Since: 23-09-2009
मध्य प्रदेश की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच और अभियोजन प्रक्रिया पर विधानसभा में पेश आंकड़ों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2020 से जून 2026 तक ईओडब्ल्यू को कुल 23,261 शिकायतें मिलीं, लेकिन इनमें से केवल 3,018 मामलों को जांच योग्य मानते हुए शिकायत के रूप में दर्ज किया गया। वहीं 756 आवेदन जांच के बाद बंद कर दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतने वर्षों में महज आठ मामलों में ही अदालत में चालान पेश किया जा सका। ये आंकड़े कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से विधानसभा में प्रस्तुत किए गए।
ईओडब्ल्यू द्वारा अदालत तक पहुंचाए गए मामलों में इंदौर नगर निगम जल कार्य घोटाला, सतना स्वास्थ्य निर्माण अनियमितता, भोपाल शासकीय भूमि फर्जीवाड़ा, जबलपुर विकास प्राधिकरण, ग्वालियर गृह निर्माण समिति, भोपाल सहकारिता, उज्जैन निर्माण कार्य और रीवा नगर निगम से जुड़े मामले शामिल हैं। विधानसभा में सामने आए आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि कई शिकायतों में एफआईआर दर्ज करने और चालान पेश करने में वर्षों का समय लग रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों की जांच की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.
Created By:
Medha Innovation & Development |