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बेतवा नदी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाए रखने के लिए सरकार ने दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी, सीवेज उत्पादन और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। योजना का उद्देश्य भविष्य में बढ़ती आबादी के बावजूद नदी को साफ रखना और बार-बार नई सीवेज परियोजनाएं बनाने की आवश्यकता को कम करना है।
परियोजना के तहत बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी में गिरने से पहले ही रोक दिया जाएगा। इसके लिए इंटरसेप्शन नेटवर्क, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) विकसित किए जाएंगे। जहां पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाना संभव नहीं होगा, वहां पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। साथ ही बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी की अलग व्यवस्था होगी, ताकि ट्रीटमेंट सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और शोधन प्रक्रिया प्रभावित न हो।
प्रस्तुति के अनुसार बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का पानी सीधे नदी में गिरता है, जबकि यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का गंदा पानी भी बिना शोधन के नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी जैसी समस्याएं भी नदी की जल गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी स्रोतों को नियंत्रित कर बेतवा को अगले तीन दशकों तक स्वच्छ बनाए रखना है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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