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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित पुस्तक में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया गया है और उसमें मौजूद 'समाजवादी' (Socialist) तथा 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) जैसे शब्दों का भी उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और आपातकाल (Emergency) से जुड़े नए अध्याय जोड़े गए हैं। SIR से संबंधित अध्याय में छात्रों को मतदाता सूची के अद्यतन, मतदाताओं के सत्यापन और चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई है।
नई पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। इसमें लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र और जन आंदोलनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुस्तक के अनुसार, 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय व्यक्त की और सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। हालांकि, संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की गई है, लेकिन प्रस्तावना में शामिल प्रमुख शब्दों की अलग से व्याख्या नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' (Integrity) शब्द 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे। ये शब्द आज भी भारतीय संविधान का हिस्सा हैं। NCERT की नई पुस्तक में इन शब्दों का उल्लेख नहीं होने और प्रस्तावना को हटाए जाने को लेकर शिक्षा और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि पुस्तक में संविधान की मूल संरचना, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों को अन्य अध्यायों के माध्यम से शामिल किया गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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