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मध्यप्रदेश ने किया नदी संरक्षण का अदभुत काम नर्मदा सेवा मिशन कार्य-योजना सभी राज्यों को भेजें :नरेन्द्र मोदी विश्वविद्यालय में नदी संरक्षण की पढ़ाई के लिए खोला जायेगा विभाग : मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेश की पहली मिनी स्मार्ट सिटी बनेगी अमरकंटक      प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि जब अधिकार भाव प्रबल हो जाता है और कर्त्तव्य भाव क्षीण हो जाता है तब अनेक पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण के प्रति भी कर्त्तव्य भाव कम होने से नदियाँ लुप्त हो रही हैं। ऐसे समय नर्मदा सेवा का काम लोगों में कर्त्तव्य भाव जाग्रत करने का महायज्ञ सिद्ध होगा। प्रधानमंत्री  मोदी आज अमरमंटक में 'नर्मदा सेवा यात्रा' की पूर्णता और नर्मदा सेवा मिशन के शुभारंभ अवसर पर भव्य समारोह में नर्मदा सेवकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवकों को प्रणाम करने से भी नर्मदा सेवा का पुण्य प्राप्त होता है। यह पुण्य माँ भारती की सेवा और गरीबों के जीवन में खुशहाली लाने के काम आएगा। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा से अहंकार मिट्टी में मिल जाता है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री और नागरिकों की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते नदियों के संरक्षण के प्रति जागृत हो गए हैं। केरल की एक नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज कई नदियों में पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि चूँकि नर्मदा नदी ग्लेशियर से नहीं निकलती। यह पौधों के प्रसाद से प्रगट होती है इसलिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर इसकी रक्षा करने का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि हम ऐसा कर्म करें कि आने वाली पीढ़ियाँ हमें याद रखें जैसे कि आज हम अपने पुरखों का याद करते हैं। जैसे नदियों ने पुरखों को जीवन दिया उसी तरह हम भी नदियों को जीवन दें। श्री मोदी ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा दुनिया की एक असंभव और असामान्य घटना है जब लाखों लोग एक नदी की रक्षा के लिये संकल्पबद्ध हुए। मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश की जनता और नर्मदा सेवा से जुड़े भक्तों को इस असाधारण कार्य के लिए बधाई। इस कार्य का वैश्विक महत्व है। श्री मोदी ने कहा कि मध्यप्रदेश में नदी के संरक्षण का अदभुत काम हुआ है। इस यात्रा के दौरान 25 लाख लोगों ने नदी बचाने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के नागरिकों और किसानों की ओर से मध्यप्रदेश सरकार और नागरिकों का अभिनंदन करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुजरात के लोग जानते हैं कि नर्मदा की एक-एक बूँद का कितना महत्व है। स्वच्छता के क्षेत्र में म.प्र. देश में सबसे आगे - प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। जनभागीदारी की उपेक्षा कर कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती । इसके लिये जन-समर्थन जरूरी है। इस दिशा में मध्यप्रदेश ने उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पीछे था लेकिन दृढ़ संकल्प और जन-भागीदारी से आज देश में सबसे आगे है। देश के 100 स्वच्छ शहरों में मध्यप्रदेश के 22 शहर शमिल हैं। पूरे देश में इंदौर पहले और भोपाल दूसरे स्थान पर है। इसका साफ मतलब है कि जन-भागीदारी और प्रशासन दोनों ने साथ काम किया है। यह उदाहरण अन्य राज्यों को प्रेरणा देने वाला है। नर्मदा सेवा मिशन कार्य-योजना परफेक्ट डाक्यूमेंट - प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री ने नर्मदा सेवा यात्रा की सफलता को भी जनता की ताकत और समर्थन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि नए पेड़ों की चिंता करेंगे तो पर्यावरण भी स्वस्थ होगा। नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह 'परफेक्ट डाक्यूमेंट' है । इसे सभी राज्यों को भेजें क्योंकि यह प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का एक मॉडल प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि यदि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 20 प्रतिशत से अधिक है तो इसमें नर्मदा नदी का ही योगदान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में भी मध्यप्रदेश ने योजना तैयार कर ली है। उन्होंने बताया कि 2022 में आजादी के पचहत्तर वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से आव्हान किया कि वे हर पल आजादी के 75 वर्ष को याद करें और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि अपनी संस्था, अपने गाँव, परिवार और प्रदेश-देश के लिए योगदान देने के लिए संकल्पित हो जाएं। उन्होंने कहा कि हम नया भारत बनाने का सपना लेकर चले हैं। इस काम में प्रत्येक नागरिक को जोड़ना है। प्रत्येक नागरिक यह कोशिश करें कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान कैसे दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक एक कदम आग चलेंगे तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे निकल जाएगा। विश्वविद्यालय में खुलेंगे नदी संरक्षण-पर्यावरण शुद्धता अध्ययन संकाय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री को नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना सौंपी। उन्होंने नदियों के संरक्षण और पर्यावरणीय शुद्धता के अध्ययन के लिए विश्वविद्यालय में विभाग खोलने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक के पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए इसे मिनी स्मार्ट सिटी बनाया जायेगा। यह प्रदेश की पहली मिनी स्मार्ट सिटी होगी। श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा हर वर्ग का सहयोग मिला और 25 लाख लोग नर्मदा सेवा से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक आंदोलन बन गया है। नर्मदा के तटों के पाँच किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं। अब सभी गाँव नदी संरक्षण के प्रति जागृत हो गए हैं। करीब 80 हजार नर्मदा सेवक स्थाई रूप से इससे जुड़ गए हैं। आगामी दो जुलाई को नर्मदा के तटों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा। इनकी रक्षा की जिम्मेदारी के लिए वृक्ष सेवक उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 12 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे । इनमें से दो जुलाई को छह करोड़ पौधे लगाए जाएंगे । अगले वर्ष 15 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। नर्मदा के प्रवाह की निरंतरता के लिए प्रयास किये जायेंगे। नर्मदा में मल-जल की एक-एक बूँद रोकी जाएगी। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लाट लगाए जा रहे हैं। जैविक खेती और सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। श्री चौहान ने कहा कि रेत की जरूरत के कारण नर्मदा को छलनी नहीं होने देंगे। खनन का कार्य वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किया जायेगा। अमरकंटक की पहाड़ी पर किसी भी प्रकार का उत्खनन नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं नर्मदा सेवा मिशन का नेतृत्व करेंगे। गाँव में नर्मदा सेवा समितियाँ कार्य करने लगी हैं। नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना को समाज के साथ मिलकर क्रियान्वित किया जाएगा। प्रधानमंत्री के हर संकल्प को मध्यप्रदेश पूरा करेगा। अगले साल से क्षिप्रा, ताप्ती, बेतवा और चम्बल तथा अन्य नदियों के संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा। नर्मदा सेवा मिशन की कार्य-योजना की प्रगति का प्रतिवेदन एक साल बाद जनता को समर्पित किया जाएगा। मध्यप्रदेश के लिए आधुनिक भागीरथ सिद्ध हुए है मुख्यमंत्री - स्वामी अवधेशानंद आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने प्रधानमंत्री को राष्ट्र ऋषि और सभ्यता, संस्कृति और संवेदना के सुमेल वाला व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत को श्रेष्ठ स्थान पर विराजित किया है। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा मिशन का प्रारंभ शासक, प्रशासक और उपासक को एक साथ काम करने के संकल्प लेने का पल है। उन्होंने कहा कि नीर में ही नारायण है। उन्होंने जल का महत्व बताते हुए कहा कि जल की स्वाभाविक माँग होती है। यह जीवन है। जल की कमी हो रही है। भविष्य में पीने योग्य पानी की कमी न हो इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार का यह मिशन समयानुकुल है। उन्होंने कहा कि भारत देश जल की आराधना में जुटा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के लिए आधुनिक भागीरथ सिद्ध हुए है। सिंहस्थ का आयोजन कर वे आधुनिक विक्रमादित्य साबित हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री को भारत की धरती पर विकास का अवतार बताते हुए कहा कि उनके होने से देश भयमुक्त है और देश का भविष्य सुरक्षित है। श्री अवधेशानंद जी ने कहा कि नदी संरक्षण का यह मॉड्यूल पूरे देश में जाएगा। वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने नर्मदा सेवा के उद्देश्य की चर्चा करते हुए कहा कि यह पूरी तरह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक यात्रा थी। इसके माध्यम से लाखों नागरिकों की नदी संरक्षण के प्रति जन-जागृति और चेतना बढ़ी है। अब हर नागरिक इस बात के प्रति सजग है कि नर्मदा नदी में एक भी बूँद गंदा पानी नहीं मिलने देंगे। प्रधानमंत्री द्वारा 'नर्मदा प्रवाह' पुस्तक का विमोचन शुरूआत में नर्मदा सेवा यात्रा का ध्वज और कलश प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री ने सौंपा। प्रधानमंत्री ने 'नर्मदा प्रवाह' पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों को नर्मदा की सेवा करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर विशाल संख्या में नर्मदा सेवक, केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद श्री ज्ञान सिंह, सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री नन्द कुमार सिंह चौहान, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्य मंत्री श्री संजय पाठक, संत समुदाय, राज्य मंत्री-मंडल के सदस्य, सांसद, विधायक, अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  16 May 2017

पॉलिसी लीडरशिप अवार्ड

    कृषि मंत्री  गौरीशंकर बिसेन ने ग्रहण किया अवार्ड  चार बार कृषि कर्मण अवार्ड से सम्मानित मध्यप्रदेश को भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान को पॉलिसी लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया। यह अवार्ड मुख्यमंत्री श्री चौहान के प्रतिनिधि के तौर पर प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  गौरीशंकर बिसेन ने ग्रहण किया। भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद द्वारा आयोजित नौवीं ग्लोबल एग्रीकल्चरल लीडरशिप अवार्ड कार्यक्रम में कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए अवार्ड दिये गये। कार्यक्रम में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल  कप्तान सिंह सोलंकी एवं राम नाईक ने अवार्ड दिये। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति  पी.जे. कुरियन एवं भारतीय कृषि और खाद्य परिषद के अध्यक्ष श्री खान और महानिदेशक श्री सिन्हा मौजूद थे। मध्यप्रदेश ने पिछले 10 वर्ष में कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2014-15 में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र में विकास दर 24.94 प्रतिशत दर्ज की गयी है। यह दर पूरे विश्व में सर्वाधिक आँकी गयी। कुल कृषि उत्पादन 110 प्रतिशत तथा कुल खाद्यान्न उत्पादन में 124 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। वर्ष 2004-05 में प्रदेश में कुल खाद्यान्न उत्पादन एक करोड़ 43 लाख मी‍ट्रिक टन था, जो वर्ष 2014-15 से बढ़कर 3 करोड़ 21 लाख मीट्रिक टन हो गया है। प्रदेश द्वारा कृषि क्षेत्र में 12 प्रतिशत सालाना दर से एक दशक तक वृद्धि प्राप्त करना देश में अप्रत्याशित घटना है। प्रदेश वर्ष 2004-05 में दलहन फसलों का उत्पादन मात्र 33 लाख 51 हजार मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 47 लाख 63 हजार मीट्रिक टन हो गया। एक दशक में यह वृद्धि 42.14 प्रतिशत आँकी गयी। प्रदेश आज देश में कुल दलहन उत्पादन का 28 प्रतिशत उत्पादित करता है। प्रति व्यक्ति अनाज की उपलब्धता 61 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति दिवस हो गयी है। यही नहीं कृषि क्षेत्र में भी 34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की वृद्धि हुई। कुल कृषि क्षेत्र बढ़कर 2 करोड़ 23 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश में फसलों की बोवाई में अभूतपूर्व कीर्तिमान लगातार स्थापित हो रहे हैं। खरीफ-2004 में सोयाबीन का रकबा 45 लाख 94 हजार हेक्टेयर था, जो वर्ष 2013 में बढ़कर 61 लाख 34 हजार हेक्टेयर हो गया। वहीं धान का रकबा वर्ष 2004 में 16 लाख 96 हजार हेक्टेयर था, जो वर्ष 2013 में 19 लाख 30 हजार हेक्टेयर हो गया। खरीफ की अन्य प्रमुख फसलें भी वर्ष 2004 की तुलना में लगातार विस्तृत क्षेत्रफल में बोयी जा रही हैं। रबी की बोवाई में भी विगत दस वर्ष में तेजी से प्रगति हुई है। वर्ष 2004 में जहाँ गेहूँ की बोवाई का रकबा 42 लाख हेक्टेयर था, वह 2013-14 में 59 लाख 76 हजार हेक्टेयर तक पहुँच गया है। वर्ष 2004 में चना 26 लाख 93 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोया जाता था, जो वर्ष 2013-14 में 31 लाख 60 हजार हेक्टेयर में बोया गया। रबी 2013-14 के परिणामों के अनुसार गेहूँ का उत्पादन 155 लाख 23 हजार मीट्रिक टन हुआ, जो वर्ष 2004-05 में हुए उत्पादन 73 लाख 27 हजार मीट्रिक टन से लगभग 81 लाख 96 हजार मीट्रिक टन अधिक है। अर्थात दो गुना से अधिक उत्पादन वृद्धि हुई। खरीफ-2013 में धान का उत्पादन 53 लाख 61 हजार मीट्रिक टन रहा, जो वर्ष 2004-05 के उत्पादन 13 लाख 09 हजार की तुलना में 40. लाख 52 हजार मीट्रिक टन अधिक है। यह वृद्धि लगभग चार गुना है। कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के सुचिंतित प्रयासों से आज मध्यप्रदेश देश में कई फसलों के उत्पादन में अव्वल हैं। जैसे कृषि विकास दर, जैविक क्षेत्र, कुल दलहन -तिलहन उत्पादन, प्रमाणित बीज उत्पादन, चना-सोयाबीन उत्पादन, निजी कस्टम हायरिंग-सेंटर की स्थापना, लहसुन-अमरूद और औषधि एवं सुगंधित फसलों, धनिया-मटर और प्याज उत्पादन में देश में प्रथम और कुल खाद्यान्न उत्पादन, गेहूँ उत्पादन, सरसों उत्पादन और मसूर उत्पादन में प्रदेश देश में द्वितीय हैं। गेहूँ उत्पादन में हम चौथे स्थान से दूसरे स्थान पर, धान में 14वें स्थान से 7वें स्थान पर और मक्का में 6वें स्थान से 5वें स्थान पर आ गए हैं।

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 MadhyaBharat  9 September 2016

mp ki siyast

  मध्यप्रदेश की सियासत का सीन कुछ ऐसा है कि इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीक-ए-जुर्म हैैं, कोई जमानत पर है या फरार... क्या सत्ता, क्या सत्ताधारी दल, क्या प्रतिपक्ष और क्या नौकरशाह। सब एक ही तराजू पर तुल रहे हैैं। कभी-कभी अलबत्ता मीडिया थोड़ा खबरों का तड़का लगाता है जो मौजूदा  हालात में कई दफा नाकाफी नजर आता है। ऐसे नाउम्मीदी के माहौल में हुकूमत के भीतर से जो आवाजें आनी शुरू हुई हैैं उसके कई मायने निकाले जा रह हैैं। ऐसा लगता है विपक्ष की भूमिका भी भाजपा के नेता अदा करेंगे। हालांकि यह सीधे तौर पर प्रमुख प्रतिपक्ष कांग्र्रेस का अनादर है। इसे कांग्र्रेस स्वीकार भी नहीं करेगी। मगर हकीकत कुछ ऐसी ही है। लगातार सत्ता में बने रहने वाले नेताओं में उकताहट और ऊब की मानसिकता भी घर कर रही है। आखिर नया-नया क्या.... क्या और कैसे- कैसे करें...? सरकार चलाने वालों की भी तो दिक्कतें हैैं। कहावत है तवे पर से रोटी पलटोगे नहीं तो जल जायेगी, पान उलटोगे नहीं तो गल जायेगा बगैरह...बगैरह। नौकरशाही का घोड़ा तो बेलगाम होने पर आनंद महसूस करता है और उसके सवार उसे काबू में करने के नुस्खे नहीं जान पाये तो फिर आम जनता का कचरा होना तय समझिये। भाजपा, संघ परिवार से लेकर बहुत से मंत्रियों तक से जो कुछ कहा जा रहा है उसका मतलब साफ है कि उच्च स्तर पर कुछ न कुछ निर्णय कर लिया गया है। अब उस फैसले को लागू करने के लिये लगता है माहौल बनाने का दौर शुरू हो गया है। मसलन, बेकाबू भ्रष्टाचार, नौकरशाही की नाफरमानियां, कार्यकर्ताओं में असंतोष,  बार-बार पार्टी के काडर की अनदेखी होना। ये सब ऐसे कारण हैैं जिनसे  सरकार व संगठन दोनों की फजीहत हो रही है। इसलिये लगता है संघ परिवार ने मध्यप्रदेश पर इन दिनों सबसे ज्यादा फोकस किया है। वैसे भी यह सूबा साफ्ट स्टेट में आता है। आप राजनीतिक प्रशासनिक क्षेत्र में बतौर प्रयोग जो मर्जी आये करें मजाल है कोई चूं बोल दे। बशर्ते उसकी जान न जाये बस। अब हालात यह हैैं कि चूंकि संघ ने कमान धीरे-धीरे कसना शुरू किया है तो नतीजे आयेंगे। समन्वय के नाम पर सत्ता संगठन के साथ संघ प्रमुखों की बार-बार बैठकें बताती हैैं मसला गंभीर है। बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय  ने अधिकारी 25 प्रतिशत  कमीशन लेते हैैं ऐसा कह सबके मन की बात बयां कर दी है। उन्होंने बता दिया कि अफसर भ्रष्टतम हो रहे हैैं और सरकार उन्हें काबू में करने में विफल  हो रही है। इस तरह की बात मीडिया में आने के बाद दिखाने के लिये भी न तो किसी भाजपा नेता ने इसका खंडन किया और न कैलाश को सफाई देने के लिये कहा गया। मतलब शिव सरकार के मामले में संघ परिवार और संगठन  के ख्याल अच्छे नहीं हैैं। अभी यह मसला ठंडा भी नहीं हुआ था कि इंदौर में मेट्रो ट्रेन के मुद्दे  पर कैलाश ने फिर नौकरशाही की आड़ में सरकार को टारगेट किया। सीएम के सपनों में रहने वाले इंदौर में अफसरों के काम की रफ्तार ऐसी है कि यहां मेट्रो नहीं बैलगाड़ी आयेगी। भाजपा नेताओं के साथ कई मंत्री भी नौकरशाही के अडिय़लपन से परेशान हैैं। गोलाबारी भले ही प्रशासन में भ्रष्टाचार और उनकी गति को लेकर हो रही हो मगर लहुलुहान तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही हो रहे हैैं। भाजपा के जानकार मानते हैैं कि सरकार को लेकर  उच्च स्तर पर कुछ न कुछ निर्णय हुआ है। समय आने पर सामने आयेगा। फिलहाल सरकार में मंत्रियों, अफसरों की कार्यशैली पर कांग्र्रेस से ज्यादा एतराज भाजपा और संघ की तरफ से आ रहा है। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, प्रदेश संगठन मंत्री  सुहास भगत के साथ अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, कुछ केंद्रीय मंत्री भी  अपनी सरकार के दोषों पर एक राय हो गये हैैं। संघ के सह करकार्यवाह भैया जी जोशी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में जो कुछ मंत्रियों, सांसद, विधायकों व पदाधिकारियों ने कहा उससे यह साफ हो गया है कि जो कुछ बयान आ रहे हैैं वे भी उनसे अहसमत नहीं हैैं। मतलब कोई खिचड़ी पक चुकी है। प्रेशर कुकर में अभी दबाव बनाया जा रहा है ताकि जो सियासत हो रही है उससे प्रेशर कुकर फटे उसके पहले कुछ ऐलान किया जा सके। अजगर करे न चाकरी.... इधर कांग्र्रेस भाजपा के भीतर असंतोष को देखते हुये ठंडेपन की रणनीति बदलने के मोड़ पर आ रही है। चुनाव से ढाई साल पहले उसने अपनी कमजोर कडिय़ों की तरफ देखना शुरू किया है जिन विधानसभा सीटों पर उसने 5-6 हजार मतों से मात खाई थी उन्हें वह मजबूत करने की कोशिश की मगर उसके प्रयास जब तक  जमीन न दिखें तब तक बातें हैैं बातों का क्या..? कांग्र्रेस के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वह चुनाव के एक साल पहले सक्रिय होती है। उसके पहले तो वह... अजगर करें  न चाकरी और पंछी करें न काम, दास मलूका कह गये सबके दाता राम...। कांग्र्रेस की हालत यह है कि बैठे हैैं किनारे पर कभी तो लहर आयेगी... कांग्र्रेसी कहते हैैं लहर आयेगी नहीं तो क्या चौथी बार भी भाजपा के पास थोड़ी जायेगी। कांग्र्रेस तो भाजपा में आ रही असंतोष की लहर से उत्साहित है। वैसे कहा जाये तो प्रदेश की राजनीति में सब जमानत पर  हैैं या फरार.... बहुत हद तक मीडिया भी इसमें शरीक है....

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 MadhyaBharat  6 September 2016

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  मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार और संगठन को लेकर जो बातें लंबे समय से सुर्खियों में थीं उससे लगता है कि संघ परिवार के कान पक गये हैैं। भाजपा को सुधारने की जितनी कोशिश संघ ने की अभी तक उसमें असफलता ही नजर आ रही है। पिछले दिनों भाजपा और संघ के शीर्ष  नेताओं की बैठक में जो कुछ चर्चा हुई और उस गुप्त बैठक की जैसी खबरें छपीं उससे यह तो साफ हो गया है कि अब भाजपा नेता भी संघ के काबू से बाहर जा रहे हैैं। कहां तो सरकार और संघ मिलकर नौकरशाही को नियंत्रित करने के सपने देख रहे हैैं और उसका अपना संगठन ही उसके निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहा है। प्रदेश में तेरह साल से सरकार पर काबिज भाजपा की हालत संगीन है। यह इसलिये भी क्योंकि संघ की हर कोशिश अब तक नाकामयाब होती दिखाई दी है।  पहले तो संघ ने प्रदेश प्रभारी के रूप में अपने होशियार स्वयं सेवक विनय सहस्त्रबुद्धे को भेजा मगर वे निगम-मंडलों में अपने चेहेतों को लाल बत्ती दिलाने के मामले में बुरी तरह एक्सपोज हो गये। बेअसर होते सहस्त्रबुद्धे ने असफलता का ठीकरा तत्कालीन प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन पर फोड़ा। नतीजतन नाटकीय तरीके से मेनन की विदाई हो गई और उनके स्थान पर संघ ने एक टेक्नोक्रेट स्वयं सेवक सुहास भगत को संगठन महामंत्री बनाया।  मगर सत्ताधारी दल के लिये जितने तेजतर्रार और कार्यकर्ताओं की सुनने वाले संगठन महामंत्री की जरूरत महसूस की जा रही थी उसमें सुहास सफल होते नहीं दिखे। उदाहरण के लिये मंडल स्तर तक प्रवास करने की जो जरूरत शुरूआत में थी उसे उन्होंने अभी तक पूरा नहीं किया है। जब जमीनी हकीकत पता नहीं होगी, सक्रिय और निष्िक्रय, मेहनतकश और जुगाड़ू, दलाल और पार्टीनिष्ठ कार्यकर्ताओं की पहचान नहीं होगी तो मंडल से लेकर प्रदेश तक सुहास जी किसे सौैंपेंगे संगठन की कमान? ऐसा नहीं होने से जो प्रदेश पदाधिकारियों की पहली फेहरिस्त आई है उसमें चयन को लेकर अनाड़ीपन साफ दिखा। संगठन संघ और खांटी कार्यकर्ताओं की झलक नजर नहीं है।  एक तरह से संगठन महामंत्री से जो अपेक्षा कार्यकर्ता कर रहे थे उसमें बुरी तरह असफल होने का प्रमाण नजर आया। इसके पहले भी जब शिवराज सरकार का विस्तार हो रहा था तो उसमें संगठन की छाप नहीं दिखी। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, मंत्रियों की मनमानी, अफसरों की नफरमानी इन सबसे भाजपा के छोटे बड़े सारे नेता, कार्यकर्ता परेशान हैैं।  शिवराज सरकार और संगठन को लेकर संघ के पास जो फीडबैक आ रहा है वह चिंता में डालने वाला है। भोपाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और संघ के सहसर कार्यवाह भैया  जी जोशी के साथ जो बैठक थी उसकी चर्चा भी सबको परेशान करने वाली थी। असल में इन दिनों संघ और भाजपा नेताओं का फीडबैक सरकार के बारे में एक जैसा आ रहा है।  दोनों ही इस बात पर सहमत हैैं कि अधिकारियों को काबू करने का मामला संभल नहीं पा रहा है। असंतोष बढ़ता जा रहा है और इसका इलाज नहीं किया तो हालात बिगड़ भी सकते हैैं। बताते हैैं कि सुहास भगत सरकार के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैैं। भाजपा कार्यकर्ताओं से भी उनकी निकटता नहीं बन पा रही है। अब संघ की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाए? प्रभारी सहस्त्रबुद्धे भी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव नहीं बना पा रहे हैैं। भगत जी ने अब तक जो किया है उससे कार्यकर्ताओं तक अच्छा संदेश नहीं पहुंचा है। कमजोर संगठन महामंत्री अक्सर कार्यकर्ताओं की पैरवी न तो संगठन में कर पाते हैैं न सरकार में। यही वजह है कि भाजपा में प्रभारी और संगठन महामंत्री के बदलाव पर भी माहौल में तब्दीली नहीं आई है। निराश कार्यकर्ता ने प्रदेश कार्यालय आना लगभग बंद सा कर दिया है। बीच में कुछ आवाजाही बढ़ी थी मगर संगठन के ठंडेपन से फिर हालात जस के तस हो गये हैैं।  पिछले दिनों पूर्व मु यमंत्री सुंदरलाल पटवा के विधानसभा क्षेत्र मंडीदीप में हुये नगरीय चुनाव में भाजपा की हार को संगठन की कमजोरी और सरकार की नाकामी के रूप में देखा जा रहा है। इसी चुनाव के साथ मैहर विधानसभा उप चुनाव में कुछ महीने पहले रिकार्ड मतों से जीतने वाली भाजपा मैहर नगर पालिका चुनाव में बुरी तरह पराजित हो गई। ऐसा ही नतीजा ईसागढ़ से आया था। खास बात यह है कि इन तीनों जगहों पर संगठन ने पूरी ताकत झौैंकी थी और मु यमंत्री ने रोड शो तक किये थे। मगर यह सब न तो कार्यकर्ताओं की उदासीन को तोड़ पाए और न मतदाताओं को वोट डालने के लिये निकाल पाए। दरअसल संगठन की कमजोरी इसमें सबसे खास वजह देखी जा रही है। एक तरह से संगठन, सरकार का पिछलग्गू दिखाई पड़ता है। उ मीदवार कौन होंगे, यह फैसला तो संगठन करता है मगर मर्जी सरकार की होती है। पूरा दारोमदार संगठन मंत्री और प्रदेश प्रभारी के ईर्दगिर्द घूम रहा है। इन दोनों की सकारात्मकता और मंडल तक के दौरे हैैं संगठन को मजबूत बना सकते हैैं। अभी तो सीन यह है कि कार्यकर्ताओं की संगठन नहीं सुन रहा है और संगठन की सरकार नहीं सुन रही है और सरकार और संगठन की अफसर नहीं सुन रहे हैैं। इन सब बातों से पार्टी हाई कमान और संघ मु यालय नागपुर के माथे पर बल पड़े गये हैैं। ऐसे में फजीहत संघ की हो रही है क्योंकि संघ फेल तो फिर क्या बचेगा?   प्रदेश भाजपा में संघ धमक कम होती जा रही है। इसके सबूत भाजपा संघ के नेताओं की एक बैठक में नजर आए। भोपाल के शारदा विहार में संघ के वरिष्ठ स्वयं सेवक भैया जी जोशी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ शिवराज सरकार के चुनिंदा मंत्रियों, सांसदों और प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों की बैठक थी। आमतौर से संघ की बैठक में क्या हुआ यह लीक नहीं होता है। दो दिवसीय इस बैठक में पहले दिन भाजपा नेता नहीं थे लिहाजा अंदर की खबरें न छपीं न टीवी चैनल्स पर दिखाई दीं लेकिन दूसरे दिन जैसे ही भाजपा नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया तो शब्दश: खबरें अखबारों में छप गईं। यह तो संघ की धमक कम होने का पहला उदाहरण है। इसके पहले संघ के पदाधिकारियों के निर्देशों की खबरें भी गाहेबगाहे छपती रही हैैं। मगर अमित शाह और भैया जी मौजूदगी में जो कुछ कहा सुना गया उसका बाजार में आना चिंताजनक है। इस बैठक में ऐसे कुछ नेता भी शामिल थे जो उमा भारती को मु यमंत्री पद से हटाने के बाद विधायक दल की कार्यवाही का विवरण मीडिया को मोबाइल आन करके लाइव बता रहे थे। शारदा विहार की बैठक में भी कुछ इसी तरह का लीकेज था। दरअसल संगठन और सरकार के संबंध में उच्च स्तरीय चर्चाओं का इतना बाजारीकरण पहले कम ही देखने को मिला है। बहरहाल संघ परिवार ने प्रदेश भाजपा के साथ शिवराज सरकार की कमान कसने का अघोषित बीड़ा उठा लिया है। ऐसे में नतीजे योजना अनुरूप नहीं आये तो संघ की फजीहत भी सरेआम होना तय है। अभी तक तो जो हालात हैैं वह अच्छे नहीं है क्योंकि संघ से आये स्वयं सेवक आदर्श आचरण के कारण अपनी धमक व प्रतिष्ठा संगठन व सरकार में बनाते थे। मगर अब उनकी कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैैं। यही है संघ की कमजोरी की खास वजह। अलग बात है कि इसे न तो संघ मानने को तैयार और न संगठन। सुधार नहीं हुआ तो समझिये गई भैंस पानी में।

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 MadhyaBharat  29 August 2016

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