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छत्तीसगढ़ में राजपूत समाज की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डॉ. राज शेखावत की क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक कुमार सिंह समेत करीब 220 पदाधिकारियों ने संगठन छोड़कर राजपूत करणी सेना (कालवी विचारधारा) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के पीछे तोमर बंधुओं के समर्थन को लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से चल रहा वैचारिक मतभेद बताया जा रहा है। कई दौर की बैठकों के बावजूद विवाद सुलझ नहीं पाया, जिसके बाद सामूहिक इस्तीफे का फैसला लिया गया।
तोमर बंधुओं के समर्थन में हुए आंदोलन के दौरान संगठन की छवि को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई। सोशल मीडिया पर क्षत्रिय करणी सेना की आलोचना हुई और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने भी विरोध दर्ज कराया। इसके बाद संगठन दो गुटों में बंटता नजर आया। अब अनुराग प्रताप सिंह के नेतृत्व वाली राजपूत करणी सेना (कालवी विचारधारा) ने अभिषेक कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। संगठन का दावा है कि नए नेतृत्व में युवाओं और सामान्य वर्ग के मुद्दों को और मजबूती से उठाया जाएगा।
नई जिम्मेदारी संभालते ही संगठन ने EWS आरक्षण प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। संगठन की मांग है कि राजस्थान मॉडल की तर्ज पर EWS प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। नेताओं का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था जटिल होने के कारण पात्र युवाओं और विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं लेती, तो पूरे छत्तीसगढ़ में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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