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फसल बीमा बना किसानों का सुरक्षा कवच, मौसम की मार से मिलेगी आर्थिक राहत
 Crop insurance , safety net ,financial relief ,t weather-induced losses

खेती में मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रही है। भारी बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने पर यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। खरीफ फसलों के लिए किसानों को केवल 1.5 से 2 प्रतिशत तक प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं। केसीसी धारक ऋणी किसानों का प्रीमियम बैंक स्वतः जमा कर देते हैं, जबकि गैर-ऋणी और बटाईदार किसान बैंक, जनसेवा केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बीमा करा सकते हैं।

योजना के तहत बुवाई न होने, खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने और कटाई के बाद प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने जैसी स्थितियों में मुआवजा दिया जाता है। यदि ओलावृष्टि, जलभराव या अन्य कारणों से नुकसान होता है तो किसानों को 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप या संबंधित कार्यालय में सूचना देना जरूरी है। समय पर शिकायत दर्ज होने पर सर्वे किया जाता है और पात्रता के अनुसार मुआवजे की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा की जाती है।

 

खरीफ सीजन में धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंग, उड़द, अरहर, तिल, मूंगफली, हरी मिर्च, प्याज और टमाटर जैसी फसलों का बीमा कराया जा सकता है। आमतौर पर खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित रहती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे फसल बीमा को अतिरिक्त खर्च नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और निवेश की सुरक्षा के रूप में देखें, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

Priyanshi Chaturvedi 12 June 2026

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