Since: 23-09-2009

 Latest News :
पाकिस्तान से होने वाले किसी भी आतंकी कृत्य के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी: राजनाथ सिंह.   कुकरमुत्तों की तरह खुल रहे फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल- केंद्रीय कृषि मंत्री.   पिछले 10 वर्षों में नारियल फाइबर उत्पादों के निर्यात में 305 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.   समुद्री क्षेत्र को लेकर जागरूकता, अंतरसंचालनीयता और समुद्री सहयोग को मजबूत करना एक स्थिर और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था की कुंजी है: राजनाथ सिंह.   केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का राज्यों को संदेश- पराली जलाने की रोकथाम के लिए युद्ध स्तर पर उतरें, अब समय बहुत कम.   आयुष मंत्रालय ने चार पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में त्वचा सम्बंधी विकारों के उपचार के लिए दिशानिर्देश जारी किए.   ग्राम कलमोड़ा के दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्र में कपास की फसल के बीच हो रही थी अवैध खेती.   जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी.   ट्रिब्यूनल ने त्योहारों के पटाखों के नियमों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने को कहा .   पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के प्रथम चरण का आधिकारिक मार्ग जारी.   DRI ने 2.604 किलो एम्फेटामाइन ड्रग जब्त की, कीमत ₹2.08 करोड़, एक महिला तस्कर गिरफ्तार।.   भोपाल में बड़ा हादसा टला, मां बेटी की बची जान.   नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीड़ित को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारा संकल्प : केंद्रीय गृह मंत्री शाह.   आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, हमारी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री साय.   विकास अनुज्ञा निरस्त होने पर CGRERA की बड़ी कार्रवाई, बिलासपुर की \'सौराष्ट्र\' रियल एस्टेट परियोजना का रेरा पंजीयन निरस्त.   जशपुरनगर में 11.83 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा हाईटेक बस स्टैंड.   किसानों ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को गन्ना भेंटकर किया अभिनंदन.   मुख्यमंत्री साय ने की मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा.  

देश की खबरें

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित रक्षा सम्मेलन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमला और सर्जिकल स्ट्राइक केवल सैन्य अभियान नहीं थे, बल्कि ये आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में आए निर्णायक बदलाव के प्रतीक थे, जो राजनयिक निंदा से आगे बढ़कर आतंकवाद के उन्मूलन के उद्देश्य से ठोस एवं सक्रिय कार्रवाई पर केंद्रित है। सीमा पार आतंकवाद के संबंध में भारत के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से होने वाले किसी भी आतंकवादी कृत्य का और भी कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विचारधारा संवाद, सह-अस्तित्व और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करती है और शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से अधिकांश आतंकवादियों का जीवनकाल घटकर एक वर्ष से भी कम हो गया है और सुरक्षा बलों ने भारत के खिलाफ हथियार उठाने के एक वर्ष के भीतर ही उन्‍हें ढेर कर दिया है।शांति बनाए रखने के लिए शक्ति और क्षमता को आवश्यक बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति की आशा रखता है, लेकिन राष्ट्र की रक्षा के लिए कभी-कभी आवश्यक हो जाने वाले युद्ध के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है, फिर भी हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हमारा लक्ष्य एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो शांति की वकालत करते हुए भी सुरक्षा के मामले में सतर्क रहे और अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो। बदलते सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए  राजनाथ सिंह ने हाइब्रिड युद्ध, उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध और अति-युद्ध के मौजूदा दौर में सतर्कता बरतने तथा हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डिजिटल युग में सुरक्षा खतरों की बढ़ती जटिलता को उजागर करते हुए '5डी सुरक्षा खतरे' के रूप में डिसइन्फॉर्मेशन (दुष्प्रचार), डीस्टेबलाइजेशन (अस्थिरता), डिसरप्शन (व्यवधान), डिसेप्‍शन (छल) और डिस्ट्रक्शन (विनाश) की पहचान की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का स्वरूप अब संगठित समूहों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ‘अकेले हमलावरों’ और ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ जैसे नए खतरे भी उभर रहे हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे व्यक्तियों की पहचान करना और संभावित आतंकवादी हमलों को समय रहते रोकना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। रक्षा मंत्री ने हाल ही में एक सह-पायलट द्वारा कथित तौर पर यात्री विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने के प्रयास और कैप्टन स्मित मच्छार द्वारा एक बड़े आतंकी हमले को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने अकेले हमला करने वाले आतंकवादियों से उत्पन्न खतरे को उजागर किया और यह भी दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति का साहस और प्रतिबद्धता नफरत से प्रेरित लोगों की योजनाओं को विफल कर सकती है। एक सतर्क और साहसी व्यक्ति पूरे आतंकी षड्यंत्र को नाकाम कर सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता के साथ-साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। राजनाथ सिंह ने रक्षा तैयारियों पर 'हार्ड पावर' और 'सॉफ्ट पावर' के संयोजन की आवश्यकता पर बल दिया और 'स्मार्ट शक्ति' की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा रणनीतियों में सटीक निर्देशित हथियारों और निष्क्रिय गोला-बारूद को किफायती हथियारों के साथ, मानवीय बुद्धिमत्ता को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ और उन्नत प्रणालियों को कम लागत वाली, सुदृढ़ और अनुकूलन प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत करना आवश्यक है ताकि सुरक्षा संबंधी उभरती चुनौतियों का समाधान किया जा सके। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए अनुसंधान, विकास और नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए, राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार ने आईडेक्‍स, आईडेक्‍स प्राइम और अदिति योजना जैसी पहलों के माध्यम से स्टार्टअप्स, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम तथा युवा नवोन्मेषकों के लिए अवसर सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप्स और एमएसएमई से  2,400 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को मंजूरी दी है और नई प्रौद्योगिकी विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृत किया है। मार्च 2026 तक, आईडेक्‍स  ने 676 स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों को शामिल किया था और 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने में सहायता की थी। 2018 की तुलना में रक्षा स्टार्टअप्स का इकोसिस्टम बढ़कर अब 2,000 से अधिक हो गया है, जिसमें युवा उद्यम ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और अन्य उन्नत क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा औद्योगिक तंत्र के विस्तार पर कहा कि रक्षा उत्पादन अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम, निजी उद्योग, 16,000 से अधिक एमएसएमई, आपूर्ति इकाइयां और नवाचार केंद्र सभी इस क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओएफबी के निगमीकरण से घाटे में चल रही संस्थाएं अब लाभ कमाने वाले उद्यमों में परिवर्तित हो गई हैं। सार्वजनिक और निजी हितधारकों का बढ़ता नेटवर्क भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार है। रक्षा खरीद में हुए सुधारों पर  राजनाथ सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र का आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण हो रहा है, जिसमें अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही शामिल है। गोला-बारूद निर्माण में हुई प्रगति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 अब स्वदेशी रूप से उत्पादित किए जाते हैं, जो इस मामले में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट के निर्यात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप राष्ट्रीय मानक स्थापित करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन योजना के कार्यान्वयन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन के बारे में भी बात की और इन्हें रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम बताया। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन का समापन इस विश्वास के साथ किया कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह 'विकसित भारत' बन जाएगा और प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था तथा रक्षा सहित सभी क्षेत्रों में विश्व को नेतृत्व प्रदान करेगा।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 October 2026

देश की खबरें

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है जहां छोटे-बड़े सभी देश अपने फैसले खुद ले सकें, अपने हितों की रक्षा कर सकें और शांतिपूर्ण तरीके से विकास कर सकें। उन्होंने विश्वास कायम करने, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और उभरती व पारंपरिक “सीमाहीन चुनौतियों” से निपटने के लिए संवाद के रास्ते खुले रखने का आह्वान किया। वे 14 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (एमपी-आईडीएसए) में आयोजित पहले दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) - भारत रक्षा थिंक टैंक फोरम को संबोधित कर रहे थे।रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान देश शांति, स्थिरता, समृद्धि और एक खुले एवं समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समान हित साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) एवं महासागर (क्षेत्र में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) की परिकल्पना खुले और बहुध्रुवीय सहयोग की वकालत करती है, और देश आसियान के नेतृत्व वाले उन तंत्रों के माध्यम से इन्हें एकीकृत करता है जो उसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र की परिकल्पना का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, समुद्र में होने वाली कार्रवाइयों से उत्पन्न दबाव और अनिश्चितता के साथ-साथ आतंकवाद, साइबर अपराध, समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध तरीके से मछली पकड़ना, जलवायु संबंधी आपदाओं और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जोखिम जैसे खतरों के कारण क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अकेले इन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता।राजनाथ सिंह ने मतभेदों को विवाद बनने से पहले ही शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया और एक ऐसी क्षेत्रीय व्यवस्था की वकालत की जहां देश किसी पक्ष में शामिल हुए बिना एक साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा, “भारत का मानना ​​है कि सुरक्षा तभी मजबूत होती है जब देश मिलकर क्षमता विकास करते हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करते हैं और संवाद के माध्यम से विश्वास बनाए रखते हैं।” रक्षा मंत्री ने भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सदियों पुराने घनिष्ठ संबंधों पर प्रकाश डाला, जो साझा इतिहास, संस्कृति, व्यापार और विचारों पर आधारित हैं। उन्होंने दोहराया कि एक्ट ईस्ट पॉलिसी इस क्षेत्र के साथ एक समान भागीदार के रूप में काम करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा, “भारत का दृष्टिकोण और आसियान का हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर नजरिया एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। हमें सहयोग को मजबूत करना चाहिए, न कि क्षेत्रीय मंचों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करनी चाहिए।” राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित रखना एक साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि ये सभी एक दूसरे से जुड़े समुद्री क्षेत्र का हिस्सा हैं, जो व्यापार, ऊर्जा, लोगों और आवश्यक वस्तुओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र को लेकर जागरूकता, अंतर-संचालनीयता और समुद्री सहयोग को मजबूत करना एक स्थिर और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने की कुंजी है।रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि चूंकि 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में नामित किया गया है, इसलिए यह साझा हितों को व्यावहारिक कार्रवाई में बदलने का अवसर है। उन्होंने कहा, “हमें समुद्र से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुधार करना चाहिए, अपनी नौसेनाओं तथा तटरक्षक बलों के बीच सहयोग को मजबूत करना चाहिए और आपात स्थितियों में मिलकर समाधान पर काम करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। हमें अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध तरीके से मछली पकड़ने और अन्य खतरों के खिलाफ भी काम करना चाहिए।” राजनाथ सिंह ने रक्षा प्रौद्योगिकी को एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर क्षमताएं और अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियां तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। हाल के संघर्षों से यह स्पष्ट हो गया है कि अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन भी महंगी रक्षा प्रणालियों को चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने व्यावहारिक, किफायती और अनुकूलनीय समाधानों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत का मानना ​​है कि नवाचार कुछ बड़े संगठनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्टार्ट-अप, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और छोटी कंपनियां सभी इसमें योगदान दे सकती हैं। भारत की 'इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स)' और 'टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ)' जैसी पहलों ने हमारी रक्षा आवश्यकताओं के लिए नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग करने का मार्ग प्रशस्त किया है।” उन्होंने ड्रोन-रोधी प्रणालियों, साइबर रक्षा, समुद्री निगरानी और आपदा राहत जैसे स्पष्ट रूप से परिभाषित समस्याओं पर नवप्रवर्तकों के साथ मिलकर काम करने के तरीकों का पता लगाने का आह्वान किया।राजनाथ सिंह ने संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, साझा परीक्षण अवसरों, युवा शोधकर्ताओं के बीच आदान-प्रदान और सावधानीपूर्वक तैयार की गई नवाचार चुनौतियों का आह्वान किया। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के सहयोग में संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा, बौद्धिक संपदा का सम्मान और प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारीपूर्ण साझाकरण सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, \"हमारा लक्ष्य उपयोगी क्षमताओं का विकास करना और हमारे देशों के बीच विश्वास को मजबूत करना होना चाहिए।\" रक्षा औद्योगिक सहयोग के विषय पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत गश्ती पोतों, रडारों, वायु रक्षा प्रणालियों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोनों और अन्य प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में आसियान साझेदारों के साथ सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए तैयार है, जो प्रत्येक देश की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप होगा। उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' पहल का उद्देश्य घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है, लेकिन आत्मनिर्भरता का मतलब अकेले काम करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पहल से विश्वसनीय साझेदारों को एक साथ उपकरण डिजाइन करने, बनाने, रखरखाव करने और सुधार लाने के अवसर मिल सकते हैं।राजनाथ सिंह ने सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव, मरम्मत और पुनर्निर्माण, प्रशिक्षण और दीर्घकालिक तकनीकी सहायता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं से स्थानीय कौशल का विकास हो सकता है, उद्योग को समर्थन मिल सकता है और आपूर्ति श्रृंखलाएं अधिक विश्वसनीय बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “हमारे शोधकर्ताओं को यह गहराई से समझने की जरूरत है कि ऐसी साझेदारियों को सफल बनाने के लिए क्या आवश्यक है: स्पष्ट आवश्यकताएं, विश्वसनीय बिक्री पश्चात सहायता, उचित तकनीकी सुरक्षा उपाय, जिम्मेदारियों और लाभों का उचित बंटवारा, और स्थानीय कंपनियों एवं कुशल श्रमिकों के लिए अवसर। हमारा लक्ष्य स्थायी साझेदारियां होनी चाहिए, न कि एक बार के लेन-देन।” प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) रक्षा वार्ता का नियमित हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि चक्रवात, बाढ़, समुद्र स्तर में वृद्धि और चरम मौसम बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, व्यापार को बाधित कर सकते हैं और जीवन एवं आजीविका को खतरे में डाल सकते हैं। उन्होंने कहा, \"हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं, सर्वोत्तम तरीकों को साझा कर सकते हैं और संकट आने से पहले समन्वय में सुधार कर सकते हैं।\"थिंक टैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकारों को अच्छे विश्लेषण की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें ऐसे विचारों की भी आवश्यकता है जिन्हें साकार रूप दिया जा सके। उन्होंने मंच से कुछ व्यावहारिक परिणामों का सुझाव दिया, जिनमें समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों, उभरती प्रौद्योगिकियों, आपदा प्रतिक्रिया और रक्षा-उद्योग सहयोग पर भारत-आसियान संयुक्त अनुसंधान एजेंडा का विकास; फेलोशिप, विजिटिंग प्रोग्राम और संयुक्त प्रकाशनों के माध्यम से युवा विद्वानों सहित शोधकर्ताओं के बीच नियमित आदान-प्रदान; समुद्री आपदा प्रतिक्रिया पर एक टेबलटॉप अभ्यास, ड्रोन-रोधी समाधानों पर एक संयुक्त अध्ययन, या सुरक्षित समुद्री सूचना साझाकरण पर एक शोध परियोजना जैसी कुछ प्रायोगिक परियोजनाओं की पहचान; औपचारिक बैठकों के बीच चर्चा जारी रखने के लिए शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए ट्रैक 1.5 और ट्रैक 2 संवादों को बढ़ावा देना; और सिफारिशों का एक संक्षिप्त सेट तैयार करना, उन्हें आगे बढ़ाने में सक्षम संस्थानों की पहचान करना और भविष्य की बैठक में प्रगति की समीक्षा करना शामिल है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 14 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल।  झाबुआ में 99 क्विंटल से अधिक वजन के गांजे के पौधे जब्त किए गए हैं। जिनकी अनुमानित कीमत 9 करोड़ 42 लाख रूपए से अधिक बताई जा रही। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में प्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध खेती, तस्करी एवं कारोबार के विरुद्ध पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस महानिरीक्षक इंदौर जोन (ग्रामीण)  अनुराग और पुलिस उपमहानिरीक्षक इंदौर रेंज (ग्रामीण)  मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में तथा पुलिस अधीक्षक झाबुआ  देवेंद्र पाटीदार के नेतृत्व में झाबुआ पुलिस ने ग्राम कलमोड़ा के दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्र में कपास की फसल के बीच की जा रही अवैध गांजा खेती का पर्दाफाश करते हुए तीन अलग-अलग प्रकरणों में 15,609 गांजे के पौधे जब्त किए हैं। इन पौधों का कुल वजन 99 क्विंटल 16 किलो 427 ग्राम तथा अनुमानित कीमत 9 करोड़ 42 लाख रुपये है। तीनों प्रकरणों में एनडीपीएस एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है। *ग्राम कलमोड़ा में पुलिस ने तीन स्थानों पर की कार्रवाई* चौकी पारा एवं थाना कोतवाली पुलिस को ग्राम कलमोड़ा में पहाड़ी, तलहटी एवं दुर्गम क्षेत्रों में कपास की फसल के बीच में अवैध गांजे की खेती किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने क्षेत्र में दबिश देकर तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से उगाए गए गांजे के पौधों को जब्त किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नशामुक्त मध्‍यप्रदेश के संकल्प को साकार करने के लिए मादक पदार्थों की अवैध खेती एवं तस्करी के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री  दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में आगामी 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी के पावन अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन (शिवधाम) से भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या (रामधाम) तक प्रारंभ होने वाली ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के प्रथम चरण का आधिकारिक मार्ग जारी कर दिया गया है। प्रथम चरण की पदयात्रा 20 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक मध्यप्रदेश के उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़ एवं गुना जिलों के विभिन्न नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। यात्रा का शुभारंभ 20 अक्टूबर को उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन एवं पूजन-अर्चन के साथ होगा। इस अवसर पर नृसिंह घाट के समीप बालाजी गार्डन में विश्व कल्याणार्थ असंख्य पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण, पूजन-अभिषेक, कन्या भोज एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात  दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में पदयात्रा प्रारंभ होगी। प्रथम चरण का तारीखवार यात्रा मार्ग   - 20 अक्टूबर: उज्जैन से पदयात्रा का शुभारंभ, रात्रि विश्राम तराना रोड, उज्जैन। - 21 अक्टूबर: उज्जैन से ताजपुर जोड़ होते हुए सिंदुरिया। - 22 अक्टूबर: सिंदुरिया से तराना। - 23 अक्टूबर: तराना से सिद्धिपुर होते हुए देवाखेड़ा-जूनापानी जोड़। - 24 अक्टूबर: देवाखेड़ा से करेड़ी माताजी मंदिर होते हुए शाजापुर। - 25 अक्टूबर: शाजापुर से पनवाड़ी। - 26 अक्टूबर: पनवाड़ी से सारंगपुर। - 27 अक्टूबर: सारंगपुर से तुकोगंज होते हुए गुलावता। - 28 अक्टूबर: गुलावता से खजनेर। - 29 अक्टूबर: खजनेर से करेड़ी। - 30 अक्टूबर: करेड़ी से राजगढ़। - 31 अक्टूबर: राजगढ़ से कालीपीठ। - 1 नवंबर: कालीपीठ से नयापुरा जोड़। - 2 नवंबर: नयापुरा जोड़ से चाचौड़ा होते हुए बीनागंज। - 3 नवंबर: बीनागंज से घाटाखेड़ी। - 4 नवंबर: घाटाखेड़ी से सागर ग्राम। - 5 नवंबर: सागर ग्राम से पाटई आश्रम, राघौगढ़। 5 नवंबर को प्रथम चरण की पदयात्रा पाटई आश्रम पहुंचने के पश्चात दीपावली पर्व के अवसर पर पांच दिवसीय अवकाश रहेगा। सत्य, धर्म, न्याय और स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेगी यात्रा ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल आदर्शों सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा और स्वाभिमान के प्रति जनजागरण करना तथा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के दान एवं चढ़ावे के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को जन-जन तक पहुंचाना है। यात्रा के दौरान विभिन्न नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों, धर्मावलंबियों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद किया जाएगा। यात्रा के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, धार्मिक आस्था के सम्मान और सत्य एवं न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया जाएगा। यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के आयोजकों ने सभी सनातन धर्मावलंबियों, संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, मातृशक्ति एवं आम नागरिकों से अपने-अपने क्षेत्रों में यात्रा का स्वागत करने तथा सत्य, धर्म, न्याय और स्वाभिमान के इस संकल्प में सहभागी बनने का सादर आह्वान किया है।  

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे मिले घावों पर मरहम लगाना, पीड़ितों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब हमें नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संकल्प को पूरा करने में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। *नक्सलवाद समाप्त हुआ, अब उसकी पीड़ा और निशानियों को भी मिटाना है :  अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की उस पीड़ा का परिचय देती है, जिसे यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया। इससे बड़ा मानवाधिकारों का हनन कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देने से पाँच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी। हमें इन घावों पर मरहम लगाना होगा। नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना होगा और उनके सम्मानपूर्वक जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि दिव्यांग भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन में नई खुशियाँ लाई जा सकती हैं। इस सेवा कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और भारतीय जैन संघ सहित अनेक संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। *बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार से बदल रही बस्तर की तस्वीर* केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्ला नार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं तथा भय का वातावरण रहता था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। बस्तर ओलंपिक ने युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। वहीं बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास हुआ है। शाह ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। पाँच दशकों तक जिन क्षेत्रों तक आवश्यक सुविधाएँ नहीं पहुँच सकीं, वहाँ अब आधारभूत अधोसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हो रहा है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 15 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में यात्री सुविधाओं के विस्तार और सार्वजनिक परिवहन अधोसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय की पहल पर जिला मुख्यालय जशपुरनगर में 11 करोड़ 83 लाख 62 हजार रुपये की लागत से हाईटेक बस स्टैंड का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया जारी है। लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह आधुनिक बस टर्मिनल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नया स्वरूप देगा। लंबे समय से आधुनिक बस स्टैंड की प्रतीक्षा कर रहे जिलेवासियों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण सौगात साबित होगी।’लगभग तीन एकड़ में बनेगा हाईटेक बस स्टैंड, 40 बसों तक के ठहराव की होगी सुविधा’    जशपुरनगर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित पुराने मवेशी बाजार परिसर में हाईटेक बस स्टैंड का निर्माण प्रस्तावित है। लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले इस आधुनिक बस टर्मिनल में एक साथ 35 से 40 बसों के खड़े होने की व्यवस्था होगी। इससे बसों के आवागमन और ठहराव को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।    जशपुर जिला मुख्यालय का बस स्टैंड जिले के प्रमुख परिवहन केंद्रों में शामिल है। यहां प्रतिदिन 100 से अधिक बसों का आवागमन होता है और पांच हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। यहां से जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी राज्यों झारखंड, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित अन्य स्थानों के लिए बस सेवाएं संचालित होती हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त बस स्टैंड की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नए बस स्टैंड के निर्माण से इस आवश्यकता की पूर्ति होगी। ’वेटिंग हॉल, लिफ्ट और डिजिटल सूचना स्क्रीन सहित मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं’    प्रस्तावित हाईटेक बस स्टैंड को यात्रियों की सुविधा और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा। यहां आधुनिक यात्री प्रतीक्षालय, सुव्यवस्थित वेटिंग हॉल, टिकट काउंटर, लिफ्ट और आधुनिक शौचालय सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यात्रियों को बसों के आगमन और प्रस्थान की जानकारी आसानी से मिल सके, इसके लिए डिजिटल सूचना स्क्रीन लगाने की भी योजना है।    बस स्टैंड परिसर में 40 दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है। इससे यात्रियों को आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त इस बस टर्मिनल से विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को सहूलियत होगी।’ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन होगा अधिक सुगम’    जशपुरनगर जिला मुख्यालय होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, रोजगार और शासकीय कार्यों के लिए यहां पहुंचते हैं। आधुनिक बस स्टैंड के निर्माण से इन यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी। बसों के व्यवस्थित ठहराव और संचालन से शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने में भी मदद मिलेगी।    नए बस टर्मिनल के विकसित होने से जशपुरनगर की परिवहन अधोसंरचना मजबूत होगी और जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही पड़ोसी राज्यों से आने-जाने वाले यात्रियों को भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।’कुनकुरी और पत्थलगांव में भी बनेंगे आधुनिक बस स्टैंड’    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के विभिन्न नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। जशपुरनगर के साथ कुनकुरी और पत्थलगांव में भी अत्याधुनिक बस स्टैंड निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।    इसी क्रम में बंदरचुआ और दुलदुला में एक-एक करोड़ रुपये की लागत से बस स्टैंड का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से जिले में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।

Madhya Bharat Madhya Bharat 14 October 2026

Video
Advertisement
x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.