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छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को छह साल की मशक्कत के बाद बड़ी राहत मिली है। ट्राइफेड ने करीब 300 करोड़ रुपये के घाटे में अपनी हिस्सेदारी देने की मंजूरी दे दी है। वर्ष 2014 से महुआ, इमली, चिरौंजी, हर्रा, कोदो-कुटकी समेत विभिन्न लघु वनोपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद तो की गई, लेकिन पर्याप्त बाजार नहीं मिलने से बड़ी मात्रा में वनोपज गोदामों में खराब हो गई। इससे संघ की करीब 1600 करोड़ रुपये की बैंक एफडी खत्म हो गई और संचालन के लिए 400 करोड़ रुपये का बैंक ऋण लेना पड़ा।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ट्राइफेड मुख्यालय में लगातार कोशिशों के बाद अब घाटे की भरपाई का रास्ता साफ हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे तेंदूपत्ता संघ की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ब्याज का बोझ कम होगा। इसका सीधा लाभ तेंदूपत्ता एवं अन्य लघु वनोपज संग्राहकों को मिलेगा, क्योंकि संघ अपनी आय का अधिक हिस्सा अब संग्राहकों के हित और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च कर सकेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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