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सिवनी News


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  घंसौर में "नमामि देवी नर्मदे'' यात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री    मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण के लिये 'नमामि देवी नर्मदे'' सेवा यात्रा देश का अब तक का सबसे बड़ा जन-अभियान है। श्री चौहान यात्रा के चौदहवें दिन सिवनी जिले के घंसौर में जन-संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह राजनीतिक नहीं, सामाजिक सरोकार से जुड़ी यात्रा है। उन्होंने कहा कि गर्मी में नर्मदा की जलधारा दुर्बल और पतली हो जाती है। चूँकि नर्मदा किसी ग्लेशियर से नहीं निकलती, बल्कि इसकी जलधारा विंध्याचल और सतपुड़ा के वृक्षों द्वारा अवशोषित जल से छोड़ी गयी बूँदों से बनती है। इसलिये यह जरूरी है कि नर्मदा के दोनों तट पर वृक्षारोपण किया जाये, ताकि नदी का जल-स्तर बढ़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान वन और राजस्व की जमीन पर वृक्षारोपण किया जायेगा। साथ ही निजी भूमि पर किसानों द्वारा वृक्षारोपण करने पर उन्हें 3 साल तक 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा राशि दी जायेगी और मनरेगा के तहत मजदूरी भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगाने पर 40 प्रतिशत सबसिडी भी दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने लोगों का आव्हान किया कि वे नर्मदा नदी को शुद्ध और पवित्र बनायें। शौच क्रिया, शव-विसर्जन, केमिकल युक्त मूर्तियाँ विसर्जित न करें। जन-संवाद कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, परिवार कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य राज्य मंत्री तथा सिवनी जिले के प्रभारी श्री शरद जैन, सांसद श्री बोधसिंह भगत, गौ-संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद तथा स्वामी प्रज्ञानंद उपस्थित थे।        

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 MadhyaBharat  25 December 2016

बाघ शिकारी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश वन विभाग की एसटीएफ टीम ने 22 अक्टूबर को कान्हा टाइगर पार्क में मारे गये बाघ के शिकारियों को ढूँढ निकाला है।  टीम ने 6 शिकारी देवी सिंह, धीर सिंह, ज्ञान सिंह, सुंदरलाल, धर्म सिंह और छोटेलाल को मानेगाँव से गिरफ्तार कर धीर सिंह के घर से बाघ को मारने में उपयोग किये गये बिजली के तारों को भी बरामद किया। शिकारियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। शिकारियों ने क्षेत्र संचालक  पंकज शुक्ला को बताया कि उनका बाघ को मारने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने मानेगाँव के पास जंगली सुअर या चीतल को मारने के इरादे से बिजली के तार बिछाए थे, जिसमें दुर्भाग्य से बाघ फँस गया। बाघ के मरने से वे बहुत भयभीत हो गये और उसके शव को घसीटकर लेंटाना की झाड़ियों में छुपा दिया। इसके बाद देवी सिंह और छोटेलाल ने बाघ के चारों पंजे काटे, ताकि उन्हें बेचकर पैसा कमाया जा सके। इतने में एसटीएफ की टीम खोजी कुत्तों के साथ वहाँ पहुँच गयी। पकड़े जाने के डर से देवी सिंह ने चारों पंजे बंजर नदी के पास पहुँचकर एकांत में जला दिये, लेकिन खोजी कुत्तों और प्राप्त जानकारी के आधार पर टीम वहाँ भी पहुँच गयी और अपराधियों को धर पकड़ा। वन विभाग की टीम को देवी सिंह ने वह जगह भी दिखायी, जहाँ उसने कटे पंजों को जलाया था। पैरों के अधजले अंग भी टीम ने बरामद किये।

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 MadhyaBharat  26 October 2016

कान्हा में शुरू होगी नाइट सफारी

कान्हा नेशनल पार्क में दिन के समय पार्क भ्रमण का आनंद तो लोग लेते ही हैं लेकिन अब जल्द ही पार्क में नाइट सफारी का भी लुफ्त ले सकेंगे। इस सीजन से कुछ हटकर करने के लिए प्रबंधन ने नाइट सफारी का प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा है।  प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि यह प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निश्चित रूप से पर्यटकों का रूझान कान्हा में जबर्दस्त बढ़ेगा और रात में जंगल भ्रमण का रोमांच अनोखा होगा। पर्यटक वन्यप्राणियों की चमकती हुई आंखें और उनका आना-जाना देखकर रोमांच होगा। हालांकि नाइट विजन गॉगल का भी उपयोग किया जाएगा। जिससे जंगल प्रकाश से भरपूर दिखाई पड़ेगा और रात के अंधेरे में भी जानवर स्पष्ट देखे जा सकेंगे। प्रथम चरण में पार्क प्रबंधन ने 03 वाहनों को नाइट सफारी के लिए अनुमति मांगी है। प्रतिदिन 18 पर्यटकों को नाइट सफारी पर जाने का मौका मिलेगा। कंजरवेशन  प्लान में भी नाइट सफारी का जिक्र हैं। कान्हा पार्क प्रबंधन का मानना है कि बफर जोन पर्यटकों के लिए खोले जाने व नाइट सफारी से पर्यटकों का रूझान बढ़ेगा। बफर जोन में पर्यटन बढ़ने से वाइल्ड लाइफ को भी फायदा मिलेगा। वन्यप्राणियों की संख्या भी बढ़ेगी। तीन माह पार्क बंद रहने से शिकारी सक्रिय हो जाते थे, लेकिन वर्षभर पर्यटन जारी रहने से लोगों की उपस्थित पार्क क्षेत्र में रहेगी। जिससे पार्क व रहने वाले वन्यप्राणियों की सुरक्षा भी होगी। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता रहेगा।

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 MadhyaBharat  30 September 2016

hindi granth akadami

  उच्च शिक्षा मंत्री पवैया ने दिये निर्देश    उच्च शिक्षा मंत्री  जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि भारत के प्रख्यात साहित्यकारों के नामचीन काव्य, ग्रंथ और अन्य साहित्यिक कृतियों से समृद्ध पुस्तकालय हिन्दी ग्रंथ अकादमी में बनाया जाये। इससे शोधार्थी छात्र को दुर्लभ पुस्तक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। श्री पवैया ने आज मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी और व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ की गतिविधियों की समीक्षा की।   मंत्री  पवैया ने निर्देश दिये कि व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ व्यापक और असरकारी बनाया जाये। इसकी गतिविधियों का प्रभाव महाविद्यालय परिसर में छात्रों के मन-मानस पर दिखाई दे। छात्रों पर इसका प्रकाश नैतिक मूल्यों और देश-भक्ति के रूप में परिलक्षित हो।   श्री पवैया ने कहा कि मध्यप्रदेश में हिन्दी भाषा की जितनी भी बोलियाँ हैं, उनका संकलन करने की योजना बनाई जाये। इसी तरह विभिन्न अंचल की जन्म से विवाह तक की परम्पराओं की लोक-रीतियों का संकलन किया जाये। त्यौहार और विवाह इत्यादि में गाये जाने वाले लोक-गीत, जो केवल पुरानी पीढ़ी के पास सुरक्षित है, उन्हें पुस्तक का रूप दिया जाये, जिससे यह धरोहर लुप्त नहीं हो।   श्री पवैया ने कहा कि अकादमी के जरिये अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पुस्तक वितरण में दिव्यांग बच्चों को भी शामिल किया जाये। यह देश में पहली बार होगा। उन्होंने कहा कि शब्दकोश का भी प्रकाशन किया जाये। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी और भारतरत्न पं. मदनमोहन मालवीय पर केन्द्रित पुस्तकों का प्रकाशन भी हो।   श्री पवैया ने कहा कि अकादमी द्वारा विश्वविद्यालय और जिला-स्तर पर चेतन प्रवाह विमर्श गोष्ठियाँ कर छात्रों को प्रोत्साहित किया जाये। गोष्ठियों में मुख्यालय के प्राचार्यों को भी शामिल किया जाये। श्री पवैया ने इस मौके पर व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के ब्रोशर का विमोचन किया। उन्होंने अकादमी का निरीक्षण भी किया। प्रमुख सचिव श्री आशीष उपाध्याय और अकादमी संचालक प्रो. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  18 August 2016

घूंघट से रोजगार तक आदिवासी महिलायें

जे.सी. धोलपुरिया गरीबी से जूझ रही छोटे-से गांव मझौली की बेरोजगार आदिवासी महिलाओं के जीवन की खोई चमक को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम कुछ हद तक लौटाने में कामयाब रही है। सदा घूंघट में सिमटी-सुकड़ी रहने वाली महिलाओं की जीवन शैली में काफी बदलाव आया है। स्वसहायता समूह बनाकर इन महिलाओं का घूंघट से चेहरा बाहर निकालने और बेरोजगार से आत्मनिर्भर होने तक का सफर महिलाओं के सामाजिक और आथिर्क सशक्तीकरण का एक प्रेरक प्रसंग है।इन महिलाओं के पति दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार का जीवन स्तर सुधारने के लिए ये स्वयं भी कुछ करना चाहती थीं। इसलिए इन महिलाओं ने दुर्गा स्वसहायता समूह और विकास स्वसहायता समूह के नाम से 12-12 महिलाओं के दो समूह बना लिए और प्रत्येक महिला हर माह तीस-तीस रूपये जमा करने लगीं। ये महिलाएं रोजी-रोटी के लिए समूह के रूप में कोई काम करना चाहती थीं, पर घूंघट की ओट में रहने और अपने संकोची स्वभाव के कारण ये अपने मकसद में आगे नहीं बढ़ पा रही थीं और मार्गदर्शन के अभाव में कोई ऐसा कार्य महिलाओं के इन स्वसहायता समूहों के हाथ नहीं लगा, जो उनके जीवन यापन का जरिया बनता। साल भर पहले विश्वास समाज सेवी संगठन ने पहल की। इन महिलाओं को प्रेरित किया और उपर्युक्त दोनों योजनाओं से जोड़ने में मदद की। आज ये महिलाएं पुरूषों के बराबर बैठकर बगैर घूंघट के विचार मंथन करती हैं। महिलाओं के ये दोनों स्वसहायता समूह आज बहुत-सी सामुदायिक गतिविधियां चलाते हैं और ये बस उतना ही कमा पाती हैं, जितने में परिवार चल सकें। खास बात यह है कि इन महिलाओं ने नशामुक्ति के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और बगैर किसी जोर जबरदस्ती के कई पुरूष शराब पीना छोड़ चुके हैं।स्वसहायता समूह की महिलाएं गांव के सभी रास्ते और घर साफ सुथरे रखने और घरों में शौचालय बनाने के लिए ग्रामवासियों को प्रेरित करती हैं। मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम इन दोनों स्वसहायता समूह की महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हुआ है। क्षेत्र के स्कूलों और आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को दिया जाने वाले मध्यान्ह भोजन की भोजन पकाने से लेकर सारी व्यवस्थाएं यही स्वसहायता समूह करते हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने भी वृक्षारोपण एवं रोपे गये पौधों की सिंचाई के काम के जरिए उनके जीवनयापन की गारंटी दी है। इन योजनाओं से पिछड़े इलाके की इन गरीब महिलाओं की कई समस्याओं का खात्मा हुआ है।दोनों योजनाओं में रोजगार पाने के साथ ही इलाके की व अपनी तरक्की की आशा संजोए ये महिलाएं पूरे समर्पण के साथ काम कर रही हैं। दुर्गा स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती शांति बाई बताती हैं कि जब दोनांे स्वसहायता समूहों की शुरूआत हुई, तो उस समय स्वरोजगार और गरीबी उन्मूलन इनके लक्ष्य थे। तब से ये महिलाओं की समाज में भागीदारी बढ़ाने में सफल रहे हैं। इसी समूह की सचिव श्रीमती गोमती बाई बताती हैं कि वृक्षारोपण के लिए ट्रीगार्ड बनाने हेतु अब समूह ईंटों का निर्माण भी करेगा। गोमती बाइ का कहना है कि समूहों ने उन्हें उनके परिवारों में धन नियंत्रक और धन प्रबंधक बनाया है।समूहों की सक्रिता से पहलीबार समूहों की महिलाओं व परिवारजनों के रहन-सहन और जीवनशैली में परिवर्तन आया है। कई महिला सदस्यों ने मोबाइल फोन खरीद लिये हैं। श्रीमती गोमती बाई को छोड़कर शेष सभी महिलाएं गैर पढ़ी लिखी हैंं, लेकिन वे अपने बच्चों को पढ़ने स्कूल भेजती हैं। पैसे आने की वजह से उनके परिवार का जीवन स्तर सुधर रहा है। लेकिन उनके लिए इतनी कमाई काफी नहीं है। इससे ज्यादा पैसे कमाने के लिए वे अभी और काम करना चाहती हैं। अपनी राह खुद बनाने वाली इन महिलाओं के लिए नये संघर्ष की शुरूआत तो अब हुई है।

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