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प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पारित न हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी और कहा कि यह असफलता नहीं, बल्कि संकल्प की परीक्षा है। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार के पास आवश्यक संख्या बल नहीं था, लेकिन आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने का इरादा अडिग है और आने वाले समय में इस लक्ष्य को जरूर पूरा किया जाएगा।
पीएम ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और सपा—पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ के कारण महिलाओं के अधिकारों को रोका। उन्होंने कहा कि संसद में विधेयक का विरोध करना महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है और देश की महिलाएं इसे कभी नहीं भूलेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी की जीत या हार का नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार का है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में सरकार 2029 तक का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए परिसीमन के साथ संशोधन विधेयक लाया गया था। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने और राज्यों के बीच विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार का दावा है कि सीटों में बढ़ोतरी सभी राज्यों के लिए समान अवसर लेकर आती। पीएम ने भरोसा दिलाया कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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