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मध्य प्रदेश में इस बार मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका के बीच राज्य सरकार ने 24 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में सामान्य वर्षा का केवल 90 से 94 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है। सबसे अधिक चिंता उज्जैन संभाग को लेकर जताई गई है, जहां वर्षा की कमी का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कृषि और राजस्व विभाग को पहले से ही राहत और बचाव की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार किसानों को कम अवधि और कम पानी वाली फसलें अपनाने, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज का रकबा बढ़ाने तथा आधुनिक खेती तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दे रही है। साथ ही वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण और मनरेगा के तहत खेत तालाब व जल संरचनाओं के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा। सात जिलों में विस्तृत माइक्रो प्लान लागू किया जाएगा और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से लगातार तकनीकी निगरानी रखी जाएगी।
राजस्व विभाग ने वर्ष 2020 की सूखा नीति के तहत आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। खरीफ फसलों के लिए 31 अक्टूबर तक और रबी फसलों के लिए 31 मार्च तक सूखे की घोषणा की जा सकेगी। राहत कार्यों के लिए प्रारंभिक तौर पर 20.9 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि जिला स्तर पर रोजाना स्थिति की समीक्षा की जाएगी ताकि बारिश की कमी का असर किसानों और कृषि उत्पादन पर कम से कम पड़े।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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