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शिवपुरी News


विधायक शकुंतला खटीक फरार

  मंगलवार की रात करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस सुबह का इंतजार करती रही, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रात में किसी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। वहीं सुबह को विधायक अपने घर से फरार हो गईं। करैरा विधायक पर भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप है। करैरा विधायक पर केस दर्ज होने के पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। प्रदेशभर में तत्समय आंदोलन हिंसक रूप ले चुका था और पुलिस को पता था कि करैरा में आंदोलन की अगुआई महिला विधायक कर रही हैं, बावजूद इसके मौके पर कोई भी महिला पुलिस नहीं थी, जबकि एसडीओपी की मौजूदगी में आक्रोशित विधायक शकुंतला खटीक ने टीआई पर घूंसे बरसा दिए। वहीं इस मामले के बाद वीडियो क्लिप सामने आने और सत्ता पक्ष के दबाव के चलते भले ही करैरा पुलिस ने सोमवार की देर रात विधायक व ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज कर लिया, लेकिन यहां भी पुलिस की मंशा विधायक को तत्काल गिरफ्तार करने की नजर नहीं आई, क्योंकि केस देर रात 11:50 बजे दर्ज किया गया। कानून के जानकारों के अनुसार रात के समय महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। केस दर्ज होने की जानकारी लगते ही विधायक अपने घर से फरार हो गईं। ब्लॉक अध्यक्ष भी फरार हो गए। विधायक पर केस दर्ज होने के साथ ही करैरा कस्बे में पुलिस ने एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। विधायक के समर्थक कोई अप्रिय घटना को अंजाम न दे सके। कस्बे में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।  धाराएं बढ़ाएंगी मुसीबत, जाना पड़ सकता है जेल। विधायक पर जो धाराएं दर्ज की गई हैं, उनमें धारा 353 शासकीय कार्य में बाधा की है, जो गैर जमानती है और इसमें न्यूनतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान हैं। इस मामले में फरियादी पुलिस है, इसलिए विधायक की मुसीबत बढ़ सकती है। शहर के एडवोकेट गजेन्द्र यादव के अनुसार धारा 147 व 149 विधि विरुद्ध जमाव यानी बलवा की धाराएं हैं, वहीं 189 लोक सेवक को पदीय कार्य न करने के लिए दबाव डालना है। इसके अलावा 294 गाली गलौज, 436 लड़ाई झगड़ा, 504 व 506 जान से मारने की धमकी की श्रेणी में हैं और यह सभी धाराएं जमानती हैं। घटनाक्रम 8 जून का था, लेकिन तत्समय टीआई से नोकझोंक की बात सामने आई और एक क्लिपिंग में विधायक 'थाने में आग लगा दो" कहती नजर आई थीं। इसके अगले दिन से लगातार वीडियो सामने आते चले गए। विधायक ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की और आग लगाने के बयान से मुकर भी गईं, लेकिन एक और वीडियो ने हलचल पैदा कर दी। मंगलवार को नया वीडियो सामने आया है, जिसमें विधायक शकुंतला टीआई संजीव तिवारी को घूंसे से मारती दिखाई दे रही हैं। चर्चा है कि भले ही पुलिस ने देर रात केस दर्ज कर विधायक शकुंतला को फरार होने का मौका हासिल करा दिया हो, लेकिन दूसरी तरफ पुलिस विधायक सहित ब्लॉक अध्यक्ष को गिरफ्तार करने उनके घरों पर कई बार दबिश देती रही। देर रात दबिश देने के अलावा सुबह और शाम को भी पुलिस दोनों के ठिकानों पर दबिश देती नजर आई। पुलिस सूत्रों का दावा है कि जल्द ही दोनों को बंदी बनाया जाएगा। इधर विधायक और ब्लॉक अध्यक्ष के फोन बंद आ रहे हैं। विधायक के गनर शैलेन्द्र सिकरवार के अनुसार विधायक रात को अचानक कहीं चली गई हैं। बता दें कि करैरा विधायक पर विरुद्ध आगजनी के लिए उत्प्रेरित करने, शासकीय कार्य में बाधा, अपशब्द, जान से मारने की धमकी, शासकीय कर्मचारी से अभद्रता सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। एसडीओपी करैरा अनुराग सुजानिया ने बताया  विधायक शकुंतला खटीक और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीनस गोयल सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि यह दोनों अभी फरार हैं।   

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 MadhyaBharat  14 June 2017

आईएएस नेहा मारव्या

नियम कायदों की मनमानी समीक्षा और बेतुके आदेश जारी करने के मामले में विवादित रही महिला आईएएसएवं शिवपुरी की प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की ताजा हरकत से सभी नाराज हैं। सरकार में शामिल मंत्री, विपक्ष में कांग्रेस और मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह तक उनकी इस हरकत से नाराज हैं। माना जा रहा है कि नेहा के खिलाफ कार्रवाई तय है और यह जल्द अमल में लाई जाएगी। मामला कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के लोकार्पण कार्यक्रम की एन मौके पर अनुमति निरस्त करने का है। हालांकि इसमें प्रभारी कलेक्टर नेहा मारव्या की ही किरकिरी हुई। उन्होंने अनुमति रद्द की, फिर भी कार्यक्रम हुआ और धूमधाम से हुआ। इतना ही नहीं तमाम प्रशासनिक अफसर भी पहुंचे और सबकुछ विधिवत ही हुआ। नेहा मारव्या एक चिट्ठी जारी करने से ज्यादा कुछ नहीं कर पाईं परंतु यह मामला प्रोटोकॉल का है। जिसका पालन नेहा मारव्या ने नहीं किया और इसी बात पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। खेलमंत्री एवं शिवपुरी विधायक के कार्यालय की ओर से समय रहते प्रभारी कलेक्टर को सूचना दे दी गई थी परंतु उन्होंने एन मौके पर चुप्पी साधे रखी। लास्ट मिनट पर 23 फरवरी को जब कार्यक्रम आयोजित होना था। मंत्री शिवपुरी आ चुकीं थीं। प्रभारी कलेक्टर ने एक पत्र जारी करके अनुमति रद्द कर दी। सामान्यत: ऐसे मामलों में यदि कोई परेशानी होती भी है तो कलेक्टर सीधे संबंधित मंत्री से फोन पर बात करके स्थिति अवगत कराते हैं परंतु आईएएस नेहा मारव्या ने केवल एक पत्र जारी किया। समझा जा रहा है कि यह हरकत मंत्री को परेशान करने के लिए साजिशन जारी किया गया। अब यशोधरा राजे सिंधिया नाराज हैं। सर्वविदित ही है कि यशोधरा राजे सिंधिया ऐसे मामलों में कभी किसी को माफ नहीं करतीं। इधर नेहा मारव्या के पुराने मामलों से अनुमान लगाया जा सकता है कि वो भी मामला संभालने के लिए कोई कदम नहीं उठाएंगी।  एक आईएएस अफसर की पहली विशेषता ही यह होती है कि वो हर हाल में विषम परिस्थितियों को भी अनुकूल कर ले, परंतु यह खूबी नेहा मारव्या के अब तक के कार्यकाल में कभी दिखाई नहीं दी। वो ना केवल विवाद पैदा कर देतीं हैं बल्कि उसमें घी भी डालतीं हैं।  

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 MadhyaBharat  27 February 2017

rti

  शैफाली गुप्ता  मध्यप्रदेश  राज्य सूचना आयोग ने कालेज प्राचार्य को गलतबयानी के लिए फटकार लगाते हुए सूचना के अधिकार के उल्लंघन का दोषी करार दिया है और उनके विरूध्द दस हजार रू. के जुर्माने का दंडादेष पारित किया है । शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय, पिछोर (षिवपुरी) के प्रभारी प्राचार्य डा. के. के. चतुर्वेदी को आदेश  दिया गया है कि अर्थदंड की राषि एक माह में आयोग में जमा कराएं ।  राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने इस मामले में दायर अंतिम अपील की 3 बार सुनवाई करने के बाद पारित आदेष में कहा कि लोक सूचना अधिकारी/प्रभारी प्राचार्य ने अपीलार्थी को उपलब्ध वांछित सूचना देने में हीलहवाला कर सूचना के अधिकार के प्रति इरादतन असद्भाव प्रदर्षित किया, अपीलार्थी व प्रथम अपीलीय अधिकारी को ही नहीं, बल्कि आयोग को भी गलत व भ्रामक जानकारी देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेष का ही नहीं, अपितु आयोग के आदेष का भी पालन नहीं किया /यही नहीं,  पर्याप्त समय, अवसर व चेतावनी देने के बाद भी प्रभारी प्राचार्य आयोग द्वारा उनके विरूध्द जारी कारण बताओ नोटिस की सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और कारण बताओ नोटिस का उत्तर भी प्रस्तुत नहीं किया । लोक सूचना अधिकारी यह सिध्द करने में विफल रहे कि उनके द्वारा आवेदन का युक्तियुक्त रूप से निर्दिष्ट अवधि में निराकरण किया गया ।  यह था मामला: अपीलार्थी अतुल गुप्ता ने आवेदन दि. 13/03/15 में लोक सूचना अधिकारी/प्रभारी कालेज प्राचार्य से षिक्षक दैनंदिनी, हाजिरी रजिस्टर व सी.सी.ए. के अंकपत्रक की जानकारी मांगी थी । प्रभारी प्राचार्य ने पहले इसे पर पक्ष की निजी व गोपनीय जानकारी बताकर पर पक्ष की असहमति के आधार पर देने से इंकार किया । जबकि प्रदत्त किए जाने हेतु रेकार्ड उपलब्ध था जो लोक दस्तावेज की श्रेणी में आता है । फिर प्रथम अपील की सुनवाई में प्रभारी प्राचार्य ने यह कहकर जानकारी देने में असमर्थता जता दी कि षिक्षक दैनंदिनी व हाजिरी रजिस्टर संबंधी रेकार्ड दीमक लग जाने के कारण मुख्य लिपिक द्वारा दि. 22/04/15 को जला दिया गया । अतः रेकार्ड उपलब्ध नहीं है।  प्रभारी प्राचार्य ने तब अपीलीय अधिकारी को यह नहीं बताया कि उन्होने ही दीमक प्रभावित रेकार्ड की सूची का अवलोकन कर मुख्य लिपिक को रेकार्ड नष्ट करने हेतु निर्देषित किया था । प्रभारी प्राचार्य ने यह तथ्य तब भी प्रकट नहीं किया जब अपीलीय अधिकारी ने उन्हें निर्देषित किया कि वे मुख्य लिपिक से जानकारी लें कि उन्होने किस दिनांक को, किसके आदेष से, कौन-कौन सा रेकार्ड नष्ट किया । जबकि प्रभारी प्राचार्य ने आयोग के समक्ष स्वीकार किया कि उन्होने ही रेकार्ड सूची का अवलोकन कर रेकार्ड तत्काल नष्ट करने का निर्देष दिया था ।  गलत बयानी:प्रभारी प्राचार्य ने सी.सी.ई. संबंधी जानकारी देने से यह कह कर इंकार कर दिया था कि विश्वविद्यालय  के नियमानुसार यह जानकारी विश्वविद्यालय को भेज दी  जाती है। उसे कालेज में रखने का प्रावधान नहीं है। इस पर अपीलीय अधिकारी ने प्राचार्य को निर्देषित किया कि वे  विश्वविद्यालय के उस नियम की प्रति अपीलार्थी को उपलब्ध कराएं जिसके तहत सी.सी.ई. रेकार्ड कालेज में रखने का प्रावधान नहीं है। पर प्रभारी प्राचार्य ने इस आदेश  का भी पालन नहीं किया । वे उनके द्वारा अपीलार्थी व प्रथम अपीलीय अधिकारी को दी गई इस जानकारी की सत्यता सिध्द करने में भी विफल रहे कि  विश्वविद्यालय के नियमानुसार सी.सी.ई. का रेकार्ड कालेज में 6 माह तक ही रखा जाता है । उसके बाद विष्वविद्यालय को भेेज दिया जाता है । उसके बाद यह रेकार्ड कालेज में रखने का कोई प्रावधान नहीं है । अंततः प्रभारी प्राचार्य ने विलंब से अपीलार्थी को सी.सी.ई. की वह जानकारी उपलब्ध करा दी जिसे उन्होंने अनुपलब्ध बताकर देने से इंकार कर दिया था । किन्तु अपीलार्थी षिक्षक दैनंदिनी व हाजिरी रजिस्टर की वह जानकारी प्राप्त करने से वंचित रह गया जो उस समय उपलब्ध थी और जिसे जानकारी देने की 30 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद जलाया गया ।  विधि विरूध्द कृत्य:आयोग के अनुसार उक्त जानकारी लोक दस्तावेज की श्रेणी में आती है जिसे पर पक्ष की निजी व गोपनीय जानकारी बताकर देने से इंकार किया जाना विधि विरूध्द था । प्रभारी प्राचार्य द्वारा कारण बताओ नोटिस का उत्तर पेश  करने के लिए डेढ़ माह का अतिरिक्त समय मांगा गया । इस पर आयुक्त आत्मदीप ने उन्हे इससे अधिक करीब 2 माह का समय देते हुए अगली पेषी पर जवाब पेश  करने का आदेश  दिया । पर प्रभारी प्राचार्य न अगली पेशी  पर हाजिर हुए, न इसका कोई कारण बताया और न ही कारण बताओ सूचना पत्र का उत्तर प्रेषित किया । उन्होने आयोग का आदेश  प्राप्त न होने की भी गलत जानकारी दी जबकि उनके कार्यालय द्वारा आयोग का आदेश प्राप्त होने की पुष्टि की गई ।   

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 MadhyaBharat  18 October 2016

विवादित

भोपाल में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा सर्जिकल स्ट्राइक में सबूत मांगे जाने पर कहा कि अरविन्द केजरीवाल ,संजय निरुपम जो कह रहे हैं उससे तो यही लगता है कि अपने माँ बाप की सुहाग रात का वीडियो देखकर अपने बाप पर भरोसा करेंगे। सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने को लेकर मप्र के भाजपा नेताओं के विवादित बयानों पर राजनीति और गरमा गई है। भोपाल से सांसद आलोक संजर और हुजूर विधानसभा सीट से विधायक रामेश्वर शर्मा ने सबूत मांगने वालों को लेकर विवादित बयान दिए हैं।  नेताओं के बीच चल रही यह जुबानी जंग भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक की गौरवगाथा को नुकसान पहुंचा रही है। दोनों नेताओं के बयान लगातार वायरल हो रहा है, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियों का जमकर विरोध किया है। आप ने एक बयान में कहा कि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा अपना मानसिक संतुलन खो चुके है,अगर देश विदेश में सवाल उठ रहे है सर्जिकल स्ट्राइक पर और श्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने देश को सही साबित करने की बात कही तो इसमें गलत क्या है। शर्मा की अभद्र टिपणी उन की छोटी और गन्दी सोच को दर्शा रही है।रामेश्वर शर्मा जनप्रतिनिधि है,उन्हें अपनी भाषा और मानसिकता पर संयम बरतना चाहिए। इस मसले पर सोशल और वेब मीडिया पर बीजेपी नेता रामेश्वर शर्मा  के बायान को घटिया बता कर इसकी आलोचना की गई है और रामेश्वर शर्मा से पूछा गया है क्या उनके यहाँ माता पिता की सुगागरात का वीडियो देखकर यह सब पता लगाया जाता है किसके पिता कौन है।  वहीँ शिवपुरी में सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत के सवाल पर कोंग्रेस सांसद  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा  सबूत मांगना गलत है हम देश के साथ हैं  ।

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 MadhyaBharat  5 October 2016

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92 हजार आँगनवाड़ी में होंगे न्यूट्री-कॉर्नर स्थापित  बच्चों को पोषण आहार की तरफ आकर्षित करने और उनमें रुचि जागृत करने के लिये प्रदेश की 92 हजार आँगनवाड़ी में 2 अक्टूबर से न्यूट्री-कॉर्नर स्थापित करने का अभियान चलाया जायेगा। इन न्यूट्री-कॉर्नर में पारदर्शी डब्बों में पोषण आहार जैसे- चना, मुरमुरा, गुड़ आदि को रखा जायेगा। इससे बच्चे आकर्षित होकर स्वयं इन डिब्बों से निकालकर मनपसंद चीज खा सकेंगे। इस अभिनव प्रयोग के संबंध में सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी एकीकृत बाल विकास को निर्देश जारी किये गये हैं।   न्यूट्री-कॉर्नर की स्थापना से पौष्टिक आहार की कमी से कुपोषित 3 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को आँगनवाड़ी केन्द्रों में ही पौष्टिक आहार लेने के लिये प्रेरित किया जा सकेगा। साथ ही आँगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ायी जा सकेगी। बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में लाभ, पोषक तत्वों की कमी की पूर्ति, बच्चों में पौष्टिक आहार के खाने की आदत डालना तथा समुदाय द्वारा पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा।   न्यूट्री-कॉर्नर संचालन के दिशा-निर्देश   न्यूट्री-कॉर्नर के संचालन के लिये प्रत्येक आँगनवाड़ी केन्द्र में एक स्थान निर्धारित कर पारदर्शी डिब्बों में पौष्टिक आहार रखा जायेगा, जिसे बच्चे आसानी से निकाल सकेंगे।   पौष्टिक आहार लेने के पहले बच्चों का हाथ धोना अनिवार्य होगा। आहार सामग्री की उपलब्धता जन-प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं समुदाय के जन-सहयोग से की जायेगी। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा प्रतिदिन न्यूट्री-कॉर्नर डिब्बे में पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। साथ ही आँगनवाड़ी केन्द्रों में उक्त पौष्टिक आहार सामग्री की उपलब्धता में सहयोग देने वालों की लिस्ट भी प्रदर्शित की जायेगी, जिसमें सहयोगकर्ता, दान-दाता का नाम एवं सहयोग राशि और सामग्री का विवरण अंकित होगा। न्यूट्री-कॉर्नर के संचालन में सहयोग के लिये स्वास्थ्य एवं पंचायत कर्मियों का सहयोग भी लिया जायेगा। कॉर्नर के प्रचार-प्रसार के लिये नील से दीवार-लेखन किया जायेगा, जिससे समुदाय को इसकी जानकारी हो सकेगी।

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 MadhyaBharat  8 September 2016

shivpuri barish

यशोधरा  ने शिवपुरी में  लोगों का दुखदर्द जाना शिवपुरी की  विधायक और मध्यप्रदेश सरकार की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया शहर के वर्षा प्रभावित इलाकों का प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निरीक्षण करते हुए उस समय भावुक हो उठीं। जब  मूसलाधार वर्षा से प्रभावित हुए नागरिकों ने उन्हें अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि अचानक आई बाढ़ से उनका गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया। इस पर यशोधरा राजे ने कहा कि मैं कई दिनों से नाला सफाई और नाले तथा तालाबों के किनारे हुए अतिक्रमणों को हटाने का कह रही थी, लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी। मैं इस अभियान में किसी के खिलाफ नहीं हूं बस चाहती हूं कि मुझे मेरा पुराना शहर लौटा दिया जाए। उनका मानना था कि यदि नालों की सफाई हो जाती और नाले तथा तालाबों के किनारे अतिक्रमण नहीं होते तो शहर को इतनी भीषण विपत्ति का सामना नहीं करना पड़ता। यशोधरा राजे के साथ वर्षा प्रभावित इलाकों का दौरा करने वालों में कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, एसपी मो. युसुफ कुर्रेशी, एसडीएम रूपेश उपाध्याय सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी और भाजपा नेता शामिल थे।    यशोधरा राजे सिंधिया ने  शिवपुरी पहुंचते ही उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ निरीक्षण करना शुरू कर दिया। सबसे पहले वह बैंक कॉलोनी में पहुंंचीं जहां उन्हें नागरिकों ने बताया कि किस तरह से वर्षा के रूप में आफत उनके घर में घुस आई। एक महिला ने रोते हुए बताया कि वर्षा के कारण उनके पुत्र का कम्प्यूटर सेट खराब हो गया वहीं कई महिलाओं ने घर के सामान को वर्षा के पानी से नुकसान पहुंचने की बात कही। खास बात यह रही कि इस जनसंपर्क ने यशोधरा राजे को कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति से भी अवगत कराया। वार्ड क्रमांक 37 में स्थित इस क्षेत्र के नागरिकों ने बताया कि यहां स्ट्रीट लाइट कभी नहीं जलती है और कॉलोनी के एक मोहल्ले में तमाम प्रयास के बाद भी सड़क नहीं बनीं। इस पर यशोधरा राजे ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुनीं और उनकी पीड़ा के निदान की दृष्टि से तुरंत स्वास्थ्य अधिकारी गोविन्द भार्गव को निर्देश दिया कि एक घंटे के भीतर यहां स्ट्रीट लाइट लग जाना चाहिए। सड़क बनाने के विषय में उन्होंने अपने निज सचिव से कहा कि यदि नगर पालिका के पास फण्ड न हो तो मेरी विधायक निधि से सड़क का निर्माण कराया जाए। वार्ड में पानी भरे होने पर उन्होंने संज्ञान लेते हुए तुरंत सफाई का निर्देश दिया। इसके बाद यशोधरा राजे कमलागंज क्षेत्र में पहुंचीं जहां कल नाला ओवरफ्लो होने के कारण पानी दुकानों और घरों में घुस गया था।    यशोधरा राजे ने दुकानों पर जाकर नुकसान का जायजा लिया और लोगों से कहा कि दुख की इस घड़ी में वह उनके साथ हैं तथा प्रशासन से मुआवजा तो नहीं, परंतु वह राहत अवश्य दिलाएंगी। कलेक्टर श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वे का काम आज से ही शुरू कर दिया गया है। कमलागंज में नाले के किनारे अतिक्रमण और नाले में सीवेज का मलबा पड़े होने पर उन्होंने नगर पालिका अधिकारियों से तुरंत मलबा साफ कराने का निर्देश दिया। इसके बाद यशोधरा राजे आदर्श नगर कॉलोनी में पहुंचीं जहां कल बरसात ने तबाही मचाई थी। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि नगर पालिका के पुराने नक्शे में झांसी तिराहा क्षेत्र में नाला बना हुआ था, लेकिन उस नाले की निकासी बंद होने पर बरसात का पानी कॉलोनी में जमा होता है। इस पर यशोधरा राजे ने एसडीएम रूपेश उपाध्याय को निर्देशित किया कि नाले की निकासी खोली जाए और यदि अतिक्रमण हों तो उसे हटाया जाए। इसके बाद यशोधरा राजे दीनदयालपुरम पहुंचीं जहां कॉलोनी में बरसात का पानी अभी भी जमा हुआ है तथा घर पानी में डूबे हैं।    यहां के नागरिकों ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने तालाब में कॉलोनी का निर्माण किया है। इस कारण समस्या पैदा हो रही है और वर्तमान में जो पानी जमा हो रहा है वह अतिक्रमण के कारण है। यदि अतिक्रमण हटा दिया जाए तो तुरंत पानी निकल जाएगा। कॉलोनी निवासी राकेश शर्मा के सुझाव पर यशोधरा राजे ने प्रशासन को तुरंत यहां हिटैची भेजकर पानी निकालने का निर्देश दिया। इसके पश्चात यशोधरा राजे गौशाला क्षेत्र में पहुंचीं जहां बरसात का पानी यहां रह रहे गरीब लोगों की झोपड़ी में घुस आया था। कॉलोनी निवासियों ने बताया कि बाढ़ में पांच-छह लोग घिर गए थे जिन्हें पुलिसकर्मियों ने साहस का परिचय देते हुए बाहर निकाला। इस पर यशोधरा राजे ने पुलिस अधीक्षक मो. युसुफ कुर्रेशी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कल विपत्ति का सामना करने में प्रशासन खासकर कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, एसडीएम रूपेश उपाध्याय की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।   

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 MadhyaBharat  3 September 2016

शिवपुरी में  60 फीसदी कम हो गए पर्यटक

बंद पड़ा है टूरिस्ट वेलकम सेंटर मध्प्रदेश के शिवपुरी जिले को पर्यटन उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए अब तक किए तमाम वादे और प्रयास गति नहीं पकड़ सके हैं। महाभारतकालीन इतिहास और पुरा संपदाएं होने के बावजूद शिवपुरी का नाम प्रदेश के पर्यटन नक्शे पर उभरकर सामने नहीं आ सका है। टूरिस्ट वेलकम सेंटर बंद है, माधव राष्ट्रीय उद्यान में भी अव्यवस्थाएं हैं। इस मुद्दे को गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यूपीए सरकार के समय लगातार उठाया था, लेकिन विभागीय हीलाहवाली ने टूरिस्ट का आकर्षण कम कर दिया, परिणाम स्वरूप बीते दो साल में ही यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जबकि 5 साल पहले तक यहां गर्मियों में भी पर्यटकों की खासी संख्या दर्ज की जाती थी।पर्यटन को रोजगार के रूप में विकसित करने के सभी राजनीतिक प्रयास अब तक विफल साबित हुए हैं। बता दें कि शिवपुरी अंचल को पर्यटन क्षेत्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पत्थर खदानों पर रोक लगा दी थी। पांच पत्थर खदानों से हटाई गई रोक को छोड़ दें तो जिले की पहचान बन चुका फर्शी पत्थर उद्योग बंद हो चुका है। करीब 70 हजार से ज्यादा मजदूर यहां से पलायन भी कर गए। पूर्व पर्यटन मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शिवपुरी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए भरपूर प्रयास किए, लेकिन उनके प्रयास भी असफल साबित हुए हैं।पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिवपुरी महोत्सव प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने की शुरूआत हुई थी। बाद में यह बंद हो गया। पर्यटन उद्योग को गति प्रदान करने के लिए हुई शुरूआत प्रशासनिक एवं राजनीतिक उदासीनता के कारण शिवपुरी के पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिला सका।वन्य प्राणियों के खुले में विचरण को देखने के लिए 1918 में सिंधिया राजवंश ने शिवपुरी में वन बिहार और आखेट स्थल के रूप में माधव राष्ट्रीय उद्यान को विकसित किया था। आजादी के बाद 1 जनवरी 1956 से प्रदेश सरकार ने इसे राष्टीय उद्यान घोषित कर दिया। वर्तमान में यह 354.61 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। विंध्याचल की वनाच्छादित चोटियों के अतिरिक्त अनेक पहाड़ी, नाले, झरने, भरके और खो हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। बीते करीब 5 साल से नेशनल पार्क में व्यवस्थाएं कम होने की वजह से इसकी पहचान भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं।यह भी हैं दर्शनीय स्थलशिवपुरी से 25 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 25 पर सुरवाया गांव में गढ़ी है। प्राचीन समय में इसे सरस्वती के मन्दिर के रूप में भी जाना जाता रहा है। इस गढ़ी की दीवारों पर अंकित नक्काशी और कारीगरी हिंदू स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना बयान करती है। पर्यटन विभाग की सुस्ती के चलते यह स्थान भी विकसित नहीं हो पाया।शिवपुरी में सिंधिया राजवंश के समय की सुन्दर छत्रियां, भदैयाकुंड, महाभारतकालीन सभ्यता का प्रतीक बाणगंगा शहर की सीमा में मौजूद दर्शनीय स्थल हैं।चांदपाठा झील में वोटिंग पर्यटकों को आकर्षित करती है। टूरिस्ट विलेज होटल के नजदीक होने के कारण इसका लाभ सैलानी उठाते हैं, लेकिन पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित न किए जाने के कारण यहां की वोट में सैलानी के आने पर भी ईंधन मौजूद नहीं रहता।

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इनामी डकैत चंदन मारा गया

शिवपुरी जिले के कुख्यात डकैत चन्दन गड़रिया को शिवपुरी पुलिस ने भौंती थाना क्षेत्र के करमई खदान के पास बाबरी झोरा केंवयाके जंगल में मार गिराने में सफलता हासिल की है। मारा गया चन्दन गड़रिया 30 हजार का इनामी डाकू था। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद युसूफ कुरैशी ने दी जानकारी में बताया की डकैत गिरोह के खोड़ चौकी क्षेत्र में होने की जानकारी उन्हें मुखबिर से मिली इस सूचना के आधार पर पुलिस पार्टियों का गठन कर चिन्हित इलाके की घेराबंदी कराइ गई वे खुद भी इस ऑपरेशन को लीड कर रहे थे । जंगल में तड़के 4 बजे पुलिस को आग जलती नजर आई गिरोह संभवतः खाना पाक रहा था ।पुलिस ने गैंग को ललकारा तो डाकुओं में खलबली मच गई। डकैत चन्दन और उसके साथियों ने पुलिस पर फायर खोल दिया पुलिस ने भी जबाबी फायरिंग की इस गोलीबारी में डकैत चन्दन गड़रिया जो की 30 हजार का इनामी था मारा गया चन्दन ही इस गिरोह का लीडर था। इसके साथी मोके से अंधेरे का लाभ उठाकर जंगल में भाग निकलने में सफल रहे। पुलिस इस गैंग का पीछा कर रही है। मौके से पुलिस ने तीन बंदूकें और कारतूस के अलावा दैनिक उपयोग की बस्तुएं भी बरामद की हैं। यहाँ कुछ बैग भी मिले हैं । डकैत चन्दन के पास से 12 बोर रायफल मिली है जबकि 2 बंदूकें वे भी बरामद की गई हैं।

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मछली बदल रही है तक़दीर

ऋषम जैनअशोक नगर जिले के रामनगर गाँव के 30 लोगों के आर्थिक हालात स्वयं के अथक प्रयास, मेहनत, कार्य करने के जुनून और वाटर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट से मिली मदद से बदल गये हैं।आज से पाँच साल पहले गाँव के 30 लोगों ने इंदिरा मछुआ सहकारी समिति बनाई। समिति ने जनपद पंचायत चंदेरी में पंजीयन करवाकर रुपये 7,950 की राशि से लीज पर जलाशय लिया। समिति सदस्यों की लगन के दृष्टिगत विश्व बैंक परियोजना द्वारा वर्ष 2011-12 में फसला जाल, नॉव, इन्सुलेटेड बॉक्स, तराजू सेट मत्स्य-बीज फिंगरलिंग परिवहन सहित रुपये 1 लाख 70 हजार से ज्यादा की सहायता दी गई।समिति ने विश्व बैंक परियोजना से सहायता मिलने के बाद पहले दो साल तक 3900 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन कर 2 लाख 54 हजर का शुद्ध लाभ प्राप्त किया। वर्ष 2012 में जलाशय से 5600 मीट्रिक टन मत्स्य-उत्पादन कर 3 लाख 36 हजार की आय प्राप्त की गई। रामनगर जलाशय से सामान्यत: प्रति हेक्टेयर 63 किलोग्राम मत्स्य-उत्पादन होता था। अब प्रति हेक्टेयर 91 किलोग्राम उत्पादन होने लगा है। समिति ने वर्ष 2012-13 में 80 हजार फिंगरलिंग संचयन किया जिससे 135 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ। समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति बदललने से उन्होंने अपने मकान बना लिये हैं तो कई सदस्य अपने बच्चों को अच्छी तालीम भी दिला पा रहे है।

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