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ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर पिछले 16 वर्षों से चल रहा विवाद अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। बुधवार को ग्वालियर की अतिरिक्त सत्र न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ उषा राजे, वसुंधरा राजे तथा यशोधरा राजे के बीच तैयार 35 पन्नों के समझौते का मसौदा अदालत में पेश किया गया। हालांकि, इस समझौते पर अभी अदालत की अंतिम मुहर लगना बाकी है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी, जिसमें समझौते को मंजूरी मिलने की संभावना है।
समझौते के मसौदे के अनुसार, जय विलास पैलेस, शिवपुरी और दिल्ली की कुछ प्रमुख संपत्तियां ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिस्से में आ सकती हैं, जबकि ग्वालियर की कुछ अन्य संपत्तियों और वाटिकाओं में उनकी बुआओं को हिस्सा मिलने की संभावना है। यह विवाद वर्ष 2010 में शुरू हुआ था, जब उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने पिता की संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार का दावा करते हुए अदालत का रुख किया था। समझौते पर अदालत की मुहर लगने के बाद संपत्ति से जुड़े विभिन्न न्यायालयों में लंबित सभी मामले समाप्त हो सकते हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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