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सबकी चिंता हरते हैं सीहोर के चिंतामन गणेश
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सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय स्थित चिंतामन गणेश मंदिर देश भर के प्रसिद्ध गणपति मंदिरों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि देश में भगवान गणेश के चार ऐसे मंदिर है जहां भगवान गणेश मूर्ति रूप में स्वयं विराजे हैं। सीहोर का गणेश मंदिर इन्ही चारो मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की स्थापना दो हजार साल पहले राजा विक्रमादित्य ने की थी। यहां यह भी किवदंती प्रचलित है कि राजा विक्रमादित्य को गणपति की यह मूर्ति स्वयं भगवान गणेश जी ने ही दी थी।


एक यह भी मान्यता है कि भगवान गणेश विक्रमादित्य के पूजन से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और मूर्ति स्वरूप में स्वयं यहां स्थापित हो गए। सीहोर के अलावा चिंतामन गणेश की देशभर में जो तीन प्रतिमाएं हैं, जिन्हें स्वयंभू कहा जाता है, उनमें से एक राजस्थान के रणथंभौर में है, दूसरी प्रतिमा उज्जैन में और तीसरी प्रतिमा गुजरात के सिद्धपुर के गणेश मंदिर में स्थापित है। स्वयंभू प्रतिमा जमीन के अन्दर आधी धंसी हुई है।


चिंतामन गणेश मंदिर भोपाल से 40 किमी दूर सीहोर जिले में पार्वती नदी के किनारे में गोपालपुर गांव में स्थित है। सीहोर का चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर 84 सिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है। सीहोर का गणेश मंदिर पेशवाकालीन श्रीयंत्र के कोण पर बना हैं। जिसमें गर्भगृह में भगवान शिव बिराजे है। वहीं भव्य शिखर के साथ माता अंबिका तथा दूसरे शिखर पर मां दुर्गा मां और मां शारदा है।


भगवान राधाकृष्ण जी के साथ ही वैदिक मंगल कलश, ऊपर पवित्र सुन्दर सभा मंडप है। नीचे सभा मंडप और परिक्रमा पथ है। मंदिर के बगल में ही विशाल वट वृक्ष है जिसमें अनेक देवी देवता विराजे है। इसके साथ ही परिसर में शीतला माता, भैरवनाथ तथा हनुमान जी का मंदिर है।


जनश्रुति के अनुसार जब भी महाराजा विक्रमादित्य पर कोई संकट आता था तब वे सिद्धपुर गणेश जी की शरण में आया करते थे और भगवान गणेश उन्हें सभी संकटों से मुक्त कर देते थे। तभी से निरंतर लोग यहां अपनी समस्याओं, परेशानियों को लेकर आते हैं। वे गणेश जी से अपनी चिंता दूर करने की मन्नत लेकर आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के पिछले हिस्से में उल्टा स्वास्तिक बनाकर मन्नत रखते हैं। जब मन्नत पूरी हो जाती है तो दोबारा यहॉं आकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।

 

MadhyaBharat 27 August 2025

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