कोरबा /वहां चरखा से, यहां सड़क से हटे बापू
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राजेंद्र जायसवाल

अहिंसा के पुजारी बापू को चरखा से हटाकर देशभर में खलबली मचाई है तो खादी ग्रामोद्योग खादी की बिक्री इसी बहाने बेतहाशा बढऩे की बात कह रहा है। देश में कैलेंडर और डायरी से बापू को किनारे किया तो कोरबा में भी मोदी रोड वाले नेता जी ने बापू के नाम घोषित मार्ग को अपने स्वनामधन्य कर रखा है। अब यहां तो इस तरह की कोई बात नहीं कि बापू का नाम हटाकर इन मोदीजी के कारण शहर को कोई फायदा हो रहा हो। 

पिकनिक में पी तो हंगामा, स्कूल में ...

थोड़ी से जो पी ली है, चोरी तो नहीं की... की तर्ज पर पिछले दिनों पिकनिक में शराब पीने वाले हेड मास्टर और शिक्षकों को लेकर गांव से मुख्यालय तक ऐसा बवाल मच गया कि कार्यवाही की तलवार लटक गई। अब ये साफगोई में कहते फिर रहे हैं कि हमारे पीने में हंगामा मच गया तो उनके लिए हंगामा क्यों नहीं मचाते जो आये दिन शराब पीकर स्कूल और सरकारी दफ्तरों में ड्यूटी बजाने पहुंचते हैं। 

तस्वीर बदलने पोस्टर ब्वाय फेमस

स्वच्छ सर्वेक्षण में कोरबा को टॉप 10 में शामिल किये जाने के बाद उत्साह से लबरेज निगम अमला अब नंबर 1 रैंकिंग हासिल करने पुरजोर कोशिश में जुटा है। तमाम अपीलों के बीच पोस्टर ब्वाय भी अपनी भूमिका निभाकर काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। अब मुख्य रास्तों के बदले गली कूचे में ये पोस्टर ब्वाय मेहनत करते तो अंदरूनी इलाकों में कुछ और ही असर होता। खैर, असर कहीं भी हो लेकिन निगम अमले के प्रयासों से स्वच्छ सर्वेक्षण को बेअसर नहीं होने देने में पोस्टर ब्वाय की भी आहूति नहीं चूकेगी।  

हमें तो अपनों ने लूटा

मौजूदा नगर पालिका कटघोरा में निर्वाचन के बाद से अपने ही अपनों में खींचतान का अंजाम इस हद तक पहुंच गया कि एक दूसरे को निपटाने में कोई कसर बाकी नहीं रही। पालिका उपाध्यक्ष और उनके सहयोगियों पर नीलगिरी के पेड़ काफी तेजी से गिरे। अब यह और बात है कि इनके हाथ भले ही होम करते जले हों, पर आग उनके ही दल के एक पूर्व मंडल अध्यक्ष ने कुछ ऐसी लगाई कि बचने का मौका तक नहीं मिला। इस आग में मौका ताक रहे लोगों ने भी थोड़ी-थोड़ी पेट्रोल अपनी तरफ से भी छिड़क दी। 

 

आखिरकार नप गई गर्दन

एसईसीएल की रेस्क्यू टीम के लिए सामानों की खरीदी में गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों की गर्दन आखिरकार जांच के लंबे अंतराल के बाद नप ही गई। बाजार दर से अधिक दर पर खरीदी से कंपनी को चूना लगाने वाले अफसरों ने मौके पर जेब तो गरम की पर अब निलंबन की गाज गिरने के बाद दहशत का आलम है। इनके कारनामों की तरह कारगुजारियां कर रहे अधिकारियों व कर्मियों में भी भय की लहर चल पड़ी है कि देर सबेर कहीं वे भी चपेट में न आ जाएं। 

हेलमेट के बाद अब बेल्ट 

दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनकर वाहन चलाने की समझाईश के बाद अब महानगरों की तर्ज पर चार पहिया वाहन चालकों को बेल्ट बांधने की समझाईश देते यातायात कर्मी दिख रहे हैं। आधुनिक तकनीकी के चार पहिया वाहनों में तो सीट के साथ बेल्ट लगी लगाई मिलती है पर वे बेचारे वाहन मालिक और चालक क्या करें जो पुराने जमाने की चारपहिया का साथ अब भी निभा रहे हैं।  

और अंत में❗

खून से लाल होती सड़कों पर हादसे रोकने जिला पुलिस व यातायात महकमा  के सड़क सुरक्षा सप्ताह के अंतराल में ही हादसे दर हादसे हो रहे हैं। हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाने के बाद सारा कुछ उसी ढर्रे पर चल पड़ता है चाहे वह आम हो या वर्दीधारी। इस तरह की जागरूकता और निर्देश 365 दिन की जरूरत हैं जिन पर कठोरता से नियमों को लागू करना अनिवार्य होना चाहिए। यातायात विभाग, परिवहन अमला, वाहन मालिकों और चालकों मे गहरे आपसी समन्वय से हादसों में कमी मुमकिन हो सकेगा। 

एक सवाल आप से ❓

विद्युत विभाग का वह कौन कार्यपालन यंत्री है जो रशियन के जंगल में रंगरलियां मनाते हुए पकड़ा गया था?