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अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सिकल सेल उन्मूलन को देश की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए इसे मिशन मोड में चलाया जा रहा अभियान कहा। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु वर्ग के करोड़ों लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो आनुवांशिक रोगों की जांच के क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रपति ने बताया कि सिकल सेल रोग का प्रभाव विशेष रूप से जनजातीय समुदायों पर पड़ता है, इसलिए देश के 17 राज्यों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और जनजातीय विद्यार्थियों के लिए विशेष जांच और जेनेटिक काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। उन्होंने 'सिकल मित्र' पहल की भी प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि लगातार प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले सिकल सेल बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक 1.32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है और लगभग 95 से 96 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिकल सेल से बचाव केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 3700 से अधिक 'सिकल मित्र' जागरूकता अभियान में सक्रिय हैं और समाज की भागीदारी से इस आनुवंशिक बीमारी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाया जा रहा है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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