Since: 23-09-2009
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा तैयारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पिछले 14 महीनों में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने करीब ₹9.80 लाख करोड़ के 55 रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति में हथियारों की उपलब्धता, तेज मरम्मत व्यवस्था और मजबूत सैन्य रसद सुनिश्चित करना है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया के लंबे संघर्षों से मिले अनुभवों ने भारत की रक्षा रणनीति को नई दिशा दी है।
वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे स्वदेशी हथियारों के प्रभावी प्रदर्शन के बाद वैश्विक स्तर पर भारतीय रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ी है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62% अधिक है। फिलीपींस, वियतनाम, आर्मेनिया और इंडोनेशिया सहित कई देशों के साथ हजारों करोड़ रुपये के रक्षा सौदे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं, जिससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक साख दोनों मजबूत हुई हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |