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मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों—बीजेपी और कांग्रेस—के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया जैसे दिग्गज अभी तक प्रचार के लिए नहीं पहुंचे हैं। वहीं बीजेपी में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला जैसे बड़े नामों ने भी फिलहाल दूरी बना रखी है। बड़े नेताओं की इस सीमित मौजूदगी के बीच दोनों ही दल स्थानीय नेतृत्व, बूथ कार्यकर्ताओं और घर-घर संपर्क के जरिए मतदाताओं को साधने में लगे हैं।
स्टार प्रचारकों की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, क्योंकि किसी भी उपचुनाव में बड़े नेताओं का रोड शो या सभा माहौल बदलने की ताकत रखता है। हालांकि, दतिया में स्थानीय मुद्दे, जातीय समीकरण और प्रत्याशी का व्यक्तिगत प्रभाव हमेशा से अहम रहा है, जिसके चलते दोनों दल स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रचार के अंतिम दौर में रणनीति के तहत दोनों पार्टियां अपने मुख्य चेहरों को मैदान में उतार सकती हैं। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले आने वाले दिनों में स्टार प्रचारकों के दौरों के बाद ही दतिया की चुनावी जंग का असली रोमांच देखने को मिलेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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