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सहारा इंडिया ग्रुप को करीब 1.04 करोड़ निवेशकों के लगभग 89 हजार करोड़ रुपए लौटाने हैं। निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए सहारा ने सुप्रीम कोर्ट में 88 संपत्तियों की सूची पेश की थी, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 1 लाख करोड़ रुपए बताई गई। ये संपत्तियां देश के 227 शहरों में फैली हैं और इनमें फ्लैट, अपार्टमेंट, मॉल, होटल, शॉपिंग सेंटर, प्रिंटिंग प्रेस, सहारा शहर और जमीनें शामिल हैं। हालांकि जांच में दावा किया गया है कि सूची में शामिल करीब 75% संपत्तियां किसी न किसी विवाद में फंसी हैं। इनमें टाइटल, रेरा, उपभोक्ता फोरम, सिविल केस, ईडी अटैचमेंट, ईपीएफओ और मालिकाना हक से जुड़े विवाद शामिल हैं। 20 से ज्यादा संपत्तियां बिक चुकी हैं, फिर भी वे सूची में शामिल हैं। रायपुर की 127 एकड़ जमीन के बिक जाने की भी बात सामने आई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ वकील शेखर नाफड़े को इन 88 संपत्तियों का सत्यापन कर तीन श्रेणियों में बांटने का निर्देश दिया था—बिना विवाद वाली, जिनका अधिकार स्पष्ट हो चुका है और जिन पर स्वामित्व या अधिकार को लेकर विवाद है। इसके बावजूद सूची में विवादित और पहले से बिक चुकी संपत्तियों के शामिल होने से सवाल उठ रहे हैं। उधर सहारा निवेशकों का पैसा लौटाने की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन भी तेज हो रहे हैं। 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के बाहर निवेशकों ने प्रदर्शन किया, जबकि 9 अगस्त को रांची में सत्याग्रह का ऐलान किया गया है। सरकार के मुताबिक, सहारा-सेबी रिफंड खाते से 10 हजार करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार को ट्रांसफर किए गए थे, जिसमें से जुलाई तक 41.5 लाख पात्र जमाकर्ताओं को 9,265 करोड़ रुपए लौटाए जा चुके हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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