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रतलाम News


 मध्यप्रदेश बदनामी

मुझे लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। कुछ अच्छा घटित नहीं हो रहा है। कृषि बेहतर उत्पादन के बाद भी बेहाल, अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है। नौकरशाही की नाफरमानियां और भ्रष्टाचार तो यहां पहले से ही खूंटा गाड़ के बैठे हुए हैैं। बदनामी के व्यापमं और गड़बडियों के सिहंस्थ की स्याही सूख नहीं पा रही है। ऐसे में नर्मदा माई समेत नदियों में रेत के डाकों ने प्रायश्चित स्वरूप मुख्यमंत्री से नर्मदा परिक्रमा करा डाली। मगर बदनामी है कि पीछा ही नहीं छोड़ रही है। प्रदेश के पराक्रमी किसानों ने प्याज की बंपर पैदावार की तो उसकी खरीदी में शिवराज सरकार के भी आंसू निकल पड़े। खुश हैं तो अफसर और व्यापारी। प्याज खरीदी में घाटालों की आशंकाओं का घटाटोप है। भ्रष्टाचार के बादल छाये हुए हैैं। मैदान में कप्तान के स्वरूप में शिवराज सिंह चौहान तो हैैं मगर मंत्रियों की गैरहाजिरी सियासी हालात को संजीदा बना रही है। ब्यूरोकेसी पर निर्भर सरकार उसी के सेबोटेज की शिकार है और अपनी बिगड़ती छवि से सदमें  में है। एक जून से शुरू हुए किसान आंदोलन के बाद एक महीना बीत चुका है, लेकिन खेती-किसानी को लेकर हर दिन कोई नई समस्या लेकर आ रही है। औसतन हर दो दिन में एक किसान कर्ज और उससे पैदा परेशानी के कारण आत्महत्या कर रहा है। कृषि मंत्री, कृषि अधिकारी इन मुसीबतों भरे दिन दिनों में गायब है। सीएम अकेले पड़ गए लगते हैं । उनकी कृषि हिमायती छवि पर बट्टा लग गया है। घबराहट में उन्होंने टॉप करने वाले विद्यार्थियों से कह दिया कि वे खेती ना करें क्योंकि वह किसानों को मरते और खेती को बर्बाद होते नहीं देख सकते। ग्यारह बरस से कृषि को लाभ का धंधा बनाने का वादा करने वाले शिवराज सिंह की खेती ना करें कि सलाह अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। वे शायद जीवन में पहली बार इस कदर असहाय महसूस कर रहे हैं। जनता से संवाद कर समर्थन पाने में जितने वे कुशल हैं शायद प्रशासनिक पकड़ में उतने ही लचर, कमजोर। उनके खाटी शुभचिंतक भी थोड़ी अगर-मगर के साथ इसे स्वीकार करते हैं। भाजपा नेतृत्व इससे परेशान हैं। मगर इसका हल खुद मुख्यमंत्री को ही लगातार ईमानदार, तर्कसंगत, उच्च कोटि के कठोर निर्णय से खोजना होगा। अभी तो पूरा प्रदेश इससे जूझ रहा है। विरोधियों के लिए यह बड़ा हथियार है। राज्य की हालत यह है कि मुख्यमंत्री जब प्याज 8 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी का एलान करते हैं तो उसी क्षण कृषि, सहकारिता और नागरिक आपूर्ति विभाग को एक साथ सक्रिय हो जाना चाहिए था। खरीदी के साथ-साथ प्याज के बारिश से सुरक्षित भंडारण के लिए। उदाहरण के लिये जब आंख में धूल कंकड़ जाता है तो पलक झपकने और हाथ बचाव के लिए किसी के आदेश की प्रतीक्षा नहीं करते। उसी तरह प्याज के लिए गोदाम, वेयरहाउस और मंडी में शेड के नीचे- ऊपर तिरपाल, पालिथिन का प्रबंध युद्धस्तर पर करना चाहिए था। यदि अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया है तो यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ सेबाटेज भी है। नौकरशाही की नाफरमानियों के बाद यह भीतरघात गंभीर है। यह सब वह अफसरशाही कर रही है जो कृषि उत्पाद का अनुमान लगाने में बुरी तरह फ्लॉप रही। इस वजह से सरकार को पता ही नहीं है कि कितनी प्याज खरीदनी है। स्थिति यह है कि गत वर्ष की तुलना में खरीदी के लिए दोगुनी राशि याने 200 करोड़ रुपए तय हुए थे। अब कहा जा रहा है कि 800 करोड़ रुपए की खरीदी होगी। यह हैरतअंगेज है। यहीं से बड़े घोटाले के साफ  संकेत मिलते हैं। कागज़ पर खरीदी और भुगतान हो जाएगा, जितनी खरीदी हुई है उससे अधिक प्याज सडऩा बता दिया जाएगा। यह सडऩा ही घोटाले के सबूतों को नष्ट करने के प्रबंध के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री-अधिकारी कोई मैदान में नहीं है। किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होना सरकार की प्रशासनिक कमजोरी का भयावह पक्ष माना जा रहा है। इसी तरह प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बिगड़ी हुई हैं। अफसरों की रुचि नहीं है। मंत्री अस्पतालों में सुधार के लिए सक्रिय नहीं हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल में 24 घंटे में 17 लोगों की ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो जाती है। हिला देने वाली इस घटना पर मंत्री जी का पता नहीं है। स्कूल खुल गए हैं, 60 हजार मास्टरों की कमी है। पच्चीस हजार प्रतिनियक्ति पर होने से और 35 हजार पहले से ही कम है। नई भर्ती के लिए वित्त विभाग ने धन की तंगी के कारण रोक लगा दी है, लेकिन जून में शिक्षा मंत्री गप्प हांकते हुए करीब 35 हजार  से अधिक शिक्षकों की भर्ती कराने की बात करते हैं, जबकि जून में घोषणा नहीं नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। विभाग में अफसर लापरवाह हैं और ऐसे में मंत्री की नींद जून में शिक्षण सत्र के दौरान खुल रही है।  पढ़ाई के बाद नगरीय प्रशासन को ही देखें। बारिश के समय शहर के नाले-नालियां साफ नहीं हुए। मगर मंत्री स्तर पर न तो कठोरता से वर्षा पूर्व तैयारियां कराईं और ना अब सजगता दिख रही है। हालात चिंताजनक हैं। चल रहे हैं गप्पों के तीर... राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता और प्रतिपक्ष गप्पों के तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के ऐलान पर सरकार व भाजपा जनता के साथ मिलकर दो दौर में प्रदेश में 12 करोड़ से अधिक पेड़ पौधे लगाने जा रही है। करीब 7 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में पहले दौर में दो जुलाई को छह करोड़ पौधे 24 जिलों में लगाने का दावा किया गया। एक अनुमान के अनुसार नर्मदा घाटी के दो दर्जन जिलों में साढ़े तीन करोड़ की आबादी है। इनमें बच्चे,बुजुर्ग और महिलाएं भी हैं। सभी आ जाएं तो भी एक-एक, दो-दो पेड़ लगाने पड़ेंगे,  जो कि संभव नहीं है। फिर पौधे, स्थान और लगाने के लिए गड्ढा खोदना जरूरी है, लेकिन व्यवहारिक पक्ष पर किसी का ध्यान नहीं है। पूरी सरकार इवेंट के रूप में चल रही है। मसलन कृषि कर्मण अवार्ड ले लो भले ही, जमीनी हकीकत में किसान आत्महत्या कर रहा है। वैसे ही दावा होगा पेड़ लगाने का रिकॉर्ड पूरा करने का। भले ही पेड़ नजर नहीं आए। अगला वर्ष चुनावी है 2018 में पेड़ लगाने की राशि पौधारोपण के हिसाब से ग्रामीणों को अदा की जाएगी। इसके बदले में पेड़ भले ना दिखें, मगर वोटों की फसल तो काटी ही जा सकती है। गप्पों और योजनाओं के ख्याली पुलाव के बीच इस तरह के इवेंट आगे भी देखने को मिलेंगे। जवाब में आलस-प्रमाद और गुटबाजी में डूबी कांग्रेस आरोपों की झड़ी लगा सकती है। मगर अभी तो उसके हाथ से भी समय की रेत की तरह से फिसल रहा है। नेतृत्व परिवर्तन की बातें कांग्रेस कैंप में गप्पों की तरह तारीख और महीने के साथ आती हैं। मगर होता कुछ नहीं है। हालात यह है कि कांग्रेस कुछ नहीं करने के लिए बदनाम है और भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन होने के बाबजूद इवेंट आधारित कामों के लिए मशहूर हो गई है। ऐसे में पार्टियों के कार्यकर्ताओं और जनता का भगवान भला करे... सब उल्टा-पुल्टा कहां तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पांव -पांव वाले भैया थे, किसान पुत्र और नर्मदा पुत्र थे, लेकिन अब किसान भी परेशान है और मां नर्मदा समेत प्रदेश की नदियां रेत चोरों की वजह से संकट में है। नैतिकवादी पार्टी भाजपा में अनुशासन और नैतिक मूल्यों की गिरावट आ रही है। कर्ज में डूबे किसान ज्यादा उत्पादन करने के बाद भी मौत को गले लगा रहे हैैं। शांति का टापू मध्यप्रदेश अशांत हो रहा है। आजादी के लिये संघर्ष करने वाली कांग्रेस मध्यप्रदेश में शिथिल पड़ी हुई है। जनसेवक कहे जाने वाले सरकारी कर्मचारी मनमानी कर रहे हैैं। ऐसा लगता है मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। जितनी ठीक करने कोशिश हो रही है उतनी ही उल्टा-पुल्टा हो रहा है...

MadhyaBharat

 MadhyaBharat  7 July 2017

kisan golikand

मध्यप्रदेश के मंदसौर में प्रदर्शनकारी किसानों पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद हुई छ किसानों की मौतों से नाराज प्रदर्शनकारियों ने आज मंदसौर कलेक्टर के साथ मारपीट और झूमाझटकी की। कलेक्टर मंदसौर स्वतंत्र कुमार सिंह स्टेट हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन करने वालों को समझाईश देने के लिए एसपी ओपी त्रिपाठी के साथ पहुंचे थे, तब उन पर आक्रोशित भीड़ ने हमला किया। बाद में उन्हें वहां से हटाया गया। इधर मंदसौर में प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह चक्काजाम कर रखा है। कर्फ्यू के बाद भी लोग हटने को तैयार नहीं हैं। कल हुई गोलीबारी की घटना में मंदसौर बरखेड़ा पंथ गांव के तीन किसानों की मौत हुई थी। इसमें से एक 11 साल का छात्र अभिषेक सिंह भी है। इससे गांव वालों में आक्रोश और बढ़ गया और एक किसान ने कलेक्टर को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने दूर तक कलेक्टर का पीछा भी किया। एसपी के साथ भी झूमाझटकी हुई है और बीजेपी के पूर्व विधायक राधेश्याम पाटीदार को जमकर पीटा और उनकी गाड़ी में आग लगा दी। कलेक्टर, मंदसौर स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया मंदसौर और पिपलिया मंडी में कर्फ्यू लगा है। मंदसौर में हाईवे पर प्रदर्शनकारियों द्वारा शव रखकर चक्काजाम किया जा रहा है जिसे हटाने के लिए समझाईश देने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन के मामले में 25-30 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है। गोलीचालन के बाद आज भी किसानों का प्रदर्शन उग्र रूप लिए रहा। आंदोलनकारी किसानों ने रूई के एक गोदाम में आग लगा दी तो सड़क के किनारे खड़े वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। पिपल्या मंडी में टोल नाके पर भी आंदोलनकारियोंं के कब्जे की खबर है। जानकारी के मुताबिक आज सुबह हजारों किसान बरखेड़ापंथ गांव में जमा हुए थे। मृतकों के अंतिम संस्कार से लौट रही भीड़ ने पिपल्या मंडी के टोल नाके पर कब्जा कर लिया और नाके के पास खड़े वाहनों में आग लगा दी। यहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। इधर, इंदौर और भोपाल के मिसरौद में  भी किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार का पुतला फूंका और चक्काजाम कर तोड़फोड़ की। मंदसौर गोलीकांड में 6 किसानों की मौत के बाद प्रदेश बंद के आह्वान का सबसे ज्यादा असर मालवा क्षेत्र में दिखाई दिया बाकि भी प्रदेश के कई इलाकों में बंद शांतिपूर्ण रहा । इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, देवास, रतलाम में प्रदर्शनकारी सड़कों पर नजर आए और जगह-जगह चक्काजाम और तोड़फोड़ की खबर मिल रही है। प्रमुख शहर जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर, उज्जैन में भी किसान प्रदर्शन जारी है। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार के बयान से सरकार यह दावा खोखला साबित हुआ है कि आंदोलनकारियों पर पुलिस अथवा सीआरपीएफ ने नहीं बल्कि उपद्रवियों ने गोली चलाई है। कलेक्टर स्वतंत्र कुमार आज उत्तेजित ग्रामीणों को यह समझाने की प्रयास कर रहे थे कि गोलियों प्रशासन के कहने पर नहीं चलाई गर्इं। लेकिन इतना सुनने के बाद किसान और भड़क गए। विवाद बढ़ता देख कलेक्टर को अलग ले जाया जाने लगा इसी दौरान एक किसान ने कलेक्टर को पीछे से थप्पड़ मार दिया। इसके बाद कलेक्टर  स्वतंत्र सिंह ने कहा कि गोली चलाए जाने को लेकर टीआई पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   इधर, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के नेता शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने इंदौर में पत्रकारों से चर्चा में आरोप लगाया है कि सरकार किसानों की हत्या पर आमादा थी, यही वजह है कि किसानों की छाती और पीठ पर गोली मारी गई। शिवकुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार में अफसरशाही पूरी तरह हावी है, 12 अफसर पूरी सरकार को चला रहे हैं। उन्होंने इन अफसरों पर भ्रष्टाचार के भी आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि दस जून से किसान पूरे प्रदेश में जेल भरो आंदोलन करेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि कैबिनेट में फैसला लिया है कि किसानों के हित के लिए कृषि लागत और विपणन आयोग बनाएंगे। इसमें लागत मूल्य पर 50% अधिक कीमत पर किसानों की उपज खरीदी जाएगी। इसके साथ ही तुअर और मूंग की खरीदी के लिए तय की गई कीमत के आधार पर 10 जून से खरीदी करने का फैसला हुआ। बैठक में किसानों की कर्जमाफी पर भी चर्चा हुई इसके लिए सरकार किसानों के लिए समाधान योजना शुरू करने का विचार कर रही है। इसके तहत कर्ज न चुका पाने वाले किसानों का एक बार ब्याज माफ किया जाएगा। मंदसौर गोलीकांड ने केंद्र सरकार को भी परेशानी में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने गोलीकांड को बड़ी साजिश करार देते हुए इसके पीछे कांग्रेस का हाथ बताया है। नायडू ने कहा किसान कभी हिंसक नहीं होता। आंदोलन में कुछ आसमाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि सरकार ने किसानों पर गोलियां चलवाई हैं। तन्खा ने कहा कि वे गोलीकांड के लिए सरकार और प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों और नेताओं के खिलाफ हत्या का मुकदमा दायर करवाएंगे। उन्होंने कहा आंदोलनकारी किसानों पर गोली चलाना सीधे उनकी हत्या करने जैसा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने आज दिल्ली में कहा कि शांतिपूर्ण अहिंसक आंदोलन पर सरकार और प्रशासन लाठियां और गोलियां बरसाकर दमन करने पर उतारू है। इससे खुद को किसान पुत्र कहने वाले शिवराज सिंह का चेहरा बेनकाब हो गया है। शिवराज जवाबदेही लेने के बजाए कांग्रेस पर आरोप लगा रही है।

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 MadhyaBharat  7 June 2017

रतलाम  सीएम शिवराज सिंह

रतलाम में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 30 जून तक प्याज की खरीदी की जाएगी। समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेंगे। सरकार किसानों के साथ खड़ी है। किसानों को खाद और बीज के लिए आसानी से लोन दिया जाएगा। 22 जिलों में 48 स्थानों पर प्याज की खरीदी की जाएगी। सीएम ने कहा कि किसानों को सलाह देने की योजना बनाई जाएगी। एक हजार करोड़ रुपए से मूल्य स्थरीकरण  बनाया जाएगा। केसीसी पर पहले की तरह एकमुश्त कर्ज मिलेगा। सरकार तुअर दाल भी समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में प्याज की खरीदी शुरू हो गई है। 5224 रुपए प्रति क्विंटल में मूंग की खरीदी की जाएगी। सीएम ने कहा कि जो आया उससे बात की है, हिंसा करने वाले किसान नहीं हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा। रतलाम में हिंसक प्रदर्शन में आंख गंवाने वाले एएसआई को चेन्नई भेजा गया है। किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करने के लिए हिंसा की जा रही है। किसान आंदोलन को लेकर रतलाम के पास डेलनपुर में हुई हिंसक घटना पर सीएम ने कहा कि जो लोग हिंसा कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा प्रदेश में दूध के दामों को अमूल डेयरी के दामों की व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, किसानों के हित के लिए किसी भी सीमा तक जाकर काम करेंगे। कांग्रेस किसानों का सहारा लेकर आंदोलन को हिंसक बना रही है। इसके पहले सीएम ने किसान आंदोलन मामले में दोपहर सीएम हाउस में आपात बैठक बुलाई, जिसमें मंत्री भूपेंद्र सिंह सहित सूबे के आला अधिकारी भी शामिल हुए। मंडी बोर्ड ने फसल बेचने पर किसानों को 50 प्रतिशत कैश भुगतान करने की घोषणा की है, बाकी 50 प्रतिशत किसानों के खाते में जमा किए जाएंगे। इसके पहले रविवार को उज्जैन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कुछ मांगों को मान लिए जाने के बाद स्थगित हो गया। इसका ऐलान भारतीय किसान संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवकांत दीक्षित ने किया, लेकिन इसे भारतीय किसान यूनियन ने नकार दिया। बिजलपुर और राऊ के किसानों ने भी आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है। इसके चलते आंदोलन बंट गया। देर रात किसान सेना ने आंदोलन वापस ले लिया। इसके बाद रविवार रात तक यह असमंजस बना रहा कि सोमवार से दूध-सब्जी की उपलब्धता सामान्य होगी या नहीं। भारतीय किसान यूनियन ने धमकी दी है कि दो दिन में मांगें नहीं मानीं तो 10 जून को पूरा प्रदेश बंद करेंगे। मानीं गईं मांगें  मंडियों में उपज बेचने पर 50% भुगतान नकद, 5% आरटीजीएस से बैंक खाते में जमा होगा।सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्याज खरीदेगी। प्रति किलो के आठ रुपए दिए जाएंगे। खरीदी अगले सप्ताह से शुरू होकर जून अंत तक चलेगी। गर्मी की मूंग भी समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी।फसल बीमा ऐच्छिक बनाएंगे।सब्जी मंडियां भी मंडी अधिनियम में लाई जाएंगी, ताकि किसानों को ज्यादा आढ़त न देनी पड़े। नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम के किसान विरोधी प्रावधानों को हटाया जाएगा।आंदोलन की वजह से किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। यादव भारतीय किसान यूनियन के महामंत्री अनिल यादव और किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने कहा कि किसान संघ पहले दूर रहा। आंदोलन प्रदेश में फैल गया तो सरकार से बात कर आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी, जबकि उन्हें इसका अधिकार ही नहीं है।  

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 MadhyaBharat  5 June 2017

मेधा पाटकर

  नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने रविवार को रतलाम में कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा एक छलावा है। इसके जरिए नर्मदा घाटी को खाली कराने की साजिश की जा रही है। नर्मदा नदी से प्रतिदिन एक-एक गांव में 1500 टन रेत का खनन हो रहा है। सेवा यात्रा अवैध गतिविधियों की मंजिल तक पहुंचने का मार्ग है, जिससे लोगों का ध्यान भटकाकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जा रही है। नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता इस यात्रा का विरोध जगह-जगह कर रहे है, लेकिन विपक्ष की चुप्पी समझ से परे है। रतलाम के पत्रकार भवन में मीडिया से चर्चा करते हुए सुश्री पाटकर ने नर्मदा सेवा यात्रा को लेकर सरकार के साथ विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया। उनके अनुसार कांग्रेस को ये तमाम मुद्दे उठाने चाहिए थे, लेकिन वह क्यो नहीं उठाना चाहती है ये समझने की बात है। इससे लगता है कि कहीं न कहीं अंदर से नीचे स्तर पर पक्ष और विपक्ष दोनों एक ही है। उन्होंने कहा कि नर्मदा सहित हर नदी की सेवा करने में राजनेता लगे है, लेकिन प्रत्यक्ष में नदियों को खत्म करने वाला काम हो रहा है। अवैध रेत खनन ने यमुना को खत्म कर दिया है। आगामी पांच साल में नर्मदा की भी यहीं स्थिति होगी, क्योकि अवैध खनन के साथ उसके आसपास कई गलत काम हो रहे है।  पाटकर ने कहा सीएम से लेकर कलेक्टर तक हर कोई जानता है कि अवैध काम चल रहा है, लेकिन सर्वथा ईच्छा शक्ति का अभाव है।  नेताओ को डर है कि यदि माफियाओं को दूर करेंगे, तो अगला चुनाव नहीं जीत सकेंगे। एनजीटी बार-बार चेतावनी देकर कार्रवाई की बात कर रहा है, लेकिन राजनैतिक दलों के नुमाइंदे खुलेआम पुलिस व प्रशासन के समक्ष अवैध काम कर रहे है। उन्हें हर स्तर पर पूरा समर्थन मिल रहा है।    

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 MadhyaBharat  27 February 2017

ratlam bas hadsa

    रतलाम से मंदसौर जा रही बस नामली के पास बारा पत्थर इलाके में पानी से भरी एक खदान में डूब गई। दुर्घटना में 14 लोगों की मौत की हुई  है और 17 यात्री घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक बस तेज रफ्तार में थी और अचानक पलटते हुए सीधे खाई में जा गिरी। यात्री बचकर बाहर निकल पाते इससे पहले ही बस गहराई में डूबने लगी। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंच गए और उसमें रस्सी बांधकर जेसीबी से बाहर निकालने की कोशिश की। कुछ शवों को बाहर निकाला गया और करीब 10 से ज्यादा घायलों को रतलाम रेफर किया गया है। आठ शवों को रतलाम पहुंचाया गया है, जिनमें एक बालक, एक महिला और 6 पुरुष शामिल हैं। गाड़ी ममता बस सर्विस की बताई जा रही है। घायलों के मुताबिक बस ड्राइवर तेजी से बस चला रहा था। उसे ऐसा करने के लिए मना भी किया गया लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान अचानक बस पलटी खाते हुए पानी से भरी खदान के अंदर गिर गई। कुछ का कहना है कि तेज रफ्तार में बस का टायर फट गया और वह 5 से 6 पलटी खाते हुए खदान में समा गई। घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। लोगों की भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और एसपी और डीएम से नाराजगी जताई।

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 MadhyaBharat  14 October 2016

बिजली गिरने से  18 लोगों की मौत

  मध्यप्रदेश में अनेक स्थानों पर छिटपुट वर्षा हुई लेकिन इस दौरान बिजली गिरने की घटनाओं में 18 लोगों की मौत हो गई। ये मौतें उज्जैन, मंदसौर, आगर, राजगढ़ और गुना जिलों में हुई। मालवा अंचल में बदले मौसम के बीच शनिवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत हुई है। उज्जैन के ग्राम करोंदिया में रेशमबाई , ग्राम धुलेटिया में मंजू और केशरपुर (थाना घट्टिया) में सोयाबीन काटने आए बजरंगगढ़ (रतलाम) निवासी सैतान भील की मौत हो गई। मंदसौर जिले में पांच स्थानों पर बिजली गिरी। इसमें दो लोगों की मौत हो और 8 लोग घायल हो गए। आगर के ग्राम ताखला में बिजली गिरने से विनोद विश्वकर्मा की मौत हुई। पांच गांवों में गिरी बिजली राजगढ़ जिले के पांच गांवों में शनिवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई और 16 लोग झुलस गए। खुजनेर ब्लॉक के पाटनकलां गांव में खेत में उस वक्त बिजली गिरी जब मजदूर सोयाबीन काट रहे थे। यहां 2 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और 15 झुलस गए। प्रभुलाल तंवर , सुनीताबाई की मौत हो गई और 7 मजदूर झुलस गए। उधर कल्पोनी गांव में रतनबाई सौंधिया, पटाड़ियाधाकड़ में संतोषबाई और भादाहेड़ी गांव में चौथमल दांगी , उसकी पत्नी कौशल्या की मौत हो गई। खिलचीपुर ब्लॉक के भादाहेड़ी में एक दंपती और पचोर ब्लॉक के पटाड़िधाकड़ व कल्पोनी में दो महिलाओं की जान चली गई। ब्यावरा कलां गांव में युवक झुलस गया। भाई-बहन सहित छह की मौत गुना में कैंट थाना क्षेत्र के गोपालपुरा में शनिवार दोपहर घर की सर्विस लाइन पर बिजली गिर गई। इससे लाइन में फाल्ट हो गया और बिजली के तार टूटकर लोहे के गेट पर गिर गए। घर में करंट फैल गया जिससे राहुल और उसकी बहन संगीता की मौत हो गई। चांचौड़ा ब्लॉक के कीताखेड़ी और तेलीगांव रोड के पास खेत पर सोयाबीन की फसल काट रहे मजदूरों पर भी बिजली गिर गई। इससे रमेश कुशवाह व रोडीबाई की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि सावित्रीबाई की हालत गंभीर है। बीनागंज के नजदीक बीजनीपुरा में बिजली गिरने से जानकी मोगिया की मौत हो गई। गायत्री मोगिया गंभीर रूप से घायल हुई है। कुंभराज तहसील के सांकाकला गांव में श्यामलाल की मौत हो गई और उसकी पत्नी प्रेमबाई घायल हो गई। मंदिर का शिखर क्षतिग्रस्त चांचौड़ा ब्लॉक के कीताखेड़ी गांव में शनिवार दोपहर राधाकृष्ण मंदिर के शिखर पर बिजली गिरने से वह क्षतिग्रस्त हो गया। दो भैंसों की मौत राघौगढ़ नपा क्षेत्र के तहत वार्ड क्रमांक 12 के बरखेड़ी मेवाती गांव में दो भैंसों की मौत हो गई।  

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 MadhyaBharat  2 October 2016

किसी भी प्रदेश से कम कीमत पर नहीं हो प्रदेश में धान की खरीदी

50 करोड़ रुपये तक वार्षिक धान खरीदी कर मुक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि ऐसे प्रयास किये जाये जिससे प्रदेश में बासमती धान की खरीदी देश के अन्य प्रदेशों के न्यूनतम मूल्य से कम पर नहीं हो। किसानों के हितों के संरक्षण में ही सबका हित है। श्री चौहान बासमती की अन्तर्राष्ट्रीय मांग में आयी कमी से उत्पन्न मंदी के इस दौर में धान खरीदी के बारे में आज व्यापारियों तथा मिलर प्रतिनिधियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।श्री चौहान ने निर्देशित किया कि बासमती उत्पादक सभी राज्यों की बड़ी मंडियों के बासमती धान के भाव प्रतिदिन प्रदेश की धान मंडियों में प्रदर्शित किये जाये।बैठक में बताया गया कि शासन ने निर्णय लिया है कि राज्य में पैदा होने वाली ऐसी बासमती धान को 31 मार्च तक मंडी फीस से पूर्ण छूट रहेगी, जिसकी बिक्री किसानों द्वारा मंडियों में की जाती है तथा जिसका उपयोग बासमती चावल बनाने के लिये प्रदेश की धान मिलों में होता है अथवा प्रदेश से बाहर ले जाने के लिये किया जाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और व्यापारियों के सहयोग के लिए सभी जरूरी उपाय सरकार ने किये हैं। बैठक में तय किया गया कि 10 करोड़ रूपये से अधिक की वार्षिक धान खरीदी पर लगने वाले कर की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रूपये कर दिया जाय। इस निर्णय से अब वर्ष में 50 करोड़ रूपये से अधिक की खरीदी करने वाले व्यापारी को ही टैक्स देना होगा। इसके साथ ही धान की भंडारण दरों को भी समायोजित करने का निर्णय लिया गया। इससे प्र-संस्करण कर्ता और क्रेता दोनों को ही दिक्कत नहीं रहेगी।बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार प्रदेश के बासमती की यूरोप में ब्रांडिंग और मार्केटिंग की भी पहल करेगी।बैठक में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, खाद्य-नागरिक आपूर्ति मंत्री विजय शाह, मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, अपर मुख्य सचिव कृषि आर.के. स्वाई, बासमती के व्यापारी एवं मिलर उपस्थित थे।

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रतलाम रौशन  हुआ अटल ज्योति से

मुख्यमंत्री ने दी सरकारी मेडिकल कॉलेज की सौगात एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सांसद नितिन गडकरी ने आज रतलाम जिले में 24 घंटे बिजली दिए जाने के अटल ज्योति अभियान का शुभारंभ किया। इसी के साथ प्रदेश में 24 घंटे बिजली प्राप्त करने वाले जिलों में रतलाम आठवाँ जिला हो गया है। मुख्यमंत्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि वर्ष 2003 में प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता 2900 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 10 हजार 400 मेगावाट हो गई है। इसे अगले वर्ष तक 14 हजार मेगावाट किया जाएगा।श्री चौहान ने कहा कि अटल ज्योति अभियान पर अब तक 11 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जा चुके हैं। अब किसानों को हर माह बिजली बिल जमा करने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी क्योंकि अब उन्हें फ्लेट रेट 1200 रूपए प्रति हार्स पावर वार्षिक दर से सिंचाई के लिए विद्युत बिल का भुगतान करना होगा।सांसद नितिन गडकरी ने कहा कि अटल ज्योति अभियान चलाकर मध्यप्रदेश को जगमगाने और रोशन करने का ऐतिहासिक कार्य मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं उनकी सरकार ने किया है। श्री गडकरी ने कहा कि प्रदेश में बिजली, पेयजल, सिंचाई, परिवहन एवं संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है।श्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदेश की कृषि विकास दर आज 18.9 प्रतिशत है। प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में शुमार हो गया है। सकल घरेलू उत्पाद भी मध्यप्रदेश में 10.9 प्रतिशत है जबकि देश में 3.50 प्रतिशत के लगभग है। श्री गडकरी ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण,सामाजिक न्याय,बेटी बचाओ आदि हर क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने तेजी से कार्य कर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रतलाम में शासकीय बजट से मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रतलाम को नमकीन उत्पादन के कलस्टर शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने रतलाम नगर के विकास के लिए 19 करोड़ तथा जिले की सभी नगर पंचायत को एक-एक करोड़ रूपए स्वीकृत करने की घोषणा की।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान ने सभी नागरिकों को स्वर्णिम मध्यप्रदेश के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद का बजट 2 करोड़ से बढ़ाकर 60 करोड़ रूपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नागरिकों से कहा कि विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बेरोजगार युवाओं को आत्म-निर्भर बनाने के उद्देश्य से एक अप्रैल से मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना लागू कर दी गई है। उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण पर गारंटी प्रदेश सरकार दे रही है।ऊर्जा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि अटल ज्योति अभियान का प्रदेश के सात जिलों में अब तक शुभारंभ हो चुका है। आज से आठवें जिले के रूप में रतलाम में भी 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की सुविधा जिले के नागरिकों को मिलने लगेगी। प्रदेश में बिजली उत्पादन एवं वितरण के लिए 25 हजार करोड़ रूपए की राशि खर्च की गई है।

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