Since: 23-09-2009

  Latest News :
मध्यप्रदेश में उपचुनाव सितम्बर के आखिरी सप्ताह में.   गैंग्स्टर विकास दुबे मुठभेड़ में मारा गया.   सिंधिया ने अपना प्लाज्मा डोनेट किया.   ज्योतिरादित्य सिंधिया कोरोना से संक्रमित.   मालगाड़ी से कुचल कर 16 मजदूरों की मौत.   साद के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला.   दिग्विजय सिंह के भाई के निशाने पर कांग्रेस.   सड़क पर मिला विशालकाय मगरमछ लगा जाम.   कमलनाथ ने नहीं निभाए जनता को दिए वचन.   बजरंग दल ने लिया गौ माता सुरक्षा संकल्प.   खाद-बीज के मुनाफाखोरों पर सख्त कार्रवाई जारी.   रिश्वत लेते उपयंत्री और लाइनमैन गिरफ्तार.   बैलाडिला में नक्सली गणेश उइके की मौजूदगी.   छत्तीसगढ़ के कण कण में बसे हैं भगवान राम.   कोरोना काल में कलेक्टर ने पेश की मिसाल.   शहर व्यवस्था देखने साइकिल से निकले कलेक्टर ,एसपी.   राज्यसभा सदस्य ने खेत में रोपा धान.   छत्तीसग़ढ में अस्थाई शिक्षाकर्मी होंगे स्थाई.  
कोलकता के मीठे पान की बेमिसाल खेती
कोलकता के मीठे पान की बेमिसाल खेती

हरदा जिले के टिमरनी विकास खंड के गांव छिरपुरा के बंसत वर्मा अपने पॉली हाउस में पान की बेमिसाल पैदावर से बहुत खुश हैं। उन्हें पंरपरागत खेती से अलग हटकर किया गया यह प्रयोग अच्छा मुनाफा दे रहा है। 

खेती में नए प्रयोग और अच्छा मुनाफा कमाने बंसत ने उद्यानिकी विभाग की योजना के अन्तर्गत पॉली हाउस बनाकर पान की खेती की शुरूआत की। इस खेती में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार पान की बेल लगाने के बाद सालों तक इससे पत्ते ले सकते हैं। बार-बार बीज (बेल) लगाने की आवश्यकता नहीं होती। पंरपरागत खेती से हटकर यह प्रयोग हरदा जिले में पहली बार हुआ है कि जब किसी किसान ने पॉली हाउस बनाकर पान की खेती शुरू की है।

बंसत वर्मा ने 9.37 लाख रुपये से अपना पाली हाउस बनवाया और वहाँ कोलकता की सुप्रसिद्ध सोफिया पान की प्रजाति को पहली बार लगाया। यह संरक्षित खेती है। पॉली हाउस बनाने से पान की फसल तेज गर्मी, पाले और बरसात की वहज से नष्ट नहीं होती। एक बार रोपाई करने के बाद 20 साल तक रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती। बसंत वर्मा ने एक हजार वर्ग मीटर के पॉली हाउस में कोलकाता से पान की 10 हजार बीज (बेल) लाकर लगाई। इससे एक साल में चार लाख पान के पत्तों का उत्पादन हुआ। बंसत ने पूर्ण जैविक विधि से पान के पत्ते पैदा किये। इसमें जीवामृत और सरसों की खली, दूध, मठा, नीम तेल का उपयोग किया। इससे लागत में भी भारी कमी आई। सिंचाई के लिए ड्रिप एण्ड फागर लगवाए। इस पान का पत्ता एक रूपये से दो रूपए तक मूल्य में भोपाल, इंदौर, इटारसी, और खण्डवा में बिकता है।

बंसत वर्मा की सफलता से प्रभावित होकर इंदौर और भोपाल में भी किसानों ने चार एकड़ के पॉली हाउस बनवाकर इस पान की प्रजति की पैदावर लेना शुरू कर दिया है।

MadhyaBharat 28 December 2017

Comments

Be First To Comment....
Video

Page Views

  • Last day : 8641
  • Last 7 days : 45219
  • Last 30 days : 64212


x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2020 MadhyaBharat News.