साथ अफसरों से मुख्यमंत्री कई सत्रों में चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और मुख्य सचिव अंटोनी डिसा उद्घाटन सत्र के बाद सबसे पहले अफसरों से से पूछेंगे कि आम जनता को नागरिक सेवाएं समय पर दी जा रही है या नहीं, इसमें क्या कठिनाई आ रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है। कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस की शुरुआत सुबह दस बजे उद्घाटन सत्र से होगी। सबसे पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कलेक्टर-कमिश्नरों से गुड गर्वनेंस को लेकर बात करेंगे। राज्य सरकार की प्राथमिकताएं, आमजनता की समस्याओं के निराकरण में अधिकारियों की क्या भूमिका हो, किस तरह से सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर आम लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। 2018 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए मिशन मोड पर डेढ़ साल तक क्या करना है और कैसे करना है इसकी रुपरेखा मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव रखेंगे। इसके बाद सुबह साढ़े दस बजे नगरीय कल्याण विभाग के तहत नागरिक केन्द्रित सेवाओं का समय पर प्रदाय किस तरह किया जाए, शहरी आवास योजनाएं कैसे बने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजक्ट स्वच्छ भारत मिशन, शहरी स्वच्छता मिशन को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अफसरों से वन-टू वन चर्चा करेंगे।  

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 MadhyaBharat  24 October 2016

sushma swaraj

समिट में 5 लाख 62 हजार 847 करोड़ रूपये के 2630 इन्टेंशन टू इन्वेस्ट  विदेश मंत्री  सुषमा स्वराज ने कहा है कि सतत प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज निवेश के लिये सबसे अधिक पसंदीदा राज्य बन गया है। श्रीमती स्वराज  इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2016 के समापन समारोह को संबोधित कर रही थी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने बताया कि इस समिट में 5 लाख 62 हजार 847 करोड़ रूपये के 2630 इन्टेंशन टू इन्वेस्ट मिले हैं। समिट में 42 देश के लगभग 4 हजार निवेशक ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि अगली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इंदौर में 16 और 17 फरवरी 2019 को होगी। श्रीमती स्वराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में बेहतर नेतृत्व और जन-केन्द्रित नीतियों से विकास हुआ है। प्रदेश की विकास दर लगातार 10 प्रतिशत से अधिक रही है। भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिये मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, क्लीन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टेण्डअप इंडिया और स्मार्ट सिटी जैसे कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। विश्व बैंक ने भारत को सबसे अधिक खुली अर्थ-व्यवस्था बताया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत को वर्ष 2016-17 के लिये विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थ-व्यवस्था बताया है। जीएसटी को 23 राज्य ने पारित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद 55.5 मिलियन डॉलर का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आया है, जो पिछले वर्ष की तुलना मे 53 प्रतिशत अधिक है। विदेश मंत्रालय ने ई-वीजा योजना लागू की है। राज्यों में विदेशी पूँजी निवेश को बढ़ावा देने के लिये अलग से स्टेट डिवीजन बनाया है। मध्यप्रदेश में विदेशी पूँजी निवेश में केन्द्रीय विदेश मंत्रालय पूरी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि 25 मिलियन अप्रवासी भारतीय भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं। उन्हें संवाद का मंच उपलब्ध कराने के लिये प्रवासी भारतीय दिवस 7 जनवरी 2017 को बैंगलुरु में आयोजित किया जायेगा। मध्यप्रदेश बन गया है 'मुख्य प्रदेश' – श्री नायडू केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री  वैंकैया नायडू ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को समर्पित, डायनामिक और अनुशासित मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ रहा है। श्री नायडू ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिये इस्तेमाल होने वाला बीमारू शब्द अब अतीत की बात हो गई। पिछले दस साल में मध्यप्रदेश, मुख्यप्रदेश बन गया है। उन्होंने कहा कि 18 हजार 900 मेगावाट बिजली उपलब्ध होना एक रिकार्ड है। अब सभी क्षेत्रों के लिये बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित है। कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। कृषि क्षेत्र में प्रगति का नया कीर्तिमान बना है। श्री नायडू ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशक के लिये अब आदर्श स्थल बन गया है। उन्होंने कहा कि शहरी अधोसंरचना अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुई है। इसमें मुख्यमंत्री का नेतृत्व सराहनीय है।  श्री चौहान ने कहा कि निवेशकों के उत्साह और निवेश करने के सकारात्मक दृष्टिकोण को देखते हुए मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास अवश्यंभावी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश का विकास हो रहा है। मध्यपदेश इसमें प्रमुख भूमिका निभाने के लिये तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सबके लिये आवास की सोच को मध्यप्रदेश पूरा करेगा। उन्होंने प्रतिभावान विद्यार्थियों की पढाई की फीस सरकार द्वारा भरने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल सम्पन्न जनशक्ति तैयार कर रहे हैं। स्वस्थ मध्यप्रदेश बनाने के लिये संकल्पित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने 20 हजार करोड रूपये के निवेश के एमओयू किये हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान केवल भोपाल गैस त्रासदी से होती थी अब बेहतर निवेश परिवेश के लिये होती है। श्री चौहान ने कहा कि निवेश का यह कारवां बढ़ता रहेगा। निवेशकों का भरोसा टूटने नहीं देंगे। मुख्यमंत्री ने उद्योगों और निवेशकों के हित में कई घोषणाएँ की। केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री गेहलोत केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री  थावरचंद गेहलोत ने कहा कि मध्यप्रदेश ने तेज गति से विकास किया है। मध्यप्रदेश में निवेश के लिये बेहतर वातावरण उपलब्ध है। निवेशक निर्यात बढ़ाने के लिये उत्पादक उद्योगों में निवेश करें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के लिये आवश्यक उपकरण जैसे मोटराईज्ड ट्रायसायकल, कृत्रिम हाथ-पैर, श्रवण यंत्र अभी विदेशों से बुलाये जाते हैं। इन उपकरणों के निर्माण के उद्योग देश में ही शुरू किये गये हैं। केन्द्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान केन्द्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले दस वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। प्रदेश में 20 प्रतिशत से अधिक की कृषि विकास दर का प्रभाव अर्थ-व्यवस्था पर भी हुआ है। ग्रामीणों की क्रय शक्ति बढ़ी है, जिसका प्रमाण पेट्रोलियम उत्पादों की खपत बढ़ना है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से पेट्रोलियम उत्पादों पर करों से होने वाली आय में राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। विश्व में हर वर्ष पेट्रोल की खपत दस प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। प्रदेश में पिछले दो वर्ष में 30 लाख घरेलू एलपीजी कनेक्शन बढ़े हैं। अगले दो वर्ष में 50 लाख घरेलू एलपीजी कनेक्शन बढ़ेंगे। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, ऑयल इंडिया, एनटीपीसी मिलकर प्रदेश में 500 मेगावॉट का सोलर पॉवर प्लांट स्थापित करेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा पेट्रो क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिये 1700 करोड़ रूपये निवेश किये जायेंगे। बीना में 500 करोड़ रूपये के निवेश से ग्रीन रिफायनरी स्थापित की जायेगी। पर्यावरण मंत्रालय से उद्योगों को मिलेगी अविलम्ब स्वीकृति – श्री दवे केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  अनिल माधव दवे ने कहा कि जंगल को भी उद्योग की नजरिये से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की वन संपदा अद्भुत और विशाल है। यहाँ घास और बाँस ऐसी उपज है जिनका औद्योगिक मूल्य है। उन्होंने कहा कि उद्योग को अनुसंधान पर भी ध्यान देना चाहिये ताकि देशज परिस्थितियों के हिसाब से पेटेंट उपलब्ध हो सके। श्री दवे ने कहा कि वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय उद्योगों को 120 दिन में स्वीकृति दे रहा है। इससे भी कम दिनों में स्वीकृतियाँ देने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन पर भी ध्यान देने की जरूरत है।  

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 MadhyaBharat  24 October 2016

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2016

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2016  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दूसरे और समापन दिवस पर भी मध्यप्रदेश में बीते ग्यारह वर्ष में हुए विकास की प्रशंसा के स्वर सुनाई दिये। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री श्री वैंकेया नायडू ने कहा कि विद्युत, पेयजल और अच्छी सड़कों की उपलब्धि मध्यप्रदेश की विशेषता बन गई है। इससे शहरों के व्यवस्थित विकास का कार्य भी आसान हो गया है। श्री नायडू ने कहा कि इन्दौर नगर में हुए विकास और कायाकल्प के नये कार्यक्रम देखकर प्रसन्नता होती है। जहाँ मध्यप्रदेश सरकार की विकास की तीव्र चाह प्रशंसनीय है, वहीं इन्दौर के नागरिकों के सकारात्मक और सहयोगी रवैये की भी तारीफ करनी होगी। प्रगति हासिल करने और अच्छे वातावरण में रहने की जनता की यह मानसिकता सुखद संकेत है। नायडू ने कहा किन्दौर आगमन से विशेष खुशी मिलती है। जब मुख्यमंत्री ने स्वागत से किया इंकार शहरी विकास मंत्री श्री वैंकेया नायडू की उपस्थिति में आज समानान्तर सत्र में पहुँचे मुख्यमंत्री  चौहान ने स्वयं का स्वागत करवाने से इंकार कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। समिट के समापन दिवस पर शहरी विकास पर केन्द्रित सत्र में जब मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री श्री नायडू को लेकर पहुँचे तब उनका पुष्प गुच्छ से स्वागत करने आए अधिकारियों से अपना स्वागत करवाने से इंकार किया। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री  नायडू के स्वागत के बाद सत्र की कार्यवाही जारी रखने के निर्देश दिये।  

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 MadhyaBharat  23 October 2016

mp टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज

टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिये उद्योग नीति में विशेष प्रावधान   मध्यप्रदेश पाँच सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्यों में से एक है। औद्योगिक क्षेत्र में टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज ऐसी इंडस्ट्री है जिसके माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। इस वजह से टेक्सटाइल इंडस्ट्री को प्रोत्साहन दिया जाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिये प्रदेश में अनुकूल माहौल है। पिछले एक दशक में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में मध्यप्रदेश में अच्छी ग्रोथ हुई है। यह विचार आज इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के समानान्तर सत्र में टेक्टाइल इंडस्ट्रीज से जुड़े वक्ताओं ने व्यक्त किये। सत्र के प्रारम्भ में एम.पी. ट्राइफेक के प्रबंध संचालक  डी.पी. आहूजा ने मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के परिदृश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में तैयार की गई उद्योग संवर्धन नीति में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के कई प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिये उपलब्ध जमीन के बारे में जानकारी दी। श्री आहूजा ने बताया कि कपड़ा उद्योग के लिये प्रदेश में पर्याप्त कपास उपलब्ध है। वर्तमान में प्रदेश में 65 बड़ी कपड़ा मिलें सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, खरगोन, खण्डवा, बुरहानपुर, ग्वालियर, छिन्दवाड़ा, जबलपुर और भोपाल टेक्सटाइल सेंटर के रूप में उभर कर सामने आये हैं। उद्योग आयुक्त  वी.एल. कान्ताराव ने बताया कि 4203 लूम्स, 53 हजार के करीब पावर लूम्स, 17 हजार 500 पावर लूम्स यूनिट और 49 स्पिनिंग यूनिट सफलता से काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि चंदेरी साड़ी बनाने वाले बुनकरों को आधुनिक सयंत्र उपलब्ध करवाये गये हैं। वर्धमान टेक्सटाइल के ज्वाइंट मेनेजिंग डायरेक्टर  सचिन जैन ने 'टेक्सटाइल सेक्टर में चुनौती' पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री में लगातार मॉर्डनाइजेशन से बदलाव आ रहे हैं। इस उद्योग में सिस्टम, स्टाइल, स्किल स्टाफ और शेयर वेल्यू में लगातार ध्यान देने की जरूरत होती है। ट्राइडेंट लिमिटेड के चेयरमेन  राजीन्दर गुप्ता ने 'मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लाभ' पर विचार रखे। उन्होंने बताया कि इस उद्योग में महिलाओं को ज्यादा रोजगार मिलता है। मध्यप्रदेश में पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिक हैं। उन्होंने स्पिनिंग, प्रोसेसिंग, स्टिचिंग और कच्चे माल की उपलब्धता पर निवेश करने वाले प्रतिनिधियों को जानकारी दी। श्री गुप्ता ने बताया कि मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री का गौरवशाली इतिहास रहा है। इंदौर की मिलें सारे देश में जानी जाती थीं। ट्राइडेंट के चेयरमेन ने बताया कि कपड़ा उद्योग से बड़ी संख्या में किसानों को रोजगार दिया जा सकता है। टेक्सटाइल सेक्टर स्किल कॉउसिंल के सी.ई.ओ. श्री जे.वी. राव ने कपड़ा उद्योग में लगने वाले कुशल और अकुशल श्रमिकों के प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिये श्रमिकों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम तैयार किया है। उन्होंने देश और मध्यप्रदेश में ट्रेनिंग सेंटर और फैशन डिजाइनिंग इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी दी।  

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 MadhyaBharat  23 October 2016

एमपी में 600  होटल

मध्यप्रदेश का पर्यटन सेक्टर निरंतर विकास कर रहा है। प्रदेश में वर्ष 2008 के मुकाबले 2015 में 14 करोड़ पर्यटक आये। पिछले साल के लिये देश के 12 पुरस्कार में से अकेले 6 पुरस्कार मध्यप्रदेश को ही मिले। पिछले 5 साल से प्रदेश पर्यटन में अग्रणी स्थान पा रहा है। संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेन्द्र पटवा ने यह बात आज इंदौर में ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट 2016 के पर्यटन सत्र में कही। पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष  तपन भौमिक ने कहा कि प्रदेश को देश में पर्यटन के क्षेत्र में प्रथम स्थान मिल रहा है, जिसे हम विश्व-स्तरीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में वाटर और हेरिटेज पर्यटन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दिनांक 15 दिसम्बर 2016 से 15 जनवरी 2017 तक एक माह का जल महोत्सव बनाया जायेगा। नई पर्यटन नीति-2016 में बहुत सारी सुविधाएँ दी जा रही हैं। अपर प्रबंध संचालक पर्यटन विकास निगम  तन्वी सुन्द्रियाल ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए बताया कि प्रदेश में 600 से अधिक नये होटल खोले जायेंगे, जिसमें औसतन 25 कमरे होंगे। प्रदेश में 3 विश्व धरोहर, 8 एडवेंचर साइटस, 27 प्रसिद्ध मंदिर-मस्जिद, किले-महल, 25 वन्य प्राणी अभयारण्य और 7 टाईगर रिजर्व पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटकों को असुविधा न हो, इसके लिये शासन हरसंभव प्रयास कर रहा है। मुख्य महाप्रबंधक एयर इंडिया अश्विनी लोहानी ने कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन के लिहाज से देश का सबसे समृद्ध राज्य है। यहाँ पिछले 10 साल में सड़कों की गुणवत्ता बढ़ने से पर्यटन का तेजी से विकास हुआ है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये नेशनल और स्टेट हाईवे पर हर 40-50 किलोमीटर की दूरी पर कुल 3000 वे-साइड एमेनिटीज उपलब्ध हैं और 23 लगभग खुलने को तैयार हैं। डब्ल्यूएसए के लिये बिजनेस मॉडल तैयार किया गया है। मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहाँ पर्यटन केबिनेट आरंभ की गई है। निवेशकों के लिये वित्तीय स्थिरता, शांत मानव संसाधन, मित्रवत नीति आदि उपलब्ध है। पाँच हेरिटेज होटल बनाये जा रहे हैं और 15 की कार्रवाई जारी है। मिन्टो हॉल 1909-हेरिटेज का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है।  

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 MadhyaBharat  23 October 2016

arun jetly gis 2016

  मध्यप्रदेश बनेगा देश का सप्लाई हब - केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री जेटली विकास और समृद्धि के लिये निवेशक और सरकार मिलकर साथ चलें - मुख्यमंत्री श्री चौहान    केन्द्रीय वित्त मंत्री  अरूण जेटली ने कहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद देश की अर्थ-व्यवस्था में सप्लाय चेन का महत्व होगा, जिसमें मध्यप्रदेश अपनी बेहतर भौगोलिक स्थिति के कारण देश का सप्लाय हब बनेगा। इस बात को ध्यान में रखकर निवेशक मध्यप्रदेश में निवेश करें। केन्द्रीय मंत्री श्री जेटली आज इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2016 के शुभारंभ सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। इस समिट में 42 देश के लगभग 4000 निवेशक और उनके प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। समिट में यूके, साऊथ कोरिया, जापान, यूएई, सिंगापुर के राजदूत और निवेशक प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री  जेटली ने कहा कि इन दिनों देश में निवेश का बेहतर वातावरण बना है। सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश की गति बढ़ी है। उसी गति के अनुरूप निजी क्षेत्र भी निवेश करे। मध्यप्रदेश में निवेश करने वाले को बेहतर अनुभव होगा। मध्यप्रदेश अपने ऐतिहासिक भौगोलिक नुकसान को लाभ में बदलकर उभरने वाले राज्य की मिसाल बना है। तेरह वर्ष पहले मध्यप्रदेश सड़क, बिजली और पानी के क्षेत्र में पिछड़े राज्यों में था और बीमारू माना जाता था। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के वर्तमान नेतृत्व और राज्य सरकार ने अधोसंरचना के क्षेत्र में बेहतर काम किया है। आज मध्यप्रदेश की सड़कें बेहतर हैं और बिजली के क्षेत्र में राज्य पावर सरप्लस है। किसानों को सिंचाई के लिये पानी की बेहतर सुविधाएँ हैं। राज्य सरकार ने संसाधनों का उपयोग लोगों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये किया है। इससे प्रदेश की कृषि विकास दर लगातार 20 प्रतिशत से अधिक रही तथा लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी। कृषि अर्थ-व्यवस्था में सुधार तथा लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने का समग्र प्रभाव राज्य की अर्थ-व्यवस्था पर भी पड़ा। मध्यप्रदेश देश की अर्थ-व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर उन्हीं राज्यों में ज्यादा रही जहाँ नेतृत्व में स्थायित्व है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में अधोसंरचना है। शैक्षणिक हब बन रहा है। नेतृत्व में स्पष्टता है। बड़ा कंज्यूमर बेस है। अभी मध्यप्रदेश का सर्वश्रेष्ठ सामने आना शेष है। केन्द्रीय मंत्री  जेटली ने कहा कि अब राज्य सरकार का जोर शहरी अधोसंरचना, कौशल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश पर है। इन दिनों देश में भी अनुकुल परिस्थितियाँ बनी हैं। केन्द्र में राजनीतिक परिवर्तन के बाद बेहतर वातावरण बना है। वैश्विक स्तर पर क्रूड आइल की कीमतें गिरने का फायदा देश को हुआ है। आर्थिक संसाधनों की बचत से अधोसंरचना और ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था के लिये ज्यादा राशि उपलब्ध हुई है। देश में अच्छी वर्षा से खाद्य उत्पादन बढ़ेगा। मुद्रास्फीति कम होगी। विश्व के कई देशों में मंदी का असर हुआ है। देश के लिये यह अवसर एक चुनौती के रूप में सामने आया है। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य बनकर उभरा है, जिसमें नेतृत्व ने सफलतापूर्वक आगे बढ़ने की तीव्र आकांक्षा को साकार किया है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान को बधाई देते हुए कहा कि स्पष्ट रोडमेप और इच्छाशक्ति से उन्होंने प्रदेश को सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का अर्थ सिर्फ बिजनेस मीट नहीं है। जीआईएस में 4जी है। गुडविल यानि भरोसा, ग्रोथ यानि समावेशी विकास, गारंटी और गुड गवर्नेंस। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में 175 इकाइयों ने काम करना शुरू कर दिया है। नवकरणीय ऊर्जा में 92 इकाइयों ने काम करना शुरू कर दिया है। पिछले दो साल में दो लाख 75 हजार करोड़ रूपए की उद्योग इकाइयाँ स्थापित हो गई हैं। मध्यप्रदेश की विशिष्टताएँ गिनाते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक औद्योगिक मित्र प्रदेश बन गया है। हर क्षेत्र में निवेश की नीतियाँ बनाई गई हैं और प्रभावी रूप से समस्याओं का समाधान करने का तंत्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि सवा लाख एकड़ का भूमि बैंक उद्योगों के लिये बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश करने की अनुकूल परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ औद्योगिक शांति है, मानव दिवसों का नुकसान नहीं होता। प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध है। सिंगल विण्डों के बजाय अब सिंगल टेबल व्यवस्था है। श्री चौहान ने कहा कि उद्योगों के लिये जितनी भी जरूरी शासकीय सेवाएँ हैं उन्हें लोक सेवा प्रदाय गारंटी नियम में लाया गया है। करीब 300 सेवाएँ इसके अंतर्गत लायी गयी हैं। श्री चौहान ने कहा कि व्यापार को आसान बनाने में मध्यप्रदेश देश के सर्वोच्च पाँच राज्य में शामिल है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को विकास और समृद्धि में भागीदार के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जितने भी निवेश प्रस्ताव पिछले दो साल में मिले हैं उन्होंने एक साल के अंदर ही उत्पादन शुरू कर दिया है। ऑनलाईन निवेश प्रस्ताव भी हमने स्वीकृत किये हैं। श्री चौहान ने सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को किसी भी प्रकार की समस्याएँ नहीं आयेंगी। निवेशक और सरकार साथ मिलकर काम करेगी तो विकास और समृद्धि के नये रास्ते भी खुलेंगे। श्री चौहान ने कहा कि विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाने के लिये सभी कदम उठाये गये हैं। आनंद मंत्रालय का गठन किया गया है। मंत्रालय के जरिये नागरिकों को अर्थपूर्ण जीवन जीने के लिये प्रेरित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक उन्नति और शांति भी जरूरी है। उन्होंने निवेशकों का आव्हान किया कि वे अपने निवेश प्रस्ताव बनाते समय मध्यप्रदेश का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि इस इन्वेस्टर्स समिट में दो हजार से ज्यादा निवेशकों ने 10 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा के निवेश के प्रस्तावदिये हैं। मध्यप्रदेश अब निवेशक मित्र राज्य : तोमर केन्द्रीय पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने समिट को सफल बताते हुए कहा कि इसका श्रेय मुख्यमंत्री श्री चौहान के करिश्माई नेतृत्व को जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के पहले कोई भी निवेशक मध्यप्रदेश में निवेश के बारे में सोचता भी नहीं था। आज मध्यप्रदेश निवेश मित्र राज्य बन गया है। इसके पीछे श्री चौहान की कड़ी मेहनत है जो अब साफ दिख रही है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। ग्रामीण विकास का पूरा परिदृश्य बदल गया है। उन्होंने कहा कि श्री चौहान अपने सफल कार्यकाल के 11 वर्ष पूरे कर रहे हैं। मध्यप्रदेश उनके नेतृत्व में और आगे बढ़ेगा। एक देश और एक कर से मध्यप्रदेश को फायदा होगा। मध्यप्रदेश बना गुड गवर्नेंस का मानक :  प्रसाद केन्द्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी, विधि एवं न्याय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में टीम इंडिया के प्रयासों से भारत विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। इसमें औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में टीम इंडिया के कैप्टन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं, तो मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ओपनिंग बेट्समेन हैं। श्री चौहान के नेतृत्व में पिछले ग्यारह वर्षों में मध्यप्रदेश का समग्र विकास हुआ है। श्री प्रसाद ने कहा कि मध्यप्रदेश में न केवल सिंचाई, कृषि, बिजली, उद्यानिकी एवं अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में काम हुआ है बल्कि सूचना एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में व्यापक काम हुए हैं। मध्यप्रदेश ने गुड गवर्नेंस का मानक स्थापित किया। श्री प्रसाद ने कहा कि देश में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टेण्डअप इंडिया, मेक इन इंडिया, जन-धन योजना आदि कार्यक्रमों से प्रगति के नये मानदण्ड स्थापित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक खाते आधार से जुड़ने के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खातों में जमा हो रही है, जिससे 36 हजार करोड़ रूपये की बचत हुई है। देश से इस वर्ष 8 लाख करोड़ रूपये के सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद निर्यात किये गये हैं। इलेक्ट्रानिक निर्माण के क्षेत्र में 40 मोबाईल निर्माण इकाइयाँ खुली हैं। मध्यप्रदेश में भी भोपाल और जबलपुर में इलेक्ट्रानिक मेन्यूफ्रेक्चरिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा है। टेक्सटाईल क्षेत्र में होगा पतंजलि का निवेश -किसानों को 10 हजार करोड़ की आय होगी पतंजलि प्रायवेट लिमिटेड के प्रमुख योगगुरू  बाबा रामदेव ने कहा है कि भारत और मध्यप्रदेश की आर्थिक विकास दर संतोषजनक बनी हुई है जबकि यूके और यूएस जैसी बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में मंदी है। उन्होंने कहा कि पतंजलि ग्रोथ की रेट अगले दो सालों में 200 प्रतिशत तक बढ़ जायेगी। हम चाहते हैं कि मध्यप्रदेश को भी इससे लाभ हो। उन्होंने खुद को वैश्विक नागरिक बताते हुए कहा कि अब पतंजलि लोगों की दवाइयों पर लगने वाला खर्च को बचाएगा। उन्होंने बताया कि टेक्सटाईल के क्षेत्र में पतंजलि बड़ा निवेश करने जा रहा है। अगले दो साल में पतंजलि के निवेश से किसानों की 10 हजार करोड़ रूपये की आय बढ़ेगी। दस हजार किसानों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि पतंजलि का आर्थिक निवेश सेवा के लिये है लाभ के लिये नहीं। भारत में चार लाख करोड़ रूपये के चीनी सामानों की बिक्री होने का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में 25 लाख करोड़ रूपये के उत्पाद निर्यात करने की क्षमता है। श्री रामदेव ने मुख्यमंत्री  चौहान को फकीर स्वभाव का मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि वे बड़ा सोचते हैं। सीधी बात करते हैं, मेहनती हैं। वे स्वभाव से फक्कड़ है और काम करने में अक्कड़ हैं। उन्होंने कहा कि श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में आर्थिक और वैचारिक समृ‍द्धि दोनों हैं। मध्यप्रदेश शांतिपूर्ण और सुरक्षित प्रदेश है और सभी दिशाओं में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया अब प्रकृति की ओर लौट रही है और इसमें जड़ी-बूटियों की खेती और प्र-संस्करण करने के क्षेत्र में मध्यप्रदेश बड़ा केन्द्र बन सकता है। मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि बीते दो वर्ष में प्रदेश में 2 लाख 71 हजार करोड़ अर्थात् 41 बिलियन डॉलर का वास्तविक निवेश आ चुका है। लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों का निवेश इसके अतिरिक्त है। वर्ष 2015 में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस में प्रदेश पाँचवें स्थान पर आ चुका है। प्रदेश को लगातार कृषि कर्मण सम्मान मिला है। आरंभ में स्वागत भाषण प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग  मोहम्मद सुलेमान ने दिया। 

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 MadhyaBharat  22 October 2016

 सीईओ कॉन्क्लेव

इंदौर में सीईओ कॉन्क्लेव में शिवराज सिंह  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी उद्योगपतियों को करों में वर्तमान में दी जा रही छूट जारी रखी जायेगी। श्री चौहान  इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट सीईओ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सी.ई.ओ. कान्क्लेव में कहा कि मध्यप्रदेश शांति का द्वीप है। प्रदेश सरकार द्वारा सिटीजन चार्टर लागू कर शासन की सभी प्रक्रियाओं को समय सीमा में पूरा करने की व्यवस्था की गयी है। औद्योगिक निवेश के लिए प्रदेश में एकल खिड़की प्रणाली लागू की गई है। प्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएँ हैं। मध्यप्रदेश की औद्योगिक विकास दर 10 प्रतिशत और कृषि विकास दर 20 प्रतिशत से भी अधिक है। प्रदेश सरकार की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली इण्डस्ट्रियल पॉलिसी है। प्रदेश सरकार और वह स्वयं निवेशकों के स्वागत के लिये दिल खोलकर तैयार है। उन्होंने उद्योगपतियों को विश्वास दिलाया कि वह स्वामी विवेकानन्द जी के शिष्य है, जो कहते हैं वह करते हैं। आप विश्वास के साथ मध्यप्रदेश आये, सरकार आपके स्वागत के लिए तैयार खड़ी है। उन्होंने कहा कि समिट का उद्देश्य भी निवेशकों की जिज्ञासाओं का समाधान करना है।  मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में सवा लाख हेक्टेयर का लेण्ड बैंक है, जिसमें 50 हजार हेक्टेयर विकसित भूमि है। उन्होंने बताया कि किसान अपनी जमीन उद्योग को लीज पर दे सकें, इसके लिये केन्द्र सरकार से कानून में संशोधन करने का आग्रह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में काम करने वाली कम्पनियों को वेट का 100 प्रतिशत रियम्बर्स किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पीपीपी मोड पर स्किल डेव्हलपमेंट करने को तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सूक्ष्म और लघु औद्योगिक इकाइयों को भी भरपूर मदद करने को तैयार है।  उद्योग मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आज देश में निवेश की बात होती है तो मध्यप्रदेश का नाम सबसे पहले लिया जाता है। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश सरकार निवेशकों को हर तरह की सुविधा देने के लिये तैयार है। प्रदेश में सुदृढ़ अधोसंरचना तैयार की गई है, जिसमें सड़क, पानी, बिजली जैसी सभी सुविधाएँ सरकार द्वारा तत्परता के साथ औद्योगिक इकाइयों को उपलब्ध करवाई जाएंगी।  इस अवसर पर प्रदेश के वित्त मंत्री  जयंत मलैया,  मुख्य सचिव अन्टोनी डिसा, औद्योगिक समूह हिन्दूजा ग्रुप के चेयरमेन जी.पी. हिन्दूजा, आदित्य बिरला ग्रुप के कुमार मंगलम बिरला, वीडियोकॉन ग्रुप के  वेणूगोपाल एन. धूत, सीमेंस लिमिटेड के  सुनील माथुर, इन्फोसिस ग्रुप के  गोपालकृष्णन, अपोलो ग्रुप की सुश्री शोभना सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के सीईओ और सहआयोजक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  22 October 2016

मध्यप्रदेश में निवेश

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट – 2016   मध्यप्रदेश के उद्योग मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने 22-23 अक्टूबर 2016 को इंदौर में होने वाले ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2016 में शामिल होने वाले देश - दुनिया के औद्योगिक और व्यवसायिक घरानों के प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके प्रति ह्रदय से अपनी कृतज्ञता प्रकट की है। श्री शुक्ल ने उद्योगपतियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि देश के हृदय प्रदेश में निवेश के लिए सबसे अनुकूल माहौल है। मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश की लगातार बढ़ती विकास दर निवेश की संभावनाओं को प्रबल करती है। प्रदेश में अब न सिर्फ सिंगल टेबल के कॉन्सेप्ट के आधार पर उद्योग लगाने की सभी कार्रवाई मौके पर की जा रही है, बल्कि राज्य सरकार ने प्रदेश लघु-कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिये एक अलग विभाग भी बनाया है। साल 2014 में हुई जीआईएस में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के प्रदेश में निवेश की सकारात्मक संभावनाओं को प्रबल करते हुए रूचि दिखाई। मुझे पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप इस समिट में निवेश की पहल से प्रदेश के युवाओं को न केवल बेहतर रोजगार के अवसर मिलेंगे बल्कि उन्हें अपने कौशल के प्रदर्शन के लिये नया मंच भी मिलेगा। उद्योग मंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में भूमि अधिग्रहण की भी आवश्यकता नहीं है। उद्योग लगाने के लिये राज्य सरकार ने लेण्ड-बैंक बनाया है। इसमें 26 हजार हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। इतना ही नहीं, निवेशक प्रदेश में किसी भी स्थान से ऑनलाइन उद्योग लगाने के लिये भूमि ले सकते हैं। साथ ही राज्य सरकार द्वारा निवेशकों को पूरी स्वतंत्रता है कि वे अपनी पसंद के मुताबिक किसी भी सेक्टर में निवेश कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में यकीनन, हमारा प्रदेश विकास के गगन में नित नई ऊँचाइयों को छू रहा है। श्री शुक्ल ने उद्योगपतियों को यह भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश के लिये संचालित आकर्षक उदार नीति, उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ ही प्रदेश की बेहतर और संतुलित अर्थ-व्यवस्था कई मायनों में अहम है। राज्य सरकार की कोशिशों का ही प्रतिफल है कि शांति के टापू के रूप से पहचाना जाने वाला प्रदेश अब 'औद्योगिक शांति टापू' के नाम से देश- दुनिया में पहचाना जाने लगा है।   उद्योग मंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में देश का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'कृषि कर्मण अवार्ड' लगातार चार बार मध्यप्रदेश की झोली में आना, राज्य सरकार की सफल नीतियों और योजनाओं का सुफल ही नहीं, बल्कि प्रदेश में हरित क्रांति की सफलता का परिचायक है। श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान का औद्योगिक क्रांति का सपना अब सच में तब्दील हो रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने कई सराहनीय कदम भी उठाये हैं। प्रदेश के हर संभागीय मुख्यालय को फोरलेन सड़क मार्ग से जोड़ना हो, उद्योगों की बेहतर ब्रांडिंग करना हो, प्रदेश में बिजली की भरपूर व्यवस्था हो, उद्योगों को सभी बुनियादी सुविधाएँ और सुदृढ़ अधोसंरचना मुहैया करने में राज्य सरकार अग्रणी है। राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देश और दुनिया को मध्यप्रदेश की खूबियों से परिचित कराने के लिये देश में न केवल रोड शो किये बल्कि दुनिया के सभी प्रमुख देशों में स्वंय जाकर प्रदेश की विकास गाथा से उन्हें परिचित कराया। इसी का नतीजा है कि आज विश्व के फलक पर मध्यप्रदेश जाना-पहचाना नाम बन गया है। श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए हर क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई हैं। इसके परिणाम भी अब जमीनी स्तर पर दिखने लगे हैं। इतना ही नहीं प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को देखते हुए देशभर से ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के शीर्षस्थ उद्योगपतियों और व्यवसायिक घरानों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश की ओर रूख किया है। निश्चित रूप से औद्योगिक क्षेत्र में हिन्दुस्तान का दिल दुनियाभर में अपना कीर्तिमान स्थापित करने को तैयार है।

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 MadhyaBharat  21 October 2016

ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट

23 देशों के राजदूत आयेंगे ,मुख्यमंत्री  चौहान ने की  तैयारियों की समीक्षा  इंदौर में 22 और 23 अक्टूबर को होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में पाँच देश जापान, दक्षिण कोरिया, यू.ए.ई., सिंगापुर और यू.के. पार्टनर कंट्री होंगे। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में 23 देश के राजदूत शामिल होंगे। साथ ही 37 देश के 260 निवेशकों सहित करीब साढ़े तीन हजार प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और मुख्य सचिव  अंटोनी डि सा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  चौहान ने बैठक में निर्देश दिये कि समिट की सभी तैयारियाँ समय से पूरी की जायें। समिट के दौरान होने वाले सेक्टोरल सेमिनार में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें। बताया गया कि पार्टनर कंट्री के राजदूतों के साथ उनके देश के प्रतिनिधि मंडल भी शामिल होंगे। सम्मेलन स्थल पर करीब पॉच हजार 600 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रदर्शनी लगायी जायेगी। इसमें 80 कंपनियाँ अपने उत्पाद का प्रदर्शन करेगी। मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित मध्यप्रदेश पेवेलियन भी लगाया जायेगा। सम्मेलन के दौरान ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट-2014 के बाद प्रदेश में आये निवेश पर रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया जायेगा। सम्मेलन के दौरान 13 सेक्टोरल सेमिनार किये जायेंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त  ए.पी.श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास आर.एस.जुलानिया, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा  इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग  मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास  मलय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  अशोक वर्णवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  14 October 2016

एमपी में डेंटल कॉलेजों की 722 सीटें खाली

  मध्यप्रदेश के निजी डेंटल कॉलेजों में इस साल 722 सीटें खाली रह गई हैं। अब इन सीटों के भरने के आसार नहीं हैं। पहली बार इतनी सीटें खाली बचीं हैं। अनरिजर्व कैटेगरी सीटें भी खाली रह गई हैं। पिछले साल तक निजी कॉलेजों में बीडीएस की करीब 400 सीटें ही बचती थीं। प्रदेश के 14 डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की 1340 सीटें हैं। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि इस साल पांच नए डेंटल कॉलेजों को मान्यता मिल गई। इसके अलावा दाखिले के लिए न्यूनतम अंक भी इस साल कम कर दिए गए थे। पिछले साल तक रिजर्व कैटेगरी के लिए 40 फीसदी व अनरिजर्व कैटेगरी के लिए 50 फीसदी अंक जरूरी होते थे। इसका असर यह हुआ कि बीडीएस में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों ने एमबीबीएस में प्रवेश ले लिया। शनिवार को दो छात्रों ने निजी कॉलेजों में ज्यादा फीस लेने की शिकायत भी की है। भोपाल के जीएमसी में सरकारी और निजी मेडिकल/डेंटल कॉलेजों के लिए चल रही काउंसलिंग खत्म हो गई है, लेकिन विवाद अभी ठंडा नहीं पड़ा है। 35 उम्मीदवारों ने अलग-अलग दिन शिकायत कर काउंसलिंग में गड़बड़ी की बात कही है। कोहेफिजा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सबसे पहले 30 सितंबर को उम्मीदवारों ने एमपी ऑनलाइन के खिलाफ शिकायतें की। तीन अलग-अलग शिकायतें में कहा गया है कि एमपी ऑनलाइन के सर्वर में कोई खराबी नहीं आई थी। जानबूझकर साफ्टवेयर में गड़बड़ी की गई थी। इस वजह से काउंसलिंग नहीं हो पाई थी। तीन दिन तक उम्मीदवार कॉलेज परिसर में पड़े रहे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में इन सीटों को ऑल इंडिया के उम्मीदवारों से भरने के लिए कह दिया था।  

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 MadhyaBharat  9 October 2016

मेट्रो रेल bhopal

मेट्रो रेल कंपनी के अध्यक्ष होंगे मुख्यमंत्री  चौहान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  भोपाल और इंदौर में संचालित होने वाली मेट्रो रेल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने के निर्देश दिये। परियोजनाओं का संचालन और प्रबंधन मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कंपनी प्रायवेट लिमिटेड करेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान इसके अध्यक्ष होंगे। नगरीय प्रशासन मंत्री, भोपाल और इंदौर के महापौर इसके सदस्य होंगे। कंपनी के प्रशासनिक ढाँचे का अनुमोदन राज्य की केबिनेट द्वारा किया जायेगा। बैठक में मेट्रो रेल के प्रथम चरणों में शामिल किये जाने वाले रूट और वित्तीय प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने बताया कि भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 22504.25 करोड़ होगी। इसमें 7 रूट को शामिल किया जायेगा। भोपाल में 95.03 किलो मीटर में मेट्रो रेल लाइन बिछाई जायेगी। इसमें से 84.83 किलो मीटर ऐलिवेटेड होगी। प्रथम चरण में दो रूट होंगे – करोंद से एम्स तक 14.99 किलो मीटर और भदभदा से रत्नागिरी तक 12.88 किलो मीटर शामिल किया जायेगा। प्रथम चरण की लागत 6962 करोड़ रूपये होगी। परियोजना के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी जापान और एशियाई विकास बैंक से वित्तीय सहायता लेने के विकल्पों पर विचार-विमर्श हुआ। इंदौर मेट्रो रेल 104 किलो मीटर में चलेगी। इस पर 26762.21 करोड़ की लागत आयेगी। पहले चरण में पलासिया-एयरपोर्ट-विजयनगर-भवरकुंआ-पलासिया रूट पर काम शुरू होगा। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के नक्शे में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से सहयोग के लिये सभी विकल्प पर विचार किया जायेगा। नवगठित मेट्रो रेल कंपनी के संचालक मंडल की बैठक में प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया।बैठक में मेयर भोपाल  आलोक शर्मा, इंदौर मेयर ती मालिनी गौड़, मुख्य सचिव  अंटोनी डि सा, मुख्यमंत्री प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  8 October 2016

स्मार्ट सिटी निवेशकों के लिये बेहतर मौका

मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये जो नागरिक सुविधाएँ और अधोसंरचना विकसित होगी उसमें निवेश के लिये निवेशकों को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की 100 शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा को लेकर देशभर में अपार उत्साह का वातावरण है, निवेशकों को इसका लाभ उठाना चाहिए। यह जानकारी प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास  एस.एन. मिश्रा ने  दी।   एस.एन. मिश्रा ने बताया कि शहरों में बढ़ती आबादी से स्मार्ट सिटी की अवधारणा को महत्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी ऐसी हो जिसकी अधोसंरचना मजबूत और वहाँ सभी नागरिक सुविधाएँ बेहतर हों। उस क्षेत्र की विद्युत, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन भी अच्छा हो। स्मार्ट शहर की कनेक्टिविटी अन्य क्षेत्र से सुलभ हो, जिससे आम आदमी एक स्थान से दूसरे स्थान सुगमता से पहुँच सके। श्री मिश्रा ने बताया कि अभी इंदौर और भोपाल में लाईट मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना शुरू की गई है। सेमीनार में दोनों शहर की मेट्रो परियोजना को फिल्म के जरिये दिखाया गया। गृह निर्माण मण्डल के आयुक्त  नीतेश व्यास ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप स्मार्ट सिटी की प्रभावी पहल में मध्यप्रदेश सरकार पूरा सहयोग करेगी। सेमीनार में भोपाल के नार्थ टी.टी. नगर की पुनर्घत्वीकरण योजना का प्रस्तुतिकरण भी हुआ।  

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 MadhyaBharat  26 September 2016

शिवराज लन्दन में समझेंगे स्मार्ट सिटी की अवधारणा

स्मार्ट सिटी प्रबंधन विशेषज्ञों और संभावित निवेशकों से चर्चा करेंगे  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान 26 और 27 सितम्बर को युनाइटेड किंगडम के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वे युनाइटेड किंगडम की सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंटरनेशनल डेव्हलेपमेंट  प्रीति पटेल के आमंत्रण पर स्मार्ट सिटी की अवधारणा और प्रबंधन के तरीकों और स्किल डेव्हलपमेन्ट कार्यों का अवलोकन करने जा रहे हैं। श्री चौहान स्मार्ट सिटी प्रबंधन के विशेषज्ञों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री लंदन प्रवास के दौरान मध्यप्रदेश में निवेश में रूचि रखने वाली निवेशक कंपनियों के प्रमुखों से भी मुलाकात करेंगे। श्री चौहान 25 सितम्बर, रविवार को लंदन पहुँचेंगे। वे 26 सितम्बर, सोमवार को श्रीमती प्रीति पटेल से मुलाकात करेंगे और लंदन के शहर प्रबंधक विशेषज्ञों से चर्चा करेंगे। इसी दिन दोपहर में वे विभिन्न निवेश कंपनियों के प्रमुखों से भेंट करेंगे। श्री चौहान प्यूरीको ग्रुप के संस्थापक श्री नाथूराम पुरी से मुलाकात कर मध्यप्रदेश में निवेश संबंधी अवसरों पर चर्चा करेंगे। प्यूरीको समूह पेपर, पॉलीमर और प्लास्टिक निर्माण से जुड़ा है। यह समूह स्वागत और रियल स्टेट व्यवसाय में भी सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री डी ला रू पिक ग्रुप के प्रमुख से मुलाकात करेंगे। यह समूह करेंसी रखरखाव के उपकरण और सुरक्षा उत्पादों के प्रदाय से जुड़ा है। श्री चौहान रोल्स रॉयस के उपाध्यक्ष श्री मघिन तमिलारासन से भी मुलाकात करेंगे। वे प्रदेश में रक्षा क्षेत्र के लिये आवश्यक उपकरण निर्माण की इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि रोल्स रॉयस इंटीग्रेटेड पॉवर और प्रोपल्सन सॉल्यूशन के क्षेत्र में सक्रिय है। यह उच्च तकनीकी से समृद्ध कारों का भी निर्माण करती है। श्री चौहान हारग्रिव्स इंडस्ट्रियल सर्विसेज के व्यापार विकास संचालक श्री केविन साबिन से भेंट करेंगे। यह कंपनी पॉवर, पोर्ट, स्टील और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को मटेरियल प्रबंधन सुविधा उपलब्ध करवाती है। मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान स्कॉच व्हिस्की एसोसियेशन के संचालक श्री मार्टिन हेटफुल भी उनसे मुलाकात करेंगे और प्रदेश में बेवरेज इकाई लगाने की संभावना पर चर्चा करेंगे। यह एसोसियेशन स्कॉटलैंड और पूरी दुनिया में व्हिस्की इंडस्ट्री के हितों का संरक्षण करता है। श्री चौहान अन्य निवेशकों से भी चर्चा करेंगे जिनमें जेसीबी के श्री फिलिप बाउवेरट शामिल हैं। यह कंपनी बहुराष्ट्रीय कार्पोरेशन हैं जो निर्माण उपकरण बनाती है। श्री चौहान हिन्दूजा समूह के सह अध्यक्ष  गोपीचंद हिन्दूजा के भोज में शामिल होंगे और उनसे ऑटोमोबाइल, एग्री बिजनेस, खाद्य प्र-संस्करण, नवकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट सिटी प्रबंधन और एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान 27 सितम्बर, मंगलवार को भारत- यू.के. स्वास्थ्य संस्थान के चेयरमेन प्रोफेसर माइक पार्कर और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभाग यू.के.के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता और माइक निथाक्रियांकिस से मुलाकात करेंगे। श्री चौहान लंदन के डिप्टी मेयर श्री राजेश अग्रवाल से मुलाकात करेंगे और भारतीय उद्योग परिसंघ एवं यू.के.-इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा आयोजित सेमीनार – 'मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाएँ' को संबोधित करेंगे। श्री चौहान 28 सितम्बर, बुधवार को नई दिल्ली वापस आयेंगे।

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 MadhyaBharat  24 September 2016

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इन्दौर

कंपनियों को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इन्दौर के लिये किया आमंत्रित  मुख्यमंत्री  शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में निवेश की व्यापक संभावनाएँ हैं। यहाँ निवेशकों के लिये सर्वाधिक उपयुक्त वातावरण है।  चौहान प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर आज हैदराबाद में सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उद्योगपतियों एवं कंपनियों के पदाधिकारियों को इन्दौर में आगामी 22-23 अक्टूबर को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश अब बीमारू स्टेट नहीं रहा। यह तेजी से विकास करने वाला राज्य बन गया है। मध्यप्रदेश कई क्षेत्र में अब देश में अग्रणी राज्य बन गया है। प्रदेश की विकास दर लगातार कई वर्ष से दो अंकों में तथा कृषि विकास दर 20 प्रतिशत से ऊपर है। पिछले वर्षों में एक लाख किलोमीटर सड़कें बनायी गयी तथा सिंचाई रकबे में भारी वृद्धि की गयी। प्रदेश अब पावर सरप्लस स्टेट बन गया है। यहाँ अच्छी अधोसंरचना है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर है। स्किल्ड मेन पॉवर उपलब्ध है। देश की सबसे बड़ी वाटर बाडी इंदिरा सागर एवं तमाम पर्यटक स्थल राज्य में स्थित हैं। प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएँ हैं। श्री चौहान ने बताया कि पर्यटन की संभावनाओं के दोहन के लिये पर्यटन केबिनेट बनायी गयी है। श्री चौहान ने कहा कि केवल खेती ही सबका पेट नहीं भर सकती। इसलिये राज्य सरकार उद्योगों पर ज्यादा ध्यान दे रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मुहैया करवाया जा सके। इसके लिये राज्य शासन द्वारा युवाओं को सभी जरूरी सुविधाएँ भी मुहैया करवायी जा रही हैं। साथ ही निवेशकों की सुविधा के लिये नीतियों में परिवर्तन किया गया है तथा सिंगल विंडो प्रणाली शुरू की गयी है। लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून बनाया गया है इसमें विभिन्न सेवाओं के प्रदान करने की समय-सीमा तय की गयी है। इसमें देरी होने पर दण्ड का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री  चौहान ने उद्योगपतियों एवं कंपनियों के पदाधिकारियों से प्रदेश में निवेश करने और उद्योग लगाने का आव्हान किया। उन्होंने निवेशकों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। आगामी 22 एवं 23 अक्टूबर को इन्दौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने का निमंत्रण दिया। श्री चौहान ने विभिन्न उद्योगपतियों और कंपनियों के पदाधिकारियों से वन-टू-वन चर्चा भी की। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल, मुख्‍य सचिव  अंटोनी डिंसा, प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग श्री मोहम्मद सुलेमान ने प्रदेश की औद्योगिक नीति और निवेशकों को दी जाने वाली सहूलियतों की जानकारी दी। सेमीनार में सीआईआई के चेयरमेन भी शामिल हुए। टाटा एडवांस सिस्‍टम के एयरो स्पेस हेड  मसूद हुसैन ने बताया कि उनकी टीम जल्द ही प्रदेश का भ्रमण करेगी। मेघा इंजीनियरिंग के व्ही.श्रीनिवास रेड्डी से प्रदेश में वाटरपाइप और पम्प निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री से फर्मामेक्सिल कम्पनी के प्रतिनिधियों के साथ कम्पनी के महानिदेशक  पी.व्ही. अप्पाजी, नवयुग कंस्ट्रक्शन के  रवि राजू, हास्पिटल डिवीजन एट अपोलो हास्पिटल इंटरप्राइजेस के प्रेसीडेंट डॉ. के. हरि प्रसाद और मायलान लेबोटरीज लिमिटेड के डॉ. हरिबाबू बोडेपुडी ने मुलाकात की।  

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 MadhyaBharat  22 September 2016

sumitra mahajan

  आर्थिक तौर पर सक्षम लोगों से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ने की अपील करते हुए लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इंदौर में  कहा कि उन्होंने भी बचपन में लकड़ी का चूल्हा फूंकने से होने वाली तकलीफें झेली हैं।   लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन  ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के एक कार्यक्रम में कहा, ‘आज मैं लोकसभा अध्यक्ष हूं। लेकिन मैंने भी बचपन में खाना बनाने के लिये लकड़ी का चूल्हा फूंका है। मुझे अच्छी तरह पता है कि चूल्हा फूंकने से किस तरह पूरे घर में धुआं भर जाता है और महिलाएं कई तकलीफें झेलती हैं। लिहाजा आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को रसोई गैस की सब्सिडी छोड़नी चाहिये, ताकि गरीब तबके के लोगों को इसका फायदा मिल सके।’   लोकसभा अध्यक्ष ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की शुरुआत के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि इस योजना से गरीबों के कई घरों में लकड़ी के चूल्हे की जगह एलपीजी का चूल्हा पहुंच रहा है। नतीजतन पर्यावरण का भी भला हो रहा है। उन्होंने हालांकि कहा कि देश के आम लोगों को यह प्रवृत्ति छोड़नी होगी कि सरकार उनके लिये हर चीज की पूरी तरह नि:शुल्क व्यवस्था करेगी।

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 MadhyaBharat  17 August 2016

shivraj singh svatntrta divs

  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य के मुख्य कार्यक्रम में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में राज्य के सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान की घोषणा की। रोजगार की संभावनाओं को तलाशने के लिए रोजगार कैबिनेट का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पुलिस, जेल, नगर सेना के अधिकारियों व कर्मचारियों को विभिन्न राष्ट्रपति पदकों से सम्मानित भी किया।   मुख्यमंत्री ने लालपरेड मैदान स्थित मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में ध्वजा रोहण कर प्रदेश की जनता को संबोधित किया। आसमान में तीन रंगों के गुब्बारों को छोड़ा। उन्होंने कहा कि रोजगार की संभावनाओं को तलाशने के लिए रोजगार कैबिनेट गठन के साथ ही इसके लिए अभियान भी चलाया जाएगा।   दैनिक वेतन भोगियों को स्थायी कर्मियों की तरह किया जाएगा और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन-भत्ते, अनुकंपा नियुक्ति आदि मिलने लगे, यह किया जा रहा है। योग्य दैनिक वेतन भोगियों को दूसरे विभागों में समायोजित करने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।   मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को जहां सातवें वेतनमान की सौगात दी वहीं अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों को छठवें वेतनमान देने का भी ऐलान किया। कार्यभारित कर्मचारियों को उनकी मृत्यु के बाद आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों खरीदी गई प्याज के भंडार को अब गरीबों में मुफ्त में बंटने की भी स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम में ऐलान किया।  

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 MadhyaBharat  15 August 2016

votar id

    इंदौर में साढ़े चार लाख मतदाता एक जैसे    इंदौर जिले में साढ़े चार लाख मतदाता एक जैसे चेहरे वाले हैं,लेकिन इनमें कोई फर्जी नहीं। निर्वाचन आयोग ने साॅफ्टवेयर की मदद से देशभर में एक जैसे चेहरे वाले लोगों के वोटर कार्ड स्कैन कर चिह्नित किए हैं।   मध्यप्रदेश में इसकी संख्या एक करोड़ है। इसका मतलब नहीं कि ये सभी फर्जी बने हैं। साॅफ्टवेयर थोड़ा भी एक जैसा दिखने वाला चेहरा चिह्नित कर लेता है। ये बातें मंगलवार को कलेक्टर पी.नरहरि ने मीडिया से कही। उन्होंने कहा-आयोग ने एक जैसे चेहरे वाले लोगों का भौतिक सत्यापन करने के लिए कहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इनमें मुश्किल से एक फीसदी मतदाता एेसे होंगे,जिनके दो जगह वोटर कार्ड होंगे। ये भी वह लोग हैं,जिनके ट्रांसफर होते रहते हैं और वे अन्य जगह नाम जुड़वा लेते हैं। इनका भौतिक सत्यापन कर नाम हटा दिया जाएगा।  

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 MadhyaBharat  27 July 2016

kailash vijayvargiye

        पहली बार कैबिनेट में इंदौर का प्रतिनिधित्व न होने की गूंज सोशल मीडिया पर सुनाई देने लगी है। सोशल मीडिया पर लोग जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। वे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (भाई) को यह समझाइश भी दे रहे हैं कि उनके आपसी झगड़े में इंदौर शहर का नुकसान हो रहा है।  व्हाट्सएप और फेसबुक पर तरह-तरह के कमेंट किए जा रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है कि ‘आज सिद्ध हो गया कि इंदौर से मुख्यमंत्री को वाकई कितना प्रेम है’। इस तीखे तंज के साथ कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा ‘मंत्रिमंडल गठन में यह भी साफ है कि योग्यता की कद्र नहीं की गई है, इंदौर के सुदर्शन गुप्ता, महेंद्र हार्डिया, रमेश मैंदोला किसी भी कसौटी पर कमतर नहीं थे लेकिन फिर भी उनकी अनदेखी की गई। इसके जवाब में कई लोगों ने यह भी लिखा कि अगर योग्यता की बात करें तो दादा (बाबूलाल गौर) से ज्यादा मध्यप्रदेश में कौन योग्य था। फिर भी उन्हें जिस तरह से बाहर निकाला और इंदौर की उपेक्षा हुई इससे यह लग रहा है कि भाजपा को मालवा बेल्ट की अब कोई फिक्र नहीं रह गई है। वहीं यह भी कहा गया कि बड़े-बड़े की लड़ाई में नुकसान हमेशा आम आदमी का होता है और अब इंदौर की जनता को बड़े बुर्जुगों की यह बात अच्छी तरह समझ आ गई होगी।   पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा ने कहा कि जिस तरह से बाबूलाल गौर को हटाया गया है, यह तरीका ठीक नहीं है। यदि उम्र का कोई क्राइट एरिया है तो पहले बताना चाहिए था। पार्टी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह बात उन्होंने बाबूलाल गौर से मुलाकात के बाद कही। जब उनसे मीडिया ने पूछा कि क्या वे उनकी पत्नी नीना वर्मा को मंत्री न बनाए जाने से नाराज हैं तो उनका कहना था कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वे किसे मंत्री बनाएं और किसे नहीं। गौर से मिलने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा और इंदौर के पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे भी पहुंचे। मोघे ने गौर से करीब 45 मिनट चर्चा की।  

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 MadhyaBharat  2 July 2016

mgm

      इंदौर शहर की स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ी उपलब्धि जुड़ने वाली है। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में बोनमैरो ट्रांसप्लांट का सेंटर खुलने जा रहा है।   दिल्ली (एम्स) के बाद इंदौर देश में दूसरा ऐसा शहर होगा, जहां सरकारी स्तर पर यह सुविधा मिलेगी। पहले यह केंद्र भोपाल में बनने वाला था, पर तैयारियों और अनुकूल स्थितियों को देखते हुए यह इंदौर के खाते में आ रहा है।   बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेंटर (बीएमटी) खोलने के लिए 15 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।   ये होंगे फायदे   ब्लड कैंसर, ए प्लास्टिक एनीमिया, थैलीसिमिया जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों को बोनमैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। निजी अस्पतालों में एक बीएमटी पर 15 लाख से लेकर 40 लाख रुपए तक का खर्च आता है। सेंटर शुरू होने पर मात्र 5 लाख रुपए में बीएमटी हो सकेगी। मेडिकल कॉलेज के पीजी और अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंट को सीखने का मौका मिलेगा। प्रदेश के आदिवासी जिलों में कई बच्चे थैलीसिमिया से पीड़ित हैं। उनको रियायती दर पर सुविधा मिल जाएगी।  

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 MadhyaBharat  27 June 2016

indore

  इंदौर में अतिक्रमण विरोधी अभियान    इंदौर में सड़क चौड़ीकरण की बाधाएं हटाने के लिए नगर निगम ने  एक बार फिर शुरुआत की। मालगंज से टोरी कॉर्नर के बीच नीमा धर्मशाला के पास कार्रवाई के पहले ही सही-गलत निशान को लेकर मकान मालिक परिवार और अफसरों में विवाद हुआ। इसके बाद नौबत धक्कामुक्की और मारपीट तक पहुंच गई।   परिवार के सदस्यों, निगम अधिकारियों, बाउंसरों के बीच देर तक चली नोकझोंक के बीच पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। शुरुआत में 40 मिनट तक कार्रवाई रुकी रही। फिर शाम तक सभी 12 चिन्हित निर्माण तोड़ दिए गए। चार अन्य निर्माण लोगों ने खुद हटाए।   सुबह नौ बजे एसडीएम संदीप सोनी, एनएन पांडे सहित निगम अधिकारी पुलिस और निगम की रिमूवल टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अमला मालगंज स्थित गौतम जैन के चार मंजिला मकान पर कार्रवाई के लिए बढ़ा जहां पहले से परिवार खड़ा था। शुरुआत में काफी देर तक दोनों पक्षों में बात होती रही। परिवार के लोग कोई और निशान बता रहे थे जबकि निगम अधिकारी अपने निशान को सही बता रहे थे।   इसी बीच जैन परिवार के 20-25 लोग अमले के सामने आ गए और धक्कामुक्की-हाथापाई शुरू हो गई। निगम उपायुक्त महेंद्रसिंह चौहान और अमले के साथ झड़प होते देख अपर आयुक्त देवेंद्रसिंह आए और उन्होंने एक व्यक्ति को पीटकर भगा दिया। कार्रवाई शुरू हुई तो परिवार के सदस्य पोकलेन के आगे लेट गए। जैसे-तैसे सहायक यंत्री रजनीश पंचोलिया, सहायक रिमूवल अधिकारी वीरेंद्र उपाध्याय और दल प्रभारी बबलू कल्याणे ने उन्हें हटाया और कार्रवाई शुरू कराई।   अफसरों के होश तब उड़ गए जब उन्होंने जैन परिवार की एक महिला को बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर पोकलेन के पंजे के सामने देखा। उसका कहना था मकान तोड़ा तो वह बच्चे के साथ कूद जाएगी। मौका देख निगम की महिला बाउंसर और महिला पुलिस ने पहुंचकर महिला को नीचे उतारा।   कार्रवाई के विरोध में परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका लगा रखी है, जिसकी सुनवाई सोमवार को होना थी। आधिकारिक सूत्रों का कहना है परिवार चाहता था कि कार्रवाई में देरी हो ताकि तब तक कोर्ट स्टे दे दे जबकि निगम इससे पहले करना चाहता था।   तीन मंजिल तोड़ने के बाद चौथी मंजिल तक पोकलेन का पंजा नहीं पहुंचा तो मजदूर भेजना पड़े। अपर आयुक्त ने बताया परिवार के लोगों ने मजदूरों से मारपीट की। बाद में पुलिस चौथी मंजिल पर गई और बाधक हिस्सा तुड़वाया। इसके बाद मकान का बचा हिस्सा गिरा दिया गया। इस दौरान परिवार के सदस्य छत पर खड़े होकर 'प्रशासन हाय-हाय' के नारे लगाते रहे। अकेले जैन परिवार का मकान तोड़ने में निगम को शाम हो गई। इधर, गौतम जैन के बेटे प्रीतेश ने कहा निगम अफसरों ने नोटिस नहीं दिए और अचानक कार्रवाई के लिए आ गए। वहीं पंचनामा फाड़ दिया और बाउंसरों ने मारपीट की।   इस कार्रवाई में 225  निगमकर्मी, 100 पुलिसकर्मी, पोकलेन मशीन, बुलडोजर, डंपर लगे लेकिन  अब ये कार्यवाही अगले माह की जाएगी।    निगम के सिटी इंजीनियर महेश शर्मा ने बताया रोड में अब 12 ऐसे निर्माण बाकी हैं जिनकी अवधि तीन जुलाई को पूरी होगी। उन्हें जुलाई में हटाया जाएगा। अपर आयुक्त ने बताया निगम ने हाथोहाथ मकानों का मलबा उठाना भी शुरू करवा दिया है। रोड पर हेलोजन लगाए जा रहे हैं। जिन घरों के नल कनेक्शन टूट गए हैं, उन्हें जोड़ना शुरू करवा दिया है। कार्रवाई के दौरान नागरिक समिति के तपन भट्टाचार्य, एसके दुबे, कैलाश लिंबोदिया और सुधीर लाड़ मौजूद थे। उन्होंने कहा अतिक्रमण हटाने के नाम पर अपर आयुक्त, उपायुक्त दादागीरी करते रहे। उन्हें कम से कम कोर्ट सुनवाई तक रुकना था। ऐसा लग रहा था जैसे निगम एकतरफा कार्रवाई कर दुश्मनी निकाल रहा है। एक ओर के निर्माण नहीं टूट रहे जबकि दूसरी ओर 15-20 निर्माण तोड़े जा रहे हैं।     Attachments area          

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 MadhyaBharat  14 June 2016

नर्मदा के तट पर अमृत का मेला  सरकारी इंतजाम अली खा पी गए सिंहस्थ को

मध्यप्रदेश सरकार का जुमला ''क्षिप्रा के तट पर अमृत का मेला '' भी सिर्फ जुमला बन कर रह गया । सरकारी कारिंदे कई बार गलतियां करते हैं इस बार भी जुमला गढ़ने में गड़बड़ हो गई ।क्योंकि जब पानी के लिए क्षिप्रा से नर्मदा को जोड़ा गया तो क्षिप्रा का अस्तित्व ख़त्म हो गया और वह नर्मदा में तब्दील हो गई । ठीक वैसे ही जैसे गंगा से मिलकर सब कुछ गंगा हो जाता है । लेकिन मध्यप्रदेश के सरकारी अफसर तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुमराह करने में लगे थे सो नर्मदा और क्षिप्रा में हुए झोलझाल को दबा दिया गया । साधुओं ,संत महात्माओं और शिवराज सिंह के आकर्षक विज्ञापनों की चकाचौंध में सिंहस्थ को आस्था का केंद्र बनाए जाने की बजाए बाजार में तब्दील करने की कोशिश अफसरों ने की । लेकिन हुअत वही जो राम रची राख । पहले दिन से ही सिंहस्थ पर मुख्यमंत्री की अफसरी भारी पड़ गयी और उज्जैन उन नज़रों से वंचित रह गया जो उसे बारह बारस बाद यहाँ देखने थे । कड़वा सत्य पहले दिन कुम्भ की जो छटा होती है ,वह इस बार नदारत रही । सरकारी कारिंदों ने कुम्भ के पहले दिन लोगों की संख्या को लेकर कुतर्क किये। कहा गया पचास लाख लोग आये हैं। लेकिन संख्या बमुश्किल पांच लाख के आसपास रही । जिन लोगों ने पिछले उज्जैन कुम्भ को देखा था उनका कहना था इस बार श्रद्धालु कम और सरकारी इंतजाम अली ज्यादा हैं । जिस कारण यह मेला श्रद्धा का केंद्र होने की बजाये बड़े बाजार में तब्दील सा हो गया । महंत चतुरानंद ने तो यह तक कहा कि सरकार ने धर्म के मामले में जो अति उत्साह दिखाकर सरकारीकरण कर दिया है । वह न तो उज्जैन के लिए न ही सिंहस्थ के लिए हितकर है । स्वामी पुष्करनंद का कहना है धर्म अपना काम अपने आप करता है वह किसी का मोहताज नहीं है खासकर सरकार का तो कतई नहीं है । सरकार ने जहाँ जहाँ टांग अड़ाई वहां वहां बंटाधार ही होता है। कुम्भ के पहले दिन पहले शाही स्नान का दिन इतना सामान्य रहा कि उज्जैन वाले सरकारी इंतजामात को कोस्ते नजर आये। श्रद्धालु कम और पुलिस और शासकीय कर्मचारी इस सिंहस्थ की शोभा बढ़ाते नजर आये। नर्मदा के टत पर अमृत का मेला ऋषि अजयदास की माने तो सरकार ने क्षिप्रा को ख़त्म कर दिया है। जैसे ही नर्मदा जल से क्षिप्रा को भरा गया क्षिप्रा का अस्तित्व ही ख़त्म हो गया। अब इसका प्रचार ''क्षिप्रा के तट पर अमृत का मेला '' नहीं ''नर्मदा के तट पर अमृत का मेला होना चाहिए। ऋषि अजय दास कहते हैं संत समुदाय ने इस बार खासकर नागा साधुओं ने काफी सयंम से काम लिया नहीं तो सरकार की इस गलती के लिए उसे लेने के देने पड़ जाते। सिंहस्थ का आकर्षण साधू सन्यासी होते हैं अगर नर्मदा के मसले पर वे बेरुखी अख्तियार कर लेते तो सिंहस्थ प्रारम्भ ही नहीं हो पाता। इस कारण वैसे भी उज्जैन सिंहस्थ कुछ नीरस सा है। बुद्धू बनाया बुद्धूबक्से ने मध्यप्रदेश के रीजनल चैनल के रिपोर्टर ऐसे भागा दौड़ी कर के रिपोर्ट दे रहे थे कि पांव रखने की जगह नहीं है। लेकिन हाल वहां आगे पाट पीछे सपाट वाला था। चंद सिक्कों में गिरवी रखे यह न्यूज़ चैनल आम लोगों को बुद्धू बनाने में लगे थे । जिन लोगों ने इनका झूठ देखा उसे लगा भोपाल से उज्जैन तक के सारे रास्ते श्रद्धालुओं से अटे पड़े हैं। मजे की बात यह है कि सिंहस्थ को लेकर जनसम्पर्क विभाग ने अँधा बांटे रेवड़ी की तर्ज पर विज्ञापन बांटे और समझ लिया कि कुम्भ सफल हो गया। सरकार के पिट्ठू न्यूज़ चैनल को जनसम्पर्क विभाग के भूतल पर बैठने वाले एक अधिकारी कमांड दे रहे थे की अब तक 10 लाख लोग पहुंचे हैं और अब 30 लाख पहुँच गए हैं यह चलाएं। एक चैनल प्रमुख ने यह सब रिकॉर्ड कर लिया है। जाहिर है झूठ के हाथ पैर नहीं होते। अभी तो सिंहस्थ शुरू हुआ है और घपलों घोटालों की बू आने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता सक्रीय हो गए हैं। धीरे धीरे rti के जरिये दूध का दूध और पानी का पानी होगा कि कितने कितने का घपला किस किस ने किया है। सरकारी कारिंदों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को गुमराह कर के 500 करोड़ के ऊपर की राशि सिर्फ प्रचार-प्रसार में खर्च कर दी,140 करोड़ के टूटे-फूटे शौचालय बनवा दिए। सरकारी माल का दुरूपयोग कैसे किया जाता है उज्जैन सिंहस्थ इसकी भी मिसाल बनेगा। चांडाल योग चांडाल योग और कुम्भ की जब बात होती तो यह नोट खाऊ अफसर कह देते कि कहे का चांडाल योग , क्या बिगाड़ लेगा ... हमारा कुछ बिगड़ा क्या ? जितने मालखाने वाले हैं उनके लिए चांडाल योग और सिंहस्थ लाभ का सौदा रहा है ,लेकिन महाकाल इनकी ऐसी कुगत करेंगे कि इनकी शक्लें इतिहास के चांडालों में दर्ज हो जाएंगी ।वैसे भी इस बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सिपहसलारों ने सिंहस्थ का सरकारीकरण कर उसका सत्यानाश कर दिया हैं ऐसे में भाड़े का मीडिया है जिसे सिर्फ हरा ही हरा दिख रहा है ,ऐसा लगता है मीडिया कि जवाबदेही जनता के प्रति न होके भ्रस्ट सिस्टम के प्रति हो । मुख़्यमंत्री शिवराज सिंह ने जब सिंहस्थ शुरू होने से पहले मीडिया को चाय पर बुलाया तो एक पत्रकार ने कहा साब माल [विज्ञापन ] दे कर गले तक तर कर दिया है। जाहिर है जो गले तक तर हैं वह पत्रकारिता क्या करेंगे और सच क्या लिखेंगे और क्या सच दिखाएंगे। फिलहाल चांडाल योग का असर अभी ब्रम्हांड पर है। उज्जैन , सिंहस्थ और इसके इंतजाम अली इससे बचे रहें हम सिर्फ इसकी प्रार्थना कर सकते हैं।

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 MadhyaBharat  23 April 2016

हर एंगल से मुस्कराती है शालभंजिका

दसवीं सदी की नायिका के पथरीले चेहरे पर जो जीवंत मुस्कुराहट आज भी है उसका मुकाबला आज की नायिकाएं शायद ही कर पाएं । यहां बात हो रही है शालभंजिका की 10 वीं सदी में एक कलाकार द्वारा पत्थर की मूर्ती बनाई गई जो निष्प्राण होकर भी सजीव व सभी भावों से युक्त नजर आती है। ग्वालियर के पुरातत्व विभाग के ऐतिहासिक भाग गूजरी महल में रखी हुईं अनेकों ऐसी ऐतिहासिक महत्व की प्रतिमाएं हैं जो अपने आप में युगों का इतिहास बयां करती प्रतीत होती हैं।शालभंजिका10 वीं सदी की इस मूर्ती की खासीयत है हर कोण से इसके चेहरे पर मुस्कुराहट दिखाई देती है। यह एक ऐसी नायिका है जिसको अपने लंबे अंतराल के बाद अपने प्रियतम के आने का समाचार मिलता है और इसको लेकर उसके संपूर्ण अस्तित्व पर एक अनन्तहीन मोहक मादक मुस्कुराहट छाजाती है। जिस कक्ष में यह मूर्ती रखी गई है उसमें पंखे व लाइट की विशेष व्यवस्था है। सुरक्षा:विभागीय कर्मचारियों के अलावा पुलिस से भी इन प्रतिमाओं की सुरक्षा में सहयोग लिया जाता है। यहां पर भी हैं ऐतिहासिक धरोहरेंप्रदेश के विदिशा, सिहोनिया, बटेश्वर, पड़ावली, नरेश्वर, कदवा, थूगौन, कोटा, ग्वालियर किला आदि ऐतिहासिक स्थलों से विभागीय सर्वेक्षण में पुरातन महत्व की वस्तुएं मिलती हैं।

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एबीएल शालाओं की सघन मॉनीटरिंग के लिए बनी कार्य-योजना

राज्य शासन ने प्रदेश की 16,000 से अधिक एबीएल (गतिविधि आधारित शिक्षण) शालाओं की सघन मॉनीटरिंग के लिए विस्तृत कार्य-योजना बनाई है। शासन ने सभी जिला कलेक्टर से एक सप्ताह में एबीएल शालाओं की मॉनीटरिंग का कार्य प्रारंभ करवाने के निर्देश दिये हैं। कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे अकादमिक गुणवत्ता के उन्नयन की दृष्टि से प्रत्येक शाला में मॉनीटरिंग का कार्य तत्काल प्रारंभ करवायें। कलेक्टर जिले में कार्य-योजना संबंधी आदेश जारी करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, डाइट/ डीआरसी तथा जिला परियोजना समन्वयक को उत्तरदायी अधिकारी नियुक्त करेंगे। एबीएल शालाओं के अकादमिक उन्नयन के लिए प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व का निर्धारण किया गया है। जन-शिक्षा केन्द्र स्तर पर जनशिक्षक एवं जन-शिक्षा केन्द्र प्रभारी मॉनीटरिंग करेंगे। जन-शिक्षक अधीनस्थ शाला की प्रत्येक माह कम से कम एक बार आवश्यक रूप से मॉनीटरिंग करेंगें। वे माह प्रारंभ होने के पहले अपना कार्यक्रम जन-शिक्षा केन्द्र प्रभारी एवं डीआरसी को देंगे। मॉनीटरिंग के दौरान सुनिश्चित किया जायेगा कि एबीएल का संचालन सुचारू रूप से हो रहा है या नहीं। अकादमिक कमियाँ पाये जाने पर उसे दूर करने के प्रयास होंगे। वरिष्ठ स्तर से मदद की आवश्यकता होने पर संबंधित को अवगत करवाया जायेगा। अकादमिक प्रतिवेदन प्रत्येक माह भेजना होगा। जन-शिक्षा केन्द्र प्रभारी प्रत्येक माह जन-शिक्षकों के अकादमिक प्रतिवेदन के आधार पर कमजोर अथवा समस्या वाली शालाओं का भ्रमण करेंगे। प्रतिवेदन की समीक्षा में वरिष्ठ स्तर से सहयोग की अपेक्षा होने पर उसे अग्रेषित किया जायेगा।विकास-खण्ड स्तर पर पदस्थ बीएसी एवं बीआरसी के मध्य एबीएल चयनित जन-शिक्षा केन्द्रों को विभाजित करते हुए आदेश जारी होंगे। माह के पहले एवं दूसरे सप्ताह में बीएसी एवं बीआरसी द्वारा न्यूनतम 5-5 शाला का दौरा किया जायेगा। बीएसी एक शाला में आधे दिन रुककर कार्य देखेंगे। जिला-स्तरीय मॉनीटरिंग में जिला शिक्षा केन्द्रों तथा डाइट/ डीआरसी में पदस्थ समस्त डीपीसी और व्याख्याताओं के बीच विकास-खण्डों के चयनित जन-शिक्षा केन्द्रों का विभाजन किया जायेगा। उनके द्वारा जिले में प्रत्येक माह कम से कम 50-50 शाला का भ्रमण तीसरे एवं चौथे सप्ताह में अनिवार्य रूप से किया जायेगा। भ्रमण के दौरान आधे दिन शाला में रुककर गतिविधियों का अवलोकन किया जायेगा। शाला के अकादमिक उन्नयन के लिए कार्य-योजना तैयार करवाई जायेगी तथा उसका प्रतिमाह फॉलोअप होगा। भ्रमण करने वाले अधिकारी अपने कार्यक्रम की सूचना वरिष्ठ कार्यालय/ अधिकारी को देंगे। प्रत्येक त्रैमास में एबीएल शालाओं के उपलब्धि स्तर का परीक्षण कर प्राप्त परिणामों का विश्लेषण होगा तथा शालावार अकादमिक उन्नयन के लिए कार्य-योजना तैयार की जायेगी।राज्य स्तर से जिला प्रभारी के रूप में नियुक्त अधिकारी माह के चौथे सप्ताह में जिले की न्यूनतम 3 शाला का भ्रमण करेंगे। वे अकादमिक उन्नयन के प्रयासों की समीक्षा कर मार्गदर्शन देंगे। राज्य-स्तरीय मॉनीटरिंग के बाद अपर मिशन संचालक, राज्य शिक्षा केन्द्र को शालावार प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा। प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, राज्य शिक्षा केन्द्र से प्राप्त निर्देशों को जिला-स्तर पर भेजकर अकादमिक उन्नयन के लिए आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। यूनीसेफ के सलाहकारों द्वारा भी उनके कार्य-क्षेत्र में शालाओं की मॉनीटरिंग की जायेगी। प्रत्येक स्तर पर एबीएल शाला की समीक्षा बैठक कर कार्य-योजना तैयार की जायेगी। सभी स्तर पर कार्य की प्रगति का रिकार्ड रखा जायेगा। मॉनीटरिंग के आधार पर शालावार कार्य-योजना तैयार होगी।

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मैली नर्मदा ,मैले विभाग

मां रेवा (नर्मदा) को सभी नदियों में सबसे पवित्र माना गया है, लेकिन अब ये भी गंदगी की चादर ओढ़ रही है। विभागीय उत्तरदायित्व नहीं होने के कारण नर्मदा नदी की न तो सफाई हो पा रही है और न ही इसकी तरफ किसी का ध्यान है। कुछ वर्षों पूर्व नर्मदा विकास प्राधिकरण (एनव्हीडीए) ने नर्मदा की सफाई के लिए पहल की थी, लेकिन अब यह भी ठंडे बस्ते में है। अमरकंटक से निकलकर 1321 किलोमीटर तक बहने वाली नर्मदा नदी अपने साथ कई शहरों की गंदगी को भी बहाकर ले जा रही है। इसकी गंदगी को खत्म करने और सफाई के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन अब तक इसकी शुरुआत नहीं हो पाई। दो वर्ष पूर्व एनव्हीडीए ने नर्मदा बायो हेल्थ मॉनीटरिंग के जरिये इसकी सफाई की पहल की थी। इसके लिए टेंडर भी बुला लिए गए, लेकिन इस पहल को यह कहते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया कि यह एनव्हीडीए का विभागीय उत्तरदायित्व नहीं है। इसी तरह नगरीय प्रशासन विभाग ने भी नर्मदा नदी के किनारे बसे शहरों और गांवों की गंदगी से बचाने के लिए प्रयास किए, लेकिन अब तक इसके भी सार्थक नतीजे सामने नहीं आए हैं।फायदे ले रहे, लेकिन जिम्मेदारी नहींनर्मदा नदी से फायदा तो कई विभाग ले रहे हैं, लेकिन इसकी सफाई की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं। खनिज विकास विभाग नर्मदा नदी से रेत का उत्खनन करके करोड़ों रुपए सालाना कमाई कर रहा है।इसी तरह नगरीय प्रशासन विभाग भी नर्मदा के पानी का भरपूर उपयोग कर रहा है। एनव्हीडीए भी नर्मदा नदी पर बांधों का निर्माण करा है, लेकिन नदी की सफाई की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। इधर नर्मदा नदी के लिए बजट में करोड़ों रुपए की राशि सरकार द्वारा हर साल निर्धारित की जा रही है लेकिन नर्मदा नदी की सफाई के लिए इसमें से एक भी पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है।मास्टर प्लान की दरकारविशेषज्ञों के अनुसार नर्मदा नदी की सफाई के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिए। नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी है और इससे लाखों लोगों की प्यास बुझ रही है, वहीं बड़ी तादाद में किसानों को खेती के लिए पानी भी मिल रहा है। लेकिन सरकार का ध्यान इस तरफ नहीं है। यदि सरकार एक योजना के अनुसार इस पर अमल करे तो निश्चित रूप से नदी की सफाई का बीड़ा उठाया जा सकता है।

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खान नदी पुनर्जीवन परियोजना दो चरण में पूरी होगी

मुख्यमंत्री चौहान ने प्रस्तुत की 2719 करोड़ की परियोजनालोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने गंगा बेसिन में शामिल इंदौर की सरस्वती-चंद्रभागा (खान) नदियों के शुद्धिकरण के बारे में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट दो भाग में तैयार करने पर चर्चा हुई। प्रथम भाग सिंहस्थ के पूर्व पूर्ण किया जा सकता है। दूसरे भाग में परियोजना को पूर्णत: लागू करने के बारे में कार्य होगा।मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य सरकार की ओर से दोनों नदी को जीवंत करने की 2719 करोड़ रुपये की योजना रखी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल में स्नान करने का अवसर मिले, इसके लिये शासन कटिबद्ध है। दिसम्बर, 2015 तक पहले चरण का कार्य पूरा करने की बात भी श्री चौहान ने कही। मुख्यमंत्री ने कहाकि दो हिस्सों में यह कार्य-योजना पूरी हो सकेगी। पहले चरण में सीवरेज ट्रीटमेंट का कार्य होगा। दूसरे चरण में अगले पाँच साल की प्लानिंग की जायेगी।बैठक में, केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू, जल-संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती, राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार, ग्रामीण विकास मंत्री श्री नितिन गडकरी तथा वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वरिष्ठ अधिकारियों सहित शामिल हुए।बैठक में जल प्रवाह में जल-मल की रोकथाम, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्ण क्षमता से संचालन, जल प्रवाह के किनारों पर बसी आबादी के विस्थापन, जल प्रवाह के शुद्ध जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करना आदि बिन्दु पर चर्चा हुई। इंदौर-उज्जैन को स्थाई रूप से बेहतर पर्यावरण और स्वच्छ जल की उपलब्धता और सिंहस्थ-2016 में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी चर्चा हुई।श्रीमती महाजन ने कहा कि प्रोजेक्ट को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया जाए। उन्होंने कहा कि गंगा बेसिन में आने वाली इंदौर की इन नदियों को स्वच्छ और जीवंत करने से क्षिप्रा सहित अन्य नदियाँ भी स्वच्छ रह सकेंगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन किया जाये।केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने सलाह दी कि धनराशि की व्यवस्था के लिये पीपीपी पद्धति का भी उपयोग किया जाये। उन्होंने कहा कि इंदौर के अधिकारी नागपुर जाकर वहाँ गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर उद्योगों में उपयोग की जानकारी लें। साथ ही सुझाव दिया कि खान नदी का जल मार्ग के रूप में उपयोग करने की संभावना भी तलाशी जाना चाहिये। केन्द्रीय मंत्री श्री वैंकेया नायडू ने भी विविध पक्ष पर अपनी राय रखी।केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि तकनीकी सलाह के अनुसार उनका मंत्रालय गंगा बेसिन की इन नदियों के लिये कार्य करेगा। उन्होंने नदियों को पुनर्जीवित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। केन्द्रीय मंत्री श्री जावड़ेकर ने भी सुझाव दिये। इंदौर के महापौर श्री मोघे ने निगम द्वारा किये जा रहे सीवरेज लाइन के कार्यों की जानकारी दी।बैठक में संभागायुक्त दुबे ने बताया कि नदी की लम्बाई 78 किलोमीटर है, जो नगरीय क्षेत्रों में 33 किलोमीटर है। स्थाई एवं अस्थाई अतिक्रमणें के कारण भी ये नदियाँ प्रदूषित हुई हैं। उन्होंने बताया कि नदी क्षेत्रों में 33 स्लम्स हैं। प्रोजेक्ट के लिये लगभग 10 हजार परिवार को विस्थापित करना होगा। नदी तक आने-जाने के रास्ते, फुटपाथ और हरित क्षेत्र विकसित करने होंगे। नर्मदा-शिप्रा लिंक से चार-पाँच साल तक पानी छोड़ना होगा और फिर यहाँ जल-ग्रहण क्षेत्र विकसित हो जाएगा। प्रोजेक्ट के लिए एसपीवी का गठन करना प्रस्तावित है। सीवरेज सहित छह उपयोजनाएँ बनाना होगी। कुल 6 माह में डीपीआर बनाई जाएगी।आईआईटी, कानपुर के प्रो. विनोद तारे ने दोनों नदी को बारहमासी बनाने संबंधी प्रेजेंटेशन दिया। तय हुआ कि प्रो. तारे और संभागायुक्त श्री दुबे नेशनल रिवर मिशन के अंतर्गत कार्य-योजना प्रस्तुत करेंगे। प्रथम चरण में इंदौर की सीवरेज प्रणाली को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जोड़ा जाएगा। इसके बाद उपचारित जल को उज्जैन के पूर्व डायवर्ट कर उज्जैन के आगे कालियादेह महल के पश्चात जोड़ा जाएगा। इंदौर के प्रस्तावित कार्य वर्तमान में लगभग 400 करोड़ रुपये के होंगे, जिसके लिये केन्द्र की विभिन्न योजनाओं में राशि स्वीकृत की जायेगी। दूसरे चरण में किनारों की बसाहट का विस्थापन और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य किया जाएगा। दोनों चरण की योजना के लिए शीघ्र ही विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाकर स्वीकृति ली जाएगी।बैठक में मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, कलेक्टर इंदौर और उज्जैन भी शामिल हुए।

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तुम्हीं सो गए दास्तां कहते कहते.....!

जुलैख़ा जबीं''हमारा संघर्ष यही होना चाहिए कि दुनिया में सामाजिक न्याय हो, भेदभाव खत्म हो, सबके साथ इंसाफ हो, सबकी जरूरतें पूरी हों. और हमें इस लड़ाई को लड़ते रहना है, सभी के साथ मिलकर, लगातार. ऐसा नहीं कि मैं सिर्फ इस्लाम के नाम पर लडूं, आप सिर्फ हिंदू धर्म के नाम पर लडें, कोई बौद्ध धर्म के नाम पर लड़े- नही हम सबको साथ आना चाहिए. क्योंकि हम, आप और बाक़ी बहुत सारे यही कह रहे हैं कि सामाजिक न्याय हो, बराबरी हो, गैर बराबरी खत्म हो, जो इस गैर बराबरी को बढ़ावा देने वाले हैं उन सभी के खिलाफ हमें एकजुट होकर लड़ना होगा. यही देश भक्ति है और सबसे बड़ी इबादत भी.’’ (डा इंजीनियर)दुनिया में कट्टरपन के खिलाफ सदभावना के लिए, मजहबी नफरत के खिलाफ अमन के लिए, सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ बहनापे और भाइचारे के लिए, सामाजिक अन्याय के खिलाफ इंसाफ के लिए आजीवन संघर्षरत डा असगर अली इंजीनियर पिछले एक बरस से हमारे बीच नहीं रहे. मगर इंसानी समाज में इंसानियत की स्थापना के लिए, मोहब्बत की जो मशाल उन्होंने जलाई है वो रहती दुनिया तक क़ायम और रौशन रहेगी. हर तरह के कटटरपन और सामंतवाद के खिलाफ डा. इंजीनियर ने अपनी आवाज बुलंद की है. अपनी कलम के जरिए, शिक्षण और प्रशिक्षण के जरिए, सभाओं, गोष्ठियों, सेमीनार, कार्यशालाओं के जरिए, आम जनता के नजदीक पहुंचने के हर संभव तरीकों और माध्यमों का इस्तेमाल वे अपने आखिरी दम तक करते रहे हैं. जातिवादी नफरत के खिलाफ उनकी कलम की धार पीड़ितों के पक्ष में हमेशा तेज रही. डा इंजीनियर हिंदोस्तानी गंगा-जमनी तहज़ीब, संप्रभुता और विविधता में एकता के जबरदस्त हामी रहे हैं. वे हमेशा कहा करते थे “बेशक आस्था जरूरी है मगर जब आस्था अंध विश्वास की शक्ल ओढ़ लेती है तब वह इंसानी समाज के लिए खतरनाक हो जाती है.” और यहीं से शुरू होती है वो जंग जिसका रास्ता और तरीक़ा डा असगर अली इंजीनियर ने हम सबको दिखाया है.सेंटर फार स्टडी आफ सोसायटी एंड सेक्युलरिज्म के अध्यक्ष और इस्लामिक विषयों के प्रख्यात विदवान डा असगर अली इंजीनियर की पहचान मजहबी कटटरवाद के खिलाफ लगातार लड़ने वाले योद्धा के तौर पे मानी जाती रहेगी. डा इंजीनियर मानना था कि दुनियां में जहां पर भी इस्लाम के मानने वालों पर जुल्म हुआ है, वहां के लोग लड़ाई के लिए उठ खडे हुए हैं. वे मानते हैं कि ’’कट्टरपंथ मजहब से नहीं सोसायटी से पैदा होता है’’ उनकी राय में ’’भारतीय मुसलमान इसीलिए अतीतजीवी हैंे क्योंकि यहां के 90 फीसदी से ज्यादा मुसलमान पिछड़े हुए हैं और उनका सारा संघर्ष दो जून की रोटी के लिए है इसलिए उनके भीतर भविष्य को लेकर कोई ललक नहीं है’’. यही नहीं, हिंदू कट्टरपंथ की वजह बताते हुए वे कहते है कि ’’जब दलितों, पिछड़ों व आदिवासियों ने अपने हक मांगने शुरू किए तो ब्राहमणों को अपना पावर खतरे में नजर आया और उन्होंने मजहब का सहारा लिया, ताकि धर्म के नाम पर सबको साथ जोड़ लें, लेकिन ये सोच कामयाब होती नजर नहीं आ रही है इसलिए उनका कटटरपंथ और तेजी से बढता जा रहा है. ताकि वह जरूरी मुददों से लोगों का ध्यान हटाएं और हिंदू धर्म के नाम पर सबको एक करने की कोशिश करें. और यही इसकी बुनियादी वजह है’’. जब दुनिया में इस्लामी आतंकवाद का प्रोपेगंडा अपने चरम पे था, हमारे मुल्क के अंदर भी मुसलमानों को लेकर शक-ओ-शुबहा बढ़ने से बेगुनाहों पर सरकारी जुल्म बढने लगे और सांप्रदायिक दंगों में जानो माल का इकतरफा नुकसान, बेकुसूर नौजवानों की गिरफतारी, झूठे मुकदमे, फर्जी एनकाउंटर बढ़ने लगे, समाज में आपसी नफरत बढ़ने लगी और मुस्लिम समाज दहशत की वजह से खुद अपने में सिमटने लगा, और कुछ स्वार्थी राजनैतिक तत्वों के जरिए, सुनियोजित तरीके से फैलाई जा रही नफरत से निपटने के लिए, शिक्षण प्रशिक्षण के ज़रिए, समाज मेें समरसता, बहनापा, भाईचारा क़ायम करने डा. इंजीनियर ने आल इंडिया सेक्युलर फोरम की शुरूआत की. जिसमें उनके अलावा देश की कई जानी पहचानी सेक्यूलर हस्तियां शामिल हुईं. इसके साथ ही देश में किए जा रहे सांप्रदायिक दंगों के पीछे की असलियत जानने के लिए उन्होंने खुद ही जांच दल गठित कर, घटनास्थलों में जाकर तफतीश की, रिपोर्ट तैयार की और संबंधित विभागों, राज्यपालों व केंद्र और राज्य सरकारों को सौंपी. मुल्क में बढ़ती जा रही मजहबी कटटरता पे उनका स्पष्ट मानना रहा है कि कटटरपंथ मजहब से पैदा नहीं होता वह मौजूदा समाज से पैदा होता है. बडी बेतकल्लुफ़ी से वे बताते हैं, आज से क़़रीब 70 बरस पहले देश में मुस्लिम लीग की मज़़बूती के पीछे भी यही वजहें थीं. क्योंकि उस वक्त जो मुस्लिम एलीट वर्ग यूपी, बिहार वगैरह का था, उसको लगा कि आजाद हिंदोस्तान में उसके हाथ से सत्ता पावर निकल जाएगा. इसलिए वे मुस्लिम लीग में गए उन्हें लगा कि लीग उन्हें और उनके प्रभुत्व को बचा लेगी. और लीग ने पाकिस्तान बनवा डाला और यहां का एलीट क्लास ये सोचकर पाकिस्तान चला गया कि वहां उनका भविष्य महफूज़़ रहेगा. मगर वहां की हकीक़़त आज हमारे सामने है कि धार्मिक कटटरपंथ के एवज़ बने किसी देश का भविष्य कितना अंधकारमय होता है. यही हिंदू कटटरपंथियों के साथ हो रहा है. वे सोचते हैं कि अगर वे हिंदू धर्म का सहारा नहीं लेंगे तो ये दलित, पिछड़े, आदिवासी सब सत्ता में आ जाएंगे और इसीलिए इन सबको सत्ता के पावर से दूर रखने के लिए हिंदू धर्म की बात करते हैं. वे कटटरपंथ की बात मजहब का नाम लेकर करते हैं ताकि बहुसंख्यक जन उनके साथ जुड़ जाए.डा इंजीनियर लोकतंत्र में अटूट विश्वास रखने वालों में रहे हैं. वे कहते हैं “चूंकि यहां लोकतंत्र है और दलित, पिछड़े भी इसे समझ रहे हैं कि वे लोकतांत्रिक तरीके से ही इसका मुकाबला कर सकते हैं. अगर आज लोकतंत्र न रहे और इस तरह की राजनीति बेखौफ बढती रहे तो वे सबको जेल में डाल देंगे, फांसी चढा देंगे, गोली मार देंगे, और फिर सब चुप हो जाएंगे तब तक के लिए, जबतक फिर से लोकतंत्र नहीं आ जाता..“डा इंजीनियर ने औरतों खासकर मुस्लिम औरतों के आर्थिक सामाजिक हालात सुधारने के लिए बहुत काम किया है. उन्होंने अपनी क़लम से मजहब के उन स्वयंभू ठेकेदारों के खिलाफ आवाज बुलंद की है जिन्होंने मुस्लिम औरतों के कुदरती, इंसानी हक़ मजहब के नाम पर दबा रखे हैं. इसके लिए उन्होंने ’’ क़ुरआन में औरतों के हक़’’ नाम से एक किताब भी लिखी साथ ही इस विषय पे बाकायदा प्रशिक्षण शिविरों का भी आयोजन पूरे मुल्क में किया. डा. साहब चाहते थे कि मुस्लिम समुदाय में से ही उच्च शिक्षित खातून आगे बढ़ें और अरबी का ज्ञान हासिल करें ताकि क़ुरआन में दिए गए अपने हक़ूक़ मर्दवादी समाज से हासिल कर सकें. बतौर भाषा अरबी सीखने और सिखाने के लिए अंग्रेजी, उर्दूू और हिंदी का प्राइमर भी तैयार कर चुके थे और इसका इंतेजाम उन्होंने बांबे स्थित अपने आफिस में कर भी रखा था. ताकि बाहर से आई हुई कुछ चुनिंदा खातून इसमें महारत हासिल कर सकें. लेखिका को भी आपने अपनी मंशा से न सिर्फ अवगत कराया था बल्कि उनके पास रहकर अरबी की पढ़ाई पूरी करने का आफर भी दिया था. उनका खाब था कि कुछ हिंदोस्तानी ख्वातीन सामाजिक न्याय, बराबरी और औरतों के हक़ुक़ से संबंधित कुरआन के रौशन पहलू को तर्जुमे के साथ आमजन तक पहुंचाने का जिम्मा उठाएं.. वे कहते हैं कि ’’जब समाज हमेशा एक सा नहीं रह सकता बदल जाता है, तो उसके क़वानीन (क़ानून) एक से कैसे रहेंगे ? उन्हें भी समाज में होने वाले बदलाव के साथ बदलना ही होगा’’. बेशक डा. इंजीनियर आज हमारे बीच नहीं रहे मगर इंसानी दुनिया से नफरत, गैर बराबरी और बेइंसाफी मिटाने के लिए, किए गए उनके तमाम काम और काविशों का बोलबाला कायम रखने के लिए, उनके छेडे़ गए जेहाद के बिगुल को सांस देेने की जरूरत है. यही डा़ असग़र अली इंजीनियर को सच्ची ख़िराजे अक़ीदत (श्रद्धांजली)होगी

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नर्मदा शुद्धिकरण के लिये 1300 करोड़ की योजना पर अमल शीघ्र

बान्द्राभान में तृतीय अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के जल को शुद्ध रखने के लिए 1300 करोड़ रूपए लागत की कार्य योजना तैयार की गई है। कार्य योजना की शुरूआत उद्गम स्थल अमरकंटक से की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज बांद्राभान में तृतीय अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव- के द्वितीय सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गंगा समग्र अभियान की सूत्रधार और पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती, नर्मदा समग्र के अध्यक्ष श्री अमृतलाल वेगड़, संयोजक श्री अनिल माधव दवे और श्री अतुल जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में नदियों को पूजा जाता है। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता के बगैर नदियों का संरक्षण संभव नहीं है। किनारों पर अवस्थित गाँवों में रहने वाले लोग संकल्प लें कि वे नदियों के जल को प्रदूषित नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपने स्तर पर तो नर्मदा सहित राज्य की सभी नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए प्रयत्नशील है। इसी दिशा में राज्य के सभी गाँवों में मर्यादा अभियान के तहत 15 लाख शौचालय के निर्माण का कार्यक्रम हाथ में लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के किनारों पर पेड़ कट जाने के कारण वृक्षों से रिसने वाला पानी अब नदियों में नहीं आ रहा है। इसी प्रकार नदियों के किनारों पर व्यवसायिक गतिविधियाँ बढ़ जाने से नदियों के जीवतंत्र को क्षति पहुँची है। मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों को नदियों के किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने का संकल्प लेने की सलाह दी।सुश्री उमा भारती ने कहा कि हमारी संस्कृति सर्व-समावेशी है। नदियाँ हमारी जीवनदायिनी हैं लेकिन हम नदियों को कुछ लौटाते नहीं हैं। सुश्री भारती ने गंगा समग्र अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि नदी किनारों पर सीवेज के गंदे पानी को नदियों में मिलने से रोकने के लिए जल उपचार संयंत्र स्थापित किये जाने चाहिए। सुश्री उमा भारती ने कहा कि नदियों के जल के अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए वहाँ होने वाले खनन का रूकना भी जरूरी है।श्री अमृतलाल वेगड़ ने कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए सामाजिक चेतना जाग्रत करना भी नर्मदा समग्र अभियान का उद्देश्य है। श्री वेगड़ ने कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को तथा अनिल माधव दवे ने सुश्री उमा भारती को स्मृति-चिन्ह भेंट किये।श्री अनिल माधव दवे ने कहा कि इस वर्ष नदी महोत्सव की थीम ‘‘हमारी नदियाँ, नीति एवं नेतृत्व’’ रखी गई है। श्री दवे ने कहा कि नर्मदा समग्र अभियान के अंतर्गत राज्य में आगामी 10 वर्ष में जैविक और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के प्रयत्न किये जायेंगे। महोत्सव में जन-प्रतिनिधि, प्रचार माध्यमों के प्रतिनिधि तथा देश-विदेश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में शामिल थे।

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नर्मदा शुद्धिकरण के साथ वृक्ष लगाएँ

नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री बाबूलाल गौर ने कहा है कि समग्र नर्मदा शुद्धिकरण योजना के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम को प्राथमिकता से किया जाये। उन्होंने उद्योग एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को वृक्षारोपण के लिये आरक्षित भूमि के प्रस्ताव शीघ्र कलेक्टर को भेजने के निर्देश दिये। श्री गौर आज मंत्रालय में समग्र नर्मदा शुद्धिकरण योजना की बैठक ले रहे थे। बैठक में जल-संसाधन एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयंत मलैया, राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा एवं नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री श्री मनोहर ऊँटवाल भी मौजूद थे।मंत्री गौर ने नर्मदा नदी से लगे शहरों के मास्टर प्लॉन शीघ्र तैयार किये जाने के लिये भी कहा। बैठक में बताया गया कि चित्रकूट का मास्टर प्लॉन शीघ्र बनकर तैयार हो रहा है। प्रदूषण निवारण मण्डल के अधिकारियों ने बताया कि नर्मदा नदी से लगे 12 उद्योग को प्रदूषण की दृष्टि से चिन्हित किया गया था, उनकी जाँच में यह पाया गया है कि इन उद्योग का अपशिष्ट नर्मदा नदी में नहीं मिल रहा है। शहडोल जिले की अमलाई पेपर मिल से होने वाले जल प्रदूषण में 30 प्रतिशत की कमी कर ली गई है। आने वाले 6 माह में उपचार संयंत्र के जरिये प्रदूषण में शत-प्रतिशत कमी को पूरा किया जायेगा। उद्योग विभाग ने बताया कि नर्मदा नदी से लगे जिलों में पहले चरण में 20 लाख पौधे लगाये जाने हैं। समग्र योजना में पौने तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाये जाने की कार्य-योजना तैयार की गई है। इस कार्य में औद्योगिक संगठनों की मदद ली जा रही है।नर्मदा शुद्धिकरण योजना के लिये 53 शहरों की जल-प्रदाय, ठोस कचरे के निपटान एवं सेनीटेशन की योजनाएँ बना ली गई हैं। अमरकंटक में गायत्री तथा सावित्री नदियों में मिल रहे प्रदूषित जल को रोकने के लिये शोधन-यंत्र की भी स्थापना की गई है। नर्मदा नदी से लगे शेष शहर में साइकिल बॉयो-टेक्नालॉजी के माध्यम से जल-शोधन की कार्य-योजना मार्च, 2013 तक तैयार कर ली जायेगी। अमरकंटक में घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करने की योजना को लागू किया गया है। पवित्र नगरी अमरकंटक में बाहर से आने वाले निर्धन वर्ग के यात्रियों के ठहरने के लिये रैन-बसेरा का भी निर्माण किया जा रहा है।

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शक्ति और ज्ञान के साधक राजा भोज

लक्ष्मीकांत शर्माहम कई अवसरों पर एक लम्बे अंतराल के बाद घटनाओं के दोहराए जाने की बातें सुनते, देखते आए हैं । ऐसा लेकिन क्यों होता है, इसके मूल में जाकर स्थितियों-परिस्थितियों के ज्ञान और विश्लेषण के आधार पर सब कुछ साफ पता चल सकता है । शक्ति की उपासना और इसे साध कर एक श्रेष्ठ शासन संचालित करने की पहचान वाले महान राजा भोज का सहस्त्राब्दी समारोह मध्यप्रदेश में करना मध्यप्रदेश सरकार की एक वैसे ही इतिहास को दोहराने की बानगी है । किसी अच्छाई को आदर्श मानकर उसका अनुकरण किसी की भी प्रगति का मूल मंत्र होता है । परन्तु यदि कोई सरकार इस आदर्श के साथ जनता के व्यापक हित में आगे आती है तो यह निश्चित ही अत्यंत महत्वपूर्ण बात हो सकती है । इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प की आवश्यकता होती है तथा यही इस दिशा में निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने के परिचायक बनते हैं । बीते एक हजार वर्षो में परिस्थितियों और स्थितियों में भारी बदलाव आए हैं । ऐसे में आज महान शासक राजा भोज के विचारों, सिद्धांतों एवं शासन की रीति-नीतियों के अनुसरण की मंशा सिर्फ प्रासंगिक ही नहीं, नितांत आवश्यक भी है । राजा भोज की नगरी यानि आज के भोपाल में शक्ति और ज्ञान के इस महान साधक की याद को ताजा करने के उपक्रम में मध्यप्रदेश सरकार ने उनकी प्रतिमा स्थापित करने के अपने निर्णय को साकार कर लिया है । इससे भोपाल ताल के करीब वीआईपी मार्ग पर गुजरने वाले हर एक व्यक्ति और विशेषकर शासक, प्रशासकों के मस्तिष्क में जहाँ राजा भोज की स्मृतियां उभरेंगी वहीं उनके मन को एक स्वस्थ, स्वच्छ और पुरूषार्थी शासक के आदर्शो को आत्मसात करने के लिए प्रेरित भी करेंगी ।राजा भोज की स्पष्ट और दृढ़ मान्यता थी कि किसी भी सुशासन की परिकल्पना शक्ति और ज्ञान के बगैर संभव नहीं है । इतिहास में ऐसे एकाधिक अवसर आए हैं इन दोनों में से किसी एक की भी रिक्तता ने सारी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्थाएँ चरमरा दीं । प्रजातांत्रिक देश में शासन को शक्ति जनता से प्राप्त होती है । पर्याप्त ज्ञान के बगैर इस शक्ति के दुरूपयोग की आशंकाएं कोरी भी नहीं हैं । इन आशंकाओं को समूल नष्ट करने का दायित्व सरकारों का ही तो है जिसे निभाने के लिए उनक सदैव सजग, सक्रिय और तत्पर रहना तथा जनआकांक्षाओं को पूरा करना आज सबसे बड़ी आवश्यकता है । इस दिशा में राजा भोज आदर्श प्रस्तुत करते हैं । राजा भोज का चिन्तन व्यापक था । इसमें किसी भी संकीर्णता का कोई स्थान नहीं था । उनकी यही सोच सुशासन का आधार हो सकती है । लोगों की कठिनाईयों और पीड़ाओं की अनुभूति कर उनके समाधान की राहें खोजना और उन्हें भी यह अनुभव कराना कि उस मुश्किल दौर में कोई उनके साथ खड़ा है, यही सच्चे-अच्छे शासन की पहचान है । महान विभूतियों के आदर्शो और जीवन मूल्यों को अपनी रीति-नीतियों में पुर्नस्थापित करने के लिए आज निश्चित ही साहस की जरूरत है । मध्यप्रदेश में सरकार के लोग इसके लिए हर चुनौती उठाने के लिए तैयार है । भोज नगरी में मकान शासक की प्रतिमा स्थापित करने के लिए जो नैतिक बल चाहिए था, उसे सरकार ने पिछले सात सालों में अपनी रीति-नीतियों के माध्यम से अर्जित करने के ईमानदार प्रयास किये हैं । आज भी जनकल्याण के नए-नए प्रयोगों को सच्चा बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान निरंतर प्रयासरत हैं । राजा भोज के सिद्धान्तों पर यहाँ की सरकार भी लोगों को शक्तिशाली बनाना चाहती है ं संकटकाल में संस्कृति ही किसी राष्ट्र को एकजुट होकर उससे जूझने में समर्थ बनाती है । राजा भोज ने भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत किया । योद्धाओं और कुशल शासकों से विश्व का इतिहास भरा पड़ा है । भारत में भी एक से एक बढ़कर महान प्रतापी और पराक्रमी शासक हुये हैं, लेकिन ज्ञान, साहित्यानुराग, कला संगीत प्रेम तथा सहृदयता के महान गुणों से विभूषित ऐसे राजा कम होते हैं, जिनके नाम सुनते ही मन श्रद्धा से भर जाए । सम्राट अशोक, सम्राट विक्रमादित्य, सम्राट समुद्रगुप्त, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य आदि ऐसे ही शासक हुये हैं, जिनके राज कौशल के साथ-साथ मानवीय गुणों तथा कला प्रेम को विश्व भर में मुक्त कंठ से सहारा जाना है । परमार वंश के महान दार्शनिक शासक महाराजा भोज इसी श्रृंखला के ऐसे ही गौरव पुरूष हैं। मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है कि भारत के इन महान राजाओं में सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज इसी भू-भाग के शासक रहे । महाराजा भोज ने जहाँ अधर्म और अन्याय से जमकर लोहा लिया और अनाचारी क्रूर आतताइयों का मानमर्दन किया, वहीं अपने प्रजा वात्सल्य और साहित्य-कला अनुराग से वह पूरी मानवता के आभूषण बन गये । मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक गौरव के जो स्मारक हमारे पास हैं, उनमें से अधिकांश राजा भोज की देन हैं । चाहे विश्व प्रसिद्ध भोजपुर मंदिर हो या विश्व भर के शिव भक्तों के श्रद्धा के केन्द्र उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, धार की भोजशाला हो या भोपाल का विशाल तालाब, ये सभी राजा भोज के सृजनशील व्यक्तित्व की देन है । उन्होंने जहाँ भोज नगरी (वर्तमान भोपाल) की स्थापना की वहीं धार, उज्जैन और विदिशा जैसी प्रसिद्ध नगरियों को नया स्वरूप दिया । उन्होंने केदारनाथ, रामेश्वरम, सोमनाथ, मुण्डीर आदि मंदिर भी बनवाए, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है । इन सभी मंदिरों तथा स्मारकों की स्थापत्य कला बेजोड़ है । इसे देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि एक हजार साल पहले हम इस क्षेत्र में कितने समुन्नत थे । राजा भोज की गौरव गाथा के बिना मध्यप्रदेश की पहचान नहीं हो सकती । राजा भोज की प्रतिमा की भोपाल में स्थापना उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से नयी पीढ़ी को अवगत कराने के लिए हमारी सरकार का एक विनम्र प्रयास है । शहरों और राज्यों के नाम कलान्तर में विभिन्न कारणों से बदल जाते हैं । भोपाल के साथ भी ऐसा ही हुआ है । राजा भोज द्वारा निर्मित इस नगरी का मूल नाम देवल भोज नगरी है । इसके ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं । कालान्तर में इस नगर का नाम बिगड़कर भोजपाल, भूपाल और इसके बाद भोपाल हो गया । भोपाल के मूल नाम को वापस करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने चाहिए । इसमें किसी को एतराज नहीं होना चाहिए क्योंकि ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ भारत के नगरों और राज्यों का नाम बदलकर मूल नाम रखा गया । मुम्बई, बंगलूरू, चेन्नई, तिरूवनंतपुरम, पुदुचैरी, कोलकाता आदि इसके उदाहरण हैं । हमने राजा भोज सहस्त्राब्दी समारोह को पूरे वर्ष मनाने का निर्णय लिया है । महाराजा भोज की गरिमा के अनुरूप आयोजित इस शुभारंभ समारोह पर ही भोपाल के इतिहास में पहली बार विश्व स्तरीय उपकरणों से सुसज्जित विशाल मंच पर एक भव्य समारोह आयोजित हो रहा है । भोपालवासियों के लिए आज का दिन निश्चिम ही अविस्मरणीय रहेगा । श्री शिवमणि, प्रिंस ग्रुप, श्री सुखविन्दर सिंह तथा अन्य कालाकारों की प्रस्तुतियों को कला रसिक हमेशा याद रखेंगे । कामनवेल्थ खेलों में जैसी आतिशबाजी हुई थी, उसी प्रकार की आतिशबाजी २८ फरवरी को लाल परेड पर होगी । मुझे आशा है कि समाज के सभी वर्गो के लोग शासन के इस प्रयास में सहभागी बनेंगे । इससे हमारा सांस्कृतिक गौरव पुनः प्रतिष्ठा होगा । अपने गौरवशाली राजा की अगवानी में भोपालवासियों से उल्लास के साथ उत्सव में शामिल होकर इतिहास के साथी बनने की अपेक्षा है ।

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सिर्फ नर्मदा स्नान से नहीं बदलेंगे आदिवासियों के सूरते हाल

आजादी के इतने लंबे समय बाद यदि हम भारत के विकास का आंकलन करे तो ,तस्वीर उजली दिखती है |अंग्रेजों ने देश को आर्थिक रूप से क्षतिग्रस्त कर हमें रेलवे लाइन के जाल के साथ छोड़ दिया था |उसके बाद देश ने अनेक क्षेत्रों में बहुत प्रगति करी है ,लेकिन भारत के एक बड़े भू-भाग में निवासरत आदिवासी समुदाय का विकास और उन्नति उस गति और तीव्रता से नहीं हो सकी, जैसी की देश ने अन्यों क्षेत्रों में करी है |आदिवासी विकास के क्षेत्र में अब तक लगाए गए संसाधन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके है |इस कड़वी सच्चाई को हमें स्वीकार करना ही होगा |गुजरात के डांग जिले में शबरी स्थान से लेकर पांच साल बाद नर्मदा स्नान तक कि अवधी में इस समुदाय की दशा और दिशा दोनों ही अपरिवर्तनीय रही है |इस का एक बड़ा कारण इस समुदाय को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर देखना है |ये आज भी देश के अनेक दुर्गम और अनसुचित क्षेत्रों में निवासरत है |यह समुदाय वर्तमान में भी स्वयं को प्रकृति की संतान और रक्षक मानकर उसके समीप रहने में ही विश्वास करता है |ये लोग शहरी सभ्यता के सामान प्रकृती का अंधधुंध दोहन नहीं करते, अपितु प्रकृति से उतना ही लेते जितना जीवन यापन को अवशक है|इसी विचार धारा के चलते यह समुदाय समाज के अन्य वर्गों की तुलना में हर क्षेत्र में पीछे छूट गया है ,जहाँ इनका वास्ता सिर्फ गरीबी और दुखों से पड़ रहा है| परंपरागत जीवन शैली का आदी ये आदिवासी समुदाय इन सब कारणों से बर्बाद और बेहाल है |इन परम्परों के फेर में कर्ज ,फिर कर्ज का जाल व बंधुआ मजदूरी जैसी चीजे अब इनके लिए आम है और इन्होंने परिस्थितियों से हताश होकर इस समुदाय ने अब इस सब को अपनी नियति और जीवन मान लिया हैं|ये सब स्तिथियाँ बदल सकती है लेकिन सिर्फ राजनितिक बयानबाजी के चलते इस दिशा में कुछ विशेष प्रगति नहीं हो पा रही |शिक्षा और जागरूकता का अभाव भी अड़े आ रहा है |अलग –अलग प्रजातियों कि बोली और भाषा भिन्न होने के कारण इन्हें जागरूक और शिक्षित करना भी एक कठिन कार्य है |जहाँ पूरे देश में साक्षरता पैसठ प्रतिशत के लगभग है ,तो आदिवासी साक्षरता का अनुपात सिर्फ सेंतालिस प्रतिशत के आसपास ही है |बिहार और झारखण्ड जैसे विशाल आदिवासी क्षेत्र में तो यह अनुपात लगभग अठरह प्रतिशत के नजदीक है, जो अत्यंत शर्मनाक और शोचनीय है ,विशेष रूप से उनके लिए जो महज गाल बजाकर आदिवासी उत्थान की बात करते है |बड़ी –बड़ी विकास की योजनाओ ने आदिवासी क्षेत्र और क्षेत्रफल दोनों को सीधे –सीधे प्रभावित किया है |भारी तादाद में विस्थापन ,फिर विस्थापन के मामूली मुआवजा के साथ पुनर्वास की निशक्त प्रक्रिया ने इन्हें विकास के पथ पर अग्रसर होने के बजाय पीछे ही धकेला है |देशभर में फैला यह समाज इतनी विविधता लिए है ,और यही विविधता इनकी एकता में बड़ी बाधा है इसलिए हमेशा ही इनकी आवाज क्षेत्रीय स्तर तक ही सिमित रहा जाती है ,उसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर यदा-कदा ही सुनायी देती है |और इस कमजोर प्रतिनिधित्व के वजह से कोई बेहतर नतीजे सामने नहीं आ पाते |इस दुर्दशा का जिम्मा सिर्फ सरकारों का नहीं है |आदिवासियों के जनप्रतिनिधि और इस समुदाय के वे लोग जो आरक्षण का लाभ लेकर सत्ता और सरकारी पदों की मलाई खा रहें है ,ज्यादा दोषी है |जिसने अपना परिवार उन्नत कर लिया पर उन्हें अपने शेष समुदाय की उन्नति में कोई रूचि नहीं है|ये नकारात्मक सोच ही वृहद स्तर पर इस समुदाय की तरक्की के अड़े आ रही है|सरकार की नीतियों के अनुरूप इस समुदाय की शिक्षा उन्नयन के प्रयास भी जोरों पर है |लेकिन सवाल यह है कि ये समुदाय सही मायनो में शिक्षित भी हो रहा है या महज खानापूर्ति ही हो रही है|एकीकृत आदिवासी विकास योजना के तहत गरीब आदिवासियों को रोजगार प्रशिक्षण और कर्ज देने के सरकारी प्रयास भी जारी है |देश भर में इस तरह के लगभग दो सौ योजनाये अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित हो रही है |इस प्रक्रिया से लगभग अडतालीस लाख आदिवासी परिवार लाभान्वित हुए है |सहकारिता के प्रसार से भी इन्हें मजबूत किया जा रहा है ,आदिवासी सहकारी विपणन विकास के अंतर्गत इनके कला –कौशल के साथ इनकी कृषि और वन-उपज को उचित एवं अधिकतम मूल्य दिलाने के प्रयास हो रहे हैं|समाज के अन्य वर्गों का इनके प्रति नजरिया भी कोई बहुत अच्छा नहीं है ,इस सोच और नजरिये को बदल कर ही आदिवासी कल्याण की मुहिम को बल दिया जा सकता है |आदिवासी और गैर –आदिवासी के मध्य सदभावना का वातावरण निर्मित किया जाना बहुत अवशक है, जहा समाज के अन्य वर्ग इन्हें मान-सम्मान देते हुए संरक्षण और समर्थन प्रदान करें |नहीं तो सिर्फ सरकारी नीतियों के बल पर सुधार कठिन है| इसके साथ ही उचित पुनर्वास की व्यवस्था भी जरूरी है ,क्योकि खनन एवं कल –कारखानों के कारण लाखों आदिवासी परिवार आज बेघर है |कोयला खनन ने भारी तादाद में इन्हें बेघर किया हैं |और तो और स्वस्थ और स्वच्छ पेयजल भी इनके लिए दिव्य स्वपन के सामान है |पवित्र नदियों में स्नान और कोरी भाषणबाज़ी इन्हें आज इस दशा में ले आयी है |जहाँ से आगे का सफर मुश्किल जरूर है लेकिन मुमकिन है

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सिंहस्थ के कामों की क्वालिटी सुधारी जाये

डिसा ने उज्जैन में निर्माण कार्यों का लिया जायजा मुख्य सचिव अंटोनी डिसा एवं डीजीपी सुरेन्द्र सिंह ने उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। मुख्य सचिव एवं डीजीपी ने सबसे पहले होमगार्ड परिसर में नव-निर्मित बेरक का निरीक्षण किया। इस दौरान बेरक में कम संख्या में बनाये गये शौचालयों पर नाराजगी प्रकट की। उन्होंने शौचालयों की संख्या बढ़ाते हुए उनकी गुणवत्ता में सुधार के निर्देश दिये।मुख्य सचिव श्री डिसा ने इंजीनियरिंग कॉलेज रोड, हरीफाटक ओवरब्रिज की चौथी भुजा का निरीक्षण किया। उन्होंने गऊघाट पर 565 लाख की लागत से निर्माणाधीन जल-शोधन संयंत्र का भी अवलोकन किया। श्री डिसा ने सिंहस्थ के दौरान शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था के लिए संयंत्र की शोधन क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जहाँ अभी इस जलशोधन संयंत्र की क्षमता 127 एमएलडी प्रतिदिन की है, उसे 167 एमएलडी प्रतिदिन बढ़ाने के लिये आवश्यक कार्यवाही करें।मुख्य सचिव ने हरीफाटक ब्रिज के नजदीक निर्माणाधीन इंटरप्रिटेशन सेन्टर (व्याख्यालय) का भी निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने महाकाल मंदिर में चल रहे टनल निर्माण कार्य का निरीक्षण कर मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों के आने-जाने की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मंदिर के आसपास पैदल निरीक्षण कर वहाँ की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। श्री डिसा ने रूद्र सागर एवं विक्रमादित्य टीले पर चल रहे निर्माण कार्य, राणोजी की छत्री का विकास कार्य एवं रामघाट का निरीक्षण किया। इस दौरान वॉच टॉवर, कंट्रोल रूम के बारे में पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी। उन्होंने रामघाट पर प्याऊ आदि को हटाने और उसकी सुन्दरता बढ़ाने के लिए विभिन्न रंगों की लाइटिंग करने के भी निर्देश दिये।प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं पर्यावरण मलय श्रीवास्तव, संभागायुक्त डॉ.रवीन्द्र पस्तौर, उज्जैन रेंज के आईजी वी.मधुकुमार, डीआईजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर कवीन्द्र कियावत, पुलिस अधीक्षक एम.एस.वर्मा, मेला अधिकारी अविनाश लवानिया सहित अन्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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एमपी में मिशन इन्द्रधनुष शुरू

23 हजार दल करेंगे भ्रमण मध्यप्रदेश में 7 अप्रैल से मिशन इंद्रधनुष की शुरूआत हुई है। इसके साथ ही पूर्व से प्रदेश में माताओं और बच्चों के लिए मदर एण्ड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के माध्यम से एएनएम को विशेष दायित्व दिया गया है। प्रति मंगलवार और शुक्रवार को ग्राम आरोग्य केन्द्र स्तर पर टीके लगाने का कार्य भी होता है। इसके बावजूद विभिन्न कारण से अनेक बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं। इन छूटे हुए बच्चों की जिन्दगी की रक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम मिशन इन्द्रधनुष है। प्रदेश में 23 हजार दल कार्य कर रहे हैं। अनेक ऐसे स्थान तक स्वास्थ्य कार्यकर्ता पहुँच रहे हैं, जहाँ आम तौर पर शासकीय सेवक नहीं पहुँचते। घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों और घुमक्कड़ और बन्जारा समुदाय तक टीकाकरण करने वाले दल पहुँच रहे हैं।उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर बच्चों का टीकाकरण कर उनका जीवन बचाने के मिशन इन्द्रधनुष की प्रदेशव्यापी शुरूआत विदिशा जिले से की गई थी। राज्य में विभिन्न जिलों में यह मिशन एक-एक सप्ताह के चरण में संचालित किया जा रहा है। इसमें दो वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। दूसरा चरण सात मई, तीसरा चरण सात जून और चौथा चरण सात जुलाई से प्रारंभ होकर अगले सात दिन तक चलेगा। डिप्थीरिया, काली खाँसी, टेटनस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी जैसे रोगों से जीवन को बचाने वाले इन टीकों के संबंध में भ्रांतियों को दूर करने का कार्य भी प्रदेश में अभियान के स्तर पर चलेगा। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव इस मिशन के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बैठकें लेकर निर्देश दे चुके हैं।प्रदेश में टीकाकरण के राष्ट्रीय औसत 65 प्रतिशत के मुकाबले में टीकाकरण का प्रतिशत कहीं ज्यादा 66.4 प्रतिशत है। अब इस मिशन में मध्य प्रदेश में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की रणनीति बनाई गई है। जन-प्रतिनिधियों के सहयोग से इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास भी किया जा रहा है।मिशन इन्द्रधनुष के लिए भारत सरकार ने पूरे देश में जो 201 जिले चुने हैं इनमें मध्यप्रदेश के उच्च प्राथमिकता वाले 15 जिले- अलीराजपुर, अनूपपुर, छतरपुर, दमोह, झाबुआ, मंडला, पन्ना, रायसेन, सागर, रीवा, सतना, टीकमगढ़, शहडोल, उमरिया और विदिशा शामिल हैं। हालाँकि राज्य सरकार शेष जिलों में भी टीकाकरण पर जोर दे रही है।

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पीथमपुर में  बनेगी जापानी  टाउनशिप

जापानी निवेशकों के सेमीनार में मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिये अनुकूल वातावरण है। जापानी निवेशक आएँ और निवेश करें। उनके लिये पीथमपुर में विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त औद्योगिक टाउनशिप बनायी जाएगी। इसमें जापान की संस्कृति, भाषा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेस्टोरेंट, बाजार, मनोरंजन के साधन आदि मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी।मुख्यमंत्री इंदौर के पीथमपुर में जापानी निवेशकों के साथ जापानीज इंडस्ट्रियल टाउनशिप इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, जापान से आए उद्योगपति सेजी तकाजी, नायशु नागोची और सी.पी.शर्मा मौजूद थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एवं जापान के सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। व्यापारिक एवं सांस्कृतिक मित्रता भी है। इन संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ और मजबूत बनाया जाये। प्रदेश में निवेश के लिये सभी संसाधन और सुविधाएँ मौजूद हैं। मध्यप्रदेश शांति का टापू है। यहाँ बिजली, सड़क, पानी सहित सभी आधारभूत सुविधाएँ हैं। शिक्षा की भी बेहतर व्यवस्थाएँ हैं। कुशल मानव संसाधन है। उद्योग मित्र नीति है। श्री चौहान ने कहा कि निवेशकों के लिये सिंगल विण्डो की नहीं बल्कि सिंगल टेबल की व्यवस्था की है। इससे एक ही जगह बैठक कर निवेशकों की समस्या का समाधान हो रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योग स्थापना के लिये 25 हजार हेक्टेयर भूमि का लैण्ड बैंक बनाया गया है। निवेशक ऑनलाइन भूमि पसंद करें। तुरन्त आवंटन कर देंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि पीथमपुर में जापानी उद्यमियों के लिये एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप में सभी सुविधाएँ दी जायेंगी। उनके लिये गोल्फ कोर्स भी बनाया जाएगा। उन्होंने जापानी निवेशकों को आगामी अक्टूबर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पार्टनर बनने और अप्रैल-मई में होने वाले सिंहस्थ में आने का भी न्यौता दिया। उन्होंने जापानी भाषा में कविता पढ़कर अपने उदबोधन का समापन किया।उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि प्रदेश में पिछले कई वर्ष से राजनीतिक स्थिरता है। स्थिरता के कारण विकास को नयी दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि भारत एवं जापान के बीच विश्वास के अनूठे रिश्ते हैं।मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने औद्योगिक नीति में उपलब्ध बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने जापानी कम्पनियों को दी जाने वाली रियायतों एवं सुविधाओं की भी जानकारी दी।जापान के भारत में राजदूत श्री केनजी हीरामत्सु ने कहा कि जापान की कई कम्पनियों ने भारत के कई राज्य चेन्नई, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्य में निवेश किया है। आज मध्यप्रदेश भारत के सबसे मजबूत आर्थिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने गत अक्टूबर में जापान की यात्रा की और वहाँ प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, उद्योग मंत्री से भेंट की और एमओयू हस्ताक्षर किये थे। यात्रा के दौरान कई उद्योगपति से मुलाकात कर उन्हें निवेश के लिये आमंत्रित किया था। इससे जापान के उद्योगपति मध्यप्रदेश में निवेश के लिये आकर्षित हुए हैं। जापानी राजदूत ने कहा मजबूत नेतृत्व से हमारे अंदर आत्म-विश्वास पैदा हो गया है। इंदौर के मेडिकल हास्पिटल और शिक्षा संस्थान का अवलोकन किया है। यहाँ ट्रान्सपोर्ट की सुविधा भी विश्व-स्तरीय है। जापानी कम्पनियों के लिये यहाँ अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर और मध्यप्रदेश के अन्य शहरों में मिल-जुलकर एक-दूसरे के साथ कार्य करने के लिये तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जापानी आपके प्रेम और स्वागत से अभिभूत हुए हैं। मुख्यमंत्री और यहाँ के लोगों ने उन्हें काफी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में इंदौर आयेंगे और कई कम्पनियाँ इसमें भाग लेंगी।पीथमपुर में भारत शासन के उद्योग मंत्रालय द्वारा विकसित किए जा रहे नेशनल ऑटो टेस्टिंग ट्रेक्स (नेट्रेक्स) के समीप लगभग 450 हेक्टेयर भूमि पर एक अत्याधुनिक एकीकृत इण्डस्ट्रियल टाऊनशिप ए.के.व्ही.एन., इन्दौर द्वारा विकसित की जा रही है ।

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धान किसानों को नुकसान नहीं होने देगी सरकार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धान उत्पादक किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए धान खरीदी पर कर दायित्व की सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ कर दिया है। उन्होंने तत्काल अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिये। इससे ज्यादा से ज्यादा व्यवसायी धान खरीदी प्रक्रिया में भाग लेंगे और किसानों को उनकी उपज की सही कीमत मिलेगी।धान खरीदी के सम्बन्ध में मंत्रालय में धान व्यापारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने व्यापारियों से सहयोग देने का आग्रह करते हुए कहा किसानों के कल्याण के लिये सरकार हर कदम उठाने को तैयार है।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि निजी व्यापारिक हितों के चलते मध्यप्रदेश की धान को बासमती का दर्जा मिलने में जो बाधाएँ थीं, वे अब दूर हो जायेंगी। प्रदेश के धान को बासमती का दर्जा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से हस्तक्षेप करने का भी आग्रह किया गया है। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के विचारों का सम्मान करते हुए धान खरीदी में हर प्रकार से सहयोग का आश्वासन दिया।मुख्यमंत्री ने सभी किसानों को खरीदी दर के संबंध में जानकारी देने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मंडियों की जिम्मेदारी है कि वे किसानों की धान की खरीदी करवायें और इसके लिये पूरी व्यवस्था रखें।बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त आर.के. स्वाई, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर मनोज श्रीवास्तव, आयुक्त मंडी बोर्ड अरूण पांडे एवं मंडी अधिकारी उपस्थित थे।

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इटली-जर्मनी से लौटे किसान मिले शिवराज से

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से विधानसभा में मुख्यमंत्री कृषक विदेश अध्ययन यात्रा के जरिये इटली और जर्मनी का भ्रमण कर लौटे प्रदेश के किसानों के समूह ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री चौहान को किसानों ने अपनी अध्ययन यात्रा के अनुभव बताये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह समूह अपने अनुभव जिलों के किसानों से बाँटे तथा उन्हें आधुनिक खेती के लिये प्रेरित करे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसान विदेश यात्रा के दौरान सीखी गई आधुनिक तकनीकों का क्रियान्वयन खेती में करें। राज्य सरकार खेती की नई तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही है। किसानों ने बताया कि इटली और जर्मनी में सभी कृषक खेती में मशीनों के उपयोग के साथ मार्केटिंग भी स्वयं करते हैं। खेती में सौर ऊर्जा का भी बड़ा उपयोग किया जाता है। अध्ययन यात्रा पर गये किसानों ने सहकारिता और डेयरी फार्मिंग का अध्ययन भी किया। मुलाकात के दौरान प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा भी उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के चयनित बीस किसान के इस दल ने जर्मनी और इटली का गत 25 नवम्बर से 6 दिसम्बर तक भ्रमण किया। किसानों ने जर्मनी और इटली के उन्नत कृषकों से भेंट भी की। मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा योजना में प्रदेश के किसान खेती, पशुपालन तथा कृषि से जुड़े व्यवसायों की उच्च तकनीक देखने-समझने के लिये विदेश भेजे जाते हैं।

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गौर ने कहा ,फोन जरूर उठाएं

गृह एवं जेल मंत्री बाबूलाल गौर ने पानी एवं बिजली आदि मूलभूत जरूरतों से जुड़े मैदानी अमले से कहा कि नागरिक जब किसी समस्या के संबंध में फोन करें तो समाधानकारक जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने खेजड़ा ग्राम के नागरिकों द्वारा बिजली विभाग के संबंधित कर्मचारी द्वारा फोन नहीं उठाने की जानकारी देने पर संबंधित को हिदायत दी कि आइंदा ऐसा नहीं हो। श्री गौर भोपाल के वार्ड 67 की बस्तियों का भ्रमण कर रहे थे।श्री गौर ने खेजड़ा और मालीपुरा ग्रामों के बीच रेलवे लाइन से होकर जाने वाले रास्ते पर ऐसा वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की बात कही जिसे ब्रिज के स्थान पर उपयोग किया जा सके। खेजड़ा से छात्र-छात्राएँ मालीपुरा स्कूल जाते हैं। वर्षाकाल में उन्हें दिक्कत होती है। श्री गौर ने कहा कि इसके लिए वह रेल मंत्री से भी अनुरोध करेंगे।श्री गौर ने खेजड़ा और शबरी नगर में 8-8 लाख लागत की दो सड़क और कैलाश नगर में 15 लाख की नाली निर्माण का भूमि-पूजन किया। आशा जैन, लीला किशन माली, सुश्री तुलसा वर्मा, राजू राठौर, राजू लोधी, सुरेश यादव, राजू साहू आदि मौजूद थे।

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सड़कों के लिए भू-अर्जन समय-सीमा में  करें

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अभिकरण में स्वीकृत परियोजनाओं में भू-अर्जन तथा मुआवजा वितरण का कार्य समय-सीमा में पूरा करें। इसकी लगातार मॉनीटरिंग की जाये। मुख्यमंत्री चौहान ने भोपाल में राष्ट्रीय राजमार्ग अभिकरण के कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री सरताज सिंह और मुख्य सचिव श्री अंटोनी डि सा भी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सड़क परियोजनाओं की कार्यवार समीक्षा की। उन्होंने कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये। इन सड़कों की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से करें। पर्यटकों की दृष्टि से झाँसी से खजुराहो पहुँचने के लिये बमेठा-खजुराहो मार्ग के फोर लेन का कार्य प्राथमिकता से करें। वैकल्पिक मार्ग के रूप में राज्य सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा झाँसी से पृथ्वीपुर-जतारा-टीकमगढ़ होकर खजुराहो मार्ग का निर्माण करवाया जा रहा है।बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग अभिकरण के अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न चरण में 2597 किलोमीटर सड़कों का कार्य चल रहा है। अब तक विभिन्न चरणों में 1460 किलोमीटर सड़कों के कार्य पूरे हो चुके हैं। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव हरिरंजन राव, सचिव ऊर्जा आई.पी.सी. केशरी सहित लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कार्यकारी उपस्थित थे।

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सरकार जमीन लेगी तो विक्रेता को मिलेगी दोगुनी राशि

मंत्रि-परिषद् के निर्णय एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता मेंसंपन्न मंत्रि-परिषद् की बैठक में सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिये आवश्यक होने पर निजी भूमिधारकों की भूमि आपसी सहमति से क्रय की जायेगी। इसके लिये मंत्रि-परिषद् ने नीति का अनुमोदन किया।नीति के अनुसार राज्य शासन के विभागों और उपक्रमों की अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं के लिये भूमि की आवश्यकता होने पर सबसे पहले कलेक्टर उपलब्ध शासकीय भूमि में से उपयुक्त भूमि प्रशासकीय विभाग को नियमानुसार हस्तांतरित करेंगे। उपयुक्त शासकीय भूमि उपलब्ध न होने पर प्रशासकीय विभाग/उपक्रम के आवेदन पर परियोजना अथवा उसके अंशभाग के लिये निजी भूमिधारकों से आपसी सहमति के आधार पर न्यूनतम आवश्यक भूमि क्रय की जा सकेगी। भूमिधारक की निजी भूमि क्रय किये जाने के दिनांक को कलेक्टर द्वारा जारी की गई गाइडलाइन की तत्समय प्रभावशाली दर के अनुसार संगणित भूमि के मूल्य और भूमि पर स्थित स्थावर परिसम्पत्तियों के मूल्य के बराबर राशि प्रतिफल के रूप में देकर क्रय की जायेगी। उपरोक्त के अलावा प्रतिफल के समतुल्य राशि विक्रेता को एकमुश्त पुनर्वास अनुदान के रूप में दी जायेगी। इस प्रकार विक्रेता को निजी भूमि और उस पर स्थित स्थावर परिसम्पत्तियों के लिए दोगुनी राशि प्राप्त होगी।विभाग/उपक्रम की परियोजना के लिये क्रय की जाने वाली भूमि उस पर स्थित स्थावर परिसम्पत्तियों के मूल्य और पुनर्वास अनुदान पर देय राशि का वहन संबंधित शासकीय विभाग/उपक्रम द्वारा किया जायेगा। नीति के अनुसार भूमि क्रय के बाद यदि परियोजना वापस ली जाती है या असफल हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप भूमि की आवश्यकता नहीं रह जाती है, तो क्रय की गई भूमि संबंधित विभाग/उपक्रम द्वारा राजस्व विभाग को समर्पित कर दी जायेगी। समर्पित भूमि राजस्व विभाग भविष्य में किसी अन्य शासकीय प्रयोजन अथवा विकास परियोजना के लिये आवंटित कर सकेगा।शासन द्वारा कृषि के लिये पट्टे पर दी गई शासकीय भूमि की किसी परियोजना के लिये आवश्यकता होने पर कलेक्टर इस नीति के अंतर्गत पट्टे की नितांत आवश्यकता का परीक्षण करेंगे। वे स्वत्व की भाँति मूल्य तथा अनुदान की राशि की गणना कर पट्टेदार को उसके द्वारा स्वेच्छा से पट्टा समर्पित करने पर समतुल्य राशि अनुदान के रूप में स्वीकृत कर सकेंगे।सौर ऊर्जा रूफटॉप परियोजनामंत्रि-परिषद् ने प्रदेश में सौर ऊर्जा को और अधिक बढ़ावा देने के मकसद से मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 5 मेगावॉट क्षमता की ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा रूफटॉप परियोजना इंदौर, भोपाल और जबलपुर में शुरू किये जाने का निर्णय लिया। परियोजना के लिये विकासक का चयन प्रतिस्पर्धात्मक निविदा के आधार पर किया जायेगा। परियोजना की स्थापना के लिये राज्य शासन और अन्य शासकीय उपक्रमों के भवनों को चिन्हित कर उनकी छतें विकासक को नि:शुल्क लीज पर दी जायेंगी। परियोजना की स्थापना से प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत की उपलब्धता बढ़ेगी।अधिकार प्रत्यायोजनप्रदेश में प्राप्त निवेश प्रस्तावों के तेजी से क्रियान्वयन के लिये सही मायने में सिंगल विंडो उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से मंत्रि-परिषद् ने नगरीय विकास एवं पर्यावरण के अधिकारों तथा सेवाओं का प्रत्यायोजन उद्योग और रोजगार विभाग की अधीनस्थ एजेंसियों को करने का निर्णय लिया। इससे निवेश प्रस्तावों के लिये आवश्यक वैधानिक अनुमतियाँ और सम्मतियाँ एक ही जगह पर मिल सकेंगी। इन सुविधाओं में भवन निर्माण की अनुमति, औद्योगिक परियोजना के लिये चयनित भूमि के परिप्रेक्ष्य में विकास अनुज्ञा एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृति शामिल हैं। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानि कारोबार में सुगमता बढ़ सकेगी।रक्षा संयंत्र उत्पाद नीतिमंत्रि-परिषद् ने राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई रक्षा संयंत्र उत्पाद निवेश नीति का अनुमोदन किया। इसमें ग्वालियर को भी शामिल करने का फैसला किया गया। उल्लेखनीय है कि कटनी, इटारसी और जबलपुर में स्थित रक्षा उत्पाद निर्माता सरकारी क्षेत्र के सार्वजनिक कम्पनी के संयुक्त उपक्रम/सहायक/विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की प्रबल संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिये 500 करोड़ या अधिक निवेश करने वाली रक्षा निर्माण उत्पाद इकाइयों को सुविधा देने के लिये यह नीति बनाई गई है।नीति में इकाइयों को 50 एकड़ तक शासकीय अविकसित भूमि उपलब्ध करवायी जायेगी। बंद/बीमार इकाइयों का क्रय कर रक्षा उत्पाद निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने पर स्टाम्प ड्यूटी की प्रतिपूर्ति की जायेगी। इकाई विशेष के लिये पृथक एस्कार्ट ऑफिसर की सुविधा दी जायेगी। अविकसित भूमि पर मूलभूत अधोसंरचना पर अनुदान दिया जायेगा। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी पूँजी निवेश को आकर्षित करने के लिये न्यूनतम 500 करोड़ स्थाई पूँजी निवेश करने वाली रक्षा उत्पाद परियोजनाओं को विशेष पेकेज स्वीकृत किया जायेगा। आयतित सामग्री के बंदरगाह से उद्योग स्थल पर परिवहन के आय-व्यय पर नियम अनुसार अनुदान दिया जायेगा।

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प्रदेश को समृद्ध बनाने में सर्वश्रेष्ठ योगदान दें :शिवराज

परमाणु वैज्ञानिक डॉ. काकोदकर मध्यप्रदेश गौरव सम्मान से विभूषित मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़वानी में जन्मे मध्यप्रदेश के माटी पुत्र विश्व प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोदकर को उनकी अभूतपूर्व सेवाओं, उपलब्धियों, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने के लिये मध्यप्रदेश गौरव सम्मान से अंलकृत किया। मुख्यमंत्री ने राज्य में उत्कृष्ट कार्यों के लिये अधिकारी-कर्मचारियों को भी मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया।स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने उत्साह से भरपूर संबोधन में नागरिकों का आव्हान किया कि वे अपने नागरिक कर्त्तव्यों का पालन करते हुए मध्यप्रदेश को शक्तिशाली और समृद्ध प्रदेश बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। परिश्रम की पराकाष्ठा तथा प्रयत्नों की परिसीमा के जरिये मध्यप्रदेश को देश का ही नहीं विश्व का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनायें।वर्ष 2015 पर्यटन वर्ष के रूप में मनेगाश्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए और पर्यटन के माध्यम से रोजगार निर्माण करने के लिये वर्ष 2015 को मध्यप्रदेश पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। इस दौरान पूरे विश्व का ध्यान प्रदेश के पर्यटन की ओर आकृष्ट किया जायेगा।श्री चौहान ने कहा कि कभी पिछड़ा कहलाने वाला मध्यप्रदेश अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों के लिये आदर्श राज्य बन गया है। आज प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर सबसे ज्यादा 11.08 प्रतिशत है। कृषि विकास में देश सर्वाधिक 24.99 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे सोयाबीन उत्पादन, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से विकास का काम करने, जैविक खेती, दलहन उत्पादन, किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने, देश में सबसे बड़े सोलर संयत्र लगाने में मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की प्रगति पर आज हर नागरिक को गर्व होता है। आज प्रदेश दिल्ली को भी बिजली देने में सक्षम है। बिजली, पानी, सड़क के मामले में देश में प्रदेश का नाम है।श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' की सोच से प्रेरित होकर 'मेक इन मध्यप्रदेश' का आव्हान किया है। उन्होंने निवेशकों और निर्माण उद्योग का आव्हान किया कि वे मध्यप्रदेश आयें और यहाँ निर्माण करें। प्रदेश में हर प्रकार की जरूरी अधोसंरचनात्मक व्यवस्था और सुविधाएँ उपलब्ध हैं।हाल ही में संपन्न ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के संदर्भ में कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के 6.89 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से प्रदेश में 17 लाख युवा को नौकरी मिलेंगीमुख्यमंत्री चौहान ने युवाओं का आव्हान किया कि वे आगे आयें और अपना खुद का उद्योग लगायें। अपनी स्वयं की कंपनी बनायें। रोजगार मांगने वाले नहीं रोजगार देने वाले बनें। इसमें राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना में प्रतिभाशाली युवा उद्यमियों को बैंक लोन सहित मार्केटिंग, ब्रांडिंग, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन देने जैसी अन्य सुविधाएँ भी दी जायेंगी।उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के मूल निवासी जो विदेशों में रह रहे हैं, ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं और नागरिकों का टेलेंट पूल बनाकर प्रदेश के विकास में उनका सहयोग लिया जायेगा। युवाओं को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता दिलाने के लिये नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने बताया कि श्रमिक समुदाय के प्रतिभाशाली बच्चों के लिये विशेष स्कूल की स्थापना की जा रही है।मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारपाँच लाख रुपये का राज्य स्तरीय शासकीय कार्यालय/संस्था का पुरस्कार संचालक, उत्थान परियोजना, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल को दिया गया।राज्य स्तरीय व्यक्तिगत पुरस्कार में एक लाख रुपये राशि के प्रथम पुरस्कार से डॉ. साकेत व्यास, जिला लोक अभियोजन अधिकारी विशेष लोक स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर, रुपए 75000 के द्वितीय पुरस्कार से श्री अनिल गौड़ उप संचालक, नगरीय प्रशासन, भोपाल और 50000 रुपये के तृतीय पुरस्कार से डॉ. अशोक भार्गव, कलेक्टर, जिला शहडोल को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार राशि के साथ प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किये गये।राज्य स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी के समूह पुरस्कार कुल राशि तीन लाख रुपए जिन अधिकारी में समान रूप से वितरित किये गये, उनमें श्री एस.एन. रूपला कलेक्टर रीवा, डॉ. रामप्रकाश जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादक प्रजनन एवं अनुवांशिकी, शासकीय कृषि महाविद्यालय, रीवा, श्री रमेन्द्र कुमार सिंह सहायक मिट्टी परीक्षण अधिकारी किसान-कल्याण तथा कृषि विकास रीवा, श्री शंभू पटेल कृषि विकास अधिकारी, किसान-कल्याण तथा कृषि विकास, रीवा, श्री निशांत वरवड़े कलेक्टर भोपाल, डॉ. अरूण सिंह, सलाहकार, भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, डॉ. एस. जसानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, होशंगाबाद, डॉ. विनय दुबे, नोडल आफीसर एवं सिविल सर्जन होशंगाबाद, डॉ. नीतेश बैंस एसएनसीयू, होशंगाबाद, डॉ. अमिता चंद स्टेट प्रोग्राम आफीसर, नीपि और मनोज द्विवेदी डीपीएम होशंगाबाद हैं। इन सभी को प्रशस्ति-पत्र भी दिये गये।जिला स्तरीय 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत प्रथम पुरस्कार डॉ. नीरज कुमार छारी सर्जन एवं मेडिकल ऑफिसर, जिला भोज चिकित्सालय, जिला धार और 15000 रुपये के द्वितीय पुरस्कार राजेश सिंह, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी, कोषालय भोपाल को दिया गया।डॉ. काकोदकरमध्यप्रदेश गौरव सम्मान से विभूषित परमाणु वैज्ञानिक डॉ. काकोदकर ने अपने सम्मान के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें विशिष्ट अनुभूति का अनुभव हो रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो घर में सम्मान मिला है। श्री काकोदकर ने अल्प अवधि में मध्यप्रदेश को विकास के पथ पर तेजी से ले जाने के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की ऐसी प्रगति देखकर उनकी अभिमान से छाती फूल जाती है। श्री काकोदकर ने मुख्यमंत्री श्री चौहान का शब्दों से अभिनंदन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश देश का जल्द ही नम्बर एक राज्य जरूर बनेगा। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस के अवसर पर इस तरह के सम्मान और अधिकारी-कर्मचारियों को उत्कृष्टता पुरस्कार से अच्छे कार्यों के लिये प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की प्रगति और विकास में वे हर अपेक्षित सेवा के लिये तत्पर रहने का वचन दिया।संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इस समारोह के कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत है। इसका सभी को मिलकर संरक्षण और संवर्धन करना है।डॉ. श्री काकोदकर के सम्मान में मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने प्रशस्ति-वाचन किया। साथ ही श्री डिसा ने बताया कि वे डॉ. काकोदकर के अधीनस्थ भाभा परमाणु केन्द्र में कार्य कर चुके हैं। समारोह में श्री काकोदकर को प्रदेश की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शॉल-श्रीफल भेंटकर कर सम्मानित किया। प्रमुख सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।मध्यप्रदेश का 59वां स्थापना दिवस मध्यप्रदेश के राज्योत्सव के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश गान के साथ हुआ। महाकवि कालिदास की कालजयी रचना मेघदूतम् पर केन्द्रित 350 से अधिक कलाकारों की समवेत सांस्कृतिक प्रस्तुति हुई। प्रस्तुति का संयोजन मैत्रेयी पहाड़ी द्वारा किया गया। विख्यात संगीतकार विशाल और शेखर के निर्देशन में आकर्षक सांगीतिक प्रस्तुति ने विशाल संख्या में उपस्थित सुधी दर्शकों का मन मोह लिया।इस अवसर पर संस्कृति संचालक रेनु तिवारी आदि उपस्थित थे।

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उज्जैन में महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय से संस्कृत की सुवास

548 शास्त्री और 501 आचार्य बने दिनेश मालवीयभगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा-स्थली उज्जैन में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्थापित महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय संस्कृत भाषा और वेदों की अमृत-तुल्य शिक्षा की सुवास का निरंतर प्रसार कर रहा है। वर्ष 2008 में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पहल पर स्थापित इस विश्वविद्यालय से 1283 विद्यार्थी उपाधियाँ प्राप्त कर चुके हैं। अभी तक 548 विद्यार्थी शास्त्री और 501 विद्यार्थी आचार्य की उपाधि ग्रहण कर चुके हैं। इसके अलावा 109 विद्यार्थी ने बी.ए. तथा 125 विद्यार्थी ने एम.ए. की कक्षा उत्तीर्ण की है। विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश शासन की विभिन्न छात्रवृत्ति तथा उच्च शिक्षा ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है।विश्वविद्यालय में पीएच.डी., विद्यावारिधि, एम.फिल., आचार्य आदि उपाधि के पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। विद्यार्थियों को वेद, व्याकरण, साहित्य-शास्त्र, ज्योतिष, ज्योतिर्विज्ञान, संस्कृत-साहित्य जैसे विषय पढ़ाये जा रहे हैं। साथ ही दर्शन-शास्त्र की शिक्षा भी दी जा रही है।विश्वविद्यालय से अभी तक 17 महाविद्यालय संबद्ध हो चुके हैं। इनमें सतना जिले के चित्रकूट के 4 महाविद्यालय, रीवा, कल्याणपुरा (शहडोल), भीतरी (सीधी), देवेन्द्र नगर (पन्ना), लश्कर (ग्वालियर), भोपाल, इंदौर, उज्जैन तथा गोविंदपुरा (जबलपुर) तथा कटनी और सागर में स्थापित एक-एक महाविद्यालय शामिल हैं।विश्वविद्यालय में एक समृद्ध पुस्तकालय है, जिसमें ज्योतिष, संस्कृत भाषा, वेद तथा अन्य विषय की असंख्य पुस्तकें हैं। शोध-पत्रिकाएँ भी प्राप्त की जा रही हैं।विश्वविद्यालय में 5 अध्यापन विभाग हैं। इनमें वेद, व्याकरण अध्यापन, संस्कृत साहित्य एवं दर्शन-शास्त्र अध्यापन, ज्योतिष एवं ज्योतिर्विज्ञान अध्यापन, विशिष्ट संस्कृत (प्राच्य), अध्यापन तथा शिक्षा शास्त्री अध्यापन विभाग शामिल हैं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिये अनेक गतिविधि चलाई जाती हैं। इनमें युवा महोत्सव, अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण, वाक् क्षमता, शास्त्रीय पांडित्य के लिये वागवर्धिनी सभा, शास्त्रार्थ प्रशिक्षण तथा व्याख्यान-मालाएँ शामिल हैं।वर्तमान में उज्जैन-देवास रोड पर विश्वविद्यालय के नवीन भवन का निर्माण चल रहा है। पंचवटी का निर्माण भी समाप्त हो चुका है।

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मध्यप्रदेश में ‘टसर क्रांति’

मध्यप्रदेश में इन दिनों ‘टसर क्रांति’ आकार ले रही है। बीते 3 वर्ष में प्रदेश में टसर रेशम का उत्पादन मात्र 3000 हेक्टेयर से बढ़कर अब लगभग 24 हजार हेक्टेयर में होने लगा है। कोकून उत्पादन भी करीब 2 करोड़ से बढ़कर लगभग साढ़े आठ करोड़ हो गया है। इसकी बदौलत मध्यप्रदेश अब टसर रेशम के उत्पादन में देश में सातवें से चौथे स्थान पर आ गया है। यह संभव हुआ है वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश विधानसभा में पारित संकल्प-29 पर प्रभावी अमल के फलस्वरूप। पहले मध्यप्रदेश उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आन्ध्रप्रदेश, झारखण्ड, बिहार और उत्तरप्रदेश के बाद सातवें नम्बर पर था।वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बन जाने से न केवल टसर रेशम कीट-पालन का क्षेत्र वहाँ चला गया, बल्कि इसका परम्परागत ज्ञान भी मध्यप्रदेश में नहीं रह गया। अविभाजित मध्यप्रदेश में 60 लाख कोकून उत्पादन होता था। विभाजन के बाद मध्यप्रदेश में यह सिर्फ 6 लाख रह गया। इसके चलते टसर रेशम उत्पादन नेपथ्य में चला गया। मध्यप्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को पुनः फोकस में लाने के लिये विधानसभा के विशेष सत्र में टसर उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को प्रमुख राज्य बनाने का संकल्प पारित किया। यह संकल्प मध्यप्रदेश में टसर रेशम उत्पादन की अपार संभावनाओं को दृष्टि में रखकर लिया गया। प्रदेश में लगभग 10 लाख हेक्टेयर में टसर रेशम उत्पादन की संभावना है।संकल्प पर अमल करते हुए वन विभाग और रेशम संचालनालय ने संयुक्त रूप से काम करना शुरू किया। सबसे पहले यह सर्वे करवाया गया कि अर्जुन और साजा के वृक्ष किन वन क्षेत्रों में बहुत अधिक हैं। सर्वे में पाया गया कि प्रदेश में इन वृक्ष की संख्या लगभग 12 करोड़ है। लक्ष्य निर्धारित कर उन पर तत्परता से अमल किया गया। वर्ष 2010-11 में 5000 हेक्टेयर में टसर उत्पादन के लक्ष्य के विरुद्ध 9000 हेक्टेयर में यह काम किया गया। डेढ़ करोड़ कोकून के लक्ष्य की तुलना में एक करोड़ 90 लाख कोकून उत्पादन हुआ। वर्ष 2011-12 में 17 हजार 500 हेक्टेयर के लक्ष्य की तुलना में 17 हजार 600 हेक्टेयर में 4 करोड़ 26 लाख कोकून तैयार किये गये। वर्ष 2012-13 में लगभग 24 हजार हेक्टेयर में 5 करोड़ 82 लाख कोकून का उत्पादन किया गया।वर्ष 2009-10 में सिर्फ 5-6 जिले में ही टसर रेशम का उत्पादन होता था। अब प्रदेश के 32 जिलों में यह कार्य हो रहा है। इस कार्य के लिये हितग्राहियों को समुचित प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रदेश में टसर रेशम उत्पादन का कार्य मुख्य रूप से बालाघाट, मण्डला, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, छिन्दवाड़ा, बैतूल, सीहोर और हरदा जिले में होता है।वन क्षेत्रों में लोगों को, जिनमें अधिकतर आदिवासी होते हैं, एक-एक हेक्टेयर क्षेत्र दे दिया जाता है। यह लोग वृक्षों पर अंडों को पालते हैं। इनमें से निकलने वाले कीड़ों को पेड़ों पर चढ़ा दिया जाता है। हितग्राही 35-40 दिन तक जंगल में रहकर ही इनकी रखवाली करता है। इससे कीड़ों के साथ-साथ वनों का संरक्षण भी होता है। ककून बनाकर यह लोग रेशम-पालन विभाग को बेच देते हैं। इससे प्रत्येक हितग्राही को दो फसलों में 3-3 माह के भीतर 10 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। हितग्राही का परिवार लगभग एक लाख रुपये तक कमा लेता है। वर्तमान में लगभग 30 हजार लोग इस कार्य से लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें करीब 80 प्रतिशत आदिवासी हैं। इस वर्ष हितग्राहियों को लगभग 6 करोड़ रुपये दिया गया।प्रत्येक कोकून में लगभग 1 किलोमीटर धागा होता है। धागा बनाने के लिये राज्य में पिछले तीन वर्ष में 19 धागाकरण इकाई स्थापित की गई हैं। इन इकाई में लगभग 1500 महिलाओं को पूरे वर्ष नियमित रोजगार मिलता है। आने वाले दो वर्ष में पूरा धागाकरण मध्यप्रदेश में ही होने लगेगा।

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MP  में युवाओं को आनलाइन  बैंकों से उच्च शिक्षा ऋण मिलेगा

मध्यप्रदेश में युवाओं को अब बैंकों में आनलाइन आवेदन कर उच्च शिक्षा ऋण प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्च शिक्षा ऋण योजना की आनलाइन मानीटरिंग के लिये तैयार किये गये साफ्टवेयर का आज यहां राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की बैठक में लोकार्पण किया। श्री चौहान ने कहा कि युवाओं को अवसर मिलें तो वे चमत्कार कर सकते हैं। मध्यप्रदेश में युवाओं को रोजगार देने के लिये मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना तैयार की गयी है। प्रदेश में 24 घंटे बिजली देकर गाँव-गाँव में लघु उद्योगों का जाल बिछाया जायेगा। उन्होंने देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये बैंकर्स से योजना में सहयोग का आव्हान किया।बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव आर.परशुराम सहित बैंकर्स और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।श्री चौहान ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं को गंभीरता से लेने और उन्हें यथास्थितिवाद के जंजाल से निकालने की जरूरत है। आज हर बड़ा उद्योग मध्यप्रदेश में आ रहा है। इसके साथ ही हम गाँव-गाँव में लघु उद्योग स्थापित कर देश ही नहीं विदेशों के बाजार भी मध्यप्रदेश में बनी सामग्री से पाटना चाहते हैं। इससे रोजगार के अवसर और प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी। गाँवों को एक स्वावलंबी इकाई बनाने के लिये परम्परागत व्यवसायों में लगे लोगों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। इन कारीगरों के लिये हर गाँव में एक छोटा बाजार विकसित किया जायेगा। युवाओं के लिये मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना तथा छोटे कारीगरों के लिये स्वरोजगार योजना बनायी गयी है। इन योजनाओं में राज्य सरकार ऋण की गारंटी और पाँच वर्ष तक पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान देगी।श्री चौहान ने कहा कि विकास का लाभ आम गरीब आदमी तक पहुँचे इसके लिये राज्य सरकार ने कई योजनाएं बनायी हैं। मुख्यमंत्री आवास मिशन तथा शहरी आवास योजना के तहत गरीबों के अपने मकान के सपने को पूरा किया जायेगा। मध्यप्रदेश आज तेजी से विकास कर रहा है तथा देश की प्रगति में योगदान कर रहा है। प्रदेश में कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मई अंत तक प्रदेश के हर गाँव में 24 घंटे बिजली मिलेगी। युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिये कौशल विकास मिशन शुरू किया गया है। युवाओं द्वारा स्थापित लघु उद्योगों के उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में राज्य सरकार हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि बैंकों की साख देश की पूँजी है, बैंकर्स इसे ध्यान में रखकर कार्य करें। उन्होंने आव्हान किया कि सबको मिलकर देश-प्रदेश के लिये कुछ करने का भाव पैदा करना होगा। बैंक युवाओं का सहयोग करें, मार्गदर्शन दें।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के विकास में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज प्रदेश में टीसीएस और इन्फोसिस जैसे बड़े उद्योग आ रहे हैं। मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था मंदी से अप्रभावित है। बैंकर्स मुख्यमंत्री स्वरोजगार जैसी महत्वाकांक्षी योजना में सहयोग करें।मुख्य सचिव आर.परशुराम ने कहा कि बैंक आर्थिक सामाजिक उन्नति की महत्वपूर्ण योजनाओं में पूरा सहयोग करें। प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास मिशन और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी अभिनव योजना शुरू की है। इसमें सभी बैंकर्स द्वारा एम.ओ.यू. किये गये हैं। राज्य सरकार स्किल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दे रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमेन एम.वी. टंकसाले ने कहा कि बैंकों का फोकस अब ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों पर है। बैंकों द्वारा गाँवों में अल्ट्रा बैंकिग सुविधा शुरू की जा रही है। हर छह माह में लीड बैंक प्रबंधकों का सम्मेलन आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सभी बैंकर्स सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं का क्रियान्वयन समय-सीमा में करें।

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इंदौर में सर्वाधिक स्वच्छ एवं सुन्दर वार्ड होंगे पुरस्कृत

मुख्यमंत्री चौहान स्वच्छता अभियान में हुए शामिल मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इंदौर में स्वच्छ इंदौर-स्वस्थ इंदौर और हरित इंदौर अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि इंदौर नगर निगम क्षेत्र में सर्वाधिक स्वच्छ एवं सुन्दर वार्ड को पुरस्कृत किया जायेगा। उन्होंने नागरिकों का आव्हान किया कि वे स्वच्छ-स्वस्थ और हरित इंदौर बनाने में सक्रिय सहयोग दें।मुख्यमंत्री चौहान और नगरीय प्रसाशन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कई जगह सफाई भी की। मुख्यमंत्री चौहान ने नगर में विभिन्न जगह पर सफाई कार्यक्रमों में भाग लिया। श्री चौहान सबसे पहले एयरपोर्ट रोड स्थित पंचशील नगर पहुँचे। यहाँ उन्होंने कचरा उठाकर सफाई अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महापौर मालिनी गौड़, विधायक सुदर्शन गुप्ता, रमेश मैंदोला, उषा ठाकुर, महेन्द्र हार्डिया सहित अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद थे। मुख्यमंत्री फिरोज गांधी नगर मालवा मिल श्मशान घाट के सामने, परदेशीपुरा चौराहा तथा कबीटखेड़ी लाहिया नगर में सफाई अभियान में शामिल हुए। उन्होंने कचरा उठाया तथा सफाई की।लाहिया नगर में मुख्यमंत्री ने कहा कि साफ-सफाई को हमारी दिन-प्रतिदिन की आदत में शामिल करना होगा। उन्होंने नागरिकों से आव्हान किया कि वे अपने घर तथा आस-पास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने में सक्रिय सहयोग करें। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन स्वच्छता की दिशा में संस्थागत प्रयास करेगा ही, परंतु नागरिकों की सक्रिय सहभागिता भी जरूरी है।नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नागरिकों से कहा कि इन्दौर को स्वच्छ, स्वस्थ और हरित बनाने में शासन-प्रशासन का सहयोग करें।

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साल का पहला रविपुष्य योग 27 जनवरी को

ज्योतिषाचार्य पं.धर्मेन्द्र शास्त्री36 वर्ष बाद रविपुष्य पर महामुहूर्त का महासंयोगो का महापुण्य होगा प्राप्त36 वर्ष बाद इलाहबाद महाकुम्भ पर्व व रविपुष्य होगा महासंयोगो का महापुण्यफल प्राप्त होगापुष्य नक्षत्र से बनता है पौष माहसर्वार्थसिद्धीयोग$पुष्यनक्षत्र$रविवार$पूर्णिमातिथि$श्रीवत्सयोग$कुम्भकाप्रमुखस्नान$शाकम्भरी जयन्ती के साथ शाकम्भरी नवरात्र का समापन दिन$माघ स्नान प्रारम्भ$बुधादित्ययोगशाकम्भरी नवरात्री 19 जनवरी से27 जनवरी ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेन्द्र शास्त्री(बडी पोलायकलॉ वाले) के अनुसार 27 जनवरी 2013 रविवार को पुष्य नक्षत्र के साथ पौषी पूणिमा एवं शाकम्भरी जयन्ती व श्रीवत्स योग एवं माघ स्नान प्रारम्भ एवं तीर्थराज प्रयाग(इलाहबाद) में महाकुम्भ का प्रमुख स्नान का संयोग बनता है ऐसा महासंयोग 36 साल पहले इलाहबाद महाकुम्भ पर्व के समय 18 जनवरी 1976 मे रविपुष्य योग एवं महाकुम्भ पर्व एक साथ आये थे ! पुष्य नक्षत्र जो 27 नक्षत्रों का राजा होता है इसे नक्षत्रराज भी कहा जाता है साथ ही रविवार का स्वामी सूर्य जो नवग्रहो के राजा है इस कारण रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र आने से सवार्थसिद्धी योग बनता है! पुष्य नक्षत्र 26 जनवरी के दोपहर 2ः44 से 27जनवरी को सायं 4ः28 तक रहेगा इस रविपुष्यमहासंयोग में यागो में नए वाहन जमीन मकान स्थाई सम्पत्ति के सौदे गृहप्रवेश गहने मषीनरी इलेक्ट्रानिक समाना खरीदना शुभ होता है। इन योगों में खरीदी गई जमीन या मकान व सोना चाँदी लाभ प्रदान करते है ! प्राचीन काल से ही ज्योतिष में 27 नक्षत्रों के आधार पर गणनाएं कर रहे हैं। इनमें से हर एक नक्षत्र का शुभ-अशुभ प्रभाव मनुष्य के जीवन पड़ता है। नक्षत्रों के इन क्रम में आठवें स्थान पर पुष्य नक्षत्र को माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी बहुत लंबे समय तक उपयोगी रहती है तथा शुभ फल प्रदान करती है क्योंकि यह नक्षत्र स्थाई होता है। पुष्य को नक्षत्रो का राजा भी कहा जाता है। यह नक्षत्र सप्ताह के विभिन्न वारों के साथ मिलकर विशेष योग बनाता है। इन सभी का अपना एक विशेष महत्व होता है। ऋग्वेद में इसे मंगलकर्ता वृद्धिकर्ता आनंद कर्ता एवं शुभ कहा गया है। नक्षत्रों के संबंध में एक कथा भी हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है उसके अनुसार ये 27 नक्षत्र भगवान ब्रह्मा के पुत्र दक्ष प्रजापति की 27 कन्याएं हैं इन सभी का विवाह दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा के साथ किया था। इस प्रकार चंद्र वर्ष के 5- पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जो सदैव शुभ कर्मों में प्रवृत्ति करने वाले ज्ञान वृद्धि एवं विवेक दाता हैं तथा इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि शनि हैं जिसे स्थावर भी कहते हैं जिसका अर्थ होता है स्थिरता। इसी से इस नक्षत्र में किए गए कार्य चिर स्थायी होते हैं। महीने में एक दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के साथ भी संयोग करता है। जब पूर्ण चंद्रमा पुष्य नक्षत्र से संयोग करता है वह मास पौष नाम से जाना जाता है। इस तरह पुष्य नक्षत्र साल के 12 महीनों में से एक का निर्धारण करता है।

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तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में 413 करोड़ के एम.ओ.यू.

इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की उपस्थिति में तकनीकी शिक्षा और कौशल उन्नयन के क्षेत्र में 16 से अधिक कम्पनियों एवं शिक्षा संस्थानों द्वारा मध्यप्रदेश शासन के साथ एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये गये। इनके माध्यम से आने वाले समय में प्रदेश में ब्लाक स्तर पर 406 स्किल डेवलपमेंट सेंटर, 39 आई.टी.आई. और 7 उच्च स्तरीय आई.टी.आई.खोले जायेंगे। इनमें एक लाख 92 हजार से अधिक युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जायेगा।मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की शिक्षा-स्थली और कालिदास की रचना-स्थली उज्जैन को अब नॉलेज सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नॉलेज सिटी में विभिन्न कम्पनियों एवं संस्थानों द्वारा शिक्षा केन्द्र स्थापित किये जायेंगे जिससे पूरे देश ही नहीं विश्व में इंदौर और उज्जैन को एजुकेशन हब के रूप में पहचाना जायेगा। श्री शर्मा ने कहा कि पहले आई.टी.आई. उतनी उन्नत नहीं थी, किंतु वर्तमान में रोजगार आधारित और समाज की मांग को देखते हुए नये-नये विषयों में युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिये दक्षता विकास केन्द्रों को ब्लाक लेवल पर स्थापित किया जा रहा है। आने वाले समय में 10 से 20 गाँवों के क्लस्टर बनाकर एसडीसी खोले जायेंगे, जिनमें युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि युवा अपने परंपरागत रोजगार क्षेत्र में प्रशिक्षित होकर प्रमाण-पत्र प्राप्त करेंगे। श्री शर्मा ने कहा कि विश्व बैंक द्वारा कम ब्याज दर पर स्वीकृत किए जा रहे 1000 करोड़ के ऋण से प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों को और बेहतर बनाया जायेगा।श्री शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश में तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा को हिन्दी माध्यम से पढ़ाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भोपाल में हिन्दी विश्वविद्यालय और उज्जैन में संस्कृत विश्वविद्यालय खोला गया है। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि मातृ भाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाय। उन्होंने बताया कि विश्व के विकसित देशों विशेषकर फ्रांस, चीन, जापान की तरक्की उनकी मातृ भाषा के कारण है। श्री शर्मा ने कहा कि हमें भी अपनी मातृ भाषा को शिरोधार्य कर विश्व में अलग पहचान बनानी चाहिये।अपर मुख्य सचिव अजिता वाजपेयी पाण्डे ने तकनीकी शिक्षा विभाग की योजनाओं एवं नीतियों के संबंध में सभी निवेशकर्ताओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होना है। निवेश में उद्योग-धंधे, निर्माण क्षेत्र, उद्यानिकी, कृषि, ऊर्जा, कपड़ा उद्योग आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होगी। यह प्रशिक्षित लोग आई.टी.आई. से ही निकलेंगे। वर्तमान में 100 से अधिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने निजी कम्पनियों एवं संस्थानों के लिये भी इस क्षेत्र के द्वार खोले हैं। आई.टी.आई. से प्रशिक्षित लोग स्वयं के व्यवसाय शुरू करने के साथ कम्पनियों में भी रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।

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इंदौर में क्रिस्टल आई.टी.पार्क लोकार्पित

राजेश पाण्डेय इंदौर में 150 करोड़ की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त क्रिस्टल आई टी पार्क का लोकार्पण हुआ ।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे लोकार्पित किया |पार्क को विशेष आर्थिक परिक्षेत्र (एसईझेड) का दर्जा प्राप्त है।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि क्रिस्टल आई टी पार्क का उच्च गुणवत्ता से निर्माण हमारा संकल्प था जो पूरा हुआ, एक सपना था जो साकार हुआ। हमारा प्रयास है कि इंदौर को आई टी के क्षेत्र में देश का सबसे बेहतर डेस्टिनेशन बनाया जाये। उन्होंने कहा कि आई टी के क्षेत्र में आने वाले ढाई साल में एक लाख लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का संकल्प है। श्री चौहान ने कहा कि आई टी क्षेत्र में कम पूँजी निवेश से अधिक रोजगार प्राप्त होता है इसलिए इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ाया जायेगा। श्री चौहान ने निर्देश दिये कि पार्क के पास की रिक्त जमीन भी आई टी निवेशकों को उपलब्ध करवाई जाये जिससे कि वे भवन निर्माण कर आई टी कंपनी स्थापित कर सके।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पार्क में स्थापित इम्पेटस कंपनी तथा पार्क का अवलोकन कर वहाँ की सुविधाओं का जायजा लिया।वाणिज्य, उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जहाँ आधारभूत संरचनाएँ होती हैं, वहीं विकास होता है। इंदौर और मध्यप्रदेश इसका बेहतर उदाहरण है। यहाँ सड़क, बिजली, पानी, इन्टरनेशनल एयरपोर्ट तथा उच्च गुणवत्ता की जीवनशैली है, शिक्षा का हब है। इसलिये तेजी से आई टी क्षेत्र तथा अन्य औद्योगिक इकाइयाँ प्रदेश में आ रही हैं। हमारा संकल्प है कि यहाँ आने वाले ढाई साल में एक लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाये।इम्पेटस के चेयरमेन श्री प्रवीण कांकरिया ने कहा कि आई टी पार्क इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिये मील का पत्थर है। इस पार्क का पूरा होना मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है।उल्लेखनीय है कि भारत में इंदौर ही एकमात्र ऐसा शहर है, जहाँ पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आई.आई.एम.) एवं इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (आई.आई.टी.) जैसी शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित दोनों संस्थाएँ कार्यरत हैं। इंदौर में आने वाले समय में आई.टी. क्षेत्र की देश की शीर्षस्थ टाटा कंसल्टिंग सर्विसेस (टी.सी.एस.) एवं इंफोसिस द्वारा भी कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा।समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया, इंदौर महापौर कृष्णमुरारी मोघे, विधायक सुदर्शन गुप्ता, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ तथा जीतू जिराती, मुख्य सचिव आर.परशुराम और अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.के. दाश उपस्थित थे।

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केम्पस इंटरव्यू भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में

चिन्हित इंजीनियरिंग कॉलेजों एवं तकनीकी संस्थाओं में अध्ययनरत प्री-फायनल ईयर के विद्यार्थियों के लिए 30 अक्टूबर से 10 नवम्बर के बीच केम्पस इंटरव्यू रखा गया है। केम्पस इंटरव्यू भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं ग्वालियर में होगा। इस यूनिवर्सिटी इंट्री स्कीम-23 इंटरव्यू में सत्र 2012-13 के प्री-फायनल ईयर के केवल छात्र ही शामिल हो सकेंगे।भोपाल में 30 अक्टूबर से 3 नवम्बर, इंदौर में 5-7 नवम्बर, उज्जैन में 8 नवम्बर और ग्वालियर में 9-10 नवम्बर को केम्पस इंटरव्यू होंगे। इंटरव्यू का समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक रहेगा।भोपाल में 30 अक्टूबर को मैनिट, 31 अक्टूबर एवं एक नवम्बर को यू.आई.टी., 2 नवम्बर को एल.एन.सी.टी. और 3 नवम्बर को आर.के.डी.एफ. में केम्पस इंटरव्यू होंगे।इंदौर में एम.आई.टी. में 5-6 नवम्बर, एस.डी.बी.सी.टी. में 7 नवम्बर, उज्जैन के एम.आई.टी. में 8 नवम्बर और ग्वालियर के एम.आई.टी.एस. में 9-10 नवम्बर को केम्पस इंटरव्यू होंगे। इस इंटरव्यू में 1648 छात्र को शामिल किया जाएगा।

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ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के लिए इंदौर तैयार

इंदौर में आगामी 28 अक्टूबर से आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट की तैयारियाँ अंतिम दौर में है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश को लाने के राज्य सरकार के इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश-विदेश के करीब 2200 निवेशक शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ ग्लोबल इन्वेस्टर मीट की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव आर.परशुराम भी उपस्थित थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री पी.के. दाश सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर मीट के गरिमामय आयोजन की सभी तैयारियाँ व्यवस्थित रूप से समय-सीमा में पूरी की जाये। मीट में आने वाले निवेशकों को प्रदेश की विशेषताओं के बारे में पहले से जानकारी दी जाये।बैठक में बताया गया कि इन्वेस्टर मीट के पहले दिन लघु उद्यमियों के लिये वर्कशाप आयोजित की जायेगी। इसमें करीब 700 से लघु उद्यमी शामिल होंगे। इसी दिन मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित विशेष प्रदर्शनी की शुरूआत भी होगी। इन्वेस्टर मीट के दूसरे दिन आयोजित उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश पर बनी लघु फिल्म ‘‘एडवांटेज मध्यप्रदेश’’ की स्क्रीनिंग होगी। इसी दिन अलग-अलग सेक्टरवार पाँच सेमीनार आयोजित किये जायेंगे। यह सेमीनार इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, नवकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, एग्री बिजनेस एवं फूड प्रोसेसिंग, अधोसंरचना और नगरीय विकास पर केन्द्रित होंगे। इन्वेस्टर मीट के तीसरे दिन भी सेक्टरवार पाँच सेमीनार होंगे, जिनके विषय सूचना प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, वेयर हाऊसिंग और लॉजिस्टिक, टेक्सटाइल तथा पर्यटन रहेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान तीनों दिन उद्यमियों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे।ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का पहला दिन होगा छोटे उद्यमियों के लियेइंदौर में होने वाली ग्लोबल इनवेस्टर समिट का पहला दिन 28 अक्टूबर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को समर्पित होगा।समिट में महाप्रबंधक एवं अधीनस्थ अधिकारी, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र भोपाल द्वारा 105 एमओयू तैयार करवाये गये हैं। इनमें 902 करोड़ 30 लाख रुपये का पूँजी निवेश होगा और 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र मण्डीदीप द्वारा 42 एमओयू तैयार करवाये गये हैं। इनमें 790 करोड़ 52 लाख रुपये का पूँजी निवेश होगा और 7,500 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।इस प्रकार भोपाल एवं मण्डीदीप का कुल पूँजी विनियोजन 1692 करोड़ 82 लाख रुपये होगा और इससे लगने वाले उद्योगों में 32 हजार 600 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।जिन उद्योगों से एमओयू किये गये हैं, उनमें मुख्य रूप से हायर केपेसिटी ट्रांसफार्मर, पेस्टीसाइड फार्मुलेशन, ट्रेक्शन मोटर्स, आर्किटेक्चरल, इन्सुलेटेड ग्लास, हाई प्रेशर पाइप, हीट एक्सचेंजर, फिन ट्यूब, पेट बॉटल एण्ड कन्टेनर, रिसायकल ऑफ ए.एफ. मेटल, सॉफ्टवेयर सल्युशन एण्ड आई.टी., इंटरप्राइजेज सल्युशन, ए.आर.सी. शट स्विच गेयर असेंबली, सालवेन्ट एक्सट्रेक्शन प्लांट, एडिबल ऑइल रिफायनरी, कृषि उपकरण, सोलर-पॉवर, बॉक्स कॉटेज, सिन्थेटिक यार्न, आइस्क्रीम, राइस मिल, मेटल स्टेच्यू, टी.एन्ड.टी. स्टील, स्ट्रा बोर्ड, जनरेटर सेट, इंजेक्शन, टफल ग्लास, ट्रेक्टर पार्ट्स आदि शामिल हैं।

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सुदर्शन जी प्रेरणादायी विचारों के वाहक थे

स्मृति-ग्रंथ सु-दर्शन का विमोचन अजय कुमार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि स्वर्गीय सुदर्शन जी प्रेरणादायी विचारों के वाहक थे। उनके बताए मार्ग के अनुसरण में मानव जीवन की सार्थकता है। श्री सुदर्शन जी के सद्विचारों को अपनाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्री चौहान भोपाल के समन्वय भवन में तरूण भारत नागपुर द्वारा प्रकाशित स्मृति-ग्रंथ सु-दर्शन के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में हिन्दी विश्वविद्यालय का गठन, जैविक खेती का प्रसार, स्वावलंबी गांव, नौजवानों को कार्य के अवसर देने और गौ-संरक्षण संवर्धन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में स्वर्गीय सुदर्शन जी के चिंतन को मूर्तरूप देने का प्रयास किया है।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये जैविक बोर्ड का गठन किया गया है। मध्यप्रदेश को जैविक राज्य बनाने के प्रयास हो रहे हैं। जैविक खेती को मिशन के रूप में ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुदर्शन जी कहते थे कि प्रकृति से उतना ही लो जिसकी भरपाई हो सके।उन्होंने कहा कि सुदर्शन जी के हिन्दी और स्वदेशी के प्रति आग्रह से सभी परिचित हैं। गौ मूत्र से ऊर्जा, गोबर से टाइल्स के प्रयोग आदि सुदर्शन जी दिखाते रहते थे। उनकी प्रेरणा से राज्य में गौ संरक्षण के लिये विश्व का पहला गौ अभ्यारण्य 24 दिसम्बर को शाजापुर में प्रारंभ हो रहा है। हिन्दी विश्वविद्यालय में हिन्दी माध्यम से तकनीकी, चिकित्सा विज्ञान आदि सभी विषयों की शिक्षा मिलेगी।श्री चौहान ने कहा कि विवेकानंद युवा केन्द्रों का गठन किया जा रहा है। ये केन्द्र युवाओं को रचनात्मक कार्यों से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलें। गाँव स्वाबलंबी बने इसके लिये लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के कदम उठाए गए हैं। इंदौर में ग्लोबल समिट का पहला दिन लघु एवं कुटीर उद्यमियों के लिये आरक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि लघु ग्रामीण उद्योगों की स्थापना में युवाओं को बैंक ऋण प्राप्त करने में सहूलियत के उद्देश्य से राज्य सरकार ऋण गारंटी देने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि सुदर्शनजी की भावना को आत्मसात करते हुये तय किया है कि राज्य में ऐसे उद्योग की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी जो नदियों के जल को प्रदूषित करते हैं।राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघकार्यवाह भैया जी जोशी ने कहा कि सुदर्शन जी ने अपने व्यवहार और आचरण से नैतिक शब्दों के अर्थ स्थापित किए। उनके जीवन में सामाजिक जीवन के सारे आदर्श मापदण्डों को देखा जा सकता है। वे जो कहते थे उसका संकल्प हृदय में धारण कर उसकी प्राप्ति के लिये पूरा परिश्रम करते थे। उन्होंने सारे समाज को जोड़ने के प्रयास किए। वे देश समाज के लिये प्रश्न नहीं खड़े करते थे। प्रश्नों के हल खोजते थे। सामाजिक जीवन में कैसा व्यक्तित्व होना चाहिए इस प्रश्न का उत्तर सुदर्शन जी थे। उनके व्यक्तित्व की पारदर्शिता, प्रमाणिकता, निर्मलता एवं खुला अंतःकरण अद्भुत था।एन.सी.ई.आर.टी. के पूर्व अध्यक्ष जे.एस. राजपूत ने कहा कि सुदर्शन जी भारतीय व्यक्तित्व का स्वरूप थे। विमोचन कार्यक्रम में पत्रकार मुज़फ्फर हुसैन ने सुदर्शन जी के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामो पर भावपूर्ण उद्बोधन दिया।स्मृति ग्रंथ की प्रस्तावना विश्वास पाठक ने प्रस्तुत की। आभार प्रदर्शन विलास डांगरे ने किया। अतिथियों का स्वागत लक्ष्मणेन्द्र माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम का संचालन अजय नारंग ने किया।

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धनंजय टॉप संसदीय रिपोर्टर

पत्रिका के धनंजय प्रताप सिंह सर्वोत्तम संसदीय रिपोर्टर चुने गए है ,दैनिक भास्कर के सतीश एलिया दूसरे और महामेधा के आनंद प्रकाश इस मामले में तीसरे स्थान पर रहे हैं |इस मौके पर रिपोर्टर्स को सम्मानित करते हुए संसदीय कार्य, विधि और विधायी मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि पत्रकारिता जगत से जुड़े लोग समाचार-पत्रों के माध्यम से वास्तविक स्थिति से जनता को अवगत करवाते हैं। वे कई बार पथ से भटक जाने पर राह दिखाने का काम भी करते हैं।पिछले दिनों भोपाल में डॉ.मिश्रा ने पं. कुंजीलाल दुबे राष्ट्रीय संसदीय विद्यापीठ द्वारा आयोजित वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में वर्ष 2011-12 में सम्पन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित किये। समारोह में विश्वविद्यालयीन, महाविद्यालयीन, विद्यालयीन युवा संसद, निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं संसदीय रिपोर्टिंग के पुरस्कार दिये गये। मंदसौर के विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा है कि पत्रकार सदैव अपना नैतिक कर्त्तव्य और धर्म निभाते आए हैं।संसदीय पत्रकारिता रिपोर्टिंग पुरस्कार (प्रिन्ट मीडिया) में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये का धनंजय प्रताप सिंह (पत्रिका), द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये का सतीश एलिया (दैनिक भास्कर) और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये का आनंद प्रकाश शुक्ल (महामेधा) को दिया गया।विश्वविद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन स्थानीय युवा संसद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 10 हजार रुपये माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, द्वितीय पुरस्कार 6 हजार रुपये पीपुल्स पत्रकारिता एवं शिक्षण संस्थान और तृतीय पुरस्कार 4 हजार रुपये का शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों को दिया गया। विद्यालयीन में प्रथम पुरस्कार 10 हजार रुपये ज्ञान गंगा इंटरनेशनल अकादमी, रतनपुर, द्वितीय पुरस्कार 6 हजार रुपये का रेड रोज को-एड स्कूल, लाम्बाखेड़ा और नवनीध हासोमल लखानी पब्लिक स्कूल बैरागढ़ तथा तृतीय पुरस्कार 4 हजार रुपये का शारदा विद्या मंदिर, रातीबड़ और महर्षि विद्या मंदिर, रतनपुर के विद्यार्थियों को दिया गया।विश्वविद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन स्थानीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 3 हजार रुपये कैरियर विधि महाविद्यालय की कु. तन्वी शर्मा, द्वितीय पुरस्कार 2 हजार रुपये उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की कु. सुप्रिया पाठक और मनीष दुबे तथा तृतीय पुरस्कार एक हजार रुपये शासकीय सरोजनी नायडू कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की कु. प्रीति सिंह और संत हिरदाराम कन्या महाविद्यालय की कु. भावना वासवानी को दिया गया।विश्वविद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 3 हजार रुपये का शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इंदौर के मनीष पाण्डेय, द्वितीय पुरस्कार 2 हजार रुपये का उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की कु. भक्ति शर्मा तथा तृतीय पुरस्कार डेढ़ हजार रुपये शासकीय स्नातक महाविद्यालय, नैनपुर, मण्डला के संदीप कुमार झारिया और शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की कु. अनुभा जैन को दिया गया। विद्यालयीन में प्रथम पुरस्कार 3 हजार रुपये शासकीय आर.पी. उत्कृष्ट उ.मा. विद्यालय, पन्ना के दीपक कुमार कोंदर, द्वितीय पुरस्कार 2 हजार रुपये जवाहर नवोदय विद्यालय, होशंगाबाद की कु. सौम्या जैन और तृतीय पुरस्कार डेढ़ हजार रुपये शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, बड़वानी की कु. सुशीला लोहारे को दिया गया।समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं विद्यालय के 5-5 विद्यार्थियों को विशेष दक्षता पुरस्कार भी दिए गए। पुरस्कार स्वरूप प्रमाण-पत्र, मेडल, शील्ड आदि का वितरण किया गया। इस अवसर पर विद्यापीठ के संचालक एल.सी. मोटवानी, उप सचिव राजेश गुप्ता सहित छात्र-छात्राएँ और शिक्षक मौजूद थे।

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उत्तरआधुनिकता और गांधी

मनोज कुमारक्या उत्तरआधुनिकता एक तरह की बौद्धिक झांसेबाजी है ? क्या वह सिर्फ एक शगल है जिसके जरिए अस्पष्टता के आतंक से पाठक, श्रोता, दर्शक को अर्धमूर्छित किया जा सकता है ? या इन सबसे कहीं अधिक वह किसी समय' में संस्थित है ? क्या हम इस अवधि को सही-सही चिन्हित कर सकते हैं ? सच तो यह है कि आज हम अन्तरावधि में हैं जब आधुनिकता बुढ़ा रही है और उत्तरआधुनिकता के दांत आ रहे हैं । जिस तरह से नए' को एक कमोडिटी बना दिया गया है, आधुनिक' होना मौलिक होना नहीं रह गया है । हम रूढ़ियों की बात करते हैं जिनमें अनुकरण का मनोविज्ञान होता है, लेकिन अनुकरण का यही मनोविज्ञान तो उन चीजों में भी चरितार्थ होता है जिन्हें फैशन कहते हैं । गांधी जी इस चीज को १९०८ में पहचान गए थे जिसे ग्लोबलाइजेशन की फैशनेबल चकाचौंध में न्यस्त हमारे पुरोधा आज तक नहीं पहचान पाए । उन्होंने हिन्द स्वराज' में तब लिखा था कि They wish to convert the whole world into a vast marlet for their goods. They will leave no stone unturned to reach the goal. गांधी जी ने आधुनिक सभ्यता के उस कमोडिटी रश '' को अपनी किन आंखों से उसी वक्त देख लिया था । १९१७ में रूडोल्फ पानविट्ज ने उत्तर आधुनिकता को एक दर्शनिक तौर पर अभिमुखी संस्कृति'' (Philosophically oriented culture) कहा था । उनसे ९ साल पूर्व गांधी ने मास्टर्स ऑफ इंडियन फिलासफी '' को, भारतीय दर्शन के प्रतीक पुरूषों को, अपनी पुस्तक हिन्द स्वराज की प्रेरणा बताया था, अपनी उस पुस्तक की प्रेरणा जो आधुनिक सभ्यता का निर्मम क्रिटीक पेश करती है । ब्रिटिश सरकार के द्वारा इस पुस्तक को १९१० में जप्त किये जाने को गांधी ने ब्रिटिश सरकार जिस सभ्यता का प्रतिनिधित्व करती है, उसका एक और अवगणन - Further condemnation बताया था । गांधी की लड़ाई किसी रूप में पॉलिटिकल नहीं थी । यह लड़ाई सिविलाइजेशनल थी । यहाँ एक देश दूसरे देश का अस्वीकार नहीं कर रहा था । यहाँ एक सभ्यता दूसरी कथित सभ्यता को अस्वीकार कर रही थी । पश्चिमी सभ्यता ' - गांधी जी को ये शब्दयुग्म ही मजाकिया और विरोधाभासी लगा था । हिंद स्वराज में वे आधुनिक सभ्यता को किंगडम ऑफ सैटन ' कहते हैं - शैतान का साम्राज्य । वे प्राचीन सभ्यता को किंगडम ऑफ गॉड ' कहकर उससे कन्ट्रार जरूर करते हैं, लेकिन इसका आशय यह नहीं था कि वे पूर्वाधुनिक थे, अतीतग्रस्त थे या भूतबाधाग्रस्त । वे कई तरह से उत्तरआधुनिक संवेदना और सोच को जन्म दे रहे थे । यह ध्यान दें कि विज्ञापन पर हमला सिर्फ गांधी ने ही नहीं किया, उत्तरआधुनिकों ने भी किया । उनके अनुसार वैज्ञानिकों के प्रिटेन्शन्स औचित्यहीन हैं, कि वैज्ञानिक भी यथार्थ का अन्वेषण नहीं करते, उसे कन्स्ट्रक्ट करते हैं । क्या बुश के एक वरिष्ठ परामर्शदाता ने भी ऐसा ही नहीं कहा ^ (You people) in what we call the reality based community ... belive that solutions emerge from your judicious study of discernible reality. That,s not the way the world really works anymore. We're ar empire now and when we act, we create our own reality. सत्याग्रही गांधी जी ने सत्य को संप्रभु सिद्धांत (Sovereign Principle) कहा था, उन्हें क्या पता था कि संप्रभुता सत्य को निर्मित करने लगेगी । गांधी के लिए सत्य विज्ञान या तर्क मात्र से पकड़ में आने वाली चीज नहीं था । गांधी जी के अनुसार तो सत्यान्वेषी को धूल से भी ज्यादा विनम्र होना चाहिए और यहाँ तो वी आर एन एंपायर नाउ'' की दर्पोक्ति है । सत्य यों तो ईश्वर की पुत्री कहा गया, लेकिन अब तो सत्य साम्राज्य की चाकरी करते नजर आता है । उधर गांधी के शब्दों में I have no God to serve but Truth. गांधी सत्य की चाकरी कर रहे थे । ईश्वर को भी सत्य की सृष्टि का गर्व न होगा, लेकिन साम्राज्य को सत्य के सृजन का, उसकी मैनुफेक्चरिंग की अपनी ताकत का गर्व जरूर है । साम्राज्य' के सामने गांधी जी लघु ग्राम गणतंत्रों को पेश कर रहे थे । ये ग्राम गणतंत्र, आइरिस मर्डोक के शब्दों में यदि प्रयोग करने की अनुमति मिले । किसी तरक की खंडित पूर्णता '' (ब्रोकन टोटलिटी) नहीं थे बल्कि समकेन्द्रित कृत्त थे । गांधी जी की तरह उत्तरआधुनिक भी इस नतीजे पर पहुँचे कि एटम बम, क्वांटम मैकेनिक्स, जेनेटिक इंजीनियरिंग, ग्लोबल क्लाइमेट आदि का हमारी वैज्ञानिक ज्ञान पश्चिमी राजनैतिक और सैनिक उद्देश्यों के अनुसरण में विकसित हुआ । जिस तरह से गांधी को पश्चिमी सभ्यता शब्द ही व्यंग्यात्मक लगता था, उसी तरह से जॉन हार्गन जैसे उत्तर आधुनिक अपनी द एंड ऑफ साइंस फेसिंग : द लिमिट्स ऑफ नॉलिज में '' आयरनिक साइंस या व्यंग्यात्मक विज्ञान की बात कर रहे हैं । गांधी जी ने आधुनिक चिकित्सा की घनघोर आलोचना की, लेकिन क्या कुछ वैसा ही काम ईवान ईलिच ने मेडिकल निमेसिस ' में नहीं किया ? वही ईलिच जो बाद में जाकर गांधी जी की झोपड़ी में रहे । तर्क की संप्रभुता के प्रति अश्रद्धा (irreverence towards reason) उत्तरआधुनिक लेखक कार्ल बार्थ में भी गांधी से कम नहीं देखी गई । हालांकि बार्थ का काम हिंद स्वराज के दो दशक बाद का है । गांधीजी तब लिख रहे थे I plead not for the suppression of reason, but for a due recognition of that in us which sanctifies reason itself.उत्तरआधुनिकता में जो मिनिमलिज्म है - जिसके चलते कार्ल आन्दे्र ने लंदन की टेट गैलरी में ईंटों का आयताकार ढेर चित्रित कर दिया था - जो एलीमेंटरी होने के लिए डिजाइन किया जाता है, क्या वह हमें गांधी के उस जीवन-दर्शन और उसके उस देह-धरे के धम्म में नहीं मिलता जो सृष्टि सो न्यूनतम मांग करता है । सिर्फ एक लंगोटी में काम चलाने वाले गांधी आधुनिकता के उपभोक्तावादी जीवनाग्रहों का प्रतिलोम थे । सच्चे मिनिमलिस्ट । सन् २००१ में मार्टिन क्रीड ने अपनी जिस मिनिमलिस्ट कलाकृति के लिये टर्नर पुरस्कार जीता, उसमें बस एक खाली कमरा है । बहुत कुछ भर लेते और ठूँस लेने की जिद पकड़े आधुनिकता के विरूद्ध गांधी का जीवन भी इस खाली कमरे की तरह है । बहुत कुछ शून्य अपने चित्ताकाश में सिरजता हुआ। पूंजी के परिग्रह के ठीक वैपरीत्य में । कहा जा सकता है कि मिनिमलिज्म की उत्तर-आधुनिकता का सीधा संबंध अपरिग्रह और शून्यवाद से है । तो यह उत्तर आधुनिकों के लिए इतिहास समय की किसी धारा से छूट जाना है । उत्तराधुनिक सिर्फ व्यक्तिगत ही नहीं है, वे राज्य या समाज के सवालों का भी साक्षात् करते हैं । ध्यान दें कि गांधी न सिर्फ अपनी जीवन शैली को मिर्निमलिस्ट बना रहे थे बल्कि उनका राजकीय आदर्श भी एक मिनिमलिस्ट स्टेट का था । हालांकि गांधी देरिदा की तरह जटिल नहीं हैं और इस रूप में उससे भी ज्यादा उत्तरआधुनिक हैं, लेकिन उन्होंने भी हिन्द स्वराज ' में आधुनिक पश्चिमी जीवन को बहुत बेबाकी से डिकंस्ट्रक्ट किया । पश्चिमी इंटेलेक्चुअल फ्रेमवर्क का इतना आक्रामक डिकंस्ट्रक्शन इस छोटी सी पुस्तक में मिलता है कि आधुनिक बुद्धिजीवी के पास गांधी को पोंगापंथी कहकर खारिज करके बच निकलने के सिवा कोई मार्ग नहीं । एक दूसरे उत्तरआधुनिकतावादी लायोटार्ड ग्रांड नैरेटिव्स, मास्टर नैरेटिव्स, मास्टर नैरेटिव्स, ' या मेटानैरिटिव्स ' के प्रति अविश्वास को उत्तरआधुनिक होना मानते हैं । अपनी पुस्तक ला कंडीशन पोस्ट मार्डेन ' में वे कहते हैं कि " Simplifying to the extreme, I define, postmodern as the incredulity towaeds metanarratives. " गांधी ने भी हिन्द स्वराज में विज्ञान, आधुनिकता, पश्चिम और श्वेत आदमी का भार जैसे मेटानैरेटिव्स के प्रति अविश्वास प्रकट किया, इन्क्रेदुलिटी प्रदर्शित की । ऐसा नहीं है कि गांधीजी पश्चिमी-पूर्वी सभ्यताओं के रूप में या आधुनिक-प्राचीन सभ्यताओं के प्रति द्वैतात्मक विश्व-रूपों, dualirtic world-forms की बात के जरिए जरूरत से ज्यादा सरलीकरण कर रहे थे । लेकिन कुछ बातों को वे बिना लाग लपेट के, बिना कोई मुरौव्वत पाले रख जरूर देना चाहते थे । वह इसलिए कि जो डुअलिज्म भी था, एक आक्रामक सभ्यता उसे भी खत्म कर सिर्फ एक ' का ही सार्वत्रिक स्वीकार और प्रचार चाहती थी । मार्क्सवाद के मेटानैरेटिव पर भी उनकी अनास्था थी क्योंकि वह भी एक तरह का टोटलाइजिंग अनुभव था जो राज्य के बाहुबलीकरण की ही ओर ले जाता है । गांधी बहुत बहादुरी से इनके प्रति असंतुष्ट हुए । उनकी विशिष्टता इस बात में है कि वे इन मेटानैरेटिव्स के द्वारा हाशिए में डाल दिए और मातहत बना लिये गये छोटे आदमी की ओर से बोले । लोगों को गांधी आस्थावादी नजर आते हैं, लेकिन हिंद स्वराज में गांधी के तर्क से कहीं ज्यादा उनका scepticism, उनका संशयी मन मेरा ध्यान खींचता है । साम्राज्यवाद के पश्चिमी भव्य वृत्तंत के प्रक्षेपण के सारे प्रयासों का, उसकी सारी विकृतियों का पर्दाफाश गांधी तब भी करते हैं जब वे जानते हैं कि वे अकेले पड़ जायेंगे, अलग-थलग पड़ जायेंगे । लेकिन वे अपने जीवनकाल में यह भी सिद्ध करते हैं उन्हें अलग-थलग कर देना इतना आसान भी नहीं है । उन्हीं मार्जिनलाइज्ड और सबआर्डिनेटेड लोगों को साथ लेकर वे दुनिया के सबसे बड़े जनअभियान को शुरू करते हैं । ये असहयोग और अवज्ञा के आन्दोलन हैं । इनकी भाषा एक अनास्थावादी और विद्रोही आत्मा की भाषा है । यह भी देखिए कि ऐसे गांधी को पाठ्यपुस्तकों में कैसे पालतू, कैसे डामेस्टिकेटेड रूप में प्रदर्शित किया जाता है । यह भी देखें कि भारत की आस्थावादी समझी जाने वाली जनता पर ...................... की अपील कितनी ज्यादा होती है । विज्ञान और आधुनिकता से समृद्धि, सुख और संतोष की ट्रस्टेड रिलेशनशिप को हिंद स्वराज में गांधीजी छितरा देते हैं । वे अवधारणात्मक पद्धतियां जिनकी करेक्टनेस ' को लेकर नेहरू आदि इस हद तक आश्वस्त थे कि हिंद स्वराज के ५० साल बाद भी वे उस मोहभंग की सृजनात्मक पीड़ा से नहीं गुजरे जिससे गांधी गुजरे थे - इस पुस्तक में गांधी के डिकंस्ट्रक्टिंग क्वेश्चंस के आगे पनाह मांगती है । आधुनिकता की लगभग सर्वमान्य होती जा रही निष्पत्तियों के विरूद्ध गांधी एक सबवर्सिव भूमिका निभाते हुए यहाँ नजर आते हैं । ध्यान दें कि गांधी इसा पुस्तक में अनरेस्ट ' और डिस्कंटेंट' को उपयोगी मानते हैं और यह कहते हैं कि असंतोष किसी भी सुधार की भूमिका निर्मित करता है । लोगों को लगता है कि गांधीजी नरम मुलायम भाषा बोलते थे । हिंद स्वराज में वे ब्रिटिश पॉर्लियामेंट को बांझ और वैश्या दोनों बोलते हैं । इसकी तुलना में रवीन्द्रनाथ टैगोर की भाषा कहीं अधिक विधायी और सकारात्मक है । रवीन्द्र ५ मार्च १९२१ को शिकागो से लिखे अपने एक पत्र में कहते हैं नियति का व्यंग्य यह है कि मैं समन्दर के इस पार पश्चिमी और पूर्वी के बीच संस्कृतियों के सहयोग के लिए उस पल काम कर रहा हूँ जब उस पार असहयोग का सिद्धांत पढ़ाया जा रहा है ।''गांधी जी के असहयोग ' का यह आंदोलन और यह भाषा रवीन्द्र के इस कथन के आलोक में और रौशन होकर उभरती है । गांधी कुछ Irreconcilables पहचान गए थे और उसके बारे में निपट फक्कड़ और औघड़ तरीके से मुखर भी हो जाते थे । ब्रिटिश और पश्चिम से अपनी और अपनों की Incompatability पर वे कतई डिफेन्सिव नहीं थे और इस मायने में उनकी भाषा अपने गुरू गोखले और अपने शिष्य नेहरू दोनों से सिर्फ भिन्न ही नहीं थी, बल्कि ज्यादा पेनी, बेलाग और नुकीली थी । इसी कारण गांधी जी अन्य ज्यादा सिविल लोगों के मुकाबले भारतीय जनता को ज्यादा रैडिकलाइज कर पाए । भाषिक समृद्धि के स्तर पर गोखले, गुरूदेव और नेहरू तीनों गांधी से कहीं आगे थे, लेकिन भारत की आम जनता को गांधी की भाषा ज्यादा पल्ले पड़ी क्योंकि वह भाषा निगोशिएशन की भाषा नहीं थी, वह असहयोग और अवज्ञा के प्रति क्षमा प्रार्थी भाषा नहीं थी । भले ही वह अवज्ञा दुर्विनीत न होकर सविनय हो लेकिन भी वह अवज्ञा ही । बाद में चेकोस्लोवाकिया की मखमली क्रांति, बाल्टिक देशों की गाती हुई क्रांति '' और अभी २००४ की संतरा क्रांति (उक्रेन) और गुलाब क्रांति (जार्जिया) हमें अपनी प्रकृति में उत्तर आधुनिक जान पड़ेंगी, लेकिन उनके बीज हैं गांधी के तौर तरीकों में । बाद में गांधी सिविल डिस्ओबिडिएंस को सिविल रेसिस्टेंस कहने लगे लेकिन महत्वपूर्ण है असहयोग, अवज्ञा, प्रतिरोध जैसे शब्दों पर गांधी की आस्था । हमारे सामने आज भी यह प्रश्न है कि हम उत्तर-औपनिवेशिक युग में रह रहे हैं या नव-औपनिवेशिक युग में रह रहे हैं या नव-औपनिवेशिक युग में । गांधी जी के हिंद स्वराज के मानदण्डों से यदि हम इस प्रश्न को हल करने की कोशिश करें तो यह उत्तर जल्दी प्राप्त हो सकेगा । स्वराज गांधी के लिए गुजराती का एक ऐसा शब्द था जिनका एक आत्मानुशासन था तो दूसरा अर्थ स्वतंत्रता या स्वायत्तता था । पश्चिम भारतीय स्व' के इन दिनों ही रूपों के विरूद्ध था । पश्चिमी सभ्यता विश्वास तो यह करती थी कि ईश्वर ने मनुष्य को अपनी शकल में गढ़ा, लेकिन किया उसने यह कि तमाम देसी सभ्यताएँ खुद अपनी इमेज में गढ़ीं यह काम अस्वाभाविक तो था ही, इसे झेलने वाली सभ्यताओं के ब्लीडिंग भी बहुत हुई । गांधी की पश्चिम के प्रति कोई कंजर्वेटिव वितृष्णा नहीं थी । वे गंभीरता से महसूस करते थे कि यह पश्चिमी दुनिया सभ्यता कहलाने की लेजिटिमेसी खो चुकी है । यदि किसी आधुनिकता के प्रति गांधीजी के मन में कोई सम्मान था भी तो वह एक सार्वभौम, एक यूनिवर्सल किस्म की आधुनिकता थी और जो पश्चात्य ' के पर्याय के रूप में वापसरी नहीं जा सकती थी । पाश्चात्य इसी अर्थ में आधुनिक था कि उसका कोई उल्लेख्य अतीत ही न था, लेकिन भारत की आधुनिकता वक्त के एक सतत प्रवाह की आधुनिकता थी । भारत को पाश्चात्य का क्लोन बनाए जाने की कोशिशों को गांधीजी हिंदस्वराज में ठीक-ठीक ताड़ जाते हैं । गांधी जी यह भी ताड़ते हैं कि जो वेस्टर्न है, वह सिर्फ सिविलाइजेशन नहीं है, सिविलाइजिंग भी है । यानी उसका दावा सिर्फ सभ्यता होने का नहीं है, सभ्य बनाने का भी है । गांधी पाश्चात्य का आधुनिक से कोई स्वचलित सम्बन्ध स्वीकार नहीं कर सकते थे, हालांकि कई जगह उन्होंने आधुनिक सभ्यता को जो लताड़ा है, वह लताड़ वस्तुतः पाश्चात्य को है । लेकिन उससे कहीं ज्यादा बड़ा उनका अस्वीकार पश्चिम की सिविलाइजिंग' भूमिका के दावे को लेकर था । जो सभ्य हुए नहीं, वे सभ्य बनाने चले हैं - गांधीजी ने इस बात को बेपर्दा कर दिया । सिर्फ दर्शन के स्तर पर ऐसा करने की तैयारी और इच्छा गांधी जी की नहीं थी, वे तो इसे घटता हुआ दिखाना चाहते थे । जो दूसरों को गुलाम बनाता हो, वह सभ्य कैसे हो सकता है । जो निहत्थे सत्याग्रहियों पर कोड़ों और लाठियों की बारिश करता है, वह सभ्य कैसे हो सकता है ? जलियांवाला बाग के बाद तो स्वयं अंग्रेजों के मन में अपने सभ्य होने के प्रति गहरा संशय पैदा हो गया । गांधी के सविनय '' की कोमल रोशनी के ठीक सामने अंग्रेजों का दर्प और धृष्टता एकदम स्पष्ट दिखाई देने लगी । यह रोशनी एकदम चकाचौंध करने वाली होती तो शायद उसमें कुछ नहीं दिखाई देता । अंग्रेजों का औद्धत्य और प्रमाद भी उसमें छिप जाता । लेकिन इस कोमल रोशनी ने सब गड़बड़ कर दी । इसलिए जो लोग हिंद स्वराज को एक वैचारिक दृष्टि भर मानते हैं, उसे एक्शनेबल नहीं । वे ध्यान से गांधीजी के जीवन, उनकी राजनीति, उनकी गतिविधियों को वाच ' करें, गांधी किस तरह से हिंद स्वराज का एक सफल कर्मानुवाद संभव कर दिखाते हैं । हिंद स्वराज गांध के संघर्ष की मेटाफिजिक्स है

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सामान्य वर्ग के निर्धन परिवारों के विद्यार्थियों को भी मिलेगी छात्रवृत्ति

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इंदौर में पूर्व शिक्षा मंत्री स्व.श्री लक्ष्मण सिंह गौड़ की स्मृति में हिन्द रक्षक संगठन के पुण्योदय प्रकल्प कार्यक्रम में कहा कि प्रदेश में अब सामान्य वर्ग के निर्धन परिवारों के विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्ति दी जायेगी। बच्चों की शिक्षा में राज्य सरकार कोई कमी नहीं आने देगी। बच्चों को हर जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जायेगी, जिससे कि वे बेहतर अध्ययन कर अपने भविष्य को उज्जवल बना सकें। उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि वे विकास की ऊँची उड़ान भरें।मुख्यमंत्री ने हिन्द रक्षक संगठक की ओर से स्कूली बच्चों को कॉपियाँ वितरित की। जिले के प्रभारी तथा परिवहन मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, महापौर श्री कृष्णमुरारी मोघे, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री विक्रम वर्मा, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, श्री रमेश मेंदोला, श्री सुदर्शन गुप्ता, श्री महेन्द्र हार्डिया तथा श्री राजेन्द्र वर्मा, पूर्व विधायक श्री जीतू जिराती, श्री मधु वर्मा तथा श्री सत्यनारायण सत्तन उपस्थित थे।श्री चौहान ने हिन्द रक्षक संगठन के प्रकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे जरूरतमंद बच्चों को अध्ययन में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने स्व. श्री लक्ष्मण सिंह गौड़ का स्मरण करते हुए कहा कि वे प्रदेश के श्रेष्ठ शिक्षा मंत्री रहे। उनके कार्यकाल में शिक्षा जगत को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर एक बच्चे का उज्जवल एवं बेहतर भविष्य बनाने के लिये दृढ़-संकल्पित है। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें अवसर मिले तो वे हर मंजिल को आसानी से पा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों के लिये संचालित योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और कहा कि बच्चे इन योजनाओं का लाभ लें।

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साइबर क्राईम में इंदौर 8वें नंबर पर

देश में साइबर क्राईम के मामले में इंदौर 8वें नंबर पर है। नेशनल क्राइम रिकार्डस ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा देश के 35 बड़े शहरों में किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है।भाजपा विधायक सुदर्शन गुप्ता ने यह मामला मध्यप्रदेश विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया। उन्होंने कहा कि इंदौर में साइबर सेल का जोनल आफिस तो खोल दिया, लेकिन आज तक ऐसे मामलों से निपटने के लिए न तो पर्याप्त स्टाफ मिला और न ही आधुनिक संसाधन।गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि प्रदेश में साइबर अपराधों को रोकने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। साइबर सेल में आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए बजट में भी प्रावधान किया गया है।इतना ही नहीं साइबर सेल के मुखयालय भोपाल में एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला भी बनाई गई है। जिसमें सीआईडी, एसटीएफ, विशेष शाखा एवं जिला पुलिस बल के 60 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों को ट्रेंनिंग दी गई है।4 पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग के लिए देश की विशिष्ट संस्थान सी-डैक त्रिवेद्रम में भेजा गया है। विधायक गुप्ता की मांग पर गौर ने साइबर सेल का अलग कॉडर बनाने पर विचार करने का आश्वासन भी दिया।

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महाशीर एमपी की राज्य मछली

प्रदेश की नदियों और जलाशयों में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी ‘महाशीर’ प्रजाति की मछली को ‘राज्य मछली’ का दर्जा दिया जायेगा। महाशीर के संवर्धन और प्रजाति को बचाने के लिये यह निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की।एम पी की कृषि केबिनेट ने मत्स्य पालन को आर्थिक उद्यमिता के रूप में बढ़ावा देने और मत्स्य पालन अधोसंरचना का विकास करने के लिये राज्य मत्योद्योग विकास योजना को भी मंजूरी प्रदान की। योजना के लिये सालाना 15 करोड़ रूपये का बजट उपलब्ध कराया जायेगा।उल्लेखनीय है कि साठ के दशक में प्रदेश की नदियों में बहुतायत में महाशीर मछली पाई जाती थी। महाशीर मछली नर्मदा, केन, बेतवा, टोंस, ताप्ती, चंबल में पाई जाती है। नर्मदा में महाशीर का उत्पादन 10 से 15 प्रतिशत ही रह गया है। तवा जलाशय में भी महाशीर के उत्पादन में कमी हुई है। इंटरनेशनल यूनियन फार कंजरर्वेशन आफ नेचर ने महाशीर को विलुप्त माना है। इसके अलावा नेशनल ब्यूरो आफ फिश जैनेटिक रिसोर्स लखनऊ ने भी महाशीर प्रजाति के विलुप्त होने पर चिन्ता जताई है।कृषि केबिनेट के इस महत्वपूर्ण निर्णय से महाशीर के संरक्षण और संवर्धन के लिये हेचरी निर्माण और बीज निर्माण गतिविधियों को प्रमुख रूप से बढ़ावा मिलेगा। केरवा जलाशय में महाशीर बीज का संचय करना शुरू कर दिया गया है।कृषि केबिनेट द्वारा अनुमोदित राज्य मत्स्योत्पादन विकास योजना के अनुसार मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिये पेरिफेरल माडल का विकास किया जायेगा जिसमें बड़े तालाबों का जलाशयों के बाजू में मत्स्य बीज उत्पादन के लिये छोटे तालाब बनाये जाते हैं। इसके लिये 57 जलाशयों को चुना गया है जिनका जलक्षेत्र 200 हेक्टेयर से ज्यादा है। यह पेरिफेरल माडल जल संसाधन विभाग के सहयोग और मार्गदर्शन में विकसित किया जायेगा। वर्तमान में शहडोल जिले में यह प्रयोग किया गया है। इसके अलावा मत्स्य बाजारों का विकास किया जायेगा।

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एम पी में 1400 डॉक्टर की भर्ती होगी

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिये किये जा रहे ठोस प्रयासों के चलते 1400 डाक्टर की भर्ती शीघ्र की जायेगी। श्री हार्डिया धार जिले के अंत्योदय मेले को संबोधित कर रहे थे।प्रभारी मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने अन्त्योदय मेले में 24 हजार 924 हितग्राहियो को 13 करोड़ 35 लाख रूपये से अधिक का लाभ चैक, सामग्री, स्वीकृति पत्र, प्रमाण-पत्र आदि वितरित किए।श्री हार्डिया ने कहा कि मनरेगा में आंवटित राशि 10 करोड़ जिले को प्राप्त हो गई है, जिसका शीध्र वितरण मजदूरों को किया जायेगा। मेले में 24 हजार 924 हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओ में 13 करोड़ 35 लाख राशि का वितरण किया।अन्त्योदय मेला में मध्यप्रदेश भवन संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल योजना में 231 हितग्राहियों को 8.07 लाख रूपये की सहायता राशि, 36 निःशक्तों को स्पर्श अभियान के तहत 18 हजार रूपये, का वितरण किया गया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।

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ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट इंदौर में

शामिल होंगे 500 से अधिक निवेशकमध्यप्रदेश के आगामी तीन दिवसीय ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में देश-विदेश के 500 से अधिक निवेशक आयेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण प्रसंग की सभी तैयारियाँ सूक्ष्मता तथा सम्पूर्णता के साथ करने के निर्देश दिये हैं। ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट 28 अक्टूबर से इंदौर में हो रही है।मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट की बिन्दुवार समीक्षा की। बैठक में उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव आर.परशुराम, अपर मुख्य सचिव उद्योग प्रसन्न कुमार दाश भी मौजूद थे।बैठक में बताया गया कि देश के अनेक बड़े समूहों ने इस मीट में आने की स्वीकृति दी है। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान प्रमुख रूप से 10 सेक्टर में बड़े निवेश होंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिये कि निवेशक बड़े हों अथवा छोटे, प्रदेश में सभी का समभाव से सम्मान किया जाय तथा नीति निर्धारित कर सुविधाएँ दी जायं।बैठक में तय किया गया कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट की तिथियों का पूरा सप्ताह मध्यप्रदेश में निवेश, नये उद्योगों की स्थापना तथा औद्योगिक विकास को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान स्वयं भी प्रदेश के विभिन्न चिन्हित औद्योगिक केन्द्रों में जायेंगे।बताया गया कि ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट के पहले दिन 28 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य तथा विशिष्टताओं की झलक दिखाने वाली विश्व स्तरीय प्रदर्शनी कार्यक्रम स्थल लालगंगा मैदान में लगायी जायेगी। उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा, निवेशकों से एम.ओ.यू. इन तीन दिवसीय आयोजन के दौरान होंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित आयोजन को भव्यता, रोचकता तथा उपयोगी बनाने के लिये अन्य आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।उद्योगपतियों से भेंटइससे पहले सोमवार को अपने नियमित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री चौहान ने उद्योगपतियों से सीधी चर्चा का क्रम आज भी जारी रखा। आज यहाँ नर्मदा ट्रामा सेंटर भोपाल के डॉ. राजेश शर्मा ने स्वास्थ्य का एक ऐसा ड्रीम प्रोजेक्ट स्थापित करने की मंशा जाहिर की जिसमें मध्यप्रदेश के किसी भी मरीज को इलाज के लिये कहीं अन्यत्र नहीं जाना पड़े। यह परियोजना हेल्थ हब के रूप में होगी। इसमें स्टेम सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक तथा चिकित्सा की क्रांतिकारी पद्धति का समावेश होगा।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रस्ताव निश्चित ही प्रभावशाली है। उन्होंने नर्मदा हेल्थ ग्रुप के डॉ. शर्मा को प्रदेश शासन की अपेक्षा के विस्तृत ब्यौरे के साथ परियोजना की पूरी रूप रेखा प्रस्तुत करने का आग्रह किया। श्री चौहान ने कहा कि उनकी भी यही इच्छा है कि हर आम आदमी को मध्यप्रदेश में ही सम्पूर्ण इलाज की सुविधा मिले।

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और बीजेपी की तिकड़ी टूट गई...

राकेश अग्ग्निहोत्रीअरविन्द मेनन की मध्यप्रदेश से रवानगी के साथ अंततः बीजेपी की वो तिकड़ी टूट गई जिसने मिशन-2018 को लेकर मध्यप्रदेश में जमावट शुरू कर दी थी। नंदकुमार सिंह चौहान के भोपाल में उनकी तारीफ में कसीदे कढ़ने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने भी नागपुर में मेनन की नई जिम्मेदारी दिल्ली में संभालने पर अपनी मुहर लगाकर उस मामले का पटाक्षेप कर दिया जिसे नागपुर यात्रा से जोड़कर हवा दी जा रही थी। इस बीच भोपाल से लेकर नागपुर ही नहीं, दिल्ली में भी बंद कमरों में हुई मेल-मुलाकातों ने बीजेपी की अंदरूनी सियासत को गरमा दिया है तो चर्चा अब पीएम नरेंद्र मोदी के महू दौरे के बाद सुहास भगत की बीजेपी में इंट्री और नंदकुमार सिंह चौहान की नई टीम के सामने आने की शुरू हो गई है जिसके बाद साफ संकेत मिलने लगेंगे कि संघ की प्रदेश बीजेपी के सत्ता और संगठन से क्या अपेक्षाएं हैं जो बेहतर समन्वय का दावा करता रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या नंदूभैया की नई टीम का रास्ता साफ हो गया है तो सुहास भगत पहले अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे या फिर उनके नाम का ऐलान नंदूभैया की टीम के साथ होगी।सूबे की िसयासत में तमाम मुद्दों पर शिवराज सिंह की नागपुर यात्रा भारी पड़ी जहां से लौटने के बाद मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ सीधे विजयासन देवी के दर्शन करने सलकनपुर पहुंचे और बाद में सभी बैठक निरस्त कर विदिशा के उस फार्म हाउस जा पहुंचे जहां उन्होंने लंबा वक्त बिताया, जिसके बाद वो भोपाल लौट आए। शिवराज जब नागपुर में संघ के सह सरकार्यवाह भैयाजी जोशी से मुलाकात कर रहे थे तब प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का भोपाल में संघ कार्यालय समिधा से बुलावा आ गया था जहां उन्होंने क्षेत्र प्रचारक अरुण जैन से चर्चा की तो दिल्ली में भी मध्यप्रदेश से जुड़े एक बड़े नेता ने झंडेवाला जाकर संघ पदाधिकारियों से विचार विमर्श किया। कुल मिलाकर इन मुलाकातों का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि मेनन की रवानगी के लिए अमित शाह के निर्देश पर अरुण सिंह की नंदूभैया के नाम लिखी चिट्ठी मीडिया तक पहुंचाई गई जिसके बाद संगठन महामंत्री अरविन्द मेनन को दिल्ली की बजाए नागपुर का रुख करना पड़ा जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी पहुंचे। शिवराज की एक हफ्ते में इस दूसरी नागपुर यात्रा का मकसद सिंहस्थ में होने वाले वैचारिक महाकुंभ की तैयारियों और उसके एजेंडे से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है लेकिन मेनन की भी वहां मौजदूगी कुछ और संकेत देती है जिसे उनकी नई भूमिका में आ रहे पेंच से जोड़कर देखा जा सकता है। शिवराज ने जिस तरह नागपुर में मीडिया के सवाल के जवाब में मेनन की नई भूमिका पर किंतु-परंतु और खड़े किए जा रहे सवाल पर अपनी रजामंदी जािहर की उसके बाद अब सबकी नजर संघ द्वारा लिखी गई उस पटकथा पर केंद्रित होकर रह गई है जिसके अगले पड़ाव को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। चर्चा का बिन्दू इन दिनों अरविन्द मेनन हैं जिन्हें बेटी बचाओ, स्वच्छता मिशन, आजीवन सहयोग निधि जैसे 21 प्रकल्पों का प्रभार सौंपा गया है लेकिन यहीं पर वो बड़ा सवाल खड़ा होता है जिसने मेनन की चिंता में इजाफा कर दिया तो शिवराज की सहानुभूति भी उनके साथ है। दरअसल मेनन की बदलती भूमिका के साथ संघ को ये फैसला करना है कि अरविन्द मेनन प्रचारक बने रहेंगे या फिर पूरी तरह उनकी सेवाएं बीजेपी को सौंप दी जाएंगी जैसा कि पूर्व में माखन सिंह, कप्तान सिंह और कृष्णमुरारी मोघे के साथ हुआ और इन्होंने अलग-अलग रास्ते से ही सही बीजेपी में रहकर लालबत्ती का सुख हासिल किया। शायद मेनन ये चाहते हैं कि संगठन महामंत्री रहते उन्हें प्रचारक घोषित कर संघ ने जो ठप्पा लगाया था वो कायम रहे जिससे उन्हें भविष्य में सौदान सिंह, बी सतीश और रामलाल की तरह बीजेपी में संघ के नुमाइंदे के तौर पर नए राज्य में नया काम मिलने की संभावनाएं खत्म न हों। प्रदेश में मेनन के जाने के बाद जो परसेप्शन बन रहा है उस पर विराम लगना और लगाना इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि इससे शिवराज और नंदू भी प्रभावित हो रहे हैं। बीजेपी में रहते मेनन के लिए कई विकल्प हैं। ये कहने वाले भी मिल जाएंगे कि उनकी नजर भी कभी प्रदेश अध्यक्ष तो कभी राज्यसभा के साथ संगठन की राष्ट्रीय भूमिका पर भी दूसरे नेताओं की तरह रही है। वह बात और है कि वो शिवराज के साथ बतौर संगठन महामंत्री मिशन 2018 फतेह करने का मानस बना चुके थे। मेनन को जो काम मिला है उसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता क्योंकि सीधेतौर पर उन्हें मोदी सरकार की उन योजनाओं की मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है जिनके दम पर मोदी दो साल का जश्न मनाने की शुरुआत मध्यप्रदेश से ग्राम उदय से भारत उदय के साथ करने जा रहे हैं जिस पर सीधे पीएमओ की गांव-गांव में नजर होगी। जहां तक बात शिवराज की है तो शिवराज के लिए ये समय जरूर चिंतन और मंथन के साथ नए सिरे से रणनीति बनाने का है कि आखिर मेनन को उनसे दूर ले जाने की वजह क्या है? क्या सिर्फ उनका लंबे समय से संगठन महामंत्री बने रहना है या फिर संघ को मध्यप्रदेश से जो फीडबैक नागौर की प्रतिनिधि सभा में मिला है उसमें अगले चुनाव को लेकर सरकार के सामने कई नई चुनौतियां हैं जिसे मध्यप्रदेश का संगठन गंभीरता से नहीं ले रहा था। शिवराज ने शायद ही कभी संघ की लाइन को चुनौती देने की कोशिश की होगी चाहे फिर वो उनके खुद का सीएम के तौर पर संसदीय बोर्ड की बैठक में चुना जाना और उससे पहले बाबूलाल गौर के चयन के समय अपने दावे को दूर रखना हो। सीएम रहते संघ के एजेंडे को सीधे तौर पर िजन संस्थानों मेें मप्र में लागू किया गया उसमें उन्होंने कभी अपनी पसंद नहीं थोपी और न ही कभी संघ के शीर्ष नेताओं से समन्वय और संवाद कमजोर होने दिया। व्यापमं की बात जरूर अब पुरानी हो चुकी है जिससे संघ की नाराजगी की चर्चा गरम रही है। पिछले करीब दो साल में मोदी के पीएम बनने के बाद लगातार केंद्र से बेहतर तालमेल स्थापित करने के साथ मोदी का प्राथमिकताओं को मप्र में सबसे ज्यादा प्राथमिकता देकर उन्होंने अपने रिश्ते प्रगाढ़ किए हैं ऐसे में सवाल ये खड़ा होता है कि इस मजबूत तिकड़ी से मेनन को दूर कर आखिर संघ और बीजेपी हाईकमान क्या हासिल करना चाहता है। शायद इसके लिए दिल्ली में झंडेवाला के साथ मोदी-शाह तो नागपुर में अगले कुछ दिन की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी जिससे कुछ संकेत मप्र को लेकर जरूर मिल सकते हैं।[नया इण्डिया से साभार ]

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मेनन हुए रुखसत ,भगत नए संगठन मंत्री

मध्यप्रदेश में अब तक संघ और सरकार के बीच संगठन को मजबूती का काम करते रहे अरविंद मेनन की आखिर विदाई हो ही गई। प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री पद पर रहते हुए मेनन ने 2011 से अब तक कई महत्वपूर्ण दौर देखे और सरकार व संघ के बीच परस्पर समन्वय बनाकर खुद की काबिलियत साबित भी की। लेकिन पिछले दो सालों से मध्यप्रदेश बीजेपी में मेनन को लेकर मतभेद शुरू हो गए थे। बीजेपी का एक गुट मेनन को की कार्यप्रणाली की शिकायत लगातार हाईकमान से कर रहा था। नतीजतन मध्यप्रदेश से मेनन की विदाई तय हुई। मेनन की जगह अब सुहास भगत काम देखेंगे। मेनन की कार्यप्रणाली हमेशा विवादों में रही है लेकिन प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री को वे साध के चलते थे यही वजह रही कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नहीं चाहते थे कि मेनन को मध्यप्रदेश से दूर किया जाए, पर पार्टी आलाकमान मेनन को नई जिम्मेदारी देने का पहले से ही मन बना चुका था। अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं, पार्टी चाहती है कि मेनन यूपी में संगठन को मजबूत करें। शिवराज क्यों नहीं चाहते थे कि मेनन जाएं क्योंकि शिवराज को मेनन उस समय मिले थे, जब वे नए-नए मुख्यमंत्री बने थे और कमजोर थे।- हर ओर से उन्हें असफल साबित करने की कोशिशें हो रही थीं। एेसे में मेनन ने न केवल पार्टी के भीतर शिवराज के लिए मोर्चा संभाला, बल्कि संगठन के स्तर पर भी मजबूती बनाई।- मेनन संभागीय संगठन मंत्री के तौर पर जबलपुर, इंदौर रह चुके थे, ऐसे में उन्हें प्रदेश की नब्ज पता थी। - उसके बाद शिवराज और मेनन की जोड़ी ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के साथ मिलकर 2008 का विधानसभा चुनाव बड़े अंतर से जीता। - 2013 का चुनाव भी इसी तिकड़ी ने जीता। अब शिवराज की नजर 2018 के चुनाव पर है। ऐसे में वे मेनन को साथ रखना चाहते थे।मेनन के मनाने पर भी नहीं मानेभाजपा सूत्रों की मानें तो मेनन भी मप्र में डटे रहना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सुषमा स्वराज से लेकर भाजपा के कई बड़े नेताओं से मुलाकात भी की थी। यहां तक कहा जा रहा था कि मेनन को मप्र में बनाए रखने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान अपने वीटो पावर का भी उपयोग कर सकते हैं, पर ये सारे कयास सिर्फ कयास ही रह गए।अब कमान सुहास भगत को भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन को पार्टी आलाकमान ने पद से हटा दिया है। पार्टी सूत्रों की माने तो मेनन को दिल्ली में नई जिम्मेदारी दी जाएगी। उनकी जगह मप्र में सुहास भगत को दी गई है। समन्वय बैठक में आयोजित की गई बैठक में यह ऐलान प्रांत के प्रचारक अरुण पोड़वाल ने किया । मेनन दिल्ली में 22 प्रकल्प के प्रमुख बनाए जा सकते हैं। पद से हटाए जाने के बाद राजस्थान की जलदाय एवं भूजल मंत्री किरण माहेश्वरी ने मेनन से मुलाकात की। गौरतलब है कि 2011 में माखन सिंह के हटने के बाद मेनन को मप्र में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। मेनन उसके पहले संगठन सह महामंत्री थे। उस समय उनके अलावा भगवतशरण माथुर भी संगठन सह महामंत्री थे।

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18 के चुनाव का प्रमुख अस्त्र होगा सोशल मीडिया

मध्यप्रदेश में सोशल मीडिया 2018 के चुनाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण अस्त्र साबित होगा ।आम आदमी पार्टी की एक कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि सच और झूठ का फैसला भी सोशल मीडिया पर तत्काल हो जाता है। आज आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सोशल मीडिया समन्वयक राजेश शर्मा द्वारा मध्य प्रदेश सोशल मीडिया के कार्यकर्ताओ व पदाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यक्रम में श्री शर्मा ने कहा कि आज के परिवेश में सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति का सबसे सुगम और असरकारक माध्यम है | आज जनता स्वच्छ राजनीती और ओछी राजनीती में फर्क समझने लगी है ऐसे में सूचनाओ और बातो को रखने के लिए अब सोशल मीडिया एक प्रबल माध्यम बनता जा रहा है | उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने में सोशल मीडिया का प्रमुख योगदान रहा है और अब मध्य प्रदेश में होने जा रहे 2018 के चुनाव में भी इसी मीडिया की निर्णायक भूमिका होगी | आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश सोशल मीडिया टीम की प्रशंसा करते हुए श्री शर्मा ने कहा की दिल्ली की ही तर्ज पर मध्यप्रदेश की सोशल मीडिया टीम भी कार्यरत है और प्रदेश सरकार की खामियों व बुराइयों को निडर होकर, कई व्यवधानों के बाद भी जन जन तक पहुचाने का कार्य करती जा रही है | इसी अवसर पर प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी राहुल शर्मा ने अपने उद्बोधन में पार्टी की सोशल मीडिया टीम को कई सुझाव दे कर आव्हान करते हुए कहा कि आगामी 2018 के चुनाव के लिए अब तैयार होने का वक्त आ गया है | इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव अक्षय हुँका ने अपने उद्बोधन में प्रदेश सोशल मीडिया के बढ़ते कदम पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा की 2018 में आम आदमी की सरकार बनने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है, आम आदमी, सोशल मीडिया की परिचर्चाओ में शामिल होने लगा है और उसे गंभीरता से भी ले रहा है, ये जनता के जागरूक होने का एक सुन्दर संकेत है |

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18 के चुनाव का प्रमुख अस्त्र होगा सोशल मीडिया

मध्यप्रदेश में सोशल मीडिया 2018 के चुनाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण अस्त्र साबित होगा ।आम आदमी पार्टी की एक कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि सच और झूठ का फैसला भी सोशल मीडिया पर तत्काल हो जाता है। आज आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सोशल मीडिया समन्वयक राजेश शर्मा द्वारा मध्य प्रदेश सोशल मीडिया के कार्यकर्ताओ व पदाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यक्रम में श्री शर्मा ने कहा कि आज के परिवेश में सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति का सबसे सुगम और असरकारक माध्यम है | आज जनता स्वच्छ राजनीती और ओछी राजनीती में फर्क समझने लगी है ऐसे में सूचनाओ और बातो को रखने के लिए अब सोशल मीडिया एक प्रबल माध्यम बनता जा रहा है | उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने में सोशल मीडिया का प्रमुख योगदान रहा है और अब मध्य प्रदेश में होने जा रहे 2018 के चुनाव में भी इसी मीडिया की निर्णायक भूमिका होगी | आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश सोशल मीडिया टीम की प्रशंसा करते हुए श्री शर्मा ने कहा की दिल्ली की ही तर्ज पर मध्यप्रदेश की सोशल मीडिया टीम भी कार्यरत है और प्रदेश सरकार की खामियों व बुराइयों को निडर होकर, कई व्यवधानों के बाद भी जन जन तक पहुचाने का कार्य करती जा रही है | इसी अवसर पर प्रदेश सोशल मीडिया प्रभारी राहुल शर्मा ने अपने उद्बोधन में पार्टी की सोशल मीडिया टीम को कई सुझाव दे कर आव्हान करते हुए कहा कि आगामी 2018 के चुनाव के लिए अब तैयार होने का वक्त आ गया है | इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव अक्षय हुँका ने अपने उद्बोधन में प्रदेश सोशल मीडिया के बढ़ते कदम पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा की 2018 में आम आदमी की सरकार बनने में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है, आम आदमी, सोशल मीडिया की परिचर्चाओ में शामिल होने लगा है और उसे गंभीरता से भी ले रहा है, ये जनता के जागरूक होने का एक सुन्दर संकेत है |

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केंद्र ने टाइगर बजट भी काटा

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद लगातार राज्य सरकार को मिलने वाली राशि में लगातार कटौती का क्रम जारी है। केंद्र सरकार ने अब टाईगर रिजर्व मद में मिलने वाली राशि में 32 करोड़ की कटौती कर दी है। जिसके चलते वन महकमे में चिंता के हालात बन गए हैं। केंद्र से कम राशि मिलने की वजह से राज्य सरकार ने भी इस मद की राशि कम कर दी है। यह राशि ऐसे समय कम की गई है जबकि राज्य में लगातार टाइगरों की संख्या में वृद्धि हो रही है।आचार संहिता की डोर से बंधे होने की वजह से महकमें के आला अफसर बजट कटौती का खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे है पर उनके चेहरे में चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई देती है। सूत्रों ने बताया कि टाइगर रिजर्व के लिए केंद्र से मिलने वाली राशि में 32 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। पिछले वर्ष तक केंद्र से लगभग 70 करोड़ रुपए वन्य प्राणियों के प्रबंधन और संवर्धन के लिए मिले थे। केंद्र की कटौती के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने भी बजट देने में कंजूसी बरती है। वित्त मंत्री ने तो वन विभाग के मद से ही 100 करोड़ की कटौती करने का ऐलान सदन में कर चुके है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में प्रमुख तौर पर छह टाइगर रिजर्व हैं। इनमें पन्ना, बांधवगढ़, पेंच, कान्हा, सतपुड़ा व संजय टाइगर रिजर्व शामिल हैं। प्रदेश सरकार को सभी टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण के नाम पर एनटीसीए भारत सरकार से लगभग 100 करोड़ रुपए दिलवाती रही है। नए साल 2016-17 के लिए केंद्र से पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत बजट में कटौती की है। साथ ही एक शर्त यह भी है कि केंद्र से मिलने वाला बजट तब मिलेगा, जब 60 प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार देगा। गौरतलब यह है कि प्रदेश सरकार ने नये वित्तीय वर्ष में पहले ही 100 करोड़ रुपए का बजट कम कर दिया। वित्त विभाग द्वारा बजट में 100 करोड़ की कटौती किए जाने पर वन विभाग के आला अफसरों ने कोई आश्चर्य नहीं व्यक्त किया, क्योंकि अपर मुख्य सचिव एपी श्रीवास्तव और जंगल महकमे के बीच पहले से ही छत्तीस का आकड़ा है। इसके अलावा वन विभाग ने करीब 32 करोड़ रुपए की मांग तो रिजर्व फारेस्ट में रहने वाले वनवासियों के पुनर्वास के लिए थी, लेकिन एनटीसीए ने कटौती करते हुए चार रिजर्व के संरक्षण प्रस्तावों को ही खारिज कर दिया है। इनमें पेंच, पन्ना,संजय व बांधवगढ़ जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व शामिल हैं।75 करोड़ की चपतवायरलैस संचालन की फीस 15 करोड़ बकायापालपुर कूनो का दायरा बढ़ाने के लिए 60 करोड़ की आवश्यकातसूचना तंत्र लगभग ध्वस्तमुखबिरी तंत्र के लिए 10 लाख की आवश्यकतावन्य प्राणियों की तस्करी करने वालों के खिलाफ विस्तृत मुहिम के लिए धन की दरकारइनका कहना हैबजट में कटौती तो हुई पर प्राथमिकता के आधार पर खर्च करेंगे।रवि श्रीवास्तव, मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक

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कांग्रेस में घमासान

अरुण यादव करेंगे कार्यकारिणी का विस्तारमध्यप्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व के प्रतिबढ़ रहे असंतोष एवं अपनी कुर्सी पर खतरा भांपते हुए अरुण यादव जल्द ही कार्यकारिणी का विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेताओं के समर्थकों को समायोजित कर असंतोष को थामने का प्रयास किया जाएगा। दरअसल जिस तरह से बीते कुछ दिनों में वरिष्ठ नेता कमलनाथ को प्रदेश की कमान सौंपे जाने की मांग उठ रही है, उसके बाद श्री यादव कार्यकारिणी के विस्तार को लेकर सक्रिय नजर आने लगे हैं। हाल ही में विधानसभा में कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने भी श्री नाथ को प्रदेश की कमान सौंपी जाने की मांग सार्वजनिक रूप से की है जिसका समर्थन अधिकांश पार्टी विधायकों ने भी किया।बाला बच्चन का कहना है कि कमलनाथ ने समर्थन किया है। बाला बच्चन का कहना है कि कमलनाथ के नेतृत्व मेें ही कांगे्रस मध्यप्रदेश में अगला चुनाव जीत सकेगी। बाला बच्चन की यह मांग सार्वजनिक होते ही कांगे्रस के विधायकों एवं कमलनाथ समर्थकों ने कमलनाथ को प्रदेश कांगे्रस की बागडोर सौंपे जाने की तेज मुहिम चला दी है, जिस कारण कांगे्रस नेताओं में सक्रियता बढऩे लगी है। अपने खिलाफ बढ़ रहे असंतोष को भांपते हुए प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव भी सक्रिया हो गए हैं और वे दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां उन्होंने प्रदेश के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताओं से चर्चा में अरुण यादव ने अपनी कार्यकारिणी के विस्तार के संकेत दिए हैं। उन्होंने तीनों वरिष्ठ नेताओं से पदाधिकारी बनाए जाने वाले समर्थकों के नाम भी मांगे हैं। इस संबंध में यादव प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय महामंत्री मोहन प्रकाश से भी चर्चा कर सकते हैं। अरुण यादव द्वारा बनाई गई टीम को लेकर प्रदेश के कांग्रेसजनों में असंतोष छा रहा है, बीच में कार्यकारिणी के विस्तार की चर्चा भी शुरू हुई थी, लेकिन अरुण यादव ने अपनी टीम के विस्तार में रुचि नहीं ली। अब अपने खिलाफ बढ़ रहे असंतोष को रोकने के लिए अरुण यादव ने अपनी टीम का विस्तार करने की पहल शुरू की है। अब जब भी प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी बनेगी उसमें सभी वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों को मौका दिया जाएगा।इसी के साथ 6 जिलों के कांग्रेसाध्यक्षों की नियुक्तियां भी हो सकती हैं, जो लंबे समय से रुकी पड़ी थीं जिनमें भोपाल (शहर) रायसेन, जबलपुर (शहर) शामिल है। भोपाल शहर और रायसेन में वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी के समर्थकों को मौका दिया जा सकता है। मैहर विधानसभा के उपचुनाव में कांगे्रस की पराजय के बाद प्रदेश कांग्रेस में नए नेतृत्व की मांग उठने लगी , जो अब कांग्रेस विधायकों द्वारा चलाई गई मुहिम से और तेज हो गई है।एक वजह यह भीमप्र की राजनीति में वर्ष 1980 के बाद अर्जुन सिंह, कमलनाथ, विद्याचरण शुक्ल, माधवराव सिंधिया का दबदवा रहा। 1993 के बाद मप्र में अर्जुन सिंह, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, श्रीनिवास तिवारी तथा माधवराव सिंधिया के प्रभाव से कांगे्रस संगठन चलता रहा। 1993 से 2003 तक कमलनाथ, दिग्विजय सिंह की जोड़ी प्रदेश में काफी मजबूत हो गई। अर्जुन सिंह और माधवराव सिंधिया की नई पार्टी बना लेने से कांगे्रस संगठन में उनका प्रभाव कम हुआ। 2003 में विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस की अप्रत्याशित करारी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दस वर्ष के संन्यास की घोषणा कर अपने समर्थकों को मझधार में छोड़ दिया। अर्जुन सिंह और कमलनाथ केंद्र में मंत्री बन गए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं होने से अर्जुन सिंह तथा कमलनाथ की सक्रियता प्रदेश में काफी कम हो गई। माधवराव सिंधिया के निधन के बाद उनका गुट भी प्रदेश में वर्षों अपेक्षित रहा, जिसके कारण मप्र के कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी धीरे-धीरे निष्क्रिय होते चले गए।

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भाजपा पर भरोसा

नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में भाजपा ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और छिंदवाड़ा नगर निगम सहित तीन नगर परिषदों पर भगवा परचम फहराया। दो नगर परिषद पर कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही। पहले चरण के चुनाव में भी भाजपा ने 10 नगर निगमों में जीत दर्ज कराई थी। प्रदेश की16 में से एक नगर निगम मुरैना का मामला कोर्ट में है। नगर सरकार की जंग में भी जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया। दूसरे चरण में हुए चार नगर निगम में भाजपा के सभी मेयर प्रत्याशी जीते। सबसे बड़ी जीत इंदौर में भाजपा की मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के नाम रहीं। जबकि सबसे कम मतों का अंतर छिंदवाड़ा में रहा। यहां पर दोनों प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर थी। भोपाल, जबलपुर में भी जीत का अंतर पहले के मुकाबले इस बार काफी बड़ा रहा।सबसे ज्यादा इंदौर, सबसे कम अंतर शमशाबादनगर सरकार के लिए सबसे ज्यादा मतों का अंतर नगर निगम इंदौर में रहा। यहां पर भाजपा की मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ ने कांग्रेस की अर्चना जायसवाल को 2,46,596 मतों से पराजित किया। सबसे कम जीत का अंतर विदिशा जिले की शमशाबाद नगर परिषद में रहा। यहां कांग्रेस के कृष्ण कुमार माहेश्वरी ने बीजेपी के मूलचंद माहेश्वरी को मात्र 102 मतों से पराजित किया।हरदा में होगा चुनाव, छनेरा में निर्दलीय जीतेनगर पालिका परिषद हरदा में अध्यक्ष को वापस बुलाने के लिए हुए मतदान में कांग्रेस की संगीता बंसल पराजित हुईं। इसके कारण वहां पर चुनाव फिर से कराए जाएंगे। इसी तरह खंडवा जिले की छनेरा में निर्दलीय प्रत्याशी कमलकांत भारद्वाज पद पर बने रहेंगे।नोटा का भी हुआ उपयोगनगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में कई प्रत्याशी जनता की नापसंद रहे। इसके लिए उन्होंने नोटा का उपयोग किया। चार नगर निगमों में हुए मतदान में 22,103 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। जबकि पार्षद प्रत्याशियों के लिए 15,444 लोगों ने नोटा का उपयोग किया। इसी तरह अध्यक्ष पद के लिए 437 नोटा के वोट पड़े।वार्ड : सबसे कम और ज्यादा वोटों से जीतनगर निगम भोपाल के चुनाव में वार्ड क्रमांक 20 से भाजपा प्रत्याशी संजीव गुप्ता महज 22 वोटों से जीत हासिल कर सके। गुप्ता को जहां 3,895 वोट मिले वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मो. रशीद खान को 3,873 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस की वार्ड क्रमांक 9 से शबाना शाहिद अली ने अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा की शमीम अफजल को सबसे ज्यादा 4,898 वोटों के अंतर से हराया।

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बेटियां बचाएं ,बेटों से पूछें कहाँ जा रहे हो

लालकिले से मोदी का सामाजिक स्टाइल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार फिर लोगों के दिल में घर कर गए। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश और दुनिया में फैले हुए सभी हिन्दुस्तानियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कहा मैं आपके बीच प्रधान मंत्री के रूप में नहीं, प्रधान सेवक के रूप में उपस्थित हूँ। देश की आज़ादी की जंग कितने वर्षों तक लड़ी गई, कितनी पीढ़ियाँ खप गईं, अनगिनत लोगों ने बलिदान दिए, जवानी खपा दी, जेल में ज़िन्दगी गुज़ार दी। देश की आज़ादी के लिए मर-मिटने वाले समर्पित उन सभी आज़ादी के सिपाहियों को मैं शत-शत वंदन करता हूँ, नमन करता हूँ। मोदी ने कहा यह देश पुरातन सांस्कृतिक धरोहर की उस नींव पर खड़ा है, जहाँ पर वेदकाल में हमें एक ही मंत्र सुनाया जाता है, जो हमारी कार्य संस्कृति का परिचय है, हम सीखते आए हैं, पुनर्स्मरण करते आए हैं- “संगच्छध्वम् संवदध्वम् सं वो मनांसि जानताम्।” हम साथ चलें, मिलकर चलें, मिलकर सोचें, मिलकर संकल्प करें और मिल करके हम देश को आगे बढ़ाएँ। इस मूल मंत्र को ले करके सवा सौ करोड़ देशवासियों ने देश को आगे बढ़ाया है। कल ही नई सरकार की प्रथम संसद के सत्र का समापन हुआ। मैं आज गर्व से कहता हूं कि संसद का सत्र हमारी सोच की पहचान है, हमारे इरादों की अभिव्यक्ति है। हम बहुमत के बल पर चलने वाले लोग नहीं हैं, हम बहुमत के बल पर आगे बढ़ना नहीं चाहते हैं। हम सहमति के मजबूत धरातल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। "संगच्छध्वम्" और इसलिए इस पूरे संसद के कार्यकाल को देश ने देखा होगा। सभी दलों को साथ लेकर, विपक्ष को जोड़ कर, कंधे से कंधा मिलाकर चलने में हमें अभूतपूर्व सफलता मिली है और उसका यश सिर्फ प्रधान मंत्री को नहीं जाता है, उसका यश सिर्फ सरकार में बैठे हुए लोगों को नहीं जाता है, उसका यश प्रतिपक्ष को भी जाता है, प्रतिपक्ष के सभी नेताओं को भी जाता है, प्रतिपक्ष के सभी सांसदों को भी जाता है और लाल किले की प्राचीर से, गर्व के साथ, मैं इन सभी सांसदों का अभिवादन करता हूं। सभी राजनीतिक दलों का भी अभिवादन करता हूं, जहां सहमति के मजबूत धरातल पर राष्ट्र को आगे ले जाने के महत्वपूर्ण निर्णयों को कर-करके हमने कल संसद के सत्र का समापन किया। भाइयो-बहनो, मैं दिल्ली के लिए आउटसाइडर हूं, मैं दिल्ली की दुनिया का इंसान नहीं हूं। मैं यहां के राज-काज को भी नहीं जानता। यहां की एलीट क्लास से तो मैं बहुत अछूता रहा हूं, लेकिन एक बाहर के व्यक्ति ने, एक आउटसाइडर ने दिल्ली आ करके पिछले दो महीने में, एक इनसाइडर व्यू लिया, तो मैं चौंक गया! यह मंच राजनीति का नहीं है, राष्ट्रनीति का मंच है और इसलिए मेरी बात को राजनीति के तराजू से न तोला जाए। मैंने पहले ही कहा है, मैं सभी पूर्व प्रधान मंत्रियों, पूर्व सरकारों का अभिवादन करता हूं, जिन्होंने देश को यहां तक पहुंचाया। मैं बात कुछ और करने जा रहा हूं और इसलिए इसको राजनीति के तराजू से न तोला जाए। मैंने जब दिल्ली आ करके एक इनसाइडर व्यू देखा, तो मैंने अनुभव किया, मैं चौंक गया। ऐसा लगा जैसे एक सरकार के अंदर भी दर्जनों अलग-अलग सरकारें चल रही हैं। हरेक की जैसे अपनी-अपनी जागीरें बनी हुई हैं। मुझे बिखराव नज़र आया, मुझे टकराव नज़र आया। एक डिपार्टमेंट दूसरे डिपार्टमेंट से भिड़ रहा है और यहां तक‍ भिड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खट-खटाकर एक ही सरकार के दो डिपार्टमेंट आपस में लड़ाई लड़ रहे हैं। यह बिखराव, यह टकराव, एक ही देश के लोग! हम देश को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं? और इसलिए मैंने कोशिश प्रारम्भ की है, उन दीवारों को गिराने की, मैंने कोशिश प्रारम्भ की है कि सरकार एक असेम्बल्ड एन्टिटी नहीं, लेकिन एक ऑर्गेनिक युनिटी बने, ऑर्गेनिक एन्टिटी बने। एकरस हो सरकार - एक लक्ष्य, एक मन, एक दिशा, एक गति, एक मति – इस मुक़ाम पर हम देश को चलाने का संकल्प करें। हम चल सकते हैं। आपने कुछ दिन पहले... इन दिनों अखबारों में चर्चा चलती है कि मोदी जी की सरकार आ गई, अफसर लोग समय पर ऑफिस जाते हैं, समय पर ऑफिस खुल जाते हैं, लोग पहुंच जाते हैं। मैं देख रहा था, हिन्दुस्तान के नेशनल न्यूज़पेपर कहे जाएं, टीवी मीडिया कहा जाए, प्रमुख रूप से ये खबरें छप रही थीं। सरकार के मुखिया के नाते तो मुझे आनन्द आ सकता है कि देखो भाई, सब समय पर चलना शुरू हो गया, सफाई होने लगी, लेकिन मुझे आनन्द नहीं आ रहा था, मुझे पीड़ा हो रही थी। वह बात मैं आज पब्लिक में कहना चाहता हूं। इसलिए कहना चाहता हूं कि इस देश में सरकारी अफसर समय पर दफ्तर जाएं, यह कोई न्यूज़ होती है क्या? और अगर वह न्यूज़ बनती है, तो हम कितने नीचे गए हैं, कितने गिरे हैं, इसका वह सबूत बन जाती है और इसलिए भाइयो-बहनो, सरकारें कैसे चली हैं? आज वैश्विक स्पर्धा में कोटि-कोटि भारतीयों के सपनों को साकार करना होगा तो यह “होती है”, “चलती है”, से देश नहीं चल सकता। जन-सामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए, शासन व्यवस्था नाम का जो पुर्जा है, जो मशीन है, उसको और धारदार बनाना है, और तेज़ बनाना है, और गतिशील बनाना है और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं और मैं आपको विश्वास देता हूं, मेरे देशवासियो, इतने कम समय से दिल्ली के बाहर से आया हूं, लेकिन मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार में बैठे हुए लोगों का सामर्थ्य बहुत है – चपरासी से लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी तक हर कोई सामर्थ्यवान है, हरेक की एक शक्ति है, उसका अनुभव है। मैं उस शक्ति को जगाना चाहता हूं, मैं उस शक्ति को जोड़ना चाहता हूं और उस शक्ति के माध्यम से राष्ट्र कल्याण की गति को तेज करना चाहता हूं और मैं करके रहूंगा। यह हम पाकर रहेंगे, हम करके रहेंगे, यह मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं और यह मैं 16 मई को नहीं कह सकता था, लेकिन आज दो-ढाई महीने के अनुभव के बाद, मैं 15 अगस्त को तिरंगे झंडे के साक्ष्य से कह रहा हूं, यह संभव है, यह होकर रहेगा। मोदी ने कहा आज जब हम बलात्कार की घटनाओं की खबरें सुनते हैं, तो हमारा माथा शर्म से झुक जाता है। लोग अलग-अलग तर्क देते हैं, हर कोई मनोवैज्ञानिक बनकर अपने बयान देता है, लेकिन भाइयो-बहनो, मैं आज इस मंच से मैं उन माताओं और उनके पिताओं से पूछना चाहता हूं, हर मां-बाप से पूछना चाहता हूं कि आपके घर में बेटी 10 साल की होती है, 12 साल की होती है, मां और बाप चौकन्ने रहते हैं, हर बात पूछते हैं कि कहां जा रही हो, कब आओगी, पहुंचने के बाद फोन करना। बेटी को तो सैकड़ों सवाल मां-बाप पूछते हैं, लेकिन क्या कभी मां-बाप ने अपने बेटे को पूछने की हिम्मत की है कि कहां जा रहे हो, क्यों जा रहे हो, कौन दोस्त है? आखिर बलात्कार करने वाला किसी न किसी का बेटा तो है। उसके भी तो कोई न कोई मां-बाप हैं। क्या मां-बाप के नाते, हमने अपने बेटे को पूछा कि तुम क्या कर रहे हो, कहां जा रहे हो? अगर हर मां-बाप तय करे कि हमने बेटियों पर जितने बंधन डाले हैं, कभी बेटों पर भी डाल करके देखो तो सही, उसे कभी पूछो तो सही।कानून अपना काम करेगा, कठोरता से करेगा, लेकिन समाज के नाते भी, हर मां-बाप के नाते हमारा दायित्व है। कोई मुझे कहे, यह जो बंदूक कंधे पर उठाकर निर्दोषों को मौत के घाट उतारने वाले लोग कोई माओवादी होंगे, कोई आतंकवादी होंगे, वे किसी न किसी के तो बेटे हैं। मैं उन मां-बाप से पूछना चाहता हूं कि अपने बेटे से कभी इस रास्ते पर जाने से पहले पूछा था आपने? हर मां-बाप जिम्मेवारी ले, इस गलत रास्ते पर गया हुआ आपका बेटा निर्दोषों की जान लेने पर उतारू है। न वह अपना भला कर पा रहा है, न परिवार का भला कर पा रहा है और न ही देश का भला कर पा रहा है और मैं हिंसा के रास्ते पर गए हुए, उन नौजवानों से कहना चाहता हूं कि आप जो भी आज हैं, कुछ न कुछ तो भारतमाता ने आपको दिया है, तब पहुंचे हैं। आप जो भी हैं, आपके मां-बाप ने आपको कुछ तो दिया है, तब हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, कंधे पर बंदूक ले करके आप धरती को लाल तो कर सकते हो, लेकिन कभी सोचो, अगर कंधे पर हल होगा, तो धरती पर हरियाली होगी, कितनी प्यारी लगेगी। कब तक हम इस धरती को लहूलुहान करते रहेंगे? और हमने पाया क्या है? हिंसा के रास्ते ने हमें कुछ नहीं दिया है। मोदी यहीं नहीं रुके उन्होंने समाज का सच बयां किया और कहा जैसे-जैसे विज्ञान आगे बढ़ रहा है, आधुनिकता का हमारे मन में एक भाव जगता है, पर हम करते क्या हैं? क्या कभी सोचा है कि आज हमारे देश में सेक्स रेशियो का क्या हाल है? 1 हजार लड़कों पर 940 बेटियाँ पैदा होती हैं। समाज में यह असंतुलन कौन पैदा कर रहा है? ईश्वर तो नहीं कर रहा है। मैं उन डॉक्टरों से अनुरोध करना चाहता हूं कि अपनी तिजोरी भरने के लिए किसी माँ के गर्भ में पल रही बेटी को मत मारिए। मैं उन माताओं, बहनों से कहता हूं कि आप बेटे की आस में बेटियों को बलि मत चढ़ाइए। कभी-कभी माँ-बाप को लगता है कि बेटा होगा, तो बुढ़ापे में काम आएगा। मैं सामाजिक जीवन में काम करने वाला इंसान हूं। मैंने ऐसे परिवार देखे हैं कि पाँच बेटे हों, पाँचों के पास बंगले हों, घर में दस-दस गाड़ियाँ हों, लेकिन बूढ़े माँ-बाप ओल्ड एज होम में रहते हैं, वृद्धाश्रम में रहते हैं। मैंने ऐसे परिवार देखे हैं। मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं, जहाँ संतान के रूप में अकेली बेटी हो, वह बेटी अपने सपनों की बलि चढ़ाती है, शादी नहीं करती और बूढ़े माँ-बाप की सेवा के लिए अपने जीवन को खपा देती है। यह असमानता, माँ के गर्भ में बेटियों की हत्या, इस 21वीं सदी के मानव का मन कितना कलुषित, कलंकित, कितना दाग भरा है, उसका प्रदर्शन कर रहा है। हमें इससे मुक्ति लेनी होगी और यही तो आज़ादी के पर्व का हमारे लिए संदेश है ,अभी राष्ट्रमंडल खेल हुए हैं। भारत के खिलाड़ियों ने भारत को गौरव दिलाया है। हमारे करीब 64 खिलाड़ी जीते हैं। हमारे 64 खिलाड़ी मेडल लेकर आए हैं, लेकिन उनमें 29 बेटियाँ हैं। इस पर गर्व करें और उन बेटियों के लिए ताली बजाएं। भारत की आन-बान-शान में हमारी बेटियों का भी योगदान है, हम इसको स्वीकार करें और उन्हें भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ लेकर चलें, तो सामाजिक जीवन में जो बुराइयाँ आई हैं, हम उन बुराइयों से मुक्ति पा सकते हैं। इसलिए भाइयो-बहनो, एक सामाजिक चरित्र के नाते, एक राष्ट्रीय चरित्र के नाते हमें उस दिशा में जाना है। भाइयो-बहनो, देश को आगे बढ़ाना है, तो विकास - एक ही रास्ता है। सुशासन - एक ही रास्ता है। देश को आगे ले जाने के लिए ये ही दो पटरियाँ हैं - गुड गवर्नेंस एंड डेवलपमेंट, उन्हीं को लेकर हम आगे चल सकते हैं। उन्हीं को लेकर चलने का इरादा लेकर हम चलना चाहते हैं।

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शिवराज ने कहा नर्मदा-मालवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करें उमा

मध्यप्रदेश की लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति मिले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती से नर्मदा-मालवा लिंक परियोजना और बरगी व्यपवर्तन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का आग्रह किया है। उन्होंने सिंचाई से संबंधित लम्बित परियोजनाओं को भी केन्द्र सरकार से शीघ्र मंजूरी दिलाने का अनुरोध भी किया है।मुख्यमंत्री ने इस संबंध में पत्र लिखकर कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के सपने को साकार करते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना 400 करोड़ की लागत से पूर्ण की है। इससे न सिर्फ सिहंस्थ 2016 के लिये जल की व्यवस्था होगी बल्कि उज्जैन, देवास, पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्रों तथा 300 ग्राम में पेयजल मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नर्मदा-मालवा लिंक परियोजना बनाकर मालवा क्षेत्र की 6 लाख 50 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई और 3000 गाँव में पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करना चाहती है। परियोजना में नर्मदा नदी का मध्यप्रदेश के हिस्से का पानी उद्वहन कर विंध्याचल पर्वत श्रंखला के पार यमुना-गंगा कछार की मालवा अंचल में स्थित गम्भीर, पार्वती, कालीसिंध और क्षिप्रा नदी में लाकर इन नदियों को प्रवहमान किया जायेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा-मालवा लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 26 हजार करोड़ है। इतनी बड़ी राशि राज्य शासन अपने स्त्रोतों से नहीं जुटा सकता। इसलिये इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जाना आवश्यक है। यह भारत सरकार निर्धारित राष्ट्रीय परियोजना के सभी मापदंडों को पूरा करती है।मुख्यमंत्री ने पत्र में बरगी व्यपवर्तन परियोजना को भी राष्ट्रीय परियोजना घोषित किये जाने का आग्रह किया। परियोजना की अनुमानित लागत 5127 करोड़ 22 लाख रुपये है। इसे भारत योजना आयोग से निवेश स्वीकृति प्राप्त है। परियोजना में नर्मदा कछार के अतिशेष जल को गंगा कछार में पहुँचाकर जबलपुर, कटनी, सतना और रीवा जिले की 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा देने के लिये नहरों का निर्माण प्रगति पर है।श्री चौहान ने कहा कि परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के लिये प्रस्ताव को केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय की हाई पॉवर स्टीयरिंग कमेटी द्वारा फरवरी 2000 में अनुशंसित किया जा चुका है। विगत 4 वर्ष से अधिक समय से यह प्रस्ताव जल संसाधन मंत्रालय द्वारा भारत सरकार की वित्तीय व्यय समिति को प्रस्तुत किये जाने के लिये लम्बित है।मुख्यमंत्री ने सुश्री उमा भारती से बरगी व्यपवर्तन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में स्वीकृत करवाने का अनुरोध किया है।अन्य लम्बित परियोजनाओं की स्वीकृतिमुख्यमंत्री ने उमा भारती का ध्यान ए.आई.बी.पी. कार्यक्रम में स्वीकृति के लिये लम्बित इंदिरा सागर नहर फेज-5, ओंकारेश्वर नहर फेज-4, इंदिरा सागर नहर फेज-1 एवं 2, लोअर गोई परियोजना तथा कमांड क्षेत्र विकास की 13 परियोजना की ओर आकर्षित करते हुए उन्हें शीघ्र स्वीकृति दिलवाने का अनुरोध किया।मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में लम्बित बीना, बानसुजारा, मोहनपुरा, पेंच व्यपवर्तन, तवा, बारना तथा संजय सरोवर (अपर वैनगंगा) जैसी वृहद परियोजनाओं तथा सीप कोलार, सोनपुर, पवई, मझगाँव, घोघरा, सेमरी, पंचमनगर और कछार जैसी मध्यम परियोजनाओं की ओर भी सुश्री भारती का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्हें शीघ्र स्वीकृति दिलवाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली के अधिकारियों को आयोग के भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में केम्प लगाकर परियोजनाओं का तत्परता से परीक्षण करने के लिये निर्देशित किया जाये

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राष्ट्रपति 27 और 28 को एमपी में

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 27 एवं 28 जून को मध्यप्रदेश आएंगे। राष्ट्रपति इस प्रस्तावित यात्रा में भोपाल एवं इंदौर के दो कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दो दिवसीय भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति भोपाल में इंडियन इन्स्टीटयूट ऑफ साइंस रिसर्च के दीक्षांत समारोह और इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती वर्ष में विशेष दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगे।मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने आज मंत्रालय में राष्ट्रपति की प्रस्तावित यात्रा के लिए प्रारंभ की गयी तैयारियों की जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से कार्यक्रम की अवधि, सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रपति के ठहरने और अन्य व्यवस्था के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन के सुरेश, कमिश्नर भोपाल एस.बी. सिंह, कमिश्नर इंदौर संजय दुबे आदि उपस्थित थे।

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प्रदेश के युवा उद्यमी बनें

सागर में 127 करोड़ की सिंचाई परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के युवा उद्यमिता के गुण पैदा करें। युवा स्वयं का रोजगार स्थापित करने के साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार दें। श्री चौहान ने आज सागर की जनपद पंचायत केसली में 127 करोड़ लागत की सोनपुर मध्यम सिंचाई परियोजना का शिलान्यास कर रहे थे। श्री चौहान ने 400 करोड़ लागत के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना का शुभारंभ भी किया। समारोह में वित्त मंत्री राघवजी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, सांसद शिवराज सिंह लोधी और विधायक भानु राणा उपस्थित थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार मुहैया करवाने के लिये गाँवों में छोटे-छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देगी। सरकार ऋण की गारन्टी लेने के साथ ही युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण भी दिलायेगी। इसके अलावा 5 वर्ष तक ब्याज सब्सिडी भी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परपंरागत लघु उद्योगों को स्थापित करवाया जायेगा। ग्रामीण कारीगरों को बेरोजगार नहीं होने दिया जायेगा। ऐसे कारीगरों को 50 हजार तक ऋण मुहैया करवाया जायेगा, जिस पर 10 हजार रुपये की छूट सरकार देगी।श्री चौहान ने कहा कि छोटे गाँवों में ग्रामीण हाट बनाई जायेंगी, जिसमें 7-8 दुकान होंगी। ये दुकानें कपड़ों पर प्रेस करने, बढ़ईगिरी, कुम्हारी, हेयर सैलून, मोची आदि कारीगरों की होंगी। इस प्रकार प्रदेश के लगभग 5 लाख कारीगर को उनके गॉँव में ही रोजगार मुहैया होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि देवरी क्षेत्र में 1000 प्रकरण मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना में स्वीकृत करें। मुख्यमंत्री ने अटल ज्योति योजना के बारे में कहा कि सागर जिले में माह मई के अंत तक 24 घंटे बिजली देना शुरू कर दिया जायेगा।पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री भार्गव ने कहा कि केसली विकासखंड में इतनी बड़ी सिंचाई परियोजना मिली है। इससे इस सूखाग्रस्त क्षेत्र में फसल की पैदावार बढ़ेगी और खुशहाली आयेगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की महिलाओं ने स्वावलम्बन द्वारा हल्दी एवं दुग्ध उत्पादन शुरू किया है। इसमें 5000 महिलाओं को रोजगार मिला है।मुख्यमंत्री ने की घोषणाएँमुख्यमंत्री श्री चौहान ने देवरी क्षेत्र के लिये अनेक घोषणाएँ कीं। इनमें डेढ़ करोड़ रुपये लागत की जल आवर्धन योजना एवं नहरों के सर्वे प्रमुख हैं। उन्होंने 70 करोड़ 60 लाख की लागत की सूरजपुर जलाशय योजना को स्वीकृति दी। शालाओं का उन्नयन, केसली में आदिवासी बालक छात्रावास, केसली में कौशल विकास केन्द्र की स्थापना, छेवला देवरी क्षेत्र में नवीन औद्योगिक क्षेत्र, उच्च न्यायालय से स्वीकृति के पश्चात ए.डी.जे.कोर्ट शुरू करने तथा अगले शिक्षा सत्र से केसली में महाविद्यालय शुरू करने की घोषणा की।400 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजनमुख्यमंत्री ने समारोह में 400 करोड़ लागत के निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। इनमें 46 करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण तथा शेष का भूमि-पूजन शामिल है। उन्होंने सोनपुर मध्यम सिंचाई परियोजना का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से 7000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई होगी तथा 35 ग्राम के 2305 कृषक लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण सड़कों, स्टाप डेम आदि के 13 करोड़ 9 लाख लागत के 28 निर्माण कार्यों के लिये शिलान्यास और लोकार्पण किये। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजना के हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया।

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इन्वेस्टर्स समिट के करारनामों पर तेजी से अमल

105 लघु , सूक्ष्म और मध्यम उद्योग के लिए जमीन आवंटित इन्दौर में अक्टूबर के अंत में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के करारनामों पर तेजी से अमल शुरू हो गया है। अभी तक 105 लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों के लिए जमीन दी जा चुकी है। समिट में लघु,सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों के लिए कुल 113 करारनामों को अंतिम रूप दिया गया था। शेष आठ उद्योग को औद्योगिक क्षेत्रों में 15 दिन के भीतर जमीन आवंटन के निर्देश दिये गये हैं। इन उद्योगों में 6 अरब 67 करोड़ 86 लाख रुपये का निवेश होगा और 6,717 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग के करारनामों पर अमल की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि उद्योग विभाग की जिस आवंटित भूमि का उपयोग नहीं किया गया है उसकी जिला और एकेवीएन स्तर पर मास्टर प्लानिंग की जाए। यह देखा जाए कि इसका क्या उपयोग हो सकता है और कितनी भूमि उद्योगों को दी जा सकती है। यह कार्य एक माह में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी भूमि का कब्जा वापस लेकर उसे नये उद्यमियों को आवंटित किया जाए। यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर कर एक माह में कार्यवाही प्रतिवेदन दिया जाए।उद्योग मंत्री ने निर्देश दिया है कि नवीन औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए केबिनेट द्वारा चयनित स्थलों और अन्य नये स्थानों पर, जहाँ भूमि उपलब्ध है और भूमि की माँग है, प्राथमिकता के आधार पर योजना बनाकर औद्योगिक क्षेत्रों का विकास शुरू किया जाए। साथ ही, स्वीकृत औद्योगिक अधोसंरचना उन्नयन के लिए सभी प्रस्तावों पर इसी वर्ष से काम शुरू किया जाए। नये औद्योगिक क्षेत्रों के विकास तथा विद्यमान औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन का कार्य जनवरी में शुरू करने का उन्होंने निर्देश दिया।इन्दौर समिट में जिन 113 सूक्ष्म और लघु उद्योग के लिए करार हुए हैं, इनमें से 14-14 उद्योग जबलपुर और ग्वालियर परिक्षेत्र, 13 उज्जैन, 10 भोपाल, 50 इंदौर, 9 रीवा और 3 सागर परिक्षेत्र में लगेंगे।बैठक में बताया गया कि यह सभी सूक्ष्म और लघु उद्योग अप्रैल-मई 2013 तक स्थापित होना शुरू हो जायेंगे। मार्च 2014 तक अधिकांश इकाइयों के स्थापित हो जाने की संभावना है।बैठक में अपर मुख्य सचिव उद्योग श्री पी.के. दाश, उद्योग आयुक्त बी.के. चतुर्वेदी, मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक, जिला उद्योग केन्द्रों के महाप्रबंधक, परिक्षेत्रीय उद्योग संचालक तथा सभी एकेवीएन के प्रबंध संचालक उपस्थित थे।

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भारत-यूएस बिजनेस मीट मध्यप्रदेश में करने पर बनी सहमति

मुख्यमंत्री चौहान की बिजनेस काउंसिल के सदस्य निवेशकों से चर्चा एम पी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत के राज्यों में सबसे तेज गति से निवेश क्षेत्र के रूप में सामने आया है। ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं, पर्यटन, खाद्य प्र-संस्करण, टेक्सटाइल और नवकरणीयऊर्जा क्षेत्रों में निवेश की भरपूर संभावनाएँ हैं। श्री चौहान गत दो अक्टूबर को वाशिंगटन डी सी में यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल और भारतीय उद्योग परिसंघ बिजनेस कान्फे्रंस को संबोधित कर रहे थे।यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल का गठन भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और वाणिज्यिक मित्रता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गठित किया गया है।मुख्यमंत्री ने यू एस इंडिया बिजनेस काउंसिल के सदस्यों और वाणिज्यिक प्रतिनिधियों को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में 28 से 30 अक्टूबर 2012 को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2012 में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध मैत्रीपूर्ण हैं। भारत के लिये अमेरिका सबसे बड़ा विदेशी पूँजी निवेश का स्त्रोत है। भारत में कुल विदेशी पूँजी निवेश में छह प्रतिशत योगदान अमेरिका का है।श्री चौहान ने मध्यप्रदेश में पूँजी निवेश के लिये तैयार वातावरण और अधोसंरचना की चर्चा करते हुए कहा कि सड़क संपर्क, बिजली, पानी और तकनीकी रूप से कौशल सम्पन्न मानव संसाधन और उद्योगों के लिये जरूरी संसाधन मध्यप्रदेश में उपलब्ध हैं।अपने संबोधन में वरिष्ठ निदेशक एवं नीति विश्लेषक और यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल की कार्यकारी उपाध्यक्ष सुश्री डिएन फैरल ने श्री चौहान की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल से व्यापारिक संभावनाएँ बढ़ेंगी। इस अवसर पर भारत और यूएस बिजनेस मीट मध्यप्रदेश में आयोजित करने पर सहमति बनी। समय और स्थान बाद में तय होंगे। अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम से चर्चाइसके पहले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निवेश सहायता के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। श्री चौहान ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन, अधोसंरचना निर्माण के वित्तीय सहयोग, नवकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं शहरी अधोसंरचना निर्माण में सार्वजनिक-निजी सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिये न सिर्फ निवेश में सहयोग बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में वित्तीय सहयोग के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और परामर्श उपलब्ध करवाने से ही समय पर निश्चित लागत में परियोजना पूरी हो सकती है।अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के प्रस्तावों पर सकारात्मक रूख अपनाते हुए उच्च, शिक्षा, जल संसाधन एवं स्वास्थ्य और सड़क अधोसंरचना के क्षेत्रों में निवेश सहयोग पर चर्चा की।अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम की ओर से क्षेत्रीय उद्योग संचालक अधोसंरचना एवं प्राकृतिक संसाधन दक्षिण एशिया सुश्री अनिता जार्ज, मुख्य निवेश अधिकारी सार्वजनिक-निजी सहयोग विभाग श्री विपुल भगत और विश्व बैंक के प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम अधिकारी जिल आर्मस्ट्रांग उपस्थित थी।

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एमपी में जून तक सबको मिल जाएगा आधार

मध्यप्रदेश की सभी सवा सात करोड़ आबादी को आगामी जून तक आधार नम्बर देने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया है कि निर्धारित समय-सीमा में यह कार्य पूर्ण होगा। बैठक में बताया गया कि समय पर संतोषजनक कार्य नहीं करने वाली एजेंसी को दण्डित किया जायेगा तथा उसी दर पर कार्य दूसरी एजेंसी को दे दिया जा सकेगा। आधार नम्बर की मध्यप्रदेश में प्रगति और आगामी कार्य योजना के संबंध में आज मुख्यमंत्री श्री चौहान की भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणी के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई।श्री चौहान ने श्री निलेकणी को इंदौर में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल इन्वेस्टर समिट में भी आमंत्रित किया। बैठक में मुख्य सचिव आर.परशुराम भी उपस्थित थे।बैठक में तय किया गया कि राज्य में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले कलेक्टरों को राष्ट्र तथा राज्य स्तर पर सम्मानित कर पुरस्कृत किया जायेगा। आधार नम्बर का एक कार्ड विशिष्ट पहचान देने के साथ अनेक सुविधायें देगा।भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणी ने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम आदि की अनेक बेहतरीन योजनायें हैं। आधार नम्बर न केवल इन योजनाओं को और गति देगा बल्कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका भी इससे समाप्त होंगी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड के माध्यम से हितग्राही को घर पर भुगतान की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। उन्होंने बताया कि यह कार्ड डेबिट कार्ड की तरह भी कार्य करेगा। इससे किसानों और अन्य हितग्राहियों को कैशलेस परचेस की भी सुविधा मिल जायेगी।मध्यप्रदेश में हो रहे कार्यों का प्रस्तुतीकरण देते हुये योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी सचिव सुधिरंजन मोहंती ने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ सात लाख आधार नम्बर आवंटित हो चुके हैं। शेष 6 करोड़ कार्ड बनाने के लिये 6 हजार मशीनें लगायी जायेंगी यह कार्य दो सौ दिन में पूरा करने की कार्य योजना तैयार की गयी है। उन्होंने बताया राज्य में इलेक्ट्रॉनिक पेयमेंट का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इसे आधार के साथ जोड़ा जायेगा।बैठक में बताया गया कि झारखण्ड, सिक्किम, महाराष्ट्र,आंध्रप्रदेश आदि अनेक राज्यों में आधार नम्बर के जरिये अनेक सफल प्रयोग हुये हैं।बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास अरूणा शर्मा, प्रमुख सचिव उद्योग प्रसन्न कुमार दाश, प्रमुख सचिव वित्त अजय नाथ, प्रमुख सचिव राजस्व बसंत प्रताप सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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गौर ने मुंबई में बताई एमपी की  खूबी

मध्यप्रदेश एक शांतिप्रिय राज्य है, जहाँ पर निवेश करना निश्चित ही लाभकारी होगा। प्रदेश में पैदा होने वाला कपास देश में सर्वोत्तम माना जाता है। मध्यप्रदेश में सस्ते एवं परिश्रमी कारीगर उपलब्ध हैं। निवेशक मध्यप्रदेश के इंदौर में अक्टूबर, 2012 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में अवश्य शामिल हों। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने मुंबई में सी.सी.आई., पर्यटन तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित निवेशक सम्मेलन में यह बात कही।मंत्री श्री गौर ने कहा कि इंदौर के समीप पीथमपुर में राष्ट्रीय-स्तर का ऑटो टेस्टिंग ट्रेक बनाया गया है, जिसके पास ऑटो क्षेत्र में निवेश करना फायदेमंद होगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में राजीव आवास योजना में लगभग 1,600 झोपड़ियों का पुनर्वसन किया जा रहा है। प्रदेश में अनेक ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक-स्थल हैं, जहाँ पर्यटकों को सुविधाएँ उपलब्ध करवाकर राष्ट्रीय्र पर्यटन नक्शे में लाया जा सकता है।मंत्री श्री गौर ने प्रारंभ में निवेशकों से एकल बैठक कर मध्यप्रदेश में उपलब्ध संसाधनों, अधोसंरचना, कच्चा माल आदि के बारे में जानकारी दी और उनसे निवेश के बारे में चर्चा की। श्री गौर से भेंट करने वालों में हिन्दुजा रियल्टी वेंटेज लिमिटेड के सुदीप गोस्वामी, इनोवेटिव फिल्म स्टूडियो के सरवन प्रसाद, होटल लीला केंपसकी की अमृता नायर, टाटा रियल्टी इन्फ्रा-स्ट्रक्चर के पी.डी. करकेरिया, इन्फ्रा-स्ट्रक्चर लीजिंग एण्ड फायनेन्सियल सर्विसेस लिमिटेड के पारितोष गुप्ता, एस.एल. इन्फ्रा-स्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के केदार भागवत और श्री मित्तल, कार्प कम्पनी के करण मित्तल एवं जिमी मिस्त्री, कारगरन ऑटोमेशन के श्रीनिवास रमेश और सैयद हसीम अराफात, यू.बी.ई. इण्डस्ट्री के विजय भास्कर तथा अशोक बिल्ड कार्प के सतीश पारीख शामिल हैं।बैठक में इनोवेटिव फिल्म के श्री प्रसाद ने मध्यप्रदेश में फिल्म सिटी बनाने की इच्छा व्यक्त की। अन्य निवेशकों ने भी मध्यप्रदेश में निवेश करने की अपनी इच्छा जतलायी।इस अवसर पर प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एस.पी.एस. परिहार, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम राघवेन्द्र सिंह और आयुक्त नगरीय प्रशासन संजय शुक्ला आदि उपस्थित थे।

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एमपी में जून तक सबको मिल जाएगा आधार

मध्यप्रदेश की सभी सवा सात करोड़ आबादी को आगामी जून तक आधार नम्बर देने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया है कि निर्धारित समय-सीमा में यह कार्य पूर्ण होगा। बैठक में बताया गया कि समय पर संतोषजनक कार्य नहीं करने वाली एजेंसी को दण्डित किया जायेगा तथा उसी दर पर कार्य दूसरी एजेंसी को दे दिया जा सकेगा। आधार नम्बर की मध्यप्रदेश में प्रगति और आगामी कार्य योजना के संबंध में आज मुख्यमंत्री श्री चौहान की भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणी के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई।श्री चौहान ने श्री निलेकणी को इंदौर में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल इन्वेस्टर समिट में भी आमंत्रित किया। बैठक में मुख्य सचिव आर.परशुराम भी उपस्थित थे।बैठक में तय किया गया कि राज्य में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले कलेक्टरों को राष्ट्र तथा राज्य स्तर पर सम्मानित कर पुरस्कृत किया जायेगा। आधार नम्बर का एक कार्ड विशिष्ट पहचान देने के साथ अनेक सुविधायें देगा।भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन निलेकणी ने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम आदि की अनेक बेहतरीन योजनायें हैं। आधार नम्बर न केवल इन योजनाओं को और गति देगा बल्कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका भी इससे समाप्त होंगी। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड के माध्यम से हितग्राही को घर पर भुगतान की सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। उन्होंने बताया कि यह कार्ड डेबिट कार्ड की तरह भी कार्य करेगा। इससे किसानों और अन्य हितग्राहियों को कैशलेस परचेस की भी सुविधा मिल जायेगी।मध्यप्रदेश में हो रहे कार्यों का प्रस्तुतीकरण देते हुये योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी सचिव सुधिरंजन मोहंती ने बताया कि प्रदेश में एक करोड़ सात लाख आधार नम्बर आवंटित हो चुके हैं। शेष 6 करोड़ कार्ड बनाने के लिये 6 हजार मशीनें लगायी जायेंगी यह कार्य दो सौ दिन में पूरा करने की कार्य योजना तैयार की गयी है। उन्होंने बताया राज्य में इलेक्ट्रॉनिक पेयमेंट का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इसे आधार के साथ जोड़ा जायेगा।बैठक में बताया गया कि झारखण्ड, सिक्किम, महाराष्ट्र,आंध्रप्रदेश आदि अनेक राज्यों में आधार नम्बर के जरिये अनेक सफल प्रयोग हुये हैं।बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास अरूणा शर्मा, प्रमुख सचिव उद्योग प्रसन्न कुमार दाश, प्रमुख सचिव वित्त अजय नाथ, प्रमुख सचिव राजस्व बसंत प्रताप सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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हनुमान जयंती : स्वर्ण चोला पहन नगर भ्रमण पर निकलेंगे सालासर बालाजी

 हनुमान जयंती पर झिलमिलाती रोशनी के बीच मंदिरों में शुक्रवार शाम को चोला चढ़ाकर सुंदरकांड का का पाठ किया जाएगा। वहीं तिलक नगर में सालासर हनुमान को नगर भ्रमण कराया जाएगा। इधर, कुछ देवालयों में अखंड रामायण पाठ जारी है।पढ़ें, कहां क्या होगा...     -  रणजीत हनुमान मंदिर में चोला चढ़ाकर महाआरती की जाएगी। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई। - तिलक नगर स्थित सालासर हनुमानजी को स्वर्ण चोला चढ़ाकर पूजन किया जाएगा। उसके बाद ध्वजारोहण होगा और बालाजी को नगर भ्रमण कराया जाएगा। - श्री हंसदास मठ पीलियाखाल संस्थान के रणछोड़ पंचमुखी चिंताहरण हनुमान मंदिर में रामचरणदास महाराज के सान्निध्य में जन्म आरती सुबह साढ़े 6 बजे होगी। शाम 7 बजे शृंगार होगा।- ओल्ड राजमोहल्ला स्थित हरिराम मंदिर में विशेष शृगार किया जाएगा। यहां हनुमानजी के साथ उनके पुत्र मकरध्वज की मूर्ति आकर्षण का केंद्र रहेगी।- श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में सुबह साढ़े 6 बजे हनुमानजी का विशेष शृंगार किया जाएगा, वहीं रात को सुंदरकांड का पाठ किया जाएगा। - सत्यसाईं चौराहा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर में विशेष शृंगार किया जाएगा।

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शिवराज के रामराज्य का रामनाम सत्य

 वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने गुड गवर्नेंस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मेरी ही शिकायत पर अठारह साल में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो कैसा गुड गवर्नेंस। डबास ने यह बात सिविल सर्विसेज डे पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। शाहपुरा झील किनारे स्थित प्रशासन अकादमी में सिविल सर्विसेज डे के मौके पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और आईपीएस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सुबह साढ़े दस बजे कार्यक्रम की शुरूआत हुई जो दोपहर दो बजे तक चला। अपर मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने गुड गवर्नेंस को लेकर प्रिजेंटेशन दिया। कार्यक्रम में सवाल जवाब के दौरान आईएफएस अधिकारी डबास ने कहा कि उन्होंने 18 साल पहले ग्वालियर में अवैध रूप से खनिज उत्खनन को लेकर मुख्य सचिव से लेकर कई जगह शिकायत की थी। आज तक उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जब मुझे ही न्याय नहीं मिला तो कैसा गुड गवर्नेंस है? सिविल सर्विस डे के एक दिन पहले अफसरों ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया तो किसी ने सुधार को लेकर प्रश्न किए। मुख्य सचिव अंटोनी डिसा और पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह प्रश्न पूछने में सबसे आगे रहे। अफसरों के हर प्रश्न का उत्तर अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा एसआर मोहंती ने बड़े ही बेबाकी और प्रशासनिक दायरे में रहते हुए दिए। प्रशासन अकादमी में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों के बीच जैसे ही प्रश्नोत्तर काल शुरू हुआ कि मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने पहला प्रश्न किया कि सीनियर अधिकारी के लिए माइक्रो मैनेजमेंट में गुड आस्पेक्ट कैसे हो सकता है। इसी दौरान पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह ने सवाल किया कि माइक्रो मैनेजमेंट में एकाउंटेबिलिटी को लेकर कैसे काम किया जा सकता है। सीएस के प्रश्न का उत्तर देते हुए एसीएस मोहंती ने बताया कि इरिगेशन पॉलिसी के लिए एसीएस जलसंसाधन आरएस जुलानिया द्वारा किए गए कार्य माइक्रो मैनेजमेंट का सबसे अच्छा उदाहरण है। डीजी सवाल पर उत्तर मिला कि रिस्पांसबिलिटी फिक्स करने की जरूरत है। सोशल मीडिया आजकल इसमें अहम् रोल अदा कर रहा है। आंख मंूदकर स्थानीय अफसर विश्वास करने की जरूरत नहीं है।   APCCF डबास को CS डिसा की डपट, बोले पर्सनल बातों का नहीं है मंच अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक आजाद सिंह डबास को मुख्य सचिव अंटोनी डिसा और पीसीसीएफ नरेन्द्र कुमार की फटकार भी लगी। डबास को बोलने के बीच ही रोकते हुए उन्हें नसीहत दी गई कि यह मंच पर्सनल बातों के लिए नहीं बल्कि गुड गर्वनेंस पर बोलने के लिए है। डबास ने मंच से 18 साल पुराना एक मामला उठाते हुए कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही थी। वे अपने ही विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे थे। दरअसल अपर मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा एसआर मोहंती अफसरों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इसी दौरान एपीससीएफ अजाद सिंह डबास खड़े हुए और प्रश्न दागा कि ग्वालियर वृत्त के वन क्षेत्र में खनिज का अवैध उत्खनन हुआ, मैने शिकायत की, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वे विभाग पर कुछ और बोलते इसके पहले मुख्यसचिव ने बीच में ही रोका और बैठ जाने को कहा। डबास फिर भी नहीं माने और बोलने को आगे बढ़े तभी पीसीसीएफ ने भी टोका और पर्सनल बातें अलग से करने की नसीहत दे डाली।   ACS मोहंती का प्रजेंटेशन काबिल-ए-तारीफ सिविल सर्विस डे के मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के एसीएस एसआर मोहंती ने प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि कौटिल्य, प्रजा की खुशी में अपनी खुशी मानते थे। वे अपनी खुशी को खुशी नहीं मानते थे। हम सिस्टम को डेवलप कैसे कर सकते हैं? पैसे का इस्तेमाल लोगों के लिए कैसे कर सकते हैं? इस तरह की नीति बनाकर मौजूदा समय में काम करने की जरूरत है। गुड गवर्नेंस के पांच पिलर हैं। सिटिजन सेंट्रिंग प्रशासन ही गुड गवर्नेंस में माना जाता है। जीरो टॉलरेंस, लीगल सिस्टम, कांपीटेंट पर्सनल, साउंड पर्सनल मैनेजमेंट, गुड पॉलिसी इसके लिए आवश्यक हैं।   माइक्रो मैनेजमेंट में एकाउंटेबिलिटी पर कैसे होगा काम: DGP सवाल: डीजीपी सुरेन्द्रसिंह-माइक्रो मैनेजमेंट में एकाउंटेबिलिटी को लेकर कैसे काम किया जा सकता है। जवाब: एसीएस मोहंती- रिस्पांसबिलिटी फिक्स करने की जरुरत है। सोशल मीडिया आजकल इसमें रोल अदा कर रहा है। आंख मूंदकर स्थानीय अफसर पर विश्वास करने की जरुरत नहीं है। सवाल: सीएस अंटोनी डिसा- सीनियर अधिकारी के लिए माइक्रो मैनेजमेंट में गुड आस्पेक्ट कैसे हो सकता है। जवाब: एसीएस मोहंती - इरिगेशन पॉलिसी के लिए एसीएस आरएस जुलानिया द्वारा किए गए कार्य माइक्रो मैनेजमेंट का सबसे अच्छा उदाहरण है। सवाल: एडीजी प्रदीप रुनवाल-डायल 100 में फाल्स काल भी आते है इसे रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे है। जवाब: एडीजी अन्वेष मंगलम -85 फीसदी फाल्स काल एमपी में आ रहे है। इसे कम करने के लिए दवाब बनाने की जरुरत अभी नहीं है। देश-प्रदेश में इस तरह की बहुत शिकायत आती है। कई बार मिस कॉल से भी जानकारी मिलती है। कई बार लोग पचास से सौ बार फाल्स कॉल् करते हे। ऐसे लोगों को ब्लैक लिस्ट किया है पर पूरी तरह इग्नोर नहीं किया है। सवाल: डायल 100 के बाद पुलिस कर्मी बीट पर मौजूद नहीं रहते। पुलिस का संवाद घटा है। इसे सुधारने की जरुरत है। जवाब: डीजीपी-सिंहस्थ के चलते फोर्स की दिक्कत आई है। बीट में मूवमेंट कम नहीं होने देंगे।

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