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नवा रायपुर स्थित आईआईएम में आयोजित चिंतन शिविर 3.0 के दौरान आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्रिपरिषद को प्रभावी नेतृत्व और सुशासन का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि नेता हमेशा यह याद रखें कि वे मशीनों का नहीं, बल्कि संवेदनशील मनुष्यों का नेतृत्व करते हैं। इसलिए शासन में तकनीक के साथ मानवीय संवेदना, सेवा-भाव, विश्वास और नैतिक मूल्यों को समान महत्व देना आवश्यक है। उनके अनुसार, किसी भी नेता की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह लोगों की भावनाओं को कितना समझता है और कठिन परिस्थितियों में कितनी संतुलित सोच के साथ निर्णय लेता है।
चिंतन शिविर के पहले दिन नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों और कृषि समृद्धि जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित शासन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और जलवायु अनुकूल कृषि मॉडल अपनाने पर जोर दिया। मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा में अपने सुझाव साझा किए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जनहितैषी बनाना है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि शिविर में उन्हें आदर्श नेतृत्व, कृषि सुधार और भविष्य की तकनीकों पर नई सीख मिली। उन्होंने कहा कि गौर गोपाल दास ने रामायण के उदाहरणों के माध्यम से बताया कि एक आदर्श मंत्रिमंडल निस्वार्थ, दूरदर्शी और सत्य बोलने का साहस रखने वाला होना चाहिए। दूसरे दिन पर्यटन, सार्वजनिक नीति, नेतृत्व, योग और सुशासन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के सत्र आयोजित किए जाएंगे।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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