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भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए EOS-05 उपग्रह को GSLV-F17 के जरिए सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है। करीब 2,367 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह पृथ्वी की निगरानी क्षमता को और मजबूत करेगा। ‘Naughty Boy’ नाम से चर्चित इस मिशन से कृषि, मौसम की जानकारी और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है। इसकी खासियत यह है कि यह सामान्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट की तुलना में काफी ऊंचाई से बड़े इलाके पर लगातार नजर रखने में सक्षम होगा।
EOS-05 को करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया जाना है। इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के घूमने की गति के अनुरूप काम करता है, जिससे किसी क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें और जरूरी जानकारी हासिल की जा सकती है। इसका इस्तेमाल चक्रवात, बादलों की गतिविधि, तेज आंधी, क्लाउडबर्स्ट और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी में किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन की सफलता पर ISRO को बधाई दी और अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारी संस्थानों के साथ भारतीय उद्योग की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
इस मिशन के साथ GSLV ने भी अपनी क्षमता का नया रिकॉर्ड बनाया है। EOS-05 अब तक GSLV से भेजा गया सबसे भारी उपग्रह बताया जा रहा है। 51.7 मीटर लंबे GSLV-F17 का लिफ्ट-ऑफ मास करीब 420.5 टन रहा। मिशन के दौरान उपग्रह को करीब 29,934 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने का अनुमान था, लेकिन यह लगभग 31 हजार किलोमीटर तक पहुंचा। इसके बाद उपग्रह अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से निर्धारित कक्षा में पहुंचेगा। EOS-05 की निर्धारित कार्य अवधि सात वर्ष है, जबकि इसके नौ वर्ष से अधिक समय तक काम करने की उम्मीद भी जताई गई है।
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