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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ अब छात्र भी खुलकर आवाज उठा रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने में रायगढ़, महासमुंद, बालोद, धमतरी और कोंडागांव समेत कई जिलों में विद्यार्थियों ने तालाबंदी, घेराव और मार्च कर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कहीं जर्जर स्कूल भवन के कारण पंचायत भवन में पढ़ाई हो रही है, तो कहीं शिक्षकों की कमी से विषयवार कक्षाएं प्रभावित हैं। प्रदेश में 1800 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है।
शिक्षकों की कमी के साथ स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 5500 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि करीब 7260 स्कूलों में छात्रों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण नई पीढ़ी अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हुई है। छात्रों का विरोध केवल अनुशासन का मुद्दा मानने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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