केंद्रीय मंत्री और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय गुना दौरे के दौरान भाजपा की अंदरूनी राजनीति खुलकर सामने आ गई। जहां एक ओर सिंधिया समर्थकों ने उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी दर्ज कराई, वहीं पार्टी के कुछ पुराने नेताओं ने दूरी बनाए रखी। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य पूरे दौरे के दौरान किसी भी प्रमुख कार्यक्रम में नजर नहीं आए। बाद में उन्होंने कहा कि यदि हर समय बैठकों और कार्यक्रमों में ही लगे रहें तो परिवार और अन्य जिम्मेदारियां कैसे निभाई जाएंगी। उन्होंने सिंधिया को चापलूसों और चुगलखोरों से सावधान रहने की सलाह भी दी। दूसरी ओर, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने सार्वजनिक मंच से ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति अपनी निष्ठा का खुलकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जब तक उनके शरीर में खून की आखिरी बूंद है, तब तक वे सिंधिया के प्रति समर्पित रहेंगे और राजनीति में कुछ मिले या न मिले, अपनी वफादारी नहीं छोड़ेंगे। उनके इस बयान को भाजपा के भीतर सिंधिया समर्थक खेमे के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद से ही 'पुरानी भाजपा' और 'नई भाजपा' के बीच वर्चस्व की चर्चा होती रही है। सिंधिया के इस दौरे के दौरान भी दोनों गुटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। विधायक पन्नालाल शाक्य के हालिया बयानों और उनकी सिंधिया समर्थक नेताओं पर की गई टिप्पणियों को लेकर पहले भी प्रदेश भाजपा नेतृत्व नाराजगी जता चुका है। ऐसे में सिंधिया का यह दौरा संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी और राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं का कारण बन गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi

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