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मुंगेली News


murti chor

मुंगेली में अष्टभूजी देवी की मूर्ति चोरी करने वाले ग्रामीण ने उसे जमीन में  छिपा दिया। बाद में उसने ग्रामीणों को गुमराह करने के लिए  बताया कि देवी उसके सपने में आई थी। खुदाई कर मूर्ति निकलने बाद इसे चमत्कारिक मूर्ति बताया गया। इसकी चर्चा जब हर और हुई उसके  बाद जिसके घर से मूर्ति चोरी हुई थी वह ग्रामीण थाने पहुंचा और मूर्ति चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई।  पुलिस ने चोरी की मूर्ति बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जरहागांव थाना क्षेत्र के ग्राम कुआं में एक ग्रामीण को स्वप्न में मूर्ति दिखाई दी। इसके बाद बताए स्थान की खुदाई करने पर अष्टभुजी देवी की मूर्ति निकली। ग्रामीण को स्वप्न आने के बाद खुदाई में निकली देवी की मूर्ति को आसपास के लोग चमत्कारिक मानने लगे। लिहाजा, आसपास के ग्रामीणों की भीड़ देवी दर्शन के लिए उमड़ने लगी। इसकी क्षेत्र में चर्चाएं होने लगीं। खुदाई में देवी की चमत्कारिक मूर्ति निकलने की खबर के बाद लोग दूर दूर से इनके दर्शन के लिए आने लगे। इसके बाद लोरमी थाना क्षेत्र के खरबोरवा-औराबांधा निवासी रेवा सिंह पिता रामभरोस (63) भी देवी दर्शन करने के लिए ग्राम कुआं पहुंचा। देवी की मूर्ति को देखकर रेवा सिंह हैरत में पड़ गया। दरअसल जिस मूर्ति को चमत्कारिक बताकर खुदाई में निकलना बताया गया है, वह बीते सावन माह में उसके घर के मंदिर से चोरी हो गई थी। मामला सामने आने के बाद उसने पुलिस को इसकी सूचना दी।  पुलिस ने पूछताछ कर जानकारी जुटाई, तब पता चला कि गांव के कोमलगिरी गोस्वामी के सपने में देवी आई थी और उसने ग्रामीणों को बताया कि इस जगह की खुदाई करने पर देवी की मूर्ति मिलेगी। ग्रामीणों का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने कोमलगिरी गोस्वामी को पकड़कर पूछताछ की। कड़ी पूछताछ में वह टूट गया और देवी की मूर्ति चोरी करना स्वीकार किया। पुलिस ने रेवा सिंह की रिपोर्ट पर आरोपी कोमलगिरी गोस्वामी पिता भजन गिरी गोस्वामी के खिलाफ धारा 379 व 295 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।  

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 MadhyaBharat  17 September 2016

अंगारों पर दौड़े एसपी-आईजी

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में पुलिस द्वारा अंधविश्वास निर्मूलन जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अंधविश्वास पर आधारित अपराधों पर रोकथाम और लोगों को जागरूक करना है। कार्यक्रम में लोगों के मन से भ्रम दूर करने के लिए बिलासपुर रेंज के आईजी व मुंगेली एसपी नीथू कमल ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर दिखाया कि ये सब सिर्फ अंधविश्वास है। उन्होंने बाबा लोगों के इस प्रकार के चमत्कार में नहीं पड़ने के लिए कहा। अभियान जिले के तीनों ब्लॉक लोरमी ,पथरिया ,मुंगेली में बिलासपुर संभाग आईजी विवेकानंद सिंहा के निर्देश पर चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान लोगों के मन से भ्रम दूर करने के लिए जिला पुलिस द्वारा महाराष्ट्र और नागपुर से बुलाई विशेष टीम ने बैगा, ढोंगी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले कार्यक्रम का डेमो प्रस्तुत कर उसका खुलासा किया। त्यौहारों के समय ऐसे ढोंगी बाबा कपूर को हाथ में जलाकर त्रिशूल को जीभ में छेद कर नीबू से खून निकाल ,गिलास से गंगाजल या देवलोक के जल निकालने जैसी जैसे चमत्कार दिखाकर लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसा लेते हैं। नागपुर महाराष्ट्र से आई टीम ने स्कूली बच्चों ,ग्रामीणों को कई जादू दिखाए उन्होंने पानी से दिया जलाकर,नीबू से खून निकालकर, गिलास से गंगाजल निकालकर, अंगारे पर चलकर दिखाकर ग्रामीणों को समझाइश दी और बताया कि यह सिर्फ विज्ञान है। कार्यक्रम में बच्चों ने उनसे कई सवाल पूछे जिसका उन्होंने जवाब दिया। अंधविश्वास का लाभ ढोंगी बाबा लूट के लिए इस्तेमाल करते हैं। आईजी विवेकानंद सिंन्हा और जिला पुलिस अधीक्षक नीथू कमल ने दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर दिखाया। उन्होंने बताया कि पहले पैरों को पानी से गीला कर लिया था। उसके बाद अंगारों पर तेजी से गुजरे इसलिए उसके पैर नहीं जले यह सब जादू नहीं है। इस प्रकार के कार्यक्रम चलाने से अंधविश्वास पर अधारित अपराधों में कमी आएगी और लोगों में जागरुकता फैलेगी जिससे ढोंगी बाबा के चमत्कारों में लोग नहीं पड़ेंगे। चिकित्सक सुविधा अभाव के कारण ढोंगी बाबा के चमत्कार में जल्दी आ जाते हैं, जिससे अनेक अपराध घटती है। इसलिए मुंगेली पुलिस द्वारा अभियान चलाया जा रहा है।  

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 MadhyaBharat  15 September 2016

sarp dansh cg

  बरसात के मौसम में सांपों के काटने से हर साल कईयों की अकाल मौत होती है, लेकिन इस बार सर्पदंश के मामल बढ़े हैं। पिछले तीन माह के दौरान छत्तीसगढ़  में सांप के काटने से कुल 494 लोगों की मौत हुई है।एंटीवेनम की कमी के चलते पीएचसी के पास यह उपलब्ध नहीं होती जिससे पीड़ित को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उसकी जान चली जाती है। प्रदेश के सभी संभागों के सरकारी अस्पतालों से राजधानी रायपुर के स्वास्थ्य विभाग को भेजी पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। महज तीन माह के दौरान प्रदेश के 27 जिलों में 494 लोगों ने सांप के काटने की वह से जान गंवाई। जबकि दो अन्य सघन वन वाले जिलों यह जिले हैं गरियाबंद और मुंगेली की रिपोर्ट नहीं मिल पाई है। रायगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 74 मामले सामने आए हैं, जबकि राजनांदगांव जिले में 48 लोगों की मौत इस वजह से हुई है। बीते चार महीने में सांप काटने के एक हजार से ज्यादा प्रकरण प्रदेश में दर्ज हो चुके हैं। इन मौतों की मुख्य वजह जिला अस्पतालों में एंटीवेनम का अभाव बताया जा रहा है। इसके अलावा मानक यंत्र और विशेषज्ञों की कमी भी लोगों की अकाल मौत का कारण है। रिपोर्ट के अनुसार पीएचसी में पदस्थ ज्यादातर डॉक्टर स्नैक बाईट के इलाज में बेहतर भूमिका नहीं निभा पाते। इसके अलावा एंटीवेनम की कमी के चलते पीएचसी के पास यह उपलब्ध नहीं होती जिससे पीड़ित को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उसकी जान चली जाती है।  

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 MadhyaBharat  1 September 2016

soni sori tiranga yatra

    सोनी सोरी की तिरंगा यात्रा पर सवाल!   राजकुमार सोनी   मैं पुलिस का प्रवक्ता नहीं हूं और आदिवासी नेत्री सोनी सोरी ने भी मुझसे कभी नहीं कहा कि मेरी ऐसी खबर छाप देना...वैसी खबर छाप देना।   यह भी साफ कर देना चाहता हूं कि मैं सोनी सोरी का कोई बहुत बड़ा प्रशंसक भी नहीं हूं। सोनी सोरी किसी पार्टी की नेत्री होने से पहले एक आश्रम की शिक्षिका रही है और वह एक स्त्री है। मुझे एक शिक्षिका और एक स्त्री के कुछ फैसलों का सम्मान तो करना आना ही चाहिए।   यह सब मैं इसलिए भी लिख रहा हूं कि कल से एक बात ने मुझे परेशान कर रखा है। एक फोन आया। मुझसे कहा गया कि मैं दिगभ्रमित हो गया हूं। सोनी सोरी को लेकर जरूरत से ज्यादा लिख रहा हूं।   मैंने अपने स्टेट एडीटर को यह बात बताई तो उन्होंने मेरी हिम्मत बढाई और कहा कि ऐसा कुछ नहीं हैं।   मैं अपने आपसे भी बात करता रहा। यह सवाल अक्सर मेरे सामने तब से खड़ा होता रहा है जब मैं वर्ष 2005 में एक माओवादी लीडर भूपति का इन्टव्यूह करने बस्तर के जंगलों में गया था। तहलका में रहने के दौरान जब मैंने नेपाल के माओवादी लीडर प्रचंड से इन्टरव्यूह किया तब भी कुछ राष्ट्रभक्त पत्रकारों ने यह कहा था कि मेरी दिशा भटक गई है।   अरे भाइयों ये माओवाद...फाओवाद हमारी देन नहीं हैं। यदि छत्तीसगढ़ को यह चुनौती विरासत के तौर पर मिली है तो इसके लिए मैं दोषी नहीं हूं। यदि मैं पंजाब में पत्रकारिता कर रहा होता तो क्या वहां के आतंकवाद को कभी कवर नहीं करता क्या?   यह कहना शायद ठीक नहीं होगा कि सोनी सोरी को मीडिया बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है। मैंने कभी नहीं कहा आप उसे गिरफ्तार करो। उसके साथ अमानवीय व्यवहार करो। जेल में उसे भूखा रखो। वहशी होने का परिचय देते हुए गुप्ताग में पत्थर डालो?  मैंने कभी नहीं कहा कि आप और आपके गुण्डे उसके चेहरे पर कालिख मले। मैंने नहीं कहा....और मेरे जैसे बहुत से लोगों ने यह नहीं कहा होगा कि आप एक स्त्री के साथ टुच्चे और मवाली की तरह पेश आए।   सोनी सोरी तिरंगा यात्रा निकाल रही है तो क्या गलत कर रही हैं? बहुत से लोगों को यह सवाल परेशान कर रहा है कि सोनी सोरी की यात्रा में मुट्ठी भर लोग चल रहे हैं। उन्हें यह सवाल विचलित नहीं कर रहा कि सोनी सोरी को यात्रा के दौरान बार-बार कोर्ट क्यों आना पड़ रहा है। जरा इस आने-जाने की तह में जाइए तो बहुत से सवालों के जवाब मिल जाएंगे।   यात्रा एक प्रतीक है कि जिस बस्तर में कोई लोकतंत्र नहीं है वहां कोई हाथ में संविधान की किताब और तिरंगा लेकर निकला हुआ है। तंत्र और उससे जुड़े लोगों की मोटी बुद्धि में यह बात अगर घुस जाती है तो यह बड़ी बात होगी।   यात्रा में बहुत भीड़ चली भी आई तो क्या होगा? यात्रा में शामिल एक सज्जन बता रहे थे- सब लोग अपने-अपने साधन से आए हुए हैं। जैसा बन रहा है वैसा हो रहा है। कोई खाना पकाता है तो कोई नीम की दातौन का जुगाड करता है। सज्जन का कहना था- यदि तिरंगा यात्रा पुलिस वाले निकालते तो शायद जगह-जगह मार्च पास्ट होता। कोई घोड़े में बैठकर तिरंगा लेकर चल रहा होता तो कोई साउथ की फिल्मों में नजर आने वाले फिल्मी गुण्डो की तरह खुली जीप में भी नजर आता। तिरंगा यात्रा के दौरान तीन-चार माओवादियो की शादी भी हो जाती।   मैं तिरंगे के साथ हूं  इसलिए इस यात्रा की नीयत के  साथ हूं। देश के बहुत से समझदार लोग इस यात्रा को एक सही कदम के तौर पर देख रहे हैं। मुझसे तो किसी ने नहीं कहा कि सोनी सोरी तिरंगा यात्रा निकालकर गलत कर रही हैं। कुछ दिनों पहले जब मैंने अग्नि संगठन के लोगों से बात की थी तब उन्होंने भी कहा था कि सोनी को तिरंगा फहराने से हम कैसे रोक सकते हैं?   अब जो बात मैं कहने जा रहा हूं उस पर जरा गौर फरमाइए।   सवाल यह नहीं हैं कि सोनी की तिरंगा यात्रा में दस लोग हैं या बीस लोग हैं?   सवाल यह है कि क्या सोनी माओवाद के सबसे बड़े गढ़ समझे जाने वाले गोमपाड गांव में 15 अगस्त को तिरंगा फहरा पाएगी?   यदि सोनी सोनी वहां झंडा फहरा देती है तो यह उस व्यवस्था के गाल में जोरदार तमाचा होगा जिस व्यवस्था की वजह से आज तक ( आजादी के बाद से लेकर अब तक ) गोमपाड गांव में तिरंगा नहीं फहर पाया है।   कितने शर्म की बात है कि छत्तीसगढ़ में एक गोमपाड एक ऐसा गांव है जहां अब तक तिरंगा नहीं फहरा जा सका है? और भी कई गांव  ऐसे हैं। लेकिन ये किसकी असफलता है? यदि सरकार यह कहती है माओवादी झंडा नहीं फहराने देते तो सीधे तौर पर सरकार की नाकामी है।   पुलिस और उनके नुमाइन्दे इस बात से  परेशान चल रहे हैं कि सोनी सोरी की तिरंगा यात्रा का जवाब कैसे दे?   यदि सोरी दस-बीस लोगों के साथ ही सही तिरंगा लहराने में कामयाब हो जाती है तो यह सवाल तो उठेगा ही कि सरकार की भारी-भरकम फौज इतने सालों से क्या भजिया-पकौड़ी खा रही थी?   व्यवस्था चाहे कितनी ही वाहियात क्यों न हो....वह कभी नहीं चाहेगी कि एक औरत तमाचा मारकर चली जाए।   आपको क्या लगता है?  भई....मुझे तो यही लगता है कि व्यवस्था इस जीवट औरत से घबराई हुई हैं।(टुडे न्यूज़ से)

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 MadhyaBharat  13 August 2016

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