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भारतीयता का मूल हैं हमारे परिवार.   पठानकोट में फिर घुसा पाकिस्तान का ड्रोन.   लुंबिनी यात्रा का उद्देश्य भारत-नेपाल संबंधों को मजूबत करना : प्रधानमंत्री मोदी.   ज्ञानवापी मस्जिद परिसर सर्वे: दूसरे दिन चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था.   डॉ. मानिक साहा ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली .   राजीव कुमार ने 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला.   सुरक्षा करने वालों की सुरक्षा भी जरूरी.   आगामी सप्ताह पूरे प्रदेश में होंगे जन-कल्याण कार्यक्रम, मुख्यमंत्री चौहान ने की समीक्षा.   महिला मोर्चा के राष्ट्रीय प्रशिक्षण वर्ग में भाग लेने भोपाल पहुंचीं स्मृति ईरानी .   सिवनी मॉब लिचिंग मामले की एसआइटी करेगी जांच.   मुख्यमंत्री चौहान ने लगाए नीम और पीपल के पौधे.   गुना में शिकारियों से मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मियों की मौत.   देश को श्रीलंका की राह पर केंद्र सरकार ले जा रही : कांग्रेस.   छत्तीसगढ़ में कानून का राज : कांग्रेस.   आईईडी ब्लास्ट में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल का जवान घायल.   पैरावट में आग लगने से छात्रा की जलकर मौत.   छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं का परिणाम किया जारी .   हेलिकॉप्टर क्रैश के उच्चस्तरीय जांच के निर्देश.  

देश की खबरें

जहां मिलती है सुरक्षा, संरक्षण और आत्मविश्वास #कुटुम्बप्रबोधन  प्रो.संजय द्विवेदी  भारत में ऐसा क्या है जो उसे खास बनाता है? वह कौन सी बात है जिसने सदियों से उसे दुनिया की नजरों में आदर का पात्र बनाया और मूल्यों को सहेजकर रखने के लिए उसे सराहा। निश्चय ही हमारी परिवार व्यवस्था वह मूल तत्व है, जिसने भारत को भारत बनाया। हमारे सारे नायक परिवार की इसी शक्ति को पहचानते हैं। रिश्तों में हमारे प्राण बसते हैं, उनसे ही हम पूर्ण होते हैं। आज कोरोना की महामारी ने जब हमारे सामने गहरे संकट खड़े किए हैं तो हमें सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संबल हमारे परिवार ही दे रहे हैं। व्यक्ति कितना भी बड़ा हो जाए उसका गांव, घर, गली, मोहल्ला, रिश्ते-नाते और दोस्त उसकी स्मृतियां का स्थायी संसार बनाते हैं। कहा जाता है जिस समाज स्मृति जितनी सघन होती है, जितनी लंबी होती है, वह उतना ही श्रेष्ठ समाज होता है।     परिवार नाम की संस्था दुनिया के हर समाज में मौजूद हैं। किंतु परिवार जब मूल्यों की स्थापना, बीजारोपण का केंद्र बनता है, तो वह संस्कारशाला हो जाता है। खास हो जाता है। अपने मूल्यों, परंपराओं को निभाकर समूचे समाज को साझेदार मानकर ही भारतीय परिवारों ने अपनी विरासत बनाई है। पारिवारिक मूल्यों को आदर देकर ही श्री राम इस देश के सबसे लाड़ले पुत्र बन जाते हैं। उन्हें यह आदर शायद इसलिए मिल पाया, क्योंकि उन्होंने हर रिश्ते को मान दिया, धैर्य से संबंध निभाए। वे रावण की तरह प्रकांड विद्वान और विविध कलाओं के ज्ञाता होने का दावा नहीं करते, किंतु मूल्याधारित जीवन के नाते वे सबके पूज्य बन जाते हैं, एक परंपरा बनाते हैं। अगर हम अपनी परिवार परंपरा को निभा पाते तो आज के भारत में वृद्धाश्रम न बन रहे होते। पहले बच्चे अनाथ होते थे आज के दौर में माता-पिता भी अनाथ होने लगे हैं। यह बिखरती भारतीयता है, बिखरता मूल्यबोध है। जिसने हमारी आंखों से प्रेम, संवेदना, रिश्तों की महक कम कर भौतिकतावादी मूल्यों को आगे किया है। न बढ़ाएं फासले, रहिए कनेक्टः     आज के भारत की चुनौतियां बहुत अलग हैं। अब भारत के संयुक्त परिवार आर्थिक, सामाजिक कारणों से एकल परिवारों में बदल रहे हैं। एकल परिवार अपने आप में कई संकट लेकर आते हैं। जैसा कि हम देख रहे हैं कि इन दिनों कई दंपती कोरोना से ग्रस्त हैं, तो उनके बच्चे एकांत भोगने के साथ गहरी असुरक्षा के शिकार हैं। इनमें माता या पिता, या दोनों की मृत्यु होने पर अलग तरह के सामाजिक संकट खड़े हो रहे हैं। संयुक्त परिवार हमें इस तरह के संकटों से सुरक्षा देता था और ऐसे संकटों को आसानी से झेल जाता था। बावजूद इसके समय के चक्र को पीछे नहीं घुमाया जा सकता। ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपने परिजनों से निरंतर संपर्क में रहें। उनसे आभासी माध्यमों, फोन आदि से संवाद करते रहें, क्योंकि सही मायने में परिवार ही हमारा सुरक्षा कवच है।    आमतौर सोशल मीडिया के आने के बाद हम और ‘अनसोशल’ हो गए हैं। संवाद के बजाए कुछ ट्वीट करके ही बधाई दे देते हैं। होना यह चाहिए कि हम फोन उठाएं और कानोंकान बात करें। उससे जो खुशी और स्पंदन होगा, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। परिजन और मित्र इससे बहुत प्रसन्न अनुभव करेगें और सारा दिन आपको भी सकारात्मकता का अनुभव होगा। संपर्क बनाए रखना और एक-दूसरे के काम आना हमें अतिरिक्त उर्जा से भर देता है। संचार के आधुनिक साधनों ने संपर्क, संवाद बहुत आसान कर दिया है। हम पूरे परिवार की आनलाईन मीटिंग कर सकते हैं, जिसमें दुनिया के किसी भी हिस्से से परिजन हिस्सा ले सकते हैं। दिल में चाह हो तो राहें निकल ही आती हैं। प्राथमिकताए तय करें तो व्यस्तता के बहाने भी कम होते नजर आते हैं। जरूरी है एकजुटता और सकारात्मकताः     सबसे जरूरी है कि हम सकारात्मक रहें और एकजुट रहें। एक-दूसरे के बारे में भ्रम पैदा न होने दें। गलतफहमियां पैदा होने से पहले उनका आमने-सामने बैठकर या फोन पर ही निदान कर लें। क्योंकि दूरियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं और एक दिन सब खत्म हो जाता है। खून के रिश्तों का इस तरह बिखरना खतरनाक है क्योंकि रिश्ते टूटने के बाद जुड़ते जरूर हैं, लेकिन उनमें गांठ पड़ जाती है। सामान्य दिनों में तो सारा कुछ ठीक लगता है। आप जीवन की दौड़ में आगे बढ़ते जाते हैं, आर्थिक समृद्धि हासिल करते जाते हैं। लेकिन अपने पीछे छूटते जाते हैं। किसी दिन आप अस्पताल में होते हैं, तो आसपास देखते हैं कि कोई अपना आपकी चिंता करने वाला नहीं है। यह छोटा सा उदाहरण बताता है कि हम कितने कमजोर और अकेले हैं। देखा जाए तो यह एकांत हमने खुद रचा है और इसके जिम्मेदार हम ही हैं। संयुक्त परिवारों की परिपाटी लौटाई नहीं जा सकती, किंतु रिश्ते बचाए और बनाए रखने से हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। इसके साथ ही सकारात्मक सोच बहुत जरूरी है। जरा-जरा सी बातों पर धीरज खोना ठीक नहीं है। हमें क्षमा करना  और भूल जाना आना ही चाहिए। तुरंत प्रतिक्रिया कई बार घातक होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम धीरज रखें। देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसे ही पारिवारिक मूल्यों की जागृति के कुटुंब प्रबोधन के कार्यक्रम चलाता है। पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक अत्रे भी लोगों को पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने प्रेरित कर रहे हैं। वे साफ कहते हैं ‘भारत में परिवार ही समाज को संभालता है।’ जुड़ने के खोजिए बहानेः   हमें संवाद और एकजुटता के अवसर बनाते रहने चाहिए। बात से बात निकलती है और रिश्तों में जमी बर्फ पिधल जाती है। परिवार के मायने सिर्फ परिवार ही नहीं हैं, रिश्तेदार ही नहीं हैं। वे सब हैं जो हमारी जिंदगी में शामिल हैं। उसमें हमें सुबह अखबार पहुंचाने वाले हाकर से लेकर, दूध लाकर हमें देने वाले, हमारे कपड़े प्रेस करने वाले, हमारे घरों और सोसायटी की सुरक्षा, सफाई करने वाले और हमारी जिंदगी में मदद देने वाला हर व्यक्ति शामिल है। अपने सुख-दुख में इस महापरिवार को शामिल करना जरूरी है। इससे हमारा भावनात्मक आधार मजूबूत होता है और हम कभी भी अपने आपको अकेला महसूस नहीं करते। कोरोना के संकट ने हमें सोचने के लिए आधार दिया है, एक मौका दिया है। हम सबने खुद के जीवन और परिवार में न सही, किंतु पूरे समाज में मृत्यु को निकट से देखा है। आदमी की लाचारगी और बेबसी के ऐसे दिन शायद भी कभी देखे गए हों। इससे सबक लेकर हमें न सिर्फ सकारात्मकता के साथ जीना सीखना है बल्कि लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना है। बड़ों का आदर और अपने से छोटों का सम्मान करते हुए सबको भावनात्मक रिश्तों की डोर में बांधना है।  एक दूसरे को प्रोत्साहित करना, घर के कामों में हाथ बांटना, गुस्सा कम करना जरूरी आदतें हैं, जो डालनी होंगीं। एक बेहतर दुनिया रिश्तों में ताजगी, गर्माहट,दिनायतदारी और भावनात्मक संस्पर्श से ही बनती है। क्या हम और आप इसके लिए तैयार हैं?

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 May 2022

देश की खबरें

  वाराणसी। ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में न्यायालय के निर्देश पर लगातार दूसरे दिन रविवार को भी कड़ी सुरक्षा के बीच मस्जिद परिसर में सर्वे की कार्यवाही चल रही है। अधिवक्ता कमिश्नर के साथ वादी-प्रतिवादी पक्ष के कुल 52 सदस्यों की मौजूदगी में परिसर के ऊपरी भाग का सर्वे हो रहा है। दोपहर 12 बजे तक मस्जिद परिसर के बरामदे, छत, गुंबद, तालाब और बाहरी दीवारों आदि की वीडियोग्राफी होनी है। मस्जिद परिसर में प्रवेश के पूर्व सभी सदस्यों के मोबाइल फोन जमा करा लिया गया। निर्धारित समय पर सुबह आठ बजे सभी पक्ष के लोग चौक थाने से ज्ञानवापी मस्जिद में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नम्बर चार के रास्ते गये। पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के बाद यहां की सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ाई गई है। सर्वे के पहले दिन परिसर के बाहर 10 लेयर की सिक्योरिटी थी, जिसे 12 लेयर की कर दी गई है। इन बातों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। उधर, सर्वे के दौरान तहखाने के एक हिस्से की वीडियोग्राफी शनिवार को नहीं हो पाई थी। उसे रविवार को खोला गया तो उसमें मिट्टी भरी मिलने की जानकारी सामने आई है। जिस पर वादी पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई। सर्वे के पहले दिन की ही तरह रविवार को भी ज्ञानवापी मस्जिद से लगभग एक किलोमीटर की दूरी तक मार्ग प्रतिबंधित है। काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर चार के दोनों तरफ करीब 500 मीटर पहले ही बैरिकेडिंग लगी हुई है। किसी भी वाहन को गोदौलिया- मैदागिन मार्ग पर नहीं जाने दिया जा रहा है। दर्शनार्थियों को गलियों के रास्ते काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है। ज्ञानवापी के एक किलोमीटर तक जगह-जगह पुलिस और पीएसी के जवान मुस्तैद है। -17 मई को अदालत में पेश होगी रिपोर्ट अदालत ने कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 17 मई की तिथि निर्धारित की है। माना जा रहा है कि रविवार को सर्वे के बाद आगे की रणनीति तैयार हो सकती है। अगर कमीशन की कार्यवाही पूरी हो जाएगी तो 17 मई को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह, अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्र और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह संयुक्त रिपोर्ट न्यायालय को सौंपेंगे। यदि टीम को लगता है कि कमीशन के लिए और समय की आवश्यकता है तो वह न्यायालय से अगली तिथि पर रिपोर्ट पेश करने की अनुमति भी मांग सकती है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 May 2022

मध्यप्रदेश की खबरें

 (प्रवीण कक्कड़)  प्रदेश के गुना में शिकारियों से मुठभेड़ में 3 पुलिसकर्मियों के शहीद होने की घटना दुखद और चिंताजनक है। खाकी वर्दी में पुलिस की नौकरी ऊपर से जितनी शानदार दिखती है, अंदर से उतनी ही चुनौतियां पुलिसकर्मियों के सामने होती हैं। इसका ज्वलंत उदाहरण गुना की घटना है, जहां फर्ज निभाते हुए इन जांबाजों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी। यह घटना केवल शिकारी और पुलिसकर्मियों की मुठभेड़ की नहीं है, बल्कि वेकअप कॉल है जो जाहिर कर रहा है कि अपराधियों में पुलिस का भय खत्म होता जा रहा है। आज समय है जब समाज, प्रशासन और राजनेताओं को पुलिसकर्मियों के हितों के बारे में विचार करना चाहिए। समाज की सुरक्षा करने वालों की सुरक्षा को भी जरूरी समझा जाना चाहिए।  इस घटना पर नज़र डालें तो शिकारी न सिर्फ खुलेआम शिकार करने का दुस्साहस कर रहे हैं, बल्कि उनके मन में पुलिस का किसी तरह का भय भी नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में पुलिस के ललकारने पर अपराधी मुठभेड़ करने के बजाए माल छोड़ कर भाग जाते हैं। लेकिन जब अपराधी इस तरह से मुकाबले की कार्रवाई करते हैं तो उसका मतलब होता है कि उस इलाके में पुलिस और प्रशासन का वकार कमजोर हो गया है। अपराधी अपराध करने को अपना अधिकार समझने लगे हैं और उनके मन में शासन का भय नहीं रह गया है। यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सोचने का विषय भी है कि पुलिस को इस तरह के संसाधनों के अनुसार सुसज्जित किया जाए और अपराधियों को मिलने वाले इस तरह के संरक्षण को समाप्त किया जाए। इस घटना का यह महत्वपूर्ण पहलू है कि क्या शिकारियों और तस्करों से रात में मुठभेड़ करने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त सुरक्षा के उपाय हैं या नहीं। जिन जगहों पर पुलिस कर्मियों को सीधे गोलियों के निशाने पर आने का खतरा है। क्या कम से कम उन जगहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को बुलेट प्रूफ जैकेट और नाइट विजन कैमरा जैसे उपकरण मुहैया नहीं कराए जाने चाहिए। क्या पुलिस वालों की इस बात की ट्रेनिंग दी गई है कि अगर शिकारी या अपराधी बड़ी संख्या में हो और उनके पास हथियार हो तो उनसे किस तरह से मुकाबला किया जाए। क्योंकि बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के और बिना अत्याधुनिक हथियारों के इस तरह की मुठभेड़ आखिर पुलिस वालों के लिए किस हद तक सुरक्षित है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य में इस विषय पर बहुत ही गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि आज भी मध्य प्रदेश देश के सबसे ज्यादा वन क्षेत्रफल वाले राज्यों में शामिल है। प्रदेश में बड़ी संख्या में अभयारण्य और नेशनल पार्क हैं। जिसमें दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव पाए जाते हैं।  सेना में भर्ती होने वाले लोगों के लिए चाहे वे सैनिक हों या उच्चाधिकारी बहुत सारी मानवीय सुविधाएं होती हैं। ऑफिसर्स के लिए अलग मैस होगा। सैनिकों का अपना मैस होता है। उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से सैनिक स्कूल होते हैं। खेल कूद और व्यायाम के लिए शानदार पार्क और होते हैं। जवान खुद को चुस्त-दुरुस्त रख सकें इसके लिए बड़े पैमाने पर शारीरिक व्यायाम की सुविधा होती है। सेना के अपने अस्पताल होते हैं। जहां विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहते हैं। इसके अलावा खेलों में सेना के जवानों का विशेष प्रतिनिधित्व हो सके इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं। निश्चित तौर पर सेना की जिम्मेदारी बड़ी है और उसे सरहदों पर देश की रक्षा करनी होती है लेकिन पुलिस की जिम्मेदारी भी कम नहीं है, उसे तो रात दिन बिना अवकाश के समाज की कानून व्यवस्था को बना कर चलना होता है। राज्य सरकारों को पुलिस के लिए नए आवासों के निर्माण के बारे में ध्यान से सोचना चाहिए। पुलिस कर्मियों के बच्चे अच्छे स्कूलों में शिक्षा ले सकें, इसलिए शहर के किसी भी कन्वेंट या सैनिक स्कूल के मुकाबले के स्कूल पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए खोले जाने चाहिए। मौजूदा दौर में सबसे जरूरी है कि पुलिस के पक्ष में सोचा जाए। कभी पुलिसकर्मियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से तो जांबाजी से एनकाउंटर करने के बाद भी आयोगों की जांच में परेशान होना पड़ता है। एक पूर्व पुलिस अधिकारी होने के नाते मैं पुलिस सेवा के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों को बखूबी समझ सकता हूं। आज पुलिस की सुरक्षा और संसाधनों के प्रति बढ़ाने हमें विचार करने की जरूरत है। इसके साथ ही परिदृश्य पर गौर करें तो राज्य पुलिस बलों में 24% रिक्तियां हैं,लगभग 5.5 लाख रिक्तियां। यानी जहां 100 पुलिस वाले हमारे पास होने चाहिए वहां 76 पुलिस वाले ही उपलब्ध हैं। इसी तरह हर एक लाख व्यक्ति पर पुलिसकर्मियों की स्वीकृत संख्या 181 थी, उनकी वास्तविक संख्या 137 थी। उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिसकर्मी होने चाहिए। इस तरह गौर करें तो राष्ट्रीय मानक से तो हम पीछे हैं ही अंतर्राष्ट्रीय मानक से तो बहुत पीछे हैं। गुना में हुई घटनाओं जैसे वेकअप कॉल में सभी का जागना जरूरी है, भले ही वे किसी भी पार्टी से जुड़े राजनेता हों, आला पुलिस अधिकारी हों या हमारा सिस्टम। ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए हमें पुलिस के लिए संसाधनों को बढाना होगा। सभी को मिलकर देशभक्ति और जनसेवा का जज्बा लिए पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर प्रयास करने चाहिए। पुलिस पर हमला करने वालों को सख्त सजा मिले, शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिवार को मुआवजा मिले। इसके साथ ही ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए भी पुख्ता सिस्टम तैयार हो। यही इन शहीद पुलिस जवानों को सच्ची श्रध्दांजलि होगी।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 May 2022

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल। मध्य प्रदेश के सिवनी में गौमांस की तस्करी के मामले दो आदिवासियों की मॉब लिंचिंग मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) करेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एसआइटी का गठन करने के निर्देश दिए हैं। सिवनी में हुई आदिवासियों की हत्या के मामले की जांच एसआइटी करेगी। साथ ही इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिवनी एसपी को हटाने के निर्देश दिए हैं। कुरई थाने और बादलपार चौकी के पूरे स्टाफ को भी हटाने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को गुना की घटना को लेकर बुलाई आपात बैठक में सिवनी की घटना पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो आदिवासियों की मौत और पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी से कराने के निर्देश दिए। सीएम चौहान ने जल्द से जल्द एसआइटी का गठन कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री ने सिवनी एसपी कुमार प्रतीक साथ-साथ थाना कुरई थाना और बादलपार चौकी के पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश भी दिए हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कुछ लोगों ने 3 आदिवासी युवकों की पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी थी। उन युवकों पर गौमांस तस्करी का शक था। इस मामले में पुलिस ने कुल 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इनमें से 6 लोगों पर नामजद केस दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार भी किया था और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 14 May 2022

छतीसगढ़ की खबरें

  रायपुर। देश को श्रीलंका की राह पर केंद्र सरकार ले जा रही। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि अनर्थशास्त्र और वित्तीय कुप्रबंधन का सबसे बड़ा उदाहरण तो केंद्र सरकार है, जहां विगत 8 वर्षों में देश पर कुल कर्जा तीन गुना बढ़ा है। नोटबंदी और बिना तैयारी के आधे-अधूरे जीएसटी जैसे अव्यावहारिक फैसलों के चलते महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है। केंद्र में हम दो और हमारे दो कि अधिनायकवादी सरकार चल रही है। मोदी सरकार में केवल चंद पूंजीपतियों के मुनाफे पर केंद्रित योजनाएं बनाई जा रही है। पूंजीपतियों के लाखों करोड़ के लोन राइट-ऑफ किए जा रहे हैं। केंद्र की सत्ता के संरक्षण में बैंकफ्रॉड बढ़ रहें हैं। बैंक, बीमा, रेलवे, बंदरगाह, नवरत्न कंपनियां, देश के संसाधन ओने-पौने दाम पर बेची जा रही है। एक तरफ जीएसटी का कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर है फिर भी राज्यों को उनके अधिकारों की राशि नहीं दी जाती। 85 प्रतिशत आम जनता की आय घट रही है, लेकिन प्रधानमंत्री के इर्द-गिर्द रहने वाले मित्रों की संपत्ति 20 महीने में 18 गुना बढ़ रही है। विदेशों में भेजा जाने वाला धन तेजी से बढ़ रहा है। भुखमरी इंडेक्स में लगातार बिछड़ते जा रहे हैं। देश में बढ़ती महंगाई बेरोजगारी और असमानता के लिए केंद्र सरकार की गलत नीतियां ही जिम्मेदार है लेकिन धरमलाल कौशिक और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में इतना साहस नहीं है कि वे कह सके कि मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियां देश को श्रीलंका के वित्तीय हालत की दिशा में धकेल रही है। श्रीलंका में कुल कर्ज जीडीपी का लगभग 113 परसेंट है। मोदी के कुशासन में भी देश को उसके ही आसपास पहुंचा दिया गया है परंतु दलीय चाटुकारिता के चलते समृद्ध होते छत्तीसगढ़ पर धरमलाल कौशिक अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।   मोहन मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़िया की समृद्धि से धरमलाल कौशिक और छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को पीड़ा है। 15 साल के शासन में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चलते छत्तीसगढ़ को 42,000 करोड़ के कर्ज में डुबाने आने वाले हैं भाजपाई भूपेश बघेल सरकार के वित्तीय अनुशासन और प्रबंधन पर तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं। 2003 में जब रमन सिंह की सरकार आई तब प्रदेश पर कोई कर्जा नहीं था बल्कि सरप्लस फंड था। छत्तीसगढ़ में जल, जंगल, जमीन, बिजली, पानी, खनिज सहित सभी संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद रमन राज के 15 साल के कुशासन में छत्तीसगढ़ को गरीबी रेखा में नंबर वन बनाया गया, राष्ट्रीय औसत से लगभग दुगुने। फिर भी 42,000 करोड का कर्ज विरासत में देकर गए जिसका ब्याज और मूलधन भी भूपेश बघेल सरकार पटा रही है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार पर कुल कर्ज केंद्र सरकार द्वारा रोकी गई छत्तीसगढ़ के हक और अधिकार की राशि 55,000 करोड़ रुपये से कम है और आरबीआई के द्वारा तय सीमा के भीतर है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 May 2022

छतीसगढ़ की खबरें

  रायपुर / बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम दर्री में शनिवार की देर रात शौचालय के पास रखे पैरावट में आग लग गई। हादसे में शौचालय गई 12वीं की छात्रा की जलकर मौत हो गई। पुलिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दर्री गांव की खिलेश्वरी यादव शनिवार की देर रात शौचालय गयी थी, उसी दौरान शौचालय के बगल में रखे पैरावट में भीषण आग लग गई। आग की तेज लपटें जल्द ही शौचालय तक पहुंच गयी। शौचालय के गेट पर आग की लपटों में छात्रा खिलेश्वरी बुरी तरह फंस गयी, जिसकी वजह से उसकी जिंदा जलकर मौत हो गयी। इधर परिजनों को जब आग लगने की खबर लगी तो उन्होंने आग को बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक खिलेश्वरी की मौत हो चुकी थी। वहीं घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज आगे की कार्रवाई में जुटी है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 May 2022

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