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पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे को लेकर पहली बार बयान देते हुए कहा कि जेन-जी देश के ही बच्चे हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां छोटी हैं, इसलिए उनके लिए पद जरूरी नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा करने और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमति मिलने के बाद ही इस्तीफा दिया। इस दौरान BJD कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की।
प्रधान ने कहा कि नई पीढ़ी के विरोध को दबाने के बजाय उसे समझना जरूरी है। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि प्रदर्शन और नारेबाजी से वे परेशान नहीं हैं और ओडिशा के लोगों के भरोसे को कभी नहीं तोड़ेंगे। प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और युवाओं के सपने देश को आगे ले जाएंगे। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधान केंद्र के चौथे पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहे। उनके इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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