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उज्जैन News


ऊर्जा मंत्री पारसचंद्र जैन

  मध्यप्रदेश में बिजली बिलों को लेकर लगातार आ रही शिकायतों से नाराज ऊर्जा मंत्री पारसचंद्र जैन अगले महीने से गांवों में बिजली पंचायत लगाएंगे। मंत्री खुद ज्यादा बिल और रीडिंग के मामले सुनेंगे और उन्हें मौके पर ही निपटाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद विभाग को यह कदम उठाना पड़ रहा है। प्रदेश में एक करोड़ 30 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बिजली बिल मुद्दा न बनें। इसलिए सरकार नई पद्धति से मीटर रीडिंग व बिल जनरेट करने की कोशिश में लगी है। उधर, बिलों में गड़बड़ियों को भी दुरस्त करने की कोशिशें चल रही हैं। इसी कड़ी में ऊर्जा विभाग ग्राम पंचायत स्तर पर बिजली पंचायत लगाने की तैयारी कर रहा है। इनमें से चुनिंदा पंचायतों में आयोजित शिविरों में विभाग के मंत्री जैन खुद पहुंचेंगे। शिविर में मंत्री और वरिष्ठ अफसर उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनेंगे और उनका मौके पर ही निराकरण करेंगे। विभाग ने जून में भी शिविर लगाया था, जिसमें एक लाख 10 हजार शिकायतें आई थीं, इनमें से सिर्फ 40 हजार का निराकरण हो पाया था। सूत्र बताते हैं कि बिजली बिलों को लेकर बढ़ती शिकायतों से मुख्यमंत्री नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार 24 में से 20 व 22 घंटे नियमित बिजली दे रही है, फिर भी जनता खुश नहीं है। संगठन की ओर से भी ऐसा ही फीडबैक आ रहा है। इसी कड़ी में पंचायत स्तर पर बिजली पंचायत लगाने की तैयारी है। बिजली बिलों में गड़बड़ी का मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को सदन में घेरने की कोशिश की थी। वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक भी लगातार गलत रीडिंग और बिजली बिल की शिकायतें करते रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में गलत रीडिंग और बिजली के बिल ज्यादा आने की पांच लाख से ज्यादा शिकायतें हैं। इसमें सभी तरह की शिकायतें बताई जा रही हैं। ऊर्जा मंत्री पारसचंद जैन ने कहा कि हम वृहद स्तर पर शिविर लगाकर उपभोक्ताओं की समस्या सुनेंगे और उनका मौके पर ही निराकरण करेंगे। कुछ जगह मैं भी जाऊंगा।       

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 MadhyaBharat  15 August 2017

ग्रीन गणेश

     पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) भोपाल की टीम ने आज उज्जैन के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महाराजवाड़ा में उज्जैन संभाग के मास्टर-ट्रेनर्स, विद्यार्थी, मूर्तिकार और प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश बनाने का प्रशिक्षण दिया। एप्को के अधिकारियों और स्थानीय पर्यावरणविद श्री राजेन्द्र सिंह और श्री राजीव पाहवा ने लोगों को पीओपी प्रतिमा विसर्जन से होने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराया। एप्को भोपाल के सर्वश्री जे.पी. नामदेव, राजेश रायकवार, राजमणि वाजपेयी, एम.डी. मिश्रा, दिलीप चक्रवर्ती, मूर्तिकार द्वय श्री प्रशांत एवं श्रीमती अंजलि गोटीवाले, सुश्री अलका सहस्रबुद्धे ने गणेश प्रतिमा के लिये मिट्टी तैयार करना, प्रतिमा बनाना और प्राकृतिक रंगों से रंगने की कला का प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को बताया गया कि पीओपी प्रतिमा के रंगों से विषाक्त हुए जल के उपयोग से किडनी और फेफड़े प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। एप्को टीम ने प्रतिभागियों को मिट्टी की गणेश प्रतिमा घर में ही या नगरीय निकायों द्वारा चिन्हित स्थलों पर ही विसर्जित करने की सलाह दी। अगले चरण में टीम उज्जैन के चार विद्यालयों और दो सार्वजनिक स्थलों पर मिट्टी से गणेश प्रतिमा निर्माण शिविर का आयोजन करेगी।  

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 MadhyaBharat  3 August 2017

महाकाल की सवारी

  मुख्यमंत्री चौहान सपत्नीक पूजन-अर्चन में शामिल हुए श्रावण मास के तीसरे सोमवार पर भगवान श्री महाकाल की सवारी पुलिस बैण्ड एवं घुड़सवार दल के साथ से क्षिप्रा तट पर पहुँची। यहाँ पर क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन हुआ। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के साथ पूजन में शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन यादव, श्री अनिल फिरोजिया, श्री इकबालसिंह गांधी सहित गणमान्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे। भगवान महाकालेश्वर की पालकी ने जैसे ही रामघाट पर प्रवेश किया, कड़ाबीन के धमाकों से रामघाट गुंजायमान हो गया। रामघाट एवं दत्त अखाड़ा घाट पर खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल की पालकी का जय महाकाल के नारे से स्वागत किया। श्रावण की फुहारों ने वातावरण में भक्तिरस घोल दिया। रामघाट पर पालकी को विश्राम देकर पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर की मूर्ति का पूजन-अर्चन करने के बाद पुरोहितों द्वारा आरती की गई। लगभग 45 मिनिट तक चले इस क्रम के बाद पालकी पुन: निर्धारित मार्ग पर भ्रमण के लिये रवाना हुई।  

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 MadhyaBharat  25 July 2017

rano dog

  उज्जैन में महाकाल मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही बम स्क्वॉड की डॉग रानो को एक माह तक आहार में मांस-मछली देना बंद कर दिया गया है। सावन माह को देखते हुए उसकी डाइट में परिवर्तन किया गया है। अब उसे मटन की जगह डिब्बाबंद फूड खिलाया जा रहा है। दरअसल, रानो सावन मास में मंदिर में रोज तैनात रहती है, वहीं सवारी के दौरान भी वह जांच करती है। इस कारण यह निर्णय लिया गया है। स्क्वॉड के पास वर्तमान में चार डॉग हैं। इनमें रानो सहित जैक, देवा नामक लेब्राडोर डॉग व टॉमी नामक जर्मन शेफर्ड नस्ल का श्वान शामिल है। चारों की जिम्मेदारी शहर के महत्वपूर्ण स्थलों की जांच कर विस्फोटक पकड़ने की है। महाकाल मंदिर में सावन व सवारी निकलने के दौरान रानो को जांच के लिए लाया जाता है। इसके जिम्मेदारी आरक्षक सुनील परिहार के पास है। सुनील के अनुसार रानो 2013 से मंदिर की सुरक्षा संभाल रही है। उसकी रोजाना की डाइट में 750 एमएल दूध, 400 ग्राम चावल अथवा 500 ग्राम आटे की रोटियां सहित 400 ग्राम मटन शामिल रहता है। हालांकि सावन में मांस देना बंद कर दिया जाता है। इसके लिए पशु चिकित्सक से अनुमति ली जाती है। उसे फिलहाल डिब्बाबंद आहार दिया जा रहा है। श्रावण मास के बाद रानो की डाइट में मांस शामिल कर दिया जाएगा।

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 MadhyaBharat  12 July 2017

माया सिंह

नगरीय विकास मंत्री  माया सिंह ने कहा है कि उज्जैन शहर को परम्परा के साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना और आवास गारंटी में उज्जैन में लगभग 200 करोड़ रूपये के कार्य किये जायेंगे। श्रीमती सिंह उज्जैन में 3 करोड़ 67 लाख की लागत के बुधवारिया हाट बाजार निर्माण का भूमि-पूजन कर रही थीं। ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन भी उपस्थित थे। नगरीय विकास मंत्री ने कहा कि नागरिकों की बुनियादी जरूरतों की पूर्ति, सुविधाओं के निर्माण और विकास के लिये राशि की कोई कमी नहीं है। उज्जैन को स्मार्ट सिटी के लिये चुना गया है। इसके कंसल्टेंट की नियुक्ति की जा रही है। स्मार्ट सिटी में वाटर सप्लाई, पार्क निर्माण, स्मार्ट परिवहन, आकर्षक लाइटिंग, सायक्लिंग झोन व्यवस्था जैसे कई कार्य किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि वेब आधारित प्रणाली से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को जोड़ा गया है। इससे पारदर्शिता के साथ विकास होगा। श्रीमती माया सिंह ने कहा कि उज्जैन दीनदयाल अन्त्योदय रसोई योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश में उज्जैन सबसे आगे निकला है। यहाँ तीन स्थान पर रसोई केन्द्र शुरू किया जाना बड़ी बात है। आर्थिक रूप से सम्पन्न व्यक्ति इस योजना में मदद के लिये आगे आ रहे हैं।

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 MadhyaBharat  21 April 2017

जयभान सिंह पवैया उज्जैन

जयभान सिंह पवैया उज्जैन में विक्रमोत्सव में  उच्च शिक्षा मंत्री  जयभान सिंह पवैया ने कहा है कि हमारे जीवन को शक्ति इतिहास से मिलती है। इतिहास को पढ़ो, वर्तमान को गढ़ो और आगे बढ़ो। श्री पवैया उज्जैन में विक्रमोत्सव को संबोधित कर रहे थे। श्री पवैया ने कहा कि हिन्दू नव-संवत्सर चैतन्य होकर सूर्य को अर्ध्य देकर मनाया जाता है। ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन ने नववर्ष की शुभकामना देते हुए कहा कि हिन्दू धर्म में गुड़ी पड़वा के रूप में नववर्ष मनाया जाता है। विधायक डॉ. मोहन यादव ने बताया कि सात-दिवसीय विक्रमोत्सव में सिक्कों की प्रदर्शनी, महानाट्य का मंचन, सुगम-संगीत आदि होंगे। इस अवसर पर प्रसिद्ध गायक श्री सुदेश भोंसले को विक्रम सुगम-संगीत अलंकरण प्रदान किया गया। डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित ग्रंथ श्री विशाला का लोकार्पण किया गया। अलंकरण के पहले श्री भोंसले क्षिप्रा नदी में नाव में सवार होकर भजन गाते हुए मंच पर पहुँचे।  

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 MadhyaBharat  29 March 2017

nuri khan

  उज्जैन में क्षिप्रा को प्रदूषण मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस की पूर्व प्रवक्ता नूरी खान ने आज अनूठा प्रदर्शन किया। उन्होंने ट्यूब और बांस से क्षिप्रा के बीच में एक मंच बनाया और अकेले ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गई। पुलिस और प्रशासन ने दोपहर में उन्हें मनाने का प्रयास किया, लेकिन वे अब तक बीच नदी में बैठी हुई हैं। नूरी खान आज तड़के चार बजे राम घाट पर अपने साथियों के साथ पहुंची और वे बीच नदी में जाकर अकेले ही भूख हड़ताल पर बैठ गई। नूरी खान ने इसके लिए अपने सामाजिक संगठन के माध्यम से यह आंदोलन शुरू किया है। नूरी खान ने प्रदेश टुडे को भेजे कुछ फोटो के माध्यम से यह बताया कि क्षिप्रा नदी में कई गंदे नाले मिल रहे हैं। शहर की सारी गंदगी पवित्र क्षिप्रा नदी में मिल रही है। उधर दोपहर में पुलिस की टीम बोट से नूरी खान तक पहुंची। उनके मंच का चारों तरफ चक्कर लगाने के बाद पुलिस अफसरों ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने का कहा, फिलहाल नूरी खान का बीच नदी में अनशन जारी है।

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 MadhyaBharat  25 February 2017

पीओएस मशीन को वेट एवं एंट्री टैक्स से छूट

पीओएस मशीन को वेट एवं एंट्री टैक्स से छूट मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सिंहस्थ 2016 में संलग्न रहे अधिकारी-कर्मचारियों को 5 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि प्रति शासकीय सेवक के मान से देने की मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन को मध्यप्रदेश वेट अधिनियम 2002 के अंतर्गत 14 प्रतिशत वेट और 2 प्रतिशत एंट्री टैक्स कुल 16 प्रतिशत टैक्स से छूट देने की स्वीकृति दी । मंत्रि-परिषद ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में पारेषण प्रणाली सुदृढ़ीकरण की पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की 354 करोड़ 78 लाख की राशि तथा तीनों विद्युत वितरण कंपनियों की वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण की 880 करोड़ 28 लाख की राशि की योजनाओं का अनुमोदन किया । मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश श्रम न्यायिक संस्थान के पीठासीन अधिकारियों के हित लाभ के संबंध में बनाये गये नियम ' मध्यप्रदेश श्रम न्यायिक सेवा (वेतन, पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति नियमों का पुनरीक्षण) नियम 2016' स्वीकृत किया। इसके अनुसार प्रदेश की न्यायिक सेवा के सदस्यों के ही समान श्रम न्यायाधीशों को भी वेतन, पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ समान रुप से प्राप्त हो सकेंगे ।  

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 MadhyaBharat  10 January 2017

 बाल हृदय रोगी

मुख्यमंत्री ने बच्चों से मिलकर बाँटी खुशियाँ  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश का कोई भी गरीब इलाज से वंचित नहीं रहेगा। पूरे प्रदेश में चिकित्सा शिविर लगाये जा रहे हैं। इन शिविरों में बाल हृदय रोगियों, श्रवण-बाधितों को कॉक्लियर इम्प्लांट, कैंसर और किडनी रोग के मरीजों की पहचान कर उनका नि:शुल्क उपचार किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज उज्जैन में पुलिस कम्युनिटी हॉल में जिले के रोगमुक्त हुए बाल हृदय रोगी बच्चों एवं कॉक्लियर इम्प्लांट से लाभान्वित श्रवण-बाधित बच्चों से मिलकर उनकी खुशियों में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने बालक मयंक व्यास का जन्म-दिन मनाया तथा केक काटकर सभी बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि रोगमुक्त हुए बच्चों से मिलकर उन्हें आत्मिक संतुष्टि हो रही है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना में बड़ी संख्या में नि:शुल्क ऑपरेशन करवाने पर बधाई दी। मुख्यमंत्री ने ऐसे बच्चों, जो जीवन में कभी सुन नहीं पाते, को 6 लाख 50 हजार रूपये की लागत के कॉक्लियर इम्प्लांट कर उनको सुनने योग्य बनाने पर भी बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के और बच्चों को चिन्हित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने इन सभी बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने की शुभकामनाएँ दी। मुख्यमंत्री ने श्रवण-बाधित बच्चों को श्रवण यंत्र भी वितरित किये। सफलता की कहानी का विमोचन मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना में जिले में अब तक 51 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इन ऑपरेशनों पर आधारित सफलता की कहानी पुस्तक का विमोचन किया। शाइना बी को आशीर्वाद दिया मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हाल ही में मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना में निकाह करने वाले नव-दम्पत्ति शाइना बी एवं इरफान को आशीर्वाद दिया एवं उपहार भेंट किये। उल्लेखनीय है कि शाइना बी का निकाह मुख्यमंत्री के निर्देश पर विगत दिसम्बर माह में धूमधाम से किया गया था। बच्चों को रोटरी क्लब की ओर से खिलौने भेंट संवाद-शुभाशीष कार्यक्रम में बाल हृदय उपचार योजना से लाभान्वित 51 बच्चों, कॉक्लियर इम्प्लांट करवा चुके 05 बच्चों तथा श्रवण-बाधित 37 बच्चों को खिलौने भेंट किये गये। खिलौने और उपहार रोटरी क्लब द्वारा प्रदान किये गये थे। एक करोड़ सात लाख रूपये व्यय मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना में 51 बच्चों के हृदय के ऑपरेशन पर 68 लाख 20 हजार रूपये तथा 05 बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट करने पर 32 लाख 50 हजार रूपये का व्यय जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया है। कॉक्लियर इम्प्लांट पर प्रति बच्चे व्यय 6 लाख 50 हजार रूपये है। संवाद शुभाषीश कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन, सांसद डॉ. चिन्तामणि मालवीय, विधायक डॉ. मोहन यादव, श्री अनिल फिरोजिया, श्री बहादुर सिंह चौहान, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष श्री दिवाकर नातू भी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  5 January 2017

rajypal solanki

राज्यपाल सोलंकी द्वारा कालिदास समारोह का समापन  हरियाणा के राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा है कि कालिदास पूरे देश का गौरव हैं। उज्जैन नगरी से पूरे विश्व को संस्कृति का सन्देश मिलता है। उज्जैन की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता। यह पवित्र नगरी तो है ही, लेकिन देश-विदेश की संस्कृति की परिचायक भी है। राज्यपाल श्री सोलंकी  उज्जैन में कालिदास समारोह के समापन अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल श्री सोलंकी ने कहा कि संस्कृति के दर्शन करना हो, तो उज्जैन आकर रहें। कालिदास ने महाकाव्य रघुवंशम् लिखा। यह आज भी सटीक है। राज्य और प्रजा के सम्बन्ध कैसे होते हैं, इसके बारे में लिखते हुए महाकवि कालिदास कहते हैं कि आदर्श राजा के लिये प्रजा सन्तान जैसी होती है, वह उसका पूरा ध्यान रखता है। किसी राजा के राज्य में यदि प्रजा दु:खी होती है तो वह राजा दण्ड का भागी होता है। आज हम जिस गुड गवर्नेंस की बात कहते हैं, उसका विषद चित्रण कालिदास ने अपने महाकाव्य में किया है। राज्यपाल ने कहा कि महाकवि कालिदास को प्रासंगिक बनाने के लिये और उनके विचारों का क्रियान्वयन करने के लिये कालिदास समारोह का आयोजन कर निश्चित रूप से प्रशंसा का कार्य किया जा रहा है। संस्कृत विद्वान श्री कमलेशदत्त त्रिपाठी ने कहा कि महाकवि कालिदास राष्ट्रकवि थे तथा कालिदास समारोह राष्ट्रीय पर्व है। समारोह के राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्वरूप को पुन: स्थापित किया जाना चाहिये। कालिदास के साहित्य में सांस्कृतिक एकता, विश्व बंधुत्व तथा विश्व एकात्मता का सन्देश मिलता है। कालिदास समारोह के माध्यम से इसे समूचे विश्व में पहुँचाया जाना चाहिये। स्वागत भाषण प्रभारी कुलपति श्री एच.पी.सिंह ने दिया। कार्यक्रम में विधायक डॉ.मोहन यादव,  बहादुरसिंह चौहान,  अनिल फिरोजिया और कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक  पी.के.झा उपस्थित थे। पुरस्कार वितरण समापन समारोह में हरियाणा के राज्यपाल श्री कप्तानसिंह सोलंकी ने चित्रकला एवं मूर्तिकला प्रतियोगिता के विजेताओं को 51-51 हजार रूपये के चेक एवं प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में चित्रकला में अहमदाबाद के श्री प्रशांत एम.पटेल, आष्टा की श्रीमती अलका पाठक, उज्जैन के श्री जगदीश नागर श्रीमती प्रतिभा सिंह शामिल हैं। मूर्तिकला में श्री नीतेश विश्वकर्मा को पुरस्कृत किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्महाविद्यालयीन वाद-विवाद और भाषण प्रतियोगिता तथा स्कूली विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया। आभार संस्कृति आयुक्त  राजेश मिश्रा ने माना। हरियाणा के राज्यपाल ने किये महाकाल के दर्शन हरियाणा के राज्यपाल  कप्तानसिंह सोलंकी ने अखिल भारतीय कालिदास समारोह के समापन कार्यक्रम के बाद श्री महाकालेश्वर मन्दिर में सदाशिव भगवान महाकाल के दर्शन किये। उन्होंने भगवान महाकाल से देश के विकास एवं देशवासियों की सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की। इस अवसर पर विधायक डॉ.मोहन यादव, श्री रूप पमनानी, पूर्व महापौर श्री मदनलाल ललावत, श्रीपाद जोशी तथा प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। दर्शन के बाद नन्दी सभा मण्डप में राज्यपाल श्री सोलंकी को श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति के प्रशासक श्री रजनीश कसेरा ने भगवान महाकाल का चित्र, प्रसाद, शाल भेंटकर सम्मानित किया।      

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 MadhyaBharat  17 November 2016

स्‍मार्ट सिटी  में उज्जैन और ग्‍वालियर

देश में स्‍मार्ट सिटी के लिए तीसरी लिस्‍ट मंगलवार को दिल्ली में जारी हो गई। केंद्रीय मंत्री वैकेंया नायडू ने  मीडिया के सामने उन शहरों के नाम घोषित किए जिन्‍हें स्‍मार्ट सिटी बनाया जाएगा। इस लिस्‍ट में मध्‍य प्रदेश के दो शहर उज्‍जैन और ग्‍वालियर को शामिल किया गया है। पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वित्‍त वर्ष में 27 बची हुई स्‍मार्ट सिटी की जगहों को भरने के लिए कुल 63 नाम आए थे जिनमें से 27 का चयन कर लिया गया है। यह 27 शहर देश के 12 राज्‍यों से चुने गए हैं। तीसरी लिस्‍ट में सबसे ज्‍यादा 5 शहर महाराष्ट्र के हैं वहीं 4-4 शहर तमिलनाडु और कर्नाटक के हैं, 3 शहर यूपी के जबकि 2-2 शहर मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान के हैं। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, उड़ीसा, नागालैंड और सिक्‍कीम के एक-एक शहर को शामिल किया गया है।नायडू ने आगे बताया कि इस घोषणा के साथ ही 60 शहरों को स्‍मार्ट सिटी बनाने के लिए 1,44,742 कराेड़ रुपए का प्रावधान भी कर दिया गया है। यह हैं 27 श्‍हारों के नाम आगरा ,अजमेर,अमृतसर, औरंगाबाद,ग्‍वालियर, हुबली-धरवाड, जलंधर,कल्‍याण-डोंबिवली ,कानपुर,कोहिमा,कोटा,मदुरै,मैंगलुरु,नागपुर ,नामची, नासिक, राउरकेला, सलेम,शिवमोगा ,ठाणे ,तंजावुर,तिरुपती,तुमकुर,उज्जैन,वड़ोदरा,वाराणसी,वैल्‍लोर।   

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 MadhyaBharat  20 September 2016

cm ujjain

  मुख्यमंत्री उज्जैनवासियों के प्रति किया आभार प्रकट        मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सिंहस्थ कुंभ महापर्व को सफल बनाने में उज्जैन शहर के नागरिकों के द्वारा सहृदयता एवं आत्मीयता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उज्जैन वासियों ने ‘अति‍थि देवो भव:’ सूक्तिवाक्य को चरितार्थ किया। शहरवासियों के इसी अपार स्नेह, प्रेम और व्यवहार ने सम्पूर्ण विश्व में सिंहस्थ की प्रतिष्ठा को और अधिक बढ़ाया और अपनी विश्वव्यापी पहचान कायम की। श्री चौहान आज उज्जैन में नागरिकों के प्रति आभार रैली को संबोधित कर रहे थे।   श्री चौहान  सपत्नीक उज्जैन पहुँचे। उन्होंने महाकाल मन्दिर पहुँचकर भूतभावन भगवान महाकाल के दर्शन कर महाकाल मन्दिर से आभार रैली प्रारम्भ की। रैली महाकाल मन्दिर परिसर से प्रारम्भ होकर गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, गोपाल मन्दिर, ढाबा रोड, दानीगेट, गणगौर दरवाजा और रामानुजकोट होती हुई रामघाट पर समाप्त हुई। मुख्यमंत्री ने रामघाट पर माँ क्षिप्रा का पूजन-अर्चन किया। बड़ी संख्या में शहरवासी रैली मार्ग पर उपस्थित थे। जगह-जगह पर सामाजिक संस्थानों, व्यापारी संघ, कर्मचारी संघ, अजाक्स, पंचक्रोशी उप समिति ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत-सम्मान करते हुए अभिनन्दन किया।   इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  पारस जैन, सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष  माखनसिंह, सांसद डॉ. चिन्तामणि मालवीय, राज्य सभा सांसद डॉ.सत्यनारायण जटिया, विधायक डॉ.मोहन यादव, अनिल फिरोजिया,  बहादुरसिंह चौहान, जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष  प्रदीप पाण्डेय,  इकबालसिंह गांधी, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष  बाबूलाल जैन,  रूप पमनानी और जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  30 May 2016

cm shivraj

    स्वतंत्रता दिवस पर मेडल से होंगे सम्मानित       सिंहस्थ में पुलिस जवानों ने नींव के पत्थर की भूमिका निभाई। उनकी कर्त्तव्य परायणता से ही सिंहस्थ निर्विघ्न सम्पन्न हुआ। यह बात बुधवार को सपत्नीक उज्जैन पहुँचे मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने डीआरपी लाइन पुलिस ग्राउण्ड में पुलिस सहभोज में कही। उन्होंने सिंहस्थ में आत्मीयता और अनुपम व्यवहार के साथ सेवा देने वाले पुलिसकर्मियों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जवानों के हौसले बुलन्द थे। कइयों ने तो श्रवण कुमार की भूमिका भी निभाई। पुलिस के व्यवहार की चहुँओर सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस फोर्स पर गर्व है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष श्री माखनसिंह और पुलिस महानिदेशक श्री सुरेंद्रसिंह भी उपस्थित थे।   मुख्यमंत्री ने कहा कि सफल सिंहस्थ में सराहनीय सेवा देने वाले पुलिस के जवानों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेडल और प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया जायेगा। उनके खाते में पाँच हजार की धनराशि पहुँचेगी। इसे मेहनताना न मानें, यह सम्मान-निधि है।   इसके बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान 32वी बटालियन के परिसर में पहुँचे। वहाँ वे सीआरपीएफ, बीएसएफ, पैरामिलेट्री फोर्स और होमगार्ड के सहभोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष  प्रदीप पाण्डेय, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, संभागायुक्त डॉ.रवीन्द्र पसतोर, एडीजी  व्ही.मधुकुमार, डीआईजी  राकेश गुप्ता, कलेक्टर  कवीन्द्र कियावत, एसपी  एम.एस.वर्मा उपस्थित थे।   

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 MadhyaBharat  26 May 2016

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        मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के नव-निर्माण के अभियान में साधु-संतों का आशीर्वाद सदैव बना रहे। साधु-संतों का आशीर्वाद पाकर मैं अभिभूत हूँ, गदगद हूँ। मध्यप्रदेश की धरा पर महाकाल की नगरी में ऐसे संत विराजे हैं, मन करता है कि वे मध्यप्रदेश छोड़कर कभी नहीं जाएँ। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज उज्जैन में सिंहस्थ के सफल आयोजन के बाद सिंहस्थ में आये सभी तेरह अखाड़ों के साधु-संतों, श्री-महंतों का अभिनंदन कर आभार व्यक्त कर रहे थे।    निरंजनी अखाड़े की छावनी में इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर विराजे श्रेष्ठ संतजन, योगियों का सारा जीवन सनातन धर्म की रक्षा एवं धर्मध्वजा को धारण करने के लिये समर्पित है। उनके चरणों में प्रणाम। उन्होंने कहा कि वे तपस्या के भाव से काम कर रहें हैं, सिंहस्थ सानन्द सम्पन्न हुआ है। बाबा महाकाल की कृपा और संतों के आशीर्वाद से प्रदेश के विकास की कामना के साथ अन्तरात्मा से श्रेष्ठतम करने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा के दोनों तट पर फलदार पेड़ लगाने का अभियान चलाया जायेगा। क्षिप्रा के दोनों तट पर भी फलदार पेड़ लगाने का व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम होगा। इस कार्य में साधु-संतों की भी भागीदारी होगी। उन्होंने साधु-सन्तों से इस अभियान में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया।   अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री नरेंद्रगिरिजी ने कहा कि श्री शिवराजसिंह चौहान ने सन्तों की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूरे विश्व को सिंहस्थ के माध्यम से यह सन्देश गया कि यहाँ सम्प्रदाय के नाम पर लड़ाई नहीं होती, इसीलिये सभी अखाड़ों ने मिलकर एकसाथ स्नान किया है। भारत की अखंडता एवं एकता के प्रदर्शन में सिंहस्थ की अहम भूमिका रही है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार, जनता और सभी अधिकारी-कर्मचारियों का आभार जताया कि उन्होंने साधु-सन्तों की खूब सेवा की।   मुख्यमंत्री  चौहान ने सभी तेरह अखाड़ों के पदाधिकारियों, श्री-महन्तों, महन्तों को शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंटकर उनका अभिनन्दन किया, आशीर्वाद लिया और सिंहस्थ की सफलता में दिये गये योगदान के लिये आभार जताया। श्री नरेंद्रगिरिजी, महामंत्री श्री हरिगिरिजी एवं सभी अखाड़ा के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री श्री चौहान का पुष्पहार पहनाकर, शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मान किया। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने सिंहस्थ में सेवाएँ देने वाले प्रभारी मंत्री  भूपेन्द्रसिंह, मंत्री  पारस जैन, केन्द्रीय सिंहस्थ समिति अध्यक्ष  माखनसिंह, महापौर  मीना जोनवाल, संभागायुक्त डॉ.रवीन्द्र पस्तोर, एडीजीपी  व्ही.मधुकुमार, डीआईजी  राकेश गुप्ता, कलेक्टर  कवीन्द्र कियावत, पुलिस अधीक्षक  मनोहरसिंह वर्मा, मेला अधिकारी  अविनाश लवानिया, जिला पंचायत सीईओ  रूचिका चौहान, आयुक्त इन्दौर नगर निगम  मनीष सिंह, अपर आयुक्त  आशीष सिंह सहित सभी झोनल मजिस्ट्रेट, पुलिस झोनल अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को पुष्पहार पहनाकर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।   साधु-सन्तों को चाँदी की थाली में मुख्यमंत्री ने परोसे पकवान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार द्वारा आयोजित साधु-सन्तों के विदाई समारोह में सभी अखाड़ों के साधु-सन्तों, श्री-महन्तों को आत्मीय भावभीनी बिदाई देने के बाद सहभोज में चाँदी की थाली में भोजन परोसा। मुख्यमंत्री ने धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह एवं दोनों पुत्रों के साथ सहभोज में शामिल होकर भोजन प्रसादी ग्रहण की। प्रभारी मंत्री भूपेन्द्रसिंह ने भी सपत्नीक सहभोज में भाग लिया। सहभोज में सभी तेरह अखाड़ों के पदाधिकारी, श्री-महन्त एवं साधु-सन्त भी शामिल हुए।     Attachments area          

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 MadhyaBharat  25 May 2016

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  मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा अभूतपूर्व और अलौकिक रहा सिंहस्थ    मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने आस्था और अध्यात्म के महाकुम्भ सिंहस्थ 2016 के सानंद संपन्न होने एवं अभूतपूर्व रूप से इसे सफल बनाने के लिए करोड़ों श्रद्धालु, संत समुदाय, महामंडलेश्वरों, अखाड़ा प्रमुखों, मुनियों, अखाड़ा परिषद और सभी धर्मों के गुरुओं को सहयोग, समर्थन, मार्गदर्शन और भागीदारी के लिए सादर नमन प्रेषित करते हुए उन्हें अन्तःकरण से धन्यवाद दिया है।    श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बाद श्रद्धालुओं ने धैर्य का परिचय दिया और प्रशासन, जन सहयोग, स्वयं-सेवकों और स्थानीय नागरिकों की मदद से व्यवस्था को चंद घंटों में पुनः स्थापित कर दिया गया। सिंहस्थ को अबाध रूप से जारी रखने में सभी सम्बंधित लोगों ने जो तत्परता दिखाई वह अत्यंत सराहनीय और अविस्मरणीय है।   श्री चौहान ने महाकुम्भ के  सफल आयोजन में से जुड़े विभाग एवं अधिकारी- कर्मचारी, सफाईकर्मियों और उज्जैनवासियों को भी धन्यवाद दिया है जिन्होंने रात-दिन के अथक परिश्रम से श्रद्धालुओं की सुविधाओँ का ख्याल  रखा और समर्पण भाव से अपनी सेवाएँ दी।   श्री चौहान ने कहा कि करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देना, सूचना देना, मदद करना, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को स्नान घाट तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण कार्य था लेकिन पूरी दक्षता के साथ इसे पूरा किया गया।   होमगार्ड से लेकर सभी  पुलिस बल ने अपनी सतर्कता से किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं होने दी। अखाड़ा परिषद और सभी अखाड़ों, देशी और विदेशी मीडिया, विद्वानों, स्वयंसेवी और सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं को कोटिश: धन्यवाद जिनका पूरा सहयोग सरकार को मिला। इससे आस्था और विश्वास का यह यह अदभुत महापर्व सानंद सम्पन्न हुआ।     Attachments area          

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 MadhyaBharat  22 May 2016

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  अमित बागलीकर  मालेगांव ब्लास्ट में आरोपी  साध्वी प्रज्ञा भारती ने न्यायालय में सिंहस्थ में आने की अपील करी थी जिसे न्यायालय ने स्वीकार करा जिस पर वे 18 मई को उज्जैन सिंहस्थ मेला प्रांगण के जयवंदे मातरम आश्रम पर आई जहां पत्रकारों के समक्ष उन्होनें अपनी आप बीती तो सुनाई साथ ही म.प्र. सरकार की आलोचना की और कहा   मैं बहुत पीडि़त और तकलीफ में हूं हर पल मैं बीमार रहती हूँ मेरी स्थिती ऐसी नहीं थी की मैं आमरण अनशन कर सकूं मुझे मजबूर किया गया जिस पर मुझे आमरण अनशन पर बैठना पड़ा इसका परिणाम  शिवराज सिंह चौहान को भुगतना पड़ेगा। जो पूर्ण रूप से हिन्दू  है और जिनका शुद्ध रक्त हिन्दू है वो मेरा समर्थन करेंगे, अन्यथा जिनमें मिलावट है समर्थन नहीं करेंगे।  साध्वी प्रज्ञा ने कहा गली कूचों की राजनीति सन्यासी नहीं करते ,सन्यासी तो दण्डनीति करते हैं। जो अब वे कर रही हैं। मोदी राष्ट्रवादी नेता हैं, जिन लोगों की वजह से लगातार 8 वर्ष का कारावास मुझे भुगतना पड़ा है मुझे  निरप्राध दंड दिया है ,जिन्होंने यह सब किया है उन्हें मैं बाहर निकलकर दंड दिलवाऊंगी। मैं मीडिया का सम्मान करती हूँ , जिन्होनें मेरा अभी तक समर्थन किया वो है मीडिया चौथा स्तंभ है, जो बहुत महत्वपूर्ण है। सिंहस्थ में चल रहे आयोजन को देखूंगी लोग मुझे देखेंगे मैं लोगों को देखूंगी।    देश के बड़े अपराध से जूझ रही साध्वी प्रज्ञा भारती ने मीडिया से   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की आलोचना कर कहा की मुझे शिवराज ने मजबूर किया जिसके कारण मुझे अनशन पर बैठना पड़ा शिवराज को भुगतना पड़ेगा। न्यायालय का सम्मान करती हूं व नियमों का पालन करूंगी। सरकार ने मदद नहीं की सरकार को कोर्ट ने आदेश दिया की मुझे सिंहस्थ में लेकर जाया जाये जिस पर मैं सिंहस्थ दर्शन करने आई हूं। मेरा विरोध कानून तोडऩे वालों से है। इस प्रकार से अपनी बातों को साफ कर साध्वी प्रज्ञा भारती ने अपनी और से विरोध किया।    साध्वी प्रज्ञा भारती के उज्जैन आने की खबर जैसे ही पुलिस विभाग को लगी उनके समस्त आला अधिकारी सिंहस्थ की व्यवस्था को छोड़ साध्वी की सेवा में लग गये जिसमें 9 पुलिस अधीक्षक, 1 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 4 नगर पुलिस अधीक्षक, 2 थाना प्रभारी, के साथ भारी पुलिस बल तैनात था जिसको लेकर पुलिस विभाग की सक्रियता दिखाई दी। पुलिस बल के साथ एम्बुलेंस व अन्य प्रशासनीक व्यवस्थाओं का अमला मौजूद स्नान घाट तक मौजूद था।  शिव कटघरे में....     भगवान शिव महांकाल की पावन नगरी में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को साध्वी ने आरोपियों के कटघरे में लेते हुए कह ही दिया की शिव की नगरी में शिवराज को भुगतना पड़ेगा जिसने मुझ प्रताडि़ता को अनशन करने पर मजूबर किया। दंड दिलवाऊंगी.....      मैंने जो सहा है वो निरप्राध दंड था जिसे मुझे मिली सजा होने के बाद लोग नहीं भूले नहीं है। मेरे ठाकुर जी ने फल दे ही दिया है और जो इस दंड के असल हकदार हैं उन्हें दंड मैं बाहर आकर दिलवाऊंगी।     सिंहस्थ को लेकर यातायात व्यवस्था आंरभ में चरमरा गई थी जिसके फलस्वरूप सिंहस्थ को मात्र दो ही दिन बीते थे की पुन: भोपाल में यातायात व्यवस्था की बैठक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ली थी उसके बावजूद जब मंगलवार को साध्वी जब मेला स्थल पर पंहुची तो यातायात व्यवस्था की लचीली प्रणाली में खुद साध्वी काफी देर तक फंसी रही स्नान करने के लिये घाट तक जाम लगने से देर शाम उन्हें हो गई। जिस पर साध्वी ने अपना गुस्सा कुछ पी लिया मगर लचर प्रणाली की आलोचना करने से इनके साथ आये लोग भी नहीं चुके।      Attachments area          

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 MadhyaBharat  21 May 2016

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान

      मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेटी है तो सृष्टि है। बेटियों को मान-सम्मान दें। श्री चौहान मंगलवार रात को उज्जैन में सिंहस्थ मेला क्षेत्र में दाती महाराज के आश्रम में उनसे आशीर्वाद लेने पहुँचे थे।    श्री चौहान ने कहा कि आज बेटियों का कोई मुकाबला नहीं है। हर क्षेत्र में बेटियाँ नाम रोशन कर रही हैं। समाज में लिंग अनुपात बराबर न होने से असमानता बढ़ रही है। बेटियों की सुरक्षा जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि बेटियों के जन्‍म को वरदान बनाने के लिए प्रदेश में लाड़ली लक्ष्‍मी योजना प्रारंभ की है। बेटी जब 21 वर्ष की हो जायेगी तो उसे 1 लाख 18 हजार रुपये मिलेंगे। बेटियों की शिक्षा के लिए नि:शुल्‍क किताबें, साईकिल, गणवेश दिया जाता है, ताकि वे आगे बढ़ सके।  सरकार ने निर्धन परिवार की बेटियों के विवाह के लिए मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना प्रारंभ की है। बेटियों को नौकरी में 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्‍हें उद्योग स्‍थापित करने के लिए पाँच प्रतिशत की अलग से छूट दी जाती है। निर्वाचन में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसी का परिणाम है कि आज पंचायत एवं स्‍थानीय निकाय में महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व लगभग 56 प्रतिशत है। उन्‍होंने कहा कि जिन परिवारों में बेटियाँ नहीं हैं उन्‍हें बेटी गोद लेनी चाहिए। मुख्‍यमंत्री ने सभी उपस्थितों को हाथ उठाकर बेटियों के मान-सम्‍मान, सुरक्षा एवं उनके जन्‍म के लिए संकल्‍प दिलवाया।   मुख्‍यमंत्री श्री चौहान ने शिवानी, सुमित्रा, मनीषा सहित दस बेटियों को सोलर फेन, सोलर लाईट एवं स्‍कूल बेग वितरित किये। उन्‍होंने संतोष बाई, राव बाई, चन्‍द्रकला , गंगा बाई , कला बाई , शिवा बाई, मन्‍नू बाई, श्‍याम बाई,भूरी बाई, कांता बाई, सुंदर बाई, अनिता एवं चन्‍दा बाई को सिलाई मशीन वितरित की।   दाती महाराज ने कहा कि वे बेटियों की सुरक्षा एवं उनके भविष्‍य निर्माण के लिए सुमंगला योजना संचालित कर रहे हैं। उनके आश्रम में तीन हजार बेटियाँ रहकर पढ़ रही हैं। उन्‍होंने घोषणा की कि उज्‍जैन के सभी विकासखंडों में 12वीं कक्षा में मेरिट में आने वाली बेटियों को 21-21 हजार रुपये और प्रदेश स्‍तर में मेरिट में आने वाली बेटियों को दो पहिया वाहन प्रदान करेंगे। उन्‍होंने कहा कि मध्‍यप्रदेश सरकार की सहायता से मध्‍यप्रदेश में भी वे बेटियों की सुरक्षा एवं उनके भविष्‍य निर्माण के लिए उनकी नौकरी एवं पढ़ाई के लिए काम करेंगे। मुख्‍यमंत्री ने दाती महाराज से प्रदेश की उन्‍नति एवं विकास के लिए भी आशीर्वाद लिया।

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 MadhyaBharat  19 May 2016

 मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान

      मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेटी है तो सृष्टि है। बेटियों को मान-सम्मान दें। श्री चौहान मंगलवार रात को उज्जैन में सिंहस्थ मेला क्षेत्र में दाती महाराज के आश्रम में उनसे आशीर्वाद लेने पहुँचे थे।    श्री चौहान ने कहा कि आज बेटियों का कोई मुकाबला नहीं है। हर क्षेत्र में बेटियाँ नाम रोशन कर रही हैं। समाज में लिंग अनुपात बराबर न होने से असमानता बढ़ रही है। बेटियों की सुरक्षा जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि बेटियों के जन्‍म को वरदान बनाने के लिए प्रदेश में लाड़ली लक्ष्‍मी योजना प्रारंभ की है। बेटी जब 21 वर्ष की हो जायेगी तो उसे 1 लाख 18 हजार रुपये मिलेंगे। बेटियों की शिक्षा के लिए नि:शुल्‍क किताबें, साईकिल, गणवेश दिया जाता है, ताकि वे आगे बढ़ सके।  सरकार ने निर्धन परिवार की बेटियों के विवाह के लिए मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना प्रारंभ की है। बेटियों को नौकरी में 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उन्‍हें उद्योग स्‍थापित करने के लिए पाँच प्रतिशत की अलग से छूट दी जाती है। निर्वाचन में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसी का परिणाम है कि आज पंचायत एवं स्‍थानीय निकाय में महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व लगभग 56 प्रतिशत है। उन्‍होंने कहा कि जिन परिवारों में बेटियाँ नहीं हैं उन्‍हें बेटी गोद लेनी चाहिए। मुख्‍यमंत्री ने सभी उपस्थितों को हाथ उठाकर बेटियों के मान-सम्‍मान, सुरक्षा एवं उनके जन्‍म के लिए संकल्‍प दिलवाया।   मुख्‍यमंत्री श्री चौहान ने शिवानी, सुमित्रा, मनीषा सहित दस बेटियों को सोलर फेन, सोलर लाईट एवं स्‍कूल बेग वितरित किये। उन्‍होंने संतोष बाई, राव बाई, चन्‍द्रकला , गंगा बाई , कला बाई , शिवा बाई, मन्‍नू बाई, श्‍याम बाई,भूरी बाई, कांता बाई, सुंदर बाई, अनिता एवं चन्‍दा बाई को सिलाई मशीन वितरित की।   दाती महाराज ने कहा कि वे बेटियों की सुरक्षा एवं उनके भविष्‍य निर्माण के लिए सुमंगला योजना संचालित कर रहे हैं। उनके आश्रम में तीन हजार बेटियाँ रहकर पढ़ रही हैं। उन्‍होंने घोषणा की कि उज्‍जैन के सभी विकासखंडों में 12वीं कक्षा में मेरिट में आने वाली बेटियों को 21-21 हजार रुपये और प्रदेश स्‍तर में मेरिट में आने वाली बेटियों को दो पहिया वाहन प्रदान करेंगे। उन्‍होंने कहा कि मध्‍यप्रदेश सरकार की सहायता से मध्‍यप्रदेश में भी वे बेटियों की सुरक्षा एवं उनके भविष्‍य निर्माण के लिए उनकी नौकरी एवं पढ़ाई के लिए काम करेंगे। मुख्‍यमंत्री ने दाती महाराज से प्रदेश की उन्‍नति एवं विकास के लिए भी आशीर्वाद लिया।

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 MadhyaBharat  19 May 2016

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  कुम्भ मेला क्षेत्र में संचालित है अंतराष्ट्रीय शोध शिविर        भारत में नीदरलेंड के राजदूत  एचई अलफॉन्सस ने कहा है कि विश्व में एक अवसर पर एक स्थान पर इतनी अधिक भीड़ एक-साथ कहीं एकत्र नहीं होती जितनी कि सिंहस्थ पर्व पर उज्जैन में होती है। इसलिए उज्जैन को भीड़ प्रबंधन के अध्ययन के लिए चुना गया है। इस अध्ययन, विश्लेषण तथा शोध के बाद क्राउड मेनेजमेंट सिस्टम पर सॉफ्टवेयर विकसित किया जायेगा।    राजदूत  अलफॉन्सस ने यह जानकारी  उज्जैन में दी। उन्होंने बताया कि नीदरलेण्ड, रशिया तथा सिंगापुर के विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ साईंस, आई.आई.टी. कॉनपुर और भारतीय औद्योगिक घरानों और स्टार्टअप कम्पनी द्वारा संयुक्त रूप से भीड़ नियंत्रण अध्ययन का प्रोजेक्ट आरम्भ किया गया है। भारत, नीदरलेण्ड संयुक्त शोध शिविर दत्त अखाड़ा क्षेत्र में स्थापित किया गया है। भीड़ के मनोविज्ञान, व्यवहार सहित गतिशीलता और ठहराव के कारण सुरक्षा भावना, व्यवस्था से सहयोग आदि विषय पर डाटा एकत्र किया जा रहा है। इस अध्ययन में जीपीएस, ड्रोन, लोकेट सेन्सर, श्रेष्ठतम केमरों आदि तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।   अध्ययन का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के लिए ऐसी गाईडलाइन तथा सॉफ्टवेयर विकसित करना है जिसका उपयोग संपूर्ण विश्व में अलग-अलग प्रयोजनों जैसे ओलम्पिक, बड़े सांस्कृतिक आयोजनों और संकट के समय भीड़ प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।   उज्जैन सिंहस्थ के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए  अलफॉन्सस ने कहा कि अधोसंरचना विकास, साफ-सफाई व्यवस्था, आई.टी. का उपयोग और लोगों का व्यवहार स्मार्ट सिटी की अवधारणा के रोल मॉडल को प्रस्तुत करता है।   मेला अधिकारी  अविनाश लवानिया ने बताया कि अध्ययन में सिंहस्थ में आ रहे लोगों की प्रकृति, विविधता, समूह व्यवहार का अध्ययन भी किया जा रहा है। संवाद और सर्वे के माध्यम से लोगों के मनोविज्ञान और भावनाओं को जानना भी इस प्रक्रिया में शामिल है।

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 MadhyaBharat  16 May 2016

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   पीएम नरेंद्र मोदी उज्जैन में आयोजित वैचारिक महाकुंभ में शिरकत करेंगे। वे 14 मई को इंदौर आएंगे और फिर हेलिकॉप्टर से दोपहर 12.30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। यहां पर उनके लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। लेकिन पीएम के लिए यहां पर जो छोटा सा घर तैयार किया गया है। इस घर में पीएम की प्रोटोकॉल को भी ध्यान में रखा गया है और उज्जैन के कुंभ सी गरिमा भी। पढ़ें, क्या है इस कुटिया की खासियत...वैचारिक महाकुंभ के आयोजन का पूरा दारोमदार राज्यसभा सदस्य अनिल माधव दवे पर है।- आयोजन के लिए 87 हेक्टेयर जमीन पर मंच, डोम और कॉटेज बनाए जा रहे हैं।- यहां पर दो कुटिया भी तैयार की गई हैं। इनका नामकरण भी हो चुका है। एक का नाम चित्रकूट तो दूसरी का पंचवटी रखा गया है।पीएम मोदी के लिए बनी पंचवटी का साइज 20 बॉय 25 वर्गफीट है। इसे दूर से देखेंगे तो लगेगा कि आप किसी गांव में आ गए हैं।- ईंट और मिट्टी से तैयार की इस कुटिया को अंदर-बाहर और नीचे (फर्श) गोबर से लीपा गया है।- बाहर माधव कॉलेज फाइन आर्ट्स के विद्यार्थियों ने चित्रकारी की है। उसे मालवा में मांडना कहते हैं।- अंदर सोफा है, टेबल-कुर्सी है, पलंग है, एसी है और एक अलमारी है। छत पर घास लगाई है।ऐसे तैयार हुई पीएम की कुटियाकुटिया को लेकर जब सांसद अनिल माधव दवे से पूछा गया कि शहर में चर्चा है कि इस कुटिया को बनाने में लाखों रुपए खर्च हुए हैं। इस पर दवे ने यहां मौजूद विशाल राजौरिया की ओर इशारा किया और पंचवटी और चित्रकूट दिखाने का कहा। इस पर राजौरिया ने पूरा हिसाब बताते हुए कहा कि पांच हजार रुपए में गोबर लिपाई का ठेका दिया। 10 हजार ईंट 30 हजार रुपए में खरीदी। झोपड़ी बनवाने में मजदूरी 20 हजार रुपए, 6 हजार में तखत खरीदे गए। 1500 रुपए में कुर्सी खरीदी गई। बिजली का काम थोड़ा जोखिम भरा होता है, इसलिए इस पर ज्यादा ध्यान दिया। बिजली के तार, फिटिंग और उपकरण पर 20 हजार रुपए खर्च हुए। 1.5 टन के दो एसी लगाए हैं। अब सोच लीजिए इस पूरी व्यवस्था पर कितना खर्च हुआ होगा। बमुश्किल एक लाख रुपये में ये बनकर तैयार हुई है। उन्होंने बताया कि यह जो दरवाजे और खिड़की आप देख रहे हैं। अनिल के पुराने मकान के हैं। उन्होंने बताया पंचवटी के निर्माण पर कोई फिजूल खर्च नहीं हुआ है।

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 MadhyaBharat  9 May 2016

नर्मदा के तट पर अमृत का मेला  सरकारी इंतजाम अली खा पी गए सिंहस्थ को

मध्यप्रदेश सरकार का जुमला ''क्षिप्रा के तट पर अमृत का मेला '' भी सिर्फ जुमला बन कर रह गया । सरकारी कारिंदे कई बार गलतियां करते हैं इस बार भी जुमला गढ़ने में गड़बड़ हो गई ।क्योंकि जब पानी के लिए क्षिप्रा से नर्मदा को जोड़ा गया तो क्षिप्रा का अस्तित्व ख़त्म हो गया और वह नर्मदा में तब्दील हो गई । ठीक वैसे ही जैसे गंगा से मिलकर सब कुछ गंगा हो जाता है । लेकिन मध्यप्रदेश के सरकारी अफसर तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुमराह करने में लगे थे सो नर्मदा और क्षिप्रा में हुए झोलझाल को दबा दिया गया । साधुओं ,संत महात्माओं और शिवराज सिंह के आकर्षक विज्ञापनों की चकाचौंध में सिंहस्थ को आस्था का केंद्र बनाए जाने की बजाए बाजार में तब्दील करने की कोशिश अफसरों ने की । लेकिन हुअत वही जो राम रची राख । पहले दिन से ही सिंहस्थ पर मुख्यमंत्री की अफसरी भारी पड़ गयी और उज्जैन उन नज़रों से वंचित रह गया जो उसे बारह बारस बाद यहाँ देखने थे । कड़वा सत्य पहले दिन कुम्भ की जो छटा होती है ,वह इस बार नदारत रही । सरकारी कारिंदों ने कुम्भ के पहले दिन लोगों की संख्या को लेकर कुतर्क किये। कहा गया पचास लाख लोग आये हैं। लेकिन संख्या बमुश्किल पांच लाख के आसपास रही । जिन लोगों ने पिछले उज्जैन कुम्भ को देखा था उनका कहना था इस बार श्रद्धालु कम और सरकारी इंतजाम अली ज्यादा हैं । जिस कारण यह मेला श्रद्धा का केंद्र होने की बजाये बड़े बाजार में तब्दील सा हो गया । महंत चतुरानंद ने तो यह तक कहा कि सरकार ने धर्म के मामले में जो अति उत्साह दिखाकर सरकारीकरण कर दिया है । वह न तो उज्जैन के लिए न ही सिंहस्थ के लिए हितकर है । स्वामी पुष्करनंद का कहना है धर्म अपना काम अपने आप करता है वह किसी का मोहताज नहीं है खासकर सरकार का तो कतई नहीं है । सरकार ने जहाँ जहाँ टांग अड़ाई वहां वहां बंटाधार ही होता है। कुम्भ के पहले दिन पहले शाही स्नान का दिन इतना सामान्य रहा कि उज्जैन वाले सरकारी इंतजामात को कोस्ते नजर आये। श्रद्धालु कम और पुलिस और शासकीय कर्मचारी इस सिंहस्थ की शोभा बढ़ाते नजर आये। नर्मदा के टत पर अमृत का मेला ऋषि अजयदास की माने तो सरकार ने क्षिप्रा को ख़त्म कर दिया है। जैसे ही नर्मदा जल से क्षिप्रा को भरा गया क्षिप्रा का अस्तित्व ही ख़त्म हो गया। अब इसका प्रचार ''क्षिप्रा के तट पर अमृत का मेला '' नहीं ''नर्मदा के तट पर अमृत का मेला होना चाहिए। ऋषि अजय दास कहते हैं संत समुदाय ने इस बार खासकर नागा साधुओं ने काफी सयंम से काम लिया नहीं तो सरकार की इस गलती के लिए उसे लेने के देने पड़ जाते। सिंहस्थ का आकर्षण साधू सन्यासी होते हैं अगर नर्मदा के मसले पर वे बेरुखी अख्तियार कर लेते तो सिंहस्थ प्रारम्भ ही नहीं हो पाता। इस कारण वैसे भी उज्जैन सिंहस्थ कुछ नीरस सा है। बुद्धू बनाया बुद्धूबक्से ने मध्यप्रदेश के रीजनल चैनल के रिपोर्टर ऐसे भागा दौड़ी कर के रिपोर्ट दे रहे थे कि पांव रखने की जगह नहीं है। लेकिन हाल वहां आगे पाट पीछे सपाट वाला था। चंद सिक्कों में गिरवी रखे यह न्यूज़ चैनल आम लोगों को बुद्धू बनाने में लगे थे । जिन लोगों ने इनका झूठ देखा उसे लगा भोपाल से उज्जैन तक के सारे रास्ते श्रद्धालुओं से अटे पड़े हैं। मजे की बात यह है कि सिंहस्थ को लेकर जनसम्पर्क विभाग ने अँधा बांटे रेवड़ी की तर्ज पर विज्ञापन बांटे और समझ लिया कि कुम्भ सफल हो गया। सरकार के पिट्ठू न्यूज़ चैनल को जनसम्पर्क विभाग के भूतल पर बैठने वाले एक अधिकारी कमांड दे रहे थे की अब तक 10 लाख लोग पहुंचे हैं और अब 30 लाख पहुँच गए हैं यह चलाएं। एक चैनल प्रमुख ने यह सब रिकॉर्ड कर लिया है। जाहिर है झूठ के हाथ पैर नहीं होते। अभी तो सिंहस्थ शुरू हुआ है और घपलों घोटालों की बू आने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता सक्रीय हो गए हैं। धीरे धीरे rti के जरिये दूध का दूध और पानी का पानी होगा कि कितने कितने का घपला किस किस ने किया है। सरकारी कारिंदों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को गुमराह कर के 500 करोड़ के ऊपर की राशि सिर्फ प्रचार-प्रसार में खर्च कर दी,140 करोड़ के टूटे-फूटे शौचालय बनवा दिए। सरकारी माल का दुरूपयोग कैसे किया जाता है उज्जैन सिंहस्थ इसकी भी मिसाल बनेगा। चांडाल योग चांडाल योग और कुम्भ की जब बात होती तो यह नोट खाऊ अफसर कह देते कि कहे का चांडाल योग , क्या बिगाड़ लेगा ... हमारा कुछ बिगड़ा क्या ? जितने मालखाने वाले हैं उनके लिए चांडाल योग और सिंहस्थ लाभ का सौदा रहा है ,लेकिन महाकाल इनकी ऐसी कुगत करेंगे कि इनकी शक्लें इतिहास के चांडालों में दर्ज हो जाएंगी ।वैसे भी इस बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सिपहसलारों ने सिंहस्थ का सरकारीकरण कर उसका सत्यानाश कर दिया हैं ऐसे में भाड़े का मीडिया है जिसे सिर्फ हरा ही हरा दिख रहा है ,ऐसा लगता है मीडिया कि जवाबदेही जनता के प्रति न होके भ्रस्ट सिस्टम के प्रति हो । मुख़्यमंत्री शिवराज सिंह ने जब सिंहस्थ शुरू होने से पहले मीडिया को चाय पर बुलाया तो एक पत्रकार ने कहा साब माल [विज्ञापन ] दे कर गले तक तर कर दिया है। जाहिर है जो गले तक तर हैं वह पत्रकारिता क्या करेंगे और सच क्या लिखेंगे और क्या सच दिखाएंगे। फिलहाल चांडाल योग का असर अभी ब्रम्हांड पर है। उज्जैन , सिंहस्थ और इसके इंतजाम अली इससे बचे रहें हम सिर्फ इसकी प्रार्थना कर सकते हैं।

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 MadhyaBharat  23 April 2016

अन्तर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ

मुख्यमंत्री चौहान ने की समीक्षा अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ के तहत सिंहस्थ के सार्वभौम संदेश पर उज्जैन जिले के ग्राम निनोरा में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की व्यापक तैयारियाँ जारी हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज संगोष्ठी की तैयारियों की समीक्षा की। आगामी 12 से 14 मई तक इस संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत और समापन सत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी शामिल होंगे। संगोष्ठी में चार विषय कृषि, कुटीर उद्योग, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता एवं सरिता पर विचार-विमर्श होगा।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संगोष्ठी के गरिमामय आयोजन की सभी तैयारियाँ समय से पूर्ण करने के निर्देश दिये। बताया गया कि संगोष्ठी में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न विषय के विद्वान शामिल होंगे। आमंत्रितों के आवास और परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। आयोजन संबंधी दायित्व इंदौर प्रशासन को सौंपा गया है। कार्यक्रम स्थल के संबंध में समन्वय जन-अभियान परिषद करेगी। संगोष्ठी की वेबसाइट तैयार की गयी है। कार्यक्रम स्थल पर प्राचीन भारतीय संस्कृति के विकास तथा मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित प्रदर्शनियाँ लगाई जायेगी।बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद अनिल दवे, इंडिया फाउन्डेशन के डायरेक्टर राम माधव, मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति बी.के. कुठियाला, अपर मुख्य सचिव एस. आर.मोहंती, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस.के.मिश्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  23 April 2016

अन्तर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ

मुख्यमंत्री चौहान ने की समीक्षा अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ के तहत सिंहस्थ के सार्वभौम संदेश पर उज्जैन जिले के ग्राम निनोरा में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की व्यापक तैयारियाँ जारी हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज संगोष्ठी की तैयारियों की समीक्षा की। आगामी 12 से 14 मई तक इस संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत और समापन सत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी शामिल होंगे। संगोष्ठी में चार विषय कृषि, कुटीर उद्योग, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता एवं सरिता पर विचार-विमर्श होगा।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संगोष्ठी के गरिमामय आयोजन की सभी तैयारियाँ समय से पूर्ण करने के निर्देश दिये। बताया गया कि संगोष्ठी में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न विषय के विद्वान शामिल होंगे। आमंत्रितों के आवास और परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। आयोजन संबंधी दायित्व इंदौर प्रशासन को सौंपा गया है। कार्यक्रम स्थल के संबंध में समन्वय जन-अभियान परिषद करेगी। संगोष्ठी की वेबसाइट तैयार की गयी है। कार्यक्रम स्थल पर प्राचीन भारतीय संस्कृति के विकास तथा मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित प्रदर्शनियाँ लगाई जायेगी।बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद अनिल दवे, इंडिया फाउन्डेशन के डायरेक्टर राम माधव, मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति बी.के. कुठियाला, अपर मुख्य सचिव एस. आर.मोहंती, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव संस्कृति मनोज श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस.के.मिश्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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शिवराज ने किया जय महाकाल

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मानवता के कल्याण और सिंहस्थ महापर्व निर्विघ्न सम्पन्न होने के उद्देश्य से सपरिवार उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर में देव-दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ महापर्व सब मिल-जुल कर मनायें। मुख्यमंत्री ने दर्शन के बाद श्री ओंकारेश्वर, श्री सिद्धिविनायक तथा साक्षी गोपाल के दर्शन भी किये।मुख्यमंत्री ने सपरिवार महन्त श्री प्रकाशपुरी जी से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसादी ग्रहण की। उन्होंने महन्तश्री से कहा कि आपकी कृपा बनी रहे। महन्त प्रकाशपुरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सिंहस्थ महापर्व के सफल आयोजन के लिये बहुत अच्छी व्यवस्थाएँ और विकास के बहुत काम किये हैं। महाकाल ही सिंहस्थ को निर्विघ्न सम्पन्न करवायेंगे, ऐसी ईश्वर से कामना है। महन्तश्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे 18 अप्रैल को महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में समय निकालकर अवश्य आयें। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रभारी मंत्री भूपेन्द्रसिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन, विधायक सतीश मालवीय, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल आदि उपस्थित थे।मुख्यमंत्री ने आव्हान अखाड़े के भवन को कर-मुक्त करवाने की घोषणा कीमुख्यमंत्री सन्तों से सपत्नीक आशीर्वाद लिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन के ग्राम सदावल स्थित श्री पंचदशनाम आव्हान अखाड़ा के नव-निर्मित भवन को नगर निगम कर से मुक्त करवाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री से अखाड़े के साधु-समाज ने नव-निर्मित भवन को टेक्स मुक्त करवाने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने आग्रह को स्वीकार करते हुए मौके पर ही भवन को कर-मुक्त करवाने की घोषणा की। इस पर साधु-समाज ने हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को तहेदिल से आशीर्वाद दिया। इसके पूर्व साधु-सन्तों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पहारों से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर आव्‍हान अखाड़े के सभापति श्रीमहन्त अमर शब्दानंदपुरी, महामंत्री सत्यगिरि, महन्त जय-विजय भारती सहित बड़ी संख्या में सन्त और महन्त उपस्थित थे।आव्हान अखाड़े के बाद मुख्यमंत्री श्री पंच अग्नि अखाड़ा स्थल पहुँचे, जहाँ सन्त-समाज ने अखाड़े में अब तक हुए विकास व निर्माण कार्यों के लिये मुख्यमंत्री को साधुवाद दिया। इस दौरान अग्नि अखाड़े के सभापति श्रीमहन्त ब्रह्मचारी गोपालानंद, महामंत्री गोविंदानंद ब्रह्मचारी, श्रीमहन्त लालबाबा, स्वामी मुक्तानंद सहित काफी संख्या में अखाड़े के साधु-सन्त उपस्थित थे। श्री चौहान ने दोनों अखाड़ों के सन्त-महन्त एवं साधुओं से सपत्नीक आशीर्वाद प्राप्त किया। अखाड़ों के भ्रमण के दौरान प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्रसिंह, अखिल भारती अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्रगिरि और अधिकारी मौजूद थे।

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कुम्भ में बैंगनी ड्रेस में मुस्तैदी से तैनात हैं सफाईकर्मी

उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ में मेला क्षेत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की योजना तैयार की गयी है। मेला क्षेत्र में बैंगनी कलर की ड्रेस में सफाईकर्मी नियमित रूप से सफाई कार्य को अंजाम दे रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान शाही स्नान के दिनों में एक करोड़ श्रद्धालु प्रतिदिन तथा सामान्य दिनों में 20 से 25 लाख श्रद्धालु मेला क्षेत्र में रहेंगे। लगभग 1000 से 1200 मीट्रिक टन कचरा प्रति सामान्य दिनों में उठाया जायेगा। कचरे की यह मात्रा शाही स्नान के दिनों में लगभग दुगनी हो जायेगी। उज्जैन नगर निगम ने शाही स्नान के दिनों में प्रतिदिन 2500 मीट्रिक टन कचरा उठाने की योजना बनायी है। इसी दौरान उज्जैन के शहरी क्षेत्र में भी प्रतिदिन 300 मीट्रिक टन कचरा उठाया जायेगा। कचरा निपटान की दृष्टि से मेला क्षेत्र को पैकेज-ए तथा पैकेज-बी में बाँटा गया है। पैकेज-ए में दत्त अखाड़ा और महाकाल जोन शामिल हैं। कांट्रेक्टर द्वारा पैकेज-ए के क्षेत्र में 3000 सफाईकर्मी तैनात किये जायेंगे। पैकेज-बी में कालभैरव और मंगलनाथ जोन को शामिल किया गया है। मेले के दौरान इन क्षेत्रों में 2000 सफाईकर्मी की तैनाती रहेगी। घाटों तथा घाट क्षेत्र में, विशेषतौर पर सफाई के लिये मेन्युअल के साथ मेकेनिकल व्यवस्था की जायेगी। जेट मशीन का इस्तेमाल घाटों की सफाई के लिये किया जायेगा। क्षिप्रा नदी में बहते कचरे को इकट्ठा करने के लिये नेट का इस्तेमाल भी किया जायेगा। मेला क्षेत्र में सकरे रास्तों पर 45 छोटे वाहन नियमित रूप से कचरा इकट्ठा करेंगे। करीब 20 ट्वीन डंपर प्लेसर ट्रक भी इस्तेमाल होंगे। सफाई कार्य में 10 काम्पेक्टर व्हीकल, 8 कैरिंग मूवेबल काम्पेक्टर व्हीकल, 40 टीपर वाहन और 40 डम्पर प्लेसर व्हीकल-सह-कंटेनर उपयोग में लाये जायेंगे।सिंहस्थ के दौरान मेला क्षेत्र में करीब 400 किलोमीटर लम्बाई में विभिन्न सड़कों की सफाई रोड स्वीपिंग मशीन द्वारा की जायेगी। इसके लिये 4 मशीन प्रतिदिन काम करेंगी। इन मशीनों की स्पीड 15 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है। सिंहस्थ में विभिन्न जोन क्षेत्र में अलग-अलग सड़क पर सफाईकर्मी तैनात रहेंगे। अस्सी फीट सड़क पर प्रत्येक 50 मीटर पर एक सफाईकर्मी, 60 फीट रोड पर प्रत्येक 100 मीटर पर एक सफाईकर्मी तैनात रहेगा। मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिये विशेष निगरानी दस्ते लगातार कार्य करते रहेंगे।

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सिंहस्थ से पहले रामघाट पर क्षिप्रा आरती

उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ के लिये उज्जैन नगर सँवर गया है। सिंहस्थ की सौगातों के अवलोकन के लिये शहर के नागरिक वाहनों को त्याग कर पदयात्रा पर निकल पड़े। चारों दिशाओं से शाम 6.30 बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु क्षिप्रा तट पर रामघाट और दत्त अखाड़ा पहुँचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में माँ क्षिप्रा का अभिनंदन किया गया। एलईडी लाइट की रोशनी से नहाया हुआ रामघाट और दत्त अखाड़ा लोगों को सुखद अनुभूति करवा रहा था। इस अद्भुत नजारे को ड्रोन केमरे से भी शूट किया गया। खाद्य एवं आपूर्ति उप समिति की बैठक में समीक्षासिंहस्थ के दौरान खाद्य पदार्थों की आपूर्ति के लिये उप समिति गठित की गयी है। उप समिति की बैठक में बताया गया कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग मेला क्षेत्र में अस्थाई राशन-कार्ड जारी करेगा। इसके साथ ही 17 रसोई गैस एजेंसी को गैस की आपूर्ति की जवाबदारी दी गयी है। मेला क्षेत्र में दूध की आपूर्ति के लिये 145 अस्थाई सेंटर होंगे। समिति की बैठक में खाद्य पदार्थों के परिवहन की व्यवस्था पर भी चर्चा की गयी। बैठक में यह भी तय हुआ कि जोन एवं सेक्टर कार्यालयों में उचित मूल्य दुकान, दुग्ध-पार्लर, नाप-तौल और खाद्य निरीक्षकों के मोबाइल नम्बर भी प्रदर्शित किये जायेंगे।सिंहस्थ को पॉलिथीन-मुक्त बनाने के लिये चलेगा अभियानसिंहस्थ को पॉलिथीन-मुक्त बनाने के लिये लगातार अभियान चलाया जायेगा। इसके लिये गठित उप समिति जन-भागीदारी के साथ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को पॉलिथीन का उपयोग न करने की समझाइश देंगे। मेला क्षेत्र में इसके लिये पर्याप्त मात्रा में दोना-पत्तल और स्टील के बर्तन की आपूर्ति सुनिश्चित की जायेगी।

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तीर्थ हैं क्षिप्रा के तट जहाँ से मिलती है मुक्ति

अनादि नगरी उज्जयिनी 'भौमतीर्थ'' भी है और 'नित्य तीर्थ'' भी है। भारत की ह्रदय-स्थली यह नगरी सृष्टि के प्रारंभिक काल से ही दिव्य पावन-कारिणी शक्ति से ओत-प्रोत रही है। स्कंद पुराण के अनुसार तो यहाँ पग-पग पर मोक्ष-स्थल तीर्थ बसे हैं। अवंतिखण्ड के अनुसार यहाँ 'महाकाल वन'' था, जहाँ सैकड़ों शिवलिंग थे, अत: उनके प्रभाव से यहाँ की पूरी भूमि नित्य तीर्थ बन गयी। इसकी पुष्टि वायु पुराण, लिंग पुराण, वराह पुराण भी करते हैं।इस नगर में बहने वाली पुण्य सलिला क्षिप्रा का वर्णन यजुर्वेद में 'शिप्रे अवे: पय:'' के रूप में आया है। यह नदी इस नगर के तीन ओर से बहती है, इसलिये इसका 'करधनी'' नामकरण भी किया गया है। इस नगरी में आकर इसके घाटों पर स्नान करने से व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त हो जाती है तथा यह स्थल स्वयमेव तीर्थ बन जाते हैं। कहा जाता है कि सौ योजन (चार सौ कोस) दूर से भी यदि कोई क्षिप्रा नदी का स्मरण मात्र करता है तब उसके सब पाप नष्ट हो जाते हैं तथा वह स्वर्ग-लोक को प्राप्त कर लेता है। मालवा की मोक्षदायिनी गंगा अर्थात् क्षिप्रा अपने उद्गम स्थल से कुल 120 मील (195 किलोमीटर) बहकर चम्बल (चर्मण्यवती) में मिलती है। नगर में इसके तटों पर धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक साधनाएँ कर अनेक साधकों ने सिद्धि प्राप्त की हैं। इसीलिये इसके तटों पर बसे मंदिर, आश्रम एवं उपासना-स्थल सांसारिकता से मुक्ति दिलाकर बैकुण्ठवासी बनाने में सहायक हैं। इस भवसागर से पार उतारने में इस नगरी को मोक्षदायिनी माना गया है। स्कन्द पुराण के अवंतिखण्ड में क्षिप्रा के तट स्थित घाट ही तीर्थ-स्थल माने गये हैं, जिनकी महिमा का गान किया गया है। उत्तरवाहिनी क्षिप्रा का स्वरूप ओखलेश्वर से मंगलेश्वर तक पूर्ववाहिनी है। इसी अवंतिखण्ड में इस नगरी के जिन तीर्थों का उल्लेख किया गया है, वह शंखोद्वार, अजागन्ध, चक्र, अनरक, जटाभृंग, इन्द, गोप, चिविटा, सौभाग्यक, घृत, शंखावर्त, सुधोदक, दुर्धर्ष, गोपीन्द्र, पुष्पकरण्ड, लम्पेश्वर, कामोदक, प्रयाग, भद्रजटदेव, कोटि, स्वर्णक्षुक, सोम, वीरेश्वर, नाग, नृसिंह इत्यादि हैं।इस नगरी में अनेक सरोवर, कुएँ, बावड़ियाँ, तालाब, कुण्ड और क्षिप्रा नदी है। यहाँ के सप्त सागरों में रत्नाकर, सोला या पुरुषोत्तम, विष्णु, गोवर्धन, क्षीर, पुष्कर और रुद्रसागर आदि रहे हैं। यह नगरी जल-सम्पदा से हर युग में हरी-भरी रही है। यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का अनेक कवियों ने अपने साहित्य में उल्लेख किया है।क्षिप्रा के तट स्थित कई दर्शनीय एवं पर्यटन-स्थल हैं, जिनमें त्रिवेणी स्थित नवग्रह एवं शनि मंदिर, नृसिंहघाट, रामघाट, मंगलनाथ, सिद्धनाथ, कालभैरव, भर्तृहरि की गुफा, कालियादेह महल, सूर्य मंदिर आदि हैं। यहाँ वर्षभर लाखों श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है।उज्जयिनी की मोक्षदायिनी क्षिप्रा के तटों पर विश्व-प्रसिद्ध सिंहस्थ महापर्व के दौरान एक 'लघु भारत'' उपस्थित हो जाता है। यही कारण है कि क्षिप्रा किनारे के घाट अन्य पवित्र नगरियों के घाटों से कमतर नहीं हैं। देश-विदेश के कई श्रद्धालु और आस्तिकजन द्वारा क्षिप्रा किनारे के इन्हीं घाटों पर अपने पितृ पुरुषों की आत्मा की सद्गति के लिये श्राद्ध और तर्पण आदि कर उज्जयिनी की महिमा को विस्तारित किया जाता है।

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सिंहस्थ में रोजाना डेढ़ लाख श्रद्धालुओं को मिलेगा सस्ता खाद्यान्न

16 सेक्टर में स्थापित होंगी 40 उचित मूल्य दुकान उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ के दौरान सिंहस्थ मेला क्षेत्र में लगभग डेढ़ लाख साधु-संत और उनके अनुयायियों को 60 दिन तक प्रतिदिन 500 ग्राम खाद्यान्न, 150 ग्राम शक्कर और प्रति व्यक्ति प्रतिदिन एक लीटर केरोसिन रियायती दर पर उपलब्ध करवाया जायेगा। इसके लिये सिद्धवट, काल भैरव, गढ़कालिका सेक्टर में 6, मंगलनाथ, खिलचीपुर, खाक चौक में 13, रंजीत, दत्त अखाड़ा, मुल्लापुरा, उजड़खेड़ा, भूखी माता में 17, हरसिद्धि, नरसिंह घाट, लालपुर एवं चिंतामन गणेश सेक्टर में 4, इस तरह पूरे मेला क्षेत्र में 40 अस्थायी उचित मूल्य दुकान स्थापित की जायेगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सिंहस्थ के दौरान प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की जरूरत का आकलन किया है। गेहूँ प्रति व्यक्ति 350 ग्राम, 60 दिन के लिये 21 किलोग्राम का वितरण किये जाने का अनुमान लगाया गया है। इस तरह डेढ़ लाख सदस्य के लिये 3150 मीट्रिक टन गेहूँ, प्रति व्यक्ति 150 ग्राम चावल प्रतिदिन के मान से 60 दिन के लिये 9 किलोग्राम प्रति सदस्य के हिसाब से डेढ़ लाख लोगों के हिसाब से 1350 मीट्रिक टन चावल, इसी तरह डेढ़ लाख लोगों के लिये 1350 मीट्रिक टन शक्कर, 90 मीट्रिक टन नमक और 300 किलो लीटर केरोसिन की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से 1000 मीट्रिक टन गेहूँ और 50 मीट्रिक टन चावल भी खुले बाजार में विक्रय के लिये उपलब्ध रहेगा।60 हजार गैस सिलेण्डर की खपतसिंहस्थ मेला क्षेत्र में प्रत्येक सेक्टर में 16 अस्थायी गैस एजेंसी की स्थापना की जा रही है। सिंहस्थ में साधु-संत और उनके अनुयायियों को 5 किलो के सिलेण्डर वितरित किये जायेंगे। मेला अवधि में 60 हजार सिलेण्डर की खपत का अनुमान लगाया गया है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन नगर एवं उज्जैन पहुँच मार्गों पर 53 पेट्रोल-डीजल पम्प संचालित हो रहे हैं। इनकी भण्डारण क्षमता 1101 किलोलीटर पेट्रोल और 1612 किलोलीटर डीजल की है। वर्तमान में पेट्रोल 56 हजार लीटर और डीजल की प्रतिदिन औसत खपत 76 हजार लीटर है। सिंहस्थ में पेट्रोल एक लाख 32 हजार लीटर और डीजल एक लाख 66 हजार लीटर की खपत का अनुमान लगाया गया है। सिंहस्थ के दौरान खाद्यान्न, गैस सिलेण्डर और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये 16 सहायक आपूर्ति अधिकारी, 44 कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सहित लगभग 100 व्यक्ति का अमला लगातार काम करेगा। इन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिलवाया गया है।

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श्रीकृष्ण ने उज्जयिनी में मिला था 64 कला का ज्ञान

सम्पूर्ण शिक्षा प्राप्त की थी 126 दिन में उज्जैन, जो पूर्व में उज्जयिनी नगरी के नाम से विख्यात था, शैक्षणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। शिक्षा-स्थली के रूप में यह नगरी नालंदा और काशी के पहले से स्थापित रही है। उज्जयिनी में जगदगुरु योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ तपोनिष्ठ महर्षि सान्दीपनी से धनुर्विद्या, अस्त्र, मंत्रोपनिषद, गज और अश्वारोहण सहित 64 कला का ज्ञान प्राप्त किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने यह सम्पूर्ण शिक्षा 126 दिन में प्राप्त कर ली थी।जब पूरा सँसार अज्ञान, अशिक्षा और अँधकार में भटक रहा था, तब भारत की ह्रदय-स्थली उज्जयिनी में महर्षि सान्दीपनी का गुरूकुल अपने उत्कर्ष पर था। शिक्षा के उदात मूल्यों से ओत-प्रोत सुविख्यात गुरूकुलों में वेदों, वेदांगों, उपनिषदों सहित 64 कला की शिक्षा दी जाती थी। वहीं मंत्र, न्याय-शास्त्र, राजनीति-शास्त्र, धर्म-शास्त्र, नीति-शास्त्र और अश्व-अस्त्र-शस्त्र संचालन की शिक्षा भी दी जाती थी। यज्ञोपवीत संस्कार होने के बाद ही आश्रम में प्रवेश मिलता था तथा शिष्यों को आश्रम-व्यवस्था के ब्रह्मचर्य नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना पड़ता था। गुरू का सम्मान और उनकी आज्ञा सर्वोपरि रहती थी।उल्लेखनीय है कि उज्जयिनी के राजा विन्द और अनुविन्द की प्रिय बहन मित्रविन्दा से भगवान श्रीकृष्ण ने विवाह किया था। महाभारत में युधिष्ठिर के बहुअर्थी चर्चित प्रसंग 'नरो व कुंजरो वा'' और 'प्रमर्थन घोर मालवेन्द्रस्य वर्मण: अश्वत्थामा हत:''। में वर्णित चर्चित हाथी इन्हीं राजाओं का था, जो महाभारत के युद्ध में उज्जयिनी से भेजा गया था। उज्जयिनी में अनादि काल से गुरूकुल की जो परम्परा रही है, उनमें महाज्ञानी सदगुरू महर्षि सान्दीपनी का गुरूकुल उनके योग्य शिष्य श्रीकृष्ण के कारण विख्यात रहा है। गुरू-शिष्य की इस परम्परा की चर्चा आज भी उज्जैन नगरी में होती है।उज्जैन में इस वर्ष अप्रैल-मई में होने वाले सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच भगवान कृष्ण के इस प्रसंग का प्रमुखता के साथ स्मरण किया जायेगा।

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सिंहस्थ से मध्यप्रदेश  पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

अगले माह से उज्जैन में शुरू हो रहे सिंहस्थ महाकुंभ में प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन निगम प्रदर्शनी लगाने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रदर्शनी में प्रदेश के ऐतिहासिक, धार्मिक एवं अन्य तरह के पर्यटक केंद्रों की तस्वीरों के साथ ही उनके बारे में पूरी जानकारी का उल्लेख होगा। प्रदर्शनी देखकर श्रद्धालुओं को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। पर्यटन निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष तपन भौमिक के मुताबिक कुंभ में देश-विदेश से 5 करोड़ पर्यटकों के आने की उम्मीद है। चर्चा में उन्होंने सवालों के खुलकर जवाब दिए।– सवाल: राजनीति में दो तरह के लोग होते हैं, पहले वो लोग जो चुनाव लड़कर राजनीति में आते हैं और दूसरे वे लोग जो बिना चुनाव लड़े ही राजनीति में पावरफुल हो जाते हैं, जैसे आप? आपकी राजनीति में और आपकी संस्था के प्रति भावना क्या है और प्राथमिकताएं क्या हैं?जवाब: मैं शुरू से ही सतत रूप से संगठन में ही रहा, मुझे संघ में और सार्वजनिक जीवन में काम करते हुए 40 साल हो गए। मैं 1977 से संघ में काम कर रहा हूं। मुझे जो जिम्मेदारी मिली है वो वास्तव में मुझे मेरी रूचि के हिसाब से मिली है। मुझे प्रदेश नेतृत्व ने संगठन महामंत्री अरविंद मेनन, प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पर्यटन विकास निगम का काम दिया है, यह विभाग वास्तव में मेरी रुचि का है और मुझे इसमें काम करने में आनंद की अनुभूति भी हो रही है।– सवाल: मध्यप्रदेश के पर्यटन के विकास को लेकर क्या योजना है?जवाब: मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम पहले से ही अच्छी स्थिति में है, मध्यप्रदेश का देश में तो अच्छा नाम है और देश में इस निगम को मध्यप्रदेश के पर्यटन का पहले, दूसरे स्थान पर नंबर रहा है। विश्व पटल पर मध्यप्रदेश के पर्यटन को लाने के लिए हम कार्यरत हैं और इसके लिए हम कार्ययोजना बना रहे हैं। निगम के विकास के लिए मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की भी विशेष रूचि है। निश्चित रूप से यह निगम पर्यटन के क्षेत्र में बहुत आगे जाएगा और विश्व पटल पर इसका नाम होगा।– सवाल: प्रदेश में विश्व स्तर पर सिंहस्थ का महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है, यदि हम पर्यटन और सिंहस्थ को जोड़कर देखें तो पर्यटन विकास निगम की सिंहस्थ में क्या भूमिका है?जवाब: मध्यप्रदेश में सिंहस्थ शुरू होने जा रहा है, इसमें मध्यप्रदेश के तीन विभाग जिसमें जनसंपर्क विभाग, संस्कृति विभाग और पर्यटन इनका सबसे बड़ा योगदान अब सिंहस्थ में शुरू होने जा रहा है। इसके पहले पीडब्ल्यूडी, पीएचई विभाग की अहम जिम्मेदारी थी। जिसमें सड़क निर्माण करना और शुद्ध जल की व्यवस्था करने के काम को प्राथमिकता से पूरा किया गया। अब इसके प्रचार-प्रसार का काम जनसंपर्क को दिया गया है और सिंहस्थ के दौरान जितने भी सांस्कृतिक आयोजन होंगे, वे सब सांस्कृतिक विभाग के द्वारा किए जाएंगे। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन के निमंत्रण पर जितने भी अतिथि कुंभ में आएंगे, उनके रुकने, खाने-पीने व आने-जाने की व्यवस्था करने का पर्यटन विकास निगम को करना है। इसमें विश्व के 102 देशों के प्रतिनिधि भाग लेने के लिए आ रहे हैं। अभी तक के भारत में जितने भी सिंहस्थ हुए हैं, हम इसे सबसे बड़े सिंहस्थ के रूप में स्थापित कर पाएंगे। सिंहस्थ के लिए केंद्र सरकार ने भी विशेष सहयोग प्रदान किया है, जिसमें नई रेल लाइन और स्टेशनों के विस्तार और स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की है। अभी तक इलाहाबाद का कुंभ सबसे बड़ा माना जाता था, लेकिन उज्जैन कुंभ की तैयारियों का जो फीडबैक आ रहा है, उससे लग रहा है कि यह विशालतम रहेगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन ने भी उज्जैन के आसपास इंदौर, देवास, शाजापुर, राजगढ़ यहां पर भी शासन ने डेवलपमेंट की अच्छी राशि दी है जिससे यातायात बस स्टेंड की अच्छी व्यवस्था की जा सके।– सवाल: कुंभ का जो विशाल पर्व होने जा रहा है उसमें विश्व और देशभर के कितने श्रद्धालुओं के आने का लक्ष्य रखा है?जवाब: इसमें विश्वभर से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। हमारा जो लक्ष्य है, उसमें 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे। इसमें दो शाही स्नान पड़ेंगे, दोनों ही शाही स्नान में एक-एक करोड़ लोग स्नान करेंगे। इसमें पुलिस और अन्य शासकीय विभाग के लोग व्यवस्था में रहेंगे। इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन के निमंत्रण पर जो लोग आएंंगे उनकी सारी व्यवस्था पर्यटन विकास निगम करेगा।-सवाल: सिंहस्थ के लिए मध्यप्रदेश शासन ने कोई स्पेशल बजट का प्रावधान किया है यदि किया है तो मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि खंडवा के हनुवंतिया में आयोजित जल महोत्सव में पर्यटकों की रूचि को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वाटर स्पोर्टस की अगले साल से एक महीने तक चलने की बात कही है। अगले साल से 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक जलोत्सव चलेगा और भोपाल में भी राजाभोज एडवेंचर्स आयोजित किया गया। इसका नाम ही हमने रखा था झील से आकाश तक। इसमें भी पर्यटकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, इसे भी हम अगले साल से स्थाई करेंगे।निगम की जमीन को लीज पर ले सकेंगे निवेशकपर्यटन विकास निगम पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए निवेशकों को होटल और रेस्टोरेंट खोलने के लिए जमीन लीज पर देगा। इसमें निवेशकों को शासकीय अनुमति मिलने में आने वाली परेशानियों को भी निगम दूर करेगा और उनका सहयोग करेगा।

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विक्रमादित्य  उनके नवरत्न और उज्जयिनी

ललितेन्द्र भारत के इतिहास में विक्रमादित्य का स्थान अद्वितीय है। जिस प्रकार राम को अयोध्या से अलग नहीं किया जा सकता उसी प्रकार विक्रमादित्य के बिना उज्जयिनी का स्मरण नहीं किया जा सकता। विगत 2000 वर्ष से अधिक समय से विक्रम का नाम सारे देश में गूँज रहा है। हिन्दू धर्म और संस्कृति तथा ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और कला से वह अविभाज्य के रूप से जुड़ा हुआ है। एक ओर जहाँ भारतीय साहित्य में अनेक रूपों में और अनेक प्रकार से विक्रम का उल्लेख किया गया है उसे अदभुत पराक्रमी शासक, धर्म, न्याय और व्यवस्था के संरक्षक गुणीजनों के आश्रयदाता तथा ज्ञान-विज्ञान की अभिवृद्धि के लिए समर्पित विद्याप्रेमी नरेश के रूप में स्मरण किया जाता है। दूसरी ओर इस बात पर भी आधुनिक इतिहासकारों द्वारा शंका उठाई जाती है कि विक्रमादित्य नामक कोई राजा उज्जयिनी में हुआ है या नहीं। वे इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि विक्रमादित्य की उपाधि अनेक राजाओं ने धारण की पर उनके मत में ऐतिहासिक आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उज्जैन में विक्रमादित्य नाम का कोई राजा हुआ भी है या नहीं। इस धारणा का प्रमुख कारण पुरातात्विक प्रमाणों का अभाव ही माना जाता है।प्राचीन साहित्य में विक्रमादित्य सम्बन्धी तथ्यों की उपर्युक्त आधार पर उपेक्षा नहीं की जा सकती। पुरातात्विक आधार न होने पर क्या हम रामायण, महाभारत तथा विविध पुराणों में वर्णित और परम्परा से मान्यता प्राप्त तथ्यों को भी शंकास्पद मानने के लिए विवश होना पड़ेगा। भारत जैसे देश में जहाँ इतनी उथल-पुथल होती रही, जहाँ इतिहास के प्रति उपेक्षा के साथ ही प्राकृतिक प्रकोपों का ताण्डव-नृत्य सदा होता रहा हो, ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों पर ही अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है। हाँ यदि किसी मान्यता के विरुद्ध यदि उत्खनन और शोध के परिणामस्वरूप अनेक महत्वपूर्ण नए तथ्य हमारे सामने आए हैं जिनसे भारत के अतीत पर महत्वपूर्ण प्रकाश पड़ता है। हो सकता है विक्रम के काल-निर्णय पर भी भविष्य में उपयोगी प्रमाण उपलब्ध हो जाये। अत: इतिहास द्वारा पुष्ट प्रमाणों के अभाव में विक्रमादित्य के परम्परागत व्यक्तित्व और उससे जुड़ी हुई ख्याति की उपेक्षा भी उचित नहीं कही जा सकती।विक्रमादित्य ने नवीन संवत्सर का ही आरम्भ नहीं किया अपितु आदर्श शासन परम्परा की नए सिरे से आधार-शिला रखी। उन्होंने राम-राज्य की कल्पना को नए सिरे से साकार कर आदर्श शासन का मानदण्ड निर्धारित किया।विक्रम संवत् को कृत संवत् तथा मालव संवत् का पर्याय माना जाता है। पर्याप्त विचार के बाद इतिहासकारों में इसके सम्बन्ध में सहमति भी हो गई है। यह तथ्य हमें यह सोचने के लिए विवश करता है कि विक्रम और मालवे का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। विक्रम मालव जनपद के राजा थे या प्रमुख यह बात भले ही विवादग्रस्त हो पर इसमें संदेह नहीं कि वे मालवगण के सर्वमान्य नेता थे और उनके नेतृत्व में ही मालवों ने शकों को पराजित किया था। ऐसी महत्वपूर्ण घटना को अमरता प्रदान करने के उद्देश्य से नये संवत्सर का आरंभ किया जाना निश्चय ही एक शुभ निर्णय था। विगत 2000 वर्ष से भी अधिक समय से इस संवत् का व्यापक उपयोग इस घटना के महत्व का परिचायक है। इतिहासविदों के समक्ष यह प्रश्न प्राय: उपस्थित होता रहा है कि विक्रमादित्य नाम न होकर एक विरुद मात्र है। इसके साथ सहज ही यह तर्क उपस्थित होता है कि यदि इस नाम को विरुद मान लिया जाय तो फिर कोई न कोई पराक्रमी व्यक्ति इस नाम को धारण करने वाला भी होना चाहिए। चन्द्रगुप्त को इसे विरुद के रूप में धारण करने की आवश्यकता तभी अनुभव हुई होगी जब इस नाम का कोई व्यक्ति अपने पराक्रम से इसे महत्व दे चुका होगा। जनश्रुति एवं साहित्यिक आधार पर हमारे सामने ऐसा व्यक्तित्व विक्रम का ही है। और उसे नाम के रूप में स्वीकार करने में आपत्ति का कारण नहीं दिखाई देता।साम्राज्यों के बुलडोजर छोटी इकाइयों को, वे प्रजातांत्रिक हों अथवा एक तंत्रीय, गुण-दोषों का विचार किए बिना ही धराशायी करने में संकोच ही नहीं करते। मालव गणतंत्र को या मालव नरेश को साम्राज्य विस्तार की प्रक्रिया में संकट का सामना करना ही पड़ा होगा। किन्तु साम्राज्य की तूफानी लहर से ध्वस्त होकर भी मालवगण की और उसके साथ ही विक्रम की कीर्ति अक्षुण्ण बनी रही। मालवगण और विक्रमादित्य की उपलब्धियाँ भारतीय जनमानस के पटल पर इस प्रकार अंकित है कि काल-प्रवाह उन्हें मिटाने में असमर्थ रहा है।उज्जैन की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी रही है कि सहसा उसे अधीनस्थ नहीं किया जा सकता था और अधीनस्थ हो जाने पर भी उसकी उपयोगिता और महत्व की उपेक्षा नहीं की जा सकती थी। आसपास की उपजाऊ भूमि तथा आन्तरिक एवं बाह्य व्यापार के मार्ग पर उसका अवस्थित होना उसके पक्ष में जाता है। यही कारण है कि देश के उन्नत नगरों में उज्जयिनी का विशिष्ट स्थान बना रहा है। मालवगण के शौर्य, नैतिक बल और बौद्धिक प्रखरता ने उसे देश में ही नहीं, विदेशों में भी ख्याति दिलवाई है। विभिन्न कलाओं तथा ज्ञान-विज्ञान की क्रीड़ा-भूमि के रूप में ही नहीं, उन्हें व्यावहारिक और परिष्कृत रूप देकर सार्वभौम उपयोग और प्रशंसा की उपलब्धि करवाने में उज्जयिनी अग्रगण्य रही है। हजारों वर्ष पूर्व महाभारत युग में भगवान् श्रीकृष्ण और बलराम की शिक्षा उसी नगरी में हुई थी और उसके शासकों ने महाभारत के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। परिस्थितियों के कारण यह परम्परा कभी क्षीण और कभी स्थूल भले ही होती रही हो, परंतु लुप्त नहीं हुई।विक्रमादित्य के अस्तित्व तथा काल निर्णय के समान ही उनके साथ जुड़े हुए उनके नवरत्नों की वास्तविकता भी आज प्रमाणों के अभाव में शंकास्पद बन गई है। उनके सम्बन्ध में सबसे बड़ा आक्षेप यह है कि नवरत्नों में सम्मिलित अनेक नवरत्नों का विक्रम का समकालीन होना सिद्ध नहीं होता। विक्रमादित्य की राजसभा के नवरत्नों के विषय में ज्योतिर्विदा भरण का यह श्लोक बहुतप्रसिद्ध है-धन्वन्तरि क्षपण का भर सिंह शंकु-वेतालभट्ट घटखर्पर कालिदासा:।ख्यातो वराहमिहिरो नृपते: समायां,रत्नानि वैवररूचिर्नव विक्रमस्य॥अर्थात् धन्वंतरि क्षपणक, अमरसिंह, शंकु वेताल भट्ट, घटखर्पर, कालिदास सुविख्यात वराहमिहिर तथा वररुचि विक्रम के नवरत्न थे। ज्योतिर्विदा भरण किसी कालिदास नामक विद्वान की रचना है। ये कालिदास रघुवंश और शाकुन्तल के कवि नहीं है। इस ग्रन्थ के प्रणयन का समय लगभग एक हजार वर्ष पूर्व का माना जाता है। इस ग्रन्थ में इन नवरत्नों का उल्लेख तभी संभव हुआ जब इस जनश्रुति के रूप में नवरत्नों की बात को व्यापक रूप से स्वीकार किया जा चुका होगा।इन नवरत्नों में कालिदास, धन्वन्तरि, अमरसिंह, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि अधिक प्रसिद्ध हैं। शेष तीन क्षपणक, शंकु एवं वेतालभट्ट के विषय में बहुत कम जानकारी प्राप्त है।(1) धन्वंतरि - विक्रमादित्य के समान ही धन्वन्तरि के सम्बन्ध में अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। कुछ लोगों के मत में काशी नरेश दिवोदास ही धन्वन्तरि थे। भारतीय आयुर्वेद में धन्वन्तरि का स्थान सर्वोपरि है। इनके अनेक शिष्य थे जिनमें सुश्रुत का प्रमुख स्थान है। इनकी कृतियों में धन्वन्तरि-निघण्टु बहुत प्रसिद्ध है। इनके द्वारा निर्मित अनेक औषधियाँ अचूक मानी जाती हैं।(2) क्षपणक - क्षपणक सामान्यत: जैन साधुओं को कहा जाता है। कुछ लोगों के मत में सिद्धसेन दिवाकर ही क्षपणक हैं। ये ज्योतिष् के विद्वान थे और वराहमिहिर ने इनका उल्लेख किया है। इन्हें द्वात्रिंशत्युत्तलिका का रचयिता भी माना जाता है।(3) अमरसिंह - बोधगया के एक शिलालेख के आधार पर इतिहासविद् अमरसिंह को विक्रम का समकालीन मानते हैं। इस शिलालेख में विक्रम और उनके नवरत्नों का उल्लेख है उसमें अमरसिंह के स्थान में अमरदेव शब्द का प्रयोग हुआ है। कनिंघम के मत में अमरदेव ही अमरसिंह हैं। इन्हें अनेक ग्रन्थों का रचयिता माना जाता है जिनमें अमरकोश अत्यन्त लोकप्रिय है। अमरकोश के मंगलाचरण से भी यह सिद्ध होता है कि वे बौद्ध थे।(4) शंकु - ज्योतिर्विदा भरण के अतिरिक्त एक और सन्दर्भ में शंकु का उल्लेख हुआ है। कहा जाता है कि ये शबर स्वामी के पुत्र थे।(5) वेतालभट्ट - वेताल पंच विशलिका जैसे कल्पना प्रधान ग्रन्थों के आधार स्वरूप कुछ रचनाएँ वेतालभट्ट द्वारा भले ही लिखी गई हों। परन्तु उनके नाम पर जिस प्रकार अनुश्रुतियों के माध्यम से कथाओं का निर्माण हुआ है उनकी संख्या का पता लगाना कठिन है। अनुमान किया जाता है कि मंत्र-तंत्र की प्रधानता के युग में तंत्र की साधना में लगे रहने के कारण वेताल के साथ अनेक कथाएँ और जन-श्रुतियाँ जुड़ गई होंगी।(6) घटकर्पर - घटकर्पर की एकमात्र रचना एक लम्बी कविता है। इसमें 22 श्लोक है। यह कविता वियोग श्रंगार की है। हो सकता है कालिदास को मेघदूत लिखने की प्रेरणा इसी कविता से मिली हो। इस कविता में यमक शब्दालंकार के उत्तम उदाहरण मिलते हैं। अभिनवगुप्त, गोवर्द्धन आदि टीकाकारों ने घटकर्पर की टीका करके यह सिद्ध कर दिया है कि उनकी गणना उच्चकोटि के कवियों में थी। कहा जाता है कि उन्होंने नीतिसार नामक एक अन्य ग्रन्थ भी लिखा था। संभव है फिर भी खोज करने पर आगे चलकर इनकी अन्य रचनाएँ भी उपलब्ध हों।(7) कालिदास - कविकुल गुरू कालिदास के सम्बन्ध में इतना अधिक लिखा गया है कि इस प्रसंग में उन पर कुछ भी लिखा जाना पुनरुक्ति मात्र होगा। फिर भी इस प्रसंग में दो-एक बातों का उल्लेख करना अप्रासंगिक न होगा। अभिज्ञान शाकुन्तल महाकवि का अदभुत नाटक है जिस पर विश्वभर के विद्वान मुग्ध हैं। उक्त नाटक के आरंभ में सूत्रधार द्वारा यह कथन कि - 'सभी रसों और भावों के दीक्षागुरू महाराज विक्रमादित्य की विद्वानों से भरी हुई इस सभा के समक्ष हमें कवि कालिदास द्वारा विरचित अभिज्ञान शाकुन्तल नामक नवीन नाटक प्रस्तुत करना है।' इस बात की ओर संकेत करता है कि कालिदास विक्रम के नवरत्नों में थे और उनके अभिज्ञान शाकुन्तल का प्रयोग विक्रम और उनके नवरत्नों के समक्ष किया गया था। अभिज्ञान शाकुन्तल, विक्रमोर्वशीय तथा मालविकाग्निमित्र उनके सुविख्यात नाटक ग्रन्थ हैं तथा मेघदूत, कुमार संभव, रघुवंश और ऋतुसंहार उनके काव्य ग्रन्थ। अनेक प्राचीन ग्रन्थों में कालिदास सम्बन्धी ऐसे अकाट्य सन्दर्भ मिलते हैं जिनसे इनका विक्रम के समय में होना असंदिग्ध हो जाता है। काव्य मीमांसा में राजशेखर द्वारा कालिदास की काव्य परीक्षा का उल्लेख इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। रघुवंश और मेघदूत में कालिदास द्वारा उज्जयिनी का उल्लेख भी उनके उज्जयिनी प्रेम का प्रमाण है। उन्होंने उज्जयिनी का जो सजीव वर्णन मेघदूत में किया है वह एक अभिनव प्रयोग है और उसके अनुकरण में न जाने कितने लोगों ने अपनी रचनाएँ करके अपने को धन्य माना है। कालिदास ने उज्जयिनी के साथ ही मालव प्रदेश की सुषमा का सुन्दर वर्णन किया है जिससे यह सिद्ध होता है कि वे यहीं के निवासी थे।कालिदास शीर्षस्थ कवि ही नहीं थे। उनकी रचनाओं के विशद अध्ययन से यह पता चलता है कि वे अपने समय के शीर्षस्थ विद्वान भी थे। वेद, पुराण, उपनिषद्, दर्शन, धर्मशास्त्र, भूगोल, इतिहास, ज्योतिष आदि विषयों में उनके पाण्डित्य की झलक उनकी रचनाओं में कदम-कदम पर परिलक्षित होती है।(8) वराहमिहिर - वराहमिहिर अपने समय के प्रकाण्ड ज्योतिषी थे। इनके विषय में यह ज्ञात है कि वे अवन्ति प्रदेश के ही निवासी थे और इनके पिता का नाम आदित्यदास था। वराह मिहिर का फलिज्योतिष् पर प्रमुख ग्रंथ वृहज्जातक है। इसकी टक्कर का दूसरा ज्योतिष का ग्रन्थ मिलना दुर्लभ है। राजाओं के लिए ज्योतिष की उपादेयता पर उन्होंने कहा है - 'कृत्ष्नागंगोपांगकुशलं, होरागणित नैष्टिकम् योन पूजयते राजा सनाशमुय गच्छति, अर्थात् जो राजा ज्योतिष के अंगों और उपांगों में प्रवीण तथा होरागणित का व्यावहारिक सम्यक् ज्ञान रखने वाले ज्योतिषी का आदर नहीं करता, वह नष्ट हो जाता है। उनके ग्रन्थ वृहत्संहिता में ग्रहों की स्थिति तथा उसके प्रभाव का विशद वर्णन किया गया है तथा उससे उत्पन्न विषम स्थिति से बचने के उपाय भी दिखाए गए हैं। ज्योतिष् में अपनी अप्रतिहत और सूक्ष्म गति के कारण वे देश-विदेश सर्वत्र सम्मान के पात्र हैं। यूनानी ज्योतिषियों से इनका सम्पर्क था और उनके अनेक पारिभाषिक शब्दों और सिद्धांतों को इन्होंने अपनाया है। ज्ञान के क्षेत्र में कोई पूर्वाग्रह उनके लिए बाधक नहीं था। ग्रहों की स्थिति व्यक्तियों पर ही नहीं विस्तृत भू-खण्डों और समस्त विश्व पर व्यापक प्रभाव की स्थिति के सम्बन्ध में उनके सिद्धान्त अनेक विपत्तियों का सामना करने एवं शासकों को तैयार होने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। ज्योतिष के अतिरिक्त उन्हें, रत्नों, औषधियों, रसायनों और पशुओं के शास्त्र का व्यापक और गंभीर ज्ञान था।(9) वररुचि - वररूचि कृत पत्र कौमुदी में लेखक ने स्वयं ही अपने को विक्रम का समकालीन बताया है और कहा है कि विक्रम के निर्देश पर ही उन्होंने उस ग्रन्थ की रचना की है। वासवदत्ता के रचयिता सुबन्धु को वररुचि का भान्जा बताया गया है। उनके द्वारा निर्मित एक ग्रन्थ 'विद्या सुन्दर' भी है जिसकी रचना उन्होंने विक्रम के निर्देश पर की थी। कुछ लोगों के मत में वैयाकरण कात्यायन ही वररुचि हैं पर बेवर के अनुसार कात्यायन का समय ई.पू. 25 माना जाता है। यदि यह मत स्वीकार किया जाय तो वररुचि का समय लगभग वही है जो विक्रम संवत् को प्रमाण मानने पर विक्रमादित्य का निर्धारित होता है। विक्रमादित्य की सभा में वररुचि के होने का उल्लेख अन्य अनेक स्थलों पर पाया जाता है। अमरकोश के कर्ता अमरसिंह ने भी उनका उल्लेख किया है

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अच्छे स्वास्थ्य और प्रबंधन का आधार है अध्यात्म

भोपाल में वैचारिक महाकुम्भ अच्छे स्वास्थ्य और प्रभावी प्रबंधन का आधार अध्यात्म है। भारत के प्राचीन विज्ञान में आयुर्वेद और योग को स्वस्थ रहने का वैज्ञानिक आधार बताया गया है। आयुर्वेद और योग एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। पर प्रभावी प्रबंधन का आधार अध्यात्म है। गीता और आध्यात्मिक विषयों पर लिखे ग्रंथों में प्रभावी प्रबंधन के गुर बताये गये हैं। यह विचार विज्ञान एवं अध्यात्म पर चल रहे तीन-दिवसीय वैचारिक कुम्भ के दूसरे दिन आज दो अलग-अलग सत्र में वैज्ञानिकों और अध्यात्म जगत के विद्वानों ने रखे। प्रथम सत्र 'स्वास्थ्य विज्ञान एवं आध्यात्मिकता'' तथा दूसरा सत्र 'प्रबंधन विज्ञान एवं आध्यात्मिकता'' पर केन्द्रित था।स्वास्थ्य विज्ञान सत्र में एम्स, नई दिल्ली की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामा जयासुन्दर ने कहा कि वर्तमान में बीमारियाँ बढ़ने के साथ औषधियों के मूल्य में भी वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य की पुरानी परिभाषा के अनुसार बीमारियों से पूरी तरह मुक्त व्यक्ति ही स्वस्थ है। इस परिभाषा के दायरे में अब शरीर के साथ मन को भी शामिल कर लिया गया है। आज के दौर में बीमारियों का इलाज 'सेलुलर लेबल' पर हो रहा है। मालीक्यूलर मेडिसिन आ गयी है। उन्होंने आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह जीवन का विज्ञान है। आयुर्वेद में तन और मन दोनों की चिकित्सा पर जोर दिया गया है। डॉ. जयासुन्दर ने आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वात, पित्त, कफ (वीकेपी) की अन्य चिकित्सा पद्धतियों से तुलना करते हुए वैज्ञानिक पहलुओं का उल्लेख किया।एस. व्यासा, बैंगलुरु की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आर. नागरत्ना ने कहा कि आधुनिक जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों का आध्यात्मिक-स्तर पर समाधान हो सकता है। उन्होंने बतलाया कि जीवन-शैली के चार मुख्य घटक- आहार, व्यायाम, आदतें और तनाव है, लोगों की सेहत पर जंक फूड का प्रभाव रिसर्च प्रोजेक्ट की चर्चा करते हुए उन्होंने बतलाया कि अस्थमा के मरीज के इलाज में 'इनहेलर' और 'ओम' का प्रयोग करने पर 'ओम' द्वारा पीड़ित व्यक्ति धीरे-धीरे सामान्य साँसें लेने लगा। यह आध्यात्मिक चिकित्सा का चमत्कारिक उदाहरण है।इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस, कोलकाता के सीनियर प्रोफेसर डॉ. शांतनु भट्टाचार्य ने हेल्थ-केयर में अध्यात्म की भूमिका पर अपने व्याख्यान में जानकारी दी कि भारत आस्थाओं, पूजा-पाठ और धार्मिक परम्पराओं का देश है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के छ: घटक में आध्यात्मिक स्वास्थ्य को शामिल करने से हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक स्वास्थ्य आस्थाओं और मूल्यों पर आधारित है। डॉ. भट्टाचार्य ने एक शोध अध्ययन के हवाला से बताया कि 66 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी अध्यात्म है।प्रबंधन विज्ञान एवं आध्यात्मिकता सत्र में भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलुरु के प्रो. के.वी. अखिलेश और प्रो. बी. महादेवन तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर के प्रो.के.पी. सिंह ने व्याख्यान दिये। सत्र की अध्यक्षता प्रो. के.बी. अखिलेश ने की।

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उज्जैन में 6 दशक पूर्व हुआ था अर्द्ध-कुम्भ

अर्द्ध-कुम्भ कोई अलग पर्व नहीं है। यह एक धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना वाले कुम्भ महापर्व का मध्य सत्र है। यह दो कुम्भ के बीच का सत्र होता है। कुम्भ और अर्द्ध-कुम्भ के आयोजन में योग-संयोग का बड़ा महत्व होता है। इस समय कुम्भ राशि के गुरू से सप्तम सिंह राशि के गुरू में मेष के सूर्य के आने पर हरिद्वार में अर्द्ध-कुम्भ का आयोजन हो रहा है। इस योग में 22 अप्रैल तक अर्द्ध-कुम्भ होगा।उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई, 2016 तक सिंहस्थ कुम्भ महापर्व का आयोजन होना है। यहाँ सिंहस्थ आयोजन के 10 वाँछित योग माने जाते हैं। सिंह राशि में गुरू, मेष राशि में सूर्य, तुला का चन्द्रमा, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि, कुश-स्थली, स्वाति नक्षत्र, व्यतिपात योग और सोमवार हो, तो सिंहस्थ का आयोजन होता है। यह तो सिंहस्थ के लिये वाँछित योग है।इसी उज्जैन में वर्ष 1950 में संध्यापुरीजी महाराज द्वारा क्षिप्रा के तट पर पहली बार अर्द्ध-कुम्भ मनाया गया। वैशाख पूर्णिमा 2 मई, 1950 को साधु-संतों ने मोक्षदायिनी क्षिप्रा में पवित्र स्नान कर महारुद्र यज्ञ किया। उस समय सिंह राशि से सप्तम राशि कुम्भ राशि के गुरू में मेष का सूर्य और वैशाख मास का योग रहा।इसके अलावा भारत के प्रयाग और नासिक में भी अर्द्ध-कुम्भ स्नान के चिन्ह मिलते हैं। प्रयाग नगरी इलाहाबाद में तुला या वृश्चिक राशि में गुरू होने पर अर्द्ध-कुम्भ मनाया जाता है। वहीं नासिक में अर्द्ध-कुम्भ नहीं मनता, लेकिन कुम्भ में गुरू, सिंह के सूर्य तथा श्रावण मास में ऐसे योग बनते हैं।

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उज्जैन सम्पूर्ण विश्व के लिये आस्था का केन्द्र

'साथी हाथ बढ़ाना।'' 'हम होंगे कामयाब।'' जैसे प्रेरणादायी गीतों को गुनगुनाते हुए रविवार को उज्जैन के अंगारेश्वर से लेकर सिद्धवट तक हजारों लोग श्रमदान करते हुए क्षिप्रा शुद्धिकरण अभियान में शामिल हुए। सफाई अभियान में महिला-बाल विकास श्रीमती माया सिंह ने भी श्रमदान किया। उन्होंने शुद्धिकरण अभियान की प्रशंसा की। अभियान में विधायक डॉ. मोहन यादव, महिला सशक्तिकरण के प्रमुख सचिव जे.एन. कंसोटिया, आयुक्त एकीकृत बाल विकास सेवा पुष्पलता सिंह और कलेक्टर कवीन्द्र कियावत भी शामिल हुए। महिला-बाल विकास मंत्री माया सिंह ने कहा कि उज्जैन सम्पूर्ण विश्व के लिये आस्था का सबसे महत्वपूर्ण केन्द्र है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के दौरान वैचारिक विमर्श होगा। इससे निकलने वाले निष्कर्ष से सम्पूर्ण विश्व को नई दिशा मिलेगी। श्रीमती सिंह ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान महिला-बाल विकास की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सिंहस्थ अवधि में महिला सुरक्षा के लिये शौर्या-दल के सदस्य तैनात रहेंगे। दल के सदस्यों को पुलिस के सहयोग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान महिला सशक्तिकरण एवं भ्रूण-हत्या जैसे महत्वपूर्ण विषयों का प्रचार-प्रसार भी विभाग करेगा। मेला क्षेत्र में खोया-पाया केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। शुद्धिकरण अभियान में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए और उन्होंने हस्ताक्षर कर शुद्ध क्षिप्रा का संकल्प लिया। अंगारेश्वर से लेकर सिद्धवट घाट तक 100 से अधिक ट्राली भर कचरा निकाला गया।महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती सिंह ने केन्द्रीय जेल में सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण योजना में विपत्तिग्रस्त महिलाओं को उनकी रुचि के अनुसार ट्रेड का चयन कर प्रशिक्षण दिलवाये जाने की व्यवस्था की गयी है। महिला-बाल विकास मंत्री ने नवजात बेटियों की माताओं का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उनके उज्जवल भविष्य के लिये योजनाएँ संचालित की हैं। उन्होंने नागरिकों से कहा कि बेटियों को पढ़ाकर उन्हें स्वावलम्बी बनायें। महिला-बाल विकास मंत्री राहगीरी-डे में शामिल हुईं। इस मौके पर सांसद श्री चिंतामणि मालवीय भी मौजूद थे। महिला-बाल विकास मंत्री ने कार्यक्रम में 150 ई-रिक्शा की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि यह रिक्शे सिंहस्थ में स्वच्छ पर्यावरण में मददगार होंगे। महिला-बाल विकास मंत्री ने जनसंपर्क विभाग द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रशंसा की। प्रदर्शनी में वर्ष 2004 के सिंहस्थ और इस वर्ष 2016 के सिंहस्थ की तैयारियों को आकर्षक ढंग से चित्रों के जरिये प्रदर्शित किया गया।

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उज्जैन में अखाड़ों के सम्पर्क अधिकारी निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका

13 अखाड़ों में चल रहे हैं काम उज्जैन में वर्ष-2016 में होने वाले सिंहस्थ में प्रत्येक अखाड़े के लिये एक सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किया गया है। सभी 13 अखाड़ों के लिये नियुक्त सम्पर्क अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। यह अधिकारी नियमित रूप से सिंहस्थ क्षेत्र में पहुँचकर अखाड़ा प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर काम में आ रही दिक्कतों की जानकारी लेते हैं।अखाड़ा स्थलों पर विभिन्न शासकीय विभाग द्वारा कार्य किये जा रहे हैं। सम्पर्क अधिकारी प्राप्त जानकारी मेला कार्यालय में उच्च अधिकारियों को देने का भी काम कर रहे हैं। इन अधिकारियों की सूची और उनके मोबाइल नम्बर सिंहस्थ की अधिकृत वेबसाइट www.simhasthujjain.in पर अपलोड है। इस साइड पर अखाड़े के प्रमुख महंत के मोबाइल नम्बर भी अपलोड किये गये हैं।

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परम्परा के साथ आधुनिकता का संगम होगा सिंहस्थ 2016

सिंहस्थ कुंभ महापर्व-2016 विक्रम संवत 2073 में इस बार परम्परा के साथ आधुनिकता का संगम होगा। सिंहस्थ की प्राचीन गौरवशाली परम्परा के साथ सिंहस्थ कुंभ मनाने की पूरी तैयारी 3000 हेक्टेयर से अधिक पड़ाव क्षेत्र में की जा रही है। उज्जैन शहर में बन रहे बड़े-बड़े पुलों, फ्लाई ओवर, फिल्ट्रेशन प्लांट, इंटरप्रिटेशन सेन्टर और फोरलेन मार्गों ने उज्जैन को मेट्रो शहर जैसा लुक दे दिया हैइस बार के सिंहस्थ के लिये पिछले सिंहस्थ के 267 करोड़ के कार्यों की तुलना में 2591 करोड़ रूपये का अधिक बजट स्थायी एवं अस्थायी कार्यों के लिये प्राप्त हुआ है। इसमें 80 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रकृति के हैं, जो उज्जैन के लिये स्थायी सौगात होंगे। शेष 20 प्रतिशत बजट राशि से मेला क्षेत्र में अस्थायी प्रकृति के कार्य करवाये जा रहे हैं। उज्जैन नगर में 362 करोड़ रुपये लागत की लगभग 100 सड़क तैयार की गयी हैं। इन सभी सड़कों की कनेक्टिविटी इनर रिंग रोड से कर दी गयी है। देवास रोड से इन्दौर रोड को मिलाने वाला इंजीनियरिंग कॉलेज रोड फोर लेन बनाया गया है। इस फोर लेन रोड पर पर्याप्त संख्या में लाइट्स लगाई गई हैं। इन्दौर रोड के महामृत्युंजय द्वार से उज्जैन शहर में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है जैसे किसी मेट्रो शहर में पहुँच रहे हों।सिंहस्थ-2016 के लिये करीब 94 करोड़ रूपये की लागत से 14.29 किलोमीटर लम्बा उज्जैन पश्चिम बायपास इनर रिंग रोड बनाया गया है। इस मार्ग पर आवागमन प्रारम्भ हो गया है। उज्जैन की इस महत्वपूर्ण सड़क को इन्दौर-उज्जैन फोर लेन, बड़नगर रोड तथा उन्हेल-नागदा मार्ग को जोड़ा गया है। यह सड़क सांवराखेड़ी सेटेलाईट टाऊन से शुरू हो रहे मेला क्षेत्र के आसपास एक-एक किलोमीटर की दूरी से गुजरती है, जिसमें मेला अवधि में आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन सहित अपने गंतव्य तक पहुँच सकेंगे। इस मार्ग के बन जाने से अब भारी वाहन बिना उज्जैन नगर में प्रवेश किये अन्य जगह आ-जा रहे हैं। इस बार सिंहस्थ में 177 करोड़ की लागत के चार रेलवे ओवर ब्रिज तथा क्षिप्रा नदी पर आठ ब्रिज बनाये जा रहे हैं। इससे आवागमन एवं क्षिप्रा नदी पर श्रद्धालुओं को इस पार से उस पार जाने में अधिक सुविधा होगी।सिंहस्थ-2016 के लिये क्षिप्रा नदी का किनारा श्रद्धालुओं के स्नान के लिये तैयार किया जा रहा है। क्षिप्रा के बाँये किनारों पर जहाँ एक ओर लाल पुल से लेकर भूखी माता और भूखी माता से लेकर दत्त अखाड़ा तक विशाल घाटों का निर्माण कार्य हो गया है, वहीं दाँये तट पर भी लाल पुल से लेकर नरसिंह घाट तक की खाली पड़ी जगहों पर भी घाटों का निर्माण किया जा चुका है। सिंहस्थ-2016 में हरिद्वार की हर की पोढ़ी जैसे सुन्दर घाट क्षिप्रा नदी पर होंगे। इस बार पाँच किलो मीटर लम्बाई में नये घाट बनाये गये हैं। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के स्नान के लिये क्षिप्रा तट के दोनों किनारों पर 8.34 किलोमीटर लम्बाई में घाट उपलब्ध रहेंगे।पाइप लाइन के जरिये हो रहा है खान डायवर्सनक्षिप्रा नदी में शुद्ध जल से स्नान हो सके, इसके लिये राज्य सरकार द्वारा खान नदी डायवर्सन योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पिपल्याराघौ से निकालकर खान नदी को 19 किलोमीटर लम्बाई में पाइप लाइन के जरिये कालियादेह महल के आगे क्षिप्रा नदी से जोड़ा जा रहा है। इस तरह त्रिवेणी के आगे से भूखी माता, रामघाट और मंगलनाथ क्षेत्र के सभी घाटों पर क्षिप्रा नदी का शुद्ध जल प्रवाहित होगा। इस कार्य के लिये राज्य शासन ने 90 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है। निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और कार्य फरवरी-2016 तक पूरा हो जायेगा। खान डायवर्सन में पाइप का आकार इतना बड़ा है कि छोटी कार इसमें से होकर गुजर सकती है।

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शिप्रा कांच की तरह दमकती नजर आएगी

घाटों पर डिस्प्ले होगी गुणवत्ता सिंहस्थ महापर्व के दौरान शिप्रा कांच की तरह दमकती नजर आएगी। महज 45 दिनों में शिप्रा की ओजोनेशन तकनीक से सफाई होगी। नोएडा की कंपनी को इसके लिए 9.80 करोड़ का ठेका मंजूर हुआ है। जो विशेष मशीनों के जरिए त्रिवेणी से मंगलनाथ घाट तक शिप्रा के पानी को कांच की तरह व उसमें मानक मात्रा में ऑक्सीजन बनाए रखने का जिम्मा संभालेगी।मंगलवार को मेयर इन काउंसिल की बैठक में कुछ मेंबरों के आंशिक विरोध के बीच प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। इसी के साथ उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड व स्पेशल प्रपोजल व्हीकल (एसपीवी) गठन, सेमी डीलक्स शौचालय बनाने सहित करोड़ों रुपए के निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई। महापौर मीना जोनवाल की अध्यक्षता में हुई एमआईसी बैठक में जलकार्य समिति प्रभारी कलावती यादव व स्वास्थ्य समिति प्रभारी सत्यनारायण चौहान ने ओजोनेशन तकनीक पर अफसरों से सवाल-जवाब किए और कम समय के लिए इतनी राशि खर्च करने का कारण पूछा। बैठक बाद संबंधित कंसल्टेंट ने ओजोनेशन सफाई का प्रजेंटेशन दिया और इसे कारगर बताया। ठेका नोएडा की वीआरसी कंस्ट्रक्शन इंडिया लिमिटेड को मिला है। आयुक्त अविनाश लवानिया ने कहा प्रोजेक्ट साधिकार समिति से मंजूर है, तभी टेंडर निकाले। बैठक में दुर्गा चौधरी, डॉ. योगेश्वरी राठौर, राधेश्याम वर्मा, मांगीलाल कड़ेल, नीलूरानी खत्री, आरती जीवन गुरु आदि उपस्थित रहे।आजोनेशन तकनीक में विशेष प्रकार की तैरने वाली मशीनों से विभिन्न घाटों पर पानी की आधुनिक सफाई होगी। जहां पानी की जो गुणवत्ता रहेगी वहां घाटों पर उसका डिस्प्ले होगा। पहली बार इस तरह का प्रयोग हो रहा है। उक्त कंपनी मशीनांे को निगम को हैंडओवर करेगी। बाद में भी इनका उपयोग हो सकेगा। दावा है कि इस तकनीक से पानी कांच की तरह साफ व आचमन योग्य बना रहेगा।

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उज्जैन के रुद्र सागर सौंदर्यीकरण और सफाई अभियान में शिवराज का श्रमदान

सिंहस्थ के आयोजन में सभी का सहयोग लिया जायेगामुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उज्जैन में जन-सहयोग से चल रहे रुद्र सागर को सुंदर और साफ बनाने के अभियान में श्रमदान कर आमजन की हौसला अफजाई की। मुख्यमंत्री ने इस काम में शासन के साथ जन-भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की।चौहान ने कहा कि वे जब पिछली बार यहाँ आये थे, तब रुद्र सागर के स्वरूप को देखकर बहुत दु:खी हुए थे। उन्हें प्रसन्नता है कि उनके आने तक यहाँ के लोगों ने आधा काम जन-भागीदारी से पूरा कर दिया है। उन्होंने लोगों का आव्हान किया कि महाकाल के आँगन को और रुद्र सागर को सुंदर बनाकर मिसाल कायम करना है। उन्होंने जन-समुदाय से पूछा कि सप्त-सरोवरों को जिन्दा करना चाहिये कि नहीं, इसके उत्तर में जनता ने उत्साह से मुख्यमंत्री का समर्थन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन को दुनिया का अनूठा नगर बनायेंगे। उन्होंने उज्जैन में महाराजा विक्रमादित्य की प्रतिमा लगाने की घोषणा की।श्री चौहान के पहुँचने पर श्रमदान कर रहे सामाजिक संगठनों में उत्साह की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री ने स्वयं 30 मिनट तक तालाब से मिट्टी निकाल कर ट्रकों में डलवाई और एक-एक संगठन के पास जाकर उत्साह बढ़ाया।विगत 18 जनवरी से रुद्र सागर को सुंदर और गहरा करने का काम चल रहा है। अब तक 10 हजार लोग श्रमदान कर चुके हैं। आठ हजार लोग रुद्र सागर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का संकल्प ले चुके हैं। अब तक 1200 डम्पर एवं 1400 ट्राली मलबा तालाब से निकालकर रुद्र सागर को एक मीटर गहरा किया जा चुका है। जनता एवं संगठनों ने लगभग 7 लाख रुपये का जन-सहयोग भी दिया है। प्रशासन के 40 विभाग और 300 स्वयंसेवी संगठन श्रमदान से जुड़े हुए हैं। इस दौरान रघु मुनि, स्कूल शिक्षा मंत्री पारस जैन, सांसद डॉ. चिन्तामणि मालवीय, महापौर रामेश्वर अखण्ड, विधायक मोहन यादव, अनिल फिरोजिया, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष दिवाकर नातू, जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय, राज्य योजना मण्डल के उपाध्यक्ष बाबूलाल जैन, नगर निगम अध्यक्ष सोनू गेहलोत, मुख्य सचिव अंटोनी डिसा, पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह सहित अनेक जन-प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे।रामघाट सहित अन्य क्षेत्रों का भ्रमणश्री चौहान ने श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद रामघाट स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में महंत रघु मुनि महाराज से भेंट कर उदासीनाचार्य श्रीचन्द्र मंदिर में पूजा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ बेहतर ढंग से हो, यही सच्ची मानव-सेवा है। श्री चौहान ने कहा कि सिंहस्थ का आयोजन ऐतिहासिक होगा। महंत रघु मुनि महाराज ने ऐसा आशीर्वाद मुख्यमंत्री को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन में असुविधा से बचाने के लिये उन्होंने आज नंदी हॉल से ही दर्शन किये।मुख्यमंत्री ने रामघाट का जायजा लिया तथा गुरु दत्तात्रय अखाड़े के महंत पीर महंत परमानन्द पुरी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महंतों ने मुख्यमंत्री का साफा बाँधकर सम्मान कर उन्हें सिंहस्थ बेहतर ढंग से मनाने का आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने दत्त अखाड़े में अष्टकौशल महंत सुंदर पुरी की समाधि पर मत्था टेका। श्री चौहान ने चारधार मंदिर में दर्शन कर शांतिस्वरूपानंद गिरि महाराज से भेंट की तथा आशीर्वाद लिया।प्रतिनिधि-मण्डलों से मुलाकातमुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतिनिधि-मण्डलों से मुलाकात के दौरान कहा कि सिंहस्थ-2016 का आयोजन सभी के सहयोग से किया जायेगा। सिंहस्थ में सेवाएँ देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं का भरपूर सहयोग लिया जायेगा। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन आदि मौजूद थे। प्रतिनिधि-मण्‍डलों में एडवोकेट संगठन, इंजीनियर सोसायटी, ठेकेदार संघ, बोहरा समाज, कुलमी पाटीदार परिषद, खेल संगठन, सन्त सत्कार समिति, मुस्लिम संगठन, रंगमंच संस्था इत्यादि शामिल थे। मुख्यमंत्री को नगर के विकास संबंधी सुझाव दिये गये।मुख्यमंत्री ने बालिका खुशबू पांचाल द्वारा नगर के चौरासी महादेव मंदिरों पर आधारित डाक्यूमेंट्री देखी और सराहना की। मुख्यमंत्री ने कालिदास अकादमी परिसर में श्री गणेश गेहलोत की प्रदर्शनी भी देखी। प्रदर्शनी में पुराने सिक्कों, नोट, माचिस और प्राचीन काव्य-संग्रह को प्रदर्शित किया गया।नगर भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री चौहान माधव सेवा न्यास में नगर भोज में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री को अपने साथ भोजन करते देखकर नागरिक काफी खुश हुए। मुख्यमंत्री ने स्वयं लोगों को भोजन परोसा। मुख्यमंत्री ने बड़ा उदासीन अखाड़े के महंत के साथ पूरे पण्डाल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।महाकालेश्वर में पूजन-अर्चनमुख्यमंत्री चौहान ने महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर पूजन-अर्चन किया। मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक जयन्त जोशी ने शाल एवं महाकाल का चित्र भेंट कर उनका सम्मान किया। दर्शन के बाद उन्होंने पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत प्रकाश पुरी से अखाड़े में जाकर भेंट की। मुख्यमंत्री ने नव-विस्तारित नंदी हॉल का अवलोकन कर वहाँ अधिक एलसीडी लगाने को कहा।फूड कोर्टसीएम शिवराज सिंह चौहान ने महाकाल वन प्रोजेक्ट फेज-1 में निर्मित फूड कोर्ट का लोकार्पण भी किया। उन्होंने दुकान आवंटियों को अधिकार-पत्र एवं चाबी सौंपी। महाकाल वन प्रोजेक्ट के फेज-1 में कुल 27 करोड़ के काम किये जा रहे हैं।

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शिवराज अमेरिका में करेंगे सिंहस्थ ब्रांडिंग

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अमेरिका में सिंहस्थ 2016 की ब्रांडिंग करेंगे। सिंहस्थ के इतिहास और इस बार के आयोजन का पूरा ब्यौरा पेश करते हुए मुख्यमंत्री प्रवासी मध्यप्रदेश के लोगों के साथ अप्रवासी भारतीयों को भी इस आयोजन में शामिल होने की अपील करेंगे।मुख्यमंत्री चौहान की अमेरिका यात्रा 31 जनवरी से पांच फरवरी तक है। एक फरवरी को सीएम तीन हजार प्रवासी मध्यप्रदेश के लोगों को सूबे में राज्य में निवेश करने और इनोवेटिव आइडिया देने के लिए प्रेरित करेंगे। इसी दिन मुख्यमंत्री ‘फ्रेंडस आॅफ मध्यप्रदेश वेबसाइट’ का लोकार्पण भी करेंगे। आयोजन में तीन हजार प्रवासी प्रदेशवासियों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन यह संख्या पांच हजार या इससे अधिक भी होने की संभावनाएं सूत्र जतला रहे हैं।आयोजन के इतिहास वाला आकर्षक ब्रोशरसिंहस्थ के इतिहास, इस बार के पूरे आयोजन, स्नान पर्व और उज्जैन की कनेक्टिविटी के ब्यौरे सहित एक नजर में जानकारी देने वाला ब्रोशर छपवाया गया है। छह भागों में बंटे इस ब्रोशर के अंतिम पृष्ठ पर मुख्यमंत्री की आयोजन में हिस्सेदारी की अपील है। इस अपील में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए जुटाई जा रही तमाम जरूरतों का जिक्र करते हुए ,सीएम यह भरोसा भी दिला रहे हैं कि आयोजन में पांच करोड़ के लगभग देश और देश के बाहर के श्रद्धालुगण आएंगे, इनकी सुरक्षा और आराम का तमाम उपाय सरकार करेगी।स्नान पर्व का ब्यौरासिंहस्थ 2016 अप्रैल में शुरू होगा और मई में इसका समापन होगा। अमेरिका में ब्रांडिंग के दौरान सीएम सिंहस्थ के स्नान पर्व का ब्यौरा भी प्रवासी प्रदेशवासियों को देंगे। दरअसल सिंहस्थ में स्नान का अत्याधिक महत्व है। इस बार के सिंहस्थ में स्नानों का सिलसिला 22 अप्रैल से शुरू होगा। छह मई को पंछाशनी यात्रा, नौ मई अक्षय तृतीया स्नान, 11 मई को शंकराचार्य जयंती स्नान, 17 मई को मोहिनी अखाड़ा और प्रदोष पर्व स्नान तथा 21 मई 16 को महास्नान होगा।उज्जैन कनेक्टिविटीउज्जैन की देश के तमाम मुख्य शहरों से हवाई, रेल और बस कनेक्टिविटी का ब्यौरा ब्रोशर में दिया गया है। उज्जैन से अहमदाबाद, भोपाल, मुंबई, दिल्ली, ग्वालियर, खजुराहो और इंदौर की दूरी का ब्यौरा दिया गया है।नौ स्थानों पर होंगे बौद्धिक समागम, भोपाल आएगी रिपोर्टप्रसं, भोपाल। सिंहस्थ 2016 में भारतीय अध्यात्म और दर्शन पर इंटरनेशनल कांफ्रेंस का आयोजन होगा। इस कांफ्रेंस के लिए माहौल तैयार करने के लिए नौ स्थानों पर 11 विमर्श होंगे। उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, जनसंपर्क और सामान्य प्रशासन विभाग इन विमर्श का आयोजन करेंगे। शासन ने नौ स्थानों को तय करते हुए सभी 11 सिंहस्थ पूर्व विमर्श के विषय तय कर दिए हैं। ये विमर्श रीवा विवि, इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर, हरिसिंह गौर विवि सागर, चित्रकूट ग्रामोदय विवि, प्रशासन अकादेमी भोपाल, गांधी मेडिकल कॉलेज इंदौर, जीएसआईटीएस इंदौर, डायरेक्टर विधि विवि भोपाल, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि भोपाल और ग्वालियर विश्वविद्यालय में होंगे। संस्थानों से कहा गया है कि इन विमर्शों में स्थानीय बुद्धिजीवियों के साथ अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए। आयोजन संस्थाओं को आयोजन के बाद पूरे कार्यक्रम की रिपोर्ट भोपाल भेजना होगी ताकि कार्यक्रम की सफलता का आकलन किया जा सके।ये होंगे विषयसामान्य उच्च शिक्षा में मूल्यपरकता, विद्यालयीन शिक्षा में मूल्यपरकता, व्यावसायिक शिक्षा में मूल्यपरकता, पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों में मूल्य चेतना, मूल्य आधारित शासन एवं प्रशासन (गुड गवर्नेंस), स्वास्थ्य सेवाओं में मूल्यपरकता, न्यायिक एवं विधिक क्षेत्र में मूल्योन्मुखता, अंतर्राष्टÑीय संबंधों में मूल्यों की सार्वभौमिकता।

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सिंहस्थ में आएंगे पाँच करोड़ श्रद्धालु

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आगामी सिंहस्थ से दुनिया को मानव कल्याण का संदेश पहुँचे। मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन का विश्वव्यापी प्रचार हो। आयोजन की सनातन परम्परा के अनुरूप श्रेष्ठतम और सुन्दरतम व्यवस्थाएँ की जाये। सिंहस्थ के सभी कार्य स्तरीय तथा पारदर्शी प्रक्रिया से समय पर पूरे किये जाये।श्री चौहान भोपाल में सिंहस्थ की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ धार्मिक पर्यटन का एक ऐतिहासिक और बड़ा अवसर है। इससे जुड़ी सभी व्यवस्थाएँ बेहतर, योजनाबद्ध और समय-सीमा में हो। सिंहस्थ में सनातन स्वरूप के साथ वर्तमान की प्रासंगिक समस्याओं पर विचार हो। इसके माध्यम से दुनिया को पर्यावरण बचाने, सब धर्मों की मूलभूत एकता, नैतिक शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया जाये। बताया गया कि उज्जैन में वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ में करीब 5 करोड़ श्रद्धालु के आने की संभावना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के बारे में पूरी दुनिया को जानकारी देकर लोगों को आमंत्रित करें। भारतीय मूल के दुनियाभर में बसे लोगों को भी आमंत्रित किया जाये। आयोजन में आधुनिकतम तकनीक का उपयोग करें। सिंहस्थ की तैयारियों में जन-प्रतिनिधियों और जनता की भागीदारी रहे। सिंहस्थ के लिये क्षिप्रा के घाटों का विश्व-स्तरीय सौन्दर्यीकरण किया जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ संबंधी सभी कार्यों के लिये पारदर्शी प्रक्रिया अपनायी जाये तथा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाये। वे हर माह सिंहस्थ की तैयारियों की समीक्षा करेंगे।बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ मेला क्षेत्र के लिये 4000 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जायेगी। अप्रैल 2016 से दो माह का यह आयोजन शुरू होगा। प्रशासनिक व्यवस्था के लिये मेला क्षेत्र में 6 जोन, 16 सेक्टर और 42 थाने बनाये गये हैं। सिंहस्थ का प्रथम स्नान 22 अप्रैल, शाही स्नान 21 मई तथा अन्य स्नान 9, 11, 17 और 19 मई 2016 को होंगे। इस दौरान पंचक्रोषी यात्रा 1 से 6 मई 2016 तक होगी। सिंहस्थ के लिये जी.आई.एस. आधारित व्यवस्था की जायेगी। रेलवे द्वारा छह फ्लेग स्टेशन बनाये जायेंगे। सिंहस्थ के दौरान करीब 20 हजार प्रशासनिक, 23 हजार पुलिस तथा 60 हजार वालेंटियर्स का अमला लगेगा। सिंहस्थ के 4000 हेक्टेयर क्षेत्र को धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लिये शहर के रूप में प्लान किया जायेगा। यातायात प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्थाएँ की जायेंगी। सिंहस्थ के लिये राज्य शासन द्वारा करीब 773 करोड़ रूपये लागत के 144 कार्य स्वीकृत किये गये हैं। सिंहस्थ के दौरान स्नान के लिये सवा सात किलोमीटर लंबे घाटों का सौन्दर्यीकरण तथा नये घाटों का निर्माण किया जायेगा। मेला अवधि के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।बैठक में मुख्य सचिव अन्‍टोनी डिसा, पुलिस महानिदेशक सुरेन्द्र सिंह सहित सभी संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, उज्जैन के संभागायुक्त, कलेक्टर तथा सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।

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सिंहस्थ प्रदर्शनी का उदघाटन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सिंहस्थ 2016 पर केन्द्रित प्रदर्शनी का उदघाटन किया। देश-विदेश से आये उद्योगपतियों और अतिथियों को सिंहस्थ की गौरवशाली परम्परा से अवगत करवाने के लिये प्रदर्शनी लगायी गयी है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री एवं परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव अन्टोनी डिसा सहित इंदौर के विधायक मौजूद थे।प्रदर्शनी में साधु-संतों के शाही-स्नान के साथ-साथ सिंहस्थ के बहुआयामी पक्ष प्रदर्शित किये गये हैं। संस्कृति और सनातन धर्म की बहती अमृत धारा को रंगों के केनवास पर बखूबी उकेरा गया है। वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ के आध्यात्मिक अनुभव को विस्तार से दिखाया गया है। आस्था के सौंदर्य का सिंहस्थ अनूठा अनुभव होगा। प्रदर्शनी में सिंहस्थ पर्व कब और किन विशेष परिस्थितियों में होता है, यह भी दर्शाया गया है।

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काल भैरव मन्दिर के लिये राजस्थान से आयेंगे लाल ग्रेनाइट पत्थर

राजस्थान की सीएम महाकाल के दरबार में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने सोमवार को उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। श्रीमती सिंधिया ने इसके बाद माँ हरसिद्धि माता मन्दिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने काल भैरव मन्दिर में भी विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मंदिर की साज-सज्जा के लिये राजस्थान से लाल ग्रेनाइट पत्थर भेजने की बात कही। श्री महाकालेश्वर मन्दिर में राजस्थान की मुख्यमंत्री का नन्दी हाल में प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर बी.एम. शर्मा ने भगवान महाकाल का चित्र, प्रसाद, शाल, श्रीफल भेंटकर सम्मान किया।मुख्यमंत्री सिंधिया ने मंगलनाथ के समीप श्री अंगारेश्वर मन्दिर में भी पूजा-अर्चना की। श्रीमती सिंधिया के साथ महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह भी थीं।प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने क्ष्रिप्रा नदी सिद्धवट से श्री अंगारेश्वर मन्दिर तक दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए पैदल पुल बनाये जाने के लिये इस्टीमेट बनाने के निर्देश दिये।

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उज्जैन में सांदीपनि आश्रम का विकास होगा

भगवन श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन में सांदीपनि आश्रम का विकास होगा ।नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा है कि मध्यप्रदेश में प्राचीन संस्कृति के संरक्षण के लिये हर-संभव प्रयास किये जायेंगे। गौर आज उज्जैन में सांदीपनि आश्रम के विकास कार्यों का भूमि-पूजन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।श्री गौर ने कहा कि धार्मिक नगरी उज्जैन का प्राचीन इतिहास रहा है। नगर की पुरा-सम्पदा को सहेजने की जिम्मेदारी हम सबकी है। उन्होंने कहा कि पुरा-सम्पदा के संरक्षण के लिये धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जायेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष श्री मोहन यादव ने बताया कि आज से 5,200 वर्ष पूर्व भी उज्जैन में यह आश्रम था। इस आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ सांदीपनि आश्रम में विद्या अध्ययन किया था। ज्ञान के इस प्राचीन केन्द्र का पर्यटन विकास निगम द्वारा 30 लाख रुपये की राशि से आश्रम का सौंदर्यीकरण और विकास का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पूरी योजना के लिये प्रदेश सरकार ने 4 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि मंजूर की है। इस मौके पर महापौर श्री रामेश्वर अखण्ड भी मौजूद थे।

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महाकाल भस्मारती की बुकिंग ऑंन लाईन

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मकर संक्रांति के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों के सुविधा के लिये भस्म आरती आनलाईन आरक्षण का शुभारंभ किया। भस्म आरती आनलाईन बुकिंग से कहीं से भी एक माह पूर्व भी भस्म आरती के लिये आनलाईन बुकिंग की जा सकेगी। महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइटwww.mahakleshwar.nic.in/.org.in पर जाकर क्लिक कर महाकालेश्वर मंदिर के वेब पेज पर लाईव दर्शन के साथ भस्म आरती की बुकिंग की जा सकेगी। यह सुविधा नि:शुल्क है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने निवास पर महाकाल के लाईव दर्शन देख प्रसन्नता जाहिर की और कहा उत्तरायण के साथ महाकाल के घर बैठे दर्शन होना परम सौभाग्य है। बताया गया कि मंदिर के व्यवस्थाओं के कम्प्यूटराईजेशन के अंतर्गत भविष्य में धर्मशाला बुकिंग, अभिषेक, पूजन बुकिंग और आनलाईन डोनेशन इत्यादि सुविधाएँ आनलाईन की जायेगी। मंदिर की आनलाईन बुकिंग और कम्प्यूटराईजेशन एन.आई.जी. उज्जैन द्वारा तैयार किया गया है।उज्जैन संभाग के शासन नियंत्रित देवस्थानों की डायरेक्ट्री का विमोचनमुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मकर संक्राति के अवसर पर उज्जैन संभाग के शासन नियंत्रित देवस्थानों के अद्यतन स्थिति दर्शाने वाली डायरेक्ट्री का भी विमोचन किया। इस डायरेक्ट्री में शासन नियंत्रित देवस्थानों का सम्पूर्ण विवरण, मंदिर की समस्त सम्पत्ति का सम्पूर्ण विवरण दिया गया है। डायरेक्ट्री में मंदिर के संधारण और संचालन के लिये शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों को उल्लेखित किया गया है। मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना को भी डायरेक्ट्री में स्थान दिया गया है। संभाग की डायरेक्ट्री जिला आधार पर बनाई गई है जिसमें प्रत्येक जिले के मंदिरों का उल्लेख किया गया है। उज्जैन संभाग में शासन नियंत्रित देवस्थानों की संख्या 10,579 है एवं उनसे लगी कृषि भूमि 25,266.5 हेक्टेयर है जो प्रदेश में सर्वाधिक है। संभागायुक्त ने बताया कि उज्जैन संभाग की वेबसाईट commujjain@mp.nic.in एवं संबंधित जिले के कलेक्टरों के वेबसाईट पर भी देवस्थान एवं मंदिरों से संबंधित सम्पूर्ण विवरण उपलब्ध है। संभाग के मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों का हुआ शुभारंभमकर संक्रांति के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा संभाग के विभिन्न मंदिरों के जीर्णोद्धार कार्यों का शुभारंभ किया गया। विभिन्न मंदिरों के लिये 40 करोड़ से अधिक के मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके प्रथम चरण में लगभग 11 करोड़ रूपये की राशि व्यय की जायेगी। इसके अंतर्गत महाकाल मंदिर उज्जैन स्थिति मंदिर हाल का विस्तारीकरण जिससे कि भस्म आरती में डेढ़ हजार से अधिक दर्शनार्थी शामिल हो सकेंगे। इसी के साथ उज्जैन स्थित चिन्तामन गणेश मंदिर, हरसिद्धी मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, कालभैरव मंदिर, सिद्धबट मंदिर, 84 महादेव एवं सांदिपनी आश्रम के विकास एवं उन्नयन के कार्ययोजनाओं का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। नीमच स्थित श्री महामाया भादवा माता मंदिर के विकास और उन्नयन की कार्ययोजना का मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है। इनके कार्य जल्द शुरू किये जायेंगे।इस अवसर पर जनसंपर्क एवं धर्मस्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा भी उपस्थित थे। उन्होंने भी इस कार्य के लिये सभी को शुभकामनाएं दी। संभागायुक्त अरूण पांडे ने मुख्यमंत्री को योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि सभी कार्य जल्द से जल्द शुरू किये जायेंगे। कार्यक्रम में जनसंपर्क आयुक्त राकेश श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। उज्जैन कलेक्टर बी.एम. शर्मा ने महाकाल मंदिर भस्म आरती आनलाईन आरक्षण के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर पुजारी प्रदीप गुरू ने मंत्रोच्चारों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य गोविंद शर्मा, मंदिर प्रशासक जयंत जोशी, एनआईसी के धर्मेन्द्र यादव, आर्किटेक्ट नितिन श्रीमाली, माफी अधिकारी राजेश यादव उपस्थित थे।

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सिंहस्थ  का देश-विदेश में मोटर साइकिल यात्रा से प्रचार

जनसंपर्क, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं खनिज साधन मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपने निवास से सिंहस्थ-2016 के प्रचार-प्रसार के लिये देश-विदेश में जाने वाले सिंहस्थ आमंत्रण मोटर साइकिल रैली के द्वितीय चरण के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क अनुपम राजन, अपर संचालक मंगला मिश्रा मौजूद थे।श्री शुक्ल ने कहा कि देश सहित पूरी दुनिया में सिंहस्थ का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था और आध्यात्म के विश्व के सबसे बड़े समागम सिंहस्थ का आयोजन प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में किया जा रहा है। जनसंपर्क मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा अनुरूप इस आयोजन को एतिहासिक बनाने के लिए जनसंपर्क विभाग द्वारा सभी प्रचार माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। श्री शुक्ल ने कहा कि सिंहस्थ समागम के दौरान उज्जैन में वैचारिक महाकुंभ भी होगा। इसके जरिये मानव-कल्याण और पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दुनिया में जन-जन तक पहुँच सकेगा।शुक्ल ने बताया कि ये मोटर साइकिल दल भोपाल से 16 मार्च से 22 अप्रैल 2016 तक भारत के 7 राज्य, 40 प्रमुख शहर एवं नेपाल में पहुँचकर करीब 12 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सिंहस्थ के संदेश को प्रसारित करेगा। यह दल भोपाल से रवाना होकर होशंगाबाद, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, (म.प्र.) दुर्ग, भिलाई, रायपुर (छ.ग.) भुवनेश्वर, जगन्नाथपुरी, राऊरकेला (उड़ीसा) जमशेदपुर, रांची (झारखंड), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), पटना, मोतीहारी (बिहार), काठमाण्डू, (नेपाल), गोरखपुर, जौनपुर, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद (उ.प्र.) तथा सीधी, रीवा, खजुराहो, सागर, भोपाल एवं उज्जैन में सिंहस्थ आमंत्रण का संदेश देगा।दल के प्रभारी उज्जैन के युवा अमन मिश्रा ने बताया कि सिंहस्थ मोटर साइकिल रैली के द्वारा प्रथम चरण में 27 नवम्बर 2015 से 15 फरवरी 2016 तक 15 राज्य तथा 50 प्रमुख शहर में 19 हजार 500 किलोमीटर यात्रा तय की गई थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 27 नवम्बर को रैली को रवाना किया था। दल ने अपनी यात्रा के दौरान भोपाल, देवास, उज्जैन, मंदसौर, नीमच (म.प्र.) नीमबाड़ा, भीलवाड़ा चित्तौड़गढ़, अजमेर, पुष्कर, जयपुर, (राजस्थान) दिल्ली और एन.सी.आर, गुना, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, आगरा, गाजियाबाद, (उ.प्र.) हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, (उत्तराखण्ड) पोन्टा साहिब (हिमाचल प्रदेश) कुरूक्षेत्र, अंबाला, हरियाणा, अमृतसर, अटारी (पंजाब), श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, सिरोही, माऊंटआबू (राजस्थान), अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत (गुजरात), सिलवासा (दमन दीव), मुम्बई, पुणे, कोल्हापुर (महाराष्ट्र), गोवा, पणजी, उड्डूपी, जोगप्रपात मैंगलुरू, (कर्नाटक), कोच्चि एरनाकुलम, तिरूवनंतपुरम, (केरला), कन्याकुमारी, एटियापुरम, रामेश्वरम एवं मदुरई (चेन्नई) पहुँचकर सिंहस्थ-2016 का प्रचार-प्रसार किया था।

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कुम्भ में कैमरे से होगी श्रद्धालुओं की गिनती

अगले माह से उज्जैन में शुरु हो रहे सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं पर पूरी तरह नजर रखने के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाले कैमरे लगाए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि कुंभी में देश विदेश के पांच करोड़ श्रद्धालु शामिल होंगे। सरकार द्वारा इसको लेकर मेला क्षेत्र में जगह-जगह लंबी दूरी तक नजर रखने वाले कैमरों का लगाया जा रहा है। इन कैमरों से सुरक्षा पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए भी मेला क्षेत्र के आसपास 51 अस्थायी थाने स्थापित किए जा रहे हैं। खास बात यह कि ये कैमरे एडवांस टेक्नोलॉजी वाले हैं। इनसे यह भी पता चल जाएगा कि सिंहस्थ में किस दिन कितने श्रद्धालु आए तथा सैटेलाइट टाउन में कितने वाहन व भीड़ इक_ा है। ये अत्याधुनिक कैमरे विदेशी कंपनी लगा रही है। सरकार ने इस बार सिंहस्थ के लिए बड़ा मेला क्षेत्र बनाया है। 3061 हेक्टेयर जमीन पड़ाव क्षेत्र और 352 हेक्टेयर सैटेलाइट टाउन के लिए अधिसूचित की है। इतना बड़ा क्षेत्र होने पर व्यवस्थाएं भी व्यापक की जा रही हैं। मेला क्षेत्र में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधाओं तथा मेला क्षेत्र में घूमने वाले असामाजिक तत्वों पर सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी।125 पाइंट और 550 कैमरेजानकारी के मुताबिक सिंहस्थ मेले पर पूरी नजर रखने के लिए 125 पाइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां 550 कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे लगातार सिंहस्थ क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। घाटों पर नहान के दौरान 11 स्थानों पर विशेष निगरानी हेतु कैमरे लगाए जा रहे हैं।प्रत्येक सेक्टर में होगा अस्थाई थानाश्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कानून व्यवस्था की दृष्टि से प्रत्येक सेक्टर के साथ एक से अधिक अस्थाई थाने स्थापित किए जा रहे हैं। कुल ५१ थाने इन क्षेत्रों में बनेंगे इनमें मंगलनाथ, आंगारेश्वर, सांदीपनि आश्रम, खाकचौक, सैटेलाइट टाउन आगर रोड, मकोडिय़ा आम, गढ़कालिका, सिद्धवट, केडी पैलेस, काल भैरव, सैटेलाइट टाउन उन्हेल रोड, लालपुर, कर्कराज, रामघाट प्रथम, रामघाट द्वितीय, महाकाल मंदिर, हरसिद्धि, नरसिंह घाट, गोपाल मंदिर, वाल्मीकि धाम, चिंतामण गणेश, गऊघाट उत्तर व दक्षिण आदि शामिल हैं।

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उज्जैन में सिंहस्थ में होगी पेयजल की पुख्ता व्यवस्था

प्रतिदिन 65 मिलियन लीटर पानी देने की तैयारी उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध करवाने की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। सिंहस्थ के दौरान शहर में 65 मिलियन लीटर पेयजल आपूर्ति किये जाने का इंतजाम किया जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग ने इसके लिये सभी आवश्यक तैयारियाँ की हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में पी.एच.ई. अमले द्वारा सतत निगरानी रखी जायेगी। पेयजल व्यवस्था के लिये गऊघाट पर 5 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से 27.25 मिलियन लीटर प्रति दिवस की क्षमता का फिल्टर प्लांट तैयार किया गया है। इसी तरह साहिबखेड़ी पर पौने चार करोड़ की लागत से 8 मिलियन लीटर प्रति दिवस क्षमता का नया जल-शोधन प्लांट और पम्प हाउस बनाया गया है। अम्बोदिया और गऊघाट पर एक करोड़ 85 लाख रुपये से जल-शोधन संयंत्रों का उन्नयन भी किया गया है। क्षिप्रा नदी के 5 बैराज की मरम्मत पर पीएचई ने 3 करोड़ 33 लाख की राशि खर्च की है। गढ़कालिका मेला क्षेत्र में 58 लाख रुपये से सम्प वेल, पम्प और टंकी का निर्माण किया जा रहा है।गऊघाट जल-शोधन यंत्र में नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना से पानी लेकर इसका उपचार किया जायेगा। पानी के उपचार के बाद पेयजल को उज्जैन शहर और सिंहस्थ मेला क्षेत्र के महाकाल और दत्त अखाड़ा जोन में चिन्तामन गणेश क्षेत्र में बनाई गई नवीन टंकी के जरिये शुद्ध पानी के वितरण की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही चारधाम मंदिर के पास बनी टंकी से भी दत्त अखाड़ा और चिन्तामन गणेश क्षेत्र में जल वितरण होगा।उज्जैन शहर के साहिबखेड़ी फिल्टर प्लांट जिसकी क्षमता 8 एमएलडी है, को साहिबखेड़ी तालाब से पानी मिलेगा। साहिबखेड़ी फिल्टर प्लांट पर 4-4 एमएलडी के तीन पम्प तैयार किये गये हैं। इनमें से 2 पम्प का उपयोग जल वितरण के लिये किया जायेगा। एक पम्प को स्टेण्डबाय रखा जायेगा। प्लांट से आगर रोड पर बनी टंकी के जरिये मंगलनाथ जोन में जल वितरण की व्यवस्था की जा रही है। गंभीर नदी पर ग्राम अम्बोदिया में पहले से बने हुए 2 पुराने फिल्टर प्लांट को वाटर सप्लाई के लिये तैयार किया गया है। मक्सी रोड पर उडासा में पुराने तालाब पर भी एक फिल्टर प्लांट तैयार किया गया है। इस प्रकार नये और पुराने 7 फिल्टर प्लांट से सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को जल वितरण की व्यवस्था रहेगी।सिंहस्थ मेला क्षेत्र में पीएचई ने 126 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई है। इन पाइप लाइनों पर अब तक 4,000 नल कनेक्शन भी तैयार किये हैं। नलों की टेस्टिंग भी कर ली गई है। श्रद्धालुओं को शुद्ध पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये पीएचई ने प्रतिदिन पानी के नमूने लेकर और उनके परीक्षण की व्यवस्था की है। लिये गये सेम्पल की जाँच गऊघाट स्थित प्रयोगशाला में की जायेगी। पानी के परीक्षण का कार्य प्राइवेट सेक्टर की एजेंसी सौंपा गया है। पीएचई ने सिंहस्थ मेला क्षेत्र में चुने हुए 30 स्थान पर नलकूप का खनन किया है। मेला क्षेत्र में पुराने 25 नलकूप की सफाई कर इनके जरिये पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। सिंहस्थ के दौरान पंचक्रोशी यात्रा के लिये पीएचई ने 100-100 किलो लीटर क्षमता की 4 टंकियाँ बनाई हैं। इसके अलावा इन क्षेत्रों में पाइप लाइन और ड्रेनेज का इंतजाम भी किया गया है। सेटेलाइट टाउन्स में भी विभाग द्वारा जल प्रदाय के लिये पाइप लाइन बिछाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 110 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है। सीवर लाइन में बहने वाले गन्दे पानी को 7 सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर ले जाया जायेगा।

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कुम्भ - क्षिप्रा में एक बूँद भी गंदा पानी नहीं मिलेगा

सिंहस्थ कुंभ महापर्व के चल रहे सभी कार्य समय पर पूरे किये जायें। सिंहस्थ में आने वाले संत-समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न होने पाये। उज्जैन जिले के प्रभारी एवं परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने यह निर्देश आज उज्जैन में सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण में दिये। प्रभारी मंत्री ने नानाखेड़ा बस स्टेण्ड, हरिफाटक ब्रिज, चिंतामन क्षेत्र, चिंतामन ब्रिज, लालपुर क्षेत्र एवं सदावल रोड पर चल रहे खान डायवर्सन कार्य, लालपुर घाट और नृसिंह घाट पर बन रहे ब्रिज आदि का निरीक्षण किया।एक बूँद गंदा पानी क्षिप्रा में नहीं मिलेगानिरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने कहा कि स्वच्छ एवं निर्मल क्षिप्रा के लिये शासन प्रतिबद्ध है। इसे ध्यान में रखकर प्रयास किया जा रहा है कि एक बूँद भी गंदा पानी क्षिप्रा में न मिलने पाये। उन्होंने उज्जैन शहर की सफाई-व्यवस्था बेहतर बनाने के भी निर्देश दिये।मंत्री श्री सिंह ने मेला क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान कहा कि नये अधिसूचित चिंतामन क्षेत्र में जमीन आवंटन के लिये जिन संतों ने बाद में आवेदन दिये हैं, उन्हें भी जमींन आवंटित की जायेगी। इसके लिये जरूरी होने पर अतिरिक्त भूमि प्रशासन अधिग्रहीत करेगा।खान-डायवर्सन का कार्य दिन-रात चलायेंप्रभारी मंत्री ने इनर रिंग रोड, रेलवे लाइन अण्डरग्राउण्ड क्रांसिंग और सदावल रोड पर चल रहे खान-डायवर्सन कार्य को दिन-रात चलाने के निर्देश दिये।क्षिप्रा के दोनों ओर बनेगा ग्रीन कॉरिडोरलालपुर घाट पर निरीक्षण में कर्कराज की ओर जाने वाले घाट के किनारे लगाई जा रही घास की प्रभारी मंत्री ने सराहना की। उन्होंने भूखी माता के हिस्से वाले घाट में भी घास लगाने के निर्देश दिये। प्रभारी मंत्री ने कहा कि इससे क्षिप्रा नदी के दोनों और ग्रीन कॉरिडोर विकसित होगा और यहाँ की हरियाली लोगों को सुकून देगी।निरीक्षण के दौरान सिंहस्थ केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष माखन सिह, विधायक डॉ. मोहन यादव, महापौर मीना जोनवाल और उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल भी साथ थे।

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उज्जैन में ग्रीन सिंहस्थ की तैयारी

सेटेलाइट टाउन में श्रद्धालुओं के लिये होंगी अनेक सुविधा उज्जैन में अप्रैल-मई में होने वाले सिंहस्थ को ग्रीन सिंहस्थ बनाने के सभी प्रयास किये जायेंगे। इस संबंध में उज्जैन कलेक्टर कवीन्द्र कियावत ने एक बैठक में कार्य-योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि सिंहस्‍थ के दौरान अखाड़ों द्वारा नियमित रूप से भण्डारे किये जाते हैं। इस दौरान भोजन प्रसादी परोसने के लिये जिन सामग्री का इस्तेमाल होता है, उनका सही तरीके से डिस्पोजल करना एक चुनौती होता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिये 50 स्व-सहायता समूह को फायनेंस किया जा रहा है। यह समूह सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर स्टील की थालियाँ, गिलास आदि सामग्री अखाड़ों को उपलब्ध करवायेंगे। सर्विस प्रोवाइडर को प्रशिक्षण भी दिलवाया जायेगा। उन्होंने बैंकर्स से कहा कि वे स्व-सहायता समूहों को 1000 या इससे अधिक थाली-गिलास के लिये फायनेंस करें। बैठक में दोना-पत्तल, प्लास्टिक की कटोरी के समुचित डिस्पोजल पर भी चर्चा की गयी।चामुण्डा जोन में मॉस ट्रेफिक के लिये 10 रूट निर्धारितसिंहस्थ के लिये बनाये गये चामुण्डा माता जोन का अधिकतर हिस्सा शहरी होने से यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण जोन होता है। देवास की ओर से आने वाला मार्ग भी इसी जोन में आता है। इस जोन में मॉस ट्रेफिक के लिये 10 रूट बनाये जायेंगे। इनमें 7 रूट मेजिक वाहन के लिये तथा 3 रूट सिटी बस के लिये रहेंगे।जोन में आने वाले ओव्हर-ब्रिज का काम लगभग पूरा हो चुका है। चामुण्डा जोन में 8 पार्किंग-स्थल चुने गये हैं। जोन में विक्रम नगर और पवासा के दो रेलवे फ्लैग स्टेशन भी आते हैं। जोन में 11 हेल्प-सेंटर, 7 अस्थाई थाने और 168 प्याऊ प्रस्तावित की गयी हैं। चामुण्डा जोन में 2775 हेक्टेयर क्षेत्र का 80 प्रतिशत भाग शहरी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ट्रेफिक मेनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।सेटेलाइट टाउन में होंगी कई सुविधासिंहस्थ के लिये बनाये जा रहे सेटेलाइट टाउन में कई सुविधा होंगी। स्पॉट-पार्किंग के लिये डिस्प्ले-बोर्ड द्वारा उपलब्धता प्रदर्शित की जायेगी। पार्किंग के लिये एडवांस बुकिंग की भी व्यवस्था रहेगी। सेटेलाइट टाउन में टॉयलेट्स, शेल्टर हाउस, हेल्प-डेस्क, खोया-पाया केन्द्र, अस्थाई थाने और अस्पताल, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, कंट्रोल-रूम और प्याऊ की सुविधा श्रद्धालुओं को मिलेगी।

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अमेरिकी ट्रेनिंग देंगे सिंहस्थ के लिए आपदा प्रबंधन की

उज्जैन में 22 अप्रैल से 21 मई तक होने वाले सिंहस्थ के लिये आपदा और भीड़ प्रबंधन का दो-दिवसीय प्रशिक्षण 29 फरवरी से प्रारंभ होगा। प्रशिक्षण में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी के अलावा 500 डॉक्टर और पेरा-मेडिकल स्टॉफ शामिल होगा। प्रशिक्षण नई दिल्ली के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल संस्थान और अमेरिका के अटलांटा स्थित सेंटर फॉर डिसीज संस्थान का संयुक्त दल देगा। प्रशिक्षण में सिखाया जायेगा कि आपदा की स्थिति में किस प्रकार लीडरशिप की जाना चाहिये। डॉक्टर और पेरा-मेडिकल स्टॉफ को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अस्पतालों में बेहतर उपचार प्रबंधन के तरीके भी बताये जायेंगे। मेला अवधि में अपराधों पर नियंत्रण और अपराधियों से किस तरह निपटा जाये, यह जानकारी भी दी जायेगी।बेहतर होगी चिकित्सा व्यवस्थासिंहस्थ-2016 में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा प्रबंधन की सुनियोजित योजना तैयार की गयी है। पूरे मेला क्षेत्र में 24 घंटे चिकित्सा के इंतजाम रहेंगे। इसके लिये 3000 मेडिकल स्टॉफ लगातार कार्य करेगा। विभिन्न स्थितियों से निपटने के लिये 552 डॉक्टर, करीब 650 नर्सिंग-स्टॉफ और 900 पेरा-मेडिकल स्टॉफ तैनात किया जा रहा है। अच्छी चिकित्सा सुविधा देने के लिये 1000 सहायक स्टॉफ भी तैनात रहेगा। सिंहस्थ में 4 जोन स्तर में 20-20 बिस्तरीय अस्पताल बनाये जायेंगे। प्रत्येक अस्पताल में 47 व्यक्ति का स्टॉफ होगा। सेक्टर-स्तर पर 23 अस्पताल बनाये जायेंगे, जिनमें 6-6 बिस्तर की सुविधा होगी। प्रत्येक अस्पताल में 31 व्यक्ति का प्रशिक्षित स्टॉफ रहेगा। उज्जैन में बनाये जा रहे प्रत्येक सेटेलाइट टाउन में भी 6 बिस्तरीय अस्पताल की सुविधा रहेगी।श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिये 1000 होमगार्ड को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मेला क्षेत्र के अस्पताल तथा शासकीय-अशासकीय अस्पतालों में 1800 बिस्तर का इंतजाम रहेगा। इनमें 200 बेड अशासकीय अस्पताल के हैं, जो सिंहस्थ के दौरान रिजर्व रखे जायेंगे। इनके अलावा 218 अतिरिक्त रूप से अस्थायी बेड भी उपलब्ध रहेंगे। सिंहस्थ में आपातकालीन ह्रदय रोग चिकित्सा व्यवस्था के तहत 3 कॉर्डियक एम्बूलेंस की व्यवस्था भी रहेगी। इंदौर के अरविंदो मेडिकल कॉलेज, अपोलो और मेदांता हॉस्पिटल ने भी एक-एक कॉर्डियक एम्बूलेंस सिंहस्थ के लिये उपलब्ध करवाने पर सहमति दी है।

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सिंहस्थ के लिए  व्यावसायिक प्लाट  देने की प्रक्रिया शुरू

तीन भुजा वाला चिंतामन आरओबी पूर्णता की ओर उज्जैन में 3413 हेक्टेयर वाले सिंहस्थ मेला क्षेत्र में व्यावसायिक कार्यों के लिये भू-खण्ड आवंटन की प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गयी है। अप्रैल-मई में होने वाले सिंहस्थ के दौरान विभिन्न व्यावसायिक गतिविधि के लिये भू-खण्ड की जरूरत होगी। इसे ध्यान में रखते हुए मेला कार्यालय ने यह प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिये लगने वाले आवेदन वेबसाइट www.simhasthujjain.in से डाउनलोड किये जा सकते हैं। आवेदन-पत्र 12 फरवरी, 2016 तक अवकाश के दिनों को छोड़कर मुख्य वन संरक्षक के उदयन मार्ग उज्जैन स्थित कार्यालय में सुबह 11 से शाम 5 बजे तक जमा करवाये जा सकते हैं।विभिन्न सेक्टर में चिन्हित भू-खण्ड के मानचित्र, आरक्षण, आवंटन की शर्तें तथा शुल्क से संबंधित अन्य जानकारी सिंहस्थ कार्यालय की वेबसाइट पर देखी जा सकती है। इस बार सिंहस्थ में 20 लाख व्यक्ति के निवास के हिसाब से मेला क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। अधिकतम प्रतिदिन एक करोड़ व्यक्ति के मान से सारी व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। सिंहस्थ अवधि के दौरान करीब 5 करोड़ श्रद्वालुओं के उज्जैन पहुँचने का अनुमान लगाया गया है।मेला कार्यालय द्वारा महाकाल जोन में साधु-संतों को 156 प्लाट आवंटित कर दिये गये हैं। आवंटित प्लाटों के कब्जे की कार्यवाही जोन कार्यालय द्वारा की जा रही है।पुरुषोत्तम सागर का विकाससिंहस्थ में सप्त सागरों का जीर्णोद्धार और विकास किया जा रहा है। इन्हीं सागरों में से पुरुषोत्तम सागर का जीर्णोद्धार और विकास कार्य 4 करोड़ 41 लाख की लागत से किया जा रहा है। उज्जैन नगर निगम द्वारा पुरुषोत्तम सागर पर स्टोन पिचिंग, विद्युत सज्जा, म्यूजिकल फाउंटेन और पॉथ-वे का निर्माण किया जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को रेलवे फाटक पर जाम में नहीं फँसना पड़े, इसके लिये 3 भुजा वाला रेलवे ओव्हर-ब्रिज (आरओबी) तैयार किया जा रहा है। रेलवे द्वारा 26 करोड़ की लागत से बनाया जाने वाला यह ब्रिज लगभग पूर्णता की ओर है।

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कालिदास अकादमी में दिखेगी सिंहस्थ की अदभुत चित्रकारी

उज्जैन में वर्ष-2016 में होने वाले सिंहस्थ में देश-विदेश के अधिक से अधिक श्रद्धालु शामिल हों, इसके लिये व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सिंहस्थ को लेकर सामान्य जन-मानस और कलाकारों में भी उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। उज्जैन में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सिंहस्थ नृत्य-नाटिका का आकर्षक प्रदर्शन किया जा चुका है।देवास की दो बालिका ने सिंहस्थ के प्रचार के लिये चित्रकारी के माध्यम को अपनाया है। सुश्री कविता सिसोदिया और सुश्री रूपल केसरवानी बताती हैं कि चित्रकारी में कई शैलियाँ होती हैं। कविता ने देवास में पिछले वर्ष मीठा तालाब और मंडूक तालाब में सिंहस्थ को केन्द्रित करते हुए जल-रांगोली बनाकर सराहना बटोरी थी। अब इन दोनों ने मधुबनी, वरली और राजस्थानी शैली को भी अपनाया है। इनका सिंहस्थ के विभिन्न आयाम पर पेंटिंग बनाने का विचार है। वे जल्द ही कालिदास अकादमी संकुल में पेंटिंग प्रदर्शनी लगायेंगी, जिसमें सिंहस्थ को चित्रों के माध्यम से दर्शाया जायेगा।

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अटलस्वप्न  मध्यप्रदेश में हो रहा है साकार

नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना का शिलान्यासपूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को जोड़ने की परियोजना अगर उनके छह वर्ष के कार्यकाल में लागू हो जाती तो देश का कायाकल्प हो जाता। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज श्री वाजपेयी जी के सपने को पूरा करते हुए नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ने की योजना प्रारंभ की है। यह मालवा को पुनः जल क्षेत्र से परिपूर्ण होने का गौरव लौटाएगी। परियोजना से मालवा क्षेत्र में पानी की चिंता दूर हो जायेगी।आडवाणी गुरूवार को क्षिप्रा के उद्गम-स्थल इन्दौर जिले के ग्राम उज्जैयनी में नर्मदा-क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना की आधारशिला रखने के बाद उज्जैन में विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे।श्री आडवाणी, जिनका हिन्दू तिथि के अनुसार आज जन्म दिन भी है, नर्मदा सिंहस्थ लिंक परियोजना को क्रियान्वित करने के श्री चौहान के व्यावहारिक प्रयासों और संकल्प से अभिभूत थे। उन्होंने कहा कि श्री चौहान ने जैसी योजनाएँ बनाई हैं उनसे पूरे प्रदेश को पुण्य ही पुण्य मिलेगा। जैसा श्री चौहान कर रहे हैं वैसा अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी करें तो देश से अशिक्षा और गरीबी दूर हो जायेगी। उन्होंने मध्यप्रदेश सहित देश में बच्चों और युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा देने पर विशेष जोर दिया।श्री आडवाणी ने श्री चौहान की प्रशासनिक क्षमता और मौलिकता के साथ नई योजनाओं के क्रियान्वयन की सराहना करते हुए निर्णय करने की क्षमता की प्रशंसा की। उन्होंने श्री वाजपेयी के छह वर्षीय कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बनते ही परमाणु परीक्षण किया गया। इससे देश को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद महँगाई नहीं बढ़ने दी। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक सड़कें बनीं। गाँव-गाँव प्रधान मंत्री सड़क योजना से जोड़े गये। इसी कार्यकाल में नदियों को जोड़ने की योजना भी बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना से नर्मदा से क्षिप्रा, चंबल, गंगा, यमुना के मिलन का चमत्कारी प्रबंध होगा। किसानों को पानी की कोई कमी नहीं रहेगी।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नर्मदा-क्षिप्रा नदी जोड़ो परियोजना मालवा के जीवन से जुड़ी है। मालवा के लिये पैसों की कमी नहीं होने दी जाएगी। श्री चौहान ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 18 हजार करोड़ तो क्या एक लाख करोड़ भी लगे तो मालवा में नर्मदा का जल लाएँगे और यहाँ की उर्वरा भूमि को सूखने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि खान नदी को भी डायवर्ट किया जायेगा और उसके पानी को उपचार के बाद ही प्रयोग में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षिप्रा को प्रदूषण से बचाने का काम भी शुरू किया जायेगा।श्री चौहान ने कहा कि इस परियोजना से मालवा के 70 शहर और तीन हजार गाँव को पानी मिलेगा। उद्योगों को पानी मिलेगा और खेतों में सिंचाई होगी। नदियों को जोड़ने के बाद बैराज बनेंगे। स्प्रिंकलर लगेंगे। उन्होंने कहा कि मालवा की उर्वरा भूमि को मरु भूमि नहीं बनने दिया जायेगा। मालवा की भूमि, पीला सोना यानी सोयाबीन उगाती है, गेहूँ उगाती है, अंगूर उगाती है, को हरा-भरा बनाने के हरसंभव कदम उठाये जाएँगे। यहाँ के किसानों को सिंचाई के तौर-तरीके सीखने के लिये इजराइल भेजा जायेगा।श्री चौहान ने कहा कि पिछले साल की तरह इस साल भी किसानों को 100 रुपये क्विंटल बोनस पर गेहूँ की खरीदी होगी। उन्होंने केन्द्र से गेहूँ उपार्जन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल करने की माँग की। उन्होंने कहा कि फीडर विभाजन का काम पूरा हो रहा है। किसानों को अगले साल मार्च तक चौबीसों घंटे बिजली मिलने लगेगी। श्री चौहान ने सरदार वल्लभ भाई पटेल निःशुल्क दवा वितरण, मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन, उच्च शिक्षा ऋण गारंटी योजना की चर्चा करते हुए कहा कि राज्य में हर वर्ग के कल्याण के लिये योजनाएँ बनाई हैं। लोगों के कल्याण और प्रदेश के विकास के लिये बेहतर से बेहतर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है।श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में मदिरा की नई दुकान नहीं खोली जाएँगी। हर नागरिक को अपना कर्त्तव्य पूरा करना होगा। अगले पाँच साल में मध्यप्रदेश देश का पहले नम्बर का राज्य बनेगा।कार्यक्रम को नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री बाबूलाल गौर, सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर, थावर चंद गहलोत, सांसद प्रभात झा, सत्यनारायण सत्तन, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया और सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन ने भी संबोधित किया।इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री द्वय सुदरलाल पटवा और कैलाश जोशी, उद्योग-वाणिज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, खाद्य मंत्री पारस जैन, कृषि मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, परिवहन मंत्री श्री जगदीश देवड़ा, बाबूलाल जैन, लक्ष्मी नारायण पांडे, क्षेत्रीय विधायक एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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