भोपाल। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 01 अक्टूबर को बालाघाट आयेंगे। वे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित आदिवासी परिवारों से मुलाकात करेंगे और उनकी पीड़ा को समझेंगे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी का मध्य प्रदेश आगमन वंचित और आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और न्याय की आवाज को मजबूती देगा। कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने के संकल्प के साथ उनके साथ खड़ा है। पटवारी ने बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मासूम बच्चों की मौतों को अत्यंत गंभीर और पीड़ादायक घटना बताते हुए भाजपा सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है। पटवारी ने कहा कि बालाघाट में मासूम बच्चों की मौत ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बैहर और बिरसा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य संबंधी जांचों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया और निमोनिया जैसे कई स्वास्थ्य कारकों का उल्लेख सामने आया है। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक व्यवस्था की विफलताओं का खामियाजा मध्य प्रदेश के गरीब और आदिवासी परिवारों के मासूम बच्चे भुगतते रहेंगे? जिन क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां समय पर उपचार, जांच, दवाइयां, टीकाकरण और पोषण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को यह बताना होगा कि आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति क्या है? बीमार बच्चों तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचीं? प्रशासन को बीमारी और संक्रमण की स्थिति का समय पर पता क्यों नहीं चला? प्रभावित परिवारों को बेहतर उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में कहां कमी रही? उन्होंने कहा कि बालाघाट की घटना केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों का दर्द है जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। हर मृत बच्चे के पीछे एक परिवार की उम्मीद, एक मां का सपना और एक पिता का भविष्य जुड़ा था। पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। कांग्रेस की मांग - आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल मजबूत किया जाए। - बच्चों की मौतों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हो। - प्रत्येक पीड़ित परिवार को न्याय और आवश्यक सहायता मिले। - स्वास्थ्य व्यवस्था में हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए। - दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टर, दवाइयां, जांच, टीकाकरण और पोषण सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। पटवारी ने कहा कि हमारा संकल्प स्पष्ट है—आदिवासी समाज को न्याय, पीड़ित परिवारों को इंसाफ और जिम्मेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित हो।
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