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एमपी हाईकोर्ट में बढ़ा लंबित मामलों का बोझ, जजों की कमी से न्याय में देरी की आशंका
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Madhya Pradesh High Court में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और जजों की कमी न्यायिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ तथा इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में वर्तमान में करीब 4.90 लाख मामले लंबित हैं। इनमें लगभग 1.40 लाख मामले ऐसे हैं, जो दस वर्ष से अधिक समय से अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर नई नियुक्तियां नहीं होने से न्याय मिलने में और देरी हो सकती है।

हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश Justice Vijay Kumar Shukla 27 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। अगले 14 महीनों में पांच और न्यायाधीशों के रिटायर होने की संभावना है। हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 53 पद स्वीकृत हैं, लेकिन प्रस्तावित सेवानिवृत्तियों के बाद कार्यरत जजों की संख्या घटकर लगभग 35 रह सकती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक न्यायाधीश पर औसतन 14 हजार से अधिक मामलों का भार आने का अनुमान है।

 

वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की स्थापना के बाद से शायद ही कभी सभी स्वीकृत पद एक साथ भरे गए हों। जजों की कमी को लंबित मामलों की बड़ी वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां नहीं हुईं, तो पहले से लंबा इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया और धीमी हो सकती है, जिससे उनकी सामाजिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।

Priyanshi Chaturvedi 18 June 2026

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