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होशंगाबाद News


अनिल दवे का बांद्राभान में अंतिम संस्कार

दवे के अभियान नर्मदा समग्र को अपनाएगी शिवराज  सरकार केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे आज रेवा तट पर पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी इच्छा के मुताबिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बांद्राभान में उनका अंतिम संस्कार किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने यहां पौध रोपण किया। श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्व. अनिल दवे ने नर्मदा समग्र और नर्मदा संरक्षण को लेकर जो भी अभियान और काम शुरू किए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है। उनकी पर्यावरण की चिंता को सरकार अभियान के रूप में लेगी। शिवराज ने कहा कि स्व. दवे का मिशन आगे भी चलता रहेगा। उनका नर्मदा समग्र का काम आगे बढ़ेगा। उन्होंने नर्मदा समग्र और मैंने नर्मदा सेवा यात्रा के लिए काम किया है। यह नर्मदा मैया को लेकर मेरी और उनकी समानता है। बांद्राभान में हर दो साल में लगने वाले नदी महोत्सव को सरकार चलाती रहेगी। स्व. दवे की पर्यावरण की चिंता को सरकार अभियान के तौर पर लेगी।  उन्हें सशस्त्रबल ने सलामी भी दी। दवे का कल हार्ट अटैक आने के बाद दिल्ली के एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया था। बांद्राभान में दवे को उनके भाई अभय दवे ने मुखाग्नि दी। यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संघ नेता सुरेश सोनी, भैय्याजी जोशी अरुण जैन के साथ केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार, नरेंद्र सिंह तोमर, डॉ. हर्षवर्द्धन, उमा भारती, विनय सहस्त्रबुद्धे, कैलाश विजयर्गीय, थावरचंद गेहलोत मौजूद थे। इससे पहले भोपाल के शिवाजी नगर स्थित नदी का घर से तिरंगे में लिपटा अनिल दवे का पार्थिव शरीर आज सुबह बांद्राभान के लिए रवाना हुआ। इससे वाहनों की लंबी कतार होशंगाबाद रोड पर लग गई थी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आज दुर्ग जिले के पाटन में बने वन क्षेत्र में सांकरा प्लांटेशन प्लाट का नाम स्व. अनिल माधव दवे स्मृति वन करने का ऐलान किया। रमन सुराज अभियान के तहत यहां पहुंचे थे।  

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 MadhyaBharat  19 May 2017

पचमढ़ी

आर.बी.त्रिपाठी कुदरत ने जैसे पचमढ़ी को दिल-खोलकर प्राकृतिक सौन्‍दर्य बख्‍शा है। चारों ओर पहाड़ों के उन्‍नत शिखर, हरियाली और वन, गहरी खाइयाँ, स्‍वच्‍छन्‍द विचरण करते वन्‍य-प्राणी, रंग-बिरंगे दुर्लभ पक्षियों के झुण्‍ड शांत वातावरण में फैली अलग तरह की सोंधी खुशबू और स्‍वच्‍छ हवा स्‍वास्‍थ्‍य के लिये बहुत फायदेमंद है। देश के हृदय प्रदेश कहे जाने वाले मध्‍यप्रदेश में बहुत नजदीक गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने या घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिये कोई अच्‍छी जगह है तो वह पचमढ़ी है। सतपुड़ा की रानी कही जाने वाली पचमढ़ी की सुरम्‍य वादियाँ और नयनाभिराम दृश्‍य किसी को भी पु‍लकित और मंत्रमुग्‍ध करने के लिये पर्याप्‍त है। लेकिन पचमढ़ी आज भी एक अबूझ पहेली की तरह है। यहाँ का इतिहास, जनश्रुतियाँ और किंवदंतियाँ सदैव ही आपको कुछ और नया जानने की जिज्ञासा उत्‍पन्‍न करती है। राजधानी भोपाल से तकरीबन 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पचमढ़ी। भोपाल से पिपरिया तक सड़क सीधी-सपाट है। बाद में मटकुली से पगारा होकर पचमढ़ी तक जाने वाली टेड़ी-मेड़ी सड़क, रास्‍ते के दोनों ओर पहाड़ एवं घने जंगल संभलकर चलने के संकेत लगे होने के बावजूद किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करते दिखते हैं। सतपुड़ा नेशनल पार्क से होकर गुजरता रास्‍ता और वन एवं वन्‍य-प्राणियों को किसी तरह का नुकसान न पहुँचाने की हिदायतें पढ़ते हुए आप आगे और आगे बढ़ते जाइये। एकाधिक स्‍थान पर अंकित चेतावनी कि यह इलाका मधुमक्खियों का है यहाँ रुकना ठीक नहीं है, भी एहतियात बरतने को प्रेरित करती है। सड़क के दोनों ओर उछल-कूद करते लाल मुँह वाले बंदर बरबस ही आपका ध्‍यान अपनी ओर खींचते हैं। लेकिन यहाँ भी लिखा मिलेगा कि ‘जंगली जानवरों को खाने के लिये कोई चीज न दें’। अलसुबह या शाम के धुंधलके में आपकी मुलाकात किसी अ ्‍य जंगली जानवर से भी हो सकती है। भरी गर्मियों में किसी गुफा के नीचे से गुजरते हुए आपके सर पर शीतल जल की बूँदें चट्टानों से रिसकर गिरें तो आपको कैसा अनुभव होगा? पचमढ़ी में बड़ा महादेव और जटाशंकर मंदिर जाने वाले श्रृद्धालु और पर्यटकों को खोहनुमा पहाडि़यों और गुफाओं के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है और ठंडे पानी की बूँदें जैसे उनका अभिनंदन करते नजर आती हैं। जटाशंकर बहुत ठंडा स्‍थान है, जो पहाड़ों के बीच बनी खोह के मध्‍य स्थित है। यहाँ आस-पास बहुतायत में आम के पेड़ लगे हैं। पहाड़ी चट्टानों के बीच आम और अन्‍य प्रजाति के विशाल पेड़ों की उपस्थिति स्‍वयं में आश्‍चर्य के साथ सुकून भी देती है। बड़ा महादेव मंदिर परिसर में एक ब्रिटिश दंपति से मिलकर ज्ञात हुआ कि 75 वर्षीय श्री मॉन रॉड पैर से लाचार होने से बैसाखी के सहारे चलते हुए यहाँ महादेव के दर्शन करने पहुँचे हैं। उन्‍होंने बताया कि दुर्गम तीर्थ स्‍थल केदारनाथ के अतिरिक्‍त भारत में स्थित सभी ज्‍योतिर्लिंग के वे दर्शन कर चुके हैं। उन्‍हें भारत भ्रमण पर आना बहुत अच्‍छा लगता है और वे प्राय: हरेक साल अपनी पत्‍नी नोरीन के साथ यहाँ आते हैं। इस दम्‍पति की आँखों की चमक और इस उम्र में उनकी श्रद्धा तथा हौसला देखते ही बनता है। जटाशंकर मंदिर के नजदीक हमारी भेंट अहमदाबाद के सी.एन. स्‍कूल से आए नन्‍हे-मुन्‍ने विद्यार्थियों से होती है। अहमदाबाद से यहाँ तकरीबन 72 बच्‍चों का ग्रुप भ्रमण पर आया हुआ था। सी.एन. स्‍कूल के हर्ष वोरा, जश, हेली, विश्‍वा और दर्शिनी ने बड़े प्रफुल्लित होकर बताया कि उन्‍हें पचमढ़ी आकर यहाँ की हरियाली तथा सुंदरता देखकर बहुत खुशी हुई है। उनके पूरे ग्रुप को पचमढ़ी बहुत भाया है। वे फिर से अधिक वक्‍त निकालकर परिवार के साथ पचमढ़ी आना चाहेंगे।   वस्‍तुत: पचमढ़ी स्थित मंदिर और कुछ अन्‍य स्‍थान ‘नेचुरल एयर कंडीशनर’ की तरह हैं। यहाँ स्‍वाभाविक रूप से वातावरण में ठंडक बनी रहती है। यहाँ की आबोहवा और वातावरण को स्‍वास्‍थ्‍य के अत्‍यंत अनुकूल और लाभप्रद माना गया है। औषधियों में प्रयुक्‍त प्राचीन जड़ी-बूटियों का भंडार और दुर्लभ आयुर्वेदिक प्‍लांट यहाँ हैं। इस तरह पचमढ़ी को बॉटनी का भंडार भी कहा जाता है। पूर्व में यहाँ ‘सेनेटोरियम’ भी बनाया गया था जिसमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिये दूर-दूर के स्‍थानों से लोग यहाँ आते थे। आज भी दमा, श्‍वांस, मनोरोग और क्षय रोग से पीडि़त मरीजों के लिये पचमढ़ी स्‍वास्‍थ्‍यप्रद जगह है।   पर्यटन विकास निगम के चंपक बंगलो में बहुतायत से दुर्लभ पेड़ों की प्रजातियाँ आज भी मौजूद हैं। समुचित देख-भाल की वजह से यहाँ आम की विभिन्‍न प्रजातियाँ, गुलाब-जामुन के पेड़, स्‍वर्ण चंपा, विशाल तने वाला चंपा, तून, महुआ, पाखड़, कटहल, सिलवर ओक (सरू), क्रिस्‍मस ट्री, जामुन बड़ी एवं देशी जामुन सहित फूलों की अनेक प्रजातियाँ हैं। इसी का सुफल है कि चंपक बंगलो के संपूर्ण परिसर में एक सौंधी सी महक और वातावरण में सुगंधित खुशबू हमेशा फैली रहती है। सैलानियों की सुविधा के लिये इन दुर्लभ पेड़ों के नाम तख्‍ती के रूप में प्रदर्शित किये गये हैं। उद्यानिकी विभाग के श्री लोखण्‍डे ने यहाँ स्थित उद्यानिकी नर्सरी में फूलों और फलदार पौधों के रोपण में अनेक नये-नये प्रयोग किये थे। लेकिन प्रकृति की इस अनुपम भेंट का आनंद लेने के लिये आपको चंपक बंगलो में रुकना होगा। चंपक बंगलो पूर्व में अविभाजित मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री का पचमढ़ी स्थित निवास था। इसी परिसर में तत्‍कालीन केबिनेट की बैठक हुआ करती थी। केबिनेट की बैठक के हॉल में पर्यटन विकास निगम द्वारा मध्‍यप्रदेश जनसंपर्क के सहयोग से तत्‍कालीन केबिनेट बैठकों, राज्‍यपाल एवं मुख्‍यमंत्री सहित मंत्री-मंडल के और विभिन्‍न ईवेंट्स के दुर्लभ श्‍वेत-श्‍याम छायाचित्र करीने से मढ़वाकर प्रदर्शित किये गये हैं। इसे केबिनेट हाल का नाम दिया गया है। इनके जरिये आप अविभाजित मध्‍यप्रदेश की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी पचमढ़ी के विभिन्‍न दुर्लभ क्षण से रू-ब-रू होते हैं। यह एक सुखद संयोग कहा जा सकता है कि पिछले दिनों मध्‍यप्रदेश मंत्रि-परिषद की महत्‍वपूर्ण बैठक और पर्यटन केबिनेट इसी स्‍थान पर संपन्‍न हुई जिसमें महत्‍वपूर्ण फैसले लिये गये। पचमढ़ी में तकरीबन आधा सैकड़ा स्‍थल पर्यटकों को लुभाने के लिये मौजूद हैं। लेकिन खास तौर पर लगभग साढ़े चार हजार फीट ऊँचाई पर स्थित धूपगढ़ पर सूर्यास्‍त का नजारा देखना किसी रोमांच से कम नहीं। यह स्‍थान प्रदेश की सर्वाधिक ऊँचाई वाले पहाड़ की चोटी है। सूर्यास्त के समय छायी रहने वाली धुंध एक अलग ही नजारा उपस्थित करती है। यहाँ आस-पास की पहा़ड़ियों की नेचुरल कटिंग अलग-अलग प्रकार की आकृतियों का एहसास करवाती है। वाकई ‘प्रकृति की भव्‍य छटाओं का अलौकिक दर्शन’ यहाँ होता है। पचमढ़ी स्थित प्राचीन मंदिर प्राकृतिक रूप से निर्मित हैं। पांडव गुफाएँ भी एक अबूझ पहेली की तरह है। इनके अतिरिक्‍त चौरागढ़, गुप्‍त महादेव, नागद्वारी के आस-पास सर्कल में चिंतामणि, गुप्‍त गंगा के अतिरिक्‍त प्राचीन चर्च भी यहाँ स्थित हैं। नागपंचमी पर यहाँ विशेष उत्‍सव होता है, जो प्राय: जुलाई माह में आती है। पचमढ़ी की खोज करने वाले केप्‍टन जेम्‍स फोरसिथ द्वारा निर्मित बाइसन भवन जिसे बाद में वन विभाग द्वारा ‘बाइसन लॉज’ व्‍याख्‍या केन्‍द्र का नाम दिया गया, एक नए स्‍वरूप में यहाँ स्थित है। बाइसन लॉज स्थित वानिकी संग्रहालय में पचमढ़ी के इतिहास, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, बाघ के संबंध में महत्‍वपूर्ण जानकारी, बाघ संरक्षण के तरीके, विभिन्‍न प्रजातियों के जंगली जानवर, दुर्लभ पक्षियों और वनस्‍पति आदि की रुचिकर जानकारी प्रदर्शित की गई है। संग्रहालय में फोरसिथ की खोज, बाइसन लॉज, पांडवों का निवास, साल और सागौन के पेड़ों का संगम, वन्‍य-जीव गलियारे, प्राणवान वन के साथ ही दुर्लभ पक्षी दूधराज, किलकिला सहित अन्‍य दुर्लभ पक्षियों की रोचक जानकारी प्रदर्शित की गई है। पचमढ़ी के प्रसिद्ध बी फॉल, कैथलिक चर्च, प्रियदर्शिनी पॉइंट (पोरसिथ पॉइंट), जटाशंकर गुफा, हांडी खोह सहित अन्‍य पर्यटन स्‍थलों की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है।  पचमढ़ी में बारहों महीने पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रीष्‍मकालीन अवकाश में भी यहाँ मध्‍यप्रदेश सहित मुख्‍यत: मुम्‍बई, नई दिल्‍ली, कोलकाता, महाराष्‍ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल से पर्यटक भ्रमण पर आते हैं। पचमढ़ी को पर्यटन के नक्‍शे पर लाकर ज्‍यादा से ज्‍यादा पर्यटकों को पचमढ़ी के प्रति आकर्षित करने में मध्‍यप्रदेश पर्यटन का विशेष योगदान रहा है। विदेशी पर्यटक यहाँ प्राय: जंगल, ट्रेकिंग, हाइकिंग, कैम्पिंग और बर्ड वॉचिंग के उद्देश्‍य से आते हैं। लेकिन देश भर के पर्यटकों को पचमढ़ी अपनी प्राकृतिक सुन्‍दरता, हरियाली, वर्षाकाल में अनगिनत वॉटर फॉल, सघन वन और वन्‍य-प्राणियों के जरिये आकर्षित करती रही है। सैलानियों की सुविधा के लिये पचमढ़ी में राज्‍य शासन एवं प्रदेश के पर्यटन निगम ने सभी जरूरी सहूलियतें जुटाई हैं। पचमढ़ी में राज्‍य पर्यटन निगम की लगभग दर्जन भर इकाईयाँ स्थित हैं। इनमें चंपक बंगलो, अमलतास, नीलांबर, पंचवटी, देवदारू, कर्निकर, रॉक एण्‍ड मेनर, हिलटॉप बंगलो, ग्‍लेन व्‍यू होटल, होटल आर्क आदि प्रमुख हैं। मटकुली से पचमढ़ी के बीच पड़ने वाली देनवा नदी पर उन्‍नत पुल बन जाने से पचमढ़ी की यात्रा अब बारहों महीने और भी सुगम हो गई है। पचमढ़ी में पर्यटन और वन विभाग से वर्षों से जुड़े श्री किशन लाल गाइड बताते हैं कि ‘ग्रीष्‍म में आम, जामुन, चारोली (अचार) और महुआ की महक सैलानियों को लुभाती है’। आम की विशेष प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं जो बड़ी स्‍वादिष्‍ट हैं। गुफाएँ, रॉक पेंटिंग और केव्‍स पेंटिंग भी यहाँ देखने को मिलती हैं। महाशिवरात्रि पर्व यहाँ का विशेष त्‍यौहार है जब दूर-दूर से आकर श्रद्धालुजन चौरागढ़ में त्रिशूल चढ़ा कर मन्‍नत मांगते हैं। राजेन्‍द्र गिरि उद्यान एक अन्‍य दर्शनीय स्‍थल है जो पूर्व राष्‍ट्रपति स्‍वर्गीय डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद की प्रिय जगह रही है। डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद अनेक बार पचमढ़ी आए और उन्‍होंने यहाँ काफी वक्‍त बिताया। जटाशंकर के रास्‍ते में निम्‍बूभोज गुफाएँ भी पर्यटकों का ध्‍यान आकर्षित करती हैं। दिसम्‍बर-जनवरी के माह में शून्‍य डिग्री तापमान में यहाँ पानी में बर्फ तक जम जाती है वहीं बारिश के समय बादलों के झुण्‍ड का जमीन की ओर आना और मकानों, भवनों की खिड़कियों से टकराना, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी बायोस्फियर रिजर्व एक अलग तरह के आनंद का अनुभव कहा जा सकता है। हालांकि पचमढ़ी से जुड़ी कोई महल या राजा-रानी की कहानी आम तौर पर प्रचलित नहीं है तथापि मान्‍यता है कि यह एक गोंडवाना आदिवासी बहुल स्‍थल था। यहाँ गोंड, कोरकू, भारिया, पिगमी (मवासी) आदिवासी रहते थे। उनके वंशज आज भी यहाँ निवास करते हैं। उनके आराध्‍य लोहारी बाबा का पूजा स्‍थल आज भी विद्यमान है। राजा भभूति का किला और किले में वॉटर मेनेजमेंट के अनुपम उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। पचमढ़ी एक ऐसी जगह है जो इंसान को खूबसूरती के नायाब तोहफे देती हैं। बदले में वह आपसे यही अपेक्षा करती है कि पचमढ़ी को बस पचमढ़ी ही रहने दें।

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 MadhyaBharat  16 May 2017

बाघ बचाने रेलवे ट्रेक पर लगेंगी जाली

भोपाल के पास  बुदनी-मिडघाट इंडियन रेलवे का ऐसा सेक्शन है जो किसी घने वन्य प्राणी अभयारण्य से गुजरता है। करीब 20 किमी के इस सेक्शन में गत दो वर्षों में छह टाइगर, दर्जन भर चीतल या हिरण सहित कई वन्य प्राणी चलती टेÑनों से कट मरे हैं। इस समस्या से निजात के लिए अब रेलवे और वन विभाग मिल कर कार्ययोजना बना रहे हैं। ऐसे ठिकानों को चिन्हित कर वहां लोहे की मजबूत जाली लगाने के अलावा दूसरे उपाय करेगा। ज्ञात हो कि चार दिन पूर्व बुदनी-मिडघाट सेक्शन पर एक युवा टाइगर की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। इसी लाइन से रातापानी अभयारण्य लगा हुआ है। यहां बरखेड़ा से बुदनी-मिडघाट तक घना जंगल लगा हुआ है। इस सेक्शन पर खासतौर से टाइगर्स की ट्रेन कटिंग से वन विभाग और रेलवे ने चिंता व्यक्त कर इस दिशा में संयुक्त रूप से काम करना तय किया है। इससे इनकी मौतें रूकेंगी। वन्यप्राणियों की ट्रेन कटिंग की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में भोपाल रेल मंडल के डीआरएम आलोक कुमार ने वन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक खांडेकर से भेंट की। अब रेलवे और वन विभाग अपने स्तर पर उन ठिकानों को चिन्हित करेगे जहां से वन्य प्राणियों का मूवमेंट ज्यादा होता है। विशेष रूप से टाइगर टेरेटरी वाले इलाके पर ज्यादा फोकस किया जाएगा। रातापानी इलाके के टाइगर मूवमेंट का ऐसा इलाका जो पटरी पार जाता है वहां लोहे की जाली लगाई जाएगी। अंडर ब्रिज बनाने के विकल्प पर काम हो रहा है। लोको पायलटों को काशन आर्डर भी जारी किया जाएगा।  

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 MadhyaBharat  6 April 2017

नर्मदा नदी के तट

3062 हेक्टेयर में उच्च गुणवत्ता के फल-पौधों का रोपण  मध्यप्रदेश में किसानों की आमदनी वर्ष 2022 तक प्रति हेक्टेयर दोगुनी करने के मकसद से नर्मदा नदी के दोनों तटों पर एक-एक किलोमीटर की पट्टी तक निजी भूमि पर फल पौध-रोपण की योजना 16 जिलों में शुरू की गयी है। योजना के पहले साल वर्ष 2016-17 में 5000 हेक्टेयर में फलदार पौध-रोपण का कार्यक्रम तैयार किया गया है। प्रदेश के 16 जिलों में नर्मदा नदी के तट के दोनों ओर 24 हजार 341 किसान के खेतों में 22 हजार 300 हेक्टेयर भूमि का चयन उद्यानिकी फसलों के लिये किया गया है। जनवरी-2017 तक 5540 किसान ने वचन-पत्र भरकर 3062 हेक्टेयर में उच्च गुणवत्ता के फल पौधों का रोपण कर दिया है। इनमें आम, अमरूद, संतरा, मौसंबी, सीताफल, बेर, चीकू, अनार प्रमुख हैं। उद्यानिकी फसलों की इस योजना में सभी वर्ग के हितग्राही को फल पौध-रोपण होने से पहले तीन वर्ष तक ली जाने वाली परम्परागत खाद्यान्न फसलों के एवज में 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।  

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 MadhyaBharat  12 February 2017

नर्मदा किनारे शराब बंदी

मध्यप्रदेश में नर्मदा तट पर शराब की दुकानें बंद करने के सरकार के निर्णय का नर्मदा किनारे के गाँव के लोगों विशेष रूप से महिलाओं ने भरपूर स्वागत किया है। 'नमामि देवी नर्मदे''-सेवा यात्रा में शामिल हो रहे लोगों ने कहा कि यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का क्रांतिकारी कदम है। नर्मदा नदी के किनारे बसे 16 जिलों के गाँवों में सामाजिक बदलाव लाने में यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा। नर्मदा सेवा यात्रा 37 दिन होशंगाबाद के डोंगरवाड़ा, हासलपुर,  रूंढाल, ताल नगरी, खोकसर और खरखेड़ी पहुँची तो नशाबंदी के निर्णय को लेकर लोगों में उत्साह था। रूंढाल ग्राम पंचायत की सरपंच चंपाबाई कहती है कि कि नशा हर बुराई की जड़ है और इसे जड़ से ही मिटाना होगा क्योंकि नशे की आदत कभी भी लग जाती है और फिर छूटती नहीं। नर्मदा के किनारे शराब की दुकान  बंद होने से पूरे प्रदेश में  सामाजिक बदलाव लाने की शुरूआत होगी। तालनगरी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती माया बाई बताती हैं कि यहाँ से 10 किलोमीटर दूर चावलखेड़ा में शराब की दुकान है। गाँव के लोग वहाँ से शराब आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। अब मुख्यमंत्री के निर्णय से दुकान बंद हो जाएगी। गाँव वालों के लिए बहुत अच्छी बात है। होशंगाबाद जिले से चार किलोमीटर दूर डोंगरवाड़ा ग्राम पंचायत को नशामुक्त ग्राम बनाने के लिए महिलाओं ने संकल्प लिया है।  यहाँ की महिलाओं ने दो साल पहले नशा मुक्ति अभियान शुरू किया था।  उन्होंने  मिलकर दुर्गा नारी नशामुक्ति जागृति समिति बनाई थी।  यहाँ की सरपंच सरोज बाई  बताती हैं कि जो भी पुरुष नशे में दिखाई देता था उसे पहले समझाते थे। यदि नहीं मानता था तो उसकी पिटाई भी महिलाएँ करती थी। ऐसे व्यक्ति के घर वाले भी विरोध नहीं करते थे। अभी काफी फर्क आया है लेकिन चोरी छिपे अभी भी नशा कर कर रहे हैं। अच्छी बात यह हुई कि गाँव में शराब आना बंद हो गई है। इस समिति की सबसे सक्रिय सदस्य हैं 60 वर्षीय कृष्णाबाई धुर्वे। उन्होंने नशे की लत के कारण अपने पति और बच्चों को खो दिया है। वह कहती हैं कि इस समिति की सदस्य महिलाएँ हमेशा चौकस रहती हैं।  मुख्यमंत्री के शराबबंदी के निर्णय  पर खुशी जाहिर करते हुए वे कहती हैं कि शराब की दुकानें बंद करने से पुण्य का काम हो रहा है। यह जिंदगी बचाने का काम है। अब नई उम्र के बच्चों को नशे से बचाना पड़ेगा। इसी गाँव की एक अन्य महिला निर्मला केवट मुख्यमंत्री के निर्णय की तारीफ करते हुए कहती हैं कि पूरे प्रदेश में इसे लागू करना चाहिए। वे कहती हैं कि नशे से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। वे बताती है कि उनके पति मनोहर केवट नशे के आदी हो चुके थे लेकिन पिछले एक साल से नशे से दूर है। बेटे नितेश केवट पर भी बुरा असर पड़ रहा था। समिति के काम करने के तरीके के सम्बन्ध में वे बताती हैं कि गाँव में जब पता चलता है कि कोई नशे में है तो महिलाएँ मिलकर उसके पास जाती हैं और पूछती हैं कि उसे किसने दी। बेचने वालों की पिटाई तक हो जाती है। धीरे-धीरे शराब बेचने वाले इस गाँव में आने से डरने लगे हैं।  मुख्यमंत्री जी के नशामुक्ति के संकल्प से हौसला बढ़ा है। अब नशामुक्ति का अभियान और तेज करने की कोशिश करेंगे। इसी गाँव की अलका राजपूत अपने पति सुभाष राजपूत को नशे की लत से छुड़ाने के लिए समिति में आई थी। अब उनकी हालत में काफी सुधार है। उनकी बेटी अंचल राजपूत बारहवीं कक्षा में है और बेटा अंकित नौवीं कक्षा में पढ़ रहा है। अंचल राजपूत मुख्यमंत्री के शराबबंदी के निर्णय को लेकर उत्साहित हैं और कहती हैं कि आसानी से शराब मिलने पर नशा करने वालों की संख्या भी बढ़ रही थी। उन्हें विश्वास है कि शराब की दुकानें बंद होने से आस-पास के गाँव  पूरी तरह से नशा मुक्त हो जाएंगे।

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 MadhyaBharat  18 January 2017

narmda sharab

बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फाँसी की सजा मिले   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फाँसी की सजा होना चाहिये। इसके लिये आवश्यकता होने पर संविधान में भी संशोधन होना चाहिये। उन्होंने नशे को विनाश का कारण बताते हुए कहा कि समाज और सरकार द्वारा मिलकर सधन नशामुक्ति अभियान चलाया जायेगा। नर्मदा के तटों पर शराब की दुकानें बंद कर दी जायेगी। मुख्यमंत्री आज होशंगाबाद में नर्मदा सेवा यात्रा में जन-संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सेठानी घाट पर सभी धर्मों के धर्मगुरू नर्मदा सेवा यात्रा को आशीर्वाद देने उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि नर्मदा तट पर ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की गुफा का जीर्णोद्धार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी जीवन देने वाली नदी है। नर्मदा के जल से प्रदेश की 30 प्रतिशत जमीन सिंचित हो रही है। प्रदेश को चार बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिलने का श्रेय किसानों और नर्मदा को है। इसी नर्मदा से गंभीर, पार्वती और कालीसिंध नदियों को नया जीवन देने की योजना बनाई जा रही है। श्री चौहान ने कहा कि नदियों का सूखना गंभीर संकट की निशानी है। नर्मदा अमृत समान जल देती है लेकिन मनुष्य के लालची स्वभाव के कारण अत्यधिक दोहन हुआ है। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी को जीवन देने वाले पेडों को काट दिया गया, जिससे नर्मदा के जल की धार चिंताजनक रूप से पतली हो गई। उन्होंने कहा कि यह समय नर्मदा मैया से क्षमा माँगने और प्रायश्चित करने का है। नर्मदा के किनारों के शहरों का दूषित मल-जल नर्मदा में बहकर जा रहा है। इसे रोकने के लिये 1500 करोड़ रूपये की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना क्रियान्वित की जायेगी। रिसाइकल किये गये पानी को खेती में सिंचाई के लिये उपलब्ध करवाया जायेगा। नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त रखना प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा के किनारे रहने वाले किसानों को फलदार वृक्ष लगाने के लिये सुविधा दी जायेगी। इसके लिये फ्रूट रूट बनाये जायेंगे। श्री चौहान ने लोगों को नर्मदा के तटों को साफ रखने, जैविक खाद का उपयोग करने, पूजन सामग्री से होने वाले नर्मदा जल के प्रदूषण को रोकने, पार्थिव शरीर को नर्मदा जल में बहाने की प्रथा को रोकने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा देने का संकल्प दिलवाते हुए कहा कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेने पर उनकी पढाई का खर्चा सरकार उठायेगी। श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा तट पर नदी और पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा आंदोलन चल रहा है। उन्होंने नर्मदा भक्तों और आम लोगों से अपील की कि वे नर्मदा सेवा यात्रा से जुड़कर नर्मदा को सबसे स्वच्छ नदी बनाने में अपना योगदान दें। श्री चौहान ने लोगों को नर्मदा नदी को निर्मल बनाने रखने में योगदान देने का संकल्प दिलाया। श्री चौहान ने 150 परिक्रमावासियों का आभार व्यक्त किया जो नर्मदा सेवा यात्रा के शुभारंभ  से यात्रा में साथ हैं।  आध्यात्मिक संत श्री रावतपुरा सरकार ने नर्मदा सेवा यात्रा को कल्याणकारी अनुष्ठान बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद दिया कि वे मानवता की सेवा के कार्य करते रहें। विधान सभा अध्यक्ष  सीतासरण शर्मा ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से इतिहास अपने को दोहरा रहा है। सदियों पहले भागीरथ जी ने लोक कल्याण के लिये गंगा अवतरण की तपस्या की थी। आज आधुनिक समय में मुख्यमंत्री  चौहान जन-कल्याण के लिये नर्मदा मैया के शुद्धिकरण का संकल्प लेकर चल रहे हैं।  आर्च बिशप श्री लियो कार्नेलियो ने कहा कि वे भारतीय नागरिक होने के नाते सभी मान्य सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस अनूठे प्रयास से जन-मानस की सोच में परिवर्तन आयेगा। यह कानून से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रयासों से नर्मदा के तट शुद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण और पर्यावरण बचाने के प्रयास मानव-कल्याण के काम है। इनसे जीवन मिलता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भी पर्यावरण बचाने की शिक्षा देना होगी। उन्होंने बाइबल का उदहरण देते हुए कहा कि नदियों के स्वच्छ जल से स्वास्थ्य मिलता है।  प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक श्री प्रकाश झा ने कहा कि नर्मदा सदियों से जीवन दे रही है। उन्होंने कहा कि पवित्र नदी नर्मदा का पत्थर भी सभी जगह पूजा जाता है। यदि नर्मदा है तो जीवन है। नर्मदा से स्नेह करें, इसकी रक्षा करें और इसे स्वच्छ रखें। पदमश्री श्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा धर्म-सत्ता यदि नदी संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा से जुड़ जाए तो परिणाम जल्दी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का नर्मदा सेवा का संकल्प सफल होगा।  प्रसिद्ध ध्रुपद गायक श्री उमाकांत और श्री रमाकांत गुंदेचा बधुओं और उनके विदेशी शिष्यों ने नर्मदाष्टक का गायन किया। मध्यप्रदेश चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल ने कहा कि नर्मदा की जितनी सेवा होगी उसका फल और आनंद उतना ज्यादा मिलेगा।  मुख्यमंत्री एवं अतिथियों ने नर्मदा सेवा यात्रा एवं नर्मदा की महिमा पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने होशंगाबाद नगरपालिका को खुले में शौच से मुक्त होने पर बधाई दी। होशंगाबाद में नर्मदा संरक्षण के संकल्प को लेकर बनाई गई मानव श्रंखला को गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रेकार्ड में शामिल होने का प्रमाण-पत्र मुख्यमंत्री ने प्रभारी मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा को सौंपा। कार्यक्रम की शुरूआत कन्याओं के चरण पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह चौहान ने बेटियों की चरण वंदन की। नर्मदा मैया की महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।  इस अवसर पर हजारों की संख्या में होशंगाबाद एवं आस-पास के जिलों से आये श्रद्धालु उपस्थित थे। मध्यप्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद और नर्मदा मिशन के श्री भैयाजी सरकार ने भी नर्मदा यात्रा को आशीर्वाद दिया। ओलंपिक में भारत को मेडल दिलाने वाले पहलवान श्री सुशील कुमार, प्रसिद्ध सिने अभिनेता श्री गोविन्द नामदेव, साहित्यकार श्री रमेश चन्द्र शाह, मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष श्री महेश श्रीवास्तव,  करूणाधाम आश्रम के श्री सुदेश शांडिल्य भी नर्मदा सेवा यात्रा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने उपस्थित थे। वन मंत्री डॉ. गौरी शंकर शेजवार, होशंगाबाद के सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह, बैतूल सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे, मध्यप्रदेश खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, मध्यप्रदेश भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह, पूर्व मंत्री श्री सरताज सिंह, विधायक, जिला एवं जनपद पंचायतों के पदाधिकारी उपस्थित थे।  नर्मदा सेवा यात्रा का हुआ अभूतपूर्व स्वागत नर्मदा सेवा यात्रा के 36वें दिन होशंगाबाद पहुँचने पर जन-मानस की ओर से अभूतपूर्व स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री वरिष्ठजन पार्क से सेठानी घाट तक नर्मदा के पवित्र जल का कलश एवं नर्मदा सेवा यात्रा ध्वज धारण कर यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने पर्यावरण प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा लगाई गई पदर्शनी का शुभारंभ किया और पौध-रोपण किया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई नर्मदा स्वच्छता प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विशाल जनसमूह ने तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा में मुख्यमंत्री का अभिवादन किया। पूरा होशंगाबाद शहर 'हर हर नर्मदे' के उदघोष से गूँज उठा। समाज के सभी वर्गों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा कर नर्मदा सेवा यात्रियों का स्वागत किया।

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 MadhyaBharat  17 January 2017

नदी संरक्षण एवं पर्यावरण

नर्मदा सेवा यात्रा नदी संरक्षण एवं पर्यावरण बचाने के लिये किया जा रहा दुनिया का सबसे बड़ा एवं अद्भुत आंदोलन है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान नर्मदा सेवा यात्रा के 33 वें दिन नर्मदा सेवा यात्रा के सेवकों एवं जन-समुदाय को होशंगाबाद जिले के सांगाखेड़ा खुर्द में नर्मदा तट पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रदूषित होती नर्मदा को बचाने के लिये लोगों से आव्हान किया कि वे नर्मदा जल को शुद्ध रखने में अपना योगदान दें। नर्मदा में पूजा के फूल,माला,प्लास्टिक के दीप आदि का विर्सजन नहीं करें। इसके लिये वे नर्मदा तट पर पृथक से विसर्जन कुंड का निर्माण करवायेंगे। नर्मदा तट पर होने वाले दाह संस्कारों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिये तटों के किनारे मुक्ति धामों का निर्माण किया जायेगा। गणेश एवं दुर्गा जी की मूर्तियों के विर्सजन के लिये भी अलग से विर्सजन कुंडों का निर्माण करवाया जायेगा। माता और बहनों को नर्मदा स्नान के बाद कपड़े बदलने के लिये चेंजिंग रूम बनवाये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में बेटियों का मान-सम्मान सुनिश्चित हो। उनकी सुरक्षा के लिये दुराचारियों को जेल नहीं बल्कि सीधे फाँसी पर लटकाया जा सके, इसके लिये शीघ्र प्रावधान के लिये कार्रवाई की जायेगी। नर्मदा नदी का उद्गम अन्य नदियों की तरह नहीं वरन पेड़ों द्वारा अवशोषित वर्षा का जल बूंदों के रूप में झीरियों के द्वारा नर्मदा नदी में गिरता रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नर्मदा का जल-स्तर बढ़ाने का एकमात्र उपाय नर्मदा के किनारों पर वृक्षारोपण ही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय विभाग अपनी-अपनी भूमि पर वृक्ष लगायेंगे और किसान अपनी निजी भूमि पर स्वयं वृक्षारोपण करें। किसानों को नुकसान न हो इसके लिये किसान फलदार एवं छायादार वृक्ष लगायें और जब तक फल नहीं आते शासन 20 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर का भुगतान करेगा। पेड़ लगाने के लिये 40 प्रतिशत सबसिडी दी जायेगी। फलदार पेड़ों के बीच वह अन्य दूसरी फसल भी उगा सकता है। पेड़ लगाने से एक ओर जहाँ नर्मदा की धारा विशाल रूप लेगी वहीं किसान भी लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा नदी पर डेम बनाकर बिजली उत्पन्न की जा रही है। इससे किसान अपने खेतों में पर्याप्त मात्रा में सिंचाई कर भरपूर फसल उगा रहे हैं। कहते हैं यमुना में 7 बार स्नान से तो गंगा में एक बार स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है तो माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से मनुष्य अपने पापों से मुक्त हो जाता है। इस अवसर पर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष श्री सीताशरण शर्मा, वरिष्‍ठ मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, श्री सूर्यप्रकाश मीणा, सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह, अध्यक्ष खनिज विकास निगम श्री शिव चौबे, संत बाबा बालकदास, सुश्री प्रज्ञा भारती, विधायक श्री विजयपाल सिंह एवं श्रीमती साधना सिंह एवं डॉ. किरण शेजवार सहित बड़ी संख्या में जनसमूह उपस्थित था।  

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 MadhyaBharat  14 January 2017

narmda yatra

भटगाँव में जन-संवाद में वन मंत्री डॉ. शेजवार   वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने भटगाँव में 'नमामि देवी नर्मदे''-सेवा यात्रा के जन-संवाद कार्यक्रम में कहा कि माँ नर्मदा में कूड़ा कर्कट, मल और गंदगी नहीं डाली जाए। इसके पानी को हमेशा निर्मल, साफ और शुद्ध रखा जाए। उन्होंने कहा कि पानी की शुद्धता के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जायेंगे। अशुद्ध पानी को भी रिसाइकिलिंग कर किसानों को खेत में सिंचाई के लिये दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नर्मदा के सभी घाटों में महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम बनाए जायेंगे। डॉ. शेजवार ने कहा कि नर्मदा पुराण में कहा गया है कि सभी नदियाँ समाप्त हो जाएगी किन्तु नर्मदा अनंत काल तक रहेगी। वर्तमान में नर्मदा के पानी से प्रदेश के 5 स्थान में बिजली पैदा की जा रही है। इसके पहले यात्रा के ग्राम गलचा से भटगाँव पहुँचने पर यात्रा के ध्वज एवं कलश की पूजा-अर्चना कर जन-संवाद प्रारंभ किया गया। सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शासन ने नर्मदा नदी की चिंता की है। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर नर्मदा की चिंता करे और उसे प्रदूषण से मुक्त कराये। साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि यह यात्रा राजनैतिक नहीं है। यह अध्यात्मिक यात्रा है और इसमें सभी धर्मों एवं जाति के लोगों ने सहयोग किया है। इस अवसर पर विधायक श्री विजयपाल सिंह, साध्वी प्रज्ञा भारती, योगमाया तीर्थ सहित अनेक जन-प्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद थे। भानपुर और गलचा में हुआ यात्रा का ऐतिहासिक स्वागत  यात्रा का पिपरिया सहलबाड़ा से सोहागपुर के ग्राम माछा में प्रवेश हुआ। यात्रा प्रात: माछा पहुँची जहाँ ग्रामीणों ने उत्साह से स्वागत किया। यात्रा माछा से अजेरा एवं अजेरा से भानपुर पहुँची। दोपहर में यात्रा भानपुर पहुँची तो ग्रामीणों ने यात्रा का ऐतिहासिक स्वागत किया। माँ नर्मदा के जयकारों के बीच यात्रा के ध्वज एवं कलश की पूजा-अर्चना हुई। नौ कन्याओ ने कलश यात्रा निकाली। भानपुर में सांसद श्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नर्मदा की सेवा के लिए यह यात्रा निकाली गई है। नर्मदा का पानी शुद्ध रहे, मिट्टी का कटाव न हो। माँ नर्मदा के किनारे हरे-भरे रहे। साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि जो लोग माँ नर्मदा के साथ हैं, वे अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं। विधायक श्री विजयपाल सिंह ने सभी को नर्मदा को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त रखने की शपथ दिलाई। मध्यप्रदेश खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे भी मौजूद थे। गलचा में दिखा उत्साह पैदल यात्री भानपुर से जब गलचा पहुँचे तब ग्रामीण जन ने उत्साह से सबका स्वागत किया। कन्याओं ने सर पर कलश रखकर यात्रा का स्वागत किया। यहाँ जन-प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने कन्या-पूजन भी किया।  

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 MadhyaBharat  13 January 2017

hoshangabad

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष से नर्मदा तट पर कोई शराब की दुकान नहीं खुलेगी। प्रदेश में नशा मुक्ति का अभियान चलाया जायेगा। नर्मदा तट के सभी शहरों में ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान होशंगाबाद जिले के ग्राम सांडिया में नर्मदा सेवा यात्रा को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, लोक निर्माण मंत्री श्री रामपाल सिंह और जिले के प्रभारी एवं उद्यानिकी राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा विशेष रूप से उपस्थित थे। बलात्कारी को फाँसी की सजा देने का कानून बनाया जाये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि देश विचार करें कि बलात्कारियों को फाँसी की सजा दी जाये। इसके लिये सभी राजनैतिक दल, संत और समाजसेवी पहल करें। इस संबंध में संविधान संशोधन कर कानून बनाया जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लोगों को नर्मदा के संरक्षण का संकल्प दिलाया। उन्होंने नर्मदा तट पर सामूहिक आरती में भाग लिया। इसके पहले उन्होंने नर्मदा-पूजन और कन्या-पूजन किया। साथ ही नर्मदा तट पर वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि 'नमामि देवी नर्मदे'- सेवा यात्रा नदी संरक्षण और पर्यावरण बचाने का सबसे बड़ा अभियान है। इसमें समाज का हर वर्ग भागीदारी करे और इसे जनआंदोलन बनायें। नदी और जल के बिना जीवन संभव नहीं है। नर्मदा नदी ने मध्यप्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। नर्मदा के जल से सिंचाई और बिजली मिली है। नर्मदा के दोनों तट के जंगलों से पेड़ कटने से नुकसान हुआ है। यही स्थिति रही तो आने वाले 50 वर्ष में पानी देखने को नहीं मिलेगा। इस अभियान में नर्मदा के दोनों तट पर पेड़ लगाने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नर्मदा के दोनो तटों पर पेड़ लगायें और नर्मदा तट के गाँवों के हर घर में शौचालय बनवायें। पूजन के नाम पर नर्मदा नदी में फूल, नारियल,तेल आदि सामग्री नहीं डालें। नर्मदा नदी में मूर्तियाँ विसर्जित नहीं करें और नर्मदा किनारे के ग्रामों को नशा मुक्त बनायें। उन्होंने कहा कि बेटे –बेटियों में भेदभाव नहीं करें। हर बच्चे को स्कूल भेजें। नर्मदा नदी के किनारों पर अवैध उत्खनन रोकने के लिये सख्त कार्रवाई की जायेगी। कार्यक्रम को सांसद श्री उदयप्रताप सिंह और साध्वी प्रज्ञा भारती ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री शिव चौबे, विधायक श्री ठाकुर दास नागवंशी, जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप पांडे, साध्वी योगमाया तीर्थ, महंत श्री बालकदास सहित संतगण, जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  12 January 2017

मानव श्रंखला का विश्व रिकार्ड

25 हजार लोगों ने बनाई 125 किलोमीटर की श्रंखला  नर्मदा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और पर्यावरण के संरक्षण के लिये चल रहे देश के सबसे बड़े अभियान 'नमामि देवी नर्मदे'-सेवा यात्रा की कड़ी में आज होशंगाबाद जिले में नागरिकों के समर्थन से मानव श्रंखला का विश्व रिकार्ड बनाया गया। कुल 125 किलोमीटर तक नर्मदा नदी के घाट और 78 स्थान पर 25 हजार से अधिक लोगों ने श्रंखला बनाकर यात्रा का समर्थन किया। अमरकंटक से 11 दिसंबर से शुरू हुई यात्रा 10 जनवरी को होशंगाबाद जिले में ग्राम उमरधा से प्रवेश करेगी। यात्रा के पूर्व तैयारियों और जन-समर्थन के लिये आज होशंगाबाद में 78 स्थान पर मानव श्रंखला बनाई गई। यह श्रंखला सेठानी घाट सहित नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर भी बनाई गई। श्रंखला में समाजसेवियों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों, स्वयंसेवी संगठनों और जन-प्रतिनिधियों ने उत्साह से सहभागिता की। यह श्रंखला नदी संरक्षण के लिये बनाई गई अब तक की सबसे बड़ी मानव श्रंखला है, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में विश्व कीर्तिमान के रूप में शामिल किया गया है। श्रंखला में शामिल लोगों ने नर्मदा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने, तटों पर पौध-रोपण करने के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का संकल्प लिया। इस मौके पर सभी ने इस संबंध में हस्ताक्षर कर अपना संकल्प दोहराया। सेठानी घाट पर सांसद श्री उदय प्रताप सिंह, विधायक श्री विजयपाल सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष श्री अखिलेश खण्डेलवाल, कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया की उपस्थिति में मानव श्रंखला बनाई गई। विवेकानंद घाट पर मध्यप्रदेश खनिज विकास निगम के अध्यक्ष और नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के उपाध्यक्ष श्री शिव चौबे की उपस्थिति में मानव श्रंखला बनाई गई।  

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 MadhyaBharat  10 January 2017

basmati rice

  मध्यप्रदेश के बासमती चावल को बासमती का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगा दी है। मद्रास हाईकोर्ट और पंजीयन प्राधिकरण में पहले से केस चल रहा है। सरकार का दावा है कि प्रदेश में बासमती किस्म का चावल लंबे समय से होता है, लेकिन केंद्र सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पत्र लिखकर प्रदेश को बासमती चावल के भौगोलिक क्षेत्र में शामिल करने से इंकार कर दिया था। केंद्र की संस्था एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) ने जीआई (ज्योग्राफिकल इंडीकेशन रजिस्ट्री) चेन्न्ई में मध्यप्रदेश को बासमती उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल करने पर आपत्ति की थी। एपीडा का कहना है कि गंगा-यमुना बेसिन में ही बासमती होती है, जबकि प्रदेश सरकार का दावा है कि प्रदेश में अंग्रेजों के जमाने में भी बासमती होती थी। इसके पक्ष में कई तर्क भी रखे गए हैं और कानूनी लड़ाई सरकार लड़ रही है। इसी कड़ी में अब दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की धान को बासमती का दर्जा दिलाने के लिए हर फोरम पर पूरी दमदारी से पक्ष रखा जाए। प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश राजौरा का कहना है कि हर स्तर पर विभाग निगरानी कर रहा है। दिसंबर में कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी।

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 MadhyaBharat  1 December 2016

 शनिदेव

शनि जिनके बारे में लोग ज्यादा नहीं जानते। जानते हैं तो सिर्फ इतना कि वे बुरा करते हैं। राशि में आ जाएं तो साढ़े सात साल तक कुछ ठीक नहीं होता। लेकिन 13 साल के कार्तिकेय को शनिदेव के जीवनभर की वो सब बातें जानना, पढ़ना और समझना पड़ रहा है जो सब नहीं जानते। केंद्रीय विद्यालय की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस नन्हे कलाकार के लिए यह चैलेंज और भी बड़ा था। इंडियाज बेस्ट ड्रामेबाज में फर्स्ट रनर अप रहने के बाद कार्तिकेय पढ़ाई में बिजी थे। तभी उन्हें कलर्स चैनल पर आने वाले सीरियल कर्म फल दाता शनि में मुख्य रोल मिला। दिवाली पर अपने घर इटारसी आए कार्तिकेय  मुंबई जाते वक्त कुछ देर के लिए भोपाल में रुके। कार्तिकेय शनि देव के चैलेंजिंग रोल और अपनी परफार्मेंस पर संतुस्ट नजर आये।  कार्तिकेय के लिए शनिदेव का कैरेक्टर प्ले करने का अॉफर सरप्राइज था। मुंबई के करीब 300 से ज्यादा बाल कलाकारों के ऑडिशन के बावजूद वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें नेचुरल एक्टर की तलाश थी। तब उन्हें किसी ने कार्तिकेय के बारे में बताया। सिलेक्शन के बाद सबसे बड़ी समस्या थी स्कूल से छुट्‌टी की।  कार्तिकेय गुजरात में अगस्त से शूट में बिजी है। रोज 12 से 13 घंटे का शूटिंग शेड्यूल है। उन्होंने बताया कि दोपहर की शिफ्ट से काम शुरू होता है तो रात 2 बजे तक फ्री होता हूं। लेकिन फिर भी कोशिश होती है कि जल्दी जागकर एक्सरसाइज करे, ब्रेकफास्ट के दौरान ही वह मम्मी के साथ स्क्रिप्ट पर काम शुरू कर देता है। 

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 MadhyaBharat  8 November 2016

13 बाघों की मौत

मध्य प्रदेश के दो राष्ट्रीय उद्यानों में पिछले एक साल में विषाक्तता, बिजली का झटका लगने और दूसरे कई कारणों से कम से कम 13 बाघ मर चुके हैं। राज्य वन विभाग ने एक RTI का जवाब देते हुए बताया कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान में नौ बाघों की मौत हो गयी जबकि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में चार बाघ मारे गए। पेंच उद्यान को मोगली के घर के तौर पर जाना जाता है जो अंग्रेज लेखक रुडयार्ड किपलिंग के फिक्शन उपन्यास 'जंगल बुक' का मुख्य किरदार है। राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों के शिकार के मामलों की जांच की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करने वाले वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना का अधिकार आवेदन देकर पिछले एक साल में मारे गए बाघों के ब्यौरे मांगे थे। वन विभाग ने विषाक्तता, बिजली का झटका लगना, बीमारी, दूसरे बाघों से लड़ाई और कुएं में डूबने को बाघों के मारे जाने की वजह बताया है। मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य हैं जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, बोरी-सतपुडा , संजय-दुबरी और पेंच शामिल हैं। इन अभयारण्यों में करीब 257 बाघ हैं। 2010 में देश में बाघों की आबादी 1,706 थी और 2014 में यह बढ़कर 2,226 हो गयी। बाघों की आबादी के लिहाज से कर्नाटक और उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर आता है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में करीब 100 बाघों की मौत हो चुकी है। जिनमें से 36 बाघों को शिकार करने के लिए मारा गया है।

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 MadhyaBharat  17 October 2016

अंत्योदय मेले अब से गरीब मेले

माखनलाल चतुर्वेदी का घर बनेगा  भव्य स्मारक  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बाबई में प्रख्यात कवि पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के घर को भव्य स्मारक बनाया जायेगा। इस पर होने वाला खर्च राज्य सरकार उठायेगी। उन्होंने कहा कि बाबई में आईटीआई खोली जायेगी। मुख्यमंत्री  चौहान  होशंगाबाद जिले के बाबई में अंत्योदय मेले को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 33 करोड़ 7 लाख रुपये के निर्माण कार्य का लोकार्पण और 12 करोड़ 76 लाख से अधिक के 19 कार्य का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, लोक निर्माण मंत्री  रामपाल सिंह, खाद्य प्र-संस्करण राज्य मंत्री  सूर्यप्रकाश मीणा, पूर्व मंत्री  सरताज सिंह, सांसद  राव उदय प्रताप सिंह और विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी भी मौजूद थे। अंत्योदय मेले अब से गरीब मेले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अंत्योदय मेले का नाम बदलकर अब इसे गरीब मेले का नाम दिया गया है। राज्य सरकार गरीबों की भलाई के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो गरीब एक ही स्थान पर वर्षों से रह रहा है, उन्हें पट्टा देकर जमीन का मालिक बनाया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि वर्ष 2018 तक प्रदेश में 2 लाख मकान बनाकर गरीबों को दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर एक-एक किलोमीटर पर फलदार पौधे लगाये जायेंगे। इसके लिये किसानों की सहमति ली जायेगी। उन्होंने कहा कि पवित्र नदी नर्मदा में अब सीवेज का पानी नहीं जाने दिया जायेगा। इसके लिये 1500 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों के हित की चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले 5 वर्ष में प्रदेश में किसानों की आमदनी दोगुनी की जायेगी। उन्होंने बाबई फार्म पर उद्योग लगाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बाबई में 15 करोड़ की लागत से गरीबों के लिये 300 आवास बनाने, प्राचीन बावड़ियों में जल-संरक्षण के लिये 10 लाख रुपये देने, नगर पंचायत के नवीन कार्यालय भवन, बस-स्टेण्ड निर्माण के लिये एक-एक करोड़ रुपये दिये जाने की घोषणा की। उन्होंने बागरा से नसीराबाद रोड के पुनर्निर्माण के लिये 18 करोड़ की राशि दिये जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 71 हजार 517 किसान को करीब 218 करोड़ की फसल क्षति की राहत राशि दी जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि 18 हजार प्रतिभाशाली बच्चों को लेपटॉप, 23 हजार बच्चियों को लाड़ली लक्ष्मी का लाभ देते हुए 7,600 करोड़ रुपये बैंक में जमा करवाये गये हैं। मुख्यमंत्री ने अंत्योदय मेले में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के 11 हजार 324 हितग्राही को सामग्री एवं राशि वितरित की।

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 MadhyaBharat  9 September 2016

अंत्योदय मेले अब से गरीब मेले

माखनलाल चतुर्वेदी का घर बनेगा  भव्य स्मारक  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बाबई में प्रख्यात कवि पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के घर को भव्य स्मारक बनाया जायेगा। इस पर होने वाला खर्च राज्य सरकार उठायेगी। उन्होंने कहा कि बाबई में आईटीआई खोली जायेगी। मुख्यमंत्री  चौहान  होशंगाबाद जिले के बाबई में अंत्योदय मेले को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 33 करोड़ 7 लाख रुपये के निर्माण कार्य का लोकार्पण और 12 करोड़ 76 लाख से अधिक के 19 कार्य का भूमि-पूजन किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, लोक निर्माण मंत्री  रामपाल सिंह, खाद्य प्र-संस्करण राज्य मंत्री  सूर्यप्रकाश मीणा, पूर्व मंत्री  सरताज सिंह, सांसद  राव उदय प्रताप सिंह और विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी भी मौजूद थे। अंत्योदय मेले अब से गरीब मेले मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अंत्योदय मेले का नाम बदलकर अब इसे गरीब मेले का नाम दिया गया है। राज्य सरकार गरीबों की भलाई के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो गरीब एक ही स्थान पर वर्षों से रह रहा है, उन्हें पट्टा देकर जमीन का मालिक बनाया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि वर्ष 2018 तक प्रदेश में 2 लाख मकान बनाकर गरीबों को दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर एक-एक किलोमीटर पर फलदार पौधे लगाये जायेंगे। इसके लिये किसानों की सहमति ली जायेगी। उन्होंने कहा कि पवित्र नदी नर्मदा में अब सीवेज का पानी नहीं जाने दिया जायेगा। इसके लिये 1500 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों के हित की चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले 5 वर्ष में प्रदेश में किसानों की आमदनी दोगुनी की जायेगी। उन्होंने बाबई फार्म पर उद्योग लगाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बाबई में 15 करोड़ की लागत से गरीबों के लिये 300 आवास बनाने, प्राचीन बावड़ियों में जल-संरक्षण के लिये 10 लाख रुपये देने, नगर पंचायत के नवीन कार्यालय भवन, बस-स्टेण्ड निर्माण के लिये एक-एक करोड़ रुपये दिये जाने की घोषणा की। उन्होंने बागरा से नसीराबाद रोड के पुनर्निर्माण के लिये 18 करोड़ की राशि दिये जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 71 हजार 517 किसान को करीब 218 करोड़ की फसल क्षति की राहत राशि दी जायेगी। श्री चौहान ने कहा कि 18 हजार प्रतिभाशाली बच्चों को लेपटॉप, 23 हजार बच्चियों को लाड़ली लक्ष्मी का लाभ देते हुए 7,600 करोड़ रुपये बैंक में जमा करवाये गये हैं। मुख्यमंत्री ने अंत्योदय मेले में राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के 11 हजार 324 हितग्राही को सामग्री एवं राशि वितरित की।

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 MadhyaBharat  9 September 2016

tawa dame in mp

        मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1 जून से 9 जुलाई तक हुई वर्षा के आधार पर 26 जिलों में सामान्य से अधिक, 17 जिलों में सामान्य तथा 7 जिलों में कम तथा 1 जिले में अल्प वर्षा दर्ज की गई है।   सामान्य से अधिक वर्ष वाले जिले जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सीधी, सतना, उमरिया, मुरैना, शिवपुरी, अशोकनगर, दतिया, भोपाल, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, बैतूल, देवास और रायसेन है।   आज दोपहर की स्थिति में नर्मदा नदी और उसके कछार में स्थित विभिन्न बाँधों का जल-स्तर निम्नानुसार है:   क्र.                 बाँध                     जल-स्तर (मीटर में)                       खतरे का जल- स्तर (मीटर में) 1.                 बरगी                    414.30                                       422.76 2.                 तवा                      353.65                                        355.40 3.                 बारना                   346.90                                        348.55 4.                होशंगाबाद (नदी)    290.80                                       293.83 5.                हंडिया (नदी)          270.70                                       272.00 6.                 इंदिरा सागर          248.70                                       262.13 7.                ओंकारेश्वर             190.45                                       196.60 8.                मोरटक्का (नदी)                                                       163.98 9.                मण्डलेश्वर (नदी)    140.56                                       157.29 10.              खलघाट (नदी)      129.50                                       135.06 11.              बड़वानी (नदी)      114.95                                       123.28 12.             जोबट                   254.20                                       260.17 13.             मान                     282.20                                       297.65 14.            अपर बेदा             308.50                                       317.00 15.            लोअर गोई            285.75                                       300.00 16              सरदार सरोवर       114.87                                       138.68 17.            गुरूड़ेश्वर              13.81                                          31.09   सामान्य वर्षा वाले जिलों में बालाघाट, डिण्डोरी, रीवा, शहडोल, इन्दौर, धार, अलीराजपुर, खण्डवा, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, भिण्ड, ग्वालियर, गुना और हरदा शामिल है।   कम वर्षा वाले जिले सिंगरौली, अनूपपुर, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, आगर और नीमच है।   अल्प वर्षा वाला एकमात्र जिला बुरहानपुर है।   सतना जिला कलेक्टर से प्राप्त जानकारी अनुसार 5 जुलाई से निरंतर हो रही वर्षा से जिले की प्रमुख नदियाँ - टमस, सोन, मंदाकिनी नदी का जल-स्तर बढ़ने से लगभग 300 लोगों को अस्थाई शिविर में ठहराया जाकर उन्हें राहत पहुँचाई गई है। जिले की रघुराज नगर तहसील के 400 व्यक्तियों को सेना द्वारा राहत शिविर में ठहरने की व्यवस्था की गई है। जिले में सतना-रीवा सड़क मार्ग माधवगढ़ रपटा के ऊपर पानी आ जाने से अवरूद्ध हो गया है। इस मार्ग पर राजस्व, पुलिस, होमगार्ड तथा जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव का कार्य किया जा रहा है।   बैतूल जिला कलेक्टर से मिली जानकारी के अनुसार सारणी के पास राजडो घाट टापू पर 8 से 10 व्यक्ति फँसे हैं। सतपुड़ा डेम से पानी छोड़ने पर जल-स्तर बढ़ रहा है। राहत और बचाव का कार्य जारी है।   रीवा जिला कलेक्टर से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम सिरमोर भड़रा, तहसील जवा के बाढ़ में फँसे 5 व्यक्ति में से 3 व्यक्ति को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष 2 व्यक्ति के लिए बचाव की कार्यवाही जारी है।   केन्द्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार होशंगाबाद में नर्मदा नदी जल-स्तर का आज शाम की स्थिति में 292.850 मीटर (960.8 फीट) अनुमानित है। यह अनुमान आगामी समय में वर्षा जारी रहने की स्थिति और तवा बाँध से पानी की निकासी की मात्रा स्थिर रहने की स्थिति में आकलित है। आज शाम की स्थिति के बाद नर्मदा नदी के जल-स्तर में आगामी अवधि में बढ़ोतरी की संभावना है।

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 MadhyaBharat  10 July 2016

शिवराज ने कहा विकास का सूर्य अस्त हुआ

सड़क दुर्घटना में गोपीनाथ मुंडे का निधन केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे का दिल्ली में एक रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया । मुंडे आज सुबह अपने निवास से एयरपोर्ट जा रहे थे तभी उनकी कार से एक कार टकरा गई ,जिसके मुंडे को चोट लगी । घायल मुंडे को एम्स ले जाया जहाँ कड़ी मशक्कत के बाद भो डॉक्टर्स उन्हें बचा नहीं सके । बीजेपी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वे 64 वर्ष के थे।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि श्री मुंडे का असमय निधन देश और पार्टी के लिये गहरा आघात है। देश ने विकास के लिये समर्पित एक प्रतिभा संपन्न, कर्मठ, जुझारू और लोक हित के मुद्दों के प्रति संवेदनशील नेता खो दिया है।श्री चौहान ने कहा कि श्री मुंडे महाराष्ट्र की राजनीति के शीर्ष पुरुष थे। श्री चौहान ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजन को यह गहन दु:ख सहने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। मध्यप्रदेश राज्य मंत्री-परिषद ने आज केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपीनाथ मुंडे के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त किया। मंत्री-परिषद ने मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी।मुख्यमंत्री ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि श्री मुंडे के निधन से विकास का सूरज अस्त हो गया। उनका निधन देश के लिये अपूरणीय क्षति है।श्री चौहान ने कहा कि मानवीय गुणों से परिपूर्ण श्री मुंडे जमीन से जुड़े नेता थे। वे असमय हमें छोड़कर चले गये। मन पीड़ा से भरा है। पता नहीं विधि ने ऐसा क्या विधान रचा कि ऐसी अनहोनी हो गयी। उन्होंने कहा कि श्री मुंडे की कमी पूरी नहीं हो सकती। ऐसा वज्रपात किसी पर नहीं हो। उन्होंने श्री मुंडे से अपनी मित्रता का स्मरण करते हुए कहा कि उन्हें सबकी चिंता रहती थी। महाराष्ट्र की जनता उन्हें दिलोजान से चाहती थी।मंत्रि-परिषद ने दिवंगत श्री मुंडे के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से उनके परिजनों, मित्रों को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

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निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन में अब मिलेंगे 50 हजार रुपये

होशंगाबाद की तरह अब हर जिले में होंगे निःशक्तजन के सामूहिक विवाह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज होशंगाबाद में निःशक्तजन सामूहिक विवाह सम्मेलन में उपस्थित होकर 51 निःशक्त नवदंपत्ति को अपना आशीर्वाद दिया। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना में सहायता राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई सहायता राशि आज आयोजित विवाह सम्मेलन में लाभान्वित दंपत्तियों को भी मिलेगी।मुख्यमंत्री चौहान ने जिला प्रशासन द्वारा निःशक्तजन सामूहिक विवाह सम्मेलन के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन प्रदेश के सभी जिलों में किये जायेंगे।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आज जिन निःशक्तजन के विवाह इस सम्मेलन में हो रहे हैं उनके रोजगार के लिए भी हर-संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि निःशक्त दंपत्तियों को स्व-रोजगार योजनाओं के साथ-साथ शासकीय नौकरियों में 6 प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी दिलाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा अपना अस्पताल के संचालक डॉ. राजेश शर्मा ने आज के सम्मेलन में विवाहित 5 निःशक्तजन को रोजगार देने की घोषणा की है। अन्य प्रतिष्ठान के संचालकों को भी इन नि:शक्तजन को रोजगार देने की पहल करना चाहिए।लोक निर्माण मंत्री सरताज सिंह ने कहा कि यह अनूठा निःशक्तजन विवाह समारोह देश का पहला हो सकता है। मध्यप्रदेश को इस बात पर गर्व है मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व की सरकार गरीबों एवं कन्याओं की मदद के लिए तत्पर है।कार्यक्रम के अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में आज निःशक्तजन का भव्य विवाह सम्मेलन संपन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं को देश के अनेक राज्यों ने अपनाया है। सांसद श्री उदय प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा बेटियों के संरक्षण के लिए उठाये गये इस अभिनव आयोजन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि कन्यादान योजना की प्रसिद्धि प्रदेश में ही नहीं है बल्कि यह योजना पूरे देश में लोकप्रिय है।कमिश्नर वीरेन्द्र कुमार बाथम ने कहा कि संभाग स्तरीय निःशक्तजन विवाह सम्मेलन प्रदेश का ही नहीं बल्कि देश का प्रथम सम्मेलन है। इस सम्मेलन में 51 निःशक्त जोड़ों का विवाह संपन्न करवाया गया है। सभी निःशक्त होशंगाबाद, बैतूल और हरदा जिले के हैं। इस विवाह समारोह में निकाह भी हो रहे हैं। एक विवाह अंतर्जातीय हो रहा है। निःशक्तजन विवाह सम्मेलन में समाजसेवियों तथा अटल बाल पालकों का भी सहयोग मिला है।अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना में दंपत्ति को मिला 2 लाख का चेकमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निःशक्तजन विवाह सम्मेलन में शामिल एकमात्र अंतर्जातीय जोड़े को 2 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया। उन्होंने नव-दम्पत्ति को सफल दांपत्य जीवन की शुभकामनाएँ दीं।मुख्यमंत्री चौहान ने किया कन्यादानसम्मेलन में पंडित सोमेश परसाई ने 50 कन्याओं का हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न करवाया। मुख्यमंत्री चौहान ने सभी 50 कन्याओं के मामा के रूप में कन्यादान की रस्म पूरी की।नव-दंपत्तियों को जो मदद मिली उसमें मुख्यमंत्री निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना में निःशक्त वर-वधू को अलग-अलग 50-50 हजार रुपये, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में वर-वधू के नाम 10-10 हजार रुपये की फिक्स डिपाजिट रसीद, अंतर्जातीय विवाह वाले जोड़े को 2 लाख रुपये का चेक तथा निःशक्तता प्रमाण-पत्र और विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।निसार और हिना बने हमसफरनिःशक्तजन मुस्लिम जोड़े का निकाह भी मुख्यमंत्री निकाह योजना में संपन्न हुआ। शहर काजी अशफाक अली ने मुस्लिम रीति-रिवाज से वर निसार खान एवं वधू हिना खान का निकाह करवाया।मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समारोह में निःशक्तजनों के विवाह समारोह के लिए तैयार स्मारिका 'संजोग' का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने 'युवा उद्यमी' पत्रिका का भी विमोचन किया।

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