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मध्यप्रदेश में फर्जी मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। भोपाल के चूनाभट्टी थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की शिकायत पर 9 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि इन डॉक्टरों ने फर्जी मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्रों के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त की और करीब पांच महीने तक नौकरी करते हुए शासकीय धन का लाभ भी लिया।
यह कार्रवाई दमोह के चर्चित फर्जी डॉक्टर रैकेट और संजीवनी क्लीनिक मामले के बाद राज्यभर में चल रही जांच के तहत की गई है। एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. राकेश बोहरे की शिकायत पर दर्ज मामले में जांच के दौरान मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल (MPMC) ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया, जिसमें नौ डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र फर्जी और कूटरचित पाए गए। आरोपियों में डॉ. आकाश चंदेलकर, डॉ. मोहर सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. मोनिका, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. शांति साहू, डॉ. सोनम यादव, डॉ. बुद्धिमान और डॉ. पवन सोलंकी के नाम शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। एसीपी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी और आरोपियों द्वारा प्रस्तुत मेडिकल डिग्रियों व अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों का भी सत्यापन कराया जाएगा। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस फर्जीवाड़े से जुड़े नेटवर्क में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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