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मध्य प्रदेश सरकार नमामि गंगे मिशन के तहत बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू कर रही है। इस परियोजना के तहत भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में नदी की वर्तमान स्थिति का अध्ययन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके लिए इंजीनियरों और अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि नदी संरक्षण की प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।
सरकार की प्राथमिकता बेतवा नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकना है। खासकर भोपाल की कलियासोत नदी से मिलने वाले सीवेज और मंडीदीप के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को सीधे बेतवा में जाने से रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मंडीदीप में अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने के कारण उद्योगों का अपशिष्ट सीधे नदी में पहुंच रहा है, जिससे नदी और आसपास की कृषि भूमि दोनों प्रभावित हो रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नमामि गंगे मिशन का उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। मध्य प्रदेश के गंगा बेसिन में 34 जिले और 283 शहरी निकाय शामिल हैं, जहां बेतवा सहित 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बेतवा की धारा को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाना है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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