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देश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है और पिछले 11 दिनों से यह तेलंगाना के आसपास ही ठहरा हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ सक्रिय पांच अलग-अलग मौसमी प्रणालियां मानसून की प्रगति में बाधा बन रही हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं पर्याप्त मजबूती से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जबकि दक्षिण से उठने वाले बादल भी उत्तर भारत की ओर नहीं पहुंच रहे हैं। इसका असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों पर पड़ा है, जहां सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
1 से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 38 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। गुजरात और महाराष्ट्र में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक रही, जहां क्रमशः 79 और 78 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के बांदा में 43.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न और अल नीनो जैसी परिस्थितियां भी मानसून की गति को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, अगले कुछ दिनों में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, यदि जेट स्ट्रीम कमजोर होती है तो अगले चार से पांच दिनों में मानसून दोबारा सक्रिय होकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और उत्तर की ओर अन्य क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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