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मध्यप्रदेश में ब्राह्मणों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। आईएएस संतोष वर्मा और नियाज खान के बाद अब प्रदेश के पूर्व अपर मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। सोशल मीडिया पर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को जबरन जातिवाद के दायरे में बांधा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
मनोज श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण कोई जाति नहीं बल्कि एक वर्ण है। उनके मुताबिक अगर ब्राह्मण जातिवादी होते, तो उनमें भी अन्य वर्गों की तरह उपजातियां और आरक्षण की मांग दिखाई देती। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण व्यवस्था जाति पर नहीं, बल्कि गोत्र पर आधारित है। जाति सामाजिक ढांचा है, जबकि गोत्र पैतृक परंपरा से जुड़ा होता है। यही वजह है कि ब्राह्मण समाज में एक ही गोत्र में विवाह की मनाही है, जो जाति व्यवस्था से बिल्कुल अलग अवधारणा है।
पूर्व आईएएस के अनुसार देशस्थ, कोंकणस्थ, मैथिल, गौड़, सारस्वत, कश्मीरी या द्रविड़ जैसे समूह जातियां नहीं, बल्कि एक ही वर्ण के भौगोलिक समूह हैं। इनमें न तो ऊंच-नीच की भावना है और न ही कोई पदानुक्रम। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण “प्रैक्टिस बिफोर यू प्रीच” का उदाहरण हैं और जाति के नाम पर दूसरों को दोष देने से पहले आत्ममंथन जरूरी है। साथ ही उन्होंने अन्य वर्गों को भी ब्राह्मण वर्ण की तरह जाति-मुक्त सोच अपनाने की सलाह दी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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