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देशभर में बुधवार को 15 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे।All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) ने ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और बड़ी ई-फार्मा कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के विरोध में एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया। इस बंद का असर कई राज्यों में देखने को मिला, जहां मरीजों और उनके परिजनों को दवाइयां लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिहार के पटना स्थितIndira Gandhi Institute of Medical Sciences के बाहर मरीज दवाओं के लिए भटकते नजर आए, जबकि चंडीगढ़ केPostgraduate Institute of Medical Education and Research में इलाज कराने पहुंचे लोगों ने भी दवाइयां न मिलने की शिकायत की। हालांकि संगठन ने पहले ही कहा था कि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रहेंगे और इमरजेंसी दवाओं की सप्लाई प्रभावित नहीं होगी।
दवा विक्रेताओं की प्रमुख मांगों में बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक, ई-फार्मेसी से जुड़े नियमों में बदलाव और नकली या गलत प्रिस्क्रिप्शन के इस्तेमाल पर नियंत्रण शामिल है। उनका कहना है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। संगठन का दावा है कि कोविड-19 के दौरान ई-फार्मा कंपनियों को दी गई ढील का अब बड़े पैमाने पर व्यावसायिक फायदा उठाया जा रहा है, जिससे पारंपरिक दवा दुकानदारों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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