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National Panchayati Raj Day के मौके पर छत्तीसगढ़ की पंचायतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य की हजारों ग्राम पंचायतों में अब युवा नेतृत्व तेजी से उभर रहा है, जहां करीब 56% सरपंच 40 साल या उससे कम उम्र के हैं। इनमें अच्छी संख्या ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं की है, जो गांवों के विकास में नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोण ला रहे हैं।
यह बदलाव केवल शहरी या मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्किBijapur, Dantewada औरNarayanpur जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। यहां युवा सरपंच शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। बालोद, धमतरी और दुर्ग जैसे जिलों में भी पंचायतों ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बदलाव की मिसाल पेश की है।
ग्राम सभाएं अब केवल औपचारिक मंच नहीं रहीं, बल्कि गांव के फैसलों का मजबूत आधार बन गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि सरपंच बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं होने के बावजूद पढ़े-लिखे युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के गांवों में अब सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि विकास और बदलाव की नई सोच के साथ नेतृत्व उभर रहा है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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