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Bhojshala में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और ASI की नई गाइडलाइन के बाद पहली बार मां वाग्देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हुई। पूजा से पहले गर्भगृह को गोमूत्र से शुद्ध किया गया और रंगोली से सजाया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अखंड ज्योत स्थापित कर श्रद्धालुओं ने महाआरती की।
सूर्योदय की पहली किरण के साथ श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र और अखंड ज्योत को सिर पर रखकर भोजशाला परिसर में पहुंचे। यज्ञशाला में हवन कुंड बनाकर विशेष पूजा और यज्ञ का आयोजन भी किया गया। 15 मई 2026 कोMadhya Pradesh High Court ने भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र घोषित करते हुए हिंदुओं को पूरे साल पूजा का अधिकार दिया था।
पूजा-अर्चना में केंद्रीय मंत्रीSavitri Thakur ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज करने की बात कही। वहीं, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार शहर में 1200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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