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मंदसौर News


 मध्यप्रदेश बदनामी

मुझे लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। कुछ अच्छा घटित नहीं हो रहा है। कृषि बेहतर उत्पादन के बाद भी बेहाल, अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है। नौकरशाही की नाफरमानियां और भ्रष्टाचार तो यहां पहले से ही खूंटा गाड़ के बैठे हुए हैैं। बदनामी के व्यापमं और गड़बडियों के सिहंस्थ की स्याही सूख नहीं पा रही है। ऐसे में नर्मदा माई समेत नदियों में रेत के डाकों ने प्रायश्चित स्वरूप मुख्यमंत्री से नर्मदा परिक्रमा करा डाली। मगर बदनामी है कि पीछा ही नहीं छोड़ रही है। प्रदेश के पराक्रमी किसानों ने प्याज की बंपर पैदावार की तो उसकी खरीदी में शिवराज सरकार के भी आंसू निकल पड़े। खुश हैं तो अफसर और व्यापारी। प्याज खरीदी में घाटालों की आशंकाओं का घटाटोप है। भ्रष्टाचार के बादल छाये हुए हैैं। मैदान में कप्तान के स्वरूप में शिवराज सिंह चौहान तो हैैं मगर मंत्रियों की गैरहाजिरी सियासी हालात को संजीदा बना रही है। ब्यूरोकेसी पर निर्भर सरकार उसी के सेबोटेज की शिकार है और अपनी बिगड़ती छवि से सदमें  में है। एक जून से शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद एक महीना बीत चुका है, लेकिन खेती-किसानी को लेकर हर दिन कोई नई समस्या लेकर आ रही है। औसतन हर दो दिन में एक किसान कर्ज और उससे पैदा परेशानी के कारण आत्महत्या कर रहा है। कृषि मंत्री, कृषि अधिकारी इन मुसीबतों भरे दिन दिनों में गायब है। सीएम अकेले पड़ गए लगते हैं । उनकी कृषि हिमायती छवि पर बट्टा लग गया है। घबराहट में उन्होंने टॉप करने वाले विद्यार्थियों से कह दिया कि वे खेती ना करें क्योंकि वह किसानों को मरते और खेती को बर्बाद होते नहीं देख सकते। ग्यारह बरस से कृषि को लाभ का धंधा बनाने का वादा करने वाले शिवराज सिंह की खेती ना करें कि सलाह अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। वे शायद जीवन में पहली बार इस कदर असहाय महसूस कर रहे हैं। जनता से संवाद कर समर्थन पाने में जितने वे कुशल हैं शायद प्रशासनिक पकड़ में उतने ही लचर, कमजोर। उनके खाटी शुभचिंतक भी थोड़ी अगर-मगर के साथ इसे स्वीकार करते हैं। भाजपा नेतृत्व इससे परेशान हैं। मगर इसका हल खुद मुख्यमंत्री को ही लगातार ईमानदार, तर्कसंगत, उच्च कोटि के कठोर निर्णय से खोजना होगा। अभी तो पूरा प्रदेश इससे जूझ रहा है। विरोधियों के लिए यह बड़ा हथियार है। राज्य की हालत यह है कि मुख्यमंत्री जब प्याज 8 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी का एलान करते हैं तो उसी क्षण कृषि, सहकारिता और नागरिक आपूर्ति विभाग को एक साथ सक्रिय हो जाना चाहिए था। खरीदी के साथ-साथ प्याज के बारिश से सुरक्षित भंडारण के लिए। उदाहरण के लिये जब आंख में धूल कंकड़ जाता है तो पलक झपकने और हाथ बचाव के लिए किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करते। उसी तरह प्याज के लिए गोदाम, वेयरहाउस और मंडी में शेड के नीचे- ऊपर तिरपाल, पालिथिन का प्रबंध युद्धस्तर पर करना चाहिए था। यदि अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है तो यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ सेबाटेज भी है। नौकरशाही की नाफरमानियों के बाद यह भीतरघात गंभीर है। यह सब वह अफसरशाही कर रही है जो कृषि उत्पाद का अनुमान लगाने में बुरी तरह फ्लॉप रही। इस वजह से सरकार को पता ही नहीं है कि कितनी प्याज खरीदनी है। स्थिति यह है कि गत वर्ष की तुलना में खरीदी के लिए दोगुनी राशि याने 200 करोड़ रुपए तय हुए थे। अब कहा जा रहा है कि 800 करोड़ रुपए की खरीदी होगी। यह हैरतअंगेज है। यहीं से बड़े घोटाले के साफ  संकेत मिलते हैं। कागज़ पर खरीदी और भुगतान हो जाएगा, जितनी खरीदी हुई है उससे अधिक प्याज सडऩा बता दिया जाएगा। यह सडऩा ही घोटाले के सबूतों को नष्ट करने के प्रबंध के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री-अधिकारी कोई मैदान में नहीं है। किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होना सरकार की प्रशासनिक कमजोरी का भयावह पक्ष माना जा रहा है। इसी तरह प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं। अफसरों की रुचि नहीं है। मंत्री अस्पतालों में सुधार के लिए सक्रिय नहीं हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में 24 घंटे में 17 लोगों की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो जाती है। हिला देने वाली इस घटना पर मंत्री जी का पता नहीं है। स्कूल खुल गए हैं, 60 हजार मास्टरों की कमी है। पच्चीस हजार प्रतिनियक्ति पर होने से और 35 हजार पहले से ही कम है। नई भर्ती के लिए वित्त विभाग ने धन की तंगी के कारण रोक लगा दी है, लेकिन जून में शिक्षा मंत्री गप्प हांकते हुए करीब 35 हजार  से अधिक शिक्षकों की भर्ती कराने की बात करते हैं, जबकि जून में घोषणा नहीं नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। विभाग में अफसर लापरवाह हैं और ऐसे में मंत्री की नींद जून में शिक्षण सत्र के दौरान खुल रही है।  पढ़ाई के बाद नगरीय प्रशासन को ही देखें। बारिश के समय शहर के नाले-नालियां साफ नहीं हुए। मगर मंत्री स्तर पर न तो कठोरता से वर्षा पूर्व तैयारियां कराईं और ना अब सजगता दिख रही है। हालात चिंताजनक हैं। चल रहे हैं गप्पों के तीर... राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता और प्रतिपक्ष गप्पों के तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के ऐलान पर सरकार व भाजपा जनता के साथ मिलकर दो दौर में प्रदेश में 12 करोड़ से अधिक पेड़ पौधे लगाने जा रही है। करीब 7 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में पहले दौर में दो जुलाई को छह करोड़ पौधे 24 जिलों में लगाने का दावा किया गया। एक अनुमान के अनुसार नर्मदा घाटी के दो दर्जन जिलों में साढ़े तीन करोड़ की आबादी है। इनमें बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं भी हैं। सभी आ जाएं तो भी एक-एक, दो-दो पेड़ लगाने पड़ेंगे,  जो कि संभव नहीं है। फिर पौधे, स्थान और लगाने के लिए गड्ढा खोदना जरूरी है, लेकिन व्यवहारिक पक्ष पर किसी का ध्यान नहीं है। पूरी सरकार इवेंट के रूप में चल रही है। मसलन कृषि कर्मण अवार्ड ले लो भले ही, जमीनी हकीकत में किसान आत्महत्या कर रहा है। वैसे ही दावा होगा पेड़ लगाने का रिकॉर्ड पूरा करने का। भले ही पेड़ नजर नहीं आए। अगला वर्ष चुनावी है 2018 में पेड़ लगाने की राशि पौधारोपण के हिसाब से ग्रामीणों को अदा की जाएगी। इसके बदले में पेड़ भले ना दिखें, मगर वोटों की फसल तो काटी ही जा सकती है। गप्पों और योजनाओं के ख्याली पुलाव के बीच इस तरह के इवेंट आगे भी देखने को मिलेंगे। जवाब में आलस-प्रमाद और गुटबाजी में डूबी कांग्रेस आरोपों की झड़ी लगा सकती है। मगर अभी तो उसके हाथ से भी समय की रेत की तरह से फिसल रहा है। नेतृत्व परिवर्तन की बातें कांग्रेस कैंप में गप्पों की तरह तारीख और महीने के साथ आती हैं। मगर होता कुछ नहीं है। हालात यह है कि कांग्रेस कुछ नहीं करने के लिए बदनाम है और भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन होने के बाबजूद इवेंट आधारित कामों के लिए मशहूर हो गई है। ऐसे में पार्टियों के कार्यकर्ताओं और जनता का भगवान भला करे... सब उल्टा-पुल्टा कहां तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पांव -पांव वाले भैया थे, किसान पुत्र और नर्मदा पुत्र थे, लेकिन अब किसान भी परेशान है और मां नर्मदा समेत प्रदेश की नदियां रेत चोरों की वजह से संकट में है। नैतिकवादी पार्टी भाजपा में अनुशासन और नैतिक मूल्यों की गिरावट आ रही है। कर्ज में डूबे किसान ज्यादा उत्पादन करने के बाद भी मौत को गले लगा रहे हैैं। शांति का टापू मध्यप्रदेश अशांत हो रहा है। आजादी के लिये संघर्ष करने वाली कांग्रेस मध्यप्रदेश में शिथिल पड़ी हुई है। जनसेवक कहे जाने वाले सरकारी कर्मचारी मनमानी कर रहे हैैं। ऐसा लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। जितनी ठीक करने कोशिश हो रही है उतनी ही उल्टा-पुल्टा हो रहा है...

MadhyaBharat

 MadhyaBharat  7 July 2017

kisan golikand

मध्यप्रदेश के मंदसौर में प्रदर्शनकारी किसानों पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद हुई छ किसानों की मौतों से नाराज प्रदर्शनकारियों ने आज मंदसौर कलेक्टर के साथ मारपीट और झूमाझटकी की। कलेक्टर मंदसौर स्वतंत्र कुमार सिंह स्टेट हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन करने वालों को समझाईश देने के लिए एसपी ओपी त्रिपाठी के साथ पहुंचे थे, तब उन पर आक्रोशित भीड़ ने हमला किया। बाद में उन्हें वहां से हटाया गया। इधर मंदसौर में प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह चक्काजाम कर रखा है। कर्फ्यू के बाद भी लोग हटने को तैयार नहीं हैं। कल हुई गोलीबारी की घटना में मंदसौर बरखेड़ा पंथ गांव के तीन किसानों की मौत हुई थी। इसमें से एक 11 साल का छात्र अभिषेक सिंह भी है। इससे गांव वालों में आक्रोश और बढ़ गया और एक किसान ने कलेक्टर को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने दूर तक कलेक्टर का पीछा भी किया। एसपी के साथ भी झूमाझटकी हुई है और बीजेपी के पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार को जमकर पीटा और उनकी गाड़ी में आग लगा दी। कलेक्टर, मंदसौर स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया मंदसौर और पिपलिया मंडी में कर्फ्यू लगा है। मंदसौर में हाईवे पर प्रदर्शनकारियों द्वारा शव रखकर चक्काजाम किया जा रहा है जिसे हटाने के लिए समझाईश देने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन के मामले में 25-30 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है। गोलीचालन के बाद आज भी किसानों का प्रदर्शन उग्र रूप लिए रहा। आंदोलनकारी किसानों ने रूई के एक गोदाम में आग लगा दी तो सड़क के किनारे खड़े वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। पिपल्या मंडी में टोल नाके पर भी आंदोलनकारियोंं के कब्जे की खबर है। जानकारी के मुताबिक आज सुबह हजारों किसान बरखेड़ापंथ गांव में जमा हुए थे। मृतकों के अंतिम संस्कार से लौट रही भीड़ ने पिपल्या मंडी के टोल नाके पर कब्जा कर लिया और नाके के पास खड़े वाहनों में आग लगा दी। यहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। इधर, इंदौर और भोपाल के मिसरौद में  भी किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार का पुतला फूंका और चक्काजाम कर तोड़फोड़ की। मंदसौर गोलीकांड में 6 किसानों की मौत के बाद प्रदेश बंद के आह्वान का सबसे ज्यादा असर मालवा क्षेत्र में दिखाई दिया बाकि भी प्रदेश के कई इलाकों में बंद शांतिपूर्ण रहा । इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, देवास, रतलाम में प्रदर्शनकारी सड़कों पर नजर आए और जगह-जगह चक्काजाम और तोड़फोड़ की खबर मिल रही है। प्रमुख शहर जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर, उज्जैन में भी किसान प्रदर्शन जारी है। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार के बयान से सरकार यह दावा खोखला साबित हुआ है कि आंदोलनकारियों पर पुलिस अथवा सीआरपीएफ ने नहीं बल्कि उपद्रवियों ने गोली चलाई है। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार आज उत्तेजित ग्रामीणों को यह समझाने की प्रयास कर रहे थे कि गोलियों प्रशासन के कहने पर नहीं चलाई गर्इं। लेकिन इतना सुनने के बाद किसान और भड़क गए। विवाद बढ़ता देख कलेक्टर को अलग ले जाया जाने लगा इसी दौरान एक किसान ने कलेक्टर को पीछे से थप्पड़ मार दिया। इसके बाद कलेक्टर  स्वतंत्र सिंह ने कहा कि गोली चलाए जाने को लेकर टीआई पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   इधर, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के नेता शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने इंदौर में पत्रकारों से चर्चा में आरोप लगाया है कि सरकार किसानों की हत्या पर आमादा थी, यही वजह है कि किसानों की छाती और पीठ पर गोली मारी गई। शिवकुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार में अफसरशाही पूरी तरह हावी है, 12 अफसर पूरी सरकार को चला रहे हैं। उन्होंने इन अफसरों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि दस जून से किसान पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि कैबिनेट में फैसला लिया है कि किसानों के हित के लिए कृषि लागत और विपणन आयोग बनाएंगे। इसमें लागत मूल्य पर 50% अधिक कीमत पर किसानों की उपज खरीदी जाएगी। इसके साथ ही तुअर और मूंग की खरीदी के लिए तय की गई कीमत के आधार पर 10 जून से खरीदी करने का फैसला हुआ। बैठक में किसानों की कर्जमाफी पर भी चर्चा हुई इसके लिए सरकार किसानों के लिए समाधान योजना शुरू करने का विचार कर रही है। इसके तहत कर्ज न चुका पाने वाले किसानों का एक बार ब्याज माफ किया जाएगा। मंदसौर गोलीकांड ने केंद्र सरकार को भी परेशानी में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने गोलीकांड को बड़ी साजिश करार देते हुए इसके पीछे कांग्रेस का हाथ बताया है। नायडू ने कहा किसान कभी हिंसक नहीं होता। आंदोलन में कुछ आसमाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि सरकार ने किसानों पर गोलियां चलवाई हैं। तन्खा ने कहा कि वे गोलीकांड के लिए सरकार और प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों और नेताओं के खिलाफ हत्या का मुकदमा दायर करवाएंगे। उन्होंने कहा आंदोलनकारी किसानों पर गोली चलाना सीधे उनकी हत्या करने जैसा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने आज दिल्ली में कहा कि शांतिपूर्ण अहिंसक आंदोलन पर सरकार और प्रशासन लाठियां और गोलियां बरसाकर दमन करने पर उतारू है। इससे खुद को किसान पुत्र कहने वाले शिवराज सिंह का चेहरा बेनकाब हो गया है। शिवराज जवाबदेही लेने के बजाए कांग्रेस पर आरोप लगा रही है।

MadhyaBharat

 MadhyaBharat  7 June 2017

kisan hadtal

किसान हड़ताल का असर ,दूध-सब्जी की सप्लाई रुकी  मध्यप्रदेश में किसानों की हड़ताल के तीसरे दिन शनिवार को एक बार फिर आम लोगों को दूध और सब्जी की किल्लत का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में पुलिस की सुरक्षा में दूध और सब्जी की दुकानें खुलीं, लेकिन इन्हें बहुत ज्यादा कीमत पर बेचा गया। उधर कई जगह आंदोलन कर रहे किसानों ने दूध और सब्जी की सप्लाई रोकने के लिए निजी वाहनों और बसों में भी चेकिंग शुरू कर दी है। भारतीय किसान संघ भी अब इस हड़ताल में शामिल होगा। किसान के आंदोलन पर सरकार हरकत में आ गई है। शनिवार दोपहर मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग के अधिकारियों से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की। इस दौरान तीनों संभागों के आईजी, कलेक्टर, एसपी और दुग्ध संघ के अधिकारी भी उपस्थित थे। देवास के पास कन्नौद में खेत से 2 लीटर दूध लेकर घर आ रहे किसान को आंदोलनकारियों ने सुबह 8.15 बजे सरकारी अस्पताल के सामने रोक लिया, उन्होंने पहले दूध बहाया इसके बाद किसान के साथ मारपीट की। मामले में रिपोर्ट लिखाई गई। राजोदा में कैलोद चौराहे पर निजी वाहनों को रोक कर किसानों ने चेकिंग की, सुबह से खुली दूध डेयरियां भी बंद करवा दी गईं। खंडवा में बसों की चेकिंग में मिली सब्जी किसानों ने सड़क पर फेंकी। महाराष्ट्र से आया दूध का वाहन भी रोका, जिसके बाद ड्राइवर वाहन को थाने ले गया। वहां पुलिस के संरक्षण में दूध ज्यादा कीमत में बिका। शाजापुर में सांची दूध की सप्लाई होने से स्थिति कुछ सामान्य हुई, लेकिन खुला दूध अब भी नहीं मिला। यहां सब्जी की सप्लाई बंद रही। शाजापुर में करीब बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर आए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जमकर प्रदर्शन किया। मंदसौर में 300 लीटर दूध एक कार से जब्त हुआ, जिसके बाद जिला अस्पताल में इसे बांट दिया गया। कई जगह किसानों का विरोध जारी रहा उन्होंने रोक-रोकर वाहनों की चेकिंग की। दूध और सब्जी की किल्लत के चलते कई जगह आम लोगों ने किसानों का विरोध किया। लोगों का कहना है कि यह तरीका बिल्कुल गलत है। झाबुआ और आलीराजपुर में हड़ताल का कोई असर नहीं दिखा, यहां सामान्य रूप से मंडी खुली और दूध की सप्लाई भी सामान्य रही। हालांकि मंड़ि‍यों में सब्जी की आवक पहले की अपेक्षा कम रही। खरगोन सब्जी मंडी में हालत सामान्य रहे लेकिन सब्जियों के भाव आसमान पर रहे। इंदौर और धार में किसानों आंदोलन के चलते व्यापारी खरगोन नहीं पहुंचे। यहां दूध की सप्लाई भी सामान्य रही। रविवार को सब्जी मंडी बंद रह सकती है। जिले के भीकनगांव में सब्जी का व्यापार जारी। यहां सांची के दूध की सप्लाई भी हुई, गड़बड़ी की आशंका के चलते अमूल का दूध नहीं मंगवाया गया। जानकारी के मुता‍बिक सांची का 10 हजार लीटर दूध यहां सप्लाई हुआ। बड़वानी में किसान आंदोलन का असर नहीं रहा।  

MadhyaBharat

 MadhyaBharat  3 June 2017

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