Since: 23-09-2009

 Latest News :
कोयला मंत्रालय ने \'विशेष अभियान 6\' के तहत ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित एक विशेष अभियान चलाया.   ECI ने राजनीतिक प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के प्रोटोकॉल पर कहा कल शाम 4 बजे से पहले किसी भी राजनीतिक दल ने मिलने के लिए समय नहीं मांगा था.   भारत-बांग्लादेश सीमा पर सोने की तस्करी के खिलाफ डीआरआई ने की कार्रवाई में 4 गिरफ्तार, 8.3 किलोग्राम पकड़ा विदेशी सोना.   वीबी–जी राम जी के तहत 375 स्वीकार्य कार्यों की अधिसूचना जारी.   केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने बैलेट पेपर से मतदान की मांग पर साधा निशाना.   विंडरजी इंडिया\' का 8वां संस्करण 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा.   कोरोना योद्धाओं को सम्मान प्रमाण पत्र नहीं, रोजगार दे सरकार: उमंग सिंघार.   मध्यप्रदेश पुलिस में आरक्षक के 1,000 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी.   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में सेवा ज्योति कलश यात्रा को किया संबोधित.   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे.   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 चीते व्योम और नीरा नौरादेही टाइगर रिजर्व में किये विमुक्त.   भोपाल में सेना दिवस पर होंगे भव्य और आकर्षक आयोजन.   43,600 करोड़ की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं, कौशल विकास समझौता और वैश्विक साझेदारियां.   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित : मुख्यमंत्री साय.   सेवा संकल्प के तहत नुक्कड़ नाटक से दिखाई प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों की यात्रा.   अरपा को प्रदूषण से बचाने 70 नालों के उपचार की बनेगी समग्र कार्ययोजना.   ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी, जोरंडाझरिया को मिला नया सामुदायिक भवन.   संकट की घड़ी में बाढ़ प्रभावितों के साथ मजबूती से खड़ी छत्तीसगढ़ सरकार.  

देश की खबरें

नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय ने विशेष अभियान 6 के संबंध में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) के दिशानिर्देशों के अनुसार, 6 अक्टूबर, 2026 को सभी कोयला क्षेत्र (फील्ड) कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक विशेष अभियान चलाया। इस विशेष अभियान में 74 फील्ड कार्यालयों के 2152 कर्मचारियों ने भाग लिया। संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में ई-कचरा प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला कोयला मंत्रालय (एमओसी) के सम्मेलन कक्ष में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सीपीसीबी में वैज्ञानिक-बी, सुश्री रिया सोनी ने ई-कचरा प्रबंधन पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें जिम्मेदारी से ई-कचरा प्रबंधन करने और प्रबंधन के प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया।इस कार्यशाला का उद्देश्य कोयला मंत्रालय और इसके केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरा) को व्यवस्थित रूप से अलग करने और उनके उचित निपटान की महत्वपूर्ण आवश्यकता के बारे में जागरूक करना था। इस कार्यशाला में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया जबकि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और इसकी सहायक कंपनियों, एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल), सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल), कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) और कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) के अधिकारी इसमें आभासी रूप से (वर्चुअल तरीके से) शामिल हुए। सीसीओ में प्रश्नोत्तरी (क्विज़) प्रतियोगिता: दिल्ली में कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) कार्यालय ने ई-कचरा प्रबंधन' विषय पर एक क्विज़ प्रतियोगिता आयोजित की।ई-कचरा कियोस्क: विशेष अभियान 6 के मुख्य उद्देश्य के अनुरूप, जमीनी स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक कचरे को व्यवस्थित रूप से इकट्ठा करने, अलग-अलग करने और ज़िम्मेदारी से उसका निपटान करने के लिए अलग-अलग फील्ड कार्यालयों में ई-कचरा कलेक्शन वर्कस्टेशन (ई-कचरा कियोस्क) लगाए गए।

Madhya Bharat Madhya Bharat 7 October 2026

देश की खबरें

नई दिल्ली। विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन(ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत स्वीकार्य कार्यों की ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘ अनुसूची को अधिसूचित कर दिया है, जिसके अंतर्गत नए ग्रामीण कार्य ढांचे के तहत 375 स्वीकार्य कार्य प्रदान किए गए हैं।विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से कार्यों की योजना।वीबी-जी राम जी के तहत, स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से कार्यों की योजना बनाई जाएगी और ग्राम सभा द्वारा उन्हें अनुमोदित किया जाएगा। ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्टैक’ के माध्यम से डिजिटल निगरानी तंत्र, केंद्र, राज्य और स्थानीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले निवेश के अभिसरण को सुगम बनाएगा तथा कार्यों के दोहराव से बचने में भी सहायता प्रदान करेगा। इस तरह, नई अनुसूची का उद्देश्य रोजगार सृजन को जल सुरक्षा, टिकाऊ ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका सृजन, जलवायु अनुकूलन और समावेशी विकास के साथ जोड़ना है, जिससे विकसित भारत@2047 के विजन में योगदान दिया जा सके। नई अनुसूची पिछले ढाँचे के तहत निर्धारित 266 कार्यों की तुलना में 41 प्रतिशत का विस्तार दर्शाती है। इन कार्यों को चार विषयगत स्तंभों—जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा तथा अत्यधिक मौसम की घटनाओं और आपदा तैयारी के लिए विशेष कार्य- के तहत पुनर्गठित किया गया है। नया ढांचा सिर्फ परिसंपत्तियों के पारंपरिक प्रकारों की सूची तक सीमित रहने के बजाय, मजदूरी रोजगार को टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण और मापनीय विकास परिणामों के साथ जोड़ने का प्रयास करता है। प्रत्येक कार्य की शुरुआत विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत जमीनी स्तर से होने वाली विकेंद्रीकृत नियोजन प्रक्रिया के माध्यम से होगी, जिसे ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाएगा और इसे ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्टैक’ के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा। 128 कार्यों के साथ जल सुरक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा मिला जल सुरक्षा स्तंभ में 128 कार्य शामिल हैं, जो चारों श्रेणियों में सर्वाधिक हैं। इनमें चेक डैम, गली प्लग, भूमिगत बांध, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन कुएं, नदियों, छोटी नदियों और नालों का पुनरुद्धार, जलभराव वाली भूमि का सुधार तथा खेतों में जल-वितरण चैनलों का जीर्णोद्धार शामिल है। इस अनुसूची में ड्रिप सिंचाई, फव्वारा प्रणाली, छतों पर वर्षा जल संचयन और टांकों के साथ-साथ जल संरक्षण और सिंचाई के लिए बर्फ-स्तूपों तथा कृत्रिम हिमनदों जैसे नए उपायों को भी शामिल किया गया है। मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए 111 कार्य मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्तंभ में 111 कार्य शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक नागरिक और बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करना है। इनमें सौर स्ट्रीट लाइटिंग, अपशिष्ट से संपदा रीसाइक्लिंग संयंत्र, ग्रे-वॉटर उपचार इकाइयां, कचरा पृथक्करण शेड, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर, बहुउद्देशीय युवा केंद्र, सामुदायिक सुविधाएं तथा सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का निर्माण शामिल है। इस ढांचे में जल जीवन मिशन की जलापूर्ति बुनियादी ढांचे की मरम्मत और रखरखाव के साथ-साथ ग्रामीण पार्कों, पैदल पथों और ग्राम स्तर की अन्य सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है।ग्रामीण आजीविका और मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए 98 कार्य नए ढांचे में आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचे पर विशेष रूप से अधिक जोर दिया गया है, जिसके अंतर्गत 98 स्वीकार्य कार्य शामिल हैं। इस श्रेणी में कृषि-प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से बुनियादी ढांचा, सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग इकाइयां, शीत भंडारण सुविधाएं, मिनी आटा मिलें, कृषि बाजार परिसर, डेयरी अवसंरचना, मशरूम उत्पादन शेड, रेशम उत्पादन शेड, पॉली-हाउस तथा जलीय कृषि संरचनाएं शामिल हैं। इसमें स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के लिए बुनियादी ढांचा का प्रावधान किया गया है, जिसमें एसएचजी कार्यशालाएं, शी मार्ट और संघ भवन, साथ ही प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र शामिल है। आजीविका से संबंधित कार्यों का हिस्सा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जो नए ढांचे के तहत कुल स्वाकार्य कार्यों का 26 प्रतिशत है, जबकि पिछले ढांचे में यह 1.1 प्रतिशत था। आपदा तैयारी और जलवायु अनुकूलन के लिए 38 कार्य पहली बार, ग्रामीण कार्य ढांचे में आपदा तैयारी और चरम मौसम की घटनाओं के लिए एक समर्पित श्रेणी को शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत 38 कार्य निर्धारित किए गए हैं। इनमें बाढ़ राहत आश्रय स्थल, सुरक्षा दीवारें, तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, बाढ़ सुरक्षा कार्य, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन, तथा जंगल की आग से निपटने के उपाय के रूप में फायर लाइन और ईंधन-बफर क्षेत्र शामिल हैं। इस श्रेणी का उद्देश्य बाढ़, चक्रवात, तूफान, सूखा, भूस्खलन, जंगल की आग और अन्य चरम मौसम की घटनाओं से ग्रामीण समुदायों और परिसंपत्तियों को मजबूत बनाना है। किसानों, कमजोर परिवारों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं पर विशेष ध्यान इस अनुसूची में कृषि, कमजोर परिवारों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं पर विशेष जोर दिया गया है। कुल 181 कार्य कृषि और संबद्ध गतिविधियों से संबंधित हैं, जिनमें 52 व्यक्तिगत लाभार्थी कार्य शामिल हैं। इनमें जल, भूमि, वृक्षारोपण, पशुधन और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों से संबंधित कार्य शामिल हैं, जो किसानों को प्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान कर सकते हैं। अंत्योदय/कमजोर परिवारों के लिए 107 कार्य निर्धारित किए गए हैं, जिनमें 68 व्यक्तिगत लाभार्थी कार्य शामिल हैं। इनमें आवास, स्वच्छता, ऊर्जा, सिंचाई, वृक्षारोपण, पशुधन आश्रय स्थल तथा परिवार स्तर की अन्य परिसंपत्तियों से संबंधित कार्य शामिल हैं। इस ढांचे में नारी शक्ति से संबंधित 36 कार्य और युवा शक्ति से संबंधित 36 कार्य भी शामिल हैं। इनमें महिला समूहों, स्वयं सहायता समूहों(एसएचजी) और संघों के लिए बुनियादी ढांचा, युवा केंद्र, कौशल विकास तथा उद्यम से जुड़े बुनियादी ढांचे शामिल हैं।

Madhya Bharat Madhya Bharat 6 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल। कोरोना के सबसे कठिन दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर प्रदेशवासियों की सेवा करने वाले मध्यप्रदेश के लगभग 4 हजार से अधिक कोरोना योद्धाओं की सेवाएं 1 अप्रैल 2022 से समाप्त किए जाने का मामला एक बार फिर सामने आया है। कोरोना योद्धाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से भोपाल स्थित उनके आवास पर मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान अस्थायी स्वास्थ्यकर्मियों ने विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा की, लेकिन संकट समाप्त होते ही सरकार ने बजट का हवाला देकर उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद से ये स्वास्थ्यकर्मी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें कई तरह की आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कोरोना योद्धाओं को उनकी आवाज विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया और कहा कि जब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में मानव संसाधन की कमी है, तो कोरोना काल का अनुभव रखने वाले इन स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन कोरोना योद्धाओं ने संकट के समय प्रदेशवासियों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, उन्हें संकट खत्म होते ही बेरोजगारी के हवाले करना सरकार की कैसी कृतज्ञता है। सिंघार ने कहा कि यदि आज यही कोरोना योद्धा स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत होते, तो शायद प्रदेश में हो रही मौतों को कुछ हद तक कम किया जा सकता था। उनके पास कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव है, जिसका लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मिल सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कहा कि कोरोना योद्धाओं का सम्मान केवल प्रमाण पत्र और भाषणों से नहीं, बल्कि उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर रोजगार देने से होगा। उन्होंने मांग कि की सरकार को तत्काल इन स्वास्थ्यकर्मियों को सरकारी सेवाओं में भर्ती करने पर विचार करना चाहिए।

Madhya Bharat Madhya Bharat 7 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल। निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों और उनकी जरूरतों पर सीधे चर्चा करेंगे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : 2027 से पहले यह संवाद निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों से संपर्क बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्रों में ही नहीं है बल्कि देश की आर्थिक राजधानी भी है। यहां ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और उभरती ऊर्जा प्रौद्योगिकियों से जुड़े बड़े उद्योग समूह हैं। मध्यप्रदेश इन क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को संबंधित कंपनियों तक पहुंचा रहा है, ताकि प्रदेश में विकसित किए जा रहे औद्योगिक अवसरों को उद्योगों की जरूरत और उनकी विस्तार योजनाओं से जोड़ा जा सके। विशेष क्षेत्रों में निवेश के अवसर मुंबई संवाद में ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, नर्मदापुरम के बाबई मोहासा रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग जोन, धार के पीएम मित्र पार्क और उज्जैन के मेडिकल डिवाइसेज पार्क को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। ये परियोजनाएं अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार तैयार किए जा रहे विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का हिस्सा हैं। ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग, नर्मदापुरम में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, धार में टेक्सटाइल और गारमेंट तथा उज्जैन में मेडिकल डिवाइसेज और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उद्योगों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों में निवेश से संबंधित उद्योगों के साथ सहायक इकाइयों और स्थानीय सप्लाई चेन के विकास की संभावनाएं भी बनेंगी। निवेश के साथ रोजगार पर जोर मध्यप्रदेश सरकार का जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश में उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ें। बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ उनके सप्लायर, सहायक उद्योग, लॉजिस्टिक्स और दूसरी सेवाओं का काम भी बढ़ता है। इससे स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगी। इन बैठकों में कंपनियों की निवेश और विस्तार योजनाओं के साथ उनकी जरूरतों को भी समझा जाएगा। भूमि, बिजली, लॉजिस्टिक्स, कुशल मानव संसाधन, सप्लाई चेन, अनुमतियों और नीतिगत सहयोग जैसे विषयों पर सीधे चर्चा होगी। उद्योगपतियों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर प्रदेश की निवेश सुविधा व्यवस्था को उनकी जरूरतों के अनुरूप और बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। सरकार के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को किस तरह की सुविधाओं और सहयोग की आवश्यकता है। फार्मा और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र पर विशेष चर्चा मुंबई कार्यक्रम में फार्मास्युटिकल क्षेत्र के साथ केंद्रित राउंडटेबल मीटिंग भी होगी। इसमें मध्यप्रदेश के फार्मा और हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। उज्जैन के मेडिकल डिवाइसेज पार्क से संबंधित प्रेजेंटेशन भी उद्योग प्रतिनिधियों के दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में विशेष क्षेत्र के अनुरूप औद्योगिक अधोसंरचना तैयार करने का उद्देश्य संबंधित उद्योगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे निवेशकों को अपने क्षेत्र के अनुसार औद्योगिक आधार मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर सहायक उद्योगों और रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावना रहेगी। उद्योगों के साथ सीधे संपर्क का विस्तार मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधा संपर्क बढ़ाया है। क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों के बाद अब देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में जाकर संबंधित उद्योगों से बातचीत की जा रही है। मुंबई में भारत स्थित विदेशी मिशनों के साथ भी संवाद होगा। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों को अंतर्राष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क तक पहुंचाने और विदेशी निवेशकों को प्रदेश के क्षेत्र विशेष के अवसरों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी के भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश में भी नई औद्योगिक अधोसंरचना और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक अवसर तैयार किए जा रहे हैं। निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के साथ उद्योगों की जरूरत के अनुसार सुविधाओं और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 7 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

रायपुर। मुख्यमंत्री  साय ने सिंगापुर के विदेश मंत्री डॉ. Vivian Balakrishnan से सौजन्य भेंट की। इस दौरान भारत-सिंगापुर के मजबूत संबंधों को राज्य स्तर पर और विस्तार देने तथा निवेश, कौशल विकास, शहरी नियोजन और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ और सिंगापुर के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। 15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के साथ सीईओ राउंडटेबल मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में आयोजित सीईओ राउंडटेबल में TCS, SMBC, Tolaram Group और Agrocorp सहित 15 से अधिक वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में निवेश और भविष्य की व्यावसायिक साझेदारियों की संभावनाओं पर विस्तार से संवाद हुआ। Global Finance & Technology Network (GFTN) के साथ हुई चर्चा में प्रदेश के युवाओं को एआई और डिजिटल फाइनेंस का प्रशिक्षण देने तथा छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों और बाजारों तक पहुंच दिलाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। Aquatech Pacific Holdings Pte Ltd के साथ प्रदेश के उद्योगों के लिए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा हुई, जबकि Adroit Overseas Pte Ltd ने फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं में रुचि दिखाई। हरित विकास और पर्यटन के क्षेत्र में भी वैश्विक साझेदारी की पहल सिंगापुर यात्रा के दौरान Gardens by the Bay और Mandai Wildlife Group के साथ हुई बैठकों ने छत्तीसगढ़ में हरित विकास, जैव विविधता संरक्षण और पर्यटन के लिए सहयोग के नए रास्ते खोले हैं। Gardens by the Bay के अनुभव और विश्वस्तरीय कार्यप्रणाली का उपयोग नवा रायपुर में बॉटनिकल गार्डन विकसित करने तथा प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बेहतर और अधिक हरित सार्वजनिक स्थल तैयार करने में किया जा सकेगा। Mandai Wildlife Group के साथ नंदनवन जंगल सफारी को विश्वस्तरीय वन्यजीव पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दिशा में सहयोग से प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी तैयार होंगे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सिंगापुर यात्रा को छत्तीसगढ़ की वैश्विक निवेश यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा, “इस यात्रा ने दुनिया के सामने यह स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। हम निवेश प्रस्तावों के साथ नई साझेदारियां और आगे बढ़ने का स्पष्ट रोडमैप लेकर लौटे हैं। अब हमारी सरकार प्रत्येक निवेशक के साथ निरंतर और गंभीरता से फॉलो-अप करेगी, ताकि इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके। हमारा लक्ष्य है कि इन निवेशों से प्रदेश के युवाओं के लिए नए करियर और रोजगार के अवसर बनें तथा हमारे उद्यमियों और स्थानीय उद्योगों के लिए विकास के नए द्वार खुलें।”

Madhya Bharat Madhya Bharat 7 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज बिलासपुर नगर निगम में संचालित योजनाओं, विकास कार्यों एवं निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर कलेक्टोरेट में आयोजित बैठक में अरपा नदी को प्रदूषण से बचाने शहर के 70 छोटे-बड़े नालों के पानी के उपचार की समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए विस्तृत डीपीआर तैयार कर सभी तकनीकी पहलुओं का सूक्ष्म परीक्षण करने को कहा। कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, नगर निगम के आयुक्त  प्रकाश कुमार सर्वे और सूडा के सीईओ  सुमित अग्रवाल भी बैठक में मौजूद थे।    प्रमुख सचिव बोरा ने अरपा नदी में नालों के जरिए पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तार से जानकारी ली। निगम के अधिकारियों ने बताया कि कुल 70 छोटे-बड़े नाले अरपा नदी में मिलते हैं। प्रमुख सचिव ने बैठक में कहा कि इन नालों के जरिए दूषित पानी सीधे नदी में न पहुंचे, इसके लिए प्रभावी और दीर्घकालीन समाधान जरूरी है। नालों के पानी का समुचित उपचार कर ही नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने डीपीआर तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक नाले की स्थिति और पानी की मात्रा का आकलन कर उपचार एवं आवश्यकतानुसार ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। योजना तैयार करते समय तकनीकी व्यवहार्यता, भविष्य की जरूरतों और इसके दीर्घकालीन प्रभावों सहित सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाला समय पानी का है, इसलिए सतही जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। शहर की स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में लगातार दिखे सुधार प्रमुख सचिव ने शहर की साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए किए जा रहे प्रयासों को निरंतर बनाए रखना जरूरी है। नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे शहर की साफ-सफाई का स्तर लगातार बेहतर हो। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।    उन्होंने नगरीय निकायों में संचालित केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित योजनाओं की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए और सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। नगरीय सेवाओं से जुड़ी परियोजनाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी काम करने को कहा।  बैठक में प्रमुख सचिव ने निर्माणाधीन एजुकेशन हब नालंदा परिसर की प्रगति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि 500 लोगों की बैठक क्षमता वाले नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम तल के स्लैब का कार्य पूरा हो गया है तथा द्वितीय तल के स्लैब का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। प्रमुख सचिव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।  बोरा ने मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना और नगरीय अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर में अधोसंरचना मद के अंतर्गत कुल 542 कार्य स्वीकृत हैं। इनमें 334 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 182 प्रगतिरत हैं तथा 26 कार्य अप्रारंभ हैं। प्रमुख सचिव ने प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। 

Madhya Bharat Madhya Bharat 6 October 2026

Video
Advertisement
x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.