Since: 23-09-2009
Chhattisgarh में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने इस कानून के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में विधेयक के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस कानून में जबरन, प्रलोभन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है।
इस कानून के तहत अवैध धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही आर्थिक लालच, दबाव या छल के जरिए धर्म परिवर्तन कराने को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून धर्म की स्वतंत्रता को रोकने के लिए नहीं, बल्कि गैर-कानूनी तरीकों से होने वाले धर्मांतरण पर नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया है।
वहीं याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि आजीवन कारावास जैसी सजा अत्यधिक कठोर है और कानून की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं, जिससे इसके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। फिलहाल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, लेकिन सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |