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छत्तीसगढ़ विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर शासकीय संकल्प पारित किया गया। इस संकल्प में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण तत्काल लागू करने का आग्रह किया गया है। सदन में इस मुद्दे पर करीब 10 घंटे तक लंबी चर्चा चली, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। बाद में कांग्रेस विधायकों ने सदन का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद विपक्ष की गैरमौजूदगी में प्रस्ताव पारित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन में कहा कि केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लाई और महिलाओं को आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन से क्षेत्रों का विस्तार और पुनर्गठन होगा, जिससे अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष ने जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दों को आधार बनाकर महिला आरक्षण का विरोध किया, जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी।
वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस विशेष सत्र को गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती, तो पहले से पारित विधेयक को लागू कर सकती थी। महंत ने सवाल उठाया कि जब समर्थन नहीं मिलना था तो ऐसा विधेयक लाने की जरूरत क्या थी। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी महिलाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर चर्चा नहीं की। अब विधानसभा का अगला सत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह में होने की संभावना जताई जा रही है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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