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नागालैंड में 23वें हॉर्नबिल उत्‍सव के आयोजन की सभी तैयारियां पूरी.   भारत जी-20 की अध्‍यक्षता ग्रहण करेगा .   गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की तैयारियां पूरी.   भाजपा के वरिष्‍ठ नेता नरेंद्र मोदी ने गुजरात में एक चुनाव रैली को संबोधित किया.   विद्युत मंत्रालय ने बिजली संकट से जूझ रहे राज्यों की करेगा सहायता .   गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार आज थमेगा .   सबसे विश्वसनीय माध्यम है समाचार पत्र - प्रो.केजी सुरेश.   केन्द्रीय वित्त मंत्री के समक्ष हुआ राज्य का प्रेजेन्टेशन.   जो दूसरों को जीते वह वीर और जो स्वयं को जीत ले वह महावीर : मुख्यमंत्री .   सभी के सहयोग से सीहोर को भारत के अग्रणी नगरों में एक बनायेंगे:मुख्यमंत्री .   मध्यप्रदेश के इतिहास में बिजली की सर्वाधिक मांग.   मुख्यमंत्री चौहान सीहोर गौरव दिवस समारोह में देंगे अनेक सौगातें.   छात्राओं ने जाना अभिव्यक्ति ऐप्प के बारे में.   किसानों के लिए मीठा एवं लाभप्रद साबित हो रहा अब वनांचल का खारी नाला .   मुख्यमंत्री के निर्देश पर आवागमन साधनों को मजबूत किया जा रहा .   अतिवृष्टि से प्रभावित पीड़ितों की सहायता .   जिले के दो उप स्वास्थ्य केन्द्र को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण पत्र.   बैंक एवं प्रशासनिक अधिकारी आम जन के हित में बेहतर समन्वय के साथ काम करें .  

मध्यप्रदेश की खबरें

सबसे विश्वसनीय माध्यम है समाचार पत्र -  प्रो.केजी सुरेश

  डिजिटल मीडिया में अवसर की अपार संभावनाएं - अनुराग उपाध्याय   हिंदी मीडिया का भविष्य बहुत उज्जवल है - संजय मिश्रा, जो भी करें, सौ फीसदी करें - डॉ. राजीव अग्रवाल, सामाजिक सरोकार दूरदर्शन की प्रथम प्राथमिकता- पूजा वर्धन , भोपाल - आम जनता का सबसे विश्वनीय माध्यम समाचार पत्र है । ये कहना है माखनलाल  चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.केजी सुरेश का । उन्होंने ये विचार विश्वविद्यालय के उन्मुखीकरण कार्यक्रम 2022 के दूसरे दिन द्वितीय सत्र में व्यक्त किए ।  वरिष्ठ पत्रकार अनुराग उपाध्याय, संजय मिश्रा, मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. राजीव अग्रवाल, एवं भारतीय सूचना सेवा की अधिकारी  पूजा वर्धन ने विद्यार्थियों को कैरियर एवं जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण टिप्स दिए ।  कुलपति प्रो. सुरेश ने कहा कि प्रिंट मीडया आज भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है और लोगों की आवाज बनकर ऊभर रहा है । उन्होंने हिंदी माध्यम की मीडिया की चुनौतियों के संबंध में कही जाने वाली बातों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी मीडिया को कोई खतरा नहीं है । कुलपति प्रो सुरेश ने कहा कि हिंदी अखबारों की स्वीकार्यता आज लगातार बढ़ रही है । हिंदी मीडिया की भाषा सौम्यता की भाषा है । उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से जांच परखकर ही समाचार पत्र में खबरों को छापा जाता है ।   डिजिटल मीडिया : अवसर एवं चुनौतियां विषय पर बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं दखल न्यूज के मुख्य संपादक अनुराग उपाध्याय ने कहा कि इसमें अवसर की अपार संभावनाएं हैं । उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम पैसा कमाने का सबसे आसान माध्यम है । अनुराग ने कहा कि अगर आपके पास कन्टेंट है, कुछ हटके करने,सोचने की शक्ति है, कुछ करने का जुनून है तो डिजिटल मीडिया में आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं । सत्र की अध्यक्षता न्यू मीडिया टैक्नोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. पी. शशिकला ने की, वहीं सत्र का संचालन सहा. प्राध्यापक श्री मनोज धुर्वे ने किया।    हिंदी मीडिया का भविष्य विषय पर वरिष्ठ पत्रकार  संजय मिश्रा ने कहा कि हिंदी मीडिया का भविष्य बहुत उज्जवल है। उन्होंने कहा कि आज सूचना एवं वैरायटी जिसके पास है वही अच्छा पत्रकार है । साथ ही उन्होंने कहा प्रिंट मीडिया ज्ञान का भंडार है । अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि यदि आप हिंदी में लिखते हैं और पढ़ते हैं तो अपनी भाषा को लेकर आत्मसम्मान का भाव रखें । विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी मीडिया के आने वाले भविष्य आप हैं। सत्र की अध्यक्षता पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने की, वहीं सत्र का संचालन डॉ. अरुण कुमार खोबरे द्वारा किया गया ।   उद्मिता और युवा विषय पर मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. राजीव अग्रवाल ने कहा कि यदि आपको जीवन में आगे बढ़ना है, कुछ करना है तो एक वाक्य को भूलना होगा, वह है सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग । उन्होंने कहा कि रोने से कुछ नहीं होगा आपको स्वयं जिम्मेदारी लेनी होगी।  डॉ. राजीव ने कहा कि जीवन में शिकायतें करना बंद करो और चुनौतियों के साथ  लड़ना सीखो । उन्होंने कहा कि यदि आपने ने जीवन में मुश्किल रास्ता चुन लिया तो आपको राजा बनने से कोई रोक नहीं रोक सकता । उन्होंने अच्छे सकारात्मक एवं अच्छे दोस्त बनाने की सलाह देते हुए कहा कि जो भी करें उसे सौ फीसदी करें । सत्र की अध्यक्षता मीडिया प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कुलसचिव डॉ. अविनाश वाजपेयी ने की, वहीं सत्र का संचालन सहा. प्राध्यापक डॉ. मणिकंठन नायर द्वारा किया गया।   दूसरे दिन का अंतिम सत्र प्रसार भारती में कैरियर विषय पर आयोजित किया गया। जिसमें भारतीय सूचना सेवा की अधिकारी एवं दूरदर्शन की संयुक्त निदेशक  पूजा वर्धन ने कहा कि प्रसार भारती में अगिनत अवसर हैं । उन्होंने कहा कि आप दूरदर्शन में रिपोर्टर, स्ट्रींगर, एंकर, समाचार वाचक, प्रोड्यूसर, कैमरामेन बन सकते हैं । प्रसार भारती के विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों के बारे में बताने के साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप आईआरएस अधिकारी भी बन सकते हैं ।  पूजा ने कहा दूरदर्शन सनसनीखेज पत्रकारिता नहीं करता है । उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकार दूरदर्शन की प्रथम प्राथमिकता होती है । सत्र की अध्यक्षता निदेशक प्रोडक्शन डॉ. आशीष जोशी ने की, वहीं सत्र का संचालन सहा. प्राध्यापक राहुल खड़िया द्वारा किया गया। उन्मुखीकरण कार्यक्रम में समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित हुए ।   तीसरे व अंतिम दिवस चार व्याख्यान होंगे, उन्मुखीकरण कार्यक्रम 2022 के तृतीय दिवस 30 नवंबर को  मनोज द्विवेदी, डॉ. दिवाकर शुक्ला,  विजय मनोहर तिवारी, देवेंद्र दीपक का व्याख्यान होगा।

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 MadhyaBharat  30 November 2022

केन्द्रीय वित्त मंत्री के समक्ष हुआ राज्य का प्रेजेन्टेशन

म.प्र. में वित्तीय और लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास सराहनीय : केन्द्रीय वित्त मंत्री सीतारमण केन्द्रीय वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमण ने कहा है कि मध्यप्रदेश में वित्तीय और लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन (पीएएम) के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास सराहनीय है। राज्य की जीएसडीपी की वृद्धि दर विगत 10 वर्षों में राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर से अधिक रही है। वर्ष 2021-22 में मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर 19.74 प्रतिशत रही, जो देश में सर्वाधिक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2025 तक देश की अर्थ-व्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर पहुँचाने के लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में भी मध्यप्रदेश के प्रयास सराहनीय हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने आज मंत्रालय में वित्त विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रेजेन्टेशन को देखने के बाद यह बात कही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित वित्त विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। विशेष रूप से वित्तीय प्रबंधन के मामले में राज्य ने अनेक नवाचार कर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रदेश में तेजी से गति प्रदान कर हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। साथ ही स्व-रोजगार के प्रयास भी बेहतर हो रहे हैं, जिससे स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आत्म-निर्भर भारत में मध्यप्रदेश अपना बेहतर योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा जीएसडीपी में वृद्धि के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे है। इसके लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 तक देश की अर्थ-व्यवस्था में 550 बिलियन डालर के राज्य के योगदान का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य पूर्ति के लिये मध्यप्रदेश सरकार जीएसडीपी टास्क फोर्स की अनुशंसाओं के अनुरूप राज्य के आर्थिक एवं समग्र विकास के लिए आर्थिक रणनीतियाँ तैयार की गई हैं।   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अर्थ-व्यवस्था के संरचनात्मक परिवर्तन के लिय ज्ञान आधारित उद्योगों जैसे सेमी कंडक्टर एवं जीव विज्ञान उद्योगों को प्रोत्साहन देना, उद्योगों का विकेंद्रीकरण, फार्मास्यूटिकल खाद्य प्र-संस्करण एवं टेक्सटाइल्स उद्योगों में क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब तैयार करने का कार्य किया जा रहा है।   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राज्य शासन द्वारा राजकोषीय मापदण्डों का निरंतर पालन किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2005-06 से वर्ष 2018-19 तक राज्य में लगातार राजस्व आधिक्य, वर्ष 2010-11 से वर्ष 2019-20 तक ऋण जीएसडीपी का अनुपात 25 प्रतिशत की सीमा में तथा ऋणों का ब्याज भुगतान कुल राजस्व का 10 प्रतिशत की सीमा में रहा। वर्ष 2020-21 में कोविड के दुष्प्रभाव के कारण राजकोषीय मापदण्ड प्रभावित हुए। मेरे द्वारा राज्य के स्वयं के वित्तीय संसाधनों की निरन्तर मासिक समीक्षा की जा रही है। राज्य के राजस्व में वृद्धि दिखी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में राजस्व आधिक्य की स्थिति रहना अनुमानित है। राज्य शासन द्वारा अपने राजकोषीय घाटे को निर्धारित सीमा में बनाये रखा गया है। साथ ही राजस्व संसाधन में वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों के निर्वर्तन एवं प्रबंधन के लिये वर्ष 2020 में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का गठन किया गया है। परिसंपत्तियों का निर्वर्तन ऑनलाईन पारदर्शी प्रक्रिया से किया जा रहा है। ईपीएफओ को 14.50 करोड़ रूपये का भुगतान कर जब्त 8 परिसंपत्तियों को विमुक्त कराया गया। इस वित्तीय वर्ष में शासकीय परिसंपत्तियों के निर्वर्तन एवं विनिवेश के फलस्वरूप 600 करोड़ रूपये की प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है।   मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि इस वर्ष नई आबकारी नीति लागू करने के फलस्वरूप आबकारी राजस्व में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है। वाणिज्यिक कर विभाग की डेटा विश्लेषण इकाई द्वारा, चिन्हित करदाताओं द्वारा अपात्र आईजीएसटी के आईटीसी का रिवर्सल कराया गया, इसके फलस्वरूप प्रदेश को अक्टूबर माह में 694 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति हुई। जीएसटी टैक्स बेस में वृद्धि के लिये विशेष अभियान में जनवरी से अक्टूबर 2022 की अवधि में 69 हजार 894 नवीन पंजीयन कराये गये हैं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 24 प्रतिशत अधिक है।   प्रेजेन्टेशन में बताया गया कि सिंचाई में उपभोक्ता शुल्क का संशोधन और 12 खनिज ब्लॉक की नीलामी पूर्ण की गई एवं 22 ब्लॉक के ऑक्शन किये जा रहे हैं। लाईमस्टोन के रॉयल्टी रेट्स का पुनरीक्षण किया जा रहा है। वन विभाग में इमारती लकड़ी का ऑक्शन वर्तमान वर्ष से प्रारंभ किया गया है, जिससे अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति संभावित है।   प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये मिशन के रूप में कार्य करते हुए आगामी 1 वर्ष में 1 लाख पदों पर भर्ती किये जाने की स्वीकृतियों जारी की जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण पथ विक्रेता योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और संत रविदास स्व-रोजगार योजना में विगत एक वर्ष में 31 लाख 19 हजार से अधिक स्व-रोजगार के अवसर सृजित किये गये हैं।   राज्य में अधो-संरचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने एवं अर्थ-व्यवस्था की वृद्धि को बनाये रखने के लिये पूँजीगत कार्यों पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में राज्य के पूंजीगत व्यय की उपलब्धि जीएसडीपी का 3.75 प्रतिशत होने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी पूँजीगत व्यय का लक्ष्य जीएसडीपी का 3.87 प्रतिशत रखा गया है। राज्य शासन द्वारा आगामी वर्षों में भी पूँजीगत कार्यों पर व्यय की इस गति को निरंतर बनाये रखने का लक्ष्य रखा गया है।

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 MadhyaBharat  30 November 2022

जो दूसरों को जीते वह वीर और जो स्वयं को जीत ले वह महावीर : मुख्यमंत्री

  1008 मज्जिनेंद्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ में शामिल हुए मुख्यमंत्री चौहान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर के बाल-विहार मैदान में चल रहे जैन समाज के 1008 मज्जिनेंद्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  चौहान ने मुनि श्री संस्कार महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और देश-प्रदेश के लिए सुख समृद्धि की कामना की।मुख्यमंत्री चौहान ने कहा‍कि जो दूसरों को जीते वह वीर और जो स्वयं को जीत ले वह महावीर होता है। उन्होंने कहा कि महावीर जितेंद्रिय होता है, जो जितेंद्रिय होता है वह जिन और जो जिन होता है वही जैन होता है। उन्होंने कहा कि अपने आपको जीत लेने वाला ही जैन होता है।   मनकामेश्वर मंदिर में की पूजा-अर्चना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर के बड़ा बाजार स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। विदिशा सांसद रमाकांत भार्गव, भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक सर्वश्री सुदेश राय और रघुनाथ मालवीय, रवि मालवीय, जिला पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह इंजीनियर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर और अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  30 November 2022

सभी के सहयोग से सीहोर को भारत के अग्रणी नगरों में एक बनायेंगे:मुख्यमंत्री

भोपाल के उप नगर के रूप में विकसित किया जायेगा सीहोर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सभी के सहयोग से सीहोर को भारत के अग्रणी नगरों में एक बनाया जायेगा। सीहोर के विकास में कोई कमी नहीं रखी जायेगी। यहाँ औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा। भोपाल के उप नगर के रूप में सीहोर का विकास किया जायेगा। भोपाल से सीहोर को लाइट मेट्रो के माध्यम से जोड़ा जायेगा। यहाँ के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर का भी श्री महाकाल लोक की तरह विकास किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सीहोर वीरों की भूमि है। अमर शहीद चैन सिंह ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये। सीहोर में जिस स्थान पर शहीदों को तोप से उड़ा दिया गया था, वहाँ जलियावाला बाग की तरह ही भव्य स्मारक का निर्माण किया जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान आज सीहोर में सीहोर गौरव दिवस समारोह में शामिल हुए। उन्होंने सीहोर की 32 हस्तियों को गौरव सम्मान से सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर ही अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा‍कि सीहोर का शरबती गेहूँ दुनियाभर में मशहूर है। इसके निर्यात को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी। सीहोर कृषि विज्ञान केन्द्र में ही सोयाबीन की दो किस्में जवाहर 9305 और 15601 विकसित की गईं। सीहोर की कचौरी, कड़ी, पूरी, सीरा, सेव, मंगोड़े प्रसिद्ध हैं। सीहोर में कृषि यंत्र बनते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में बेटियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। बेटियों के प्रति दुराचार करने वालों को फाँसी की सजा का प्रावधान है। अभी तक 89 व्यक्तियों को फाँसी की सजा सुनाई गई है। बेटियों की उच्च शिक्षा की फीस सरकार भरती है। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में 12वीं में 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक लाने वालों को सरकार लेपटॉप तो देती ही है, साथ ही उनकी उच्च शिक्षा की फीस भी सरकार भरती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी भर्तियों के अलावा उद्योगों से रोजगार सृजित किये जा रहे हैं। स्व-रोजगार के लिये भी व्यापक अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं। प्रदेश में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री चौहान ने सीहोर के विकास के लिये रखी गई विभिन्न माँगों, नगर में सीसी रोड निर्माण, फुटपाथ निर्माण, नाला सौंदर्यीकरण, दो पुल निर्माण, स्ट्रीट लाइट्स में एलईडी लगवाने, तालाब गहरीकरण, मार्ग निर्माण आदि को पूरा करने की घोषणा की। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी को नगर को आगे बढ़ाने, नगर को स्वच्छता में नम्बर-1 बनाने और नशामुक्ति आदि का संकल्प दिलाया।   समाजजनों ने नगर के विकास का संकल्प लिया मुख्यमंत्री चौहान की प्रेरणा पर नगर के विभिन्न समाज के लोगों ने नगर के विकास में योगदान करने का संकल्प लिया। राठौर समाज ने 11 कन्याओं के विवाह, चौरसिया समाज ने सफाईकर्मियों को गणवेश देने, जैन समाज ने प्रवेश द्वार के निर्माण, आई.ई.एफ. स्कूल द्वारा दो चौराहों के सौंदर्यीकरण, नगर पालिक अध्यक्ष प्रिसं राठौर द्वारा प्रत्येक गली में दुकानों के आगे डस्टबिन रखवाने, ब्राम्हण समाज द्वारा 4 आँगनवाड़ियों को गोद लेने, संडे सुकून ग्रुप द्वारा नगर में बड़े गमले रखवाने और सेल्फी पॉइन्ट बनवाने, किराना व्यापारी संघ ने सभी चौराहों पर डस्टबिन रखवाने का, अग्रवाल समाज द्वारा प्रमुख चौराहे के सौंदर्यीकरण, पेट्रोल पम्प संघ द्वारा कचरा गाड़ी देने, क्रिश्चियन समाज द्वारा तहसील चौराहे का सौंदर्यीकरण और मुस्लिम समाज द्वारा नगर के सौंदर्यीकरण के लिये बिजली व्यवस्था का संकल्प लिया। सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। वे निरंतर प्रदेश के विकास में लगे रहते हैं। प्रदेश में बेटियों का विशेष सम्मान है। बेटियों के प्रति अत्याचार करने वालों को फाँसी की सजा दी जाती है। विधायक सुदेश राय ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान सीहोर के सबसे बड़े गौरव हैं। उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में 29 नवम्बर, 2005 को शपथ ग्रहण की थी। इसी दिन को सीहोर के गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। नगरपालिका अध्यक्ष श्री प्रिंस राठौर ने स्वागत भाषण दिया। घर-आँगन को रंगोली, दीप और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया सीहोर नगर के गौरव दिवस पर रोड-शो के दौरान नागरिकों द्वारा पुष्प वर्षा कर किए गए अभिनंदन से मुख्यमंत्री  चौहान अभिभूत हुए और नगरवासी भी अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर भाव-विभोर हो उठे। लगभग दो किलोमीटर चले रोड-शो में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी अपने घरों से बाहर  निकल कर मुख्यमंत्री का स्वागत करने आतुर दिखे।  नगर के गौरव दिवस पर नगरवासियों ने अपने घरों को रंग-बिरंगी रोशनी,  रंगोली और दीप जला कर घर-आँगन को सजाया। पार्श्व गायक मोनाली ठाकुर ने दी आकर्षक प्रस्तुति सीहोर के गौरव दिवस समारोह में पार्श्व गायक मोनाली ठाकुर ने आकर्षक गीतों की प्रस्तुति दी। उपस्थित जन इन प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध हो उठे।

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 MadhyaBharat  30 November 2022

बैंक एवं प्रशासनिक अधिकारी आम जन के हित में बेहतर समन्वय के साथ काम करें

  केसीसी ऋण, योजनाओं के हितग्राहियों के ऋण प्रकरण, समूहों के बैंक लिंकेज, बीमा क्लेम के शीघ्र निराकरण के निर्देश कलेक्टर विनय कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति (डीएलआरसी) एवं जिला स्तरीय स्तरीय सलाहकार समिति (डीएलसीसी) की बैठक गत दिवस 28 नवंबर को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में कलेक्टर ने किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने के प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि कृषि व संबद्ध विभागों के अधिकारी और बैंक इस प्रक्रिया में बेहतर समन्वय एवं सक्रिय भागीदारी दर्ज करते हुए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति में सहयोग करें।  कलेक्टर ने जिले के अभी बैंकों के क्रेडिट डेबिट अनुपात की जानकारी ली। इस दौरान जिन बैंकों का परफॉर्मेंस आशानुरूप नहीं, उन्हें प्रगति के निर्देश कलेक्टर ने दिए। उन्होंने कहा कि विकासखंड स्तर पर होने वाली बैठक में अधिकारी सक्रियता से भाग लें जिससे विकासखंड स्तर पर भी आवेदनों का समाधान हो सके। कलेक्टर ने एनआरएलएम और एनयूएलएम के तहत हितग्राही समूहों के बैंक लिंकेज एवं विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत ऋण प्रकरणों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए ऋण स्वीकृत एवं वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसी तरह उन्होंने मुद्रा लोन के आवेदनों, दोहरी प्रामाणिकता, और बीमा क्लेम जैसे प्रकरणों पर भी शीघ्र कार्यवाही कर हितग्राहियों को मदद सुनिश्चित करने के आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत  नम्रता जैन, लीड बैंक मैनेजर विकास गुप्ता एवं समस्त बैंक के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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 MadhyaBharat  29 November 2022

मध्यप्रदेश के इतिहास में बिजली की सर्वाधिक मांग

 15748 मेगावाट का नया रिकार्ड दर्ज ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मध्यप्रदेश के इतिहास में गत दिवस 27 नवम्बर को प्रात: 10.53 बजे सर्वाध‍िक बिजली मांग का नया रिकार्ड कायम हुआ। इस दिन प्रदेश में बिजली की मांग 15748 मेगावाट दर्ज हुई। इससे पूर्व प्रदेश में सर्वाध‍िक बिजली की मांग 24 दिसंबर 2021 को 15692 मेगावाट दर्ज हुई थी। प्रदेश में कैसी रही बिजली की मांग प्रदेश में जब बिजली की मांग 15748 मेगावाट पर दर्ज हुई उस दौरान मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर, सागर व रीवा संभाग) में 4319 मेगावाट, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) में 4808 मेगावाट और मध्यप्रदेश पश्चि‍म क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (इंदौर व उज्जैन संभाग) में बिजली की अध‍िकतम मांग 6313 मेगावाट दर्ज हुई। रेलवे को 308 मेगावाट बिजली दी गई। प्रदेश में कैसे हुई बिजली सप्लाई प्रदेश में 27 नवम्बर को जब बिजली की मांग 15748 मेगावाट दर्ज हुई, उस समय बिजली की सप्लाई में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप एवं जल विद्युत गृहों का उत्पादन अंश 3823 मेगावाट, इंदिरा सागर-सरदार सरोवर-ओंकारेश्वर जल विद्युत परियोजना का अंश 820 मेगावाट, सेंट्रल सेक्टर का अंश 4272 मेगावाट और आईपीपी का अंश 2521 मेगावाट रहा। अन्य स्त्रोत जिनमें नवकरणीय स्त्रोत व बैंक‍िंग भी शामिल हैं, से प्रदेश को 4311 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई।

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 MadhyaBharat  29 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान सीहोर गौरव दिवस समारोह में देंगे अनेक सौगातें

  41 करोड़ रूपए से अधिक के निर्माण एवं विकास कार्यों का करेंगे शिलान्यास तथा लोकार्पण सीहोर शहर का गौरव दिवस 29 नवंबर को मनाया जाएगा। गौरव दिवस समारोह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल होंगे और सीहोर शहर को अनेक निर्माण एवं विकास कार्यों की सौगात देंगे। सौगात स्वरूप मुख्यमंत्री चौहान सीहोर नगर में 19 करोड़ 38 लाख रूपए के निर्माण एवं विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं 22 करोड़ 21 लाख रूपए के कार्यों का लोकार्पण करेंगे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी भी मौजूद रहेंगे। सीहोर नगर के गौरव दिवस को लेकर नगरवासियों में भारी उत्साह है। दीपोत्सव की भाँति नागरिकों द्वारा अपने घरों को रोशनी तथा घर-आँगन को रंगोली से सजाया जा रहा है। नगर में प्रवेश करते ही उत्सव का वातावरण दिखता है। छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं तथा बुर्जुगों में उत्साह की लहर है। नगर के गौरव दिवस के उपलक्ष्य में 25 नवंबर से 5 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रभात फेरी, स्वच्छता संगोष्ठी, चित्रकला प्रतियोगिता, साइकिल रैली, मैराथन, रंगोली प्रतियोगिता, शहर के इतिहास एवं पर्यटन तथा विकास को बढ़ावा देने के लिए संगोष्ठी, नगर के इतिहास और पर्यटन से संबंधित निबंध प्रतियोगिता, खेल प्रतियोगिता, सामूहिक योग एवं सूर्य नमस्कार तथा सांगीतिक कार्यक्रमों में नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुमारी दीक्षा मेवाड़ा, श्रेयांश विश्वकर्मा, श्रद्धा ठाकुर, आयुष राजपूत, मोहिनी शर्मा, दक्ष गौर ने कहा कि हमारे सीहोर नगर के गौरव दिवस को लेकर हम सभी लोग उत्साहित है। नगर गौरव दिवस के उपलक्ष्य में हो रहे कार्यक्रमों में हम सभी सहभागिता कर रहे हैं। हमें अपनी जन्म-भूमि पर गर्व है।   इन कार्यों का करेंगे शिलान्यास मुख्यमंत्री चौहान 5 करोड़ रुपए की लागत से 100 सीटर कन्या छात्रावास (बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना) का शिलान्यास, 03 करोड़ 46 लाख रूपए की लागत से सीहोर शहर में ब्रह्मपुरी तिराहे से श्मशान घाट इंदिरा नगर से फोरलेन बाईपास तक सीसी मार्ग का निर्माण कार्य, 6 करोड़ 89 लाख रूपए की लागत से कोलीपुरा तिराहे से झागरिया बायपास तक फोरलेन सीसी मार्ग का निर्माण, 33 लाख रूपए की लागत से बांसिया से बरनावद सड़क निर्माण, 60 लाख रूपए की लागत से अहमदपुर- बरखेड़ा हसन रोड से पंदा सड़क निर्माण, 35 लाख रूपए की लागत से बरखेड़ा दोराह से चौकी सड़क निर्माण, 66 लाख रूपए की लागत से खाईखेड़ा छतरी रोड से रामजाखेड़ा सड़क निर्माण, 60 लाख रूपए की लागत से चरनाल रोड से मोतीपुरा कलां सड़क निर्माण, 29 लाख रूपए की लागत से श्यामपुर रोड से मानपुरा, 51 लाख रूपए की लागत से सिराड़ी से रासलाखेड़ी सड़क निर्माण तथा 65 लाख रूपए की लागत से अहमदपुर रोड से विलेज गोंडी सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन करेंगे।   इन कार्यों का करेंगे लोकार्पण   मुख्यमंत्री  चौहान एक करोड़ 12 लाख रूपए की लागत से बने मोतीपुरा बैराज का लोकार्पण करेंगे। इसी प्रकार एक करोड़ 29 लाख रूपए की लागत से बने छतरी बैराज का लोकार्पण, 3 करोड़ 86 लाख रूपए की लागत से बरखेड़ाहसन (टी-05) से लोधीपुरा उमरझिर, एक करोड़ 90 लाख रूपए की लागत से बनी मुंगावली से बड़बेली सड़क, एक करोड़ 18 लाख रूपए की लागत से टी-06 एनएच 12 बराड़ी से सेमरादांगी मार्ग के चैनेज 2515 मीटर पर पुल, दो करोड़ 8 लाख रूपए की लागत से टी-06 एनएच 12 बराड़ी से सेमरादांगी मार्ग के चैनेज 5380 मीटर पर पुल, एक करोड़ 25 लाख रूपए की लागत से टी-06 एनएच 12 बराड़ी से सेमरादांगी मार्ग के चैनेज 7 हजार मीटर पर पुल, 8 करोड़ 44 लाख रूपए की लागत से बने 370 शासकीय शाला, 180 आँगनबाड़ी केन्द्र, 8 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 3 आश्रम एवं छात्रावास और 74 ग्रामीण पंचायत भवन सहित कुल-635 संस्थाओं में पेयजल व्यवस्था का कार्य तथा एक करोड़ 5 लाख रूपए की लागत से बने जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र (डीईआईसी) भवन का लोकार्पण करेंगे।

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 MadhyaBharat  29 November 2022

मंडला की तीन ग्राम पंचायत के बैगा समुदाय को मिले हेबीटेट राईट्स

ग्राम सभा एवं उपखंड वनाधिकार समिति की अनुशंसा को जिला वनाधिकार समिति ने दी स्वीकृति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों को हेबीटेट राईटस दिये जा रहे हैं। मंडला जिले की जनपद पंचायत बिछिया की तीन ग्राम पंचायत कन्हारीकला, चंगरिया और मेढ़ाताल के बैगा समुदाय के हेबीटेट राईटस (प्राकृतिक पर्यावास के अधिकार) के दावे ग्राम पंचायत एवं उपखण्ड स्तरीय वनाधिकार समिति की अनुशंसा के बाद जिला स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा स्वीकृति जारी कर दी गई है। तीनों पंचायत में बैगा समुदाय के लोगों के लिये जननांकीय निर्धारक, आर्थिक/जीवन उर्पाजन के लिये प्रयोजन, सांस्कृतिक/धार्मिक, औघधि एवं कंदमूल आदि के लिये सीमा का विस्तार और खसरा निर्धारित किया गया है। इन ग्राम पंचायतों के 541 बैगा परिवारों को 664 हेक्टेयर वनभूमि एवं 435 हेक्टेयर राजस्व भूमि (बड़े-छोटे झाड़) के जंगल में, इस प्रकार कुल 1099 हेक्टेयर भूमि में हेबीटेट राईटस प्रदान किये जाने की मान्यता दी गई है। जिला समिति द्वारा स्वीकृत क्षेत्रों में ग्राम पंचायत कन्हारीकला, चंगरिया और मेढ़ाताल के बैगा समुदाय के लोग अनुषांगिक प्रयोजनों के लिये सांस्कृतिक मान्यताओं के स्थलों, संसाधनों तक आने-जाने के उपयोग, वन / राजस्व वन क्षेत्रों से प्राप्त काष्ठ, लघु-वनोपज, गैर कृषि खाद्य, चारागाह, औषधि, जलाऊ लकड़ी का संग्रहण तथा संसाधनों तक पहुँच के लिये आवागमन, परम्परागत तरीके से ग्राम की सीमाओं के अंदर नदी, नालों में मछली पकड़ने, सांस्कृतिक - धार्मिक प्रयोजन के स्थलों तक पहुँच एवं उपयोग, आजीविका के लिये खाद्य आदि संग्रहण एवं संसाधनों तक पहुँच के लिये आवागमन और बैगा परम्पराओं के अनुसार विभिन्न बीमारियों / प्राकृतिक प्रकोप के उपचार हेतु उनके औषधिक ज्ञान अनुसार औषधियों तक पहुँचने एवं संग्रहण के लिये स्थलों का चिन्हाकंन किया गया है।   हेबीटेट राईट्स के प्रस्ताव / दावा पर पहले ग्राम सभा एवं उपखण्ड स्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा कार्यवाही पूर्ण की गई। प्रस्ताव दावा निराकरण के लिए अनुशंसा सहित जिला स्तरीय वनाधिकार समिति को भेजा गया। प्रस्ताव पर जिला स्तरीय समिति द्वारा विस्तृत समीक्षा एवं चर्चा की गई। इसमें संबंधित ग्राम पंचायतों के बैगा समुदाय एवं उपस्थित जन-प्रतिनिधियों के समक्ष दावे से संबंधित सभी जानकारियाँ पढ़ कर सुनाई गई। बैगा समुदाय के लोगों द्वारा सभी तथ्यों पर सहमति व्यक्त कर तैयार किये गये नजरी नक्शे का भी समिति के समक्ष परीक्षण कर मानचित्र पर स्थल सत्यापन किया गया। समिति के सभी उपस्थित सदस्यों, उपखण्ड स्तरीय समिति के प्रतिनिधि एवं बैगा समुदाय की सहमति के बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार हेबीटेट राईट्स के दावे को सर्व सम्मति से मान्य करने की स्वीकृति दी गई।   मण्डला जिले में इसके पूर्व मवई जनपद के अमवार में हेबीटेट राईट प्रदान किये जा चुके हैं। शासन की मंशा के अनुसार जल, जंगल एवं जमीन का वास्तविक अधिकार बैगा समुदाय को दिया जा रहा है। हेबीटेट राईटस मिल जाने से बैगा समुदाय वनों में अपनी प्राचीन परम्पराओं का निर्वाह पहले की तरह निश्चिंत होकर कर सकेंगे।

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 MadhyaBharat  29 November 2022

अपने गाँव-शहर के प्रति गर्व की अनुभूति कराने का उत्सव है गौरव दिवस-मुख्यमंत्री

  गाँव-शहर के विकास में सहभागी बनें नागरिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहर और गाँव के गौरव दिवस, स्थानीय निवासियों में अपने क्षेत्र के प्रति गर्व की अनुभूति कराने और विकास में उन्हें सहभागी बनाने का उत्सव है। इसी कड़ी में सीहोर शहर का गौरव दिवस 29 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस दिन अमर शहीद कुंवर चैन सिंह की छतरी पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी, साथ ही अंग्रेजों से संघर्ष में शहीद हुए 356 सैनिकों की स्मृति में शहीद स्थल पर कार्यक्रम किया जाएगा। मुख्यमंत्री  चौहान सीहोर के गौरव दिवस की तैयारियों संबंधी समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस और अपर मुख्य सचिव वित्त अजीत केसरी उपस्थित थे। सीहोर के जन-प्रतिनिधि तथा कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह अढायच सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी सीहोर से वर्चुअली शामिल हुए। बताया गया कि 29 नवंबर को सीहोर के गौरव दिवस पर प्रथम-सत्र में एक हजार पौधे लगाए जाएंगे तथा 501 कन्याओं का भोज होगा। सायंकालीन-सत्र में शहर में दीपावली की तरह साज-सज्जा, रंगोली और प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान का रोड-शो तथा संबोधन होगा। टाउन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में सीहोर की प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान की उपस्थिति में विभिन्न सामाजिक संस्थाएँ तथा स्वयंसेवी संगठन नगर की स्वच्छता, विकास गतिविधियों और पर्यावरण-संरक्षण का संकल्प लेंगे। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायिका मोनाली ठाकुर की सांगीतमय प्रस्तुति भी होगी। सीहोर के गौरव उत्सव की कड़ी में 25 नवम्बर से ही गतिविधियाँ की जा रही हैं। इसमें नेत्रदान एवं रक्तदान शिविर, सामूहिक योग कार्यक्रम, मैराथन और रन फॉर सीहोर का आयोजन किया गया। साथ ही स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।

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 MadhyaBharat  28 November 2022

मध्यप्रदेश में भी अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक उत्सव की पहल होगी

  भिन्न-भिन्न संस्कृतियों के कार्यक्रम भावनात्मक एकता को करते हैं मजबूत : मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम और विचार अद्भुत है। इससे देश में भावनात्मक एकता मजबूत हो रही है। एक राज्य दूसरे राज्य की परम्पराओं, जीवन-मूल्यों और संस्कृति को समझ रहा है और राज्य परस्पर निकट आ रहे हैं। मध्यप्रदेश में विभिन्न राज्यों की अलग-अलग संस्कृतियों को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक उत्सव करने की पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने आज मणिपुर की राजधानी इंफाल पहुँचने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मणिपुर पहुँच कर यह देखा कि यहाँ संगाई महोत्सव में अलग-अलग राज्यों के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे और मणिपुर की जनता उन सभी कलाकारों को दिल से सराह रही थी। विशाल जन-समूह एकत्रित था। कला प्रेमियों में राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए जुनून था। मध्यप्रदेश के कलाकारों ने भी अपनी कला का यहाँ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मणिपुर की जनता से मिला स्नेह और आदर याद रहेगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने मणिपुर की जनता और मुख्यमंत्री  एन. बीरेन सिंह का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री चौहान ने मणिपुर की जनता को मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण दिया, जिससे मध्यप्रदेश में अंतर्राज्यीय सांस्कृतिक उत्सव कार्यक्रम करते हुए इस परम्परा को स्थापित किया जा सके। ऐसे कार्यक्रम देश में एकात्मता के भाव को बढ़ाने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि हम सब भारत माता के लाल हैं, भेदभाव का कहाँ सवाल है। अलग भाषा और अलग प्रदेश है फिर भी अपना एक देश है।

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 MadhyaBharat  28 November 2022

मध्यप्रदेश और मणिपुर के मध्य पर्यटन सहित अन्य क्षेत्रों में आदान-प्रदान बढ़ाने के प्रयास

मुख्यमंत्री मणिपुर के राजकीय उत्सव संगाई महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश और मणिपुर के मध्य पर्यटन, सांस्कृतिक और अन्य क्षेत्रों में परस्पर आदान-प्रदान बढ़ाने के प्रयास होंगे। मणिपुर एक खूबसूरत राज्य है। यह बेहतरीन राज्यों में से एक है। सुंदर वन, जल और जन-सम्पदा से परिपूर्ण भारत का मुकुट मणि राज्य है। मध्यप्रदेश और मणिपुर में काफी साम्य भी है। मुख्यमंत्री  चौहान मणिपुर के इंफाल में राजकीय उत्सव संगाई महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि बाक्सिंग में मेरीकॉम से लेकर अन्य खेलों के प्रतिभावान खिलाड़ी मणिपुर का माथा ऊँचा किए हुए हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने हिंदुस्तान की धरती पर सबसे पहले तिरंगा मणिपुर में ही फहराया था। इस नाते मणिपुर का विशेष महत्व है। मणिपुर, देश ही नहीं दुनिया के सबसे अच्छे राज्यों में से एक बन जाये, जो मणियों से भरा हो उसे हिंदी में मणिपुर कहते हैं। यह सचमुच में अद्भुत प्रदेश है। यहाँ के मंदिर भी अद्भुत हैं। गोविंद जी मंदिर और गोपीनाथ जी का मंदिर मणिपुर में आस्था का केंद्र हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री  एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में मणिपुर विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में मणिपुर अग्रणी है। आने वाले दस वर्ष में मणिपुर हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा टूरिज्म डेस्टिनेशन होगा। मणिपुर के 14 स्थानों से एक साथ प्रारंभ इस उत्सव के उद्घाटन से केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी भी जुड़े। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मणिपुर विकास के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ता जाये,ऐसी शुभकामनाएँ मध्यप्रदेश वासियों की हैं। मणिपुर का सौंदर्य अभिभूत करने वाला है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की सुंदरता भी कम नहीं है। उन्होंने मणिपुर के रहवासियों को पर्यटन के लिए मध्यप्रदेश आने का आमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मणिपुर के जो विद्यार्थी मध्यप्रदेश में अध्ययनरत हैं, उनकी चिंता करना मुख्यमंत्री के नाते मेरा दायित्व है। मुख्यमंत्री चौहान ने मणिपुर राज्य के व्यंजनों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गत 12 वर्ष से प्रारंभ इस उत्सव का यह 11वां वर्ष है। कोविड की वजह से उत्सव की निरंतरता प्रभावित हुई थी। मुख्यमंत्री  चौहान ने गत 21 नवम्बर से प्रारंभ 10 दिवसीय उत्सव के सातवें दिन आज इसमें हिस्सा लेते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री  एन. बीरेन सिंह को उत्सव के लिए बधाई दी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मणिपुर की पारम्परिक चित्रकला सहित अन्य कलात्मक वस्तुओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री  चौहान को उपहार भी भेंट किये। महोत्सव में मणिपुर के लोक कलाकारों सहित देश के विभिन्न प्रांतों के कलाकारों के नृत्य और मध्यप्रदेश के लोक नृत्य की भी प्रस्तुति हुई।

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 MadhyaBharat  28 November 2022

सामाजिक समरसता के भाव को जीवन में उतारने की जरूरत : राज्यपाल

संविधान के उचित अनुपालन से ही समाज का समग्र विकास संभव: डॉ. बरतूनिया राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विश्वविद्यालय सदैव ज्ञान का केंद्र रहे हैं। इनका काम मात्र डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को देश की एकता, अखंडता, राष्ट्र निर्माण और विकास का कर्णधार बनाना है। शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़, अखण्ड और विकसित राष्ट्र निर्माण के लिए सही रास्ता दिखाने एवं मार्गदर्शन का काम करना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा वंचित वर्ग के कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के आहवान पर राज्य में अनुसूचित जनजाति के जननायकों को चिन्हित कर उचित सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय उच्च गुणवक्तापूर्ण शोध एवं शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करें। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मेरी अपेक्षा है कि विश्वविद्यालय समाज के साथ जुड़ कर, सामुदायिक विकास तथा युवाओं में अधिक और सशक्त नेतृत्वशीलता विकसित कर शाश्वत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान करें। राज्यपाल ने स्नातकों द्वारा ली गयी प्रतिज्ञा को उद्धृत करते हुए मादक पदार्थों के सेवन और भ्रष्टाचार से दूर रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें सामाजिक समरसता के भाव को जीवन में उतारने की जरुरत है। बाबा साहेब अम्बेडकर के जीवन-दर्शन को आत्मसात कर एक स्वस्थ समाज की स्थापना करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय उपलब्ध भौतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए समाज के कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर, शासन द्वारा चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाओं को उनके लक्षित समूह तक पहुँचाने में महती भूमिका अदा करेगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवाओं को आगे आकर भारत के गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करने की शुरूआत करनी चाहिए। तत्कालीन सामाजिक एवं जातिगत बुराइयों से निकल कर भारत को कैसे आगे ले जाना है, इस चिंता को साकार रूप देने में बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हमारा संविधान सदैव लोकमत एवं राष्ट्रहित की बात करता है। संविधान की मूल प्रति में अंकित चित्रों की प्रदर्शनी लगाने की आवश्यकता है, जिससे आमजन संविधान की मौलिकता से परिचित हो सके। डॉ. अम्बेडकर विश्वविद्यालय का विस्तार देश और प्रदेश में करना पहली प्राथमिकता पर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के रूप में लागू किया जाना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अहम् कार्य रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और नवोन्मेषी पाठ्यक्रमों को शुरू करने सहित कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाना चाहिए। संस्कृति, पर्यटन एवं अध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रहित की संस्था है। समस्याओं का समूल निदान मिल कर करने की जरुरत है। शपथ एक साधना है। दीक्षा उपादान से प्राप्त ज्ञान को प्रज्ञान में बदलने की जरुरत है। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी. बरतूनिया ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय समाज के विषय में अनेक मौलिक अवधारणाएँ प्रस्तुत की हैं। वे भारतीय समाज को अविछिन्न और अखंड देखना चाहते थे। डॉ. अम्बेडकर ने समाज की भौतिक परिस्थितियों को पहचानते हुए सामाजिक-आर्थिक समानता तथा विभिन्न वर्गों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया। उपाधि प्राप्त करके जब आप अपने कर्म-पथ पर चले तो प्रत्येक अवसर पर आपके व्यक्तित्व और कृतित्व में इस धरा और इस संस्था की अतुलनीय विरासत और छवि अवश्य दिखें। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के. शर्मा ने कहा कि शिक्षा, समाज की उन्नति एवं सभ्यता की प्रगति की आधारशिला है। विश्वविद्यालय केंद्रित शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य जीवन मूल्यों को विकसित कर संस्कारों को परिष्कृत करना है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये डॉ. अम्बेडकर विचार एवं दर्शन अध्ययनशाला, सामाजिक विज्ञान एवं प्रबंधन अध्ययनशाला, कृषि एवं ग्रामीण विकास अध्ययनशाला, शिक्षा एवं कौशल विकास अध्ययनशाला तथा विधि एवं सामाजिक न्याय अध्ययनशाला एवं शोध, प्रसार और प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा अनुसंधान केंद्रित अध्ययन-अध्यापन का कार्य अनवरत किया जा रहा है। विश्वविद्यालय शिक्षा और सामाजिक समरसता को लेकर बाबा साहब के विचारों और सपनों को आगे बढ़ाने संकल्पित है। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति द्वारा विभिन्न अध्ययनशालाओं के पीएच.डी. एवं एम.फिल. के 48 शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी। साथ ही सत्र 2021-22 में उत्तीर्ण स्नातकों को उपाधि देने की अनुमति प्रदान की गयी। न्यायाधीश दानसिंह स्मृति कुलपति पदक स्नातक की छात्रा शारदा विश्वकर्मा को प्रदान किया गया। समारोह में ‘दीक्षांत स्मारिका’ सहित विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों डॉ. बी.आर. अम्बेडकर समतामूलक शिक्षा और समाज, जैन संस्कृति और संस्कार एवं सामाजिक समरसता और संत साहित्य का लोकार्पण किया गया। मानद आचार्य प्रो. स्नेहलता श्रीवास्तव द्वारा रचित एवं आलोक बाजपेई द्वारा संगीतबद्ध कुलगीत का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आरंभ और समापन संगीतमय राष्ट्रगान के साथ हुआ। अतिथियों के विश्वविद्यालय आगमन पर सेना बैंड, एन.सी.सी. तथा एन.एस.एस कैडेट्स द्वारा गॉड ऑफ ऑनर दिया गया। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार एवं परिसर में स्वाधीनता आंदोलन के जनजातीय नायक एवं नायिकाओं का जीवनवृत्त चित्र सहित प्रतिस्थापित कर अनावरित किया। दीक्षांत में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेणु जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार के प्रोफेसर्स और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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 MadhyaBharat  27 November 2022

सामाजिक समरसता के भाव को जीवन में उतारने की जरूरत : राज्यपाल

संविधान के उचित अनुपालन से ही समाज का समग्र विकास संभव: डॉ. बरतूनिया राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विश्वविद्यालय सदैव ज्ञान का केंद्र रहे हैं। इनका काम मात्र डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं को देश की एकता, अखंडता, राष्ट्र निर्माण और विकास का कर्णधार बनाना है। शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़, अखण्ड और विकसित राष्ट्र निर्माण के लिए सही रास्ता दिखाने एवं मार्गदर्शन का काम करना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा वंचित वर्ग के कल्याण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के आहवान पर राज्य में अनुसूचित जनजाति के जननायकों को चिन्हित कर उचित सम्मान देने का कार्य किया जा रहा है। विश्वविद्यालय उच्च गुणवक्तापूर्ण शोध एवं शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करें। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मेरी अपेक्षा है कि विश्वविद्यालय समाज के साथ जुड़ कर, सामुदायिक विकास तथा युवाओं में अधिक और सशक्त नेतृत्वशीलता विकसित कर शाश्वत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान करें। राज्यपाल ने स्नातकों द्वारा ली गयी प्रतिज्ञा को उद्धृत करते हुए मादक पदार्थों के सेवन और भ्रष्टाचार से दूर रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें सामाजिक समरसता के भाव को जीवन में उतारने की जरुरत है। बाबा साहेब अम्बेडकर के जीवन-दर्शन को आत्मसात कर एक स्वस्थ समाज की स्थापना करने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय उपलब्ध भौतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए समाज के कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर, शासन द्वारा चलायी जा रही कल्याणकारी योजनाओं को उनके लक्षित समूह तक पहुँचाने में महती भूमिका अदा करेगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवाओं को आगे आकर भारत के गौरवशाली अतीत को पुनर्स्थापित करने की शुरूआत करनी चाहिए। तत्कालीन सामाजिक एवं जातिगत बुराइयों से निकल कर भारत को कैसे आगे ले जाना है, इस चिंता को साकार रूप देने में बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हमारा संविधान सदैव लोकमत एवं राष्ट्रहित की बात करता है। संविधान की मूल प्रति में अंकित चित्रों की प्रदर्शनी लगाने की आवश्यकता है, जिससे आमजन संविधान की मौलिकता से परिचित हो सके। डॉ. अम्बेडकर विश्वविद्यालय का विस्तार देश और प्रदेश में करना पहली प्राथमिकता पर है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के रूप में लागू किया जाना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अहम् कार्य रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और नवोन्मेषी पाठ्यक्रमों को शुरू करने सहित कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाना चाहिए। संस्कृति, पर्यटन एवं अध्यात्म मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रहित की संस्था है। समस्याओं का समूल निदान मिल कर करने की जरुरत है। शपथ एक साधना है। दीक्षा उपादान से प्राप्त ज्ञान को प्रज्ञान में बदलने की जरुरत है। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी. बरतूनिया ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय समाज के विषय में अनेक मौलिक अवधारणाएँ प्रस्तुत की हैं। वे भारतीय समाज को अविछिन्न और अखंड देखना चाहते थे। डॉ. अम्बेडकर ने समाज की भौतिक परिस्थितियों को पहचानते हुए सामाजिक-आर्थिक समानता तथा विभिन्न वर्गों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया। उपाधि प्राप्त करके जब आप अपने कर्म-पथ पर चले तो प्रत्येक अवसर पर आपके व्यक्तित्व और कृतित्व में इस धरा और इस संस्था की अतुलनीय विरासत और छवि अवश्य दिखें। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के. शर्मा ने कहा कि शिक्षा, समाज की उन्नति एवं सभ्यता की प्रगति की आधारशिला है। विश्वविद्यालय केंद्रित शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य जीवन मूल्यों को विकसित कर संस्कारों को परिष्कृत करना है। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिये डॉ. अम्बेडकर विचार एवं दर्शन अध्ययनशाला, सामाजिक विज्ञान एवं प्रबंधन अध्ययनशाला, कृषि एवं ग्रामीण विकास अध्ययनशाला, शिक्षा एवं कौशल विकास अध्ययनशाला तथा विधि एवं सामाजिक न्याय अध्ययनशाला एवं शोध, प्रसार और प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा अनुसंधान केंद्रित अध्ययन-अध्यापन का कार्य अनवरत किया जा रहा है। विश्वविद्यालय शिक्षा और सामाजिक समरसता को लेकर बाबा साहब के विचारों और सपनों को आगे बढ़ाने संकल्पित है। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति द्वारा विभिन्न अध्ययनशालाओं के पीएच.डी. एवं एम.फिल. के 48 शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी। साथ ही सत्र 2021-22 में उत्तीर्ण स्नातकों को उपाधि देने की अनुमति प्रदान की गयी। न्यायाधीश दानसिंह स्मृति कुलपति पदक स्नातक की छात्रा शारदा विश्वकर्मा को प्रदान किया गया। समारोह में ‘दीक्षांत स्मारिका’ सहित विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों डॉ. बी.आर. अम्बेडकर समतामूलक शिक्षा और समाज, जैन संस्कृति और संस्कार एवं सामाजिक समरसता और संत साहित्य का लोकार्पण किया गया। मानद आचार्य प्रो. स्नेहलता श्रीवास्तव द्वारा रचित एवं आलोक बाजपेई द्वारा संगीतबद्ध कुलगीत का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आरंभ और समापन संगीतमय राष्ट्रगान के साथ हुआ। अतिथियों के विश्वविद्यालय आगमन पर सेना बैंड, एन.सी.सी. तथा एन.एस.एस कैडेट्स द्वारा गॉड ऑफ ऑनर दिया गया। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार एवं परिसर में स्वाधीनता आंदोलन के जनजातीय नायक एवं नायिकाओं का जीवनवृत्त चित्र सहित प्रतिस्थापित कर अनावरित किया। दीक्षांत में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. रेणु जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार के प्रोफेसर्स और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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 MadhyaBharat  27 November 2022

भ्रष्टाचार कोढ़ है, इसे पूरी तरह समाप्त करना जरूरी : मुख्यमंत्री चौहान

  सुशासन के लिए जन-प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी टीम भावना और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य करें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भ्रष्टाचार कोढ़ है, इसे पूरी तरह समाप्त करना है। राज्य सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति है। जन-कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों, थानों में एफ.आई.आर. लिखे जाने और आपराधिक प्रकरणों पर कार्यवाही के मामलों में भ्रष्टाचार की प्रत्येक शिकायत या सूचना पर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करें। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का बिना लिए-दिए, समय पर लाभ मिले, सभी क्षेत्रों में सुशासन स्थापित हो। यही व्यवस्थाएँ स्थापित करने के उद्देश्य से प्रात:कालीन बैठकें की जा रही हैं। यह आवश्यक है कि जन-प्रतिनिधि और अधिकारी-कर्मचारी टीम भावना से कार्य करें, उनके प्रयासों में कोई कमी न रहे। मुख्यमंत्री चौहान देवास जिले में संचालित जन-कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति की मॉर्निंग मीटिंग में समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय पर सुबह 7.30 बजे हुई बैठक में देवास जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, विधायक श्रीमती गायत्री राजे, आशीष शर्मा, मनोज चौधरी, अपर मुख्य सचिव महिला-बाल विकास अशोक शाह, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी संजय शुक्ला, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी और आजीविका मिशन के  एम.एल. बेलवाल वर्चुअली शामिल हुए। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि ऐसे अधिकारी-कर्मचारी जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं अथवा जिनका आचरण ठीक नहीं है या जिनके विरूद्ध भ्रष्टाचार की शिकायतें हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित किया जाए। राज्य सरकार जन-सामान्य के हित में व्यवस्थाएँ संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण तथा मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान में देवास जिले की प्रगति के लिए जिला अधिकारियों को बधाई दी। साथ ही बेहतर विद्युत व्यवस्था के लिए अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर के संबंध में जागरूकता और बिजली बिलों के संशय के संबंध में कैम्प लगा कर प्रचार-प्रसार की गतिविधियाँ संचालित की जाये। मुख्यमंत्री ने गुम बच्चियों की बरामदगी और महिला सुरक्षा के लिए देवास जिले में संचालित गतिविधियों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री  चौहान ने जल जीवन मिशन तथा प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में जिले में कार्यों की धीमी गति, पिछले 2 माह से पूरक पोषण आहार वितरण नहीं होने और ग्रामीण सड़कों की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिले के सोनकच्छ अनुविभाग और देवास नगर निगम में संचालित गतिविधियों, पुलिस थानों में एफ.आई.आर. लिखने और दोषियों पर कार्यवाही की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि जल जीवन मिशन में पूर्ण हुई योजनाओं का लोकार्पण जन-सामान्य को जोड़ कर किया जाए। योजनाओं के संधारण और प्रबंधन में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आमजन को सही समय पर जल कर का भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाए। मुख्यमंत्री चौहान ने योजना में रेस्टोरेशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि जन-प्रतिनिधि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि थानों में एफ.आई.आर नहीं लिखने, लिखने में विलंब और सही धारा नहीं लगाने जैसी शिकायतों की संवेदनशीलता से जाँच की जाए। कानून-व्यवस्था की स्थिति में विवेचना में विलंब और कार्यवाही नहीं करने के प्रकरणों के प्रति भी सजग रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को खाद के लिए लाइन नहीं लगानी पड़े। मुख्यमंत्री ने जिले में रोजगार मेलों और स्व-रोजगार गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। युवाओं और विद्यार्थियों को नशे की लत से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्री प्रतिमाह इस प्रकार की बैठकें कर गतिविधियों की समीक्षा करें। जानकारी दी गई कि जल जीवन मिशन में 2 लाख 50 हजार कनेक्शन का लक्ष्य है, जिनमें से 1 लाख 25 हजार कनेक्शन का कार्य पूर्ण हो गया है। जिले के कुल 166 गाँवों में अब तक हर घर नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में 9 लाख 50 हजार स्वीकृत आवासों में से 6 हजार आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में 31 हजार आवासों में से 99 प्रतिशत आवास पूर्ण हो चुके हैं। आवास प्लस में जारी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत 16 हजार में से6 हजार का निर्माण पूर्ण हुआ है। आवास निर्माण में अनुचित राशि मांगने संबंधी 352 शिकायतों में जाँच कराई जा रही है। जिले में 102 अमृत सरोवर में से 44 का निर्माण पूर्ण हुआ है। मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान में 700 शिविर लगाए गए, जिनमें प्राप्त 2 लाख 95 हजार आवेदनों में से 2 लाख 75 हजार को स्वीकृति प्रदान की गई है। कानून-व्यवस्था में अवैध शराब संबंधी 662 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जिले में 65 भू-माफिया पर कार्यवाही कर 40 करोड़ रूपये लागत की 150 एकड़ भूमि मुक्त कराई गई है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि "एक जिला-एक उत्पाद" में लिए गए उत्पाद बाँस की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। इससे किसानों की अतिरिक्त आय का स्त्रोत भी विकसित होगा। बाँस के उत्पादों को देवास जिले की पहचान बनाने के लिए नवाचार किए जाएँ। कलेक्टर ने जानकारी दी कि बाँस उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट सहित देश के विभिन्न शो-रूम से भी सम्पर्क किया जा रहा है। प्रभारी मंत्री प्रति माह जिले में संचालित योजनाओं, विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की करें समीक्षा बाँस उत्पादों को देवास जिले की पहचान बनाया जाये देवास जिले में प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण तथा मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान की प्रगति को सराहा मुख्यमंत्री ने मॉर्निंग मीटिंग में की देवास जिले की समीक्षा

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 MadhyaBharat  27 November 2022

गौरव दिवस सरकारी नहीं, जन-जन का आयोजन : मुख्यमंत्री चौहान

अपने शहर के विकास और प्रगति में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि गौरव दिवस सरकारी नहीं, जन-जन का आयोजन है। किसी भी शहर, गाँव अथवा क्षेत्र का विकास केवल सरकार नहीं कर सकती, जब तक उसके साथ समाज का पूरा सहयोग न हो। अपने शहर, गाँव, क्षेत्र के विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। साथ ही इस पावन दिवस पर पाँच संकल्प लें - अपने जन्म-दिन पर एक पौधा जरूर लगायेंगे, आँगनवाड़ियों में सहयोग देंगे, बेटी के जन्म पर खुशियाँ मनायेंगे, पानी की प्रत्येक बूँद बचायेंगे और शहर को नशामुक्त बनायेंगे। मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान आज सागर में सागर गौरव दिवस समारोह में शामिल हुए। डॉ. हरिसिंह गौर की 153वीं जयंती को सागर गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान ने सागर की अनेक विभूतियों को "सागर रत्न" से सम्मानित किया। उन्होंने रिमोट का बटन दबा कर 120 करोड़ 50 लाख रूपये की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोर्कापण भी किया। कार्यक्रम स्थल पर मनमोहक आतिशबाजी की गई। पदमश्री  रामसहाय पाण्डे, गायक  उदित नारायण एवं अन्य कलाकारों ने कार्यक्रम में आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सागर के विकास में सर डॉ. हरिसिंह गौर के सहयोग को भुलाया नहीं जा सकता। अद्भुत थे गौर बाबा, उन्होंने सागर को ज्ञान का सागर दिया। वे संविधान निर्माण सभा के सदस्य और प्रसिद्ध कानूनविद थे। उन्होंने अपना सारा धन सागर विश्वविद्यालय बनाने के लिये खर्च कर दिया। इस विश्वविद्यालय में आचार्य रजनीश और सुदर्शन जी जैसी अनेक हस्तियाँ पढ़ी हैं। मेरा सागर से गहरा रिश्ता है। मुझे भी कुछ समय सागर विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र की पढ़ाई करने का अवसर प्राप्त हुआ। डॉ. गौर के त्याग को विद्यार्थी समझ सकें इसके लिये पाठय-पुस्तकों में उनकी जीवनी को शामिल किया जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आगामी एक वर्ष में सागर में 4770 करोड़ रूपये से अधिक के कार्य कराये जायेंगे। स्मार्ट सिटी योजना में सागर का इंदौर एवं भोपाल नगरों की तरह ही महानगर के रूप में विकास किया जा रहा है। सागर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा चुकी है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक क्रांति हो रही है। प्रदेश में इंजीनियिंरग एवं मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में किये जाने का ऐतिहासिक कार्य किया जा रहा है। मेधावी बेटे-बेटियों की उच्च शिक्षा की पढ़ाई की फीस सरकार भर रही है। प्रदेश में बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लाड़ली लक्ष्मी योजना-2 शुरू की गई है। मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहाँ बेटियों के साथ गलत कार्य करने वालों को फाँसी की सजा दी जाती है। माफियाओं और अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गरीबों को तत्काल वित्तीय सहायता देने के लिये माइक्रो फायनेंस योजना प्रारंभ करने जा रही है, जिसमें 5 हजार रूपये की तुरंत सहायता दी जायेगी। इस राशि को हितग्राही बिना ब्याज के अपनी सुविधानुसार वापस कर सकेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सागर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिये राजघाट बांध की ऊँचाई दो मीटर बढ़ाई जायेगी। इस पर लगभग 200 करोड़ रूपये अतिरिक्त व्यय आयेगा, जिसका प्रावधान अगले वित्त वर्ष में कर दिया जायेगा। तीर्थ-दर्शन योजना में अयोध्या के लिये ट्रेन भी चलाई जायेगी। केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हर गाँव, हर शहर का गौरव दिवस मनाने की जो परिकल्पना दी है, वह अत्यंत सराहनीय है। इससे क्षेत्रों का समग्र विकास तो होगा ही, साथ ही हर व्यक्ति क्षेत्र के प्राचीन गौरव को जान सकेगा। पटेल ने कहा कि डॉ. हरिसिंह गौर ने सागर के विकास में अद्वितीय योगदान दिया है। हम उनके बताये मार्ग पर चलें। मुख्यमंत्री चौहान ने पदमश्री  रामसहाय पाण्डे, पदमश्री डॉ. कपिल तिवारी, प्रसिद्ध सिने अभिनेता  मुकेश तिवारी, सेवानिवृत्त आईआरएस  अशोक मिश्रा, पूर्व यूजीसी चेयरमेन प्रो. डी.पी. सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस  बी.आर. नायडू, प्रो. जी.एस. वाजपेई, प्रो. गौरीशंकर पाराशर, पत्रकार शिवकुमार विवेक,  राजेश सिरोठिया,  शरद द्विवेदी और अमित जैन, विष्णु आर्य, एडवोकेट चतुर्भुज सिंह राजपूत,  कैलाश सिंघई और विरदी चंद जैन को सागर रत्न से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री चौहान ने डॉ. हरिसिंह गौर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समारोह को सांसद  राजबहादुर सिंह और विधायक  शैलेन्द्र जैन ने भी संबोधित किया। लोक निर्माण मंत्री  गोपाल भार्गव, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  भूपेन्द्र सिंह, राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे। डॉ. हरिसिंह गौर के जीवन वृत्त पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।   मकरोनिया आरओबी का लोकार्पण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सागर में 36 करोड़ 26 लाख रूपये की लागत से निर्मित मकरोनिया देवल रेलवे ओवर ब्रिज का लोकार्पण भी किया। इससे क्षेत्रीय रहवासियों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही समय और अर्थ की बचत भी होगी। मुख्यमंत्री ने सागर के गौरव दिवस पर सागरवासियों को यह बड़ी सौगात दी। अदभुत थे गौर बाबा, सागर को ज्ञान का सागर दिया डॉ. हरिसिंह गौर की जीवनी को पाठयक्रम में शामिल किया जायेगा आगामी एक वर्ष में सागर में होंगे 4770 करोड़ रूपये से अधिक के कार्य सागर की विभूतियों को सागर रत्न से किया सम्मानित 120 करोड़ 50 लाख रूपये के विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण पदमश्री  रामसहाय पाण्डे, गायक उदित नारायण एवं अन्य कलाकारों ने दी प्रस्तुतियाँ गौरव दिवस पर हुई मनमोहक आतिशबाजी मुख्यमंत्री  चौहान सागर गौरव दिवस समारोह में हुए शामिल

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 MadhyaBharat  27 November 2022

मध्यप्रदेश में भी लगाएंगे बहुआयामी कृषि प्रदर्शनी, लागू करेंगे नवाचार – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री चौहान ने नागपुर में किया एग्रो विजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए मध्यप्रदेश में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। गेहूँ उत्पादन में देश में अव्वल रहते हुए मध्यप्रदेश में किसानों को सभी तरह के उत्पादन का पूरा लाभ देने का कार्य किया। प्रदेश की कृषि विकास दर देश में सर्वाधिक है। इसके बावजूद अन्य प्रदेशों में किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी उन्हें लागू करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस सिलसिले में केन्द्रीय मंत्री  गडकरी की पहल पर विदर्भ में लोकप्रिय हुई बहुआयामी एग्रो विजन कृषि प्रदर्शनी और अन्य नवाचारों को अपनाने का कार्य भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश में एग्रो विजन का कार्यक्रम किसानों के हित में किए जाने की आवश्यक पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान आज नागपुर में केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के संयोजन में हुए एग्रो विजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रदर्शनी के साथ ही कार्यशाला और परिसंवाद के कार्यक्रम 28 नवंबर तक चलेंगे। मुख्यमंत्री  चौहान ने दीप जला कर एग्रो विजन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए 5 सूत्री रणनीति पर अमल किया गया है। इसमें उत्पादन वृद्धि, लागत कम करने, फसल का उचित दाम देने, क्षति पर आवश्यक भरपाई और तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों को प्राकृतिक आपदा और अन्य कारणों से फसलों की क्षति पर पर्याप्त राहत राशि देने की व्यवस्था की गई है। किसानों को फसल बीमा की राशि दिलवाने के लिए निरंतर समीक्षा की गई। परिणामस्वरूप किसानों को राहत मिली। इसी तरह कृषि कार्य में रिमोट सेंसिंग और तकनीक के भरपूर उपयोग से किसानों को लाभ देने का कार्य किया गया। मध्यप्रदेश में कृषि विविधीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गेहूँ, धान, चना और दालों के अलावा फल और फूलों की खेती के नवाचार भी हो रहे हैं। प्रदेश में बाँस उत्पादन से किसानों को आय वृद्धि का लाभ मिला है। सबसे महत्वपूर्ण बात किसानों को जीरो प्रतिशत पर कर्ज देकर ब्याज से राहत दिलवाने की व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में सिंचाई प्रतिशत को कई गुना बढ़ा कर किसानों को अधिक उत्पादन की सुविधाएँ पहुँचाते हुए उनकी आमदनी बढ़ाने में सहयोग किया गया। किसान को शिक्षित कर आर्थिक लाभ दिलवाने, सभी तरह के अनाजों की खरीद की उचित व्यवस्था कर किसानों की जिंदगी बदलने का कार्य किया गया। मध्यप्रदेश में सोलर पंप का उपयोग बढ़ रहा है। इस पर केन्द्र और राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से चलित पम्पों का इस्तेमाल करेंगे। केन्द्रीय मंत्री गडकरी के मार्गदर्शन में इथेनाल के प्लांट भी लगाए जाएंगे। इथेनाल से निर्मित फ्यूल से पेट्रोल और डीजल के उपयोग से हो रही विदेशी मुद्रा का खर्च बचाने का प्रयास करते हुए पर्यावरण-संरक्षण का कार्य भी करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि विकास दर में लगातार वृद्धि के विशेष प्रयास किये गये। प्रदेश की कृषि विकास दर को उच्चतम स्थिति में रखने का प्रयास रहा है। वर्तमान में यह 18 प्रतिशत है, जो अन्य प्रांतों से अधिक है। एग्रो विजन से किसानों को मार्गदर्शन देने का कार्य नितिन गडकरी कर रहे हैं। ऐसे कार्य मध्यप्रदेश सीखना चाहता है। अनुकरणीय और श्रेष्ठ कार्य सीखना ही चाहिए। मध्यप्रदेश में काफी कुछ किया गया है, लेकिन जिस ढंग से तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की प्रेरणा देने का कार्य गडकरी कर रहे हैं, वो सराहनीय है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भी यही मंशा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित उनके अनेक नवाचार प्रेरणा का कार्य करते हैं। नितिन जी ने आज भी अनेक नवाचारों की जानकारी दी है। विदर्भ ही नहीं संपूर्ण भारत में एग्रो विजन किसानों को शिक्षित करने और मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एग्रो विजन के सुझावों को मध्यप्रदेश की धरती पर लागू करने का कार्य किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर निरंतर बढ़ी है। मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में और भी बेहतर परिणाम देगा। उन्होंने कहा किऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों की उपयोगिता और उनके लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान अन्न प्रदाता होने के साथ ही ऊर्जा प्रदाता भी बन रहा है। अद्यतन तकनीकों का उपयोग किसानों की आय को बढ़ाने में मददगार बन रहा है। विदर्भ के किसानों को कृषि क्षेत्र की नई तकनीक और नए व्यवसाय से अवगत करवाने, उनकी आय में वृद्धि करवाने, खेती को अधिक लाभदायक बना कर किसान को सुखी, संपन्न और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से हर साल नागपुर में एग्रो विजन किया जाता है। गडकरी ने बताया कि एग्रो विजन का यह 13वां वर्ष है। इसमें किसान, कृषि विशेषज्ञ और कृषि प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। चार दिन के इस आयोजन में विभिन्न विषय पर कार्यशाला, राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी, सेमीनार एवं संगोष्ठियों के महत्वपूर्ण सत्र होंगे। खाद्य, चारा और ईंधन पर केन्द्रित भविष्य की कृषि पर विचार करते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान से एकीकृत प्रौद्योगिकी के विकास पर व्यापक चर्चा करना एग्रो विजन का मुख्य उद्देश्य है।   50 लाख से अधिक किसान देख चुके हैं कृषि प्रदर्शनी   एग्रो विजन में प्रदर्शनियों के जरिये से किसानों को नवीनतम तकनीक की जानकारी दी जाती है। लगभग 400 कार्यशालाओं में करीब 700 विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला है, जिसका लाभ 4 लाख से अधिक किसान बंधु ले चुके हैं। करीब 2500 कम्पनियों ने कृषि क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्यों का प्रदर्शन किया। इनमें बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी शामिल हैं। कृषि विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने भी किसानों का मार्गदर्शन करने का कार्य किया। प्रदर्शनियों का अवलोकन 50 लाख से अधिक किसान कर चुके हैं। विदर्भ क्षेत्र में जैविक कृषि, कपास उत्पादन, मत्स्य-पालन, बाँस उत्पादन, बागवानी के कार्यों से किसानों को जोड़ा गया है।   मुख्यमंत्री चौहान और केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने एग्रो विजन-2022 की डायरेक्ट्री का विमोचन किया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, किसान संगठनों के सदस्य और नागरिक उपस्थित थे। म.प्र. में मुख्यमंत्री चौहान ने कृषि क्षेत्र के विकास में दिया विशेष ध्यान – केन्द्रीय मंत्री गडकरी मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर में निरंतर हुई वृद्धि अन्न प्रदाता के साथ ऊर्जा प्रदाता भी बन रहा है किसान

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 MadhyaBharat  26 November 2022

पेसा अधिनियम जनजातीय भाई-बहनों की जिन्दगी बदलने की सामाजिक क्रांति : मुख्यमंत्री

  मुख्यमंत्री ने पेसा जागरूकता के लिए नियुक्त मास्टर ट्रेनर्स से की वर्चुअल चर्चा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पेसा अधिनियम जनजातीय भाई-बहनों की जिन्दगी बदलने की सामाजिक क्रान्ति है। जनता की शक्तियाँ जनता तक पहुँचाने, पंचायती राज को और सशक्त बनाने और निर्णय लेने की ताकत गाँव और गरीब के हाथों में देने का है। इसलिए अधिनियम की जानकारी देने के लिए मास्टर ट्रेनर्स के रूप में आपको चुना गया है। पेसा अधिनियम को भली-भांति समझ कर इसके प्रावधान लोगों तक पहुँचाने का कार्य करें, जिससे उनके मन में किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे। मुख्यमंत्री चौहान आज निवास कार्यालय से पेसा अधिनियम की जागरूकता के लिए बनाए गए मास्टर ट्रेनर्स से वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा कर रहे थे। अपर मुख्य सचिव श्री अशोक शाह सहित 20 जिलों एवं 89 विकासखंडों के अधिकारी वर्चुअली शामिल थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा कोई कर्मकांड नहीं एक सामाजिक क्रांति है। अंतर आत्मा से जनजातीय भाई-बहनों को उनके अधिकारों को देने का क्रांतिकारी प्रयास है। इसको मैं जगह-जगह जाकर बारीकी से समझा रहा हूँ। आप भी गंभीरता से पेसा अधिनियम को समझ कर जनता को जागरूक करें। मैं पेसा अधिनियम को जमीन पर लागू करवा कर ही चैन की साँस लूंगा। मुझे विश्वास है कि मास्टर ट्रेनर्स जनता जनार्दन को पेसा अधिनियम के बारे में ठीक से समझाएंगे। जनता को उसके अधिकारों को देना हमारी प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मास्टर ट्रेनर्स पहले स्वयं पेसा अधिनियम को भली-भाँति समझ लें, जिससे अन्य प्रशिक्षकों को आप ठीक से समझा सकें। प्रशिक्षक आम समझाने का कार्य करेंगे। अधिनियम की सरल, क्षेत्रीय और ग्रामीणों की भाषा में जनता को जानकारी दी जाए। यह अधिनियम लोगों के दिल और दिमाग पर उतर जाए, ऐसा प्रयास करें। अधिनियम के संबंध में लोगों के हर तरह के भ्रम दूर करें। प्रारंभ में यह अधिनियम प्रदेश के 89 विकासखंडों में क्रियान्वित किया जा रहा है। आगे चलकर इस अधिनियम को अन्य विकासखंडों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जब समाज में बड़ा बदलाव करने का अवसर मिलता है। इस अवसर का मास्टर्स ट्रेनर्स भली-भाँति निर्वहन करें। जनता को सशक्त बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ें। जनता भी अपने अधिकारों का प्रयोग कर अपने आपको सशक्त बनाने का प्रयास करे।

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 MadhyaBharat  26 November 2022

पेसा एक्ट लागू करने हो गई है ग्राम सभा की शुरूआत : मुख्यमंत्री चौहान

  आज मैं भाषण देने नहीं आपको पेसा एक्ट पढ़ाने आया हूँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पेसा एक्ट एक सामाजिक क्रांति है, इससे जनजातीय विकासखण्डों में ग्राम सभाओं को अधिकार सम्पन्न बनाया जा रहा है। गत 15 नवंबर से लागू इस एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये अब सशक्त रूप से ग्राम सभाओं की शुरूआत हो चुकी है। ग्रामीणजन अपने अधिकारों का उपयोग कर ग्राम को आत्म-निर्भर बनाये और ग्रामीणों को आर्थिक संबल प्रदान करें। मुख्यमंत्री चौहान आज डिंडौरी जिले में पेसा एक्ट की जागरूकता के लिये ग्राम शहपुरा और गुरैया में ग्राम सभा में शामिल होकर ग्रामीणों से रू-ब-रू हुए। मुख्यमंत्री चौहान ने ग्रामीणों से कहा कि मैं आज भाषण देने नहीं, आपको पैसा एक्ट पढ़ाने आया हूँ। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर जनजातीय समुदाय के लिये ऐतिहासिक निर्णय लिया जाकर पेसा एक्ट लागू किया गया है। इसमें प्रत्येक जनजातीय ग्राम की अलग से ग्राम सभा होगी और उसे अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा। इसके लिये जरूरी है कि ग्राम के लोग पेसा एक्ट की भावना को समझे और उसे अपने ग्राम हित में लागू करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पेसा एक्ट लागू कर यह सुनिश्चित किया है कि अब सरकार भोपाल से नहीं चौपाल से चलेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट किसी के खिलाफ नहीं है, इससे किसी का कोई नुकसान नहीं है, सभी का फायदा ही फायदा है। आज मैं आपको जल, जंगल और जमीन का अधिकार देने आया हूँ। अब हर साल ग्राम की ग्राम सभा में पटवारी और फारेस्ट गार्ड नक्शा, खसरे की नकल, बी-1 की कापी लेकर आयेंगे और ग्रामवासियों को पढ़ कर सुनायेंगे। गड़बड़ी पाई गई तो ग्राम सभा सुधार करेगी। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अब किस सरकारी कार्य, योजना के लिये जमीन देना है, यह ग्राम सभा तय करेगी। ग्राम की भूमि का बिना ग्राम सभा की अनुमति के भू-अर्जन नहीं किया जा सकेगा। किसी जनजातीय भाई की जमीन पर कोई व्यक्ति बहला-फुसला कर, शादी के माध्यम से अथवा धर्मांतरण द्वारा कब्जा नहीं कर पायेगा। गाँव की गिट्टी, पत्थर, रेती आदि की खदानों की नीलामी होनी है या नहीं यह ग्राम सभा तय करेगी। खदान पहले जनजातीय सोसायटी को, फिर ग्राम की बहन को और फिर पुरूष को प्राथमिकता के आधार पर दी जायेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गाँव के तालाबों का प्रबंधन, उनमें मछली पालन, सिंघाड़ा उत्पादन आदि का अधिकार ग्राम सभा का होगा और प्राप्त आमदनी पर ग्रामवासियों का हक होगा। सौ एकड़ तक के सिंचाई तालाब और बाँधों का प्रबंधन ग्राम सभा के पास होगा। हर्र, बहेड़ा, ऑवला, गोंद, करंज आदि वनोपज संग्रह और बेचने का अधिकार ग्राम सभा को होगा। वह इनके मूल्य भी निर्धारित कर सकेगी। वनोपज की आमदनी भी ग्राम सभा के पास आयेगी। जनजातीय भाइयों को अब तेन्दूपत्ता तोड़ने और बेचने का अधिकार होगा। साथ ही आमदनी भी उनके खाते में जायेगी। आगामी 15 दिसम्बर तक ग्राम सभा तय कर ले कि वह इस वर्ष तेन्दूपत्ता संग्रहण करेगी अथवा नहीं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि ग्राम पंचायत में एक वर्ष में जो पैसा आता है उससे क्या किया जाये, यह ग्राम सभा तय करेगी। यदि गाँव के मजदूरों को कोई दूसरे स्थान पर ले जाता है तो उसे ग्राम सभा से इसकी अनुमति लेना होगी। बाहरी व्यक्ति गाँव में आता है तो उसे भी ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी। मनरेगा के कार्यों की मॉनिटरिंग ग्राम सभा करेगी। कार्य का मस्टर रोल भी ग्राम सभा में रखा जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गाँव में नई दारू दुकान खुले या नहीं, इसका फैसला ग्राम सभा करेगी। यदि दारू की दुकान, अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल के पास है तो ग्राम सभा उसे बंद करने अथवा दूसरी जगह ले जाने की अनुशंसा कर सकेगी। ग्राम सभा किसी दिन को ड्राय-डे घोषित करने के लिये कलेक्टर को अनुशंसा कर सकेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोई निजी साहूकार, ब्याज देने वाला व्यक्ति लायसेंस लेकर और सरकार द्वारा तय ब्याज दर पर ही ग्रामीणों को ऋण दे सकेगा। अवैध रूप से दिये गये ऋण शून्य हो जायेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गाँव के छोटे-छोटे झगड़ों के निराकरण के लिये ग्राम शांति एवं विवाद निवारण समिति गठित की जायेगी, जो उनका निपटारा करेगी। जिन मामलों में एफआईआर दर्ज होती है, उसकी जानकारी पुलिस द्वारा ग्राम सभा को देना होगी। बाजारों, मेलों, त्योहारों का प्रबंधन ग्राम सभा कर सकेगी। आँगनवाड़ी, छात्रावास, स्कूल, आश्रम शालाएँ, अस्पताल के प्रबंधन का अधिकार भी ग्राम सभाओं के पास होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने ग्रामवासियों की माँग पर ग्राम शहपुरा में मुख्य मार्ग पर डिवाइडर निर्माण, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का सिविल अस्पताल में उन्नयन कर महिला डॉक्टर की पद-स्थापना, मार्ग निर्माण, हर घर पाइप लाईन और नल से जल आदि की घोषणा की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शहपुरा में "मामा की पाती मुखिया के नाम" और सिकल सेल प्रभावितों के लिये जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई "जीवनदायिनी प्रसाद" का विमोचन किया। केन्द्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी संबोधित किया। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के मुखिया एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे। आँगनवाड़ी, स्कूल और अस्पताल के संचालन पर निगाह रखेंगी ग्राम सभाएँ गाँव की चौपाल से चलेगी अब सरकार मुख्यमंत्री, डिंडौरी जिले के शहपुरा और गुरैया की ग्राम सभा में हुए शामिल

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 MadhyaBharat  26 November 2022

मां जगदंबा की आरती कर लिया गौमाता की सेवा का संकल्प

  जागृत हिंदू मंच द्वारा शाहजहांनबाद मां दुर्गा मंदिर में महाआरती का आयोजन    भोपाल। शाहजहांनाबाद स्थित मां जमदंबा मंदिर में जागृत हिंदू मंच द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंच द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं को गौमाता की सेवा का संकल्प दिलाया गया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. दुर्गेश केसवानी ने महाआरती के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को गौमाता की सेवा का संकल्प दिलाया। केसवानी ने कहा कि गौमाता में 33 करोड़ देवी देवता वास करते हैं। ऐसे में गौमाता की पूजा अर्चना से परिवार में सुख और समृद्धि आती है। महाआरती के दौरान मंच के संयोजन सुनील जैन, बसंत गनोते,अनिल मोटवानी,राजा भैया सेन,पपू रजक,राजेश जोधवानी,सुनील कुमार,शर्यान्श जैन,मुकेश कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।  गौमाता की सुरक्षा के लिए लगाया रेडियम :  मंच के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर बताया कि मंच द्वारा लंबे समय से गौमाता के सींगों पर रेडियम लगाने का काम किया जा रहा है। इससे अंधेरे में वाहन की रोशनी से गौमाता की वास्तविक स्थिति का पता लगता है। इसके अलावा शहर की विभिन्न गौशालाओं में नियमित रूप से गौमाता की सेवा भी की जाती है। उन्होंने गौपालकों से भी आह्वान किया की। जब गौमाता दूध देना छोड़ दे तो उसे आवारा न छोड़ें। उनकी सदैव सेवा करते रहें।

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 MadhyaBharat  25 November 2022

खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 में महाविद्यालयीन विद्यार्थी बनेंगे वॉलेंटियर

बहु-भाषी विद्यार्थियों को प्राथमिकता प्रदेश में खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 के 5वें संस्करण का आयोजन 31 जनवरी से 11 फरवरी 2023 तक 8 अलग-अलग जिलों में किया जा रहा है। इस खेल महाकुंभ में महाविद्यालयीन विद्यार्थी वॉलेंटियर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके लिए पंजीयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। अंतिम तिथि 30 नवंबर निर्धारित है।खेलों इंडिया यूथ गेम्स भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मंडला, बालाघाट, जबलपुर और खरगौन में होंगे। इसमें शासकीय महाविद्यालयों के एनसीसी एवं एनएसएस के विद्यार्थी वॉलेंटियर के रूप में काम करेंगे। खेलो इंडिया में‍विभिन्न राज्यों के लगभग 6 हजार से ज्यादा खिलाड़ी भाग ले रहे है। विभिन्न प्रांतों से आए इन खिलाड़ियों की सुविधा के लिए उच्च शिक्षा विभाग बहु-भाषी विद्यार्थियों को वॉलेंटियर के लिए प्राथमिकता देगा। इसके अतिरिक्त शासकीय महाविद्यालयों के खेलों से जुडे विद्यार्थी भी अपना पंजीयन करा सकते है। खेलों इंडिया गेम्स की ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया के बाद 1 से 5 दिसम्बर तक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर पंजीकृत विद्यार्थियों के सत्यापन और चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। 15 दिसम्बर से इन चयनित वालिंटियर्स को विशेषज्ञों द्वारा एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जायेगा। चयनित वॉलेंटियर्स खेल आयोजन के दौरान जिलों में निर्धारित स्थान पर सुबह 7 से शाम 7 बजे तक उपस्थित रहेंगे।

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 MadhyaBharat  25 November 2022

वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता में लेखा परीक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण:राज्यपाल

  लेखा परीक्षा सप्ताह समापन समारोह को राज्यपाल पटेल ने किया संबोधित राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि लोक धन के अपव्यय को रोकने संबंधी व्यवस्थाओं के अनुपालन में और सभी प्रकार के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता सुनिश्चित कराने में लेखा परीक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेखा परीक्षा विभाग का 160 वर्षों का समृद्ध और गौरवशाली इतिहास है। राज्यपाल पटेल ने शुक्रवार को लेखा परीक्षा सप्ताह के समापन समारोह को वर्चुअली संबोधित किया। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने लेखा परीक्षा विभाग के गौरवशाली इतिहास के सम्मान में गत वर्ष से 16 नवम्बर को लेखा परीक्षा दिवस के रूप में मनाने की पहल की है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषता विधायिका सहित उसके सभी प्रमुख अंगों में सामंजस्य बनाए रखना है। लेखा परीक्षा विभाग द्वारा संसद और राज्य विधान सभाओं के लिए सरकार और अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण की सार्वजनिक धन के व्यय सम्बन्धी जवाबदारी तय करने और इस सम्बन्ध में जानकारी जन-साधारण को उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दायित्व का निर्वहन किया जाता है। वास्तव में लेखा परीक्षा विधायिका के प्रति प्रशासन की जवाबदेही लागू करने का उपकरण होकर वित्तीय प्रशासन पर विधायी नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऑडिट के कठोर मानकों का पालन अधिक सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, जिससे ऑडिट के दौरान नुकसान के अनुमानों अथवा बाहरी आंकड़ों के कारण ऑडिट की अखंडता प्रभावित नहीं हो। राज्यपाल पटेल ने कहा कि लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा अपने दायित्वों का सफल निर्वहन, संवैधानिक कर्त्तव्यों और सौंपी गयी जिम्मेदारियों को हमेशा सचेत रहते हुए पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संसाधनों का उपयोग गरीबों और ज़रूरतमंदों के हित में प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने में लेखा परीक्षा के अधिकारी-कर्मचारियों की महती भूमिका है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी सबसे निर्धन लोगों की सेवा करने और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए पारस्परिक सहानुभूति से भरपूर सोच के साथ कार्य करें। उन्होंने लेखा परीक्षा के अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उनका सहयोग विकास की वर्तमान गति को और तेज करने, समाज के वंचित वर्गों के कल्याण और राष्ट्र-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान होगा। प्रधान महालेखाकार गीताली तारे ने स्वागत भाषण दिया। प्रधान महालेखाकार  डी. साहू ने आभार माना।

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 MadhyaBharat  25 November 2022

मध्यप्रदेश में भी लगाएंगे बहुआयामी कृषि प्रदर्शनी, लागू करेंगे नवाचार – मुख्यमंत्री

  मुख्यमंत्री चौहान ने नागपुर में किया एग्रो विजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए मध्यप्रदेश में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। गेहूँ उत्पादन में देश में अव्वल रहते हुए मध्यप्रदेश में किसानों को सभी तरह के उत्पादन का पूरा लाभ देने का कार्य किया। प्रदेश की कृषि विकास दर देश में सर्वाधिक है। इसके बावजूद अन्य प्रदेशों में किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी उन्हें लागू करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इस सिलसिले में केन्द्रीय मंत्री गडकरी की पहल पर विदर्भ में लोकप्रिय हुई बहुआयामी एग्रो विजन कृषि प्रदर्शनी और अन्य नवाचारों को अपनाने का कार्य भी किया जाएगा। मध्यप्रदेश में एग्रो विजन का कार्यक्रम किसानों के हित में किए जाने की आवश्यक पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान आज नागपुर में केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के संयोजन में हुए एग्रो विजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रदर्शनी के साथ ही कार्यशाला और परिसंवाद के कार्यक्रम 28 नवंबर तक चलेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने दीप जला कर एग्रो विजन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए 5 सूत्री रणनीति पर अमल किया गया है। इसमें उत्पादन वृद्धि, लागत कम करने, फसल का उचित दाम देने, क्षति पर आवश्यक भरपाई और तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में किसानों को प्राकृतिक आपदा और अन्य कारणों से फसलों की क्षति पर पर्याप्त राहत राशि देने की व्यवस्था की गई है। किसानों को फसल बीमा की राशि दिलवाने के लिए निरंतर समीक्षा की गई। परिणामस्वरूप किसानों को राहत मिली। इसी तरह कृषि कार्य में रिमोट सेंसिंग और तकनीक के भरपूर उपयोग से किसानों को लाभ देने का कार्य किया गया। मध्यप्रदेश में कृषि विविधीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गेहूँ, धान, चना और दालों के अलावा फल और फूलों की खेती के नवाचार भी हो रहे हैं। प्रदेश में बाँस उत्पादन से किसानों को आय वृद्धि का लाभ मिला है। सबसे महत्वपूर्ण बात किसानों को जीरो प्रतिशत पर कर्ज देकर ब्याज से राहत दिलवाने की व्यवस्था की गई। मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में सिंचाई प्रतिशत को कई गुना बढ़ा कर किसानों को अधिक उत्पादन की सुविधाएँ पहुँचाते हुए उनकी आमदनी बढ़ाने में सहयोग किया गया। किसान को शिक्षित कर आर्थिक लाभ दिलवाने, सभी तरह के अनाजों की खरीद की उचित व्यवस्था कर किसानों की जिंदगी बदलने का कार्य किया गया। मध्यप्रदेश में सोलर पंप का उपयोग बढ़ रहा है। इस पर केन्द्र और राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से चलित पम्पों का इस्तेमाल करेंगे। केन्द्रीय मंत्री गडकरी के मार्गदर्शन में इथेनाल के प्लांट भी लगाए जाएंगे। इथेनाल से निर्मित फ्यूल से पेट्रोल और डीजल के उपयोग से हो रही विदेशी मुद्रा का खर्च बचाने का प्रयास करते हुए पर्यावरण-संरक्षण का कार्य भी करेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि विकास दर में लगातार वृद्धि के विशेष प्रयास किये गये। प्रदेश की कृषि विकास दर को उच्चतम स्थिति में रखने का प्रयास रहा है। वर्तमान में यह 18 प्रतिशत है, जो अन्य प्रांतों से अधिक है। एग्रो विजन से किसानों को मार्गदर्शन देने का कार्य नितिन गडकरी कर रहे हैं। ऐसे कार्य मध्यप्रदेश सीखना चाहता है। अनुकरणीय और श्रेष्ठ कार्य सीखना ही चाहिए। मध्यप्रदेश में काफी कुछ किया गया है, लेकिन जिस ढंग से तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की प्रेरणा देने का कार्य गडकरी कर रहे हैं, वो सराहनीय है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की भी यही मंशा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित उनके अनेक नवाचार प्रेरणा का कार्य करते हैं। नितिन जी ने आज भी अनेक नवाचारों की जानकारी दी है। विदर्भ ही नहीं संपूर्ण भारत में एग्रो विजन किसानों को शिक्षित करने और मार्गदर्शन देने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एग्रो विजन के सुझावों को मध्यप्रदेश की धरती पर लागू करने का कार्य किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर निरंतर बढ़ी है। मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में और भी बेहतर परिणाम देगा। उन्होंने कहा किऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों की उपयोगिता और उनके लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान अन्न प्रदाता होने के साथ ही ऊर्जा प्रदाता भी बन रहा है। अद्यतन तकनीकों का उपयोग किसानों की आय को बढ़ाने में मददगार बन रहा है। विदर्भ के किसानों को कृषि क्षेत्र की नई तकनीक और नए व्यवसाय से अवगत करवाने, उनकी आय में वृद्धि करवाने, खेती को अधिक लाभदायक बना कर किसान को सुखी, संपन्न और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से हर साल नागपुर में एग्रो विजन किया जाता है।  गडकरी ने बताया कि एग्रो विजन का यह 13वां वर्ष है। इसमें किसान, कृषि विशेषज्ञ और कृषि प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। चार दिन के इस आयोजन में विभिन्न विषय पर कार्यशाला, राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी, सेमीनार एवं संगोष्ठियों के महत्वपूर्ण सत्र होंगे। खाद्य, चारा और ईंधन पर केन्द्रित भविष्य की कृषि पर विचार करते हुए इस क्षेत्र में अनुसंधान से एकीकृत प्रौद्योगिकी के विकास पर व्यापक चर्चा करना एग्रो विजन का मुख्य उद्देश्य है।   50 लाख से अधिक किसान देख चुके हैं कृषि प्रदर्शनी   एग्रो विजन में प्रदर्शनियों के जरिये से किसानों को नवीनतम तकनीक की जानकारी दी जाती है। लगभग 400 कार्यशालाओं में करीब 700 विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिला है, जिसका लाभ 4 लाख से अधिक किसान बंधु ले चुके हैं। करीब 2500 कम्पनियों ने कृषि क्षेत्र के उत्कृष्ट कार्यों का प्रदर्शन किया। इनमें बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ भी शामिल हैं। कृषि विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने भी किसानों का मार्गदर्शन करने का कार्य किया। प्रदर्शनियों का अवलोकन 50 लाख से अधिक किसान कर चुके हैं। विदर्भ क्षेत्र में जैविक कृषि, कपास उत्पादन, मत्स्य-पालन, बाँस उत्पादन, बागवानी के कार्यों से किसानों को जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री चौहान और केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने एग्रो विजन-2022 की डायरेक्ट्री का विमोचन किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, किसान संगठनों के सदस्य और नागरिक उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  25 November 2022

अलीराजपुर एवं झाबुआ में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी

  गुजरात सामान्य निर्वाचन 2022 में म.प्र. के सीमावर्ती जिलों में निर्देश  गुजरात विधानसभा सामान्य निर्वाचन 2022 के लिए सीमावर्ती जिला अलीराजपुर एवं झाबुआ में शराब बिक्री पर प्रतिबंध एवं शुष्क दिवस घोषित किए जाने के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग ने आदेश जारी किया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि गुजरात राज्य की सीमा से लगे प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चरणानुसार मद्यनिषेध संबंधी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। मतदान क्षेत्र में किसी निर्वाचन के लिए मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय के साथ समाप्त होने वाली 48 घंटे की अवधि के दौरान उस मतदान क्षेत्र के भीतर किसी होटल, आहार गृह, मधुशाला में अथवा किसी अन्य सार्वजनिक तथा निजी स्थान में कोई भी स्पिरिटयुक्त, किण्वित या मादक लिकर या वैसी ही प्रकृति का अन्य पदार्थ न विक्रय किया जाएगा न दिया जाएगा और न वितरित किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति जो उपबंधों का उल्लंघन करेगा उसे 6 माह का कारावास या 2 हजार रुपये जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा।   जिला निर्वाचन अधिकारियों को इन बिंदुओं का पालन कराना होगा   गुजरात राज्य के सीमावर्ती जिलों की सीमा से 3 किलोमीटर की दूरी तक मतदान के समाप्त होने के निर्धारित समय से 48 घंटे पूर्व से व मतगणना तिथि को क्षेत्र की शराब की दुकानें बंद रखी जाएगी तथा शराब बिक्री पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाएगा। साथ ही मतदान क्षेत्र में शराब के परिवहन की संभावना न रहे, ऐसे प्रयास किए जाएंगे।   मदिरा की दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट, क्लब और अन्य सेलिंग प्वाइंट/सर्विस प्वाइंट आदि में शुष्क दिवस के आदेशों में उल्लेख अनुसार दिनांकों में किसी को भी शराब बिक्री एवं सेवा की अनुमति नहीं होगी।   गैर मालिकाना क्लब, होटल, रेस्टोरेंट आदि तथा ऐसे होटल जिनके पास विभिन्न श्रेणी की मदिरा प्राप्त करने तथा प्रदाय करने के लाइसेंस उपलब्ध है, इन्हें भी शुष्क दिवस के आदेशानुसार शराब बिक्री/सेवा की अनुमति नहीं होगी।   निर्देश में उल्लेख है कि उक्त अवधि के दौरान व्यक्तियों द्वारा शराब के भंडारण में कटौती की जाए तथा बिना लाइसेंस परिसर में शराब के भंडारण पर आबकारी कानून में प्रावधानित प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए। उल्लेखनीय है कि गुजरात राज्य में कुल 182 सीटों पर 2 चरण में सामान्य निर्वाचन 2022 कार्यक्रम जारी किया गया है। एक और 5 दिसंबर को मतदान एवं 8 दिसंबर को मतगणना होनी है।

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 MadhyaBharat  24 November 2022

 ब्रांडिंग का उम्दा अवसर बने प्रवासी भारतीय दिवस और जीआईएस

प्रवासी भारतीय दिवस और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रवासी भारतीय दिवस और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने वाले अतिथियों का स्वागत हम पलक-पावड़े बिछा कर करेंगे। दोनों आयोजन मध्यप्रदेश और इंदौर की ब्रांडिंग के उम्दा अवसर बनेंगे। हम परिवार-भाव से सभी का स्वागत और अभिनन्दन करेंगे। मुख्यमंत्री  चौहान आज इंदौर में प्रवासी भारतीय दिवस और जीआईएस के आयोजनों की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। आयुक्त नगर निगम  प्रतिभा पाल ने की गई व्यवस्थाओं और योजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि समूचे आयोजन में इंदौर के नागरिकों की सक्रिय सहभागिता और जन-प्रतिनिधियों के समन्वय से हम इसे एक अविस्मरणीय आयोजन बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर मध्यप्रदेश की विशेषताओं को प्रमुखता से उजागर किया जाये। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष  सुमित्रा महाजन ने स्मारिका के प्रकाशन का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि "एक जिला-एक उत्पाद" में चयनित उत्पादों का गिफ़्ट पैक भी अतिथियों को दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की प्रमुख विशेषताओं माँ नर्मदा और यहाँ की पुरातन विरासत का प्रदर्शन भी किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री चौहान ने इंदौर के आस-पास के पर्यटन-स्थलों के पहुँच मार्ग की भी जानकारी ली और उन्हें समय रहते पूरी तरह दुरूस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि होम-स्टे के लिए प्रस्तावित घरों को प्रशासन की टीम जाकर देख ले और भली भाँति तस्दीक कर ले कि वे अतिथियों के लिए उपयुक्त हों। 

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 MadhyaBharat  24 November 2022

अपनी संस्कृति परम्परा जीवन-मूल्य और आतिथ्य सत्कार से इंदौर दुनिया का दिल जीतेगा

  इंदौर बना दुनिया के सपनों का शहर - मुख्यमंत्री चौहान इंदौर में अगले जनवरी माह में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियाँ जारी है। इन्हीं तैयारियों के संबंध में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यापारिक, औद्योगिक, धार्मिक तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से दोनों आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिये संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक गौरवशाली आयोजन है और इसमें आप सब सक्रिय रूप से सहभागी बने। मुख्यमंत्री ] चौहान ने इंदौर में होने वाले आयोजनों की चर्चा करते हुए कहा कि यहाँ चार महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इनमें प्रवासी भारतीय सम्मेलन, इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 की बैठकें और खेलों इंडिया जैसे आयोजन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर को मेहमाननवाजी का बेहतर अवसर मिला है। इस दुर्लभ अवसर से चूके नहीं, व्यवस्थाओं और स्वागत-सत्कार से अतिथियों के दिलों में ऐसी यादगार छाप छोड़ें, जिसे यहाँ आने वाले लोग कभी नहीं भूल पायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इंदौर दुनिया का दिल जीतेगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि इंदौर अब सिर्फ मेरे ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सपनों का शहर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी इण्डोनेशिया में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि विश्व में देश का नाम बढ़ाने वाले अतिथि इंदौर में आ रहे हैं। हमारा फर्ज बनता है कि हम उनके स्वागत-सत्कार में कोई कमी नहीं रखें। मेहमान जो हमारा होता है, वह जान से प्यारा होता है। अतिथि देवो भव:, हमारी परम्परा है। इस परम्परा के अनुरूप आयोजन को अविस्मरणीय बनाये। मुख्यमंत्री  चौहान ने इंदौरवासियों से इन आयोजन में सक्रिय भागीदार बन कर दुनिया को इंदौर की संस्कृति, जीवन-मूल्य और परम्परा का बेहतर उदाहरण दिखायें। उन्होंने कहा कि प्रशासन, आयोजन से जुड़े विभिन्न संगठन, संस्थाएँ हर सप्ताह अपने-अपने स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करें। उन्होंने आग्रह किया कि अतिथियों को ग्रामीण परिवेश का अनुभव भी करायें। मुख्यमंत्री ने अतिथियों को घरों में ठहराने की पहल का स्वागत किया और कहा कि यह एक अभिनव पहल है। इस पहल से इंदौर दुनिया के सामने एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करेगा। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनके द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी दी। साथ ही आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिये सुझाव भी दिये। 

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 MadhyaBharat  24 November 2022

देश के लिए बलिदान होने वाले महान व्यक्तियों के बारे में रखें जानकारी - राज्यपाल

राज्यपाल ने नरसिंहपुर में ग्राम गोरखपुर में स्कूली बच्चों से किया आत्मीय संवाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नरसिहंपुर जिले के ग्राम गोरखपुर में शासकीय सीनियर जनजातीय बालक छात्रावास का अवलोकन किया और छात्रों से स्नेहपूर्वक संवाद किया। उन्होंने छात्रों को किताब और खेलकूद सामग्री वितरित की। राज्यपाल ने शयन कक्ष, लायब्रेरी और रसोई कक्ष का अवलोकन किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। छात्रों से सामान्य ज्ञान और स्थानीय जन-प्रतिनिधियों से संबंधित प्रश्न पूछे। राज्यपाल  पटेल ने लायब्रेरी में रखी "भारत रत्न" पुस्तक कक्षा 9 वीं के छात्रों से पढ़वाई और छात्रों से कहा कि लायब्रेरी में दिन में कम से कम आधा घंटा जरूर पढ़ना चाहिये। इससे ज्ञान बढ़ता है। छात्रों को अपने देश पर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले महान व्यक्तियों के बारे में जानकारी होनी चाहिये। राज्यपाल  पटेल ने ग्राम गोरखपुर में 60 लाख रूपये लागत के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अतिरिक्त कक्ष के नवीन भवन का लोकार्पण किया। राज्यपाल  पटेल ने स्कूली बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कक्षा 11 वीं के छात्र अनिल गौड़ एवं अंकित राय से स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे अपने माता-पिता का सदैव सम्मान करें और उनका ध्यान रखें। राज्यपाल पटेल ने नवीन स्कूल भवन में केमिस्ट्री एवं बायोलॉजी की प्रयोग शाला और अटल टिंकरिंग लैब का निरीक्षण किया और छात्र- छात्राओं से विभिन्न प्रयोगों के बारे में जानकारी ली। राज्यपाल  पटेल ने स्कूल परिसर में आम का पौधा रोपा। विधायक जालम सिंह पटैल, जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति काकोड़िया, अन्य जन-प्रतिनिधि ने भी पौध-रोपण किया।   राज्यपाल सिकल सेल एनीमिया स्वास्थ्य शिविर में लोगों से हुए रू-ब-रू राज्यपाल पटेल नरसिंहपुर जिले के ग्राम गोरखपुर में सिकल सेल एनीमिया स्वास्थ्य शिविर में लोगों से रू-ब-रू हुए और मरीजों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से स्नेहपूर्वक बात की और उनकी माताओं से जानकारी ली। राज्यपाल पटेल ने मोहल्लों में स्वास्थ्य शिविर लगाने और आयुष्मान भारत योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों को दिलाने के निर्देश दिये। राज्यपाल पटेल ने कहा है कि सिकल सेल रोग से पीड़ितों के बच्चों की भी जाँच कर उनका समुचित इलाज कराया जाए। उन्होंने बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल भेजने के लिये ग्रामीणों को प्रेरित किया।   दिव्यांगता और टी.बी. चेम्पियन प्रमाण-पत्र वितरित किए गए राज्यपाल पटेल ने यश मेहरा को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और गंगोत्री बाई एवं रामप्यारी ठाकुर को टीबी चैम्पियन प्रमाण पत्र प्रदान किये। उन्होंने हितग्राही महिला को फूड बॉस्केट भी प्रदान किया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रोटीनयुक्त पोषण आहार और दवाइयाँ नियमित रूप से जरूर लें। उन्होंने प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में पोस्टर पर हस्ताक्षर किये।

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 MadhyaBharat  24 November 2022

किसान की सहमति के बिना जमीन नहीं ली जाएगी : मुख्यमंत्री चौहान

  किसानों की सुविधा के लिए लगेंगे राजस्व और विद्युत समस्या निराकरण शिविर मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री सम्मान किसान निधि और मुख्यमंत्री किसान-कल्याण योजना में उन किसानों के नाम भी जोड़े जाएंगे जो पात्र होते हुए भी किसी वजह से नाम नहीं जुड़वा सके। किसानों की राजस्व और विद्युत देयक संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए शिविर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार डिफाल्टर किसानों की ब्याज राशि की प्रतिपूर्ति करेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों के हित में अनेक घोषणाएँ की। किसानों द्वारा मुख्यमंत्री चौहान के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया। मुख्यमंत्री  चौहान आज भोपाल के मोतीलाल नेहरू विज्ञान महाविद्यालय के मैदान से किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों के प्रति मेरा प्रेम और श्रद्धा का भाव है। किसानों की जो भी जायज समस्याएँ हैं, उन्हें दूर करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रारंभ में किसानों के संगठन द्वारा मुख्यमंत्री चौहान को सुझाव-पत्र दिया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के अनेक किसान सम्मान निधि के पात्र हैं। यदि सूची में पात्र किसानों के नाम दर्ज नहीं हो सके हैं, तो उन्हें दर्ज कर 10 हजार रूपए वार्षिक सहायता राशि प्रदान करने का कार्य किया जाएगा।प्रदेश के किसान बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री सम्मान किसान निधि में 6 हजार और मुख्यमंत्री किसान-कल्याण योजना के 4 हजार मिला कर प्रति हितग्राही सालाना मिलने वाली 10 हजार रूपए की राशि से लाभान्वित हो रहे हैं। इस लाभ से वंचित लोगों के नाम प्राथमिकता से जोड़े जाएंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ की। इनमें नहरों की मरम्मत, मंडियों में किसानों के हित में अत्याधुनिक उपकरण स्थापित करने, बड़े तौल काँटे लगाने, राजस्व भूमि पर वर्षों से कृषि कार्य करते आ रहे किसानों के लिए पात्रतानुसार आवश्यक पट्टे प्रदान करने, विभिन्न योजनाओं के लिए सरकार द्वारा किसान की जमीन लिए जाने के फलस्वरूप नामांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की घोषणाएँ शामिल हैं। प्रारंभ में मुख्यमंत्री चौहान का स्वागत किया गया। मंच पर भारतीय किसान संघ मध्यप्रदेश के कई पदाधिकारी उपस्थित थे।   राज्य सरकार करेगी डिफाल्टर किसानों की ब्याज राशि की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों के हित में की घोषणाएँ मुख्यमंत्री चौहान का किसानों ने माना आभार मुख्यमंत्री  चौहान की अन्य प्रमुख घोषणाएँ किसान की सहमति से ही उसकी भूमिका का अधिग्रहण होगा। डिफाल्टर कृषक की कर्ज माफी का ब्याज भरने का कार्य सरकार करेगी। गन्ना किसानों का बकाया, मिल मालिकों से चर्चा कर वापस करवाने का कार्य किया जाएगा। जले ट्रांसफार्मर शीघ्र से शीघ्र बदलवाने का कार्य होगा। किसान पम्प योजना की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी।

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 MadhyaBharat  24 November 2022

युवाओं के लिये रोजगार सबसे बड़ी जरूरत : मुख्यमंत्री चौहान

पहली बार सरकारी और निजी क्षेत्र में हो रही हैं व्यापक स्तर पर भर्तियाँ एक लाख पदों पर नियुक्तियों के कार्य की हुई समीक्षा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि युवाओं को रोजगार आज की सबसे बड़ी जरूरत है। रोजगार सरकारी क्षेत्र में हो या निजी क्षेत्र में, योग्यतानुसार कार्य मिल जाए, यह बहुत आवश्यक है। सेवाओं में आने से युवाओं में स्वाभाविक रूप से उत्साह का संचार होता है। पर्याप्त अमले से संस्थानों और विभागों की कार्य-प्रणाली भी सहज और आसान होती है।  मुख्यमंत्री चौहान आज मंत्रालय में विभिन्न सरकारी विभागों में एक लाख पदों को भरने संबंधी समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रति माह रोजगार दिवस के फलस्वरूप बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है। औद्योगिक संस्थानों में स्थानीय युवाओं की सेवाएँ लेने को महत्व दिया जा रहा है। राज्य सरकार सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने दृढ़ संकल्पित है। इसी संकल्प की पूर्ति के लिए अभियान संचालित कर शासकीय विभागों में रिक्त पद भरे जा रहे हैं। लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  यशोधरा राजे सिंधिया, किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल, सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  उषा ठाकुर, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  ओ.पी. सखलेचा और पशुपालन मंत्री  प्रेम सिंह पटेल, मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन  विनोद कुमार ने प्रेजेंटेशन दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि शासकीय विभागों में अकेले गृह विभाग में ही 6 हजार आरक्षक पदों पर नियुक्ति देने की पहल हुई है। प्रयास यह है कि किसी एक दिन सभी को समारोह पूर्वक नियुक्ति-पत्र प्रदान किए जाएँ। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभागों के पदों को भरने की कार्रवाई के साथ ही राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों में भी पदों की पूर्ति के लिए कार्यवाही की जा रही है। उपस्थित मंत्रीगण ने रोजगार और स्व-रोजगार क्षेत्र में हो रहे कार्य को महत्वपूर्ण बताया।   अगस्त 2023 तक भर लिए जायेंगे 1 लाख 12 हजार पद   जानकारी दी गई कि 15 अगस्त से प्रारंभ हुए रिक्त पदों की पूर्ति के अभियान की कार्यवाही निरंतर 12 माह तक चलेगी। प्रदेश में 01 लाख 12 हजार 724 सरकारी रिक्त पदों को भरने के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। नवंबर माह में तेजी से कार्य हुआ है। लगभग 60 हजार पदों को भरने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। सभी विभाग इस कार्य में सक्रिय हैं। प्रथम श्रेणी के 1,271, द्वितीय श्रेणी के 20 हजार 728, तृतीय श्रेणी के 82 हजार 879 और चतुर्थ श्रेणी के 9091 पद रिक्त हैं। इन पदों की पूर्ति के लिए वित्त विभाग से अनुमति के बाद आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। गत 15 अगस्त से 31 अक्टूबर तक 36 हजार 235 पद विज्ञापित किए गए हैं। नवम्बर माह में 3 हजार 926 पद विज्ञापित किए गए हैं। इस माह के अंत तक करीब 19 हजार पद विज्ञापित होंगे। आठ विभागों में 1595 नियुक्तियाँ गत तीन माह में कर दी गई हैं। बीती तिमाही में जनजातीय कार्य विभाग में 722 और स्वास्थ्य विभाग में 852 नियुक्तियाँ की गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में 15 हजार 196 और जनजातीय कार्य विभाग में 15 हजार 618 पद विज्ञापित हुए हैं। सभी विभाग में लगातार नियुक्तियाँ हो रही हैं।   स्व-रोजगार प्रयासों पर भी हुई चर्चा   प्रदेश में स्व-रोजगार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी बैठक में चर्चा हुई। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रतिमाह तीन लाख लोगों को रोजगार अवसरों से जोड़ने के प्रयासों में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिमाह रोजगार दिवस का आयोजन हो रहा है। साथ ही नवीन निवेश के आने की रफ्तार भी बढ़ी है। यह पहली बार हुआ है कि मध्यप्रदेश में शासकीय और निजी क्षेत्र में इतने अधिक पद भरे जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में कई बड़े उद्योग आ रहे हैं। उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशक भी निरंतर आ रहे हैं।

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 MadhyaBharat  23 November 2022

शासकीय स्कूलों को प्रायवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जाएगा:मुख्यमंत्री चौहान

मुख्यमंत्री ने शासकीय स्कूलों को स्मार्ट बनाने सामग्री की वितरित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शासकीय स्कूलों स्मार्ट बनाने के लिए इंदौर में विधायक निधि का अभिनव उपयोग किया गया है। इससे शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा और बच्चों को तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासकीय स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए सीएम राईज स्कूल योजना प्रारंभ की गई है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को स्मार्ट बनाने के लिए दी गई सामग्री का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बच्चों में योग्यता और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आगे बढ़ने के लिए सिर्फ उन्हें सुविधाएँ एवं अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। राज्य शासन द्वारा सभी बच्चों को समान रूप से सुविधाएँ एवं अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री  चौहान ने बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पढ़ो-लिखो, खेलो और आगे बढ़ो। मुख्यमंत्री चौहान ने आज इंदौर के 13 उच्चतर माध्यमिक और 9 माध्यमिक स्कूलों को कम्प्यूटर, प्रिंटर, एलसीडी प्रोजेक्टर आदि वितरित किये। यह सामग्री विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा विधायक निधि से उपलब्ध कराई गई है। विधायक निधि से स्कूलों में फर्नीचर भी दिये गये हैं। इससे शासकीय स्कूलों के 28 हजार से अधिक विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री  चौहान द्वारा विधायक आकाश विजयवर्गीय की पहल पर जन-सहयोग से विधानसभा क्षेत्र क्रमांक इंदौर-तीन की 60 आँगनवाड़ियों में बच्चों को खेलने के लिए टेम्पोलिन जम्पर भी वितरित किए गए। विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधायक निधि से शासकीय स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जा रहा है। विधानसभा इंदौर-तीन के 56 स्कूलों को स्मार्ट बनाने तथा तकनीकी शिक्षा के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। आँगनवाड़ियों को टेम्पोलिन जम्पर भी दिए गए हैं।

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 MadhyaBharat  23 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान की उपस्थिति में 10 संस्थाओं के साथ हुआ एमओयू

मुख्यमंत्री चौहान ने इन्दौर में स्टार्टअप्स के लिए 15 दिवस में कार्यालय संचालन के दिए निर्देश युवा आगे बढ़े, प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग हेतु प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की विशेष उपस्थिति में इन्दौर में एमएसएमई एवं स्टार्ट अप्स को सशक्तिकरण प्रदान करने के लिए विभिन्न सेक्टर की 10 संस्थाओं से समझौता एमओयू हुए। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री  चौहान थे। एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश उन्नति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के ग्रामीण युवा भी स्टार्टअप के क्षेत्र आगे आ रहे हैं। प्रदेश सरकार इन युवा को हर संभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार दृढ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्वता के साथ युवाओं को स्टॉर्टअप के क्षेत्र में स्थापित करने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने आईडीए अध्यक्ष से स्टार्टअप को बल देने के लिए 15 दिवस के भीतर इन्दौर में सर्वसुविधायुक्त कार्यालय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने टैलेंट का प्रकटीकरण करें। स्टॉर्टअप को पूंजी से लेकर प्रशिक्षण और मेन पावर की उपलब्धता के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने युवा स्टार्टअप्स की समस्याओं का समाधान एक फोन और ईमेल पर करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।   इन संस्थाओं के साथ हुए एमओयू ओपन नेटवर्क फ़ॉर डिजिटल कॉमर्स ओएनडीसी, द ग्लोबल इंडस इंटरप्राइजेस, सिडबी स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, फिट्ट फेडरेशन फ़ॉर इनोवेशन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, एसोचैम, सीआईआई, पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, एम-1 एक्सचेंज, युवर स्टोरी के साथ एमओयू हुआ। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने कहा कि प्रदेश के युवा सशक्त उद्यमी बनाने तथा प्रदेश में कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। रोजगार दिवस एवं विभिन्न स्व-रोजगार योजनाओं से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाये जाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के व्यापक अवसरों की सुलभता के लिए आगामी 4 माह में प्रदेश के 42 जिलों में 100 से ज्यादा क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्रदेश सरकार युवा स्टॉटअप्स को बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज से सहयोग के प्रयास कर रही है। रोजगार दिवस के माध्यम से अभी तक प्रदेश में 14 लाख 73 हजार हितग्राहियों को स्व-रोजगार योजनाओं में ऋण प्रदान किये गए हैं।   मंत्री सखलेचा ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों से प्रदेश में बने अनुकूल वातावरण का लाभ उठाते हुए एक बेहतर इकोसिस्टम निर्मित किया जाना है। इसी तारतम्य में एमएसएमई तथा स्टार्टअप को सक्षम बनाने के लिए आज देश की अग्रणी संस्थाओं के साथ एमओयू निष्पादन का यह कार्यक्रम किया गया है। प्रथम सत्र में ओएनडीसी नेटवर्क पर संबंधित बाजार सहयोगियों, स्टार्टअप एवं एमएसएमई को शामिल करने एवं उसका लाभ की जानकारी देने के लिये कार्यशाला में परिचर्चा हुई। कार्यशाला में उद्यमियों की जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों ने समाधन किया। स्वागत उदबोधन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के सचिव श्री पी. नरहरि ने दिया।   एमओयू से एमएसएमई तथा स्टार्टअप हेतु अवसर बनेंगे आज हुए एमओयू से प्रदेश की एमएसएमई तथा स्टार्टअप को अनेक लाभ और सहयोग प्राप्त होंगे। मुख्य रूप से अकादमिक संस्थाओं एवं इनक्यूबेशन सेंटर के लिए क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण के हैंड होल्डिंग कार्यक्रम, विभिन्न सरकारी योजनाओं में वित्त पोषण के लिए आवेदन प्रक्रिया का मार्गदर्शन, विभाग के साथ इनोवेशन लैब/हब जैसी नई पहल स्थापित करने के लिए सहायता दी। स्टार्टअप्स को मार्केट लिंकेज और बिजनेस डेवलपमेंट के अवसर, टेक्नोलॉजी और कम्युनिटी डेवलपमेंट में सहायता, नीतिगत परामर्श में सहयोग, क्लस्टर विकास में सहयोग, स्टार्टअप के विशिष्ट आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न बैंकिंग समाधान, स्टार्टअप्स को विकास और विजिबिलिटी के लिए स्मार्ट बॉय प्लेटफार्म पर सूचीबद्ध करने में, ट्रेड्स प्लेटफार्म और अन्य आपूर्ति श्रंखला (सप्लाय चेन), वित्त समाधानों के बारे में जागरूकता, लघु उद्योगों और स्टार्टअप को विलंबित भुगतान से राहत का माध्यम, राज्य के स्टार्टअप्स की सफलता की कहानियों का प्रकाशन, यूएई में निवेश के अवसरों, व्यापार और वाणिज्य की प्रासंगिक जानकारी, बाजार तक पहुँच और स्टार्टअप्स को फंडिंग के लिए पिचिंग की सुविधा आदि लाभ और सहयोग मिलेंगे।

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 MadhyaBharat  23 November 2022

इंदौर को प्रदेश का टूरिज्म हब बनाया जायेगा : मुख्यमंत्री चौहान

  आकाशमार्ग का भी इस्तेमाल किया जाएगा आवागमन के लिए 1 लाख 13 हजार पदों की भर्तियाँ शीघ्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इंदौर को प्रदेश का टूरिज्म हब बनाया जाएगा। इंदौर के एक तरफ उज्जैन में श्री महाकाल लोक बन चुका है, दूसरी और ओंकारेश्वर में अद्वैत संस्थान का निर्माण किया जाएगा। इंदौर क्षेत्र से लगा मांडू और महेश्वर भी है। इन सब को मिला कर इंदौर में एक अच्छा टूरिज्म हब विकसित किया जा सकता है। साथ ही इंदौर में सड़कों के बोझ को कम करने के लिए आकाश मार्ग का भी इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंगलवार को इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा 47 करोड़ 27 लाख रूपये की लागत वाले क्रांतिसूर्य जननायक टंटया मामा भील चौराहा (भंवरकुआ) के फ्लाय ओव्हर और 41 करोड़ 18 लाख रूपये की लागत के खजराना स्थित चौराहे पर बनने वाले फ्लाय ओव्हर का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में 1 लाख 13 हजार शासकीय पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ हो गई है। इसमें पीएससी के पद भी शामिल है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी हिंदी में होगी। अंग्रेजी के बोझ को भविष्य में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। इसके लिये हिन्दी में पाठ्यक्रम भी प्रारंभ कर दिये गये हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राऊ में जल संसाधन के तालाब को नगर परिषद राऊ को दिया जाएगा। गांधीनगर और फूटी कोठी में फ्लाय ओव्हर और इंदौर में एमआर-3 भी बनाया जायेगा। इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  जयपाल सिंह चावड़ा ने कहा कि इंदौर का आज विश्व में नाम है तो इसके पीछे मुख़्यमंत्री चौहान की कल्पना और उनकी दूरदृष्टि से ही सम्भव हो पाया है।  

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 MadhyaBharat  23 November 2022

अपनी संस्कृति, परम्परा, जीवन-मूल्य और आतिथ्य सत्कार से इंदौर दुनिया का दिल जीतेगा

इंदौर बना दुनिया के सपनों का शहर - मुख्यमंत्री चौहान इंदौर में अगले जनवरी माह में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियाँ जारी है। इन्हीं तैयारियों के संबंध में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यापारिक, औद्योगिक, धार्मिक तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से दोनों आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिये संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक गौरवशाली आयोजन है और इसमें आप सब सक्रिय रूप से सहभागी बने। मुख्यमंत्री  चौहान ने इंदौर में होने वाले आयोजनों की चर्चा करते हुए कहा कि यहाँ चार महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इनमें प्रवासी भारतीय सम्मेलन, इन्वेस्टर्स समिट, जी-20 की बैठकें और खेलों इंडिया जैसे आयोजन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर को मेहमाननवाजी का बेहतर अवसर मिला है। इस दुर्लभ अवसर से चूके नहीं, व्यवस्थाओं और स्वागत-सत्कार से अतिथियों के दिलों में ऐसी यादगार छाप छोड़ें, जिसे यहाँ आने वाले लोग कभी नहीं भूल पायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि इंदौर दुनिया का दिल जीतेगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि इंदौर अब सिर्फ मेरे ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सपनों का शहर है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भी इण्डोनेशिया में देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि विश्व में देश का नाम बढ़ाने वाले अतिथि इंदौर में आ रहे हैं। हमारा फर्ज बनता है कि हम उनके स्वागत-सत्कार में कोई कमी नहीं रखें। मेहमान जो हमारा होता है, वह जान से प्यारा होता है। अतिथि देवो भव:, हमारी परम्परा है। इस परम्परा के अनुरूप आयोजन को अविस्मरणीय बनाये। मुख्यमंत्री चौहान ने इंदौरवासियों से इन आयोजन में सक्रिय भागीदार बन कर दुनिया को इंदौर की संस्कृति, जीवन-मूल्य और परम्परा का बेहतर उदाहरण दिखायें। उन्होंने कहा कि प्रशासन, आयोजन से जुड़े विभिन्न संगठन, संस्थाएँ हर सप्ताह अपने-अपने स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करें। उन्होंने आग्रह किया कि अतिथियों को ग्रामीण परिवेश का अनुभव भी करायें। मुख्यमंत्री ने अतिथियों को घरों में ठहराने की पहल का स्वागत किया और कहा कि यह एक अभिनव पहल है। इस पहल से इंदौर दुनिया के सामने एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करेगा। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनके द्वारा की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी दी। साथ ही आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिये सुझाव भी दिये। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री  उषा ठाकुर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  ओमप्रकाश सकलेचा, सांसद  शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायकगण सहित अन्य जन-प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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 MadhyaBharat  23 November 2022

दुर्गेश : राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कम और सर्कस ज्यादा

  कांग्रेस को ओर कमलनाथ को देश के हिंदुओं से माफी मांगना चाहिये आष्टा । मप्र भाजपा के प्रवक्ता दुर्गेश केशवानी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कहा ये यात्रा कम और सर्कस ज्यादा नजर आ रहा है,कमलनाथ द्वारा जन्मदिन पर मन्दिर की आकृति का केक काटने से हिंदुओ की आस्था आहत हुई,माफी मांगे कमलनाथ भाजपा द्वारा ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में विषय के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने आष्टा आये  मप्र भाजपा के प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केशवानी ने आज चर्चा में राहुल गांधी की भारत जोडो यात्रा को ले कर कहा की ये भारत जोड़ो यात्रा कम सर्कस ज्यादा नजर आ रही है। आपने देखा चल रही यात्रा के दौरान वे हंटर मारते, कभी कुछ करते दिखे मतलब ये यात्रा कम सर्कस ज्यादा दिख रही है। केशवानी ने कहा हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री  कमलनाथ द्वारा अपने जन्मदिन पर हनुमान जी के चित्र लगे,मन्दिर की आकृति के केक को काटा इससे हिंदुओ की धार्मिक भावना आहत हुई है। आखिर कमलनाथ जी को हिन्दू धर्म से इतनी घृणा क्यो है। उक्त केक को जिस प्रकार उन्होंने काटा उससे एक बार फिर मुगल आक्रांताओं की याद दिला दी। भगवान श्रीराम,हनुमान जी,राम मंदिर हमारी श्रद्धा आस्था के केंद्र बिंदु है। इस कृत्य के बदले कांग्रेस को ओर कमलनाथ जी को देश के हिंदुओं से माफी मांगना चाहिये। इसको लेकर देश उन्हें कभी माफ नही करेगा। उक्त कृत्य देश के हिंदुओं की धार्मिक भावना,उनकी आस्था पर प्रहार है। एक अन्य प्रश्न को लेकर केशवानी ने कहा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मप्र में आ रही है,उसको लेकर मप्र के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जी ने स्पष्ट कर दिया है की कोई परिंदा भी पर नही मार सकता है,कमलनाथ जी को असली में चिंता कांग्रेस में जो अंदरूनी कलाह चल रही है उसकी है,घर की आंतरिक लड़ाई से उन्हें असुरक्षा का भाव लग रहा है। आयोजित प्रशिक्षण वर्ग को लेकर केशवानी ने कहा भाजपा में बैठक,वर्ग,प्रशिक्षण सतत चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है। हम पूरी तैयारी से 23 एवं 24 में होने वाले विधानसभा लोकसभा के चुनाव में जनता के बीच अपने कार्यो,किये विकास को लेकर जायेंगे। निश्चित देश प्रदेश में हुए विकास के बदले जनता का आशीर्वाद भाजपा को पुनः मिलेगा।   दुर्गेश केशवानी , बीजेपी प्रवक्ता 

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 MadhyaBharat  22 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान से भाप्रसे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने भेंट की

मुख्यमंत्री चौहान ने अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भारतीय प्रशासनिक सेवा 2021 बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने निवास कार्यालय में भेंट की। मुख्यमंत्री चौहान ने अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने अधिकारियों को देश, प्रदेश और जन-सेवा के कल्याण तथा विकास कार्य करने के लिये प्रेरित किया। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान से भेंट करने वाले परिवीक्षाधीन अधिकारियों में नीमच के सहायक कलेक्टर सृजन वर्मा, शिवपुरी के सहायक कलेक्टर अरविंद कुमार शाह, धार के सहायक कलेक्टर  शिवम प्रजापति, विदिशा की सहायक कलेक्टर  अर्चना कुमारी, बैतूल के सहायक कलेक्टर  दिव्यांशू चौधरी, मण्डला के सहायक कलेक्टर अर्थ जैन, देवास के सहायक कलेक्टर  टी प्रतीक राव और छिंदवाड़ा की सहायक कलेक्टर  वैशाली जैन शामिल रही।

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 MadhyaBharat  22 November 2022

देश में सबसे बेहतर है प्रदेश में निवेशकों को सुविधाएँ देने की नीति: मुख्यमंत्री

  मुख्यमंत्री ने ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में उद्योगपतियों आने का दिया निमंत्रण मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को सुविधाएँ देने की नीति देश में सबसे बेहतर है। प्रदेश में निवेशकों को पूरा सहयोग दिया जाएगा। निवेश बढ़ने से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश और आत्म-निर्भर भारत का निर्माण हो सकेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने यह बात आज निवास पर उद्योगपतियों से भेंट के दौरान कही। उन्होंने निवेशकों को इंदौर में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया। भेंट के दौरान सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  मनीष रस्तोगी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री चौहान से चर्चा के दौरान मेसर्स एचईजी लिमिटेड मण्डीदीप के प्रमोटर  रिजु झुनझुनवाला ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में काम करने का सबसे अच्छा माहौल है। उनकी कंपनी की इकाई ग्रेफाईट एनोड के विनिर्माण के लिए प्रदेश में 1800 करोड़ रूपए का नवीन निवेश करेगी। ग्राम सिरसौदा, तहसील सोनकच्छ, जिला देवास में इस परियोजना के प्रथम चरण में 800 करोड़ तथा द्वितीय चरण में एक हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 20 हजार मीट्रिक टन होगी। एक जनवरी 2025 तक प्रथम चरण का उत्पादन शुरू होगा और एक जनवरी 2028 तक परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा। इसमें लगभग 400 लोगों को रोजगार मिलेगा। मेसर्स एलम सोलर, नई दिल्ली के सीईओ मनोज अग्रवाल ने बताया कि कम्पनी दो चरणों में 1500 मिलियन यूएस डालर का निवेश करेगी। लगभग 500 एकड़ में स्थापित प्लांट में 400 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा और 15 हजार से 20 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। मेसर्स रमणीक पॉवर एण्ड एलॉयज प्रा. लि. बालाघाट के डायरेक्टर निश्‍चल त्रिवेदी ने बताया कि कम्पनी द्वारा ग्राम सरंडी, तहसील वारासिवनी, जिला बालाघाट में 168 करोड़ रूपए का निवेश प्रस्तावित है। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें सिलिको एलॉयज का उत्पादन होगा। मेसर्स बुरहानपुर टेक्सटाईल्स लिमिटेड के मेनटोर श्री ओमप्रकाश मित्तल ने बताया कि उनकी कम्पनी द्वारा ग्राम फतेपुर, जिला बुरहानपुर में यार्न, ट्वीस्टेड यार्न, ग्रे-फेब्रिक, आरएफडी फेब्रिक, साड़ी धोती/जॉब वर्क, पैलेट्स उत्पादन पर 297 करोड़ 86 लाख रूपये के निवेश का प्रस्ताव है। इससे 1100 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री  चौहान से भेंट करने वालों में मेसर्स एलम सोलर, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष  आकाश अग्रवाल, मेसर्स एच.ई.जी. लि. मण्डीदीप के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अंकुर खैतान, ईडी मनीष गुलाटी, मेसर्स रमणीक पॉवर एण्ड पलॉयल प्रा. लि. बालाघाट के डारेक्टर हर्ष त्रिवेदी तथा मेसर्स बुरहानपुर टेक्सटाईल्स लि. के डायरेक्टर  रवी पोद्दार, कम्पनी सचिव  वेदांत मित्तल आदि प्रतिनिधि शामिल थे।  

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 MadhyaBharat  22 November 2022

पेसा एक्ट की जानकारी संबंधित वर्ग तक सरल भाषा में पहुँचाये – मुख्यमंत्री

  89 विकासखंडों के ग्रामों में लागू पेसा एक्ट को समझाने पहुँचेंगे मास्टर्स ट्रेनर्स मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के हित में पेसा नियम लागू किए गए हैं। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन है। सरकारी अधिकारी और अन्य सभी वर्ग मिल कर इसे सफल बनाएँ। सामाजिक समरसता के साथ पेसा एक्ट के प्रावधान जमीन पर उतारे जाएँ। मुख्यमंत्री चौहान आज आर.सी.वी.पी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में मध्यप्रदेश पंचायत उपबंध, (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम 2022 पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट कोई कर्मकांड नहीं, इससे जनजातीय वर्ग का जीवन बदलेगा। जनजातीय वर्ग को पेसा एक्ट सरल भाषा में समझाया जाए। राज्य स्तरीय कार्यशाला के बाद प्रदेश के 89 विकासखंडों के ग्रामों में लागू पेसा एक्ट को समझाने के लिए मास्टर्स ट्रेनर्स भी जिलों में पहुँचेंगे। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित कर लिया गया है। कार्यशाला में प्रमुख रूप से 20 जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, वन मंडल अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट से सामाजिक समरसता से सामाजिक क्रांति आएगी। उन्होंने एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार 31 दिसंबर तक सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए ग्राम सभाएँ जरूरी कार्यवाही पूरी करें। सभी विभाग संवेदनशील होकर जुट जाएँ। एक्ट के प्रभाव क्षेत्र के बीस जिलों के 89 विकासखंडों में सभी व्यवस्थाएँ की जाएँ। दिए गए अधिकारों से जनजातीय वर्ग के जीवन स्तर में होने वाले सुधार को सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाए। यह एक्ट लागू होने से जनजातीय वर्ग की जिन्दगी बदलने का कार्य शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 15 नवम्बर से प्रदेश में पेसा के नियम लागू कर दिए गए हैं। अब 89 विकासखंडों में ग्राम सभाओं के गठन का कार्य प्रारंभ हो रहा है। इसकी जानकारी प्रशिक्षण में दी जा रही है। जनजातीय वर्ग को जल, जंगल, जमीन से जुड़े अधिकारों के साथ ही महिला सशक्तिकरण के अधिकार दिलवाने के लिए सभी सक्रिय हों, इस उद्देश्य से कार्यशाला की गई है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जहाँ गौण खनिज से जुड़े अधिकार जनजातीय वर्ग को दिए जा रहे हैं, वहीं लघु वनोपज से जुड़े कार्य से उन्हें बेहतर ढंग से लाभांवित करने की पहल हुई है। खनिज पट्टों पर जनजातीय लोगों का पहला हक बनता है। सहकारी क्षेत्र और पानी के संरक्षण के अधिकार भी जनजातीय वर्ग को स्थानांतरित होंगे। मास्टर्स ट्रेनर बनाए जा रहे हैं। ये मास्टर्स ट्रेनर गाँव-गाँव में जाकर ट्रेनिंग देंगे। यह कार्यशाला इसलिए रखी गई ताकि कोई भ्रम न रहे। मैदानी स्तर पर जनजातीय भाई-बहनों को सशक्त करने के लिए बिना किसी विलंब के पेसा को लागू किया गया है। स्थानीय बोलियों में भी पेसा के नियम समझाए जाएंगे। गीतों, दीवार लेखन और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पेसा नियम के प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य अमले की मनोवृत्ति में संशोधन आवश्यक है। अक्सर होता यह है कि संपन्न वर्ग अलग दुनिया बना लेता है। पिछड़े लोग अधिक पिछड़ जाते हैं। यह स्थिति बदलनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उदाहरण के लिए भारिया जनजाति के लोग सस्ते दाम पर चिरौंजी बेचने को विवश होते हैं। उनका शोषण नहीं होना चाहिए। पेसा नियम से ग्राम पंचायतें सशक्त होंगी। वनोपज का मामला हो, राजस्व का काम हो या फिर श्रमिकों की समस्याएँ, सभी का समाधान होगा। इस वर्ग की बेटियाँ कठिनाइयों में न पड़ें, इसके लिए भी प्रशासन पूरी तरह सजग हो। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा नियम के संबंध में प्रशासनिक अमला सकारात्मक मानसिकता बना कर सभी संबंधित लोगों को इसके नियम समझाये। एक्ट के संबंध में कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए। सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के जनजातीय बहुल ग्रामों की ग्रामसभा, जिनमें अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्य भी शामिल हैं, अधिकार संपन्न होकर कार्य करेंगी। यह एक्ट किसी के विरोध में नहीं हैं। इसकी आवश्यक जानकारी संबंधित विभागों और अमले को दी जा रही है। एक्ट के क्रियान्वयन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित राजस्व, वन, जल संसाधन, कृषि और आबकारी विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि 4 दिसंबर को जननायक टंट्या मामा की स्मृति में नेहरू स्टेडियम इंदौर में कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है, इसमें व्यापक भागीदारी रहेगी। राज्य शासन के मंतव्य के अनुसार पेसा नियम का संदेश और जानकारी लोगों तक पहुँचाये। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कमजोर वर्ग, गरीबी के आधार पर योजनाओं में लाभ लेने के लिये पात्र हैं। इनका हक हड़पने वालों को नेस्तनाबूद करें। दोषी लोगों को नौकरी से बाहर कर जेल भेजें। जिलों में अच्छा कार्य भी हो रहा, कोई गैप हो तो उसे समाप्त करें। कहीं लेन-देन की शिकायतें मिलें, उन्हें न छोड़ें। अवैध नशे के कारोबारियों को भी न छोड़ा जाये। मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि एक्ट की मूल भावना जनजातीय वर्ग का कल्याण है। पुलिस थाना स्तर पर छोटे-मोटे विवादों को बातचीत से सुलझाया जा सकता है। यदि कोई अपराध थाने में पंजीबद्ध होता है तो उसकी सूचना ग्राम सभा को देना होगी। विभागों द्वारा एक्ट के क्रियान्वयन से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन भी निरंतर दिया जाएगा। मास्टर्स ट्रेनर्स द्वारा मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव  मलय श्रीवास्तव ने कार्यशाला में हुए विचार-विमर्श की जानकारी दी। बुरहानपुर कलेक्टर की पहल पर निर्मित पेसा एक्ट से संबंधित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री  चौहान को पेसा एक्ट पर केन्द्रित पुस्तिका भेंट की गई। कार्यशाला में विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभागीय कार्यों और पेसा एक्ट से जुड़े प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। अमर पाल सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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 MadhyaBharat  22 November 2022

राज्यपाल टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्वरंग 2022 के समापन समारोह में हुई शामिल

  राज्यपाल  ने कहा - विश्वरंग के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कला और संस्कृति का संरक्षण होगा राज्यपाल अनुसुईया उइके आज अपने भोपाल प्रवास के दौरान रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव ‘विश्वरंग 2022‘ के समापन समारोह में शामिल हुई। महोत्सव में राज्यपाल को टैगोर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कविता संग्रह ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा‘ और बाल कविता कोश, विज्ञान कथाकोश पुस्तक तथा वनमाली कथा पत्रिका के नए अंक भेंट किये। राज्यपाल उइके ने विश्वरंग के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए विश्वरंग-2022 की पूरी टीम को साधुवाद दिया। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में (पूर्व विधानसभा परिसर) अपने विधानसभा सदस्य रहते हुए बिताए पलों का भी स्मरण किया।  राज्यपाल  उइके ने कहा कि महोत्सव में पद्म पुरस्कार, साहित्य अकादमी विजेताओं सहित विश्व के कवि, लेखक, कलाकारों, कला, साहित्य के विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों का संगम हुआ है, जो निश्चित ही आधुनिक समाज को जीवन में साहित्य की प्रासंगिकता को समझाने का बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा। राज्यपाल उइके ने कहा कि आज डिजिटल दुनिया की चकाचौंध ने युवा पीढ़ी सहित्य से दूर किया है। उन्होंने कविगुरू रविंद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए कहा कि वे बहु आयामी प्रतिभा के धनी थे और गद्य, पद्य, संगीत, चित्रकला, नृत्य जैसी अनेक विद्याओं में पारंगत थे। हमारी सनातन संस्कृति और गुरूदेव की चिंतन धारा एक ही रही है। टैगोर की रचनाओं को पूरे विश्व में विभिन्न भाषाओं में पढ़ा गया है। यह प्रसन्नता का विषय है कि आज उनके नाम पर साहित्य और कला महोत्सव मनाने के लिए हम एकत्रित हुए हैं। राज्यपाल ने कहा कि यह गौरव का विषय है कि विश्व रंग में हमारे प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्रोफसर और विद्यार्थियों की भी सहभागिता रही है। इस वर्ष भी नीदरलैंड, रूस, फिजी़, श्रीलंका, कनाडा, उज्बेकिस्तान, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया जैसे 35 देशों के प्रतिनिधि विश्वरंग महोत्सव में शामिल हुए हैं। राज्यपाल ने विश्वरंग 2019 और 2020 की उपलब्धियों और आयोजन की सफलता को भी रेखांकित किया।  राज्यपाल ने आगे कहा कि साहित्य किसी भी देश के जीवन, इतिहास, और संस्कृति का संपूर्ण भाग है। विश्व के विभिन्न देशों की एकजुटता और उसकी भावनाओं की एकरूपता में कला और साहित्य की बड़ी भूमिका है।  भारतीय साहित्य ने हमेशा भाषाओं की विविधता का पालन -पोषण किया है। राज्यपाल सुश्री उइके ने महोत्सव की प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी को मिले सम्मान पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीकों में भाषा का प्रमुख स्थान है। हमारी सभ्यता ने हमेशा बौद्धिक स्वतंत्रता को अपनाया है और सांस्कृतिक बहुलवाद का उत्सव मनाया है। विश्वरंग हिन्दी और भारतीय भाषाओं का भव्य उत्सव है। विश्वरंग का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की संकल्पना के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे लाखों युवाओं को मातृभाषा में शिक्षा मिल पाएगी। मेडिकल और तकनीकी जैसे विषयों की हिंदी में पढ़ाई प्रारंभ करने की पहल को भी उन्होंने सराहा।  राज्यपाल ने अपने राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनमें जागरूकता लाने के लिए आयोग की 50 प्रतिशत से अधिक सामग्रियां हिंदी में उपलब्ध कराने का कार्य उन्होंने किया था।  राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि विश्वरंग-2022 में जनजातीय विषयों के महत्व को देखते हुए, एक अनूठी पहल के रूप में, आदिवासी साहित्य एवं कला महोत्सव का आयोजन भी किया गया है। जिसमें आदिवासी कला प्रदर्शनी एवं फिल्म भी दिखाई गई। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति से गहरा रिश्ता है। आदिवासी कला कौशल, संस्कृति और ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास आवश्यक है। हमारे समाज में वनवासी और आदिम जाति कितनी भी कठिन एवं विपरीत परिस्थितियों रही हो उन्होंने अपनी कला और संस्कृति को बनाये रखा है।  राज्यपाल ने कहा कि विश्वरंग में विश्व शांति एवं सद्भाव यात्रा, नेशनल पेंटिंग एक्जिबिशन, बाल साहित्य एवं कला महोत्सव, साहित्य, कला, संस्कृति और संगीत के विभिन्न सत्र बच्चों और युवाओं के लिए अनूठी सौगात रही है। साथ ही युवाओं को देखते  हुए टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और उद्यमिता पर भी फोकस किया गया । उन्होंने कहा कि  विश्वरंग समारोह के अंर्तगत महत्वपूर्ण सत्रों में विद्वतजनों की उपस्थिति से निश्चित रूप से इस आयोजन की सार्थकता बढ़ी है। भविष्य में, समाज में इसका व्यापक प्रभाव दिखाई देगा। राज्यपाल  उइके ने उपस्थित प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि नई पीढ़ी को कला संस्कृति और साहित्य के साथ ही मूल्यों की परंपराओं से अवगत कराने के लिए आप सभी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। आज इन सांस्कृतिक मूल्यों में निरंतर गिरावट आ रही है और परिवार की परिभाषा सीमित हो गई है। सरकार के साथ ही समाज का भी दायित्व है कि वो आने वाली पीढ़ी को कला और संस्कृति के बारें में सीख प्रदान करें।  राज्यपाल उइके ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि  विश्वरंग से साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और भाषा में काम करने वाले रचनाकारों के बीच वैश्विक विमर्श शुरू होगा। डिजिटल क्रांति के दौर में सांस्कृतिक मूल्यों के स्थायित्व के लिए यह अति महत्वपूर्ण है। विश्वरंग के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कला और संस्कृति का संरक्षण होगा। भारतीय संस्कृति के मूल्यों के प्रचार प्रसार के लिए यह उल्लेखनीय आयोजन है। विश्वरंग के समापन कार्यक्रम को संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर तथा स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रभुराम चौधरी ने भी संबोधित किया।    इस अवसर पर रबिन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलपति और विश्वरंग के निदेशक  संतोष चौबे, सभी सह निदेशक, सीवी रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति आर. पी. दुबे सहित वरिष्ठ साहित्यकार और कलाप्रेमी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  21 November 2022

रहली क्षेत्र के खेतों को मिलेगी सिंचाई सुविधा - मंत्री भार्गव

मंत्री भार्गव ने मध्यम सिंचाई परियोजना का किया भूमि-पूजन लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने 162 करोड़ 66 लाख रूपये से बनने वाली आपचंद मध्यम सिंचाई परियोजना का सागर जिले के रहली में भूमि-पूजन किया। उन्होंने कहा है कि इस परियोजना से लगभग एक दर्जन गाँव के किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलेगा। परीयोजना से किसानों को पानी की कोई कमी नहीं आयेगी और रहली क्षेत्र के किसानों की आय दोगुनी हो जायेगी। मंत्री  भार्गव ने कहा कि वर्तमान में कई देशों में पानी की कमी है। हमारे देश में कई ऐसे राज्य एवं जिले हैं, जहाँ पानी की कमी होने से पानी की बचत की जाती है। प्रकृति ने हमें इस क्षेत्र में सुनार, गधेरी और कोपरा नदियाँ दी हैं। बांध बनने के बाद आस-पास के नलकूप, बोरवेल और कुओं का जल-स्तर बढ़ेगा। मंत्री भार्गव ने कहा कि शाहपुर के पास साजली नदी पर पेयजल के लिए डैम बना है। पेयजल के लिए क्षेत्र के 108 गाँव में पाइप लाइन बिछाई जा रही है। यहाँ घरों में टोंटी से जल आएगा। जल, जंगल और जमीन पर सभी का हक है। नर्मदा नदी प्रदेश की जीवन रेखा है। नर्मदा नदी से सिंचाई और पीने के लिए जल मिलता है। मंत्री भार्गव ने कहा कि सिंचाई परियोजना से 12 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पाइप लाइन से पानी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की जमीन परियोजना से डूब में आयेगी, उन्हें प्रति हेक्टेयर 8 लाख रूपये मुआवजा राशि दी जायेगी और घर बनाने के लिए पाँच लाख रूपये के साथ प्लाट भी नि:शुल्क दिया जायेगा। प्रभावित किसानों को प्रति माह 3 हजार रूपये जीवन निर्वाह भत्ता दिया जायेगा। प्रभावित पशु मालिकों, छोटे व्यापारियों को शेड निर्माण के लिए 25 हजार रूपये और पुनर्स्थापना के लिए 50 हजार रूपये दिए जाएंगे। पक्की सड़क, शौचालय, आँगनवाड़ी भवन बनाए जायेंगे। सिंचाई परियोजना से चनौआ खुर्द, बडखेरा गौतम, भौदहार, बसारी, बेलई, भटोली, कदला, कुमेरिया, वगरोन, चंदौला, मुर्गा दरारिया, ऊमरा, चौका, चंद्रपुरा, बोरई, रतनारी, पहरेह, खनपुरा आदि ग्रामों के किसानों की खेती सिंचित हो जायेगी। मंत्री  भार्गव ने कहा कि नर्मदा नदी पर बने बाँधों से  बिजली बनाई जा रही है। रहली क्षेत्र की सुनार, गधेरी, कोपरा नदी पर डैम बनाए जा रहे हैं। कोपरा नदी का डैम बनने से इसका पानी दमोह, पथरिया विधानसभा तक जाएगा। 

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 MadhyaBharat  21 November 2022

मुख्यमंत्री ने खाटला पंचायत में बताये पेसा एक्ट के अधिकार

सब अपनी पंचायतों में पेसा एक्ट के बारे में बताएं मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने कुक्षी के मंडी प्रांगण में पेसा जागरूकता कार्यक्रम के दौरान आयोजित खाटला पंचायत में 4 जनपद के 40 ग्राम पंचायत के सरपंचो को सम्बोधित करते हुए पेसा एक्ट के प्रावधानों के बारे में सरपंचों से सीधी बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ ही अन्य कई अधिकार भी ग्राम सभाओं को दिए गए हैं। अब आप लोगों को गाँव को सशक्त बनाना है। आप सब अपनी पंचायतों में पेसा एक्ट के बारे में बताएं। फैसला अब ग्राम सभाओं में होना है। इसलिए गाँव के लोगों में इसके विभिन्न पहलू के बारे में आपको भी जागरूकता लानी है। खाटला पंचायत के दौरान बाग के सरपंच धर्मेंद्र बामनिया ने ग्राम सभाओं को व्यापक रूप से अधिकार संपन्न बनाने के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान का धन्यवाद ज्ञापित किया। निसरपुर के सरपंच अंतिम पटेल ने भी धन्यवाद दिया। इस दौरान सांसद वीडी शर्मा और क्षेत्रीय सांसद  छतरसिंह दरबार भी उपस्थित रहे।  

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 MadhyaBharat  21 November 2022

पेसा एक्ट से होगा जनजातीय समुदाय का आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण : मुख्यमंत्री

पेसा एक्ट समाज के सभी नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पेसा एक्ट जनजातीय भाई-बहनों की आर्थिक, सामाजिक उन्नति और उन्हें सशक्त एवं अधिकार सम्पन्न बनाने के लिये लागू किया गया है। यह एक्ट समाज के सभी नागरिकों के हित में है। किसी भी गैर-जनजातीय समाज के नागरिक के खिलाफ नहीं है। पेसा एक्ट अनुसूचित क्षेत्र में गाँव में लागू होगा, यह एक्ट शहर में लागू नहीं होगा। हमारे जो भी जनजातीय भाई-बहन विकास की दौड़ में पीछे रह गये हैं, पेसा एक्ट उन्हें मजबूत बनायेगा। मुख्यमंत्री  चौहान धार जिले के कुक्षी में पेसा जागरूकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यहाँ उन्होंने 4 जनपद की 40 ग्राम पंचायत के सरपंचों से चारपाई पर बैठ कर पेसा एक्ट के नियमों के संबंध में संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कुक्षी से क्रान्तिसूर्य जननायक टंट्या भील गौरव यात्रा को पूजन के बाद रवाना किया और यात्रा में स्वयं शामिल भी हुए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर सबका अधिकार होना चाहिये। पेसा एक्ट के नियमों के अनुसार अब पटवारी और वन विभाग के बीट गार्ड को गाँव की जमीन का नक्शा, खसरा, बी-1 नकल वर्ष में एक बार गाँव में लाकर ग्राम सभा में दिखाना होगा, जिससे जमीन के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी न कर सके। यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो ग्राम सभा को रिकॉर्ड को सुधारने की अनुशंसा करने का अधिकार होगा। पटवारी को ग्राम सभा की बैठक में भूमि संबंधी डिटेल्स पढ़ कर सुनानी होगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट के नियम में प्रावधान है कि शासन की योजना के किसी भी प्रोजेक्ट में किये जाने वाले सर्वे और भू-अर्जन के लिये ग्राम सभा की अनुमति आवश्यक होगी। किसी भी जनजातीय नागरिक की भूमि छल-कपट और बलपूर्वक अब कोई हड़प नहीं सकेगा। यदि कोई ऐसा करता है, तो ग्राम सभा को उसे वापस करवाने का अधिकार रहेगा। उन्होंने कहा कि बहला-फुसला कर धर्मान्तरण कराने और फिर जनजातीय समाज की जमीन हड़प लेने की कोशिश नहीं होने दी जायेगी। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि खनिज की खदान, जिसमें रेत, गिट्टी पत्थर की खदान शामिल है, के ठेके देना है या नहीं, इसका निर्णय ग्राम सभा द्वारा किया जायेगा। खदान पर पहला अधिकार सोसायटी, फिर गाँव की बहन-बेटी और उसके बाद पुरुष का होगा।   सिंचाई तालाबों का प्रबंधन ग्राम सभा करेगी   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने गाँव-गाँव में तालाब बनवाये हैं। इन तालाबों का पूरा प्रबंधन ग्राम सभा करेगी। ग्राम सभा तय करेगी कि तालाब में मछली पाले या नहीं। तालाब से जो आमदनी होगी, वह ग्राम सभा को मिलेगी। सौ एकड़ कृषि क्षेत्र में सिंचाई करने वाले तालाब का प्रबंधन अब सिंचाई विभाग नहीं ग्राम सभा करेगी।    जंगल से मिलने वाली वनोपज पर ग्राम सभा का अधिकार   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गाँव की सीमा के जंगल में होने वाली वनोपज- महुआ, हर्रा, बहेरा आदि के संग्रहण और बेचने और भाव तय करने का अधिकार ग्राम सभा के पास होगा। तेन्दूपत्ता को तोड़ने और बेचने का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है। इसमें सरकार का किसी भी प्रकार का दखल नहीं रहेगा। सरकार यह काम तभी करेगी, जब ग्राम सभा चाहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेन्दूपत्ता यदि इस साल तोड़ना चाहते हैं, तो शीघ्र ही 15 दिसम्बर तक ग्राम सभा को प्रस्ताव पारित करना होगा।   ग्राम विकास का निर्णय ग्राम सभा लेगी   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ग्राम सभा ही ग्राम विकास की कार्य-योजना बनायेगी। ग्राम सभा की अनुमति के बाद ही ग्राम पंचायत को मिलने वाली राशि खर्च की जा सकेगी। काम के लिये गाँव से बाहर जाने वाले श्रमिक को पहले ग्राम सभा में यह बताना होगा कि वह कहाँ काम करने जा रहा है, उस स्थान का पता लिखाना होगा, जिससे कि उस श्रमिक के हितों का ध्यान ग्राम सभा रख सके। यदि कोई बाहर का व्यक्ति गाँव में आता है, तो उसे भी ग्राम सभा को सूचित करना होगा। श्रमिकों को पूरा पारिश्रमिक मिले, इसका ध्यान भी ग्राम सभा रखेगी।   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में केवल लायसेंसधारी साहूकार ही निर्धारित ब्याज दर पर पैसा उधार दे सकेंगे। इसकी जानकारी भी ग्राम सभा को देनी होगी। अधिक ब्याज लेने पर संबंधित साहूकार पर कार्यवाही होगी।   ग्राम सभा की अनुमति के बिना नई शराब दुकान नहीं खुलेगी   मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना शराब और भांग की नई दुकान नहीं खुल सकेगी। किसी शराब दुकान को हटाने की अनुशंसा ग्राम सभा कर सकेगी। यदि शराब की दुकान के पास स्कूल, अस्पताल और धर्मशाला है, तो ग्राम सभा उस शराब दुकान को वहाँ से हटाने की अनुशंसा सरकार को भेज सकेगी। ग्राम सभा को अवैध रूप से संचालित शराब की दुकानों पर कार्यवाही करवाने का अधिकार रहेगा।   ग्राम सभा सुलझाएगी छोटे झगड़े   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गाँव में शांति एवं विवाद निवारण समिति बनेगी और गाँव के छोटे-मोटे झगड़े थाने नहीं जायेंगे, उन्हें अब ग्राम सभा में ही सुलझाया जायेगा। गाँव के किसी व्यक्ति के विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज करने के पहले पुलिस को ग्राम सभा को बताना होगा।   स्कूल-आँगनवाड़ी के निरीक्षण का अधिकार ग्राम सभा को मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट ने ग्राम सभा को अधिकार दिया है कि वह आँगनवाड़ी, स्कूल, आश्रम, छात्रावास का निरीक्षण करे और इनके काम ठीक से संचालित कराएँ।   मुख्यमंत्री ने दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री चौहान ने उपस्थित जन-समूह को प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ पेसा एक्ट के अधिकार लागू करने का संकल्प दिलाया। सांसद  व्ही.डी. शर्मा, सांसद छतर सिंह दरबार, राज्य सभा सांसद  सुमेर सिंह सोलंकी, सांसद  गजेन्द्र सिंह पटेल, पूर्व मंत्री  रंजना बघेल और अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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 MadhyaBharat  21 November 2022

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता उन्हें समय-सीमा में पूर्ण करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दें

  मुख्यमंत्री चौहान ने की सतना जिले की वर्चुअल समीक्षा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सतना जिले में जल जीवन मिशन तथा जिले में जारी अन्य सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उन्हें समय-सीमा में पूर्ण करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। लापरवाही और गड़बड़ी करने वालों पर कार्यवाही करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी  पात्र  व्यक्तियों  को  राशन सही मात्रा में निर्बाध रूप से उपलब्ध हो। भ्रष्टाचार करने वालों और शासकीय योजनाओं का लाभ जन-सामान्य को सहज-सरल तरीके से मिलने में व्यवधान  उत्पन्न करने  वालों  पर  एफआईआर  दर्ज  की  जाए। मुख्यमंत्री  चौहान जिले में संचालित शासकीय योजनाओं, निर्माण कार्यों और कानून-व्यवस्था की स्थिति  की वर्चुअली समीक्षा कर रहे थे। निवास कार्यालय से हुई समीक्षा बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रामखेलावन पटेल उपस्थि थे। कमिश्नर रीवा  अनिल  सुचारी  रीवा  से  तथा  कलेक्टर सतना श्री अनुराग वर्मा और जिले के अन्य अधिकारी सतना से वर्चुअली सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अधिकारी, ग्रामीण क्षेत्र का निरंतर भ्रमण करें तथा प्रधानमंत्री आवास योजना में बन रहे आवासों की प्रगति की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पथ विक्रेता योजनाओं में धीमी प्रगति पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अधिकाधिक लोगों को योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत सरोवर योजना में जन-भागीदारी सुनिश्चित करते हुए सरोवर के आसपास पर्याप्त सौन्दर्यीकरण किया जाए। विकास कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराने के लिए कमिश्नर तथा कलेक्टर व्यक्तिगत रूप से कार्यों की प्रगति की निगरानी करें। मुख्यमंत्री  चौहान ने सतना नगर की सड़कों के रेस्टोरेशन के कार्य को गति देने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सतना को प्रदेश में आदर्श जिला बनाने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी और जन-प्रतिनिधि टीम भावना से कार्य करें। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सतना जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अवैध शराब बिकने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन प्रकरणों में सख्त कार्यवाही की जाए। अवैध और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को ध्वस्त करें। नशे के विरूद्ध अभियान में जागरूकता गतिविधियों के साथ माता-पिता को विश्वास में लेकर बच्चों की कॉउंसलिंग की जाए। मुख्यमंत्री चौहान ने सीएम हेल्प लाइन, आँगनवाड़ियों में पोषण आहार वितरण, सड़कों की स्थिति, उर्वरक आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, मुख्यमंत्री भू-आवासीय अधिकार योजना, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान के की भी जानकारी प्राप्त की। जानकारी दी गई कि जल जीवन मिशन में जिले में जारी 224 योजनाओं में 69 का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। राशन वितरण में गड़बड़ी के सात प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है तथा 35 दुकानें निलंबित की गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में वर्ष 2016-17 से 2020-21 की अवधि के 93 प्रतिशत आवास पूर्ण कर लिए गए हैं। जिले में चयनित 106 अमृत सरोवर में से 38 का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। स्वतंत्रता सेनानियों के गाँवों में प्राथमिकता से अमृत सरोवर निर्मित किए गए हैं। यहाँ कैफेटेरिय और पाथ-वे भी विकसित किए गए हैं।  

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 MadhyaBharat  20 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान 28 नवम्बर को करेंगे हनुवंतिया जल महोत्सव का शुभारंभ

महोत्सव में पहली बार फ्लाइंग बोट का रोमांच हनुवंतिया टापू में 28 जनवरी, 2023 तक चलेगा जल महोत्सव वाटर, एयर एडवेंचर एक्टिविटी के साथ होगी लोक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के बड़े आयोजनों में से एक "जल महोत्‍सव" का 7वाँ संस्‍करण 28 नवंबर 2022 से शुरू होगा। मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान खंडवा जिले के हनुवंतिया टापू पर ‘जल महोत्सव’ का शुभारंभ करेंगे। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  उषा ठाकुर भी मौजूद रहेंगी। महोत्सव का समापन 28 जनवरी 2023 को होगा।  प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक मप्र टूरिज्म बोर्ड  शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि ‘जल महोत्सव' देश के एडवेंचर लवर्स के लिए आदर्श गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। पर्यटन बोर्ड नित नए नवाचारों से पर्यटकों के उत्साह और आनंद को बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहता है। इसी श्रंखला में इंदिरा सागर बांध के बेकवाटर पर स्थित हनुवंतिया टापू पर फ्लाइंग इन्फ्लेटेबल बोट एक्टिविटी की जा रही है। देश में पहली बार पर्यटक इसका आनंद लेंगे। हनुवंतिया में इस बार स्कूबा डाइविंग, बोरियामल द्वीप पर नाइट सफारी, लग्‍जरी रीगल सीरीज बोट, 40 फीट हाई रोप स्पिंग, जिप सायकल, पेरामोटरिंग, पेरासेलिंग, स्‍पीड बोट, जेट स्‍काई, हॉट एयर बलूनिंग, मोटर बोट राइडिंग आदि एडवेंचर गतिविधियाँ प्रमुख आकर्षण होंगी।  टूरिज्म बोर्ड द्वारा सनसेट डेज़र्ट केम्‍प के साथ मिल कर हनुवंतिया टापू में टेन्‍ट सिटी का संचालन किया जा रहा है। इसमें 104 लग्‍ज़री स्विस टेन्‍ट्स के साथ कॉर्पोरेट सम्मेलनों के लिए एसी सम्मेलन हॉल की सुविधा मिलेगी। केरल के प्रसिद्ध करैली समूह के द्वारा वेलनेस स्पा, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय एंगलर्स का तीन दिवसीय एंगलिंग स्पोर्ट इवेंट, संगीत समारोह, पतंग उत्सव जैसी अनेक गतिविधियाँ पर्यटकों के मनोरंजन के लिए होगी।    जल महोत्सव की उपलब्धियाँ जनवरी 2022 में स्पेन में इंडियाज यूनिक वाटर एंड एडवेंचर कार्निवल से सम्मानित।  वर्ष 2017 में केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा सबसे अनोखे और अद्वितीय नवीन पर्यटन उत्पाद वर्ष 2015-16 के लिए सम्मानित। वर्ष 2021 में जल महोत्सव के 60 दिन के दौरान 2 लाख 40 हजार से ज्यादा पर्यटक शामिल।

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 MadhyaBharat  20 November 2022

डिप्रेशन के विरूद्ध जन-जागरूकता के प्रयास सराहनीय – मुख्यमंत्री

युवाओं को डिप्रेशन से बचाने 30 धावक दौड़ेंगे 8 हजार किलोमीटर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि डिप्रेशन के बारे में जन-जागरूकता के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। इस समस्या से युवाओं को बचाना बहुत आवश्यक है। प्रयास यह होना चाहिए कि डिप्रेशन की समस्या हो ही नहीं पाए। दौड़ के आयोजन और अन्य जागरूकता गतिविधियों से लोगों को डिप्रेशन से बचाने के कार्य से जुड़ी संस्था हिमालय नाइट के प्रयास अनुकरणीय हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि युवाओं द्वारा डिप्रेशन के विरूद्ध विश्व की सबसे लम्बी रिले दौड़ का प्रयास सराहनीय है। करीब 8 हजार किलोमीटर की दौड़ में 30 धावक शामिल हैं। चंडीगढ़ से 10 नवम्बर को रवाना यह दौड़ 19 नवम्बर को  महाकाल लोक की परिक्रमा भी कर आई है। प्रतिदिन 250 किलोमीटर की दूरी तय की जा रही है। यह दौड़ 24 घंटे चलती है। कुल 36 दिन तक दौड़ निरंतर चलेगी। इस दौड़ के मार्ग में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और अन्य प्रांत शामिल हैं। रिले दौड़ नई दिल्ली में समाप्त होगी। आज भोपाल पहुँचे धावक दल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री चौहान के साथ स्मार्ट उद्यान में भी पौध-रोपण में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री  चौहान ने संदीप आर्य, धावक दल के एक दिव्यांग सदस्य सहित चार बेटियों से चर्चा भी की।   

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 MadhyaBharat  20 November 2022

विश्व धरोहर सप्ताह 19 से 25 नवंबर तक

  राज्य के संग्रहालय और स्मारकों में 19 नवंबर को दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री सुश्री उषा ठाकुर 19 नवंबर, शाम 4 बजे राज्य संग्रहालय में विश्व धरोहर सप्ताह प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगी। साथ ही आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करेंगी। मंत्री  ठाकुर पुरातत्व संचालनालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भी करेंगी। प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन शिव शेखर शुक्ला सुबह 11 बजे राज्य संग्रहालय में विश्व धरोहर सप्ताह संबंधी गतिविधियों का शुभारंभ करेंगे। सूचना आयुक्त  विजय मनोहर तिवारी भी उपस्थित रहेंगे। प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि विश्व धरोहर सप्ताह में 19 नवंबर को राज्य के अधीन संग्रहालय और स्मारकों में दर्शकों का प्रवेश निःशुल्क रहेगा। साथ ही संचालनालय पुरातत्व द्वारा 19 से 25 नवंबर तक राज्य के विभिन्न संग्रहालयों में धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्याख्यानमाला और कार्यशाला होगी। साथ ही प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। राज्य संग्रहालय के कार्यक्रम में डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान भोपाल के निदेशक  प्रकाश परांजपे, जीवाजी विश्वविद्यालय के प्रो. एस.के. द्विवेदी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण दिल्ली के सेवानिवृत्त अधीक्षक डॉ. मेनुअल जोसेफ और अश्विनी शोध संस्थान उज्जैन के निदेशक डॉ. आर.सी. ठाकुर का व्याख्यान होगा।

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 MadhyaBharat  19 November 2022

गढ़ाकोटा में 2 करोड़ 61 लाख रूपये के कार्यों का लोकार्पण

लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने किया लोकार्पण  लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने सागर जिले के गढ़ाकोटा नगर पंचायत क्षेत्र में 2 करोड़ 61 लाख रूपये लागत से शैक्षणिक संस्थाओं में भवन और अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण किया। मंत्री भार्गव ने कहा है कि शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल गढ़ाकोटा क्षेत्र की पुरानी शैक्षणिक संस्था है। काफी समय से छात्राओं की बढ़ती संख्या के कारण अतिरिक्त कक्ष और विज्ञान संकाय में प्रयोगशाला की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। आज स्कूल में 73 लाख 87 हजार रूपये की लागत से निर्मित 3 अतिरिक्त कक्ष और 3 प्रयोगशाला कक्ष का लोकार्पण हुआ है। इसी कड़ी में लोक निर्माण मंत्री  भार्गव ने शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल साबूलाल में एक करोड़ 88 लाख रूपये की लागत से बनाये गये दो मंजिला भवन का भी लोकार्पण किया।

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 MadhyaBharat  19 November 2022

770 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के निर्माण/उन्नयन के लिए 121 करोड़ स्वीकृत

  नागरिकों को अपने घर के नजदीक ही मिलेगी उपचार की सुविधा : भूपेन्द्र सिंह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया है कि नागरिकों को अपने घर के नजदीक ही उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न नगरीय निकायों में 783 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत 770 संजीवनी क्लीनिक के नवीन निर्माण एवं उन्नयन और पहले से संचालित संजीवनी क्लीनिक एवं सिविल डिस्पेंसरी के उन्नयन के लिए 121 करोड़ 25 लाख रूपये आवंटित किये गये हैं। इनमें से 611 नवीन एवं 172 पूर्व से संचालित संजीवनी क्लीनिक हैं।  

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 MadhyaBharat  19 November 2022

स्वामित्व योजना में 8990 गाँवों के 9.37 लाख अधिकार अभिलेख वितरित

किसानों को परेशानी हुई तो अधिकारी होंगे जिम्मेदार राज्य शासन द्वारा स्वामित्व योजना में 8990 गाँवों के 9 लाख 37 हजार अधिकार-पत्र नागरिकों को सौंपे गए हैं। यह जानकारी राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को मंत्रालय में राजस्व विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक में दी। राजस्व और परिवहन मंत्री ने कहा कि मैं स्वयं गाँवों में योजनाओं का फीड बेक लूँगा। स्वामित्व योजना में कागजों में जिन कार्यों का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से किसी ऐसे ग्राम में जहाँ अधिकार अभिलेख पूर्ण हो चुका है, वहाँ मैं स्वयं संपूर्ण कार्य का भौतिक सत्यापन करूँगा। प्रमुख सचिव राजस्व  मनीष रस्तोगी, सचिव संजय गोयल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   स्वामित्व योजना में अगस्‍त 23 तक पूरा करें सर्वे राजस्व मंत्री ने कहा कि 50 हजार ग्रामों में आबादी सर्वेक्षण का कार्य अगस्त 2023 तक पूरा कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। इसके लिए उन्होंने कार्य की गति बढाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री किसान-कल्याण योजना के संदर्भ में महाकौशल, मालवा, बुन्देलखंड, बघेलखंड, पूर्वी मध्यप्रदेश, पश्चिमी मध्यप्रदेश और उत्तरी मध्यप्रदेश में कार्यक्रम कर माह दिसम्बर एवं जनवरी में 10-15 जिलों के लोगों को सम्मिलित किया जाए। मंत्री राजपूत ने कहा कि अब कोरोना खत्म हो गया है, इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं अन्य मंत्रीगण क्षेत्र में शिविर कर आर्थिक सहायता वितरित करेंगे।   मुख्यमंत्री नगरीय भू-अधिकार योजना का व्यापक प्रचार–प्रसार करें   राजस्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अति महत्वपूर्ण एवं लोक कल्याणकारी योजना नगरीय भू-अधिकार योजना का अधिक से अधिक प्रचार किया जाये, जिससे पात्र लोग योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने निर्देश दिये कि शिविर लगा कर प्राप्त आवेदनों का निराकरण जल्द से जल्द किया जाये। राजपूत ने रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम (आर.सी.एम.एस.) के क्रियान्वयन को भी गति देने के निर्देश दिये।   कार्य में लापरवाही बरतने वालों से लें स्पष्टीकरण मंत्री  राजपूत ने कहा किसानों के हितों से जुड़े इस मामले पर कि जिलेवार जानकारी तैयार करें और जिन जिलों ने निर्धारित समय-सीमा में कार्य नहीं किया है, उन्हें कारण बताओ सूचना-पत्र जारी करें।

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 MadhyaBharat  19 November 2022

"पेसा" एक्ट से जनजाति क्षेत्रों में ग्राम सभा अधिकार सम्पन्न होगी

जल, जंगल, जमीन पर जनजातीय वर्ग को मिलेगा अधिकार : मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जल, जंगल, जमीन पर जनजातीय वर्ग का अधिकार है। राज्य सरकार उनके हक को दिला रही है। प्रदेश में जनजातीय वर्ग को सशक्त और अधिकार सम्पन्न बनाने के लिये पेसा एक्ट लागू किया गया है, जिससे उनके जीवन में खुशहाली आएगी। गाँव का पैसा गाँव के विकास में ही उपयोग होगा। छल और कपट से प्रदेश की धरती पर धर्मांतरण नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री चौहान गुरूवार को नर्मदापुरम जिले के जनजातीय ब्लॉक केसला में पेसा जागरूकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पेसा एक्ट से मिले अधिकारों के प्रति जनजातीय समुदाय को जागरूक किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा एक्ट से जनजातीय वर्ग को मजबूती मिलेगी। नये नियमों के अनुसार अब पटवारी और बीट गार्ड को गाँव की जमीन का नक्शा, खसरा, बी वन नकल, गाँव में ही लाकर ग्राम सभा में दिखाने होंगे, जिससे जमीन के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी न कर सके। यदि कोई गड़बड़ी करता है तो ग्राम सभा को उसे ठीक करने का अधिकार रहेगा। किसी प्रोजेक्ट के लिये जमीन लेने के लिये ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी। छल, कपट और बलपूर्वक अब कोई जमीन नहीं हड़प सकेगा। यदि कोई ऐसा करता है तो ग्राम सभा को हस्तक्षेप कर उसे वापस करवाने का अधिकार होगा। छल और कपट से प्रदेश की धरती पर धर्मांतरण किसी कीमत पर नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि खनिज के मामले जिनमें रेत खदान, गिट्टी-पत्थर के ठेके देना है या नहीं इसका निर्णय भी ग्राम सभा में ही लिया जाएगा।   तालाबों का प्रबंधन ग्राम सभा करेगी मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ग्राम सभा अमृत सरोवर, तालाबों का प्रबंधन करेगी। तालाबों में सिंघाड़ा उगाने और मछली पालन एवं मत्स्याखेट की सहमति ग्राम सभा देगी। सौ एकड़ सिंचाई तालाबों का प्रबंधन, वनोपज का संग्रहण एवं न्यूनतम मूल्य निर्धारण भी ग्राम सभा में हो सकेगा। जनजातीय वर्ग के लोगों के द्वारा वनोपज संग्रहण करने के साथ उसे बेचने का भी हक होगा। तेंदूपत्ता की तुड़ाई और ब्रिकी का कार्य भी जनजातीय वर्ग करेंगे। वनोपज की दर ग्राम सभा तय करेंगी। यह सब प्रस्ताव एक माह के अंदर ही तय हो जाएंगे। ग्राम सभा तेंदूपत्ता संग्रहण एवं विक्रय का प्रस्ताव 15 दिसंबर तक पारित करे। गाँव का पैसा गाँव के विकास में ही उपयोग होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग को पेसा एक्ट के संबंध में प्रशिक्षण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं मनरेगा के माध्यम से कब और कौन सा कार्य कराया जाना है, इसकी कार्य-योजना का प्रस्ताव ग्राम सभा ही बनाएगी। मस्टर रोल भी ग्राम सभा देखेगी। यदि ग्राम से मजदूरों को बाहर ले जाना हो तो पहले ग्राम सभा को जानकारी देनी होगी। गाँव में बाहर से आने वाले व्यक्ति की जानकारी भी ग्राम सभा को देनी होगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के उत्थान के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। जनजाति क्षेत्रों में केवल लायसेंसधारी साहूकार ही निर्धारित ब्याज दर पर पैसा उधार दे सकेंगे। इसकी जानकारी भी ग्राम सभा को देना होगी। साहूकार द्वारा अधिक ब्याज नहीं लिया जा सकेगा। अधिक ब्याज लेने पर संबंधित पर कार्यवाही होगी। शासन की जन-कल्याणकारी योजनाओं के हित लाभ के लिए भी ग्राम सभा को अधिकार रहेगा। किस वास्तविक हकदार को हक मिलना चाहिए यह ग्राम सभा ही तय करेगी। उन्होंने कहा कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई नई शराब की दुकान नहीं खुलेगी। किसी शराब दुकान को हटाने की अनुशंसा ग्राम सभा कर सकेगी। छोटे झगड़े सुलझाने का अधिकार भी ग्राम सभा के पास रहेगा। किसी थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज होने पर इसकी सूचना ग्राम सभा को देना होगी। स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र, आँगनवाड़ी केन्द्र, आश्रम, छात्रावास आदि के व्यवस्थित संचालन के लिए मॉनिटरिंग का अधिकार भी ग्राम सभा को होगा। मेला एवं बाजार का प्रबंधन भी ग्राम सभा करेगी। नये नियमों को प्रभावी ठंग से लागू किये जाने के लिये पेसा कोऑर्डिनेटर बनाये जायेंगे।   प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ अधिकार लागू करने का दिलाया संकल्प मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास के पथ पर आगे बड़ रहा हैं। उन्होंने प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ पेसा एक्ट के अधिकार लागू करने के लिए जन-समूह को संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह की बहनों के सशक्तिकरण के लिए भी राज्य सरकार कृत संकल्पित है। इस वर्ष भी लगभग 3 हजार करोड़ रुपए स्व-सहायता समहों के खातों में डाले जाएंगे। मुख्यमंत्री  चौहान ने सुखतवा कॉलेज का नामकरण भगवान बिरसा मुंडा के नाम से करने की घोषणा भी की।   जनजातीय समुदाय ने दिया धन्यवाद कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन एवं माँ सरस्वती के पूजन से किया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने भगवान बिरसा मुंडा, वीर रघुनाथ शाह, शंकर शाह, टंट्या मामा एवं रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जनजातीय नायकों को नमन किया। जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के लिए पेसा एक्ट लागू करने के लिए जनजाति समुदाय ने धन्यवाद-पत्र देकर मुख्यमंत्री  चौहान का आभार माना। मुख्यमंत्री  चौहान ने जनजाति नायकों के जयघोष और "जय सेवा" "जय जोहार" से संबोधन की शुरुआत की।   आपकी सरकार, आपका कानून, आपका अधिकार   सांसद राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आजादी के 70 वर्षों के इतिहास में सही मायनों में अब जनजाति वर्ग के जीवन को नई दिशा मिली हैं। अब जनजाति वर्ग की ताकत उनके हाथों में होंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनजाति वर्ग के सशक्तिकरण एवं उनके उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। पेसा एक्ट लागू कर उन्होंने जनजाति वर्ग को जल, जंगल एवं जमीन पर अधिकार दिला कर मुख्यमंत्री  चौहान सामाजिक क्रांति लाये हैं। सांसद श्री सिंह ने क्षेत्र की जनता की तरफ से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। सिवनी मालवा विधायक प्रेम शंकर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  चौहान के नेतृत्व में प्रदेश के कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। हमारा प्रदेश 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड जीत चुका है। मुख्यमंत्री  चौहान प्रदेश को स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने के लिए कृत-संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने सिवनी मालवा क्षेत्र में पिछले दिनों विकास कार्य स्वीकृत करने पर मुख्यमंत्री  चौहान का आभार माना।   जनजातीय लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति कार्यक्रम में एकलव्य आवासीय विद्यालय केसला, कन्या आवासीय परिसर सुखतवा, चुरना आवासीय विद्यालय, एमजीएम इटारसी एसटी छात्रावास के छात्र-छात्राओं ने जनजातीय संस्कृति पर केन्द्रित लोक नृत्य एवं गीतों की प्रस्तुति दी। गोंडी और कोरकू वेशभूषा में सजे बालक-बालिकाएँ प्रदेश की जनजातीय संस्कृति की परंपराओं को साकार करते दिखाई दिए। संचालन प्राचार्य  राजेश जायसवाल ने किया। खनिज साधन एवं जिले के प्रभारी मंत्री  ब्रजेंद्र प्रताप सिंह, नर्मदापुरम विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा सहित विधायक और बड़ी संख्या में जनजाति वर्ग के नागरिक शामिल रहे।

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 MadhyaBharat  18 November 2022

जनजातीय वर्ग को जल, जंगल और जमीन के अधिकार देने पहली बार हुआ गंभीर प्रयास : मुख्यमंत्री

  कलेक्टर्स को पेसा नियम जमीन पर उतारने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जनजातीय वर्ग को महत्वपूर्ण अधिकार देने के उद्देश्य से प्रदेश में 15 नवम्बर से लागू पेसा नियम को जमीन पर उतारने के लिए कलेक्टर्स संबंधित विभिन्न विभागों के साथ सक्रिय भूमिका का निर्वहन करें। पेसा जागरूकता सम्मेलन से संबंधित वर्ग को नियमों की विस्तृत जानकारी दी जाए। आज नर्मदापुरम जिले के केसला में पेसा जागरूकता सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ है। अन्य जिलों में भी ऐसे सम्मेलन किए जाएंगे। साथ ही 22 नवम्बर को राज्य स्तरीय पेसा कार्यशाला भोपाल में होगी। इसमें 7 संभाग – चम्बल, उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम, जबलपुर, शहडोल और रीवा के कमिश्नर्स और आईजी, 20 जिले श्योपुर, रतलाम, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा, बुरहानपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिंडौरी, बालाघाट, शहडोल, अनुपपूर, उमरिया और सीधी के कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और जिला पंचायत के सीईओ हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री  चौहान ने आज निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा पेसा जागरूकता कार्यक्रम संबंधी निर्देश कलेक्टर्स को दिये। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के जनजातीय भाई-बहनों के लिए पेसा के नियमों को पूरी ताकत के साथ लागू करने का पहली बार गंभीरता से प्रयास हुआ है। प्रदेश के 20 जिलों के 89 विकासखण्डों की 5 हजार 254 पंचायतों के 11 हजार 757 ग्रामों में यह नियम लागू हैं। इन ग्रामों की ग्राम सभाएँ 20 नवम्बर से 3 दिसम्बर के मध्य होंगी। इन विशेष ग्राम सभाओं में पेसा नियमों के बिन्दुओं पर चर्चा के साथ विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसी तरह ग्राम सभाएँ पेसा नियम लागू होने के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पारित करेंगी और 4 दिसम्बर को टंट्या मामा बलिदान दिवस के कार्यक्रमों में भागीदारी पर भी चर्चा करेंगी। प्रभारी मंत्रियों के परामर्श से कलेक्टर्स ग्राम सभा की तारीख तय करेंगे।   सरकार भोपाल से नहीं चौपाल से चले मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एक नया इतिहास रचना है। सरकार भोपाल से नहीं चौपाल से चले, इसके लिए विकेंद्रीकरण की दृष्टि से कार्य किया जाए। पेसा नियमों के बारे में नुक्कड़ नाटक, दीवार लेखन और अन्य माध्यमों से आवश्यक प्रचार भी किया जाए। जन अभियान परिषद का पूरा सहयोग प्राप्त किया जाए। जनजातीय वर्ग के लोगों को मजबूत बनाने के लिए यह एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है। जनजातीय परम्पराओं और संस्कृति के संरक्षण का कार्य भी पेसा नियम का प्रमुख भाग है। यही नहीं श्रमिकों के अधिकारों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। पेसा नियमों के लिए वन विभाग के अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, मछली पालन, राजस्व, गृह, खनिज, जल संसाधन और वाणिज्यिक कर विभाग का परस्पर समन्वय रहेगा।   प्रशिक्षण की व्यूह रचना मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पेसा नियमों के संबंध में विशेष प्रशिक्षण की रूपरेखा बनाई गई है। हर ग्राम सभा के लिए 27 नवम्बर तक मास्टर ट्रेनर्स का चिन्हांकन करते हुए उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए 25 से 30 नवम्बर की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद मास्टर्स ट्रेनर 5 दिसम्बर से आवंटित किए गए ग्रामों में जाएंगे और वहाँ दो से तीन दिन रूक कर सरल भाषा में ग्राम सभा में पेसा नियमों की बारीकियाँ समझाएंगे। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि पेसा नियमों से अन्य पिछड़ा वर्ग या किसी अन्य वर्ग पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं होगा। ग्राम सभाओं में भी जनजातीय वर्ग के अलावा अन्य वर्गों के सदस्य शामिल हैं। सामाजिक ताना-बाना यथावत रहेगा। आज की बैठक में जन अभियान परिषद के महानिदेशक श्री बी.आर. नायडू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।   राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल श्री पटेल का कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने शॉल और गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिकृति स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट कर सम्मान किया।

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 MadhyaBharat  18 November 2022

देश-समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाले साहित्य का प्रसार हो: राज्यपाल

पुस्तकालयों में परिवेश के प्रति सजग बनाने वाली पुस्तकों का हो संकलन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भावी पीढ़ी को देश और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाले साहित्य का प्रसार किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय गौरव, आजादी के संघर्ष, अमर वीर-वीरांगनाओं और पर्यावरण चेतना के प्रति सजग बनाने वाले साहित्य का पुस्तकालयों में संकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ही साहित्य, कला और पर्यावरण आदि विभिन्न विषय पर पुस्तकों की उपलब्धता पुस्तकालयों में होनी चाहिए। राज्यपाल पटेल आज कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव 2022 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि कलात्मकता की शक्ति अद्भुत होती है। दिल, दिमाग और आत्म-शक्ति के समन्वय से ही रचना का सृजन होता है। इसके लिए किसी साधन-संसाधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने डिण्डोरी जिले की यात्रा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ दोनों हाथों से वंचित बालिका पैरों से अद्भुत चित्र का निर्माण करती है। उन्होंने कहा कि कलात्मक प्रतिभा और शक्ति व्यक्तित्व को विशिष्ट स्वरूप देती है। सांस्कृतिक आयोजनों से पारंपरिक कलाओं को निरंतरता, मजबूती मिलती और नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहरों से परिचित होती है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि भारत की भाषाई, भौगोलिक विविधताओं ने सृजन के उदार मिश्रण के रूप में बेहतरीन साहित्य का निर्माण किया है, जिसकी बानगी, अनूठी और अप्रतिम विविधता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय में मौखिक परम्पराओं में लोक कला, संस्कृति, जड़ी-बूटी, पारम्परिक उपचार और पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली के ज्ञान का अपार भण्डार सुरक्षित है। शिक्षण संस्थाओं, समाज के रचनाकारों और साहित्यकारों का भी दायित्व है कि वे आने वाली पीढ़ी को अपनी कला और संस्कृति की धरोहर से परिचित कराये। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वरंग की पहल डिजिटल क्रांति के दौर में भी सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और भाषा के सृजनकारों के बीच वैश्विक विमर्श का शुभारम्भ करेगी। राज्यपाल  पटेल ने हिन्दी के डॉ. नंद किशोर आचार्य, गुजराती के जयंत परमार, मराठी के  शरण कुमार लिम्बाले, मलयालम के  ए.अनविंदाक्षन, उड़िया की  प्रतिभा राय, अंग्रेजी की सुकृता पॉल, संस्कृत के डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी को विश्वरंग अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया। राज्यपाल पटेल को राजभवन की अधिकारी  शिल्पी दिवाकर द्वारा उनकी रचना "प्रेम सेतु की गिलहरी" की प्रथम प्रति भेंट की गयी। विश्वरंग के अवसर पर प्रकाशित विश्व रंग फोल्डर, विश्व में हिन्दी रिपोर्ट, विश्वरंग स्पीकर प्रोफाइल बुकलेट, विश्वरंग पुस्तक यात्रा रिपोर्ट और बाल कविता कोश भेंट किये गए। रविन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने स्वागत उद्बोधन में विश्व रंग के आयोजन के संबंध में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिन्दी और भारतीय भाषाओं में परस्पर रिश्ता कायम करने की पहल विश्वरंग का आयोजन है। उन्होंने विश्वरंग के दौरान की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि दुनिया में समस्त विज्ञान का स्रोत भारत का प्राचीन विज्ञान है। जिसका अलग-अलग रूपों में आज विकास हो रहा है। विश्वरंग के सह-निदेशक डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने आयोजन की रूपरेखा की जानकारी दी। सह-निदेशक डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी ने चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल कार्यक्रम के बारे में बताया।

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 MadhyaBharat  18 November 2022

आर्थिक विकास की दृष्टि से एक दशक ही नहीं बल्कि अगली पूरी सदी ही भारत की होगी

भारत में शीघ्र ही विनिर्माण क्षेत्र एवं पूंजीगत क्षेत्र में निवेश बहुत भारी मात्रा में बढ़ने जा रहा  अभी हाल ही में अमेरिका के निवेश के सम्बंध में सलाह देने वाले एक प्रतिष्ठित संस्थान मोर्गन स्टैनली ने अपने एक अनुसंधान प्रतिवेदन में यह बताया है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की दृष्टि से अगला दशक भारत का होने जा रहा है। इस सम्बंध में उक्त प्रतिवेदन में कई कारण गिनाए गए हैं। भारत में केंद्र सरकार ने विनिर्माण के क्षेत्र में बड़े आकार की कई नई इकाईयों को स्थापित करने के उद्देश्य से हाल ही के समय में कई निर्णय लिए हैं, जिनका उचित परिणाम अब दिखाई देने लगा है। इनमे शामिल हैं, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, कम्पनियों द्वारा अदा की जाने वाली कर की राशि को 25 प्रतिशत तक कम करना और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, ईज आफ डूइंग बिजिनेस के क्षेत्र में कई निर्णय लेना, आदि, शामिल हैं। इसके चलते चीन से विनिर्माण के क्षेत्र में कई इकाईयां भारत में अपना कार्य प्रारम्भ करने जा रही हैं। भारत में वर्तमान में चीन की तुलना में श्रम लागत भी बहुत कम है। कोरोना महामारी के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के कामकाज में एक विशेष परिवर्तन दिखाई दिया था। इन संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को कार्यालय में न आकर, अपने घर से कार्य करने की छूट प्रदान की थी। यह परिवर्तन भारत के हित में कार्य करता दिख रहा है क्योंकि कर्मचारी यदि कार्यालय के स्थान से घर में ही कार्य कर सकता है तो उसे सिलिकोन वैली (केलीफोरनिया) में रहने की क्या जरूरत, वह तो मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली एवं पुणे में रहकर भी अपना कार्य बहुत आसानी से कर सकता है। इससे कम्पनी को बहुत बचत हो सकती है क्योंकि अमेरिका में वेतन का स्तर भारत की तुलना में बहुत अधिक रहता है। इस प्रकार, बहुत बड़े स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी कम्पनियां अपने कार्य को मुंबई में निवास कर रहे भारतीय इंजिनीयरों से करवाने पर गम्भीरता से विचार कर रही हैं। बल्कि कुछ कम्पनियों ने तो तकनीकी कार्य को भारत में आउट्सॉर्स करना शुरू भी कर दिया है। इससे भारत में तकनीकी कार्य के क्षेत्र में रोजगार के बहुत अधिक अवसर निर्मित होने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं। इससे भारत में अधिक आय वाले परिवारों की संख्या में भारी वृद्धि दृष्टिगोचर होगी। भारत में वर्तमान में 50 लाख परिवारों की आय 35000 अमेरिकी डॉलर से अधिक है। आगे आने वाले 10 वर्षों में यह संख्या 5 गुना बढ़कर 250 लाख परिवार होने जा रही है। इससे भारत में विभिन्न वस्तुओं का उपभोग द्रुत गति से बढ़ने जा रहा है। वर्ष 2022 की दीपावली के दौरान भारत में विभिन्न कम्पनियों द्वारा निर्मित उत्पादों की हुई बिक्री, इस दृष्टि से सबसे स्पष्ट उदाहरण बताया जा रहा है। वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति आय 2278 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है जो 10 वर्षों के दौरान दुगनी से भी अधिक होकर 5242 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष हो जाएगी।    भारत में शीघ्र ही विनिर्माण क्षेत्र एवं पूंजीगत क्षेत्र में निवेश बहुत भारी मात्रा में बढ़ने जा रहा है। यह न केवल केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं विभिन्न सरकारी संस्थानों के माध्यम से होगा बल्कि निजी क्षेत्र एवं विदेशी निवेशकों द्वारा का भी इसमें भारी योगदान होगा। वर्तमान में, भारत में स्थापित विनिर्माण इकाईयों द्वारा उनकी उत्पादन क्षमता का 75 प्रतिशत के आसपास उपयोग किया जा रहा है। इस क्षमता के उपयोग होने के बाद सामान्यतः नई विनिर्माण इकाईयों की स्थापना प्रारम्भ हो जाती है। विनिर्माण इकाईयों की स्थापना, ऊर्जा की खपत में क्रांतिकारी सुधार, डिजिटल क्रांति एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अत्यधिक निवेश से भारत में विकास को रफ्तार मिलेगी।     अभी तक चीन पूरे विश्व के लिए एक विनिर्माण केंद्र बन गया था और अमेरिका उत्पादों के उपभोग का मुख्य केंद्र बन गया था। परंतु, आगे आने वाले 10 वर्षों के दौरान स्थिति बदलने वाली है। भारत चीन से भी आगे निकलकर विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने जा रहा है, जिससे भारत में उत्पादों का उपभोग तेजी से बढ़ेगा। अतः भारत न केवल उत्पादों के उपभोग का प्रमुख केंद्र बन जाएगा बल्कि विश्व के लिए एक विनिर्माण केंद्र भी बन जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत पूर्व में ही वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।    भारत में वर्तमान में ऋण:सकल घरेलू उत्पाद अनुपात 57 प्रतिशत है। जबकि चीन में 225 प्रतिशत एवं अमेरिका में 200 प्रतिशत है। भारत में बैंकों द्वारा प्रतिभूति आधारित ऋण प्रदान किए जाते हैं अतः जिनके पास प्रतिभूति का अभाव होता है, उन्हें बैकों से ऋण लेने में परेशानी आती है, हालांकि केंद्र सरकार ने इस प्रकार के ऋणों पर अब अपनी गारंटी देना प्रारम्भ किया है परंतु फिर भी बैंकों से ऋणों का उठाव तुलनात्मक रूप से कम ही है। अब आने वाले समय में शीघ्र ही भारतीय बैकों द्वारा रोकड़ प्रवाह आधारित ऋण प्रदान किए जाएंगे  जिससे ऋण:सकल घरेलू उत्पाद अनुपात में तीव्र वृद्धि दृष्टिगोचर होगी। इस अनुपात में सुधार से न केवल उत्पादों की मांग में वृद्धि होती बल्कि बैकों के तुलन पत्र का आकार भी बढ़ेगा। वर्तमान के सेवा क्षेत्र के निर्यात में वैश्विक स्तर पर भारत की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र में यह 1.7 प्रतिशत से बढ़कर 1.9 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वर्ष 2021-2030 के दौरान पूरे विश्व में बिकने वाली कुल कारों में से 25 प्रतिशत कारें भारत में निर्मित कारें होंगी। साथ ही, 2030 तक यात्री वाहनों की बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सा विद्युत चलित वाहनों का होगा, जिनका निर्माण भी भारत में अधिक होगा। इस प्रकार, वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों द्वारा किए जा रहे उत्पादों के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत पहुंचने की प्रबल सम्भावना है। वर्तमान में भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 900 वाट ऊर्जा का उपयोग होता है जबकि यह आगे आने वाले समय में बढ़कर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1450 वाट ऊर्जा होने जा रहा है, क्योंकि भारत में 6 लाख से अधिक गावों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। हालांकि, फिर भी यह अमेरिका में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 9000 वाट ऊर्जा से बहुत कम ही रहने वाला है। परंतु, इसमें एक सिल्वर लाइनिंग जो दिखाई दे रही है वह यह है कि भारत में ऊर्जा के उपयोग में होने वाली वृद्धि का 70 प्रतिशत से अधिक भाग नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र से प्राप्त होने वाला है। अतः नवीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में भारत में निवेश बहुत बड़ी मात्रा में होने जा रहा है, इसमें विदेशी निवेश भी शामिल है। इस कारण से भारत में जीवाश्म ऊर्जा की मांग कम होगी और कच्चे तेल (डीजल, पेट्रोल) की मांग भी कम होगी। इससे पर्यावरण में भी सुधार दृष्टिगोचर होगा। इसके साथ ही, भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच जो वर्तमान में 30-40 प्रतिशत जनसंख्या तक ही सीमित है वह आगे आने वाले समय में बढ़कर 60-70 प्रतिशत जनसंख्या तक हो जाएगी। उक्त वर्णित कारणों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार वर्तमान स्तर 3.50 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2031 तक 7.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा और इस प्रकार भारतीय अर्थव्यवस्था अमेरिका एवं चीन के बाद  विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। इसी प्रकार, भारत का पूंजी बाजार भी अपने वर्तमान स्तर 3.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर पर 11 प्रतिशत की, चक्रवृद्धि की दर से, वार्षिक वृद्धि दर्ज करते हुए अगले 10 वर्षों में 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा। भारत में घरेलू मांग के लगातार मजबूत होने से एवं भारत में डिजिटल  क्रांति के कारण भारतीय नागरिकों की आय में बहुत अधिक वृद्धि होने की सम्भावना के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास का पांचवा हिस्सा भारत से निकलेगा, ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है। प्रायः यह देखा गया है कि किसी भी देश में विकास चक्र, प्रारम्भ होने के बाद, लगभग 70-80 वर्षों तक लगातार चलता है, हालांकि, इस खंडकाल में अर्थव्यवस्था में कुछ समस्याएं बीच के समय में आती रहती हैं। इस प्रकार, भारतीय अर्थव्यवस्था भी अब विकास चक्र के दौर में प्रवेश कर गई है इस दृष्टि से यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि “आर्थिक विकास की दृष्टि से अगला दशक ही नहीं बल्कि अगली पूरी सदी ही भारत की होगी”। भारत को विदेशी आक्रांताओं एवं अंग्रेजी शासकों द्वारा पिछले 1000 वर्षों तक लगातार लूटा गया है। अब समय आ गया है कि भारत से लूटी गई सम्पत्ति को व्यापार के माध्यम से भारत में हस्तांतरित किया जाए। अतः भारत से लूटी गई सम्पत्ति के पुनः भारत में लौटने का समय अब आ गया है। प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  17 November 2022

सचिव राज्य निर्वाचन आयोग सिंह ने की निर्वाचन तैयारियों की समीक्षा

5 जिलों के 19 नगरीय निकायों में आम निर्वाचन होना है सचिव राज्य निर्वाचन आयोग राकेश सिंह ने गुरूवार को निर्वाचन के लिए बाकी नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन तैयारियों की वीडियो कॉफ्रेंसिंग से समीक्षा की।  सिंह ने कहा कि सभी तैयारियाँ समय-सीमा में सुनिश्चित करें। सिंह ने बताया कि 5 जिलों के 19 नगरीय निकायों में आम निर्वाचन होना है। उन्होंने निकायवार निर्वाचन तैयारियों की समीक्षा की। सिंह ने कहा कि शेष पंचायतों में आम एवं उप निर्वाचन की पूरी जानकारी तुरंत भेजें। बैठक में जिलों से उप जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधीक्षक और नोडल अधिकारी आई.टी. शामिल हुए। बैठक में निर्वाचन सामग्रियों की उपलब्धता और बजट आवंटन के संबंध में भी चर्चा की गयी। इस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव राजकुमार खत्री, नवीत धुर्वे,  सुतेश शाक्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  17 November 2022

भारत की तरफ उम्मीद से देख रही दुनिया, भारत नेतृत्व करेगा: मुख्यमंत्री

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का "अखण्ड भारत: एक परिचर्चा" और "दीपावली मिलन" कार्यक्रम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत को दुनिया के अनेक देश उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा। प्रेम, सद्भाव, एकता और परस्पर सम्मान का भाव रखने में बहुत शक्ति होती है। नफरत की दीवारें तोड़ कर प्रेम की गंगा बहाना है। सभी मिल कर हिंदुस्तान की प्रगति के लिए कार्य करें। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएँ बिना भेदभाव के सभी के लिए लागू हैं। हम बिना झगड़े और खून-खराबे के साथ बेहतर वातावरण में विकास के लिए मिल कर कार्य करें। मुख्यमंत्री चौहान आज शाम स्थानीय छोला क्षेत्र के मन्नत गार्डन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के "अखण्ड भारत: एक परिचर्चा" और "दीपावली मिलन" समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास की भावना के साथ प्रेम और भाईचारे के साथ मिल कर रहने से अखण्ड भारत को बनाने और मजबूत करने का कार्य हो सकेगा। वर्ष 1947 में भारत का बँटवारा हुआ, लेकिन हमारी संस्कृति, हमारे पूर्वज, हमारी नदियाँ एक हैं। मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना- हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा। हम सभी के लहू का रंग एक है। इसी माटी में पैदा अन्न हमने खाया है। आक्रामक तो बाहर से आए थे। हमारी संस्कृति एक है। हमें अपनी परम्पराओं का सम्मान करना है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का एकता और सद्भाव का संदेश सभी जगह जाना चाहिए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह विश्वास किया जा सकता है कि विभक्त हुए देश फिर एक होंगे। नफरत की दीवारें खड़ी नहीं होना चाहिए। दंगे और झगड़े नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अनेक लोगों की रोजी-रोटी झगड़ों और फसादों से चलती होगी। मध्यप्रदेश में आपराधिक तत्वों और शांति भंग करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गंभीर अपराधों के लिए सख्त सजा रखी गई है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष  इंद्रेश कुमार ने कहा कि हम एक थे, एक हैं और एक रहेंगे। मुस्लिम समुदाय अल्पसंख्यक नहीं भारत का मूल नागरिक बन कर जियें। हम सब हिंदुस्तानी कहलाएँ। सभी को मिल कर एक अखण्ड, शक्तिशाली और आत्म-निर्भर भारत का निर्माण करना है। नये हिंदुस्तान को बनाने के लिए सभी अच्छे और सच्चे भारतीय के रूप में सामने आएँ। शायर अल्लामा इकबाल द्वारा कहा भी गया है “सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा”।  इंद्रेश कुमार ने कहा कि हमारे मदरसों में स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रम हो रहे हैं। दरगाहों में सद्भावना और भाईचारे के लिए दीप उत्सव के प्रयास भी लोकप्रिय हो रहे हैं। हमारी भाषाएँ, बोलियाँ और चेहरे एक से हैं। फिर क्या जरूरी है कि हमारी सीमाएँ युद्ध वाली हों, सीमाओं पर शांति क्यों नहीं हो सकती, आतंकवाद और नक्सलवाद से किसी का भला नहीं हुआ। लाखों लोग मरे हैं। हम ऐसी व्यवस्था को समर्थन दें जिसमें न आतंक हो, न घुसपैठ हो और न ही रूपए पैसे और सोने-चांदी की तस्करी हो। इंद्रेश कुमार ने कहा कि इंडोनेशिया की हवाई सेवा का प्रतीक-चिन्ह गरूड़ है। अनेक देशों में भारतीय संस्कृति के प्रतीक-चिन्ह और स्मारक हैं। जब यूरोपियन यूनियन हो सकती है तो भारतीय यूनियन क्यों नहीं हो सकती। आज झगड़ों की नहीं सुलह और समाधान की जरूरत है। कार्यक्रम में अतिथियों को तुलसी का पौधा भेंट किया गया। शाल, अंगवस्त्र और स्मृति-चिन्ह भेंट किए गए। कार्यक्रम में मंच के राष्ट्रीय संयोजक  मोहम्मद अफजाल, मध्यप्रदेश के संयोजक मोहम्मद फारूख खान, एस.के. मुद्दीन, तपन भौमिक,  रमेश शर्मा “गुट्टू भैया” सहित अनेक जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रारंभ में भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। समापन राष्ट्र गान से हुआ।

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 MadhyaBharat  17 November 2022

पीएम स्व-निधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल

  योजना में 6 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर को लोन वितरित पीएम-स्वनिधि योजना में अभी तक मध्यप्रदेश में 6 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर को ऋण वितरित किया जा चुका है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह ने बताया है कि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में अव्वल है। उन्होंने इस कार्य में लगे अधिकारी और कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा है कि आगे भी यह स्थान बरकरार रहना चाहिए। पी. एम. स्वनिधि योजना के प्रथम चरण में 5 लाख शहरी पथ विक्रेताओं को 498 करोड़ 77 लाख रूपये का ऋण वितरित कर मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। पी.एम. स्वनिधि योजना के द्वितीय चरण में (20 हजार रुपये ऋण राशि) 97 हजार 508 शहरी पथ विक्रताओं को 194 करोड़ 74 लाख रूपये का ऋण वितरित कर देश में द्वितीय स्थान पर है। पी. एम. स्वनिधि योजना के तृतीय चरण में 1,726 शहरी पथ विक्रताओं को 8 करोड 59 लाख रूपये का व्याज मुक्त ऋण प्रदान किया गया है। साथ ही 2 लाख 26 हजार स्ट्रीट बेंडर्स ने डिजिटली लेन-देन कर 3 करोड 15 लाख रुपये का कैशबैक प्राप्त किया है। योजना 24 मार्च, 2020 को एवं इससे पूर्व शहरी क्षेत्रों में वेंडिंग कर रहे ऐसे सभी पथ विक्रेताओं के लिए लागू है, जिनके पास शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग/पहचान-पत्र है। कोविड-19 महामारी के दौरान नगरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग स्ट्रीट वेंडर्स को 10, 20 एवं 50 हजार रूपये की कार्यशील पूँजी ऋण प्रदान किये जाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा "पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्म-निर्भर निधि योजना" (पीएम स्वनिधि) जुलाई 2020 से प्रारंभ की गई है। योजना के प्रथम चरण में 10 हजार रूपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। इसे समय पर चुका देने पर 20 हजार और फिर 50 हजार रूपये का ऋण दिया जाता है।

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 MadhyaBharat  17 November 2022

प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के मध्य में नियुक्ति की शर्तें बदलने पर HC ने  मांगा जवाब

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय और मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल को नोटिस जारी   हाई कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के मध्य में नियुक्ति की शर्तें बदले जाने पर जवाब-तलब कर लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय और मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल को नोटिस जारी किए गए हैं। हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए याचिकाकर्ताओं को साक्षात्कार में शामिल करने की अनुमति प्रदान करने की व्यवस्था दे दी। हालांकि, परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई है। इस तरह साफ है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का परिणाम विचाराधीन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता राजधानी भोपाल निवासी रचना धाकड़ सहित सागर, सीहोर, सतना, सीधी, उमरिया के आवेदकों की ओर से पक्ष रखा गया। याचिका मे कहा गया कि  कि आयुक्त लोक शिक्षण ने प्राथमिक शिक्षक के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। जिसके अनुसार आवेदकों के लिए एक जनवरी 2021 को न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की थी। आवेदक भरने के बाद याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा दी और वे उत्तीर्ण हो गए। लेकिन भर्ती प्रक्रिया के मध्य में काउंसलिंग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित कर दी गई है। काउंसलिंग 24 नवंबर से शुरू हो रही है। हाई कोर्ट ने सभी बिंदुओं पर गौर करने के बाद व्यवस्था दी कि याचिकाकर्ताओं को काउंसलिंग में शामिल किया जाए। साथ ही परिणाम सीलबंद कवर में सुरक्षित रखा जाए। 

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 MadhyaBharat  15 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया

  देशभक्ति की अलख जगाने वाले 'धरती आबा' बिरसा मुंडा भगवान  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जन-नायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर नमन कर माल्यार्पण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास पर स्थित सभागार में भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। जन-नायक भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातु गाँव में हुआ। वे अपने समाज की ब्रिटिश शासकों द्वारा की गई दशा को लेकर चिंतित रहते थे। अपने कार्यों से बिरसा मुंडा अपने क्षेत्र में 'धरती आबा' यानी 'धरती पिता' हो गए थे। राष्ट्रीय आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाकर देशभक्ति की अलख जगाने वाले 'धरती आबा' बिरसा मुंडा को इस क्रम में भगवान माना जाने लगा। अक्टूबर 1894 को भगवान बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से लगान माफी के लिए आंदोलन किया। वर्ष 1897 से 1900 के बीच मुंडाओं और अंग्रेज सिपाहियों के मध्य युद्ध होते रहे और बिरसा मुंडा के नेतृत्व में मुंडाओं ने अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए। मार्च 1900 में चक्रधरपुर में बिरसा मुंडा एक जन-सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। भगवान बिरसा मुंडा ने अपनी अंतिम साँस 9 जून 1900 को रांची कारागार में ली।

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 MadhyaBharat  15 November 2022

जनजातीय गौरव दिवस स्वाभिमान का पावन पर्व

 प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय प्रतिनिधित्व का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ   हम सभी को स्मरण है कि पिछले साल 15 नवंबर 2021 को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी। विगत एक साल में हमने यह भी देखा है कि केंद्र की सरकार ने जनजाति समाज के हित के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा फैसला यह लिया कि जनजातीय समाज से आने वाली श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाया गया। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की इच्छाशक्ति के कारण आजादी के 70 साल बाद पहली बार देश के सर्वोच्च पद पर किसी जनजातीय महिला को स्थान मिला है। वस्तुतः विगत सात दशकों में भारतीय चेतना में यह बात गहरे रूप से बैठा दी गई थी कि जनजातीय समाज पिछड़ा समाज है, इसका कोई योगदान नहीं है, इनके पास कुछ भी गौरवशाली बात नहीं है। ऐसे अनगिनत झूठ थोपे और रोपे गये, जिसके पीछे बहुत बड़ी साजिश भी थी। क्योंकि एक भोले समाज को बरगलाना बहुत सरल है। उसे व्यवस्था के विरुद्ध भड़काना भी कठिन नहीं है। इसलिए यह तथ्य सभी को समझना चाहिए कि वांमपंथी इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों ने देशभर में जनजातीय समाज को हीन-दीन बनाने व जताने के लिए हर प्रकार से षड्यंत्रपूर्वक प्रयास किये हैं। जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय वांग्मय में हमारे वनवासी बंधुओं का महत्व और उनका योगदान हर कालखंड में रेखांकित किया गया है। उनकी महिमा, उनकी कुशलता, उन पर सर्व समाज की निर्भरता का बखान हमारे प्रचीन साहित्यों में उपलब्ध है। रामायण, महाभारत ही नहीं वेदों, उपनिषदों की ऋचाएँभी जनजाति गौरव की गाथा कहते हैं। दरअसल, भारत में जो कुछ भी हमें औद्योगीकरण से पहले दिखाई देता है, या हमने हासिल किया है, उसमें आरण्यक समुदायों का महान योगदान रहा है। वन-क्षेत्रों के आसपास बनाए गए ऐतिहासिक धरोहर भी उन्हीं की बदौलत हैं।कला-शिल्प और कौशल के अनेक विधाओं में हमारी जनजातियां निपुण रही हैं। उनकी अपनी देशज ज्ञान परंपराएँ भी हैं। परंतु देश की प्रारंभिक सरकारों ने इन पक्षों पर कोई खास ध्यान नहीं दिया। उन्होंने उन्हें उत्पादक समाज की बजाय उपभोक्ता समाजकी तरह ट्रीट किया।  वर्ष 2014 में केंद्र की सत्ता में मोदी सरकार के आगमन के बाद देश में जनजातीय समाज के प्रति एक संवेदनशील युग की शुरुआत हुई। मोदी सरकार ने जनजातियों के लिए चल रही योजनाओं को और मजबूत किया है।साथ ही जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं को केंद्र में रखकर बड़े कदम उठाये हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजाति गौरव दिवसकेरूप में मनाने का निर्णय लिया। जनजातीय गौरव के तहत सभी सरकारें उनके विविध पक्षों पर चर्चा कर रही हैं तथा अनेक प्रकार की हितकारी योजनाओं को भी क्रियान्वित कर रही हैं।  जनजातीय गौरव दिवस की स्थापना के पीछे का भाव भी यही है कि जनजातीय संस्कृति में विद्यमान प्रेरक प्रसंगों को आम जनमानस भी समझे और उसे आत्मसात करे। आने वाली पीढ़ियां हमारेसमस्त जनजातीय बंधुओं के गौरवशाली पक्षों को जान सकें और उन्हें अपनी विचार-यात्रा में स्थान दे सकें। कहना होगा कि स्वाधीनता के अमृत काल में लिया गया गया यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र का सुनहरा अध्याय है। उल्लेखनीय है भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय समाज से निकले एक ऐसे प्रतीक हैं, जिन्होंने अपने समय में उन शक्तियों के सामने अपनी आवाज बुलंद की जिनके सामने आंख उठाने वाले कुचल दिए जाते थे। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध बिरसा मुंडा ने न केवल महाआंदोलन (उलगुलान) किया अपितु अपने लोगों को स्वधर्म की ओर लौटने की बड़ी मुहिम चलाई। उस मुहिम में वे अत्यंत सफल हुए और अंग्रेजों को यह संदेश देने में सफल हुए किउनके द्वारा संचालित धर्मांतरण का धंधा अब नहीं चल सकता। भगवान बिरसा मुंडा एक सनातनी धर्मयोद्ध थे, जिन्होंने अपने समाज को परधर्मियों के चंगुल से बचाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।इस अर्थ में वे पहले जनजाति नायक हैं जिन्होंने न केवल स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी बल्कि अपने स्वधर्म की रक्षा का संघर्ष भी छेड़ा। उन्होंने चर्च द्वारा चलाए जा रहे धर्मांतरण से अपने लोगों को बचाने के लिए सद्मार्ग अपनाया और हजारों युवाओं को धर्म की ओर वापस मोड़ा। समय की आवश्य़कता के दृष्टिगत उन्होंने लोगों को नशामुक्ति से लेकर सदाचार के धर्मप्राण मार्ग बताए जिस पर लाखों लोग चल पड़े थे। 15 नवंबर 1875 को छोटानागपुर पठार के अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे बिरसा मुंडा ने कम आयु में अंग्रेजों की नीतियों और कार्यशैली का प्रतिकार किया। मात्र 16 साल से 25 साल की कम आयु तक उन्होंने ऐसा आन्दोलन चलाया जो भारतीय संस्कृति की रक्षा में बड़ा अध्याय है। उन्होंने आस्थागत आक्रमण को समझकर लोगों को जागरुक किया। जून 1900 में जेल में उन्हें जहर देकर मार दिया गया ।  प्रारंभ में मिशनरी स्कूल से पढ़े बिरसा को अंग्रेजी और हिन्दी आती थी। उनके अनेक परिजन धर्म परिवर्तित कर चुके थे, वे भी चाहते तो उस समय अंग्रेजों के संरक्षण में बड़ा ओहदा हासिल कर सकते थे। लेकिन बिरसा मुंडा में अपनी धर्मचेतना से जागृत होकर मातृभूमि की रक्षा के साथ-साथ अपनी पहचान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, इसलिए बिरसा मुंडा को लोकजगत ने भगवान का स्थान दिया। वे हमारी समस्त पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। जनजातीय समाज और संस्कृति का इतिहास अनेक गौरवशाली प्रसंगों से भरा पड़ा है। लेकिन कई दशकों तक वामपंथी इतिहासकारों ने एक विशेष परिवार और दल को गौरव का सारा श्रेय देने के लिए अनेक अध्यायों को ढक दिया। ऐसे परिदृष्य में मोदी सरकार ने बिरसा मुंडा के जन्मदिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में स्थापित करके उन सभी गौरवशाली पृष्ठों का पुनरुच्चारण किया है। आज हम इस अवसर पर जनजातीय गौरव के विविध पक्षों को सामने ला सकते हैं। यह हमारे लिए स्वाभिमान का पावन पर्व है।  निःसंदेह केंद्र सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय गौरव की दिशा में कई ऐसे काम किये हैं, जिसकी चर्चा यहां लंबी हो सकती है लेकिन एक तथ्य जो आज चहुंओर स्वीकार किया जा रहा है कि भाजपा सरकारों ने जनजातीय इतिहास के उन नायकोंव नायिकाओं को विमर्श की मुख्य धारा में लाने में सफलता पाई है, जिन्हें अबतक भुलाया जाता रहा।साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय प्रतिनिधित्व का भी एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। आज हमारे लोकतंत्र के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर उसी समाज की एक बेटी विराजमान हुईं हैं, जिनके योगदान को कई साल तक कमतर आंका जाता रहा। जनजातीय गौरव दिवस की दूसरी वर्षगांठ और राष्ट्रपति बनने के बाद पहले जनजातीय गौरव दिवस परद्रौपदी मुर्मू जी का शहडोल में आगमन भी मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है।   विष्णुदत्त शर्मा - मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं खजुराहो लोकसभा सांसद 

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 MadhyaBharat  15 November 2022

राष्ट्रपति मुर्मु का जबलपुर पहुँचने पर भव्य स्वागत

  राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री चौहान ने जबलपुर विमानतल पर की आगवानी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के दो दिवसीय मध्यप्रदेश प्रवास के लिए आज जबलपुर पहुँचने पर भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी मध्यप्रदेश की यह पहली आधिकारिक यात्रा है । राष्ट्रपति लालपुर, शहडोल में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित जनजातीय सम्मेलन में शामिल होने आई हैं ।राष्ट्रपति  मुर्मु का आज दोपहर लगभग 12.15 बजे झारखंड की राजधानी रांची से भारतीय वायुसेना के विमान से जबलपुर के डुमना विमानतल आगमन हुआ। विमानतल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने उनकी  अगवानी की। राष्ट्रपति का स्वागत केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते,  प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत एवं राज्य सभा सदस्य  सुमित्रा वाल्मिकी ने भी स्वागत किया। विमानतल पर करीब 10 मिनट रूकने के बाद राष्ट्रपति ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के साथ वायुसेना के हेलिकॉप्टर द्वारा शहडोल प्रस्थान किया।

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 MadhyaBharat  15 November 2022

राष्ट्रपति की उपस्थिति में जनजातीय गौरव दिवस से लागू होगा पेसा एक्ट : मुख्यमंत्री

सामाजिक समरसता के साथ प्रदेश का विकास सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि यह मध्यप्रदेश के लिये गौरव की बात है कि राष्ट्रपति  द्रोपदी मुर्मू के मुख्य आतिथ्य में शहडोल में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इसी दिन मध्यप्रदेश में जनजातीय समुदाय के हित में पेसा एक्ट भी अधिकारिक रूप से लागू किया जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सामाजिक समरसता के साथ प्रदेश का विकास सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री चौहान आज शहडोल के लालपुर ग्राम में जनजातीय गौरव दिवस की तैयारियों की समीक्षा के बाद उमरिया जिले के गुरूवाही में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहाँ मौजूद बच्चों से चर्चा भी की। गुरूवाही से बाँधवगढ़ जाते समय मुख्यमंत्री से कस्तूरबा गांधी छात्रावास की छात्राओं ने मुलाकात की और उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने अपनी भांजी छात्राओं को आशीर्वाद दिया और उनकी शिक्षा के संबंध में जानकारी ली।  

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 MadhyaBharat  14 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस की तैयारियों का जायजा लिया

  शहडोल के लालपुर ग्राम में जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ की समीक्षा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शहडोल के लालपुर गाँव पहुँच कर राज्य-स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस की तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ समीक्षा की। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू मध्यप्रदेश आ रही है। राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी यह पहली मध्यप्रदेश की यात्रा है। हम उनका शहडोल में भव्य स्वागत करें और कार्यक्रम को ऐतिहासिक, अभूतपूर्व एवं गरिमामयी स्वरूप प्रदान करें। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि 15 नवम्बर भगवान बिरसा मुंडा के जन्म-दिवस पर जनजातीय परंपराओं एवं संस्कृति पर आधारित लोक नृत्यों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम सुनिश्चित किये जायेंगे। राष्ट्रपति का जनजातीय परंपराओं के अनुसार भव्य और गरिमामय स्वागत की तैयारियाँ भी सुनिश्चित की जाये। कमिश्नर शहडोल संभाग राजीव शर्मा ने सभा स्थल की तैयारियों, बैठक, पार्किंग, पेयजल, परिवहन एवं भोजन व्यवस्था की तैयारियों की जानकारी दी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाहूलाल सिंह, जनजातीय कल्याण मंत्री  मीना सिंह, विधायक  जयसिंह मरावी, मनीषा सिंह,  शरद कोल, अध्यक्ष नगरपालिका बुढार शालिनी सरावगी, एडीजी डीसी सागर, मुख्य वन संरक्षक  लाखन सिंह उइके, कलेक्टर  वंदना वैद्य सहित जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।   15 नवम्बर को लागू होगा पेसा एक्ट मुख्यमंत्री चैहान ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुंडा के जन्म-दिवस पर राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में मध्यप्रदेश में सामाजिक समरसता लाने के उददेश्य से पेसा एक्ट लागू होगा। मुख्यमंत्री चौहान शहडोल जिले के लालपुर में राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव उत्सव की तैयारियों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी मिलकर सामाजिक समरसता का परिचय देते हुए महामहिम राष्ट्रपति का ऐसा ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण स्वागत करें, जो उन्हें हमेशा स्मरण रहें। मुख्यमंत्री ने मीडियाकर्मियों से भी इस कार्यक्रम में सहर्ष सहभागिता की अपील की।

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 MadhyaBharat  14 November 2022

15 नवम्बर 2022 जनजाति गौरव दिवस के शुभ अवसर पर विशेष लेख

जनजाति समाज के लिए चलाई जा रही आर्थिक विकास की योजनाएंजनजाति समाज बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए देश में दूर दराज इलाकों के सघन जंगलो के बीच वनों में रहता है। जनजाति समाज के सदस्य बहुत ही कठिन जीवन व्यतीत करते रहे हैं एवं देश के वनों की सुरक्षा में इस समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। चूंकि यह समाज भारत के सुदूर इलाकों में रहता है अतः देश के आर्थिक विकास का लाभ इस समाज के सदस्यों को कम ही मिलता रहा है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार एवं कई राज्य सरकारों ने विशेष रूप से जनजाति समाज के लिए कई योजनाएं इस उद्देश्य से प्रारम्भ की हैं कि इस समाज के सदस्यों को राष्ट्र विकास की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके एवं इस समाज की कठिन जीवनशैली को कुछ हद्द तक आसान बनाया जा सके। भारत में सम्पन्न हुई वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 10.43 करोड़ है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है।  जनजाति समाज के सदस्यों को भारतीय राजनीति की मुख्यधारा में शामिल किए जाने के प्रयास भी किए जाते रहे हैं एवं इस समाज के कई प्रतिभाशाली सदस्य तो कई बार केंद्र सरकार के मंत्री, राज्यपाल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री के पदों तक भी पहुंचे हैं। आज भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भी आदिवासी समाज से ही आती हैं।केंद्र सरकार द्वारा जनजाति समाज को केंद्र में रखकर उनके लाभार्थ चलाई जा रही विभिन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से एक विशेष पोर्टल का निर्माण किया है। जिसकी लिंक है - भारत सरकार का राष्ट्रीय पोर्टल https://www.इंडिया.सरकार.भारत/ - इस लिंक को क्लिक करने के बाद “खोजें” के बॉक्स में जनजाति समाज को दी जाने वाली सुविधाएं टाइप करने से, भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न सुविधाओं की सूची निकल आएगी एवं इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रपत्रों की सूची भी डाउनलोड की जा सकती है।जनजाति समाज के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को दो प्रकार से चलाया जा रहा है। कई योजनाओं का सीधा लाभ जनजाति समाज के सदस्यों को प्रदान किया जाता है। साथ ही, कुछ योजनाओं के अंतर्गत राज्य सरकारों को विशेष केंद्रीय सहायता एवं अनुदान प्रदान किया जाता है और इन योजनाओं को राज्य सरकारों द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। जैसे, जनजातीय उप-योजना के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को जनजातीय विकास हेतु किए गए प्रयासों को पूरा करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का मूल प्रयोजन पारिवारिक आय सृजन की निम्न योजनाओं जैसे कृषि, बागवानी, लघु सिंचाई, मृदा संरक्षण, पशुपालन, वन, शिक्षा, सहकारिता, मत्स्य पालन, गांव, लघु उद्योगों तथा न्यूनतम आवश्यकता संबंधी कार्यक्रमों से है। इसी प्रकार, जनजातीय विकास हेतु परियोजनाओं की लागत को पूरा करने तथा अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन स्तर को राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भी अनुदान दिया जाता है। जनजातीय समाज के विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करने हेतु भी उक्त निधियों के कुछ हिस्से का प्रयोग किया जाता है।राज्य सरकारों को वित्त उपलब्ध कराने सम्बंधी उक्त दो योजनाओं का केवल उदाहरण के लिए वर्णन किया गया है, अन्यथा इसी प्रकार की कई योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में जनजाति समाज के सदस्यों को सीधे ही लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से भी केंद्र सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमे मुख्य रूप से शामिल हैं - (1) आदिवासी उत्पादों और उत्पादन विपणन विकास की योजना; (2) एमएसपी योजना की मूल्य श्रृंखला के विकास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वनोपज के विपणन हेतु योजना; (3) आदिवासी उत्पादों या निर्माण योजना के विकास और विपणन के लिए संस्थागत सहयोग की योजना; (4) आदिवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना; (5) जनजातीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की योजना; (6) जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के लिए अनुदान योजना; (7) उत्कृष्ट केन्द्रों के समर्थन के लिए वित्तीय सहायता योजना जिसका लाभ जनजातीय विकास और अनुसंधान क्षेत्र में काम कर रहे विश्वविद्यालयों और संस्थानों को दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न गैर सरकारी संगठनों की संस्थागत संसाधन क्षमताओं को बढ़ाना और मजबूत बनाना है ताकि इन अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालय के विभागों द्वारा आदिवासी समुदायों पर गुणात्मक, क्रिया उन्मुख और नीति अनुसंधान का संचालन किया जा सके; (8) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) और राज्य अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एसटीएफडीसी) को न्यायसम्य (इक्विटी) सहायता प्रदान करने की योजना। यह योजना केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है और आदिवासी मामले मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है; (9) आदिवासी आवासीय विद्यालयों की स्थापना सम्बंधी योजना; (10) अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजना; (11) अनुसूचित जनजाति के छात्रों की योग्यता उन्नयन संबंधी योजना; (12) अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना। उक्त समस्त योजनाओं की विस्तृत जानकारी उक्त वर्णित पोर्टल पर उपलब्ध है।इसी प्रकार केंद्र सरकार के साथ साथ कई राज्य सरकारें भी जनजाति समाज के लाभार्थ स्वतंत्र रूप से कुछ योजनाओं का संचालन करती है। मध्यप्रदेश, भारत के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गिना जाता है एवं मध्यप्रदेश में विविध, समृद्ध एवं गौरवशाली जनजातीय विरासत है जिसका कि मध्यप्रदेश में न केवल संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है, अपितु जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास तथा जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कई प्रकार के कार्य भी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में भारत की कुल जनजातीय जनसंख्या की 14.64% जनसंख्या निवास करती है। भारत में 10 करोड़ 45 लाख जनजाति जनसंख्या है, वहीं मध्यप्रदेश में 01 करोड़  53 लाख जनजाति जनसंख्या है। भारत की कुल जनसंख्या में जनजातीय जनसंख्या का प्रतिशत 8.63 है और मध्यप्रदेश में कुल जनसंख्या में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत 21.09 है। मध्यप्रदेश में जनजाति उपयोजना क्षेत्रफल, कुल क्षेत्रफल का 30.19% है। प्रदेश में 26 वृहद, 5 मध्यम एवं 6 लघु जनजाति विकास परियोजनाएं संचालित हैं तथा 30 माडा पॉकेट हैं। मध्यप्रदेश में कुल 52 जिलों में 21 आदिवासी जिले हैं, जिनमें 6 पूर्ण रूप से जनजाति बहुल जिले तथा 15 आंशिक जनजाति बहुल जिले हैं। मध्यप्रदेश में 89 जनजाति विकास खंड हैं। मध्यप्रदेश के 15 जिलों में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया एवं सहरिया के 11 विशेष पिछड़ी जाति समूह अभिकरण संचालित हैं।मध्यप्रदेश सरकार जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास के साथ ही उनके स्वास्थ्य एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। (1) मध्यप्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल 15 जिलों में आहार अनुदान योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह रू. 1000 की राशि जमा की जाती है। (2) आकांक्षा योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के 11वीं एवं 12वीं कक्षा के प्रतिभावान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जईई, नीट, क्लेट की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग एवं छात्रावास की सुविधा प्रदान की जाती है। (3) प्रतिभा योजना के अंतर्गत जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शासकीय शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। (4) आईआईटी, एम्स, क्लेट तथा एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पर रू. 50 हजार रूपये की राशि तथा अन्य परीक्षाओं जेईई, नीट, एनआईआईटी, एफडीडीआई, एनआईएफटी, आईएचएम के माध्यम से प्रवेश लेने पर रू. 25 हजार रूपये की राशि प्रदान की जाती है। (5) महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले अनुसूचित जनजाति के जो विद्यार्थी गृह नगर से बाहर अन्य शहरों में अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें वहां आवास के लिए संभाग स्तर पर 2000 रूपये, जिला स्तर पर 1250 रूपये तथा विकास खंड एवं तहसील स्तर पर 1000 रूपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता, आवास सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की जाती है। (6) इसी प्रकार की सहायता अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को विदेश स्थित उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन के लिए भी प्रदान की जाती है।(7) अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए प्रदेश के 89 जनजाति विकास खंडों में प्राथमिक शालाओं से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर की शालाएं संचालित की जा रही हैं जिनमें विद्यार्थियों को प्री-मेट्रिक तथा पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति दी जा रही है। (8) मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति के ऐसे विद्यार्थियों, जो सिविल सेवा परीक्षा में निजी संस्थाओं द्वारा कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं, को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही अनुसूचित जनजाति के प्रदेश के ऐसे विद्यार्थी, जो सिविल सेवा परीक्षा की प्राथमिक परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, उन्हें 40 हजार रूपये, जो मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं उन्हें 60 हजार रूपये तथा साक्षात्कार सफल होने पर 50 हजार रुपए की राशि दी जाती है। (9) मध्यप्रदेश में जनजातीय लोक कलाकृतियों एवं उत्पादों को लोकप्रिय करने तथा उनसे जनजाति वर्ग को लाभ दिलाए जाने के उद्देश्य से उनकी जी आई टैगिंग कराई जा रही है। प्रथम चरण में 10 जनजाति लोक कलाकृतियों एवं उत्पादों  की जीआई ट्रैगिंग कराए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।प्रहलाद सबनानीसेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  14 November 2022

15 नवम्बर 2022 जनजाति गौरव दिवस के शुभ अवसर पर विशेष लेख

जनजाति समाज के लिए चलाई जा रही आर्थिक विकास की योजनाएंजनजाति समाज बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए देश में दूर दराज इलाकों के सघन जंगलो के बीच वनों में रहता है। जनजाति समाज के सदस्य बहुत ही कठिन जीवन व्यतीत करते रहे हैं एवं देश के वनों की सुरक्षा में इस समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। चूंकि यह समाज भारत के सुदूर इलाकों में रहता है अतः देश के आर्थिक विकास का लाभ इस समाज के सदस्यों को कम ही मिलता रहा है। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार एवं कई राज्य सरकारों ने विशेष रूप से जनजाति समाज के लिए कई योजनाएं इस उद्देश्य से प्रारम्भ की हैं कि इस समाज के सदस्यों को राष्ट्र विकास की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके एवं इस समाज की कठिन जीवनशैली को कुछ हद्द तक आसान बनाया जा सके। भारत में सम्पन्न हुई वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 10.43 करोड़ है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है।  जनजाति समाज के सदस्यों को भारतीय राजनीति की मुख्यधारा में शामिल किए जाने के प्रयास भी किए जाते रहे हैं एवं इस समाज के कई प्रतिभाशाली सदस्य तो कई बार केंद्र सरकार के मंत्री, राज्यपाल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री के पदों तक भी पहुंचे हैं। आज भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भी आदिवासी समाज से ही आती हैं।केंद्र सरकार द्वारा जनजाति समाज को केंद्र में रखकर उनके लाभार्थ चलाई जा रही विभिन योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से एक विशेष पोर्टल का निर्माण किया है। जिसकी लिंक है - भारत सरकार का राष्ट्रीय पोर्टल https://www.इंडिया.सरकार.भारत/ - इस लिंक को क्लिक करने के बाद “खोजें” के बॉक्स में जनजाति समाज को दी जाने वाली सुविधाएं टाइप करने से, भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न सुविधाओं की सूची निकल आएगी एवं इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रपत्रों की सूची भी डाउनलोड की जा सकती है।जनजाति समाज के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को दो प्रकार से चलाया जा रहा है। कई योजनाओं का सीधा लाभ जनजाति समाज के सदस्यों को प्रदान किया जाता है। साथ ही, कुछ योजनाओं के अंतर्गत राज्य सरकारों को विशेष केंद्रीय सहायता एवं अनुदान प्रदान किया जाता है और इन योजनाओं को राज्य सरकारों द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। जैसे, जनजातीय उप-योजना के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को जनजातीय विकास हेतु किए गए प्रयासों को पूरा करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इस सहायता का मूल प्रयोजन पारिवारिक आय सृजन की निम्न योजनाओं जैसे कृषि, बागवानी, लघु सिंचाई, मृदा संरक्षण, पशुपालन, वन, शिक्षा, सहकारिता, मत्स्य पालन, गांव, लघु उद्योगों तथा न्यूनतम आवश्यकता संबंधी कार्यक्रमों से है। इसी प्रकार, जनजातीय विकास हेतु परियोजनाओं की लागत को पूरा करने तथा अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन स्तर को राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों के बराबर लाने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भी अनुदान दिया जाता है। जनजातीय समाज के विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए आवासीय विद्यालय स्थापित करने हेतु भी उक्त निधियों के कुछ हिस्से का प्रयोग किया जाता है।राज्य सरकारों को वित्त उपलब्ध कराने सम्बंधी उक्त दो योजनाओं का केवल उदाहरण के लिए वर्णन किया गया है, अन्यथा इसी प्रकार की कई योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में जनजाति समाज के सदस्यों को सीधे ही लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से भी केंद्र सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिनमे मुख्य रूप से शामिल हैं - (1) आदिवासी उत्पादों और उत्पादन विपणन विकास की योजना; (2) एमएसपी योजना की मूल्य श्रृंखला के विकास के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वनोपज के विपणन हेतु योजना; (3) आदिवासी उत्पादों या निर्माण योजना के विकास और विपणन के लिए संस्थागत सहयोग की योजना; (4) आदिवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना; (5) जनजातीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की योजना; (6) जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के लिए अनुदान योजना; (7) उत्कृष्ट केन्द्रों के समर्थन के लिए वित्तीय सहायता योजना जिसका लाभ जनजातीय विकास और अनुसंधान क्षेत्र में काम कर रहे विश्वविद्यालयों और संस्थानों को दिया जाता है। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न गैर सरकारी संगठनों की संस्थागत संसाधन क्षमताओं को बढ़ाना और मजबूत बनाना है ताकि इन अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालय के विभागों द्वारा आदिवासी समुदायों पर गुणात्मक, क्रिया उन्मुख और नीति अनुसंधान का संचालन किया जा सके; (8) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) और राज्य अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एसटीएफडीसी) को न्यायसम्य (इक्विटी) सहायता प्रदान करने की योजना। यह योजना केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है और आदिवासी मामले मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है; (9) आदिवासी आवासीय विद्यालयों की स्थापना सम्बंधी योजना; (10) अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की छात्रवृत्ति योजना; (11) अनुसूचित जनजाति के छात्रों की योग्यता उन्नयन संबंधी योजना; (12) अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना। उक्त समस्त योजनाओं की विस्तृत जानकारी उक्त वर्णित पोर्टल पर उपलब्ध है।इसी प्रकार केंद्र सरकार के साथ साथ कई राज्य सरकारें भी जनजाति समाज के लाभार्थ स्वतंत्र रूप से कुछ योजनाओं का संचालन करती है। मध्यप्रदेश, भारत के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गिना जाता है एवं मध्यप्रदेश में विविध, समृद्ध एवं गौरवशाली जनजातीय विरासत है जिसका कि मध्यप्रदेश में न केवल संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है, अपितु जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास तथा जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर कई प्रकार के कार्य भी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में भारत की कुल जनजातीय जनसंख्या की 14.64% जनसंख्या निवास करती है। भारत में 10 करोड़ 45 लाख जनजाति जनसंख्या है, वहीं मध्यप्रदेश में 01 करोड़  53 लाख जनजाति जनसंख्या है। भारत की कुल जनसंख्या में जनजातीय जनसंख्या का प्रतिशत 8.63 है और मध्यप्रदेश में कुल जनसंख्या में जनजाति जनसंख्या का प्रतिशत 21.09 है। मध्यप्रदेश में जनजाति उपयोजना क्षेत्रफल, कुल क्षेत्रफल का 30.19% है। प्रदेश में 26 वृहद, 5 मध्यम एवं 6 लघु जनजाति विकास परियोजनाएं संचालित हैं तथा 30 माडा पॉकेट हैं। मध्यप्रदेश में कुल 52 जिलों में 21 आदिवासी जिले हैं, जिनमें 6 पूर्ण रूप से जनजाति बहुल जिले तथा 15 आंशिक जनजाति बहुल जिले हैं। मध्यप्रदेश में 89 जनजाति विकास खंड हैं। मध्यप्रदेश के 15 जिलों में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया एवं सहरिया के 11 विशेष पिछड़ी जाति समूह अभिकरण संचालित हैं।मध्यप्रदेश सरकार जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास के साथ ही उनके स्वास्थ्य एवं जनजाति बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। (1) मध्यप्रदेश के विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल 15 जिलों में आहार अनुदान योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में प्रतिमाह रू. 1000 की राशि जमा की जाती है। (2) आकांक्षा योजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के 11वीं एवं 12वीं कक्षा के प्रतिभावान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जईई, नीट, क्लेट की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग एवं छात्रावास की सुविधा प्रदान की जाती है। (3) प्रतिभा योजना के अंतर्गत जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शासकीय शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। (4) आईआईटी, एम्स, क्लेट तथा एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पर रू. 50 हजार रूपये की राशि तथा अन्य परीक्षाओं जेईई, नीट, एनआईआईटी, एफडीडीआई, एनआईएफटी, आईएचएम के माध्यम से प्रवेश लेने पर रू. 25 हजार रूपये की राशि प्रदान की जाती है। (5) महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले अनुसूचित जनजाति के जो विद्यार्थी गृह नगर से बाहर अन्य शहरों में अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें वहां आवास के लिए संभाग स्तर पर 2000 रूपये, जिला स्तर पर 1250 रूपये तथा विकास खंड एवं तहसील स्तर पर 1000 रूपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता, आवास सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की जाती है। (6) इसी प्रकार की सहायता अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को विदेश स्थित उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन के लिए भी प्रदान की जाती है।(7) अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए प्रदेश के 89 जनजाति विकास खंडों में प्राथमिक शालाओं से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर की शालाएं संचालित की जा रही हैं जिनमें विद्यार्थियों को प्री-मेट्रिक तथा पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति दी जा रही है। (8) मध्यप्रदेश के अनुसूचित जनजाति के ऐसे विद्यार्थियों, जो सिविल सेवा परीक्षा में निजी संस्थाओं द्वारा कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं, को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही अनुसूचित जनजाति के प्रदेश के ऐसे विद्यार्थी, जो सिविल सेवा परीक्षा की प्राथमिक परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, उन्हें 40 हजार रूपये, जो मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं उन्हें 60 हजार रूपये तथा साक्षात्कार सफल होने पर 50 हजार रुपए की राशि दी जाती है। (9) मध्यप्रदेश में जनजातीय लोक कलाकृतियों एवं उत्पादों को लोकप्रिय करने तथा उनसे जनजाति वर्ग को लाभ दिलाए जाने के उद्देश्य से उनकी जी आई टैगिंग कराई जा रही है। प्रथम चरण में 10 जनजाति लोक कलाकृतियों एवं उत्पादों  की जीआई ट्रैगिंग कराए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।प्रहलाद सबनानीसेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  14 November 2022

भारत का भविष्य गढ़ने का पंडित नेहरू का सपना है "बाल दिवस"

  नेहरु जी ने कहा था  "आदमी बड़ा नहीं होता है, काम बड़ा होता है "   14 नवंबर को महान स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। उनकी जयंती को हम सब बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। ऐसे में कई बार मन में सवाल आता है कि हम और भी किसी रूप में पंडित नेहरू का जन्मदिन मना सकते थे, जैसे कि राष्ट्र निर्माता के रूप में, प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में, लोकतंत्र को मजबूत करने वाले व्यक्ति के रूप में। फिर क्यों उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में चुना गया। इस बात को समझना है तो पंडित नेहरू के उन कार्यों पर निगाह डालनी पड़ेगी जो उन्होंने भारत का प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद किये। उन्होंने सबसे ज्यादा ध्यान अगर किसी चीज पर दिया तो वह था भारत के भविष्य का निर्माण। वह भविष्य किसके लिए बना रहे थे? भारत की आने वाली नस्लों के लिए, भारत के बच्चों के लिए। भारत के बच्चे आगे चलकर एक सभ्य, सुसंस्कृत और सुशिक्षित नागरिक के तौर पर विकसित हो और एक खुशहाल मुल्क बनाएं  यही पंडित नेहरू का सपना और कार्यक्रम था। उन्होंने पहला काम यह किया कि भारत का कोई बच्चा भूखा ना रहे। आजादी के समय भारत में बड़े पैमाने पर भुखमरी की स्थिति थी और देश खाद्यान्न के भारी संकट से जूझ रहा था। ज्यादा उपज बढ़ाने के लिए पंडित नेहरू ने बड़े बांध और सिंचाई पर पूरा ध्यान लगा दिया। पंडित नेहरू ने सन 1955 तक भारत में सिंचित जमीन का इतना नया रकबा जोड़ दिया था जितना कि उस समय अमेरिका में कुल सिंचित क्षेत्र था। अपने शासन के 17 वर्ष में वह भारत को खाने के सामान की आत्मनिर्भरता की दहलीज तक ले आए थे और बाकी का काम लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में पूरा हुआ। दूसरा महत्वपूर्ण काम उन्होंने बच्चों के लिए यह किया है कि देश में शिक्षा के विश्वस्तरीय संस्थानों की स्थापना की। यह संस्थान सरकारी पैसे से बनाए गए और यहां पढ़ाई लगभग मुफ्त रही, लेकिन संस्थानों के प्रबंधन में सरकार का हस्तक्षेप ना के बराबर रहा। असल में पंडित नेहरू चाहते थे की ज्ञानी और विद्वान लोग अपने अनुसार संस्थानों को चलाएं और वहां बेवजह बाबूशाही हावी ना हो। भारत के सभी प्रमुख आईआईटी, आईआईएम, ऐम्स आदि संस्थान के निर्माण करने का श्रेय सीधे-सीधे पंडित नेहरू को ही जाता है। हम सब देखते हैं कि आज आजादी के 75 वर्ष बाद भी वही संस्थान देश में सर्वश्रेष्ठ हैं जो पंडित नेहरू ने बनाए। इससे पता चलता है कि उन्होंने जो भी काम किया, बहुत ठोस ढंग से किया और भविष्य को निगाह में रखकर किया। बच्चों के प्रति इसी लगाव के कारण उन्हें पूरा देश चाचा नेहरू कहता था। यह चाचा नेहरु का ही विजन था कि आप देखें तो जो भी संस्थान या अन्य चीजें उन्होंने बनाई उनमें बड़े-बड़े खेल के मैदान, कसरत करने के स्थान, टहलने के लिए खूब सारी जगह जरूर मिलेगी। पंडित जी को पता था कि बच्चे एक खुशहाल और खुले वातावरण में ही अपना संपूर्ण विकास कर सकते हैं चारदीवारी की बंदिशों में बुद्धि अपनी असीमित क्षमताओं का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पाती। जिस समय नेहरू जी देश के प्रधानमंत्री बने तब देश में उच्च शिक्षा की व्यवस्था तो बहुत कम थी ही साथ ही प्राथमिक शिक्षा भी ना के बराबर थी। नेहरू जी ने यह सुनिश्चित किया कि गांव-गांव में प्राथमिक विद्यालय खुल जाएं और बच्चे वहां तालीम हासिल कर सकें। शिक्षा के माध्यम को लेकर भी बहुत ज्यादा सजग थे। आजादी के पहले उच्च शिक्षा का माध्यम तो सिर्फ अंग्रेजी था। वहीं स्कूली शिक्षा या तो अंग्रेजी में या फिर फारसी प्रभाव वाली उर्दू में दी जाती थी। नेहरू जी ने सिद्धांत स्थापित किया है कि किसी भी स्थिति में बच्चे को प्राथमिक शिक्षा उसकी मातृभाषा में ही दी जाए। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अगर उत्तर भारत के बहुत से परिवार किसी दूसरी भाषा की प्रमुखता वाले महानगर में रहते हैं तो वहां भी इस बात की कोशिश होनी चाहिए कि हिंदी भाषी परिवारों के बच्चों के लिए हिंदी में शिक्षा का इंतजाम हो। वह अंग्रेजी के शत्रु नहीं थे लेकिन मातृ भाषाओं में पढ़ाई के कट्टर समर्थक थे। अभी एक 2 साल पहले भारत की जो नई शिक्षा नीति आई है उसमें भी पंडित जवाहरलाल नेहरु कि इसी दृष्टि को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। पंडित नेहरू और बच्चों से उनके प्यार के बारे में बहुत सी बातें कही जा सकती हैं लेकिन यहां मैं पंडित नेहरू का वह भाषण याद दिलाना चाहता हूं जो उन्होंने आईआईटी खड़गपुर जो कि देश की पहली आईआईटी थी उसके पहले दीक्षांत समारोह के वक्तव्य में दिया था। नेहरू जी ने आईआईटी के पहले बैच के नौजवान इंजीनियरों से कहा था कि आप लोग यहां से पास होकर जा रहे हैं। इंजीनियर बन रहे हैं। जाहिर है? आप लोग एक सम्मानजनक जीवन जी पाएंगे। आपके सामने आर्थिक संकट नहीं होंगे। आप अच्छी घर गृहस्थी बनाएंगे और सुख से रहेंगे। लेकिन अगर आप समझते हैं कि यही करना इस आईआईटी में पढ़ने का मकसद है तो फिर आपका पढ़ना बेकार है। आप यहां से जाइये और नए हिंदुस्तान का निर्माण करिए। ऐसे भी बहुत से देश हैं जो भारत से भी ज्यादा पिछड़े हैं, हम चाहते हैं कि अपने देश के साथ ही उन पिछड़े देशों को आगे बढ़ाने में भी आप अपने हुनर का परिचय दें। फिर नेहरु जी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि "आदमी बड़ा नहीं होता है, काम बड़ा होता है। छोटा आदमी भी बड़े काम से जुड़ जाता है तो उसके ऊपर बड़प्पन के कुछ छींटे पड़ जाते हैं। तो जाइए और आपने सामने जिंदगी में कोई बड़ा लक्ष्य रखिए और उसे पूरा करने में अपना जीवन समर्पित करिए।" पंडित नेहरू कि यह वह सोच है जिसके कारण उनके जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। बच्चों को लाड़ दुलार और प्यार तो हर मां-बाप और चाचा कर सकता है, लेकिन बच्चों का भविष्य गढ़ना और उनके माध्यम से भारत माता का नाम ऊपर करने का सपना देखना पंडित नेहरू ही कर सकते हैं। इसीलिए वह देश के चाचा नेहरू हैं और उनका जन्म दिवस बाल दिवस।   (प्रवीण कक्कड़)

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 MadhyaBharat  13 November 2022

आत्म निर्भरता एवं स्वदेशी अपनाकर चीन को आर्थिक क्षेत्र में दी जा सकती है मात

  चीन में आर्थिक गतिविधियों में कमी आई  जिसके चलते भारत से चीन को निर्यात कम हुआ    भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 में वस्तुओं के आयात के मामले में एक बार पुनः भारत की निर्भरता चीन पर बढ़ी है। हालांकि पिछले 3 साल के दौरान भारत के चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे परंतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में चीन एवं भारत के बीच 11,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 8,600 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में कहीं अधिक है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़े यह अच्छी बात हो सकती है परंतु चिंता का विषय यह है कि चीन से भारत में आयात बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और भारत से चीन को निर्यात उस गति से नहीं बढ़ पा रहे है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत में चीन से आयात 9,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6,530 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा था। वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम दो माह में भी स्थिति संभलने के स्थान और अधिक बिगड़ी ही है, अर्थात इस दौरान चीन को भारत से निर्यात 31 प्रतिशत से घटा है और भारत में चीन से आयात 12.75 प्रतिशत बढ़ गया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत के कुल व्यापारिक आयात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कोरोना महामारी के बाद भारत में चूंकि आर्थिक विकास बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है अतः कई वस्तुओं का आयात चीन से बहुत भारी मात्रा में किया जा रहा है। परंतु चीन अभी भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है और चीन के कुछ प्रांतों में अभी भी लाक्डाउन लगाया जा रहा है अतः चीन में आर्थिक गतिविधियों में कमी आई है जिसके चलते भारत से चीन को निर्यात कम होता जा रहा है। कुछ समय पूर्व की गई एक रिसर्च के अनुसार, भारत चीन से कुल 6,367 उत्पादों का आयात कर रहा था। जिनका मूल्य 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर (कुल आयात का 15.3 प्रतिशत भाग) था। कई मदों में तो भारत कुल आयात का एक बड़ा भाग चीन से आयात कर रहा था। 893 उत्पादों का तो 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत भाग (759 करोड़ अमेरिकी डॉलर) चीन से आयात किया जा रहा था। इसी प्रकार 364 उत्पादों का 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत भाग (549 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 386 उत्पादों का 70 प्रतिशत से 80 प्रतिशत भाग (909 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 428 उत्पादों का 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत भाग (656 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 476 उत्पादों का 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत भाग (972 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 461 उत्पादों का 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत भाग (914 करोड़ अमेरिकी डॉलर), 550 उत्पादों का 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत भाग (890 करोड़ अमेरिकी डॉलर) एवं 706 उत्पादों का 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत भाग (524 करोड़ अमेरिकी डॉलर) चीन से आयात किया जा रहा था। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट रूप से झलकता है कि इन उत्पादों के आयात के मामले में भारत की चीन पर जरूरत से अधिक निर्भरता हो गई है। उक्त परिस्थितियां निर्मित करने में दरअसल देश की जनता ही अधिक जवाबदार है, क्योंकि देश के नागरिक विदेशी उत्पादों के पीछे दीवानगी की हद्द तक भागते हैं। और फिर, चीन के निम्न स्तरीय उत्पाद तो बहुत सस्ते दामों पर ही उपलब्ध हो जाते हैं। देश के व्यापारी बंधुओं ने भी इन उत्पादों का चीन से भारी मात्रा में आयात कर देश की जनता को उपलब्ध कराने में अपनी अहम भूमिका अदा की। इससे इन उत्पादों का भारत में निर्माण बंद हो गया। जिसके परिणामस्वरूप देश में रोजगार के कई अवसर नष्ट हो गए एवं कई कुटीर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग बंद हो गए। हालांकि पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत के कई सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं स्वदेशी जागरण मंच भी शामिल है ने चीन में निर्मित वस्तुओं के स्थान पर भारत में निर्मित वस्तुओं के उपयोग करने की मुहिम चलाई थी, जिसका अच्छा परिणाम भी दिखाई देने लगा था और इसके चलते वित्तीय वर्ष 2017-18 के बाद से चीन से आयात लगातार कम हो रहे थे। जिसके परिणाम स्वरूप भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा जो वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था वह वित्तीय वर्ष 2018-19 में घटकर 5,356 करोड़ अमेरिकी डॉलर का, वित्तीय वर्ष 2019-20 में घटकर 4,866 करोड़ अमेरिकी डॉलर का और वित्तीय वर्ष 2020-21 में और भी घटकर 4,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया था। परंतु, वित्तीय वर्ष 2021-22 में पुनः बढ़कर 7,290 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया है। अब यह तथ्य किसी से छुपा नहीं है कि भारत द्वारा चीन से आयात बढ़ने से चीन की आर्थिक सुदृढ़ता मजबूत हो रही है और वह भारत के बॉर्डर पर भारत को ही आंख दिखा रहा है। अतः भारत को इस सम्बंध में अब पुनः विचार करने की आवश्यकता है कि किस प्रकार चीन से आयात की जाने वाली वस्तुओं का उत्पादन भारत में ही बढ़ाया जाय एवं चीन से इन वस्तुओं के आयात कम किए जा सकें। भारत में निर्यात प्रतिस्पर्धी उद्योग स्थापित किए जाने की आज महती आवश्यकता है। हालांकि हाल ही के समय में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना इस सम्बंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है। कुल मिलाकर इस सम्बंध में अब देश में गम्भीर प्रयास किए जाने की महती आवश्यकता है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक प्रतिवेदन के अनुसार भारत में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को लागू कर चीन से आयात को यदि 50 प्रतिशत से कम किया जा सके तो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 2,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वृद्धि की जा सकती है। आज आवश्यकता इस बात की भी है कि भारतीय नागरिक भी अपनी सोच में गुणात्मक परिवर्तन लाएं एवं चीन के निम्न गुणवत्ता वाले सामान को केवल इसलिए नहीं खरीदें क्योंकि यह सस्ता है। इस प्रकार की सोच में आमूलचूल परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। भारत में निर्मित सामान, चाहे वह थोड़ा महंगा ही क्यों न हो, को ही उपयोग में लाया जाना चाहिए। ताकि भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ाया जा सके एवं रोजगार के अधिक से अधिक अवसर भारत में ही उत्पन्न होने लगें। साथ ही, अब यदि भारत को आत्म निर्भर बनाने की स्थिति में लाना है तो हमें अपने मौलिक चिंतन में भी परिवर्तन करना होगा। आज यदि हम वैश्विक बाजारीकरण की मान्यताओं पर विश्वास करते हैं तो इस पर देश को पुनर्विचार करने की सख्त जरूरत है। चीन सहित अन्य देशों से हमें शुरुआती दौर में कम से कम उन वस्तुओं के आयात को बलपूर्वक रोकना चाहिए जिनका निर्माण हम भारत में ही आसानी से कर सकते हैं। इस बात पर भी अब चिंतन की आवश्यकता है कि चीन से हम किस हद्द तक के रिश्ते कायम रखें।    प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  13 November 2022

ऊर्जा-संरक्षण के लिये 365 दिन सजग रहना जरूरी

आचरण में दिखे ऊर्जा-संरक्षण के प्रति चिंता : राज्यपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि ऊर्जा संरक्षण के लिये 365 दिन सजग रहना जरूरी है। ऊर्जा संरक्षण के प्रति चिंता आचरण में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि बूँद-बूँद से सागर बनता है। व्यक्तिगत स्तर पर ऊर्जा के संरक्षण का संकल्प, व्यवहार और छोटी-छोटी सावधानियाँ ही राष्ट्र को ऊर्जा में आत्म-निर्भर बनाएंगी। राज्यपाल पटेल आज रविन्द्र भवन में केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के ऊर्जा-संरक्षण राष्ट्रीय अभियान 2022 में राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की बचत वास्तव में उसका उत्पादन है। ऊर्जा के सही उपयोग के संबंध में उपयोगकर्ता का जागरूक और ऊर्जा-संरक्षण के प्रति सजग होना जरूरी है। हर क्षेत्र में आत्म-निर्भरता नए भारत के निर्माण के लिए जरूरी है। ऊर्जा की मांग और उत्पादन में संतुलन के लिए उत्पादन में वृद्धि, उपयोग में संयम और वितरण में समानता भी होना चाहिए। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2070 तक ग्रीन हाउस उत्सर्जन को नेट जीरो पर लाने के लिए संकल्प लिया गया है। अभियान के द्वारा जन-मानस को ऊर्जा-संरक्षण के संबंध में सजग बनाने के लिए प्रयास सराहनीय है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि चित्रों को देखने से साफ पता चल रहा है कि बच्चों की व्यवहारिक समझ और कल्पनाशीलता, पर्यावरण की समस्या और समाधान के प्रति सजग है। चित्रों में विषय की समझ और उसके प्रस्तुतिकरण को देख कर मन हर्षित हुआ है। चित्रों में बच्चों की रचनात्मकता, प्रधानमंत्री के ग्रीन हाऊस उत्सर्जन को नेट जीरो पर लाने के संकल्प की पूर्ति का सुखद संकेत है। राज्यपाल ने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने आशा की कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित बच्चे देश में मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे और स्वयं को अच्छे नागरिक के रूप में समाज में स्थापित करेंगे। प्रारम्भ में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रतिभागी बच्चों के चित्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। निर्णायक मण्डल के सदस्यों और प्रतियोगिता के आयोजकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल को एन.एच.डी.सी की और से स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया। राज्यपाल पटेल ने कक्षा 5 से 7 के ग्रुप में प्रथम पुरस्कार दिव्यांशी सिंह को, द्वितीय नाइसा यादव को एवं तृतीय पुरस्कार से श्रेया चौधरी को पुरस्कृत किया। कक्षा 8 से 10 के ग्रुप में तृतीय पुरस्कार से परी जैन को, द्वितीय से नीतीषा गोखरू को एवं प्रथम पुरस्कार से निश्चला महेश्वरी को पुरस्कृत किया। प्रबंध निदेशक एन.एच.डी.सी  विजय कुमार सिन्हा ने बताया की सुनहरे भविष्य के लिए ऊर्जा की बचत आवश्यक है। ऊर्जा-संरक्षण के प्रति जन-जागृति के लिए देश में दो श्रेणियों में स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता की गई है। राज्य स्तर पर कक्षा 5 से 7 और कक्षा 8 से कक्षा 10 के बच्चों की दो श्रेणी में प्रतियोगिता हुई। प्रत्येक श्रेणी के 50 बच्चों को प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र, 2 हजार रुपये और एल.ई.डी बल्ब प्रदाय किया जायेगा। दोनों श्रेणी के 10-10 बच्चों को प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र, 7 हजार 5 सौ रुपये और एल.ई.डी बल्ब प्रदाय किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी के प्रथम पुरस्कार में 50 हजार, द्वितीय में 30 हजार और तृतीय में 20 हजार रूपये की राशि के पुरस्कार दिये गये। कार्यक्रम में प्रतिभागिता के लिए बच्चों और उनके पालकों को वातानूकुलित श्रेणी की रेल यात्रा का व्यय भी दिया गया है। मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन  अशोक कुमार ने आभार माना।

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 MadhyaBharat  13 November 2022

खाद के संबंध में भ्रम फैलाने वालों और गड़बड़ी करने वालों के विरूद्ध होगी कार्यवाही

  मुख्यमंत्री चौहान ने किया आश्वस्त, किसानों को जरूरत के अनुसार मिलेगी खाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है प्रदेश में किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था है। निरंतर आपूर्ति की जा रही है। कुछ तत्व खाद के संकट की अफवाह फैला कर अराजकता का माहौल बनाना चाहते हैं। ऐसे भ्रम फैलाने वाले लोगों के विरूद्ध सख्ती से कार्यवाही की जाएगी। गड़बड़ी करने वालों के विरुद्ध भी कार्यवाही होगी। मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं आने देंगे। प्रदेश में खाद के रैक निरंतर आ रहे हैं। थोड़े समय के लिए तकनीकी कारणों से कुछ दिक्कत अवश्य आई थी जिसे दूर कर लिया गया है। किसानों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार किसानों को आवश्यकतानुसार खाद उपलब्ध करवा रही है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चौहान ने निरंतर समीक्षा कर खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था सुचारू बनाने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों के अधिकारी जिलों में भ्रमण कर व्यवस्थाएँ भी देख रहे हैं।

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 MadhyaBharat  13 November 2022

श्रेष्ठ कार्य के लिए राज्य और जिला स्तर पर पुरस्कृत होंगी आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ

  मुख्यमंत्री चौहान ने दिलाया सुपोषण का संकल्प-कोई बच्चा अंडरवेट न रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हम सब मिल कर यह चुनौती स्वीकार करें कि आगामी एक साल में प्रदेश में कोई बच्चा कम वजन का नहीं रहेगा। प्रत्येक आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका अपने क्षेत्र के हर बच्चे और महिला को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने को केवल शासकीय कार्य नहीं अपितु अपना व्यक्तिगत कर्त्तव्य मानें। महिला-बाल विकास मात्र विभाग नहीं, मेरा अपना परिवार है। महिलाओं - बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार तथा महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे इस विभाग के मैदानी अमले की मेहनत और विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों की सजगता एवं जागरूकता की समाज और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। आज का यह कार्यक्रम, प्रदेश की जनता की ओर से विभाग की सेवाओं का सम्मान तथा प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का कार्यक्रम है। राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और पर्यवेक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही प्रतिवर्ष जिला स्तर पर भी श्रेष्ठ कार्य के लिए सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान महिला-बाल विकास के मैदानी अमले के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं उत्प्रेरणा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।   मुख्यमंत्री चौहान ने आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और पर्यवेक्षकों को पुरस्कृत किया   मुख्यमंत्री ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। बाल भवन के बच्चों द्वारा मध्यप्रदेश गान की प्रस्तुति दी गई, जिसके सम्मान में सभी खड़े हुए। मुख्यमंत्री चौहान ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आँगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक और अधिकारियों को पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिला कार्यालय वर्चुअली जुड़े तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने भी वर्चुअल सहभागिता की।   राज्‍य सरकार बेटियों को बोझ मानने के सभी कारणों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि माँ-बहन और बेटी को उनका अधिकार दिलाना मेरे जीवन का उद्देश्य है। प्रदेश में लिंगानुपात बराबर करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। बेटे की चाह ने बेटियों के साथ बहुत अन्याय किया है। हमारी सरकार बेटियों को बोझ समझने के सब कारणों को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2011 की जनगणना के समय प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 919 था। एनएचएफएस-5 के अनुसार जन्म के समय लिंग अनुपात 927 से बढ़ कर 956 हो गया। महिला-बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में समाज का हरसंभव सहयोग लिया जाएगा। अडाप्ट एन आँगनवाड़ी में जन-सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समाज भी आँगनवाड़ियों के लिए अधिक से अधिक सहयोग करने के लिए तत्पर है। भोपाल में आँगनवाड़ियों के लिए लोगों ने भरपूर सामग्री दी और इन्दौर से आर्थिक रूप से हरसंभव सहयोग मिला है।   उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बेटियों की फीस राज्य शासन भरेगी   मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी योजना-2 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, क्लैट की पढ़ाई तथा अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश लेने वाली लाड़ली लक्ष्मी बेटियों की फीस राज्य शासन द्वारा भरवाई जाएगी। बेटियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए हरसंभव सहायता और अवसर उपलब्ध होंगे।   महिलाओं को अधिकार के साथ सुरक्षा भी   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहाँ नगरीय निकायों और पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इसी का परिणाम है कि अब, घर की दहलीज पार नहीं करने वाली महिलाओं के आधार पर परिवार के पुरूषों को पहचान मिल रही है। उन्हें सरपंच पति, पार्षद पति के रूप में जाना जा रहा है। महिला पुलिस के रूप में कानून-व्यवस्था संभालती बहन-बेटियों को देख कर मन प्रसन्नता से भर जाता है और लगता है कि महिला सशक्तिकरण का भाव वास्तविक स्वरूप में क्रियान्वित हो रहा है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि बहन-बेटियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। कई प्रकरणों में प्रदेश में बेटियों को गलत नजर से देखने वालों को फाँसी की सजा सुनाई गई है। दुराचारी किसी भी स्थिति में बख्शे नहीं जाएंगे।   अनाथ बच्चों की देख-रेख सरकार की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोविड जैसी महामारी के दौरान प्रदेश में बच्चों की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने ली। जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया उनके लिए मुख्यमंत्री कोविड सहायता योजना लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य था।   विभागीय गतिविधियों में गड़बड़ियों की संभावनाओं को निर्मूल करें मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि महिला-बाल विकास बहुत संवेदनशील विभाग है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ, बहनों की प्रसव पूर्व जाँच कराने में मदद और उन्हें सभी टीके लगवाने के लिए प्रेरित कर जीवन सहजने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए 16 हजार रूपये की व्यवस्था की गई है। हमें विभागीय गतिविधियों में गड़बड़ियों की संभावनाओं को निर्मूल करने की ओर आगे बढ़ना है। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग व्यवस्थित और सजग रूप से हो।   मुख्यमंत्री हर त्रैमाह में करेंगे आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं से संवाद मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से मिलने, उनसे बातचीत करने और उनसे सुझाव लेने के लिए हर 3-4 माह में कार्यक्रम किए जाएंगे। साथ ही विभागीय गतिविधियों के बारे में सुझाव आमंत्रित कर व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। संचालक, महिला-बाल विकास डॉ. रामराव भोंसले ने बताया कि प्रदेश में 92 हजार 153 आँगनवाड़ी तथा 453 परियोजनाएँ संचालित हैं। विभाग में कार्यरत 1 लाख 90 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी इस कार्यक्रम से वेबकास्ट एवं अन्य वर्चुअल माध्यमों से जुड़े हैं। अपर मुख्य सचिव महिला-बाल विकास अशोक शाह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  13 November 2022

घर-घर जल पहुंचाने के लिए दूसरे राज्यों के अच्छे कामों का करें अध्ययन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जल निगम के संचालक मंडल की बैठक   घर-घर जल पहुंचाने की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। इस दिशा में मध्य प्रदेश में बेहतर काम हुआ है। यह जानकारी हर माध्यम से सभी को दी जानी चाहिए। साथ ही जिन राज्यों में घर-घर जल बचाने की दिशा में अच्छा काम हुआ है, उनका अध्ययन कराया जाए। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  जल निगम के संचालक मंडल की बैठक के दौरान कही। इसमें बताया गया कि जल निगम के कार्यों के प्रभाव का आकलन आइआइएम इंदौर कर रहा है। बैठक में बताया गया कि मिशन के अंतर्गत प्राथमिकता से कार्यों को पूरा किया गया है। इससे ग्रमीणों के जीवन स्तर पर में सुधार भी हुआ है। समूह जल प्रदाय योजनाओं के अमल से ग्रामीण भाइयों-बहनों को काफी आसानी हुई है। आइआइएम इंदौर द्वारा इन कार्यों के आकलन और अध्ययन का काम भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन के कामों में पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान दिया जाए। जल निगम के कार्यों के प्रभाव का आकलन आइआइएम इंदौर कर रहा है। बैठक में बताया गया कि मिशन के अंतर्गत प्राथमिकता से कार्यों को पूरा किया गया है। इससे ग्रमीणों के जीवन स्तर पर में सुधार भी हुआ है।  

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 MadhyaBharat  12 November 2022

एससी, एसटी और ओबीसी छात्रावासों का माह नवंबर का खाद्यान्न जारी

12 किलो ग्राम गेहूं एवं 03 किलो ग्राम चावल कुल 15 किलो के मान से खाद्यान्न का वितरण किया जाएगा  आपूर्ति नियंत्रक, भोपाल मीना मालाकार ने बताया कि जिले की कल्याणकारी संस्था एवं छात्रावास योजना अंतर्गत एनएफएसए पोर्टल पर प्रदर्शित 83 कल्याणकारी संस्थाओं, छात्रावासों के अन्तःवासियों की संख्या के मान से संस्थावार माह नवंबर 2022 के लिए गेहूं 31524 किलो ग्राम एवं चावल 6289 किलो ग्राम का आवंटन जारी कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि जिले की 83 संस्थाओं को निकटतम शासकीय उचित मूल्य दुकान से संलग्न कर खाद्यान्न पुर्नावंटित किया गया है। ऑनलाइन सूची अनुसार एस.सी., एस.टी. छात्रावासों को एक रूपये प्रति किलो की दर से तथा अन्य पिछड़ावर्ग छात्रावासों कल्याणकारी संस्थाओं को बीपीएल अनुसार प्रत्येक हितग्राही को 12 किलो ग्राम गेहूं एवं 03 किलो ग्राम चावल कुल 15 किलो के मान से खाद्यान्न का वितरण किया जाएगा।

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 MadhyaBharat  12 November 2022

भोपाल जिले में यूरिया सहित उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता

 संतुलित खाद उपयोग की सलाह उप संचालक, किसान कल्याण एवं कृषि विकास भोपाल ने बताया कि जिले की कुल संभावित आवश्यकता अनुसार जिले में पर्याप्त उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है तथा तीनों रेक पॉइंटो से लगातार यूरिया का आवंटन प्राप्त हो रहा है। एक से 10 नवम्बर के बीच जिले में 2000 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है तथा माह नवम्बर अंत तक 3000 मीट्रिक टन यूरिया और आने की संभावना है। उर्वरक आपूर्ति में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है तथा पूरे सीजन में भी आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसान भाई अफवाहों पर ध्यान न देते हुये अनावश्यक अतिरिक्त खाद की खरीदी करने से बचे एवं उर्वरक की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष रबी 2021 में 30 नवंबर 2021 तक जिले में कुल 32726 मीट्रिक टन यूरिया का विकय किया गया था एवं 09 नवंबर 2022 तक कुल 31744 मीटिक टन विक्रय किया गया है एवं जिले के डबल लॉक, मार्केटिंग सोसायटि केन्द्रों में 192.05 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। सहकारी समितियों के माध्यम से 5500 मीट्रिक टन यूरिया वितरित किया जा चुका है। केन्द्र शासन से लगातार यूरियों की रेके लगाई जा रही है जिससे जिले में यूरिया की आपूर्ति हो रही है। भोपाल जिले में सीहोर, मंडीदीप एवं सोरई इन 03 रेक पॉइंटो से खाद की आपूर्ति की जाती है। राज्य शासन द्वारा प्रतिदिन वीसी के माध्यम से खाद आपूर्ति की समीक्षा की जाकर आवश्यकता अनुसार इन रेको द्वारा उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में 4 डबल लॉक केन्द्र 34 सहकारी सोसायटियां एवं लगभग 100 निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद विक्रय किया जाता है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष रबी 2021 में 31 नवंबर 2021 तक जिले में कुल 14670 मीट्रिक टन डीएपी विक्रय किया गया था जबकि इसके विरूद्ध इस वर्ष इसी अवधि में 18627 मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। रबी फसलों की बोनी की स्थिति को देखते हुये पर्याप्त डीएपी उपलब्ध कराया जा चुका है। यूरिया बोनी के 25 से 30 दिन उपरांत देने की आवश्यकता होती है तथा जिले में माह नवम्बर अंत तक बोनी पूर्ण होने की संभावना है उसके उपरांत यूरिया का प्रथम डोज दिसम्बर माह के प्रथम, द्वितीय सप्ताह में द्वितीय डोज जनवरी माह के प्रथम सप्ताह एवं फरवरी अंत में तृतीय डोज की आवश्यकता होगी। उल्लेखनीय है कि जिले में कुल 149 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसले बोई जाती है जिसमें से लगभग 143 हजार हेक्टेयर में गेहू की बोनी होने की संभावना है। इसके आलावा चना, मटर, मसूर एवं सरसों जिले के अन्य मुख्य फसले है, फसलों के अनुसार यूरिया एवं डीएपी प्रमुख उर्वरक है जिनकी आवश्यकता इन फसलों के लिए होती है, यूरिया मुख्य रूप से गेंहू फसल में दिया जाता है जिससे की फसलों में नत्रजन की पूर्ति होती है। डीएपी नत्रजन एवं फॉसफोरस युक्त पोषक तत्व है जोकि बोनी के समय दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर पोषक तत्वों के आधार पर गेंहू में दो से तीन बोरी डीएपी तथा तीन से चार बोरी (50 किलो) की यूरिया की आवश्यकता होती है।  

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 MadhyaBharat  12 November 2022

मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक और पर्यटन महत्व के स्थानों से प्रारंभ करेंगे 5जी टेलीकॉम सेवाएँ

  मुख्यमंत्री ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए निवेशकों को दिया निमंत्रण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संचार क्षेत्र में नित नए आयाम जुड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं को इनका लाभ दिलवाने के लिए ठोस पहल की जा रही है। उज्जैन में श्री महाकाल लोक से इसी माह 5जी टेलीकॉम सेवाएँ शुरू हो रही हैं। इन्दौर और भोपाल के अलावा अन्य धार्मिक, आध्यात्मिक महत्व के स्थानों पर भी ये सेवाएँ प्रारंभ करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री चौहान ने आज मुम्बई पहुँच कर आगामी जनवरी माह में इन्दौर में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए निवेशकों को निमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने मुम्बई में रिलायंस जियो के पदाधिकारियों के साथ हुई चर्चा के बाद बताया कि छतरपुर जिले के विश्व धरोहर स्थल खजुराहो और जबलपुर के निकट पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में भी 5 जी सर्विस के फ्री वाय-फाय जोन स्थापित किए जाएंगे। मध्यप्रदेश में रिलायंस जियो संचार क्षेत्र में सेवाएँ देते हुए 50 प्रतिशत से अधिक मार्केट शेयर और रिलायंस रिटेल के स्टोर्स संचालित कर रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज टेली कम्युनिकेशन के अलावा वस्त्र व्यवसाय, केमिकल्स, हाईड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और वित्तीय सेवाओं में संलग्न है। मध्यप्रदेश में कंपनी के व्यापार का काफी विस्तार हुआ है।   निवेशकों से हुई चर्चा मुख्यमंत्री चौहान ने मुंबई में निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा में उन्हें जनवरी में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित किया और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इनमें प्रमुख रूप से महेन्द्रा एण्ड महेन्द्रा, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, बी.पी.सी.एल, केमेरिक्स बायोटेक, सिमबायोटेक फार्मा लेब, गुफिक बायोसाईंसेस और पीरामल ग्रुप शामिल हैं। मुख्यमंत्री चौहान बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज में इन्फोबीन्स लिमिटेड के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हुए। उन्होंने फार्मा और मेडिकल डिवाइसेस मैन्युफैक्चर्स के साथ भी चर्चा की।   मध्यप्रदेश में औद्योगिक के अनुकूल है वातावरण मुख्यमंत्री चौहान ने निवेशकों को बताया कि आगामी 11-12 जनवरी को इन्दौर में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट उद्योग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने निवेशकों को इस समिट में पधारने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री  चौहान ने निवेशकों को बताया कि मध्यप्रदेश में करीब सवा लाख एकड़ क्षेत्र का लैंड बैंक, 24 घंटे बिजली, तीस दिन में अपना व्यवसाय शुरू करने की उदार नीति, कुशल मानव संसाधन, औद्योगिक शांति, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, उपलब्ध है। आत्म-निर्भर भारत के लिए आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश में आत्म-निर्भरता के प्रमुख स्तंभों अधो-संरचना, सुशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थ-व्यवस्था और रोजगार पर फोकस करते हुए निरंतर कार्य हो रहा है। जहाँ तक टेक्सटाइल्स पॉलिसी की बात है, में भी रेडीमेड उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण है और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी अनेक कंपनियाँ कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में अधो-संरचनात्मक विकास हुआ है। इसका लाभ औद्योगिक इकाइयों को भी मिल रहा है। प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को रोजगार देने का कार्य आसान हुआ है। प्रारंभ में मुख्यमंत्री चौहान ने ताज प्रेसीडेन्ट में "इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश" कार्यक्रम का दीप जला कर शुभारंभ किया। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और मध्यप्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न उद्योगपति और निवेशक उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  11 November 2022

मध्यप्रदेश में फार्मा सेक्टर के विकास पर करेंगे फोकस : मुख्यमंत्री

कोविड काल में म.प्र. के फार्मा सेक्टर ने बढ़ाया था अनेक देशों के लिए सहयोग का हाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोविड की कठिन परिस्थितयों में मध्यप्रदेश के फार्मास्युटिकल सेक्टर ने देश ही नहीं विदेश में बसे लोगों की भी मदद की। मानवता की दिशा में उठे इस महत्वपूर्ण कदम से मध्यप्रदेश को यह प्रेरणा मिली है कि हमें फार्मा सेक्टर को फोकस करना चाहिए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कई जीवनरक्षक दवाइयाँ बना कर फार्मा सेक्टर मनुष्यों की सेवा करता है। एक क्षेत्र में एक सी सुविधाएँ प्रदान करते हुए औद्योगिक क्षेत्र को लाभान्वित करने से ज्यादा अच्छे परिणाम मिलेंगे। मध्यप्रदेश इस दिशा में सक्रिय रहेगा। मुख्यमंत्री  चौहान आज मुम्बई में राउंड टेबल बैठक में फार्मा एण्ड मेडिकल डिवाइसेस मैन्यूफैक्चरर्स से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र को 5 ट्रिलियन डालर की अर्थ-व्यवस्था बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश पूर्ण सहयोग के लिए संकल्पबद्ध है। मध्यप्रदेश अनेक क्षेत्र में विकास की चरम स्थिति में पहुँचने के साथ नए निवेश से समृद्धि और रोजगार वृद्धि के प्रयास कर रहा है। अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एक गौरवशाली, वैभवशाली और शक्तिशाली भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश सर्वाधिक योगदान देगा। भारत की इकॉनोमी में मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ कर 4.3 प्रतिशत हो गया है। प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 37 हजार रूपये है। प्रदेश की विकास दर देश में सबसे ज्यादा 19.76 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश में अलग-अलग निवेश को नीति के अंतर्गत सुविधाएँ दी जाती हैं। कोई विशेष प्रस्ताव आता है, तो उस पर भी प्राथमिकता से विचार किया जाता है।   मध्यप्रदेश से डाकू हो गए हैं साफ   मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के चम्बल क्षेत्र में किसी जमाने में डाकू हुआ करते थे। अब सब साफ कर दिए गए हैं। चम्बल क्षेत्र में अटल प्रोग्रेस-वे बनाया जा रहा है। इसके दोनों तरफ इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनेंगे। मध्यप्रदेश के मध्य से नर्मदा एक्सप्रेस-वे गुजरेगा, जिसके दोनों तरफ भी इंडस्ट्रियल क्लस्टर और टाउनशिप का विकास होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने निवेशकों को इंदौर में 11 और 12 जनवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने का निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि समिट के पहले इंदौर में तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन भी होगा।

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 MadhyaBharat  11 November 2022

प्रदेश की आत्म-निर्भरता के लिए निवेश अहम : मुख्यमंत्री

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट प्रदेश के विकास में ऐतिहासिक साबित होगी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुम्बई में "इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज़ इन मध्यप्रदेश" कार्यक्रम में निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं मध्यप्रदेश की 8.5 करोड़ जनता की ओर से निवेश के लिए आमंत्रित करने आया हूँ। मध्यप्रदेश में सभी उद्योगों में अपार संभावनाएँ हैं। टेक्सटाईल, खाद्य प्र-संस्करण, फार्मास्युटिकल सेक्टर सहित सभी क्षेत्रों में निवेशकों के लिए मध्यप्रदेश आकर्षण का केन्द्र है। जनवरी 2023 में इन्दौर म.प्र. में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेश प्रोत्साहन और उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के लिए मुम्बई में होटन ताज प्रेसीडेन्ट में यह कार्यक्रम किया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि म.प्र. में सिंगल विन्डो सिस्टम से उद्योग स्थापना संबंधी प्रक्रियाओं को सुगम और समय-सीमा में पूर्ण करना संभव हो रहा है। पर्यटन की दृष्टि से भी मध्यप्रदेश, देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। भारत को वर्ष 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थ-व्यवस्था बनाने के संकल्प को पूर्ण करने के लिए मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन के लिये प्रतिबद्ध है। प्रदेश में एक लाख 22 हजार एकड़ का लैंड बैंक, पर्याप्त पानी, बिजली, रोड नेटवर्क, दक्ष मानव संसाधन और शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध है। यहाँ 11 से 12 क्लाईमेटिक जोन हैं। यहाँ कोई भी बिजनेस किया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इंदौर की इन्फोबीन्स आईटी कंपनी को घंटी बजा कर बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) में सूचीबद्ध कराया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि इंदौर में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दो दिन प्रदेश के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। समिट में निवेश का नया इतिहास लिखा जायेगा। प्रवासी भारतीय दिवस एवं खेलो इंडिया कार्यक्रम में भी आप सभी का हार्दिक स्वागत है।  मुख्यमंत्री चौहान कहा कि ई-व्हीकल भविष्य की आवश्यकता है। प्रदेश में ई-व्हीकल कंपनियों के लिए पार्क बनाने का निर्णय लिया गया है। हमने मध्यप्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया है। प्रदेश में दो एक्सप्रेस-वे का निर्माण हो रहा है। चंबल के बीहड़ को जोड़ते हुए अटल एक्सप्रेस-वे और अमरकंटक से सीधे गुजरात की सीमा तक नर्मदा एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है, जिसके दोनों तरफ इंडस्ट्रियल पार्क बनाये जायेंगे। इंदौर में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में सिंचित क्षेत्र 7.5 लाख हेक्टेयर था, जिसे बढ़ा कर हमने 45 लाख हेक्टेयर कर दिया है। आने वाले 3 वर्षों में सिंचित क्षेत्र 65 लाख हेक्टेयर होगा। यहाँ पिछले 15 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय 30 हजार से बढ़ कर एक लाख 37 हजार रूपये हुई है। यहाँ बेरोजगारी की दर देश की सबसे कम 0.8 प्रतिशत है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस स्टेट है। यहाँ थर्मल, हाईड्रो, विंड, सोलर एवं रिन्युएबल एनर्जी का उत्पादन किया जा रहा है। हम पानी से भी बिजली बनाते हैं और पानी के ऊपर भी बिजली बनाते हैं। ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट से 600 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लगातार दस सालों तक हमने 18 प्रतिशत से अधिक एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट दर्ज की है, जो चमत्कार है। अधो-संरचना, स्वास्थ्य-शिक्षा, सुशासन तथा अर्थ-व्यवस्था और रोजगार राज्य सरकार के लिए प्राथमिकता के क्षेत्र हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोविड काल के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा को अवसर में बदलने की बात कहते हुए "आत्म-निर्भर भारत" का मंत्र दिया। हमने आत्म-निर्भर भारत के लिए आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोडमेप बनाया है, जिस पर अमल जारी है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास की ओर निरंतर अग्रसर है। पर्यटन की दृष्टि से भी प्रदेश, देश के समृद्ध राज्यों में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकार्पित "श्री महाकाल लोक" विश्व का ध्यान आकर्षित कर रहा है। तीर्थ-यात्रियों को रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुँचने के लिए रोप-वे बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जहाँ लेबर रिफॉर्म्स किए गए हैं। अब प्रदेश में महिलाएँ भी 3 शिफ्ट में कार्य कर सकती हैं। प्रदेश में इंडस्ट्री फ्रेंडली पॉलिसी है। म.प्र. आईटी के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति कर रहा है। छोटे शहरों के बच्चे भी कमाल कर रहे हैं। प्रदेश में 2 हजार स्टार्टअप्स हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि "आप सभी को प्रवासी भारतीय दिवस तथा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित करता हूँ। आप समिट का इंतजार न करें, आज और अभी से निवेश की प्रकिया प्रारंभ कर दें।" मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा भी की। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री राज वर्धन सिंह दत्तीगांव ने कहा कि मध्यप्रदेश ऑटो कम्पोनेंट, सर्विस सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग, हॉस्पिटेलिटी, टेक्सटाईल आदि सेक्टर में प्रगति कर रहा है। इंदौर देश का एक मात्र ऐसा शहर है, जहाँ आईआईटी और आईआईएम दोनों है। मध्यप्रदेश का गेहूँ, चावल, लहसुन, प्याज, मक्का, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद सहित कई कृषि उत्पादों का मिडिल ईस्ट एवं यूएई में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री देश के सर्वाधिक अनुभवी मुख्यमंत्री हैं, जो प्रदेश को आत्म-निर्भर बनाने के लिए सतत् प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कोविड के दौरान ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए 24 घंटे काम किया। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए मेडिकल डिवाइस पार्क को मंजूरी दी। मध्यप्रदेश सेस्मिक फ्री जोन है, यहाँ निवेश हर तरह से लाभकारी है। प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन संजय शुक्ला ने प्रदेश में निवेश के लिये उपलब्ध सुविधाओं एवं नीतियों संबंधी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का कमिटमेंट, शासन-प्रशासन तक आसान पहुँच, स्किल्ड एवं सेमी स्किल्ड मेनपॉवर की उपलब्धता आदि के कारण मध्यप्रदेश में निवेश लाभकारी है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव मनीष सिंह एवं एमपीआईडीसी के एमडी  मनीष सिंह भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में निवेश के सुअवसरों एवं मध्यप्रदेश की समृद्ध, सामाजिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक, औद्योगिक, पर्यटन विरासत एवं आधारभूत संरचना को दर्शाती हुई लघु फिल्म भी दिखायी गई। मध्यप्रदेश में पूर्व में निवेश कर चुके उद्योगपतियों ने निवेश के लिए सकारात्मक वातावरण एवं सरल औद्योगिक नीति आदि से संबंधित अपने अनुभव साझा कर उपस्थित समूह को निवेश के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम में साउथ कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैण्ड, नीदरलैण्ड एवं बांग्लादेश के कॉन्सुलेट जरनल एवं जापान, कनाडा और ताइवान के प्रतिनिधि एवं महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के एम.डी. तथा सीईओ डॉ. अनीश शाह, हिन्दुस्तान यूनिलिवर के सीईओ संजीव मेहता तथा रिलायंस इण्डस्ट्रीज के डायरेक्टर अनंत अंबानी, यू.एस. फार्मा के सीएमडी तपन संघवी, केमेरिक्स लाईफ साइंसेज के डायरेक्टर  ए.के. मिश्रा, एनक्यूब ऐथिकल फार्मा के एम.डी. मेहुल शाह, ग्यूफिक बायोसाइंसेज के सीएमडी प्रणव चौकसी और पीरामल ग्रुप के वाईस चेयरपर्सन डॉ. स्वाति पीरामल सहित अन्य विख्यात उद्योगपतियों ने सहभागिता की।

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 MadhyaBharat  11 November 2022

भारतवंशियों ने कहा, सफल बनाएंगे सम्मेलन

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में इंदौर आने के लिए उत्साहित हैं अनेक देशों के प्रवासी भारतीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश को 17वें प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन के आयोजन की जिम्मेदारी मिली है। विदेश मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश सरकार के सहयोग से इंदौर में हो रहे इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभिन्न देशों के प्रवासी भारतीयों, फ्रेंडस ऑफ एमपी के सदस्यों और उद्योग व्यापार से जुड़े भारतीय मित्रों के सहयोग की जरूरत है। मुख्यमंत्री चौहान ने फ्रेंडस ऑफ एमपी के सदस्यों को प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। अनेक देशों में रह रहे भारतवंशियों ने मुख्यमंत्री चौहान से वीडियो कॉफ्रेंस से चर्चा करते हुए कहा कि वे सम्मेलन को सफल बनाने में पूरा सहयोग देंगे। मध्यप्रदेश सरकार सम्मेलन के अवसर पर विभिन्न राष्ट्रों से द्विपक्षीय सहयोग पर भी वार्ता करेगी। प्रवासी भारतीय सम्मेलन के मुख्यअतिथि गोयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली होंगे। यह सम्मेलन आठ से दस जनवरी तक इंदौर में होने जा रहा है। इसके बाद ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट भी होगी। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इंदौर आने के लिए स्वीकृति दे चुके हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन में अनेक बिजनेस लीडर आएंगे। नोबल पुरस्कार से पुरस्कृत व्यक्तित्व, प्रख्यात डॉक्टर, लेखक सहित विभिन्न हस्तियाँ भी आएंगी। मनभावन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में मालवा की विशिष्ट कला-संस्कृति का प्रदर्शन होगा। साथ ही चुनिंदा रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट भी दिखाए जाएंगे। आमंत्रित प्रतिनिधि उज्जैन में लोकार्पित श्री महाकाल लोक के दर्शन भी करेंगे।मुख्यमंत्री चौहान ने आज वीसी बैठक द्वारा प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन के संबंध में विभिन्न देशों में फ्रेंड्स ऑफ एमपी के चैप्टर्स लीडर्स और सक्रिय सदस्यों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान विभिन्न राष्ट्रों से चैप्टर्स लीडर्स ने अधिक से अधिक सदस्यों के साथ इंदौर आने के प्रति जिज्ञासा प्रकट की। मुख्यमंत्री चौहान ने यूएसए, यूके, यूएई सहित विभिन्न देशों से जुड़े हुए फ्रेंडस ऑफ एमपी के सदस्यों को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे इस संवाद से अभिभूत महसूस कर रहे हैं। आप लोगों का जो प्रेम इस देश और मध्यप्रदेश की माटी के लिए है, वो अद्भुत है। आपकी देश के प्रति भक्ति और सेवा की भावना की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है। जब-जब देश या मध्यप्रदेश को आपकी जरूरत हुई है आप दोनों बाहें फैला कर मदद के लिए आगे आए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रवासी भारतीय मित्रों ने कोविड के कठिन समय में ऑक्सीजन, फूड, दवा भेजने के लिए भी पूरा सहयोग दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अपना मध्यप्रदेश अद्भुत है। यह वन संपदा, खनिज संपदा, जन संपदा, जल संपदा, वन संपदा से परिपूर्ण है। मध्यप्रदेश पहले से टाइगर स्टेट रहा है, इसके बाद लेपर्ड स्टेट बना और अब चीता स्टेट भी है। देश में आज मध्यप्रदेश का अलग स्थान है। मध्यप्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। इंदौर लगातार 6वीं बार स्वच्छता में नंबर वन है। स्वच्छता में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रवासी भारतीय दिवस पर हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, हमारी देश की गौरव राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू हम सबको मार्गदर्शन देंगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजन के संबंध में फ्रेंडसऑफ एमपी के सदस्यों के सुझावों पर अमल किया जाएगा। मध्यप्रदेश के लिए यह ऐतिहासिक अवसर है। जनवरी माह में तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन के बाद वहीं 11-12 जनवरी 2023 को ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट इंदौर में होना है, जिसमें आए प्रतिनिधि अन्य निवेशकों के साथ भेंट और बैठक कर सकेंगे। इस तरह सुविधानुसार अनेक प्रतिनिधि 5 दिन का प्रवास कर दोनों कार्यक्रमों को यादगार बनाने की भूमिका निभाएंगे। राज्य सरकार का प्रयास है कि आमंत्रित प्रतिनिधियों को अनुकूल एयर कनेक्टविटी उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही एनआरआई निवेशकों को जमीन आवंटन जैसी सुविधा प्राथमिकता से उपलब्ध करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन के विभिन्न आयामों के बारे में संपूर्ण जानकारी सोशल मीडिया एवं वेबसाइट पर निरंतर दी जाएगी। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि प्रवासी भारतीय विभाग ने गत 13 अक्टूबर को प्रवासी भारतीय दिवस और सम्मेलन की वेबसाइट लॉन्च की है। यह सिंगल विंडो की तरह है। इसमें रजिस्ट्रेशन, आवास, पर्यटन स्थल आदि की जानकारी होगी। इस वेबसाइट के माध्यम से अब तक 36 ग्रुप और उसमें शामिल 720 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इस वेबसाइट पर प्रारंभ किए गए स्टार्टअप और एक्सपोर्टर्स की जानकारी भी दी जाएगी।   किसने क्या कहा लंदन के डिप्टी मेयर  राजेश अग्रवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश उनकी जन्म भूमि है। बीस वर्ष में यह अवसर आया है जब मध्यप्रदेश में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, इसे सभी मिल कर सफल बनाएंगे। जितेंद्र वैद्य, आबुधाबी ने बताया कि वे आबुधाबी में 25 सालों से निवास कर रहे हैं। प्रवासी भारतीय सम्मेलन इंदौर में होना गौरव की बात है। पिछली बार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में इंदौर आने का काफी अच्छा अनुभव है। परमीत माकोड़े बोस्टन ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा। कर्म भूमि से जन्म-भूमि की यात्रा होगी। इंदौर स्वच्छतम शहर है। इंदौर के स्टेडियम में प्रधानमंत्री जी का विशेष पोट्रेट चित्र तैयार कर भेंट करने की योजना है।  जितेंद्र मुछाल न्यूयार्क ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान द्वारा फरवरी 2015 में न्यूयार्क में जो पौधा रोपा था वह आज वृक्ष बन गया है। इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह का वातावरण है। श्री महाकाल लोक देखने की भी सभी में जिज्ञासा है। पर्यटन और उद्योग क्षेत्र में प्राथमिकता से कार्य के लिए अनेक निवशक तैयार होंगे। डॉ. शिरीष जौहरी, सिंगापुर ने कहा कि वे महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज इंदौर से पढ़े हुए हैं। इस लगाव की वजह से वे सम्मेलन की तारीखों की बेसब्री से प्रतिक्षा कर रहे हैं। रवि कुमार तिवारी टोरंटो ने कहा कि इंडो-केनेडा चेम्बर्स ऑफ कामर्स का गठन किया गया है। कनाडा से करीब 100 प्रतिनिधियों के आने का अनुमान है। रक्षित मेहता स्विटजरलैंड अलंकार मालवीय जोहान्सबर्ग और लीना वैद्य आबुधाबी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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 MadhyaBharat  10 November 2022

सी.एम. राईज योजना में 678 करोड़ रू. की प्रशासकीय स्वीकृति का अनुमोदन

  8 नवीन आदर्श स्नातक महाविद्यालय के लिए शैक्षणिक पदों की स्वीकृति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग की 23 सी.एम. राईज योजना के उच्चतर माध्यमिक शाला भवन निर्माण की 678 करोड़ 82 लाख 25 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया। निर्णय के अनुसार सी.एम. राईज योजना में 23 स्कूल भवन निर्माण कार्यों में से 11 कार्यो की निर्माण एजेन्सी परियोजना क्रियान्वयन इकाई, लोक निर्माण विभाग, 06 कार्यों की निर्माण एजेन्सी भवन विकास निगम तथा 06 कार्यों की निर्माण एजेन्सी मध्यप्रदेश पुलिस हाऊसिंग एवं अधो-संरचना विकास निगम को बनाया गया है। साथ ही जनजातीय कार्य को वित्तीय वर्ष के पूँजीगत मद में प्रावधानित बजट से सी.एम. राईज योजना में निर्माण कार्यों को स्वीकृत किये जाने के लिए सूचकांक से मुक्त रखे जाने की अनुमति दी गई।   8 नवीन आदर्श स्नातक महाविद्यालय के लिए शैक्षणिक पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने रूसा परियोजना में दमोह, राजगढ़, बड़वानी, छतरपुर, गुना, खंडवा, सिंगरौली और विदिशा में एक-एक नवीन आदर्श स्नातक महाविद्यालय की स्थापना के लिए प्रस्तावित 336 शैक्षणिक एवं 200 अशैक्षणिक, कुल 536 नवीन पद निर्माण, आवर्ती एवं अनावर्ती व्यय के लिए 12 हजार 658 लाख रूपये की स्वीकृति दी।   उचित मूल्य दुकानों की खाद्यान्न व्यवस्थाओं के लिए राशि में वृद्धि   मंत्रि-परिषद ने उचित मूल्य की दुकानों का खाद्यान्न पर कमीशन, परिवहन व्यय और पीओएस मशीन की अतिरिक्त कमीशन की राशि को बढ़ाने का निर्णय लिया। इसमें नगरीय क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों को खाद्यान्न वितरण पर कमीशन 70 से बढ़ा कर 90 रूपये प्रति क्विंटल, ग्रामीण क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों को 200 से अधिक राशनकार्ड होने एवं पूर्णकालिक विक्रेता होने पर 10 हजार 500 रूपये प्रतिमाह दिया जायेगा। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों को 200 से कम राशनकार्ड होने एवं पूर्णकालिक विक्रेता होने पर 6 हजार रूपये प्रतिमाह और ग्रामीण क्षेत्र की उचित मूल्य दुकान पर अंशकालिक विक्रेता होने पर 3 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जायेगा। इसी प्रकार दुकानविहीन एक हजार 514 पंचायतों में नवीन दुकान खोलने पर खाद्यान्न में कमीशन 6 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जाएगा। खाद्यान्न के परिवहन, हेण्डलिंग मद में प्रति क्विंटल राशि 65 से बढ़ा कर 70 रूपये प्रति क्विंटल किया गया है। साथ ही उचित मूल्य दुकानों के पीओएस के लिए अतिरिक्त मार्जिन राशि 17 रूपये प्रति क्विंटल से बढ़ा कर 21 रूपये प्रति क्विंटल की गई है। इन सभी पर राज्य सरकार द्वारा नियमित 50 प्रतिशत राशि के अतिरिक्त 52 करोड़ 20 लाख रूपये का प्रतिमाह व्यय किया जाएगा।   "मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत" योजना की अनुमति   मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं में "मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत" योजना लागू करने की अनुमति दी। इसमें उद्यम क्रांति योजना के प्रथम चरण में 888 बेरोजगार युवाओं को बैंक ऋण से वाहन उपलब्ध कराया जायेगा। इससे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आवंटित राशन सामग्री को प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य दुकानों तक परिवहन कराया जायेगा।   "फसल अवशेष प्रबंधन" योजना का संचालन   मंत्रि-परिषद ने नरवाई जलाने की प्रथा को हत्सोहित करने, कृषि यंत्रीकरण को बढ़ाने और भूमि में नमी का संरक्षण करने के लिए "फसल अवशेष प्रबंधन" योजना को संचालित करने का निर्णय लिया। योजना में उपयोगी शक्ति चलित कृषि यंत्रों को चिन्हित कर कृषकों द्वारा इन्हें क्रय करने पर अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। लघु, सीमान्त, महिला, एस.सी. और एस.टी. कृषकों को 50 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 40 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। योजना का क्रियान्वयन कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय करेगा।   प्राथमिक प्र-संस्करण को प्रोत्साहन योजना   मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण युवाओं को बैंक ऋण आधार पर कस्टम प्रोसेंसिंग केन्द्र स्थापना के लिए अनुदान सहायता उपलब्ध कराने के लिये नवीन योजना "प्राथमिक प्र-संस्करण को प्रोत्साहन" को संचालित करने का निर्णय लिया। योजना का क्रियान्वयन कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय करेगा।   मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के 211 पदों का अनुमोदन   मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के सुचारू संचालन के लिए 211 पदों के सेटअप को अनुमोदन दिया गया। इसमें पूर्व में स्वीकृत 198 पद की कार्योत्तर स्वीकृति एवं 13 नवीन पदों की स्वीकृति दी गई। निगम में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते एवं स्थापना व्यय के लिए प्रतिवर्ष 15 करोड़ रूपये का बजटीय अनुदान प्रथम 5 वर्षों के लिए दिये जाने की स्वीकृति दी गई।   मत्स्य-उत्पादन वृद्धि के लिए 100 करोड़ रूपये   मंत्रि-परिषद ने "मुख्यमंत्री मत्स्य-विकास योजना" को आगामी 2 वर्षों (2022-23 एवं 2023-24) के लिए लागू करने का निर्णय लिया। योजना 2 वर्षों में प्रदेश में मत्स्य-पालन को बढ़ावा देने और मत्स्य-उत्पादन वृद्धि के लिए 100 करोड़ रूपये व्यय किया जायेगा।   सिविल विंग के लिए 121 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति   मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और अनुरक्षण कार्य के लिए सिविल विंग के निर्माण का निर्णय लिया। सिविल विंग का मुख्यालय कार्यालय आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा में तथा 5 उप संभाग कार्यालय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में स्थापित किये जायेंगे। इसके संचालन के लिए कुल 121 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इस विंग द्वारा 10 करोड रूपये तक की लागत के नवीन निर्माण और भवनों के संधारण का कार्य किया जायेगा |   हवाई पट्टी के लिए नि:शुल्क भूमि आवंटन   मंत्रि-परिषद ने "रीवा हवाई पट्टी पर ATR-72 टाईप विमानों के परिचालन के लिए Visual Flight Rules (VFR) तथा InstrumentFlight Rules (IFR) विकसित करने, वर्तमान हवाई पट्टी के विस्तार, विकास के लिए तहसील हुजूर में ग्राम उमरी की 1.948 हेक्टेयर, ग्राम चोरहटा की 7.199 हेक्टेयर, ग्राम चौरहटी की 5.391 हेक्टेयर और ग्राम अगडाल की 10.735 हेक्टेयर कुल 25.273 हेक्टेयर अर्थात 61.945 एकड़ भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को निःशुल्क आवंटित करने का निर्णय लिया।   प्रतिपूर्ति सहायता राशि का निर्धारण   मंत्रि-परिषद ने राज्य शासन द्वारा उद्योग संवर्धन नीति 2010/2014 अंतर्गत वृहद श्रेणी के उद्योगों के लिए उद्योग निवेश संवर्धन सहायता/ वेट सीएसटी प्रतिपूर्ति सहायता का प्रावधान किया है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए जारी शासनादेश 22 जून 2018 में उल्लेखित गणना सूत्र में "विक्रय गणक" की गणना में विक्रय की गई वस्तु के मूल्य के आधार पर वास्तविक सहायता राशि का निर्धारण किया जाये, को स्पष्ट किए जाने का निर्णय लिया गया।   टोल संग्रहण की कार्योत्तर स्वीकृति   मंत्रि-परिषद ने इंदौर-उज्जैन मार्ग (लम्बाई 48.9 कि.मी.) पर म.प्र. सडक विकास निगम द्वारा चयनित एजेंसी के माध्यम से 26 सितम्बर 2034 तक उपभोक्ता शुल्क (टोल) संग्रहण किये जाने की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की। रियायत अनुबंध निरस्तीकरण के बाद सड़क विकास निगम द्वारा टोल लगाने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। इंदौर-उज्जैन मार्ग (लम्बाई 48.9 कि.मी.) पर दूरी आधारित मूल टोल दरें प्रभावी किये जाने की स्वीकृति गई। इंदौर-उज्जैन मार्ग पर निम्नानुसार वाहनों की श्रेणी को टोल से छूट जाने की स्वीकृति प्रदाय की गई, (1) भारत सरकार तथा मध्यप्रदेश सरकार के समस्त यान सरकारी कर्त्तव्य (ड्यूटी) पर हो। (2) संसद के सदस्यों तथा विधानसभा के सदस्यों के यान। (3) भारतीय सेना के समस्त यान जब ड्यूटी पर हों। (4) एम्बुलेंस। (5) फायर बिग्रेड। (6) भारतीय डाक तथा तार विभाग के यान। (7) कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग की जाने वाली ट्रैक्टर-ट्राली तथा बैलगाड़ियाँ। (8) आटो रिक्शा, दुपहिया वाहन। (9) स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। (10) भूतपूर्व सांसदों एवं विधायकों के एक यान।   सम्पत्ति का निर्वर्तन   मंत्रि-परिषद ने जिला नर्मदापुरम स्थित राजस्व विभाग की ट्रैक्टर स्कीम ओल्ड इटारसी वार्ड नं. 1, तहसील इटारसी की परिसम्पत्ति, जिसका खसरा क्रमांक 449/1 एवं 447/2/1 कुल क्षेत्रफल 8 हजार वर्गमीटर के निर्वर्तन हेतु एच-1 निविदाकार की उच्चतम निविदा राशि 11 करोड़ 91 लाख 11 हजार 121 रूपये की संस्तुति करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100 प्रतिशत जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया गया।   मंत्रि-परिषद ने जिला ग्वालियर स्थित राजस्व विभाग की वार्ड क्र. 65, ग्राम वीरपुर के शीट क्र 630/2. भूमि परिसम्पत्ति कुल क्षेत्रफल 297.90 वर्गमीटर के निर्वर्तन के लिए एच-1 निविदाकार की उन्नतम निविदा राशि 77 लाख 93 हजार रूपये की संस्तुति करते हुए उसे विक्रय करने एवं एच-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100 प्रतिशत जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।   मंत्रि-परिषद द्वारा जिला इन्दौर स्थित राजस्व विभाग की वार्ड नं 50, पिपल्याहाना, भू खण्ड पार्ट 01 सर्वे क्रमांक 471 क्षेत्रफल 1380 वर्गमीटर एवं पार्ट 02 सर्वे क्रमांक 472 क्षेत्रफल 3700 वर्गमीटर, पार्सलों के निर्वर्तन के लिए एच-1 निविदाकार को पार्ट-1 की उच्चतम निविदा राशि 10 करोड़ 59 लाख 48 हजार रूपये और पार्ट-2 की उच्चतम निविदा राशि 28 करोड़ 16 लाख 44 हजार रुपये की संस्तुति करते हुए उसे विक्रय करने एवं एच-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100 प्रतिशत जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही किये जाने का निर्णय लिया गया।   मुख्यमंत्री चौहान ने ऊर्जा साक्षरता अभियान के वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। समारोह का मुख्यमंत्री चौहान ने कन्या-पूजन और दीप जला कर शुभारंभ किया। अध्यक्ष ऊर्जा विकास निगम गिर्राज दंडोतिया, सचिव ऊर्जा एवं एमडी एमपी पावर मनेजमेंट कम्पनी विवेक पोरवाल, प्रबंध संचालक ऊर्जा विकास निगम कर्मवीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।   प्रदेश की ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियाँ आबादी के लिए 24 घंटे और कृषि को 10 घंटे निर्बाध बिजली मुख्यमंत्री विद्युत बिलों में राहत योजना में 74.77 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के 4664 करोड़ रूपए से अधिक के बिल माफ बिजली संबंधी शिकायतों का केंद्रीकृत 1912 कॉल सेंटर, उपाय एप, स्मार्ट एप, निष्ठा वाइस बॉट से त्वरित समाधान। इंस्टेन्ट बिलिंग सिस्टम से उपभोक्ताओं को मीटर रीडिंग के तत्काल बाद बिल। कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर( डीबीटी) योजना लागू। हरित ऊर्जा ट्रांसमिशन के लिए 2100 करोड़ रूपए के हरित ऊर्जा कॉरिडोर का निर्माण। सोलर रूफटॉप कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन कनेक्शन प्रक्रिया। ऊर्जा संरक्षण जागरूकता के लिए प्रदेशव्यापी ऊर्जा साक्षरता “ऊषा” अभियान संचालित।

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 MadhyaBharat  10 November 2022

मध्यप्रदेश की उपलब्धियों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति का महत्वपूर्ण योगदान : मुख्यमंत्री

विकास के दिल की धड़कन है बिजली ,श्रेष्ठ कार्य के लिए पुरस्कृत हुए अधिकारी-कर्मचारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आम जनता के लिए सतत कार्य करने वाले ऊर्जा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते हैं। हम सभी को इन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में मध्यप्रदेश ने जो उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, उनमें ऊर्जा विभाग का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री  चौहान कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में ऊर्जा संरक्षण, निर्बाध विद्युत प्रदाय एवं उपभोक्ता संतुष्टि पर कार्यशाला और सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सम्मानित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई भी दी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विकास के दिल की धड़कन बिजली है। दिल धड़कना बंद हुआ तो विकास खत्म। आज मध्यप्रदेश में अन्न के भण्डार भरे हैं। यह चमत्कार बिजली और बिजली विभाग के अमले के कारण हुआ है। मध्यप्रदेश ने गेहूँ का पूरे देश में रिकार्ड उत्पादन किया है। हम अनाज निर्यात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि आज मध्यप्रदेश 24 घंटे बिजली देने वाला राज्य है। बिजली जहाँ कृषि, सिंचाई, शिक्षा,उद्योग क्षेत्र में मददगार बनी है, वहीं विद्युत की बिना बाधा आपूर्ति से ही बच्चों की पढ़ाई सही तरीके से हो पा रही है। ऊर्जा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और अन्य अमले का परिश्रम सराहनीय है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मानसून के समय भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जब आंधी और तूफान के कारण बिजली के खंभे गिरे थे और बिजली की आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई थी, तब विभाग के अमले ने तत्परता से इनका सुधार कार्य कर बिजली सप्लाई थोड़े से समय में ही प्रारंभ कर दी थी। बिजली कर्मचारी इसके लिए दिन-रात जुटे थे। उन्होंने आधी रात को भी कार्य किया था। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के लिए करोड़ों रूपए की सब्सिडी प्रदान कर रही है। यदि गाँवों में जल जीवन मिशन से घर-घर में नल लगा कर पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है तो इसमें बिजली की सहायता से ही कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बिजली की बचत के लिए जागरूकता अभियान आवश्यक है। जब बिजली की आवश्यकता न हो तो बिजली का स्विच बंद कर देना चाहिए। मैं स्वयं मुख्यमंत्री निवास में अनावश्यक जलती बिजली देख स्विच ऑफ करता हूँ। अन्य लोगों को भी कहता और टोकता हूँ। यदि बिजली फालतू जलती है तो यह जनता के पैसे का अपव्यय है । मुख्यमंत्री चौहान ने कहाकि हम सभी को बिजली की बचत के प्रति जागरूक रहना चाहिए। ऊर्जा साक्षरता अभियान निरंतर चलता रहे। बिजली नहीं होगी तो विकास की गति ठप्प हो जाएगी। विभाग से संबंधित विभिन्न कमियां दूर करने के प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सरकार जनता की बिजली से जुड़ी अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर सजग रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आवश्यक है कि सभी अधिकारी- कर्मचारी अपना कार्य बहुत आनंद के भाव के साथ करें। व्यक्ति के मन में एक तड़प होना चाहिए, यह तड़प ही कार्य करवाती है। मुख्यमंत्री चौहान ने आनंद पूर्वक गर्व के भाव के साथ कार्य करने के दृष्टांत भी सुनाए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि ऊर्जा विभाग का अमला पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करे। बिजली की चोरी होती है तो उसे रोकने का कार्य हो। ट्रांसफार्मर बिगड़े हैं तो सुधार किया जाए। विद्युत संबंधित व्यवस्थाओं और संधारण कार्यों के लिए तकनीक का उपयोग करें। पारेषण की हानि कम करने के प्रयास सराहनीय हैं, इन्हें जारी रखें। कहीं भी ट्रांसमिशन, जनरेशन और वितरण से जुड़े कार्यों में खामियाँ हैं तो उसे कम से कम कैसे करें, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाएँ।   साँची बन रही है सोलर सिटी मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए मध्यप्रदेश ने रीवा सहित प्रदेश के अन्य स्थानों पर संयंत्र स्थापित किए। साँची प्रथम सोलर सिटी बनेगी। आगामी सौर ऊर्जा दिवस पर इसका कार्य पूर्ण करने के लिए तेजी से कार्य हो रहा है। यह मध्यप्रदेश की विशेष उपलब्धि रहेगी।   विद्युत वितरण कम्पनियों की संगठनात्मक संरचना में होगी वृद्धि ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि विद्युतवितरण कम्पनियों की संगठनात्मक संरचना में वृद्धि और अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों में संशोधन के प्रस्ताव बनाये गये हैं।तोमर ने बताया कि आज से 20 साल पहले बिजली की खपत 451 यूनिट प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष थी, जो अब बढ़ कर 1032 यूनिट हो गई है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों में कम्पनियों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सबसे बड़ा योगदान है। श्री तोमर ने बताया कि सरकार बिजली के लिये 24 हजार करोड़ रूपये की सब्सिडी देती है। शत-प्रतिशत मीटर लगाने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही आकलित खपत के बिल देने की प्रक्रिया को जल्द बंद किया जायेगा। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग ने कहा कि वर्ष 2030 तक बिजली की माँग का 50 प्रतिशत नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा से पूरा किया जायेगा। उन्होंने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी। प्रमुख सचिव ऊर्जा  संजय दुबे ने ऊर्जा और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों की जानकारी दी।   पुरस्कृत अधिकारी-कर्मचारी मुख्यमंत्री  चौहान ने उल्लेखनीय कार्य करने पर पॉवर जनरेटिंग कम्पनी लिमिटेड जबलपुर के सुशील कुमार पाल कार्यपालन अभियंता (उत्पादन) रानी अवन्तीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगीनगर जिला जबलपुर,  राकेश शाही सहायक अभियंता (उत्पादन) सतपुड़ा विद्युत गृह सारणी,  सोहन चौहान कनिष्ठ अभियंता  सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया खण्डवा, पॉवर ट्रांसमिशन कम्पनी लिमिटेड जबलपुर के  राजेश्वर सिंह ठाकुर तत्कालीन कार्यपालन अभियंता (श्योपुर), आशुतोष राय सहायक अभियंता, रामदयाल महारा लाइन परिचारक, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड, इंदौर के आशीष तिवारी सहायक यंत्री, विद्याचरण तिवारी कनिष्ठ यंत्री,  गोपाल माली लाइनमेन, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड जबलपुर के  विजय तिवारी कनिष्ठ अभियंता, प्रिया खादीकर, कनिष्ठ अभियंता और  चन्द्रभान पटेल सहायक लाइनमेन, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड भोपाल के संदीप सिटोके सहायक प्रबंधक, रफीक खान लाइनमेन,नफीस खान लाइन हेल्पर,  जगदीश राठौर सहायक लाइनमेन और  कमलेश चन्द्र बाजपेई सहायक लाइनमेन, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड भोपाल के सर्वश्री प्रवीण तिवारी जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी, पी.के. कनौजे जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी और दीपक बुलानी जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी को पुरस्कृत किया।

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 MadhyaBharat  10 November 2022

कांग्रेस के अत्याचारों को भूल रहे लोगों को जगाने का काम कर रहे कीर्तनकारी

  कीर्तनकारियों का सम्मान करने के बाद बोले भाजपा प्रवक्ता  भोपाल।  कमलनाथ और जगदीश टाइटलर के इशारे पर हजारों सिखों को रातों रात घर से निकालकर कत्ल कर दिया गया। किसी के गले में जलते हुए टायर डाले गए, तो किसी को हथियारों से निर्ममता पूर्वक कत्ल कर दिया गया। ऐसे नरसंहार के जख्म आज भी सिख समाज के दिलों में ताजा है और इन्हें एक बार फिर ताजा करने का काम कमलनाथ ने किया है। यह बात भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केसवानी ने बुधवार को ईदगाह हिल्स स्थित टेकरी साहिब गुरुद्वारे में कीर्तनकारी कुलविंदर सिंह, जसपाल सिंह और गुरप्रीत सिंह का सम्मान करने के बाद कही। दरअसल भाजपा प्रवक्ता इंदौर में कीर्तनकारी मनप्रीत सिंह कानपुरी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का कड़ा विरोध  करने के बाद टेकरी साहिब गुरुद्वारे पहुंचे थे।  मुगलों के अत्याचारों से कराया मुक्त :  भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सिख समाज हमेशा ही देश को नई दिशा दिखाता आया है। मुगल आक्रांता औरंगजेब के अत्याचारों से जब पूरा देश कांप रहा था। तब सिख समाज ने उनका कड़ा विरोध किया था। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अत्याचार भी सिख समाज को नहीं डरा सके। ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद सिख समाज के लोगों की निर्मम हत्याएं दो ऐसी घटनाएं हैं, जिन्होंने कांग्रेस की सिख विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।  डॉ. केसवानी ने कहा कि समय के साथ कई लोग कांग्रेस के इन अत्याचारों को भूल गए, लेकिन मंगलवार को इंदौर के खालसा काॅलेज में आयोजित गुरुनानक जयंती के कार्यक्रम में सिख दंगों के आरोपी कमलनाथ के सत्कार से कीर्तनकारी मनप्रीत सिंह कानपुरी ने लोगों को जागरूक करने का काम किया है। इसे उनके विरोध से ज्यादा लोगाें को जागरूक करने वाला संदेश माना जाना चाहिए।  यह है मामला :  इंदौर के खालसा कॉलेज में गुरुनानक जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के सत्कार से कीर्तनकारी मनप्रीत सिंह कानपुरी नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि जिनके इशारे पर हजारों सीखों का कत्ल हुआ। उनके घर दुकान जला दिए गए। उनका यहां सम्मान हो रहा है। इसके बाद उन्होंने गुरु गोविंद सिंह की कसम खाते हुए कहा कि आज के बाद वे कभी भी इंदौर नहीं आएंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी और संजय शुक्ला  भी मौजूद थे। डॉ. दुर्गेश केसवानी 

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 MadhyaBharat  9 November 2022

मुख्यमंत्री ने प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा नानकसर में मत्था टेका

गुरु नानक की "सबको बराबर मानने और प्रेम व करुणा के मार्ग पर चलने" की शिक्षा आज भी प्रासंगिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि “एक नूर से सब जग उपज्या” के माध्यम से गुरु नानक देव जी की सबको बराबर मानने और प्रेम व करुणा के मार्ग पर चलने की दी हुई शिक्षा आज भी प्रासंगिक है। उन्हीं के द्वारा दिखाया गया मार्ग विश्व में शाश्वत शांति का पथ प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री  चौहान गुरुद्वारा नानकसर, हमीदिया रोड भोपाल में श्री गुरुनानक देव जी के 553वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मत्था टेकने के बाद संगत को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सिख गुरुओं द्वारा अन्याय करने और समाज में अशांति फैलाने वालों को दंडित करने के हुक्म का पालन करते हुए ही राज्य सरकार ऐसे तत्वों के विरुद्ध त्वरित और सख्त कार्यवाही कर रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने गुरुद्वारे में मत्था टेक कर प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि, सबके जीवन में प्रगति और प्रदेश के विकास के लिए अरदास की। मुख्यमंत्री ने “जो बोले सो निहाल-सत श्रीअकाल” तथा “वाहे गुरु का खालसा-वाहे गुरु की फतह” के उद्घोष से अपना उद्बोधन खत्म किया। मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा परिसर में सबद कीर्तन का श्रवण भी किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चौहान प्रतिवर्ष प्रकाश पर्व पर आशीर्वाद लेने और मत्था टेकने गुरुद्वारे में उपस्थिति देते हैं। मुख्यमंत्री को गुरूद्वारे की ओर से शॉल तथा प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए। मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारे में लंगर छका और लंगर परोसने व बर्तन धोने की सेवा भी दी। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग भी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  9 November 2022

मतदाता, नाम जोड़ने-हटाने के लिए आठ दिसंबर तक लिए जाएंगे आवेदन

मप्र में प्रदेश में पांच करोड़ 27 लाख 24 हजार 128 मतदाता  निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन कर पुनरीक्षण कार्य किया प्रारंभ।  प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन कर पुनरीक्षण का काम बुधवार से प्रदेशभर में प्रारंभ कर दिया। चार करोड़ 53 लाख मतदाताओं के लिए अब तक लिए जा चुके हैं आधार नंबर। आठ दिसंबर तक सभी 64 हजार 100 मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल आफिसर बैठेंगे और नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन के आवेदन लेंगे।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने बताया कि आठ दिसंबर तक सभी 64 हजार 100 मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल आफिसर बैठेंगे और नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के आवेदन लेंगे। 12,13, 19 और 20 नवंबर को घर-घर संपर्क अभियान चलेगा। इसमें बूथ लेवल आफिसर ऐसे पात्र व्यक्ति, जिनके नाम सूची में शामिल नहीं हैं, उनसे आवेदन कराएंगे। आवेदनों का निराकरण 26 दिसंबर तक किया जाएगा और सूची का अंतिम प्रकाशन पांच जनवरी 2023 को होगा। बूथ लेवल आफिसर मतदाताओं से आधार नंबर की जानकारी देने का आग्रह भी किया जाएगा। प्रदेश में अभी 86 प्रतिशत मतदाताओं के आधार नंबर मिल चुके हैं। वोटर हेल्पलाइन एप, वोटर पोर्टल से आनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है।  अभी प्रदेश में पांच करोड़ 27 लाख 24 हजार 128 मतदाता हैं। इनमें दो करोड़ 73 लाख 30 हजार 001 पुरुष, दो करोड़ 53 लाख 16 हजार 915 महिला और एक हजार 278 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। सेवा मतदाताओं में 73 हजार 633 पुरुष और दो हजार 301 महिलाएं हैं।मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए 17 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवा आवेदन कर सकते हैं।

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 MadhyaBharat  9 November 2022

श‍िवराज कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्‍वपूर्ण निर्णय

  मुख्‍यमंत्री अन्‍नदूत योजना को भी मंजूरी  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक हुई।  जिसमे अनेक महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्‍यमंत्री अन्‍नदूत योजना को भी मंजूरी दी गई। बैठक के बाद गृहमंत्री डाक्‍टर नरोत्‍तम मिश्रा ने कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी मीडिया को दी।बैठक में मुख्‍यमंत्री अन्‍नदूत योजना को भी मंजूरी दी गई। कृषि विभाग द्वारा प्रस्तावित इस योजना पर अंतिम निर्णय कैबिनेट बैठक में लिया गया। प्रदेश में गेहूं, धान, सोयाबीन, चना सहित अन्य फसलों की कटाई हार्वेस्टर से होने के कारण खेत में नरवाई (पराली) छूट जाती है। किसान इसे साफ कराने के लिए अलग से मजदूर लगाने का व्यय बचाने के लिए आग लगा देते हैं। इससे प्रदूषण तो फैलता ही है, भूमि के पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं। इसका असर भूमि की उत्पादन क्षमता पर भी पड़ता है। बैठक के बाद गृहमंत्री डाक्‍टर नरोत्‍तम मिश्रा ने कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी मीडिया को दी। प्रदेश में फसल कटने के बाद अवशेष को जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देगी। लघु, सीमांत, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को यंत्र की कीमत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अन्य श्रेणी के किसानों को 40 प्रतिशन अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश सरकार उचित मूल्य की राशन दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का खाद्यान्न वितरित कराती है। नगरीय क्षेत्र की दुकानों को खाद्यान्न वितरण के लिए कमीशन प्रति क्विंटल 70 रुपये की जगह अब 90 रुपये दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र की उचित मूल्य की दुकानों को दो सौ से अधिक पात्र परिवार एवं पूर्णकालिक विक्रेता होने पर कमीशन दस हजार 500 रुपये दिया जाएगा। दो सौ कम पात्र परिवार एवं पूर्णकालिक विक्रेता होने पर छह हजार रुपये प्रतिमाह और अंशकालिक विक्रेता होने पर तीन हजार रुपये प्रतिमाह कमीशन दिया जाएगा। खाद्यान्न के परिवहन, हम्माली आदि व्यय के लिए 65 रुपये की 70 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएंगे।

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 MadhyaBharat  9 November 2022

युगदृष्टा एवं राष्ट्रऋषि श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी का जन्म दिवस

आर्थिक क्षेत्र में भी राष्ट्रीयता का भाव होना आवश्यक     श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर, 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम में हुआ था। श्री दत्तोपंत जी के पित्ताजी श्री बापूराव दाजीबा ठेंगड़ी, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता थे, तथा माताजी, श्रीमती जानकी देवी, गंभीर आध्यात्मिक अभिरूची से सम्पन्न थी। उन्होंने बचपन में ही अपनी नेतृत्व क्षमता का आभास करा दिया था क्योंकि मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में ही, आप आर्वी तालुका की ‘वानर सेना’ के अध्यक्ष बने तथा अगले वर्ष, म्यूनिसिपल हाई स्कूल आर्वी के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये थे। आपने बाल्यकाल से ही अपने आप को संघ के साथ जोड़ लिया था और आपने अपने एक सहपाठी और मुख्य शिक्षक श्री मोरोपंत जी पिंगले के सानिध्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्गों का तृतीय वर्ष तक का प्रशिक्षण कार्य पूर्ण कर लिया। आपके वर्ष 1936 से नागपुर में अध्यनरत रहने तथा श्री मोरोपंत जी से मित्रता के कारण आपको परम पूजनीय डॉक्टर जी को प्रत्यक्ष देखने एवं सुनने का अनेक बार सौभाग्य प्राप्त हुआ और आगे चलकर आपको परम पूजनीय श्री गुरूजी का भी अगाध स्नेह और सतत मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। दिनांक 22 मार्च 1942 को संघ के प्रचारक का चुनौती भरा दायित्व स्वीकार कर आप सुदूर केरल प्रान्त में संघ का विस्तार करने के लिए कालीकट पहुंच गए थे। श्री दत्तोपंत जी बचपन में ही संघ के साथ जुड़ गए थे अतः आपके व्यक्तित्व में राष्ट्रीयता की भावना स्पष्ट रूप से झलकती थी। आपके व्यक्तित्व का चित्रण करते हुए श्री भानुप्रताप शुक्ल जी लिखते हैं कि “रहन–सहन की सरलता, अध्ययन की व्यापकता, चिन्तन की गहराई, ध्येय के प्रति समर्पण, लक्ष्य की स्पष्टता, साधना का सातत्य और कार्य की सफलता का विश्वास, श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी का व्यक्तित्व रूपायित करते हैं।” चूंकि श्री दत्तोपंत जी मजदूर क्षेत्र से सम्बंधित रहे थे अतः आपको वर्ष 1969 में भारत के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल के सदस्य के रूप में रूस एवं हंगरी जाने का मौका मिला। यह यात्रा आपके लिए साम्यवाद के वास्तविक स्वरूप का बारीकी से अध्ययन करने का एक अच्छा अवसर साबित हुई। इस यात्रा के बाद आपने अनुभव किया कि साम्यवादी विचारधारा में खोखलापन है एवं यह कई अन्तर्विरोधों से घिरी हुई है। हालांकि उस समय दुनिया के कई देशों में साम्यवाद अपनी बुलंदियों को छू रहा था, परंतु श्री दत्तोपंत जी ने उसी समय पर बहुत आत्मविश्वास के साथ कहा था कि आगे आने वाले समय में साम्यवाद अपने अन्तर्विरोधों के कारण स्वतः ही समाप्त हो जाएगा इसके लिए किसी को किसी प्रकार के प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आज परिणाम हम सभी के सामने है। इसी प्रकार आपकी आर्थिक दृष्टि भी बहुत स्पष्ट थी। आर्थिक क्षेत्र के संदर्भ में साम्यवाद एवं पूंजीवाद दोनों ही विचारधाराएं भौतिकवादी हैं और इन दोनों ही विचारधाराओं में आज तक श्रम एवं पूंजी के बीच सामंजस्य स्थापित नहीं हो पाया है। इस प्रकार, श्रम एवं पूंजी के बीच की इस लड़ाई ने विभिन्न देशों में श्रमिकों का तो नुकसान किया ही है साथ ही विभिन्न देशों में विकास की गति को भी बाधित किया है। आज पश्चिमी देशों में उपभोक्तावाद के धरातल पर टिकी पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं पर भी स्पष्टतः खतरा मंडरा रहा है। 20वीं सदी में साम्यवाद के धराशायी होने के बाद एक बार तो ऐसा लगने लगा था कि साम्यवाद का हल पूंजीवाद में खोज लिया गया है। परंतु, पूंजीवाद भी एक दिवास्वप्न ही साबित हुआ है और कुछ समय से तो पूंजीवाद में छिपी अर्थ सम्बंधी कमियां धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। पूंजीवाद के कट्टर पैरोकार भी आज मानने लगे हैं कि पूंजीवादी व्यवस्था के दिन अब कुछ ही वर्षों तक के लिए सीमित हो गए हैं और चूंकि साम्यवाद तो पहिले ही पूरे विश्व में समाप्त हो चुका है अतः अब अर्थव्यवस्था सम्बंधी एक नई प्रणाली की तलाश की जा रही है जो पूंजीवाद का स्थान ले सके। वैसे भी, तीसरी दुनियां के देशों में तो अभी तक पूंजीवाद सफल रूप में स्थापित भी नहीं हो पाया है। धरातल पर अर्थ के क्षेत्र में हम आज जो उक्त वास्तविकता देख रहे हैं, यह श्री दत्तोपंत जी की दृष्टि ने अपने जीवनकाल में बहुत पहिले ही देख ली थी। इसी कारण से आपने निम्न तीन विषयों पर डंकेल प्रस्तावों का गहराई से अध्ययन करने के पश्चात इनका न केवल डटकर विरोध किया था बल्कि आपने इसके विरुद्ध देश में एक सफल जन आंदोलन भी खड़ा किया। आपका स्पष्ट मत था कि बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का व्यापार, निवेश सम्बन्धी उपक्रमों का व्यापार एवं कृषि पर करार सबंधित डंकेल प्रस्ताव भविष्य में विकासशील देशों के लिए गुलामी का दस्तावेज साबित होंगे क्योंकि यह विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के लिए आर्थिक साम्राज्यवाद ला सकते हैं एवं इससे विकासशील देशों की संप्रभुता संकट में पड़ जाएगी।    दरअसल वर्ष 1980 से ही श्री दत्तोपंत जी ने विकसित देशों के साम्राज्यवादी षड्यंत्रों से भारत को आगाह करना प्रारम्भ किया था। आपका स्पष्ट मत था कि विश्व बैंक, अर्न्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं इसी प्रकार की अन्य बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के माध्यम से विकसित देशों द्वारा विकासशील एवं अविकसित देशों का शोषण किया जा सकता है क्योंकि इस प्रकार के संस्थानों पर विकसित देशों का पूर्ण कब्जा रहता है। श्री दत्तोपंत जी का उक्त चिंतन भी सत्य होता दिखाई दे रहा है क्योंकि अभी हाल ही में चीन द्वारा श्रीलंका, पाकिस्तान एवं अन्य कई देशों को ऋण के जाल में फंसाकर इन देशों के सामरिक महत्व वाले बंदरगाहों आदि पर कब्जा करने का प्रयास किया गया है। इन्ही कारणों के चलते श्री दत्तोपंत जी ने आर्थिक क्षेत्र में साम्यवाद एवं पूंजीवाद के स्थान पर राष्ट्रीयता से ओतप्रोत एक तीसरे मॉडल का सुझाव दिया था। साम्यवाद और पूंजीवाद दोनों विचारधाराओं को, भौतिकवादी विचार दर्शन पर आधारित होने के चलते, आपने अस्वीकार कर दिया था एवं आपने हिन्दू विचार दर्शन के आधार पर “थर्ड वे” का रास्ता सुझाया। अर्थात, हिन्दू जीवन मूल्यों के आधार पर ही आर्थिक व्यवस्था के लिए तीसरा रास्ता निकाला था। पाश्चात्य आर्थिक प्रणाली भारतीय परम्पराओं के मानकों पर खरी नहीं उतरती है। भारत में तो हिंदू अर्थव्यवस्था ही सफल हो सकती है। आप अपने उद्भोधनों में कहते थे कि कि समावेशी और वांछनीय प्रगति और विकास के लिए एकात्म दृष्टिकोण बहुत जरूरी है। वर्तमान में दुनियाभर में उपभोक्तावाद जिस आक्रामकता से बढ़ रहा है, उससे आर्थिक असमानता चरम पर है। इसके समाधान के लिए आपने हिंदू जीवन शैली और स्वदेशी को विकल्प बताया। आपका मत था कि हमें अपनी संस्कृति, वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य के लिए आकांक्षाओं के आलोक में प्रगति और विकास के अपने माडल की कल्पना करनी चाहिए। विकास का कोई भी विकल्प जो समाज के सांस्कृतिक मूल को ध्यान में रखते हुए नहीं बनाया गया हो, वह समाज के लिए लाभप्रद नहीं होगा। श्री दत्तोपंत जी ने सनातन हिंदू धर्म के अधिष्ठान पर राष्ट्रवादी विचार प्रवाह को सुपरिभाषित करने का महान कार्य भी सम्पन्न किया। आपने वर्ष 1955 में भारतीय मजदूर संघ, वर्ष 1979 में भारतीय किसान संघ, वर्ष 1983 में सामाजिक समरसता मंच एवं वर्ष 1991 में स्वदेशी जागरण मंच जैसे राष्ट्रवादी संगठनों का निर्माण राष्ट्र के सक्षम एवं समर्थ प्रहरी संगठनों के रूप में किया। ये सभी संगठन आगे चलकर आधुनिक राजनीति की अपर्याप्तता को पूर्ण करने का एक सशक्त माध्यम बने। दिनांक 14 अक्टोबर 2004 को पुणे में, श्री दत्तोपंत जी को महानिर्वाण प्राप्त हुआ। आपने अपने जीवन काल में लगभग 200 से अधिक पुस्तकें लिखी, सैकड़ों की संख्या में आपके  प्रतिवेदन प्रकाशित हुए तथा हजारों की संख्या में आपके द्वारा लिखित आलेख पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। प्रहलाद सबनानी   सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक,   भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  8 November 2022

मुख्यमंत्री चौहान 10 नवम्बर को मुम्बई में करेंगे उद्योगपतियों एवं निवेशकों से भेंट

इंदौर में जनवरी 2023 में प्रस्तावित इन्वेस्टर्स समिट के लिए करेंगे आमंत्रित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है‍ कि उद्योगपतियों और निवेशकों के लिए जनवरी 2023 में इंदौर में होने वाली इन्वेस्टर्स समिट परिणाममूलक हो, इस उद्देश्य से प्रदेश की आवश्यकताओं , निवेश के अवसरों और संभावनाओं की निवेशकों और उद्योगपतियों को विस्तार से जानकारी दी जाए। प्रदेश में कृषि उपकरणों के निर्माण और फार्मा तथा मेडिकल डिवाइस निर्माण से संबंधित उद्योगों की संभावनाओं से इस क्षेत्र में कार्यरत उद्योगपतियों को विशेष रूप से अवगत कराया जाए। मुख्यमंत्री चौहान आज निवास कार्यालय में मुम्बई में उद्योगपतियों के साथ 10 नवम्बर को मुलाकात एवं रोड-शो के संबंध में बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान जनवरी 2023 में इंदौर में प्रस्तावित इन्वेस्टर्स समिट के लिए उद्योगपतियों और निवेशकों को आमंत्रित भी करेंगे। प्रमुख सचिव  संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव मनीष सिंह तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान 10 नवम्बर को मुम्बई में महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के एम.डी. तथा सीईओ डॉ. अनीश शाह, हिन्दुस्तान यूनिलिवर के सीईओ  संजीव मेहता तथा रिलायंस इण्डस्ट्रीज के डायरेक्टर अनंत अंबानी एवं  धनराज नाथवानी, सीएट टायर्स के एम.डी. अनंत गोयनका, यू.एस. फार्मा के सीएमडी तपन संघवी, केमेरिक्स लाइफ साइंसेज के डायरेक्टर  ए.के. मिश्रा, एनक्यूब ऐथिकल फार्मा के एम.डी. मेहुल शाह, ग्यूफिक बायोसाइंसेज के सीएमडी  जयश चौकसी और पिरामल ग्रुप के वाइस चेयरपर्सन डॉ. स्वाति पिरामल से भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री  चौहान इन्फोबीन्स लिमिटेड के उद्घाटन कार्यक्रम और मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर आयोजित सत्र में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री चौहान फार्मा और मेडिकल उपकरणों के निर्माण से संबंधित इकाईयों की स्थापना की संभावनाओं के संबंध में इस क्षेत्र में कार्यरत उद्योगपतियों से विशेष रूप से चर्चा करेंगे। इसके अंतर्गत गोदरेज, एलेमबिक फार्मा, आदित्य बिरला ग्रुप, हीरानंदानी ग्रुप, सन फार्मास्युटिकल्स, टाटा संस, प्रोक्टर एंड गेम्बल इंडिया, लार्सेन एंड ट्यूबरो, परस्सिटेंट सिस्टम्स और पंचशील रियल्टी रिजर्व के प्रमुखों व पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे।

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 MadhyaBharat  8 November 2022

सार्वजनिक सम्मान ,पुरस्कार व्यक्ति को बेहतर योगदान के लिए प्रेरित करते हैं: राज्यपाल

प्रदेश के विकास के लिए मिल कर कदम बढ़ाएँ : मुख्यमंत्री  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सार्वजनिक सम्मान और पुरस्कार व्यक्ति को समाज में बेहतर योगदान के लिए प्रेरित करता है। उनका उत्साहवर्धन करता है। उन्होंने सभी सम्मानितों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि वे आगे भी वंचितों और पिछड़ों की मदद के लिए बेहतर कार्य करते रहेंगे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वे प्रदेश के 40 जिलों के दूरस्थ अंचलों का भ्रमण कर चुके हैं। भ्रमण के दौरान वे वंचित और पिछड़े वर्ग के साथ सीधा संवाद करते हैं। सरकार की योजनाओं से मिलने वाली हितग्राहियों की खुशी की अभिव्यक्ति को देख कर उन्हें गर्व और हर्ष का अनुभव होता है कि वे उस प्रदेश के राज्यपाल हैं, जिसकी सरकार पूरी ताकत से लोगों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने सरकार द्वारा जन-कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम को बधाई दी है। आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी सरकार इसी गति से कार्य करती रहेगी। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सरकार की जन-कल्याण की योजनाएँ अंतिम कड़ी के व्यक्ति तक पहुँचाने में अधिकारियों, जन-प्रतिनिधियों और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। राज्यपाल पटेल ने राज्य के स्थापना दिवस पर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि आयोजनों ने प्रदेश में उल्लास और उमंग का वातावरण बनाया है। राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में योगदान के लिए सम्मान और पुरस्कार की पहल प्रेरणादायी है। राज्यपाल  पटेल आज मुख्य अतिथि के रूप में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए सभी मिल कर कदम बढ़ाएँ, हम प्रदेश की बेहतरी का संकल्प लें और आम इंसान को राहत देते हुए विकास के नए प्रतिमान स्थापित करें। विकास और शांति में खलल डालने वालों को छोड़ेंगे नहीं, नेस्तनाबूत करेंगे। वहीं अच्छा कार्य करने वाले निरंतर प्रोत्साहित होंगे। मुख्यमंत्री चौहान आज शाम रवीन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में गरिमामय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री चौहान ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश अनेक क्षेत्र में देश में अव्वल है। यह क्रम आगे भी बना रहेगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने सभी पुरस्कृत संस्थाओं और व्यक्तियों को बधाई दी। राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री चौहान ने विभिन्न श्रेणी में पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम में मंच पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के साथ गृह और जेल मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, चिकित्सा शिक्षा मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, मंत्री  सुरेश धाकड़, मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक  कृष्णा गौर, भोपाल की महापौर  मालती राय और जिला पंचायत भोपाल की अध्यक्ष राम कुंवर गुर्जर मौजूद थीं। अतिथियों द्वारा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह अंतर्गत भोपाल में सप्ताह भर चली विभिन्न गतिविधियों के प्रतिभागियों को भी प्रशस्ति-पत्र और ट्राफी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा की आज जबलपुर में 5 हजार करोड़ से अधिक राशि से सड़कों का जाल बिछाने के कार्यों का शुभारंभ हुआ है। मुख्यमंत्री चौहान ने सिंचाई के रकबे में वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय बढ़ने और प्रदेश की अन्य प्रमुख उपलब्धियाँ गिनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और अन्य पुरस्कार देने का विचार काफी समय से मन में था जिसे आकर दिया गया है। यह सम्मान कार्य करने वालों के प्रति सामाजिक स्वीकृति है। यह सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं बल्कि उनके परिश्रम का सम्मान है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि उत्कृष्टता और नवाचारों को सदैव प्रोत्साहित किया जाएगा। विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान करने का उद्देश्य यही है कि अच्छा कार्य करने वाले और नहीं करने वाले एक समान न समझे जाएँ। उत्कृष्टता का सम्मान हो। पर्यावरण के क्षेत्र में, बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अन्य क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले आज पुरस्कृत हुए हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने आहवान किया कि आज बिजली बचाने, पानी बचाने, नशा मुक्ति, पर्यावरण के संरक्षण, बेटियों की सुरक्षा और सम्मान बढ़ाने के लिए सभी मिल कर कार्य करें। मध्यप्रदेश को समृद्ध और गौरवशाली बनाते हुए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर और शक्तिशाली भारत के संकल्प को भी पूर्ण करें। मध्य प्रदेश प्रत्येक क्षेत्र में नंबर वन रहे, इसके लिए सभी सहयोग प्रदान करें। मुख्य सचिव इक़बाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजोरा, पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जन प्रतिनिधि, आम नागरिक काफी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस उत्सव समारोह के समापन के अवसर पर प्रदेश में लगभग आठ हजार लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में, जिनमें सामाजिक संगठन, बेहतर काम करने वाले कर्मचारी-अधिकारी, खिलाड़ी को आज सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश अद्भुत है। वन-सम्पदा, जल-सम्पदा, जन सम्पदा ,कल-कल बहने वाली गंगा मैया की तरह नदियाँ, श्री महाकाल महालोक, ओंकारेश्वर, ओरछा में रामलला, मैहर में शारदा मैया, सलकनपुर वाली मैया, तीन-तीन वर्ल्ड हेरीटेज, चित्रकूट, साँची, मण्डलेश्वर, भीमबैठका प्रदेश की धरोहर हैं। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, चीता स्टेट और गिद्द स्टेट है। दुनिया भर के प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं। यहाँ की वाइल्ड लाइफ अद्भुत और अभूतपूर्व है। अनेक विशेषताओं से भरा हुआ हमारा मध्यप्रदेश है। सचमुच में इस मध्यप्रदेश पर हमको गर्व है। प्रदेश अब तेजी से प्रगति और विकास के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिला यह सम्मान अन्य लोगों को और अच्छा करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य के लिए पूरे 52 जिलों को बधाई दी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं और राज्य सरकार की योजनाओं के लिए पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़कर उन्हें लाभान्वित करने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। प्रदेश में 88 लाख नाम योजनाओं के लिए सामने आए हैं। पंचायतों से लेकर वार्डों तक शिविर लगे। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मंत्रिगण, अन्य जन-प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी बधाई के पात्र हैं। इन्हें एक दिन स्वीकृति पत्र प्रदान करने का कार्य किया जाएगा। इसकी तिथि शीघ्र तय की जा रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आगामी दो तीन महीनों में अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रदेश में हो रहे हैं। इनमें खेलो इंडिया,प्रवासी भारतीय दिवस और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट शामिल हैं।   पुरस्कृत संस्थाएँ और व्यक्ति मुख्यमंत्री चौहान के निर्देश पर एक नवम्बर से आरंभ मध्यप्रदेश स्थापना दिवस कार्यक्रम श्रंखला अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में भारत सरकार से वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के प्राप्तकर्ताओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचार के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय कार्य के लिए संस्थाओं को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान प्रदान किए गए। इन्हें मिला भारत सरकार से वर्ष 2022 में प्राप्त राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए प्रशस्ति पत्र मुख्यमंत्री चौहान ने भारत सरकार से वर्ष 2022 के राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को सम्मानित किया। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में संपूर्ण राज्य में स्वच्छता के लिए ओडीएफ स्थायित्व और ओडीएफ प्लस के विभिन्न घटकों के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के वर्ग में स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण 2022 में मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार मिलने पर प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास उमाकांत उमराव को प्रशस्ति-पत्र मिला। इसी क्रम में जिला स्तर पर भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भोपाल को भी भोपाल जिले के प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रशस्ति-पत्र दिया गया। बुरहानपुर जिले को देश में प्रथम हर घर जल जिला प्रमाणीकरण की उपलब्धि पर भारत सरकार से जल जीवन अवार्ड 2022 प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के लिए अपर मुख्य सचिव  मलय श्रीवास्तव तथा कलेक्टर बुरहानपुर  प्रवीण सिंह को प्रशस्ति-पत्र दिया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने खनिजों की खोज, नीलामी और खदानों के संचालन में पहल के लिए राष्ट्रीय खनिज विकास पुरस्कार की श्रेणी-2 का प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने पर प्रमुख सचिव खनिज साधन सुखवीर सिंह को प्रशस्ति पत्र दिया। इसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश द्वारा नंबर वन स्वच्छ राज्य का सम्मान अर्जित करने पर प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास  मनीष सिंह तथा स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में देश के नंबर वन स्वच्छ शहर का सम्मान प्राप्त करने पर कलेक्टर इंदौर मनीष सिंह और आयुक्त नगर निगम इंदौर को प्रशस्ति पत्र दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में 150 दिवस चैलेंज पुरस्कार 2021 के क्रियान्वयन के लिए राज्यों के श्रेणी में मध्यप्रदेश को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ । इस उपलब्धि के लिए प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास  मनीष सिंह को प्रशस्ति पत्र दिया गया। लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार वर्ष 2021 दतिया कलेक्टर  संजय कुमार और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी दतिया को प्राप्त हुआ है। पोषण अभियान में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्राप्त इस पुरस्कार के लिए उपरोक्त अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र दिए गए। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मुख्यमंत्री चौहान ने शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में छतरपुर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में बड़वानी जिले के नगरीय निकाय के अध्यक्ष, कलेक्टर बड़वानी तथा नगरीय निकाय के अधिकारी, म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में झाबुआ जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार दिया। इसी क्रम में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिधि योजना(पीएम स्वनिधि) में निवाड़ी जिले के नगरीय निकाय के अध्यक्ष, कलेक्टर तथा कलेक्टर द्वारा नामित नगरीय निकाय के अधिकारी और सीएम हेल्पलाइन एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत बुरहानपुर जिले के कलेक्टर तथा जिला प्रबंधक, लोक सेवा प्रबंधन को पुरस्कार प्रदान किया गया।   नवाचार के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार नवाचार के लिए छह श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए। इनमें मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के अंतर्गत नागरिक सेवा प्रदाय, सूचना प्रौद्योगिकी और सुशासन श्रेणी में पुलिस थानों की रैकिंग के लिए आयुक्त पुलिस भोपाल मकरंद देउस्कर, डीसीपी हेडक्वार्टर  विनीत कपूर, एसीपी हेडक्वार्टर अजय मिश्रा, शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास श्रेणी में निरक्षरता से आजादी अभियान के अंतर्गत कलेक्टर मंडला  हर्षिता सिंह और महिला एवं बाल विकास अधिकारी  श्वेता कानवे, सीएम राइज स्कूल की पहल के लिए प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरूण शमी, आयुक्त लोक शिक्षण अभय वर्मा, उप संचालक लोक शिक्षण डी.एस. कुशवाह, संस्कृत विद्यालय संचालन के लिए महर्षि पंतजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के संचालक  प्रभात राज तिवारी शामिल हैं। स्वास्थ्य एवं पोषण श्रेणी में योग से निरोग कार्यक्रम के लिए प्रमुख सचिव, आयुष प्रतीक हजेला और उप संचालक आयुष डॉ. राजीव मिश्रा तथा उमंग हेल्पलाइन के लिए अतिरिक्त संचालक लोक शिक्षण कामना आचार्य को पुरस्कार दिया गया।   मुख्यमंत्री चौहान ने अधोसंरचना श्रेणी में श्री महाकाल महालोक परियोजना के लिए प्रमुख सचिव संस्कृति  शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास  मनीष सिंह, प्रमुख सचिव धर्मस्व  संजीव झा, कलेक्टर उज्जैन आशीष सिंह और सीईओ स्मार्ट सिटी, उज्जैन आशीष पाठक को पुरस्कृत किया। मुख्यमंत्री चौहान ने सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण के लिए सम्मान अभियान (असली हीरो) के लिए पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, एडाप्ट एन आंगनवाड़ी के लिए अपर मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास अशोक शाह तथा आयुक्त महिला बाल विकास और आनंदम तथा अल्पविराम कार्यक्रम के लिए आनंद विभाग के अखिलेश अर्गल, ग्वालियर में संचालित आशीर्वाद योजना के लिए कलेक्टर ग्वालियर  कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत आशीष तिवारी और तत्कालीन आपूर्ति नियंत्रक चन्द्रभान सिंह जादौन, ग्वालियर संभाग में संचालित समझौते से समाधान योजना के लिए तत्कालीन संभागायुक्त ग्वालियर संभाग आशीष सक्सेना (अब सेवानिवृत्त) को पुरस्कृत किया गया। नगर गौरव दिवस आयोजन के लिए कलेक्टर दतिया  संजय कुमार सहित दतिया के अधिकारियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में रोजगार एवं आर्थिक विकास श्रेणी के लिए स्व-सहायता समूह द्वारा पोषण आहार संयंत्र संचालन के लिए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  उमाकांत उमराव और मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन  ललित बेलवाल तथा आवास सामग्री एप फ्लाय एश और सेट्रिंग के लिए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास उमाकांत उमराव तथा संचालक प्रधानमंत्री आवास को नवाचार में पुरस्कार प्रदान किए गए।   मध्यप्रदेश गौरव सम्मान 2022 मुख्यमंत्री  चौहान ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण श्रेणी में नर्मदा समग्र भोपाल, वीरता पूर्ण कार्य के लिए हॉक फोर्स, सामाजिक सुधार श्रेणी में मध्यप्रदेश गायत्री परिवार, महिला एवं बच्चों का विकास श्रेणी में सेवा भारती मध्य भारत को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान प्रदान किए। जनभागीदारी और सामुदायिक प्रबंधन श्रेणी में व्यक्तिगत श्रेणी के अंतर्गत विजय मनोहर तिवारी और संस्थागत श्रेणी में 56 दुकान व्यापारी एसोसिएशन इंदौर, शिक्षा एवं खेलकूद के क्षेत्र में व्यक्तिगत श्रेणी में  रूबीना फ्रांसिस और संस्थागत श्रेणी में सरस्वती शिक्षा परिषद, स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र में व्यक्तिगत श्रेणी में विनायक लोहानी और संस्थागत श्रेणी में आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड तथा जन सेवा के क्षेत्र में आरूषी भोपाल संस्था को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान प्रदान किया गया। रूबीना फ्रांसिस की ओर से उनके प्रतिनिधि ने सम्मान ग्रहण किया।   बुंदेलखंड के लोक नृत्यों ने किया आनंदित कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कृति विभाग के सौजन्य से आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बुंदेलखंड अंचल के प्रसिद्ध बधाई लोक नृत्य की प्रस्तुति प्रतिभाशाली युवक युवतियों के दल द्वारा दी गई। इस प्रस्तुति का अतिथियों सहित सभी उपस्थित लोगों ने आनंद प्राप्त किया।

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 MadhyaBharat  8 November 2022

मध्यप्रदेश में 6 लाख करोड़ रूपये से अधिक की सड़कें बनाई जायेंगी

केन्द्रीय मंत्री गड़करी और मुख्यमंत्री चौहान ने जबलपुर में किया 8 सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 6 लाख करोड़ रूपये से अधिक लागत की सड़कें बनाई जायेंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भागीरथ प्रयासों से मध्यप्रदेश बीमारू राज्य से विकसित राज्य बन गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के आग्रह पर जबलपुर में लॉजिस्टिक पार्क स्वीकृत करने की घोषणा की। केन्द्रीय मंत्री गड़करी और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जबलपुर में 4054 करोड़ रूपये लागत से 214 किलोमीटर लंबाई की 8 सड़क परियोजना का शिलान्यास और लोकार्पण किया। उन्होंने विकास कार्यों के लिये आधा दर्जन मार्गों को मंजूरी देते हुए सौगात दी। जिसका लाभ दमोह, सागर, सिवनी, बालाघाट, कटनी, डिण्डौरी सहित पूरे मध्य भारत को मिलेगा। केन्द्रीय मंत्री गड़करी ने कहा कि जबलपुर में विकास की अपार संभावनाओं को मूर्त रूप देने के लिये केन्द्र सरकार से हमेशा सहयोग मिलेगा। यहाँ शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, रोजगार सहित अन्य सभी सेक्टर्स में विकास को गति मिलेगी। जबलपुर नगर में एम्पायर टॉकीज से कटंगा, साउथ एवेन्यू मॉल से ग्वारी घाट-गुरूद्वारा तक रोप-वे को मंजूरी दी जा रही है। साथ ही सिविक सेंटर से मालवीय लार्डगंज, बड़ा फुहारा, बल्देव बाग तक फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार होते ही फ्लाई ओवर निर्माण की स्वीकृति दी जायेगी। केन्द्रीय मंत्री गड़करी ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान प्रदेश में जहाँ कहीं भी लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना का प्रस्ताव देंगे उन सबको मंजूरी दे दी जायेगी। उन्होंने कहा कि शहपुरा-भिटोनी मार्ग को उन्नत करने और उमरिया-डुंगरिया मार्ग को रिंग रोड से जोड़ने के कार्य को स्वीकृति दी जायेगी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय राज्य मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा शहपुरा-नरसिंहपुर और दमोह की सभी सड़क परियोजनाओं को जल्द ही मूर्त रूप दिया जायेगा। जबलपुर में रिंग रोड पर तैयार होने वाले आईकॉनिक ब्रिज को पर्यटन के लिये विकसित करने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा सभी संभव मदद दी जायेगी। केन्द्रीय मंत्री गड़करी ने कहा कि जबलपुर से दमोह तक 800 करोड़ रूपये की लागत से 100 किलोमीटर 2 लेन सड़क निर्माण की मंजूरी दी गई है। इस मार्ग के लिये डीपीआर का कार्य पूरा हो गया है। शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू होगा। जबलपुर के आईएसबीटी से पाटन तक 2 लेन सड़क, नरसिंहपुर से सिंहपुर तक 10 किलोमीटर लंबी 4 लेन सड़क को मंजूरी दी गई है। नरसिंहपुर से श्योपुर मार्ग का डीपीआर बहुत जल्द तैयार हो जायेगा। सिवनी से बालाघाट तक 88 किलोमीटर लंबा मार्ग नया एनएच होगा। बालाघाट से राजेगाँव तक 4 लेन मार्ग के लिये टेंडर प्रक्रिया वर्ष 2023 तक पूर्ण हो जायेगी। राजेगाँव से रायपुर तक 3 हजार 500 करोड़ रूपये लागत से नया सड़क मार्ग तैयार किया जायेगा। केन्द्रीय मंत्री  गड़करी ने कहा कि जबलपुर में बनने वाले रिंग रोड के आसपास की जमीन राज्य सरकार अधिग्रहित करे। डेव्हलपमेंट अथॉरिटी बनाये। इस जमीन पर लॉजिस्टिक पार्क, इण्डस्ट्रियल क्लस्टर और स्मार्ट सिटी का निर्माण किया जा सकता है1 उन्होंने कहा कि भेड़ाघाट में म्यूजिकल फाउंटेन बनाने में केन्द्र सरकार मदद करेगी। जबलपुर-नागपुर मेट्रो भी बहुत जल्द केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि जबलपुर और नागपुर के मध्य मेट्रो ट्रेन जल्दी ही शुरू की जायेगी। इसमें 8 बोगी होंगी। दो बोगी फल-सब्जियों के लिये रहेंगी। शेष छह बोगी में एक बिजनेस क्लास बोगी होगी, जिसमें हवाई जहाज की तरह सुविधाएँ होंगी। रिंग रोड जबलपुर के सर्वांगीण विकास की गारंटी : मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सड़क परियोजनाओं-रिंग रोड का निर्माण जबलपुर के सर्वांगीण विकास की गारंटी है। यह केवल रिंग रोड ही नहीं है, बल्कि युवाओं के रोजगार, उद्योग, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विकास के लिये अनेक द्वार खोलने वाली परियोजना है। इससे महाकौशल क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएँ बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जबलपुर प्रदेश के सर्वाधिक विकसित शहरों में होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्तव में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री गड़करी ने देश में विकास की नई परंपरा शुरू की है। उनकी कल्पनाशीलता का लाभ सभी को मिल रहा है। उन्होंने असंभव को भी संभव बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत फेज-दो में जबलपुर के लिये 720 करोड़ रूपये के कार्य स्वीकृत किये जा रहे हैं। डुमना एयरपोर्ट 421 करोड़ रूपये की लागत से बन रहा है। उन्होंने आईकॉनिक ब्रिज बनाने और मॉस रेपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिकतम बनाने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-प्रतिनिधियों के विकास एवं जन-कल्याण संबंधी कार्यों के प्रस्ताव स्वीकृति के लिये भेजे जायेंगे। केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल केन्द्रीय जल शक्ति एवं खाद्य प्र-संस्करण एवं उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा है कि हर क्षेत्र में विकास कार्य हो रहे हैं, जिसका लाभ सभी को मिल रहा है। दमोह जिले में भी जल्द राष्ट्रीय राजमार्ग रफ्तार भरेगा। विकास की जो नींव आज रखी जा रही है, उसका लाभ आने वाले 50 वर्ष तक मिलेगा। प्रदेश के लोक निर्माण और जबलपुर जिले के प्रभारी मंत्री  गोपाल भार्गव ने कहा कि देश ने वर्ष 2014 के बाद विकास की रफ्तार पकड़ी है। सड़कों के बिना विकास की कल्पना ही नहीं की जा सकती। उच्च गुणवत्ता की सड़कें क्षेत्र को और लोगों को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्री  गड़करी कामधेनु और कल्पवृक्ष की तरह विकास और जन-कल्याण की सभी माँगों को पूरी करते हैं। सांसद राकेश सिंह ने कहा कि महाकौशल अंचल को आज मिली 13 सड़क परियोजनाओं की सौगात से इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, संपन्नता आयेगी और युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने इन परियोजनाओं की सौगात देने के लिये केन्द्रीय मंत्री श्री गड़करी का आभार माना।

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 MadhyaBharat  8 November 2022

नरोत्तम मिश्रा

  कमलनाथ खेद पत्र जारी करें ,राहुल जनता से माफ़ी मांगे एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह  को लेकर कहा कि दिग्विजय सिंह का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना अधूरा रह गया. दिग्विजय बुजुर्ग नेता है। वो किसी के साथ भी डांस कर सकते हैं। अब फिटनेस का दौर है तो दिग्विजय को भी फिटनेस तो दिखानी पड़ेगी।  गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि  कमलनाथ को किसान और बेरोजगार से झूठ बोलने के लिए  खेद पत्र जारी करना चाहिए। की उन्होंने  उस  समय के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से झूठ बुलवा लिया। राहुल गाँधी ने ही कमलनाथ से किसानों का कर्ज और बेरोजगारों का रोजगार वादा किया था। राहुल मध्यप्रदेश में आने से पहले किसान और नौजवान से माफ़ी मांगे। उन्होंने कहा राहुल की यात्रा का ध्येय पहले दिन से ही नहीं था। बदलने का सवाल ही नहीं खड़ा होता है। वहीं उन्होंने दिग्विजय सिंह के डांस पर कहा कि दिग्विजय सिंह किसी के साथ भी डांस कर सकते हैं। उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की मंशा तो पूरी हुई नहीं। अब राहुल की फिटनेस की बात पर वे डांस कर रहे हैं। मिश्रा ने कहा विधानसभा सत्र सार्थक चर्चा के लिए होती  हैं। हल्ला करने के लिए नहीं।  विपक्षी मुख्यमंत्री  का भाषण भी सत्र में नहीं सुनते हैं। नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी मर्डर के मामले में कहा  मुख्य आरोपी और लड़की के पिता सुरेश जाटव को  गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा टीटी नगर के अपराधियों का वीडियो संज्ञान में आया है। अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। रासुका की कार्रवाई की जाएगी। इन अपराधियों के जमानत दरों के विरुद्ध भी कार्यवाही होगी। 

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 MadhyaBharat  7 November 2022

अधिकारियों, कर्मचारियों और संस्थाओं के समर्पित प्रयास सराहनीय -सीएम

राष्ट्रीय पुरस्कार, मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और मध्यप्रदेश गौरव सम्मान प्राप्तकर्ताओं को दी शुभकामनाएँ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शासकीय योजनाओं और जन-कल्याणकारी गतिविधियों के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विकास और नागरिकों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए अधिकारी, कर्मचारियों और संस्थाओं के समर्पित प्रयास सराहनीय है। मुख्यमंत्री  चौहान ने केन्द्र सरकार से वर्ष 2022 में राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित अधिकारियों, शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त जिलों, नवाचार के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2022 से सम्मानित अधिकारियों और मुख्यमंत्री गौरव सम्मान 2022 से सम्मानित संस्थाओं को ट्वीट कर शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि टीम मध्यप्रदेश का समर्पण और तत्परता अनुकरणीय है। नवाचार श्रेणी में सम्मानित होने वाले चयनित जिलों की टीमों के उत्कृष्ट और अद्भुत नवाचार प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने मध्यप्रदेश गौरव सम्मान-2022 से सम्मानित होने वाली संस्थाओं को भी बधाई दी है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री चौहान के निर्देश पर एक नवम्बर से आरंभ मध्यप्रदेश स्थापना दिवस कार्यक्रम श्रृंखला में राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह में केन्द्र सरकार से वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के प्राप्तकर्ताओं को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचार के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार तथा विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय कार्य के लिए संस्थाओं को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान के लिए चुना गया है। वर्ष 2022 में प्राप्त राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए प्रशस्ति-पत्र मुख्यमंत्री चौहान ने भारत सरकार से वर्ष 2022 के राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में वर्ष 2021-22 में संपूर्ण राज्य स्वच्छता के लिए ओडीएफ स्थायित्व और ओडीएफप्लस के विभिन्न घटकों के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के वर्ग में स्वच्छता सर्वेक्षण (ग्रामीण) 2022 में मध्यप्रदेश को प्रथम पुरस्कार मिलने पर प्रशस्ति-पत्र के लिए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  उमाकांत‍उमराव को शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने इसी क्रम में जिला स्तर पर भोपाल कलेक्टर  अविनाश लवानिया तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भोपाल को भी भोपाल जिले के प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रशस्ति-पत्र के लिए बधाई दी है। बुरहानपुर जिले को देश में प्रथम हर घर जल जिला प्रमाणीकरण की उपलब्धि पर भारत सरकार से जल जीवन अवार्ड 2022 प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री  चौहान ने इस उपलब्धि के लिए अपर मुख्य सचिव मलय श्रीवास्तव तथा कलेक्टर बुरहानपुर  प्रवीण सिंह अढायच को प्रशस्ति-पत्र के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री चौहान ने खनिजों की खोज, नीलामी और खदानों के संचालन में पहल के लिए राष्ट्रीय खनिज विकास पुरस्कार की श्रेणी-2 का प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने पर प्रमुख सचिव खनिज साधन  सुखवीर सिंह को प्रशस्ति-पत्र के लिए बधाई दी है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश द्वारा नंबर वन स्वच्छ राज्य का सम्मान अर्जित करने पर प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास मनीष सिंह तथा स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में देश के नंबर वन स्वच्छ शहर का सम्मान प्राप्त करने पर कलेक्टर इंदौर  मनीष सिंह और आयुक्त नगर निगम इंदौर को प्रशस्ति-पत्र के लिए शुभकामनाएँ दी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 150 दिवस चैलेंज पुरस्कार 2021 के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को राज्यों की श्रेणी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री  चौहान ने प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास  मनीष सिंह को प्रशस्ति-पत्र के लिए बधाई दी। लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार वर्ष 2021 दतिया कलेक्टर  संजय कुमार और जिला महिला-बाल विकास अधिकारी दतिया को प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री  चौहान ने पोषण अभियान में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्राप्त इस पुरस्कार के लिए इन अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र के लिए शुभकामनाएँ दी। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मुख्यमंत्री चौहान ने शासकीय योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में छतरपुर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बड़वानी जिले के नगरीय निकाय के अध्यक्ष, कलेक्टर बड़वानी तथा नगरीय‍निकाय के अधिकारी, म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में झाबुआ जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए बधाई दी। इसी क्रम में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिधि योजना में निवाड़ी जिले के नगरीय निकाय के अध्यक्ष, कलेक्टर तथा नगरीय निकाय के अधिकारी पुरस्कृत होंगे और सीएम हेल्पलाइन एवं लोक सेवा गारंटी अधिनियम में बुरहानपुर जिले के कलेक्टर तथा जिला प्रबंधक, लोक सेवा प्रबंधन को पुरस्कार के लिए शुभकामनाएँ दी।   नवाचार के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार   नवाचार के लिए छह श्रेणियों में मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार में नागरिक सेवा प्रदाय, सूचना प्रौद्योगिकी और सुशासन श्रेणी में पुलिस थानों की रैंकिंग के लिए पुलिस आयुक्त भोपाल  मकरंद देउस्कर, डीसीपी हेडक्वार्टर विनीत कपूर, एसीपी हेडक्वार्टर अजय मिश्रा को बधाई दी गई। मुख्यमंत्री चौहान ने शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास श्रेणी में निरक्षरता से आजादी अभियान में कलेक्टर मंडला  हर्षिता सिंह और महिला-बाल विकास अधिकारी  श्वेता कानवे, सीएम राइज स्कूल की पहल के लिए प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा  रश्मि अरूण शमी, आयुक्त लोक शिक्षण अभय वर्मा, उप संचालक लोक शिक्षण डी.एस. कुशवाह, संस्कृत विद्यालय संचालन के लिए महर्षि पंतजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के संचालक  प्रभात राज तिवारी को शुभकामनाएँ दी। स्वास्थ्य एवं पोषण श्रेणी में योग से निरोग कार्यक्रम के लिए प्रमुख सचिव आयुष  प्रतीक हजेला और उप संचालक आयुष डॉ. राजीव मिश्रा तथा उमंग हेल्पलाइन के लिए अतिरिक्त संचालक लोक शिक्षण  कामना आचार्य को बधाई दी।   मुख्यमंत्री चौहान ने अधो-संरचना श्रेणी में श्री महाकाल महालोक परियोजना के लिए प्रमुख सचिव संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास मनीष सिंह, प्रमुख सचिव धर्मस्व  संजीव झा, कलेक्टर उज्जैन आशीष सिंह और सीईओ स्मार्ट सिटी आशीष पाठक को बधाई दी। मुख्यमंत्री  चौहान ने रोजगार एवं आर्थिक विकास श्रेणी में स्व-सहायता समूह द्वारा पोषण आहार संयंत्र संचालन के लिए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास  उमाकांत उमराव और मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ललित बेलवाल तथा आवास सामग्री एप फ्लाई एश और सेंट्रिंग के लिए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास उमाकांत उमराव तथा संचालक प्रधानमंत्री आवास को नवाचार में पुरस्कार के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। मध्यप्रदेश गौरव सम्मान 2022 मुख्यमंत्री चौहान ने पर्यावरण एवं जल-संरक्षण श्रेणी में नर्मदा समग्र भोपाल, वीरता पूर्ण कार्य के लिए हॉक फोर्स, सामाजिक सुधार श्रेणी में मध्यप्रदेश गायत्री परिवार, महिला एवं बच्चों का विकास श्रेणी में सेवा भारती मध्य भारत को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान के लिए बधाई दी है। मुख्यमंत्री चौहान ने जन-भागीदारी और सामुदायिक प्रबंधन श्रेणी में व्यक्तिगत श्रेणी में विजय मनोहर तिवारी और संस्थागत श्रेणी में 56 दुकान व्यापारी एसोसिएशन इंदौर, शिक्षा एवं खेलकूद के क्षेत्र में व्यक्तिगत श्रेणी में  रूबीना फ्रांसिस और संस्थागत श्रेणी में सरस्वती शिक्षा परिषद, स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र में व्यक्तिगत श्रेणी में  विनायक लोहानी और संस्थागत श्रेणी में आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड तथा जन सेवा के क्षेत्र में आरूषि संस्था, भोपाल को मध्यप्रदेश गौरव सम्मान के लिए शुभकामनाएँ दी हैं।

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 MadhyaBharat  7 November 2022

प्रशिक्षण सम्पूर्ण सेवाकाल की मार्गदर्शिका, दिल दिमाग खुला रख प्राप्त करें

कार्यशैली का लक्ष्य जरूरतमंद वंचित वर्गों का भरोसा और दिल जीतना हो राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आर.सी.वी.पी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में प्रशिक्षणाधीन अखिल भारतीय सेवा के प्रशासनिक और राजस्व सेवा के अधिकारियों के साथ आत्मीय संवाद किया। अकादमी संचालक  सोनाली पोंक्षे वायंगणकर के नेतृत्व में प्रशिक्षु अधिकारी आज सौजन्य भेंट के लिए राजभवन आए थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान दिल-दिमाग को खुला रखकर ज्ञान प्राप्त करें। यह संपूर्ण सेवाकाल में उपयोग आने वाली मार्गदर्शिका है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सेवा भावना के साथ कार्य करने से सारा जीवन आनंद के साथ बीतेगा। उन्होंने कहा कि धन से भौतिक सुख की प्राप्ति हो सकती है लेकिन संवेदनशीलता के साथ दूसरों की मदद ही आत्मिक आनंद प्राप्त करने का तरीका है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि सरकार के जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों को अंतिम कड़ी तक पहुँचाना अधिकारियों का दायित्व है। इसलिए जरूरी है कि जन-साधारण के साथ आत्मीय व्यवहार करें। आत्मीयता के लिए सामान्य बोलचाल, सरल व्यवहार और संवेदनशील आचरण का पालन पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवक की कार्यशैली का लक्ष्य जरूरतमंद तथा वंचित वर्गों का भरोसा और दिल जीतने का होना चाहिए। सेवाकाल के दौरान कई समस्याएँ और चुनौतियाँ आएंगी, जिनके समाधान के लिए जरूरी है कि कार्यक्षेत्र की विशेषताओं को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ अधीनस्थ कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बना कर प्रयास किए जाएं। अकादमी संचालक सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने स्वागत उद्बोधन दिया। विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी सह प्रशिक्षण संचालक  रश्मि बघेल ने आभार माना। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों की ओर से  वैशाली,  अरविंद और जयदीप लकुम ने प्रशिक्षण में प्राप्त अनुभवों को साझा किया।  

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 MadhyaBharat  7 November 2022

खाद वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाने करें तकनीक का पूरा उपयोग

प्रदेश में खाद की पर्याप्त उपलब्धता, वितरण में असंतुलन न हो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि खाद वितरण की ऐसी व्यवस्था करें कि कहीं भी खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को लाइन न लगाना पड़े। उपलब्धता के बाद यह सुनिश्चित करें कि वितरण की व्यवस्था भी सही रहे। केन्द्र सरकार से निरंतर आवंटन प्राप्त हो रहा है। खाद की कोई कमी नहीं है। वितरण का असंतुलन नहीं होना चाहिए। यह जानकारी भी किसान तक पहुँचे। खाद वितरण के सुचारू प्रबंध मैदान में दिखना चाहिए। कंट्रोल रूम से निगाह रखते हुए प्रतिदिन की जानकारी सामने लाई जाए। व्यवस्था में दोषी लोगों को जेल भेजने की कार्यवाही हो। प्रदेश में खाद वितरण के 262 अतिरिक्त काउंटर प्रारंभ किए गए हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पूरे प्रदेश में सुचारू रूप से खाद और उर्वरक का वितरण सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि गड़बड़ी करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करते हुए व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाएँ। समय पर वितरण के साथ ही सोशल मीडिया से किसानों को आँकड़ों सहित वास्तविक स्थिति की जानकारी जिला स्तर पर दी जाए। इसके लिए कलेक्टर्स आवश्यक व्यवस्थाएँ करें। मुख्यमंत्री चौहान ने बोवनी कार्य की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके परिश्रम की पूरी कीमत मिलना चाहिए। विशेष रूप से मंडियों में आने वाले सब्जी उत्पादकों को बिचौलियों और व्यापारियों द्वारा अनुचित लाभ लेने से बचाने पर भी ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री चौहान आज शाम निवास कार्यालय में प्रदेश में खाद व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव सहकारिता  के.सी. गुप्ता, आयुक्त सहकारिता संजय गुप्ता और प्रबंध संचालक मार्कफेड आलोक कुमार सिंह उपस्थित थे।   प्रदेश का खाद परिदृश्य बैठक में बताया गया कि केन्द्र सरकार द्वारा माह नवम्बर-2022 के लिए यूरिया का आवंटन सात लाख मी. टन (2.85 लाख मी. टन स्वदेशी एवं 4.15 लाख मी. टन आयातित) एवं डीएपी का आवंटन 1.94 लाख मी. टन (0.20 लाख मी. टन स्वदेशी एवं 1.74 लाख मी. टन आयातित) दिया गया है। माह नवम्बर 2022 के लिए 4.15 लाख मी. टन आयातित यूरिया का आवंटन दिया गया है, जिसके विरूद्ध केन्द्र सरकार द्वारा 60 हजार मी. टन का आवंटन दिया गया है। दिनांक 5 नवम्बर 2022 की स्थिति में यूरिया 1.20 लाख मी. टन ट्रांजिट सहित, डीएपी 0.83 लाख मी. टन ट्रांजिट सहित‍ एवं एनपीके ट्रांजिट सहित 0.34 लाख मी. टन प्राप्त है। दिनांक 4 नवम्बर 2022 की स्थिति में यूरिया का स्टॉक 2. 23 लाख मी. टन, डीएपी का स्टॉक 1.52 लाख मी. टन एवं एनपीके का स्टॉक 1.14 लाख मी. टन है।   बताया गया कि गत वर्ष 30 नवम्बर, 2021 तक विक्रय मात्रा के अनुसार अनुमान के आधार पर दिनांक 4 नवम्बर 2022 तक यूरिया 32 जिलों में, डीएपी 41 जिलों में, एनपीके 34 जिलों में और डीपएपी +एनपीके का 42 जिलों में भण्डारण कर लिया गया है। विपणन संघ ने माह नवम्बर के लिए 175 यूरिया के रेक और 78 रेक डीएपी की माँग की है, जिसके विरूद्ध एक नवम्बर से 4 नवम्बर 2022 तक 23 यूरिया की रेक और 15 डीएपी की रेक ट्रांजिट सहित मिल चुकी है। विपणन संघ के 240 डबल लॉक केंद्र से नगद वितरण प्रारंभ हो चुका है। भीड़ वाले डबल केंद्रों पर अतिरिक्त केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। कुल 90 केंद्रों से विक्रय प्रारंभ है, शेष विक्रय केंद्र अगले दो दिन में 7 नवम्बर तक प्रारंभ हो जाएंगे।   बताया गया कि प्रदेश में मार्केटिंग समितियों के 105 विक्रय केंद्र प्रारंभ हैं। विपणन संघ के डबल लॉक केंद्रों से एक अक्टूबर से अभी तक 68 हजार मी. टन यूरिया और 61 हजार मी. टन डीएपी को बेचा जा चुका है। माह अक्टूबर-2022 का यूरिया का आवंटन 6 लाख मी. टन है, जिसके विरूद्ध 3.64 लाख मी. टन यूरिया ट्रांजिट सहित प्राप्त हुआ है और 2.36 लाख मी. टन शीघ्र प्राप्त होगा। डीएपी का अक्टूबर 2022 के लिए आवंटन 4 लाख लाख मी. टन है, जिसके विरूद्ध 2.65 लाख मी. टन ट्रांजिट सहित प्राप्त हुआ है। अक्टूबर, 2022 के कोटे की शेष यूरिया की मात्रा 2.36 लाख मी. टन और डीएपी की शेष मात्रा 1.35 लाख मी. टन मिलाकर माह नवम्बर 2022 के लिए यूरिया का आवंटन 9.36 लाख मी. टन, डीएपी 3.29 लाख मी. टन का संशोधित आवंटन आदेश माह नवम्बर 2022 के लिए जारी करने की कार्यवाही की जा रही है। साथ ही एडवांस प्लानिंग में माह दिसम्बर के लिए यूरिया की माँग 5 लाख मी. टन, डीएपी 1.25 लाख मी. टन, एनपीके 0.30 लाख मी. टन का अनुमान लगाया गया है। इसकी व्यवस्था के लिए भी प्रयास अभी से किए जा रहे हैं।

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 MadhyaBharat  6 November 2022

सड़क क्रांति मध्यप्रदेश के महत्व और गौरव को बढ़ाएगी

केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी 7 नवम्बर को करेंगे 5315 करोड़ की 13 सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में विभिन्न सड़क निर्माण प्रकल्प तेजी से पूर्ण हो रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से भिन्न-भिन्न योजनाओं में अनेक मार्ग स्वीकृत हुए हैं। अनेक पूर्ण हो चुके हैं। इससे प्रदेश का पर्यटन महत्व भी बढ़ रहा है। प्रदेश के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के अलावा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर से परिचित होने देश-विदेश से सैलानी पहुँच रहे हैं। यह सड़क क्रांति मध्यप्रदेश के महत्व और गौरव को बढ़ाएगी। इस क्रम में सोमवार 7 नवम्बर को मण्डला और जबलपुर जिले में 5315 करोड़ रूपए की लागत से कुल 543 कि.मी. लम्बी 13 सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है। मुख्यमंत्री  चौहान ने नवम्बर के इन कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री चौहान ने जबलपुर और मण्डला में हो रहे कार्यक्रमों की तैयारियों की जानकारी दोनों जिलों के कलेक्टर्स और विभागीय अधिकारियों से प्राप्त की। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सड़कों के निर्माण से न सिर्फ पर्यटकों को लाभ हो रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीण और शहरी आबादी बेहतर सड़कों से सीधे लाभान्वित हो रही है। आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश का एक बड़ा हिस्सा केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी द्वारा किए जा रहे शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों से लाभान्वित होगा। महाकौशल अंचल में इन सड़कों का होना है लोकार्पण और शिलान्यास बताया गया कि महाकौशल अंचल में जबलपुर सहित मण्डला, डिण्डोरी और नरसिंहपुर जिले लाभान्वित हो रहे हैं। जबलपुर जिले में 8 सड़क परियोजनाओं की शुरूआत हो रही है। इनमें कुल 3332 करोड़ रूपए की लागत की सात सड़कों की आधारशिला रखी जा रही है। इसके अलावा एक सड़क का लोकार्पण हो रहा है, जो एनएचएआई द्वारा नरसिंहपुर जिले में हिरन नदी से सिंदूर नदी तक की 4 लेन सड़क है, जिसकी लम्बाई 53 कि.मी. है। यह सड़क 722 करोड़ रूपए की लागत से बन कर पूरी हुई है। इस सड़क के लोकार्पण के साथ ही जिन सात सड़कों का शिलान्यास हो रहा है उनमें जबलपुर से कुण्डम लम्बाई 42 कि.मी., बरेला से मानेगांव लम्बाई 16 कि.मी., मानेगांव से राष्ट्रीय राजमार्ग 45 तक 4 लेन की सड़क लम्बाई 20 कि. मी., राष्ट्रीय राजमार्ग 45 से कुश्नेर लम्बाई 36 कि. मी., कुश्नेर से अमझर लम्बाई 23 कि. मी., कुण्डम से निवास सड़क उन्नयन लम्बाई 23 कि.मी. और एक कि.मी. लम्बाई का जबलपुर ऐलिवेटेड कॉरिडोर एक्सटेंशन भी शामिल है। मंडला जिले में 1261 करोड़ रूपए की लागत से 329 कि.मी. लम्बाई की पाँच सड़कों के निर्माण की शुरूआत हो रही है। इनमें कुण्डम से शहपुरा 36 किमी, शहपुरा से डिण्डोरी 37 किमी, डिण्डोरी से सागरटोला 86 किमी, डिण्डोरी से मण्डला 101 किमी और समनापुर से बजाग तक मार्ग का उन्नयन शामिल है। बताया गया कि इन सड़क परियोजनाओं के अमल से मार्गों का 2-लेन (पेव्हड शोल्डर सहित)उन्नयन कार्य हो रहा है। परियोजनाओं में मेजर ब्रिज, माइनर ब्रिज और कल्वर्ट का निर्माण, रहवासी क्षेत्र में नाली निर्माण, बस-ले-बाय, ट्रक-ले-बाय तथा जंक्शन के उन्नयन का कार्य और रहवासी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटिंग का कार्य भी हो रहा है। परियोजना से सड़क सुरक्षा की दृष्टि से क्रेश बेरियर, रोड मार्किंग,साइनेज, बोर्ड एवं अन्य कार्य सम्पन्न होंगे।   परियोजनाओं से होने वाले लाभ सड़क के ज्यामितीय सुधार से यात्रा सुगम एवं सुरक्षित होने के साथ यात्रा समय में कमी। पर्यटन एवं धार्मिक स्थल, विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट, अमरकंटक, कान्हा नेशनल पार्क जाने में सुविधा। परियोजना से छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश तक चावल एवं स्टील के ट्रकों का आवागमन सुगम तथा यात्रा समय में कमी से ईंधन की बचत। औद्योगिक विकास, कृषि एवं पर्यटन और रोजगार अवसरों को बढ़ावा।

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 MadhyaBharat  6 November 2022

गंभीर अपराध के अपराधियों को मिल रहा है कठोरतम दंड

मुख्यमंत्री चौहान ने चिन्हित अपराधों पर कार्रवाई का प्रेजेंटेशन देखा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में अपराधों पर पुख्ता नियंत्रण के उद्देश्य से वर्ष 2008 से चिन्हित अपराध पर कार्रवाई की नियमित समीक्षा का कार्य शुरू हुआ है, जिसके अंतर्गत चिन्हित अपराधों की श्रेणी में शामिल अपराध में उल्लेखनीय कमी लाने के साथ ही इन अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों को कठोरतम दंड देने का कार्य हो रहा है। चिन्हित अपराधों की श्रेणी इसलिए बनाई गई है, जिससे अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई हो सके और उनमें भय का वातावरण व्याप्त हो। मुख्यमंत्री चौहान ने चिन्हित अपराध योजना के संबंध में आज निवास सभा कक्ष में गृह विभाग का प्रेजेंटेशन देखा और समीक्षा के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री चौहान को बैठक में चिन्हित अपराध योजना के अब तक के परिणाम, वर्तमान स्थिति, महत्वपूर्ण उपलब्धियों, विभिन्न जिलों की स्थिति और भविष्य की कार्य-योजना के संबंध में प्रेजेंटेशन से जानकारी प्रदान की गई। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि चिन्हित अपराधों की समीक्षा के लिए जिला, संभाग और राज्य स्तर पर समितियों का गठन किया गया है, जिसकी प्रत्येक माह समय-समय पर समीक्षा की जाती है। जिला स्तर पर कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षक, जिला अभियोजन अधिकारी/शासकीय अधिवक्ता, संभाग स्तर पर संभाग आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक और राज्य स्तर पर अपर मुख्य सचिव, गृह की अध्यक्षता में पुलिस महानिदेशक/अति. पुलिस महानिदेशक-अपराध अंवेषण और विवेचना एवं प्रमुख सचिव, अपर मुख्य सचिव/ विधि एवं विधायी कार्य विभाग और संचालक लोक अभियोजन की सदस्यता वाली समिति की बैठक की जाती है। मुख्यमंत्री चौहान को प्रेजेंटेशन के माध्यम से चिन्हित प्रकरणों और दोष सिद्ध प्रकरणों से भी अवगत कराया गया। बैठक में प्रेजेंटेशन से मुख्यमंत्री चौहान को वर्ष 2008 से वर्ष 2022 (30 सितंबर) तक प्रदेश में चिन्हित अपराधों के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले और सुधार की आवश्यकता वाले जिलों की स्थिति के बारे में भी अवगत कराया गया। बताया गया कि वर्ष 2020-22 में महिला संबंधित चिन्हित अपराधों में 2 मृत्यु दंड, 187 आजीवन कारावास, 137 अन्य कठोर कारावास से अपराधी दंडित किए गए है। चिन्हित पर कार्यवाही की दृष्टि से खरगोन, बालाघाट, खण्डवा, मण्डला और झाबुआ जिले अच्छे प्रदर्शन की श्रेणी में शामिल हैं। हत्या के वीभत्स प्रकरण, सामूहिक हत्याकांड, हत्या के साथ डकैती, सामूहिक बलात्कार, आतंकवादी कृत्य, अपहरण के साथ हत्या, पुरातत्व महत्व की और धार्मिक मूर्तियों की चोरी, जिनसे जन-सामान्य की भावनाएँ जुड़ी हैं, बारह वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ बलात्कार आदि की घटनाओं को चिन्हित अपराधों की श्रेणी में शामिल कर कठोरतम दंड देने की व्यवस्था की गई है। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, ओएसडी, मुख्यमंत्री कार्यालय योगेश चौधरी और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

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 MadhyaBharat  6 November 2022

निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है ‘प्रकाशपर्व’

प्रवीण कक्कड़ सिख समाज के संस्थापक गुरूनानक देव जी का 553वां प्रकाश पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। यह प्रकाश पर्व हमें निःस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। गुरूनानक देव जी ने भूखे संतों को भोजन कराने से सेवा के जिस बीज को बोया था, उसे अन्य गुरूओं ने अपने उपदेशों से मजबूत किया और दशमेश पिता तक आते-आते सेवा का यह वृक्ष पूरी तरह समृद्ध हो गया। आज पूरे विश्व में सिख समाज को उसकी सेवा भावना के लिए जाना जाता है। जीवन मूल्यों में संस्कारों का बड़ा महत्व है। ऐसा ही एक संस्कार है सेवा का भाव। नि: स्वार्थ भाव से यथासंभव जरूरतमंद की मदद करना, सेवा करना हमारे संस्कारों की पहचान कराता है। तन, मन और वचन से दूसरे की सेवा में तत्पर रहना स्वयं इतना बड़ा साधन है कि उसके रहते किसी अन्य साधन की आवश्यकता ही नहीं रहती। क्योंकि जो व्यक्ति सेवा में सच्चे मन से लग जाएगा उसको वह सब कुछ स्वत: ही प्राप्य होगा जिसकी वह आकांक्षा रखता है। दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी का मूलमंत्र है। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से किसी का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का भाव निहित रखना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हुए कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सकें। सेवा भाव ही मनुष्य की पहचान बनाती है और उसकी मेहनत चमकाती है। सेवाभाव हमारे लिए आत्मसंतोष का वाहक ही नहीं बनता बल्कि संपर्क में आने वाले लोगों के बीच भी अच्छाई के संदेश को स्वत: उजागर करते हुए समाज को नई दिशा व दशा देने का काम करता है। जैसे गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं होती, वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है। ठीक इसी तरह खूबसूरत लोग हमेशा दयावान नहीं होते, लेकिन दयावान लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं, यह सर्वविदित है। सामाजिक, आर्थिक सभी रूपों में सेवा भाव की अपनी अलग-अलग महत्ता है। बिना सेवा भाव के किसी भी पुनीत कार्य को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता। सेवा भाव के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के साथ ही आम लोगों को भी उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। असल में सेवा भाव आपसी सद्भाव का वाहक बनता है। जब हम एक-दूसरे के प्रति सेवा भाव रखते हैं तब आपसी द्वेष की भावना स्वत: समाप्त हो जाती है और हम सभी मिलकर कामयाबी के पथ पर अग्रसर होते हैं। सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं है, जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हमारे अंतिम सेवा काल तक सेवा ही एक मात्र ऐसा आभूषण है, जो हमारे जीवन को सार्थक सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। बिना सेवा भाव विकसित किए मनुष्य जीवन को सफल नहीं बना सकता। हम सभी को चाहिए कि सेवा के इस महत्व को समझें व दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें। प्रकाश पर्व गुरूनानक देवजी की शिक्षाओं व उनकी निस्वार्थ सेवा के अनुसरण करने का दिन है। इस दिन गुरूग्रंथ साहिब को शीश नवाने के साथ ही कीर्तन और लंगर के आयोजन होंगे। इन लंगरों में हर जाति, पंथ, वर्ग के लोग एकसाथ भोजन करेंगे जो हमारी एकता और निस्वार्थ भावना का प्रतीक है। गुरूनानक देव के उपदेशों को अगर हम समझने का प्रयास करें तो उसमें मानवसेवा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। यह उपदेश भारतीय संस्कृति की मूल भावना में निहित हैं। इस भावना ने न केवल देश और विश्व के उत्थान में योगदान दिया है बल्कि भेदभाव से उपर उठकर मानवता की सेवा की है। विश्व के विभिन्न भागों में सिख समाज द्वारा की जा रही मानव सेवा इसका  उदाहरण है।  बॉक्स   गुरूनानक देवजी  गुरूनानक देवजी का जन्म 1469 की कार्तिक पूर्णिमा पर ग्राम तलवंडी, पंजाब में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है। वे सिख समाज के पहले गुरू थे। उन्होंने ही इस समाज की नींव रखी। गुरूनानक देव का जन्मदिन हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर प्रकाशपर्व के रूप में मनाया जाता है। उन्हें बाबा नानक और नानक शाह के नाम से भी पूजा जाता है। उनके उपदेशों में हमेशा नैतिकता, मेहनत, सच्चाई और सेवा भाव के संदेश रहे। उन्होंने विश्व को सांप्रदायिक एकता, शांति और सदभाव का संदेश भी दिया। 22 सितंबर 1539 को गुरूनानक देवजी का निर्वाण हुआ। जहां अब ननकाना साहिब गुरुद्वारा है। जो पूरे विश्व में उनके अनुयायियों की आस्था का केंद्र है।

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 MadhyaBharat  5 November 2022

निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है ‘प्रकाशपर्व’

प्रवीण कक्कड़ सिख समाज के संस्थापक गुरूनानक देव जी का 553वां प्रकाश पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। यह प्रकाश पर्व हमें निःस्वार्थ सेवा का संदेश देता है। गुरूनानक देव जी ने भूखे संतों को भोजन कराने से सेवा के जिस बीज को बोया था, उसे अन्य गुरूओं ने अपने उपदेशों से मजबूत किया और दशमेश पिता तक आते-आते सेवा का यह वृक्ष पूरी तरह समृद्ध हो गया। आज पूरे विश्व में सिख समाज को उसकी सेवा भावना के लिए जाना जाता है। जीवन मूल्यों में संस्कारों का बड़ा महत्व है। ऐसा ही एक संस्कार है सेवा का भाव। नि: स्वार्थ भाव से यथासंभव जरूरतमंद की मदद करना, सेवा करना हमारे संस्कारों की पहचान कराता है। तन, मन और वचन से दूसरे की सेवा में तत्पर रहना स्वयं इतना बड़ा साधन है कि उसके रहते किसी अन्य साधन की आवश्यकता ही नहीं रहती। क्योंकि जो व्यक्ति सेवा में सच्चे मन से लग जाएगा उसको वह सब कुछ स्वत: ही प्राप्य होगा जिसकी वह आकांक्षा रखता है। दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी का मूलमंत्र है। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से किसी का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का भाव निहित रखना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हुए कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सकें। सेवा भाव ही मनुष्य की पहचान बनाती है और उसकी मेहनत चमकाती है। सेवाभाव हमारे लिए आत्मसंतोष का वाहक ही नहीं बनता बल्कि संपर्क में आने वाले लोगों के बीच भी अच्छाई के संदेश को स्वत: उजागर करते हुए समाज को नई दिशा व दशा देने का काम करता है। जैसे गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं होती, वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है। ठीक इसी तरह खूबसूरत लोग हमेशा दयावान नहीं होते, लेकिन दयावान लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं, यह सर्वविदित है। सामाजिक, आर्थिक सभी रूपों में सेवा भाव की अपनी अलग-अलग महत्ता है। बिना सेवा भाव के किसी भी पुनीत कार्य को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता। सेवा भाव के जरिए समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के साथ ही आम लोगों को भी उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। असल में सेवा भाव आपसी सद्भाव का वाहक बनता है। जब हम एक-दूसरे के प्रति सेवा भाव रखते हैं तब आपसी द्वेष की भावना स्वत: समाप्त हो जाती है और हम सभी मिलकर कामयाबी के पथ पर अग्रसर होते हैं। सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं है, जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता है। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर हमारे अंतिम सेवा काल तक सेवा ही एक मात्र ऐसा आभूषण है, जो हमारे जीवन को सार्थक सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाता है। बिना सेवा भाव विकसित किए मनुष्य जीवन को सफल नहीं बना सकता। हम सभी को चाहिए कि सेवा के इस महत्व को समझें व दूसरों को भी इस ओर जागरूक करने की पहल करें। प्रकाश पर्व गुरूनानक देवजी की शिक्षाओं व उनकी निस्वार्थ सेवा के अनुसरण करने का दिन है। इस दिन गुरूग्रंथ साहिब को शीश नवाने के साथ ही कीर्तन और लंगर के आयोजन होंगे। इन लंगरों में हर जाति, पंथ, वर्ग के लोग एकसाथ भोजन करेंगे जो हमारी एकता और निस्वार्थ भावना का प्रतीक है। गुरूनानक देव के उपदेशों को अगर हम समझने का प्रयास करें तो उसमें मानवसेवा को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। यह उपदेश भारतीय संस्कृति की मूल भावना में निहित हैं। इस भावना ने न केवल देश और विश्व के उत्थान में योगदान दिया है बल्कि भेदभाव से उपर उठकर मानवता की सेवा की है। विश्व के विभिन्न भागों में सिख समाज द्वारा की जा रही मानव सेवा इसका  उदाहरण है।  बॉक्स   गुरूनानक देवजी  गुरूनानक देवजी का जन्म 1469 की कार्तिक पूर्णिमा पर ग्राम तलवंडी, पंजाब में हुआ था। जो अब पाकिस्तान में है। वे सिख समाज के पहले गुरू थे। उन्होंने ही इस समाज की नींव रखी। गुरूनानक देव का जन्मदिन हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर प्रकाशपर्व के रूप में मनाया जाता है। उन्हें बाबा नानक और नानक शाह के नाम से भी पूजा जाता है। उनके उपदेशों में हमेशा नैतिकता, मेहनत, सच्चाई और सेवा भाव के संदेश रहे। उन्होंने विश्व को सांप्रदायिक एकता, शांति और सदभाव का संदेश भी दिया। 22 सितंबर 1539 को गुरूनानक देवजी का निर्वाण हुआ। जहां अब ननकाना साहिब गुरुद्वारा है। जो पूरे विश्व में उनके अनुयायियों की आस्था का केंद्र है।

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 MadhyaBharat  5 November 2022

खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 के लिये सीएम की अध्यक्षता में आयोजन-सह-समन्वय समिति गठित

  मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित   राज्य शासन ने मध्यप्रदेश में 31 जनवरी से 11 फरवरी, 2023 तक होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 के 5वें संस्करण के आयोजन के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में "आयोजन-सह-समन्वय समिति" और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित की है। मुख्यमंत्री  चौहान की अध्यक्षता में गठित इस समिति में केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री सह-अध्यक्ष और खेल और युवा कल्याण मंत्री मध्यप्रदेश उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन, केन्द्रीय सचिव युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन, गृह और वित्त विभाग समिति के सदस्य होंगे। प्रमुख सचिव खेल और युवा कल्याण विभाग म.प्र. को सदस्य सचिव मनोनीत किया गया। आयोजन-सह-समन्वय समिति में पुलिस महानिदेशक पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश, महानिदेशक भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली, संचालक खेल और युवा कल्याण मध्यप्रदेश, भारतीय ओलंपिक संघ के प्रतिनिधि और अध्यक्ष-महासचिव स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को सदस्य बनाया गया है।   खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 के लिये कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। समिति के सह-अध्यक्ष सचिव केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय होंगे। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामान्य प्रशासन, गृह, वित्त विभाग समिति के सदस्य मनोनीत किये गये हैं। प्रमुख सचिव ऊर्जा, लोक निर्माण, खेल और युवा कल्याण, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, स्कूल शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति, नगरीय विकास एवं आवास, परिवहन, और जनसम्पर्क विभाग को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति में पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश, महानिदेशक भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली, संचालक खेल और युवा कल्याण मध्यप्रदेश, संचालक खेलो इंडिया नई दिल्ली, अपर पुलिस महानिदेशक अग्नि शमन म.प्र., वरिष्ठ निदेशक भारतीय खेल प्राधिकरण, खेलो इंडिया, नई दिल्ली, अध्यक्ष-महासचिव स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारतीय ओलंपिक संघ, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रतिनिधि, मंडल रेल प्रबंधक, भोपाल मंडल, भारतीय रेलवे म.प्र., संचालक दूरदर्शन भोपाल और राज्य के दो प्रमुख खिलाड़ी खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 की कार्यकारी समिति के सदस्य होंगे। आयोजन-सह-समन्वय समिति खेल और युवा कल्याण विभाग और कार्यकारी समिति के माध्यम से खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2022 को नियंत्रण, प्रबंधित, व्यवस्थित और प्रशासित करेगी। कार्यकारी समिति खेलो इंडिया यूथ गेम्स के सुचारू संचालन, पर्यवेक्षण, निगरानी के साथ आयोजन-सह-समन्वय समिति के समग्र मार्गदर्शन में विभिन्न एजेन्सियों के बीच समन्वय का कार्य करेगी। कार्यकारी समिति खेलो इंडिया यूथ गेम्स के स्थानों के अधोसंरचना विकास की निगरानी और क्रियान्वयन एजेंसियों के कार्यों की समीक्षा भी करेगी।

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 MadhyaBharat  5 November 2022

"एक जिला-एक उत्पाद" में सीहोर जिले के बुदनी के कलात्मक खिलौनें अब भोपाल में बिकेंगे

  गौहर महल में एक्सक्लूसिव शोरूम का हुआ शुभारंभ मुख्यमंत्री चौहान के निर्देश पर काष्ठ शिल्पियों की आय वृद्धि के प्रयास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुदनी के लकड़ी के खिलौनों के विक्रय और प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में सीहोर जिला पंचायत और म.प्र. हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल के गौहर महल में आज संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम की प्रबंध संचालक अनुभा श्रीवास्तव ने एक्सक्लूसिव शोरूम का शुभारंभ किया। एंब्रॉयडरी हुरमुचो की विशेषज्ञ आर्टिस्ट सरला सोनेजा (ग्वालियर) विशेष रूप से उपस्थित थी। शोरूम प्रारंभ होने से काष्ठ शिल्पियों की आय में वृद्धि होगी।   अनेक हस्त शिल्पी रहे मौजूद   "एक जिला-एक उत्पाद" अंतर्गत बुदनी जिला सीहोर के लकड़ी के कलात्मक खिलौनें और अन्य हस्तशिल्प के एक्सक्लूसिव मृगनयनी शोरूम के शुभारंभ पर अनेक हस्त शिल्पी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि काष्ठ शिल्प के उत्कृष्ट कलाकार बुदनी में कई वर्ष से लकड़ी के खिलौनों का विक्रय करते आ रहे हैं। इनका विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर भी आउटलेट शुरू हुआ है। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीहोर  हर्ष सिंह, हस्तशिल्पी, हस्तशिल्प विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी और कला प्रेमी नागरिक भी उपस्थित थे।

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 MadhyaBharat  5 November 2022

पीथमपुर म.प्र. की औद्योगिक एवं रोजगार देने वाली राजधानी

मुख्यमंत्री ने 1371 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पीथमपुर मध्यप्रदेश की औद्योगिक एवं रोजगार देने वाली राजधानी बन गया है। यहाँ बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित हुए हैं और उद्योगों के लिये निवेश आने का क्रम जारी है। यहाँ बेटियों के लिये अलग से महिला उद्यमी पार्क बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री  चौहान पीथमपुर में रोजगार दिवस और "एक जिला-एक उत्पाद'' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 1371 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात दी और 3 लाख 19 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ने के लिये 2577 करोड़ रूपये की ऋण राशि का वितरण किया। साथ ही महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने महिला उद्यमी पार्क का भूमि-पूजन कर 21 महिला उद्यमियों को भूमि आवंटन-पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना के लिये सांस्कृतिक पुनरुत्थान के कार्य शुरू हो गये हैं। वाग्देवी की प्रतिमा, जो इस समय इंगलैंड में है, को पुन: मध्यप्रदेश लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उज्जैन में श्री महाकाल लोक बनाया गया है। ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापना का कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये रात-दिन एक कर रही है। अगले एक वर्ष में एक लाख रिक्त सरकारी पदों पर भर्ती की जायेगी। नवम्बर माह में 40 हजार रिक्त पदों में भर्ती के लिये विज्ञापन जारी हो जायेंगे। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पीथमपुर में 1100 एमएसएमई इकाइयों में 12 हजार 777 करोड़ रूपये का निवेश है और 38 हजार 770 लोगों को रोजगार मिला है। यहाँ 95 बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हैं, जिसमें 26 हजार 320 करोड़ रूपये का निवेश है और 53 हजार 493 लोगों को रोजगार मिला है। इस तरह से कुल एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। पीथमपुर के फार्मा सेक्टर ने दुनियाभर को कोविड में दवाएँ पहुँचा कर अद्भुत काम किया है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि किसान भाइयों से जमीन लेकर 12 हजार 500 हेक्टेयर में नया निवेश क्षेत्र स्थापित किया जायेगा, जिसमें एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। पीथमपुर अद्भुत औद्योगिक क्षेत्र है। यहाँ औद्योगिक इकाइयाँ लगातार निवेश करती जा रही हैं। यहाँ के औद्योगिक उत्पादों का 11 हजार करोड़ रूपये का निर्यात विभिन्न देशों में किया जाता है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पीथमपुर में सड़कों के निर्माण के लिये 15 करोड़ रूपये दिये जायेंगे। यहाँ राजस्व अनुभाग बना कर स्थाई रूप से एसडीएम कार्यालय स्थापित किया जायेगा। पीथमपुर अस्पताल का सिविल अस्पताल में उन्नयन किया जायेगा। स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा की गई क्षेत्रीय विकास की गई माँगों को भी पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर कोई भी गरीब परिवार बिना आवास के नहीं रहेगा। ऐसे सभी परिवारों को मुख्यमंत्री भू-आवासीय योजना में जमीन देकर उसका मालिक बनाया जायेगा। सभी पात्र लोगों के आवास भी बनाये जायेंगे। अकेले धार जिले में ही एक लाख गरीबों के मकान बन चुके हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि पूर्व सरकार ने संबल और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी हमारी अनेक कल्याणकारी योजनाएँ बंद कर दी थी। ऐसी सभी बंद योजनाओं को हमने पुन: शुरू कर जनता को उसका लाभ देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब परिवार के मेधावी विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की फीस राज्य सरकार भरेगी। पढ़ाई के साथ रोजगार की व्यवस्था के लिये भी सरकार निरंतर अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के हितलाभ भी वितरित किये। मुख्यमंत्री ने धार जिले के बाग प्रिंट के 'लोगो' का अनावरण किया एवं कारीगरों को जीआई सर्टिफिकेट वितरित किये। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एमपीआईडीसी और फियो के बीच एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं का टर्न ओवर 20 हजार करोड़ तक पहुँच गया है। मेरा उद्देश्य है कि मेरी बहनें प्रतिमाह कम से कम 10 हजार रूपये की आय अर्जित करें। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सरकार का समग्र रूप से एक ही लक्ष्य है कि जनता की ख़ुशहाली। युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन के लिए विभिन्न योजनाएँ चल रही हैं। युवाओं को एक लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक का लोन बैंक द्वारा दिया जा रहा है। लोन वापसी की गारंटी राज्य सरकार दे रही है। मुख्यमंत्री  चौहान ने मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान की जानकारी कलेक्टर से ली। बताया गया कि अभी तक ज़िले में 3 लाख 19 हज़ार आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसमें से 2 लाख 90 हज़ार आवेदन स्वीकृत भी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने आयुष्‍मान योजना, गरीबों के मकान की योजना, भू-आवास अधिकार योजना, गरीबों के राशन की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि मध्यप्रदेश को एक नई दिशा देने के लिये अंत्योदय के साथ आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश को गढ़ने के लिये आज महत्वपूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। हमारी सरकार मध्यम एवं वंचित वर्ग के हर बच्चे का सपना पूरा करेगी। प्रदेश में 2 हजार से ज्यादा युवाओं ने स्टार्ट-अप प्रारंभ किये हैं। साथ ही फर्नीचर एवं टॉय क्लस्टर के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। औद्योगिक निवेश एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री  राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत से प्रोत्साहित होकर मुख्यमंत्री शिवराज चौहान द्वारा आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लिये कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिसमें 52 जिलों के 38 उत्पादों को "एक जिला-एक उत्पाद'' के रूप में चयनित किया गया है। इनकी मार्केटिंग के लिये अमेजान, फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन मार्केटिंग साइट से समझौता किया गया है। राज्य सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के लोगों की जन्म से लेकर सम्पूर्ण जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। युवा वर्ग के रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिये भी कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं, ताकि युवा अपने स्वप्न पूरे करते हुए प्रदेश एवं देश के विकास में सहयोगी बनें। मुख्यमंत्री चौहान का कार्यक्रम स्थल पहुँचने पर अलग अंदाज़ में स्वागत किया गया। यहाँ उनसे मिलने आये भांजे-भांजी भी पहुँचे, जो मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं और जिनकी फ़ीस राज्य सरकार द्वारा भरी गई है। मंच पर 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले और सरकार से लैपटाप प्राप्त करने वाले मेधावी बच्चों ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया। राज्य सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले धार ज़िले के जनजाति युवाओं ने भी मुख्यमंत्री चौहान का आभार जताया। घर-घर अनाज पहुँचाने वाले वाहन चालक और लाड़ली लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों ने भी उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री  चौहान ने इंदौर और उज्जैन संभाग के विभिन्न ज़िलों द्वारा 'एक जिला-एक उत्‍पाद' के तहत लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्य बिंदु -3.19 लाख युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ने 2577 करोड़ की ऋण राशि का वितरण -महिला उद्यमी पार्क का भूमि-पूजन कर 21 महिला उद्यमियों को भूमि आवंटन-पत्र सौंपे -वाग्देवी की प्रतिमा को मध्यप्रदेश लाया जायेगा -महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण -पीथमपुर में हुआ रोजगार दिवस और "एक जिला-एक उत्पाद" कार्यक्रम 

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 MadhyaBharat  5 November 2022

नवंबर में लगभग 40 हजार शासकीय नौकरियों के विज्ञापन आएंगे

  सालभर में एक लाख लोगों को शासकीय नौकरी मिल जाएगी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा आज रोजगार दिवस है। महीने में 1 दिन रोजगार का कार्यक्रम भाजपा की सरकार करती है। रोजगार के लिए हम सभी प्रयत्न कर रहे हैं। नवंबर में लगभग 40 हजार शासकीय नौकरियों के विज्ञापन निकले जा रहे हैं। सालभर में एक लाख लोगों को शासकीय नौकरी मिल जाएगी। केवल सरकारी नौकरी में सभी को रोजगार नहीं मिल सकता। इसके लिए हमने तय किया कि स्वरोजगार की जितनी भी योजनाएं हैं, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना सहित अन्य योजनाओं के तहत हर महीने नौजवानों को स्वरोजगार उपलब्ध कराएं। शिवराज पीथमपुर पहुंचे हैं।  जहाँ उन्होंने जिला उत्पाद को लेकर जोर दिया।  आज पीथमपुर में रोजगार दिवस  कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। लगभग 3 लाख लोगों को स्वरोजगार की योजनाओं के लिए लोन मिलेगा और कई अलग-अलग तरह की सब्सिडी का लाभ हम देंगे। मध्यप्रदेश में आ रहे निवेश के कारण कारखानों में रोजगार मिल रहा है। मैं अभी उज्जैन जाने वाला हूं। वहां व्यवस्था करूंगा कि बजट होटल कैसे बनें और सामान्य परिवारों के निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों के श्रद्धालु भी श्री महाकाल महाराज का श्री महाकाल लोक देख पाएं। श्री महाकाल लोक के कारण उज्जैन में आर्थिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा, इन चारों का समुच्चय है मनुष्य। चारों का सुख चाहिए इसलिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की व्यवस्था बनाई गई। विविध कामनाओं के लिए अर्थ चाहिए। इसलिए भारतीय संस्कृति में कहा गया है कि अर्थ के बिना दुनिया नहीं चलती।  

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 MadhyaBharat  4 November 2022

भामाशाह सम्मान समारोह में कर दाताओं का सम्मान

सीएम शिवराज ने कहा कर दाताओं  की वजह से विकास की योजानाएं क्रियान्वित होती है  भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित भामाशाह सम्मान समारोह में नये पंजीयन करदाताओं के लिए वेलकम किट पुस्तिका का विमोचन और जी.एस.टी. करदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए व्हाट्सएप्प आधारित चैटबॉट MeGHA का लोकार्पण किया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में जी.एस.टी. विधान अंतर्गत प्रदेश में अधिकतम कर जमा करने वाले व्यवसायियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा जी एवं अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि तथा व्यवसायी उपस्थित थे। इस मौके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा भामाशाह जी हमारे आदर्श हैं कि हम कमाएंगे तो अपने लिए नहीं कमाएंगे। उसमें देश का, समाज का और गरीबों के कल्याण का भी हिस्सा शामिल होगा। भामाशाह जी केवल एक व्यक्ति नहीं हैं, वह हमारे जीवन मूल्य हैं। अपने जीवन भर की कमाई मातृभूमि की रक्षा के लिए, मेवाड़ के स्वाभिमान के लिए उन्होंने महाराणा प्रताप को समर्पित कर दी थी।शिवराज ने कहा शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा का चारों का समुच्चय है। इसलिए अपने यहां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की व्यवस्था बनाई गई। इसलिए भारतीय संस्कृति में अर्थ को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। बुभुक्षितः किम न करोति पापं। बिना अर्थ के अनर्थ होता है। हमारी संस्कृति में हमारी परंपरा में धन कमाने को हमेशा पवित्र उद्देश्य माना गया। वयस्क का परम कर्तव्य है कि वह धन कमाए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा कि अर्थ चाहिए व्यक्ति को भी और राष्ट्र के निर्माण के लिए भी। इसलिए अर्थ आवश्यक है। अर्थ का अभाव, विनाशकारी है। अर्थ का प्रभाव भी बुरा है। अर्थ कमाना है, लेकिन धर्म के साथ। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ायें, सब अर्थ का उपार्जन भी करें, ईमानदारी से टैक्स भी चुकायें और अपने प्रदेश एवं देश को आगे बढ़ाने में योगदान दें।  सीएम शिवराज ने कहा ईमानदारी से धन कमाने में हम कोई बाधा नहीं आने देंगे और यदि कोई बाधा आई तो उसे दूर करने का हम प्रयास करेंगे। आप खूब मेहनत करें, धन कमायें। धन कमाना भी देश की सेवा है। कमाये हुए धन का टैक्स ईमानदारी से दें, तो इससे बड़ी सेवा देश की कुछ और हो ही नहीं सकती है। मैं सभी टैक्सपेयर्स का हृदय से अभिनंदन करता हूं। आइये,मिलकर एक विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनायें। मैं सभी करदाताओं के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त कर रहा हूं क्योंकि आप ही राज्य का खजाना भरते हैं। आप जब खजाना भरते हैं तो हम सड़कें बनाते हैं, पानी की सिंचाई की योजनाएं बनाते हैं। हम गांव व शहरों का विकास करते हैं। हम शिक्षा और स्वास्थ्य पर पैसा खर्च करते हैं।

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 MadhyaBharat  4 November 2022

पीएमएवाय शहरी में 2472 हितग्राहियों को लाभ

 24 करोड़ 99 लाख रूपये स्वीकृत किये गए    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के बीएलसी घटक की परियोजनाओं के लिए जियो टेगिंग के आधार पर 2472 हितग्राहियों को आवास के लिए 24 करोड़ 99 लाख रूपये स्वीकृत किये गए हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने स्वीकृत आवासों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य करवाने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। मिशन संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह ने जानकारी दी है कि 1769 हितग्राहियों को 17 करोड़ 69 लाख रूपये उनके बैंक खाते में अंतरित करने की स्वीकृति दी गयी है। इसी तरह जिन 703 हितग्राहियों ने आवास का कार्य लिंटल स्तर तक पूरा कर लिया है, उन्हें द्वितीय किश्त की राशि 7 करोड़ 3 लाख रूपये उनके खाते में ट्रांसफर करने की स्वीकृति जारी की गयी है।

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 MadhyaBharat  4 November 2022

अब पन्ना जिले में नए युग की शुरुआत होगी - मुख्यमंत्री

जिले में अगले शिक्षा सत्र से कृषि महाविद्यालय शुरू किया जाएगा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के विकास के लिए उद्योग आवश्यक है। कृषि क्षेत्र में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। गेहूँ के उत्पादन में भी प्रदेश देश में नंबर वन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र में हर सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए खेती के साथ उद्योग आवश्यक है। खेती के साथ प्रदेश में अलग-अलग सेक्टर के उद्योग लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री  चौहान आज पन्ना जिले के हरदुआ केन में 2800 करोड़ रूपये की लागत के जे.के. सीमेंट प्लांट का लोकार्पण कर रहे थे। प्लांट से 1000 को सीधे और 10 हजार को लोगों अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि प्रदेश में होने वाली इन्वेस्टर मीट में विश्व के अनेक देश से उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास के लिए हरसंभव प्रयास और लगातार काम कर रही है। पन्ना जिले में उद्योग की अनंत संभावनाएँ हैं। जो भी सहयोग आवश्यक होगा, सरकार देने के लिए कृत-संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के साथ ही यहाँ की जनता भी उद्योगपतियों को उद्योग लगाने में सहयोग करे। उद्योग आने से क्षेत्र में समृद्धि आती है और हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेंगे। उद्योग आने से आने वाले समय में क्षेत्र की आर्थिक दशा बदल जाएगी। अब पन्ना जिले में नए युग की शुरुआत होगी और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जायेगी। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि पन्ना जिले में अगले शिक्षा सत्र से कृषि महाविद्यालय शुरू किया जाएगा। सिंघानिया ग्रुप द्वारा आईटीआई प्रारंभ की जा रही है, इसमें स्थानीय युवाओं को काम सिखाए जाएंगे और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। इसके लिए उन्होंने सिंघानिया ग्रुप को धन्यवाद दिया। उद्योग नीति एवं निवेश संवर्धन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने सिंघानिया परिवार को बधाई देते हुए कहा कि रिकॉर्ड अवधि में सीमेंट प्लांट तैयार कर उत्पादन प्रारंभ किया गया है। पन्ना में यह सिर्फ शुरूआत है, आगाज है, अभी तो अंजाम बाकी है। खनिज साधन एवं श्रम मंत्री  बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा आज का दिन पन्ना जिले के लिए ऐतिहासिक है। आज क्षेत्र को एक बड़े उद्योग की सौगात मिली है, जो मुख्यमंत्री की सफल आर्थिक नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अब पन्ना उद्योग विहीन नहीं रहा। कोविड काल के बावजूद भी मात्र 18 माह में प्लांट तैयार कर उत्पादन शुरू करने के लिए सिंघानिया ग्रुप को बधाई दी। इस उद्योग से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। खजुराहो सांसद  वी.डी. शर्मा ने पन्ना जिले को उद्योग की श्रेणी में खड़ा करने के लिए सिंघानिया परिवार को धन्यवाद ज्ञापित किया। कम्पनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जल-संरक्षण के क्षेत्र में भी कार्य किया है। रोजगार के अवसर के अलावा हर तरफ क्षेत्र का विकास होगा। पूरे प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में पन्ना अव्वल रहा, सबसे ज्यादा पर्यटक पन्ना टाइगर रिजर्व में आए। मुख्यमंत्री चौहान ने पन्ना में कम्पनी प्रबन्धन द्वारा वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, आई.टी.आई. का शिलान्यास और जे.के. सीमेंट प्लांट का लोकार्पण किया। साथ ही प्लांट के पहले उत्पादन 500 बोरी सीमेंट की खेप को हरी झंडी दिखाकर पवई की प्रसिद्ध कंकाली माता मंदिर के लिये रवाना किया। साथ ही कम्पनी द्वारा अमानगंज अस्पताल के लिए भेंट की गई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई।

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 MadhyaBharat  3 November 2022

सुरक्षित पर्यावरण के लिए जीवन पद्धति में बदलाव जरूरी  - राज्यपाल

ऊर्जा और पर्यावरण-संरक्षण की पहल घर से हो राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि ऊर्जा और पर्यावरण-संरक्षण के लिए हर व्यक्ति और हर घर को पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए जीवन पद्धति में बदलाव लाना और भारतीय जीवन-शैली को अपनाना होगा। राज्यपाल  पटेल विज्ञान भवन के जगदीश चन्द्र बसु सभागार में केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और विज्ञान भारती द्वारा आयोजित ऊर्जा और पर्यावरण-संरक्षण संगोष्ठी का समापन कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने पूर्वजों की जीवन-शैली का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय जीवन पद्धति पर्यावरण-सरंक्षण का प्रभावी तरीका है। स्टील और सीमेंट से मकान बनेंगे तो एयर कंडीशनिंग भी करनी होगी। जरूरत यह समझने की है कि पर्यावरण हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि परिवार के सदस्य जन्म-दिवस पर एक पौधे का रोपण अवश्य करें। मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिदिन पौधा रोपण की पहल की है, जो सराहनीय है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आधुनिक जीवन की पर्यावरणीय चिंताओं, ग्लोबल वार्मिंग, क्लाइमेट चेंज आदि के मूल में मानव के कार्य ही है। अत: ऊर्जा और पर्यावरण-संरक्षण के लिए चिंता एवं संचेतना को आचरण में उतारना जरूरी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि पर्यावरण-सरंक्षण के लिए ऊर्जा की उत्पादन लागत में कमी लाने पर विचार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वातावरण में प्रदूषण नहीं हो, ऊर्जा का सरंक्षण हो, इसके लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों पर विचार किया जाना जरूरी है। मंत्री  सखलेचा ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से हरित और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा एवं पर्यावरण-सरंक्षण के लिए ऊर्जा की जरूरतों में कमी करने की नहीं, ईको फ्रेंडली ऊर्जा के विकल्प को अपनाने और जीवन शैली में बदलाव की पहल करने की जरूरत हैं। उन्होंने कोयले का, गैसीकरण द्वारा उपयोग की संभावनाओं पर विचार की जरूरत बताते हुए कहा कि इसे ऊर्जा का स्त्रोत बनाने से ऊर्जा व्यय में काफी कमी आएगी। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय के विशेष सचिव आशीष उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2030 में वर्तमान से तीन गुना अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी। देश में सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में सार्थक प्रयास हो रहे है। प्रदेश के प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  निकुंज श्रीवास्तव ने कहा कि संगोष्ठी की अनुशंसाओं को लागू करने और आम जन तक पहुँचाने में विभाग पूरा सहयोग करेगा। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील गुप्ता ने हाइड्रोजन ऊर्जा के उपयोग से संबधित विषयों पर विचार की आवश्यकता बताई। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुधीर भदौरिया ने भारत की पंच-महाभूत की संकल्पना को ऊर्जा और पर्यावरण चिंताओं का समाधान बताया। महानिदेशक म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद अनिल कोठारी ने स्वागत उद्बोधन दिया। विज्ञान भारती मध्यप्रांत के अध्यक्ष अमोघ गुप्ता ने आभार माना।

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 MadhyaBharat  3 November 2022

कई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो रहा भारतीय रुपया

  अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 18 प्रतिशत बढ़ गई  विश्व के कई देशों में मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वहां के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में लगातार वृद्धि की जा रही है। विशेष रूप से अमेरिका में ब्याज दरों में की जा रही वृद्धि का असर अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है क्योंकि अमेरिकी डॉलर वैश्विक स्तर पर किए जाने वाले आर्थिक व्यवहारों के निपटान का एक सशक्त माध्यम है। इस कारण के चलते सामान्यतः कई देशों में विदेशी निवेश भी अमेरिकी डॉलर में ही किए जाते हैं। अभी हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक (यूएस फेड) ने अमेरिका में ब्याज दरों में लगातार तेज वृद्धि की है क्योंकि अमेरिका में मुद्रा स्फीति की दर पिछले 40 वर्षों के एतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। ब्याज दरों में की गई तेज वृद्धि के कारण अन्य देशों में विशेष रूप से वहां के पूंजी बाजार (शेयर मार्केट) में अमेरिकी डॉलर में किए गए निवेश को निवेशक वापिस खींच रहे हैं एवं यह राशि अमेरिकी बांड्ज में निवेश कर रहे हैं क्योंकि इस निवेश पर बिना किसी जोखिम के तुलनात्मक रूप से अच्छी आय प्राप्त हो रही है। इस सबके चलते पूरे विश्व में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ गई है एवं स्वाभाविक रूप से अमेरिकी डॉलर की कीमत भी अन्य देशों की मुद्राओं की तुलना में बहुत महंगी हो गई। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर की कीमत बढ़ रही है और अन्य देशों की मुद्राओं का अवमूल्यन हो रहा है। भारत में भी अब यह कहा जाने लगा है कि रुपए का तेजी से अवमूल्यन हो रहा है अर्थात अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपए की कीमत तेजी से गिर रही है, परंतु भारत के संदर्भ में ऐसा कहा जाना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।         अमेरिका के केंद्रीय बैंक अर्थात यूएस फेड ने हाल ही में ब्याज दरों में बहुत बढ़ौतरी की है इससे अमेरिका में निवेश करने के लिए अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता एवं मांग पूरे विश्व में बढ़ रही है। इसकी वजह से अन्य समस्त देशों की मुद्राओं यथा यूरो, पाउंड, येन, रूबल, यूआन, रुपए आदि का, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले, अवमूल्यन हो रहा है। जिस प्रकार की महंगाई की दर कई देशों में चल रही है, जो कई यूरोपीयन देशों में तो यह पिछले 50 साल के एतिहासिक स्तर पर है, इसे नियंत्रित करने के लिए अमेरिका सहित ये सभी देश ब्याज दरों को बढ़ाते चले जा रहे हैं जिससे अन्य देशों की मुद्राओं पर तो दबाव आ रहा है परंतु अमेरिकी डॉलर मजबूत होता जा रहा है। विश्व की 6 बड़ी सबसे बड़ी मुद्राओं की कीमत की तुलना में अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 18 प्रतिशत बढ़ गई है। अमेरिकी डॉलर का विश्व में एक रिजर्व मुद्रा के रूप में उपयोग हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है अतः इन व्यवहारों का भुगतान करने के लिए सभी देशों को अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होती है। साथ ही, अमेरिकी संस्थानों का अन्य देशों के पूंजी बाजार में जो निवेश था वह निवेश भी अमेरिकी संस्थानों द्वारा निकाला जा रहा है और निवेश की इस राशि को अमेरिकी बांड्ज में लगाया जा रहा है। लगभग दो साल पहिले तक अमेरिकी बांड्ज पर ब्याज दर केवल 25 बेसिस पाइंटस थी जो आज बढ़कर 325 बेसिस पाइंटस से अधिक हो गई है। भारतीय रुपए के अवमूल्यन की यदि चर्चा की जाय तो रुपए का यह अवमूल्यन वर्ष 1947 के बाद से लगातार हो रहा है। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय वर्ष 1947 में अमेरकि डॉलर की तुलना में रुपए की कीमत एक रुपया तय की गई थी। अर्थात 1 अमेरिकी डॉलर 1 भारतीय रुपए के बराबर था। परंतु, एक अमेरिकी डॉलर की कीमत वर्ष 1967-1971 के बीच 7.50 रुपए पर आ गई, वर्ष 1988-89 में 14.40 रुपए हो गई, वर्ष 1991-92 में 24.40 रुपए हो गई, वर्ष 2001-02 में 47.69 रुपए हो गई, वर्ष 2013-14 में 60 रुपए एवं वर्ष 2021-22 में 74 रुपए हो गई और आज लगभग 83 रुपए हो गई है। इस प्रकार अमेरिकी डॉलर की कीमत लगातार बढ़ती गई है और भारतीय रुपए का अवमूल्यन होता रहा है। यहां भारतीय रुपए की तुलना यदि अमेरिकी डॉलर को छोड़कर अन्य देशों की मुद्राओं से की जाय तो यह आभास होता है कि हाल ही के समय में अन्य मुद्राओं का भारतीय रुपए की तुलना में अधिक तेज गति से अवमूल्यन हुआ है और इन मुद्राओं की तुलना में भारतीय रूपया मजबूत हुआ है। इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपए का अवमूल्यन हुआ है। इस तथ्य को इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर की तुलना में अन्य देशों की मुद्राओं का कितना अवमूल्यन हुआ है और भारतीय रुपए का कितना अवमूल्यन हुआ है। जापान येन का अमेरिकी डॉलर की तुलना में 22 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, ब्रिटिश पाउंड का 20 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, यूरो का 15 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, दक्षिण कोरिया की मुद्रा का 15 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, आस्ट्रेलिया की मुद्रा का 12 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है वहीं चीनी यूआन एवं भारतीय रुपए का 10 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है। चूंकि अन्य देशों की मुद्राओं का भारतीय रुपए की तुलना में अधिक अवमूल्यन हुआ है अतः भारतीय रूपए की कीमत इन देशों की मुद्राओं की तुलना में बढ़ गई है।     लगभग उक्त प्रकार का ट्रेंड एशिया स्थित विभिन्न देशों की मुद्राओं के संदर्भ में भी दिखाई दिया है। वर्ष 2022 में अमेरिकी डॉलर की तुलना में फिलिपींस की मुद्रा का 16 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, सिंगापुर की मुद्रा का 6 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, मलेशिया की मुद्रा का 11 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है, चीन की मुद्रा का 10.4 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है एवं भारतीय रुपए का 10.25 प्रतिशत अवमूल्यन हुआ है। कई विकसित देशों एवं एशिया के कई देशों की मुद्राओं की तुलना में भारतीय रुपए का अमेरिकी डॉलर की तुलना में कम अवमूल्यन होने के कारणों में मुख्य रूप से शामिल हैं भारतीय अर्थव्यवस्था का लगातार मजबूत रहना और देश में आर्थिक विकास की गति का तेज होना। हाल ही के समय में भारत से निर्यात भी तेज गति से बढ़ रहे हैं जिसके चलते अमेरिकी डॉलर की भारत में आवक बढ़ी है। दूसरे, भारत में विदेशी निवेश भी लगातार बढ़ता जा रहा है जो कि सामान्यतः अमेरिकी डॉलर में ही होता है। इसके चलते भारत के पास पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा का भंडार मौजूद है। हालांकि भारत में आर्थिक प्रगति के चलते वस्तुओं, विशेष रूप से कच्चे तेल, का आयात बहुत अधिक मात्रा में हो रहा है, इससे व्यापार घाटा बहुत अधिक मात्रा में हो गया है। भारत के कुल आयात में 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल के आयात का रहता है और देश में कच्चे तेल की कुल मांग का लगभग 80 प्रतिशत भाग आयात किया जाता है जिसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना होता है। अभी पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी बहुत बढ़ गईं थी जिससे भारत के लिए अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता बहुत बढ़ गई थी। अमेरिकी डॉलर की मांग अधिक होने के चलते डॉलर मजबूत होता गया और रुपए का अवमूल्यन होता रहा। भारत में महंगाई बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के साथ साथ अमेरिकी डॉलर के मजबूत होते जाना भी बहुत बड़ी वजह मानी जाती है। इन सभी कारणों के चलते भी भारत में महंगाई की दर विकसित देशों की तुलना में कम ही है। अमेरिका में महंगाई की दर 8 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है जो कि लगभग 3 वर्ष पूर्व तक 2 प्रतिशत के अंदर रहती थी, यूरोपीयन देशों में 9 प्रतिशत के आसपास है तो भारत में महंगाई की दर लगभग 7 प्रतिशत है जो कि कुछ वर्ष पूर्व तक 10 प्रतिशत से भी अधिक रहती थी। अब भारत कई देशों से समझौते करता जा रहा है, जिसके अंतर्गत इन देशों के साथ होने वाले विदेशी व्यापार के व्यवहारों के भुगतान भारतीय रुपए अथवा उन देशों की मुद्राओं में एक दूसरे को किये जाएंगे। भारत के इस कदम से भारत की अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी। विशेष रूप से रूस एवं ईरान से किए जा रहे इन समझौतों से विशेष प्रभाव पड़ेगा क्योंकि वर्तमान में इन देशों से भारत कच्चे तेल का आयात बहुत बड़ी मात्रा में कर रहा है। अतः अब आगे आने वाले समय में भारतीय रुपया और अधिक मजबूत होगा, ऐसी आशा की जा रही है। प्रहलाद सबनानी सेवा निवृत्त उप महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक

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 MadhyaBharat  3 November 2022

भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित होंगे सर्वाधिक कर जमा करने वाले व्यवसायी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे सम्मानित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में 3 नवबंर को रवीन्द्र भवन में भामाशाह पुरस्कार समारोह होगा। समारोह में मुख्यमंत्री  चौहान सर्वाधिक कर जमा करने वाले व्यवसायियों को सम्मानित करेंगे। वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना एवं आर्थिक-सांख्यिकी मंत्री  जगदीश देवड़ा अध्यक्षता करेंगे। समारोह में विगत दो वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा कर जमा करने वाले व्यवसायियों को भामाशाह पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार 5 श्रेणियों में दिए जायेंगे। इस पुरस्कार की स्थापना का उद्देश्य मध्यप्रदेश में माल और सेवा कर अधिनियम के प्रावधानों में करदाताओं द्वारा जमा राज्य जीएसटी की राशि तथा आईजीएसटी सेटलमेंट से राज्य को प्राप्त कर राशि के आधार पर सर्वाधिक कर राशि जमा करने वाले सप्लायर को प्रोत्साहित करना है।

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 MadhyaBharat  2 November 2022

लाड़ली लक्ष्मियों के आगे बढ़ने और सफलता अर्जित करने में ही मेरे जीवन की सार्थकता

मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली लक्ष्मी वाटिका का लोकार्पण किया लाड़ली लक्ष्मियों के साथ लगाए 151 आम के पौधे हर जिले में होगा “एक पार्क लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के नाम” म.प्र. स्थापना दिवस कार्यक्रम की श्रंखला का दूसरा दिन लाड़ली लक्ष्मियों को समर्पित रहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेटियाँ प्रसन्न-सुखी रहें, प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर हों और जीवन में सफलता अर्जित करें, यही मेरी कामना और मेरे जीवन की सार्थकता है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जिन बेटियों को गोदी में लेकर लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण-पत्र भेंट किए थे, वे आज कॉलेज जा रही हैं। बेटियाँ इसी प्रकार अपने जीवन में आगे बढ़ें, प्रगति करें मेरी यही कामना है। मुख्यमंत्री  चौहान लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में पौधे लगाने के बाद लाड़ली लक्ष्मियों को संबोधित कर रहे थे। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की श्रंखला में दूसरा दिन लाड़ली लक्ष्मियों के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री चौहान ने भोपाल में तात्या टोपे नगर स्टेडियम के पीछे विकसित लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में लाड़ली बेटियों के साथ पौधे रोपे। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में लाड़ली लक्ष्मी वाटिकाएँ विकसित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हमारी सरकार ने हर जिले में “एक पार्क लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के नाम” विकसित करने का निर्णय लिया है। पेड़ लगाना जीवन रोपने के समान है, बेटियों द्वारा लगाए गए पौधे समय के साथ बड़े होंगे और जीव-जगत को विभिन्न स्वरूप में अपना योगदान देंगे। मनुष्य का जीवन भी पेड़ जैसा उपयोगी होना चाहिए। हम प्रदेश और देश की प्रगति और लोगों के जीवन में आशा और प्रसन्नता लाने के लिए कार्य करें, तभी हमारे जीवन की सार्थकता है। मुख्यमंत्री  चौहान ने लाड़ली लक्ष्मियों के माता-पिता से कहा कि बेटियों के लालन-पालन और उनके आगे बढ़ने के मार्ग में हर कदम पर राज्य सरकार उनके साथ है। मुख्यमंत्री चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान स्थित लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं के साथ हाइब्रिड प्रजाति के आम के पौधे लगाए। वाटिका में 151 पौधे लगाए गए। पौध-रोपण में कॉलेज में प्रवेश कर चुकी लाड़ली लक्ष्मियों ने भाग लिया। लाड़ली लक्ष्मी कुमारी साक्षी दुबे ने अपने अनुभव साझा किये। खजुराहो सांसद  वी.डी. शर्मा, विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर  रामेश्वर शर्मा, विधायक  कृष्णा गौर, भोपाल महापौर मालती राय भी शामिल हुई।

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 MadhyaBharat  2 November 2022

बड़े लोगों की बजाए अब बेटियों के नाम पर होंगी प्रदेश की सड़कें - सीएम

  सभी जिलों में विकसित किए जाएंगे "लाड़ली लक्ष्मी पथ" मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़े लोगों के नाम पर सड़क का नाम रखने की परंपरा पुरानी है। देश दुनिया में आज पहली बार बेटियों के नाम पर किसी मार्ग का नामकरण किया जा रहा है। भोपाल में भारत माता चौराहे से पॉलिटेक्निक चौराहे तक का मार्ग जो अभी स्मार्ट सिटी सड़क से जाना जाता है, अब "लाड़ली लक्ष्मी पथ" के रूप में जाना जाएगा। मुख्यमंत्री  चौहान भारत माता चौराहे पर "लाड़ली लक्ष्मी पथ" लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि बेटियों के सम्मान से बड़ा कोई दूसरा सम्मान नहीं है। हमने तय किया है कि प्रदेश के सभी 52 जिलों में "लाड़ली लक्ष्मी पथ" विकसित किए जाएंगे। इन पथ के दोनों ओर बालिकाओं और महिलाओं के कल्याण एवं उन्नति के लिए संचालित योजनाओं, महिला सशक्तिकरण से संबंधित जानकारियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। इससे माँ-बहन, बेटियाँ और समाज जागरूक होगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम रहा है। बेटियाँ सक्षम हों, प्रसन्न रहें और अपने जीवन में उपलब्धियाँ अर्जित करें, यही मेरी कामना है। मुख्यमंत्री  चौहान ने कार्यक्रम में शामिल लाड़ली लक्ष्मियों का पुष्प-वर्षा कर अभिवादन किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री  चौहान के साथ लाड़ली लक्ष्मियों ने सेल्फी भी ली। शहडोल से आई लाड़ली लक्ष्मी अवनि श्रीवास्तव ने बताया कि योजना से मिली राशि से उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिली है। अवनि वर्तमान में बीसीए का कोर्स कर रही हैं। अवनि ने लाड़ली लक्ष्मियों के पोषण, शिक्षण और केरियर का ध्यान रखने के लिए मुख्यमंत्री  चौहान का आभार माना।  

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 MadhyaBharat  2 November 2022

ग्रामीण पेयजल के लिए समय अनुरूप बदलते संसाधन

  विकास और जन-कल्याण के लिए समय के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता देश की आजादी और फिर राज्य का गठन जैसी घटनाओं का साक्ष्य इतिहास के रूप में हमारे सामने उपस्थित रहा है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। कल, आज और कल के पूरे परिदृश्य में जल प्रत्येक जीव की पहली जरूरत रही है। कालांतर में ग्रामीण आबादी की पेयजल व्यवस्था के स्रोत कुआँ, बाबड़ी, तालाब, पोखर और नदियाँ जरूर रहे हैं, लेकिन परिवार की जल व्यवस्था की जिम्मेदारी हमारी आधी आबादी (महिलाओं) पर ही रही है। पानी के स्त्रोत कितनी भी दूर हों और मौसम कैसा भी दुष्कर, पर पानी लाने का काम माँ, बहन, बहू और बेटियों को ही करना होता था। मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना (एक नवंबर 1956) के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का गठन वर्ष 1969 में हुआ। विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल प्रदाय की योजनाएँ तैयार कर क्रियान्वयन प्रारंभ किया गया। दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में जहाँ पेयजल के स्त्रोत नहीं थे, वहाँ पर केलिक्स-रिंग मशीन द्वारा हैण्डपंप स्थापित कर आम जनता को शीघ्र पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती रही है। इस व्यवस्था के लिए करीब 5 लाख 55 हजार हैण्डपंप की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में की गई थी, जो लगातार क्रियाशील है। पेयजल गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्रदाय के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन सहित पेयजल स्त्रोतों की जल-गुणवत्ता की निगरानी और अनुश्रवण सहित सहायक गतिविधियों का संचालन भी निरंतर हो रहा है। केन्द्र सरकार से शत-प्रतिशत अनुदान आधारित गतिवर्धित ग्रामीण जल-प्रदाय कार्यक्रम पर वर्ष 1972 से अमल शुरू हुआ। इसमें 40 लीटर प्रति व्यक्ति, प्रति दिन के मान से सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था के कार्य किए गए। त्रि-स्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के बाद वर्ष 1995 में नगरीय क्षेत्रों में पेयजल प्रदाय के संचालन और संधारण का कार्य संबंधित नगरीय निकायों को सौंपा गया। इसके बाद से ही पीएचई विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता पूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के दायित्व का निर्वहन कर रहा है।   समय के अनुरुप होते परिवर्तन प्रदेश के विकास और जन-कल्याण के लिए समय के अनुरूप बदलाव की आवश्यकता और सुगमता को देखते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री पेयजल योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के कार्य प्रारंभ किये गये। इनमें ग्रामीण आबादी के घरों में नल कनेक्श्न से पेयजल उपलब्ध करवाने का कार्य हुआ। केंद्र, राज्य और वित्तीय संस्थाओं के सहयोग से अप्रैल 2020 तक 17 लाख 72 हजार ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन से जल पहुँचाया गया।   मिशन ने दी ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को नई दिशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश की ग्रामीण आबादी के लिए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ऐसा वरदान है जो उनकी पेयजल की कठिनाइयों को पूरी तरह दूर कर देगा। आजादी के बाद मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ग्रामीण परिवारों की पेयजल व्यवस्था की बड़ी कठिनाई को समझा, उस पर गंभीरता से चिंतन किया और निदान के लिये जल जीवन मिशन की घोषणा कर उसे मूर्तरूप दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की करीब सवा पांच करोड़ ग्रामीण आबादी के लिए जल जीवन मिशन में तत्काल कार्य प्रारंभ करवाये। मिशन को सरकार की प्राथमिकता में रख कर निरंतर प्रगति की समीक्षा करते हुए जल प्रदाय योजनाओं के कार्य गुणवत्तापूर्ण और जल्दी पूरा करने के लिए विभागीय अमले से संवाद कर उन्हें प्रेरित किया। जून 2020 में मिशन के कार्य जब प्रारंभ हुए तो देश के साथ मध्यप्रदेश भी कोविड-19 के लॉकडाउन से गुजर रहा था। कोविड-19 और दो वर्षा काल के बाबजूद 20 लाख से अधिक वार्षिक लक्ष्य वाले 12 बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश ने अपना अच्छा स्थान लगातार बनाये रखा है।   मिशन में मध्यप्रदेश के बुरहानपुर को देश का शत-प्रतिशत ''हर घर जल'' सर्टिफाइड जिला होने का प्रथम पुरस्कार राष्ट्रपति  द्रोपदी मुर्मु से प्राप्त हुआ है। अब तक प्रदेश के 6 हजार 783 ग्राम शत-प्रतिशत ''हर घर जल'' युक्त हो चुके हैं, इनमें से केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सर्वाधिक सर्टिफाइड घोषित ग्रामों की संख्या मध्यप्रदेश की ही है। अब तक प्रदेश के 53 लाख 97 हजार 911 ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुँचाया जा चुका है। इसी श्रंखला में ग्रामीण क्षेत्र में संचालित 41 हजार 271 आँगनवाड़ियों और 71 हजार 92 शालाओं में नल कनेक्शन से जल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी की गई है। शेष शालाओं एवं आँगनवाड़ियों में भी नल कनेक्शन के कार्य निरंतर जारी हैं। हमारा प्रदेश 12 बड़े राज्यों में सर्वाधिक ग्रामों को शत-प्रतिशत "हर घर जल" उपलब्ध करवाने में दूसरे पायदान पर है।   विभाग की मिशन की व्यूह-रचना में प्रदेश के करीब एक करोड़ 20 लाख लक्षित ग्रामीण परिवारों में से शेष रहे परिवारों को केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित वर्ष 2024 की समय-सीमा में नल कनेक्शन से जल पहुँचाना है। विभागीय सर्वेक्षण में 10 हजार 409 ग्राम स्त्रोत विहीन पाये गये हैं। राज्य शासन ने इन ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के लिए जल-स्त्रोत आकलन समिति गठित की है, जो वैकल्पिक स्त्रोत के संबंध में सूक्ष्म परीक्षण कर रिपोर्ट देगी जिसके आधार पर जल-संरचनाओं के निर्माण के कार्य प्रारंभ किए जा सकेंगे।   आने वाला कल-हर घर होगा जल   केन्द्र और राज्य सरकार के 50-50 प्रतिशत व्यय भार से संचालित जल जीवन मिशन में अब तक 49 हजार 776 करोड़ रूपये लागत की जल-प्रदाय योजनाएँ स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें 36 हजार 464 करोड़ की समूह और 13 हजार 312 करोड़ की एकल जल-प्रदाय योजनाएँ शामिल है। मिशन में प्रदेश के लक्षित 51 हजार 548 ग्रामों में से 41 हजार 139 में जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। शेष जल-स्त्रोत विहीन ग्रामों के संबंध में राज्य स्तरीय समिति आकलन का कार्य कर रही है।   प्रदेश के 23 हजार से अधिक ग्रामों की जल-प्रदाय योजनाओं के कार्य 60 से 90 प्रतिशत प्रगतिरत हैं। जल-स्त्रोत विहीन ग्रामों का सर्वे कार्य शुरू किया जा चुका है। मिशन में लक्ष्य से भी बड़े अपने हौंसले के साथ हम निश्चित ही अपेक्षित और सकारात्मक परिणाम हासिल करेंगे। आने वाला कल प्रदेश के हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुँचाने के उद्देश्य की पूर्ति का साक्षी होगा।

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 MadhyaBharat  2 November 2022

पीथमपुर में 4 नवम्बर को एक जिला-एक उत्पाद और राज्य स्तरीय रोजगार दिवस समारोह

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान होंगे मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 4 नवम्बर को धार जिले के पीथमपुर में एक जिला-एक उत्पाद और राज्य स्तरीय रोजगार दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के स्थापना दिवस पर इस वर्ष 7 दिवसीय कार्यक्रम हो रहे हैं। एमएसएमई विभाग के सचिव  पी. नरहरि ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस से तैयारियों की समीक्षा की। औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग के सचिव  जॉन किंग्सले, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक धार सहित विभागीय जिला अधिकारी उपस्थित थे। सचिव  नरहरि ने बताया कि जिला मुख्यालयों में होंने वाले कार्यक्रम में विभिन्न स्व-रोजगार योजनाओं में वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले में लाभान्वित हुए हितग्राहियों को आमंत्रित कर स्वीकृति और वितरण पत्र जन-प्रतिनिधियों से दिलवाये जायेंगे। आद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन और एमएसएमई विभाग द्वारा प्रदेश में कार्यक्रम किये जा रहे हैं। "एक जिला-एक उत्पाद" से संबंधित गतिविधियों में एमएसएमई विभाग के एक जिला-एक उत्पाद वाले जिलों ग्वालियर, कटनी शिवपुरी, रतलाम, विदिशा, सागर तथा छतरपुर के साथ ही औद्योगिक निवेश विभाग के तहत अन्य सभी जिलों में भी कार्यक्रम होंगे और प्रदर्शनी भी लगायी जायेगी। बायर-सेलर मीट की जायेगी। संबंधित बैंक एवं विभाग सहभागी होंगे। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। सभी कार्यक्रम स्थापना दिवस की थीम पर आधारित होंगे।

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 MadhyaBharat  1 November 2022

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी प्रदेश के स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ

  मध्यप्रदेश आज तेज गति से आगे बढ़ रहा है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के 67वें स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ और बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कभी बीमारू कहा जाने वाला मध्यप्रदेश आज तेज गति से आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष मध्यप्रदेश की आर्थिक विकास दर 19.76 प्रतिशत रही। बीमारू से सुचारू और अब आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश बनाने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश हर क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों से यही प्रार्थना है कि प्रदेश की प्रगति और विकास में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। आइये समृद्ध विकसित और आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए हम तेजी से आगे बढ़ें।

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 MadhyaBharat  1 November 2022