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पराली जलाने में मध्यप्रदेश अव्वल, बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
 Madhya Pradesh , tops, stubble burning, rising cases raise concerns

मध्यप्रदेश में गेहूं की पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ते हुए देश में सबसे ऊपर पहुंच गए हैं।Indian Council of Agricultural Research और CREAMS के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 21 अप्रैल के बीच देशभर में दर्ज 29 हजार से अधिक मामलों में करीब 69% हिस्सेदारी अकेलेMadhya Pradesh की है। इस अवधि में राज्य में 20 हजार से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गईं, जो इसे पराली जलाने के मामलों में शीर्ष पर ले जाती हैं।

जिला स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है।Vidisha औरUjjain पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे हैं। विदिशा में 2000 से अधिक और उज्जैन में भी लगभग इतनी ही घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा रायसेन, होशंगाबाद और सिवनी जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे पर्यावरण और वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि फसल चक्र और समय की कमी इसके पीछे बड़ी वजह है। किसान गेहूं की कटाई के तुरंत बाद ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई करना चाहते हैं, जिसके चलते वे पराली जलाने को आसान विकल्प मानते हैं। हालांकि, यह तरीका पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है और इससे प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है, जिससे दीर्घकालीन कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

Priyanshi Chaturvedi 24 April 2026

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