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परंपरा की जड़ों से आधुनिकता के शिखर तक : युगानुकूल मातृत्व का भारतीय दृष्टिकोण.   लखीसराय में अशोकधाम मंदिर के बाहर भगदड़, 7 महिलाओं की मौत.   तारापीठ के होटल में भीषण आग, 7 श्रद्धालुओं की मौत; 9 घायल.   PM मोदी बोले- नक्सलवाद कमजोर पड़ा, अब ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानकर अलग करना होगा.   भागवत बोले- युवाओं को सही दिशा मिली तो देश को होगा फायदा, वरना बढ़ सकता है सामाजिक बोझ.   यूपी में 75 जिलों में बारिश का अलर्ट, 11 नदियां उफान पर; MP के 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी.   महाकाल मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन.   बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम का जल्द ऐलान संभव, MP से 7 नेताओं के नाम चर्चा में.   नागपंचमी पर खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, 24 घंटे होंगे दर्शन.   2027 होगा युवा वर्ष, हर साल 1 लाख रोजगार पर फोकस; CM मोहन यादव ने MP के विकास का रोडमैप पेश किया.   उज्जैन में बनेगा नमो घाट, 182 फीट ऊंची होगी भगवान कृष्ण की कांस्य प्रतिमा; 244 करोड़ का टेंडर जारी.   भोपाल नगर निगम की बैठक 19 अगस्त को, खाली बिल्डिंग किराए पर देने का प्रस्ताव.   सरकारी स्कूलों की बदहाली पर Gen-Alpha की आवाज बुलंद, तालाबंदी से मार्च तक विरोध.   नवंबर से बंद DSA मशीन, आंबेडकर अस्पताल में हर महीने 75-80 मरीजों का इलाज प्रभावित.   रामगोपाल अग्रवाल से ED की पूछताछ, टुटेजा-ढेबर-त्रिपाठी कनेक्शन पर सवाल.   छत्तीसगढ़ में अग्निवीरों को पुलिस भर्ती में 10% आरक्षण, AI मिशन के लिए 500 करोड़.   कोसा साड़ी पहनकर रैंप पर उतरीं सरेंडर महिला नक्सली, हिंसा छोड़ हुनर से बनाई नई पहचान.   छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार आज भी संघर्ष में.  

देश की खबरें

  भाग–1 : मातृत्व—सृष्टि का शाश्वत सत्य और भारतीय जीवन-दर्शन का आधार शैफाली गुप्ता विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित\"युगानुकूल मातृत्व\"विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक वैचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारतीय संस्कृति के मूल स्वर—मातृत्व—का पुनर्स्मरण थी। सभागार में देशभर से आए संत, विद्वान, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, नीति-निर्माता तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित थीं। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालकपूजनीय श्री मोहन भागवत जीअपने सहज, संतुलित और गहन चिंतन के साथ उपस्थित थे। पूरा सभागार एकाग्र होकर उनके प्रत्येक शब्द को आत्मसात कर रहा था। उन्हीं श्रोताओं के बीच बैठकर मुझे भी इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह कोई सामान्य व्याख्यान नहीं था। यह भारतीय जीवन-दर्शन की उस मूल चेतना का उद्घोष था, जिसने हजारों वर्षों से इस सभ्यता को दिशा दी है। आधुनिकता, तकनीक, बदलते पारिवारिक ढाँचे और वैश्विक चुनौतियों के बीच भागवत जी ने जिस स्पष्टता से मातृत्व की सनातन अवधारणा को प्रस्तुत किया, वह केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। उनके उद्बोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश था—\"मातृत्व चर्चा का विषय नहीं, जीवन का शाश्वत सत्य है।\" आज जब परिवार, विवाह, संस्कार और संबंधों पर निरंतर बहस हो रही है, तब यह वाक्य हमें उस मूल सत्य की ओर लौटाता है जिसे किसी तर्क की आवश्यकता नहीं होती। जैसे सूर्य का प्रकाश सिद्ध करने के लिए प्रमाण नहीं चाहिए, वैसे ही मातृत्व की महिमा किसी बहस की मोहताज नहीं। सृष्टि के प्रारंभ से लेकर आज तक जीवन की प्रत्येक धारा मातृत्व के माध्यम से ही प्रवाहित हुई है। भारतीय संस्कृति ने मातृत्व को केवल जैविक प्रक्रिया नहीं माना। यहाँ मातृत्व सृजन है, संरक्षण है, संवर्धन है, करुणा है, त्याग है और सबसे बढ़कर संस्कार है। यही कारण है कि हमारी परंपरा ने केवल जन्म देने वाली स्त्री को ही माता नहीं कहा, बल्कि पृथ्वी कोमातृभूमि, भाषा कोमातृभाषा, गंगा कोगंगा माता, गौ कोगौमाताऔर संपूर्ण प्रकृति कोजगज्जननीका स्वरूप माना। यह दृष्टि बताती है कि जहाँ संरक्षण है, वहाँ मातृत्व है; जहाँ पोषण है, वहाँ मातृत्व है; जहाँ जीवन को आगे बढ़ाने की शक्ति है, वहीं माता का वास्तविक स्वरूप है। भागवत जी ने कहा कि सृष्टि का निर्माण, संवर्धन और पोषण मातृत्व के बिना संभव नहीं। प्रत्येक जीव की उत्पत्ति माता से होती है। प्रकृति स्वयं मातृत्व की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वह बिना किसी अपेक्षा के देती है, पोषित करती है और संतुलन बनाए रखती है। यदि मातृत्व न हो, तो केवल जन्म नहीं रुकेगा, बल्कि संवेदनाओं की पूरी परंपरा समाप्त हो जाएगी। माता : मनुष्य की प्रथम गुरु मनुष्य और अन्य जीवों में सबसे बड़ा अंतर विचार करने की क्षमता है। पशुओं में जन्म होता है, उनका व्यवहार मुख्यतः प्रकृति द्वारा संचालित होता है, किंतु मनुष्य केवल जन्म से मनुष्य नहीं बनता। उसे संस्कारों की आवश्यकता होती है, शिक्षा की आवश्यकता होती है और जीवन-दृष्टि की आवश्यकता होती है। यहीं से माता की भूमिका आरंभ होती है। बालक जब संसार में आता है, तब उसका पहला विद्यालय उसकी माँ की गोद होती है। भाषा का पहला शब्द, स्नेह का पहला अनुभव, अनुशासन का पहला संस्कार, करुणा की पहली अनुभूति और विश्वास का पहला आधार—सब कुछ माता से प्राप्त होता है। विद्यालय ज्ञान दे सकता है, विश्वविद्यालय कौशल विकसित कर सकता है, किंतु मनुष्य का चरित्र घर में ही बनता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने माता को\"प्रथम गुरु\"कहा है। माता केवल यह नहीं सिखाती कि कैसे बोलना है; वह यह भी सिखाती है कि कब मौन रहना है। वह केवल चलना नहीं सिखाती; वह यह भी सिखाती है कि किस दिशा में चलना है। वह केवल सफलता की प्रेरणा नहीं देती; वह यह भी सिखाती है कि सफलता से पहले मनुष्यता आवश्यक है। यही मातृत्व की सबसे बड़ी शक्ति है। जीवनभर का भावनात्मक आश्रय भागवत जी का एक अत्यंत मार्मिक विचार था कि मनुष्य को जीवन के प्रत्येक चरण में भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है और वह सबसे अधिक माता के पास मिलता है। बालक गिरता है तो माँ की गोद में रोता है। युवक संघर्ष करता है तो सबसे पहले माँ को याद करता है। जीवन की सफलताएँ हों या असफलताएँ, मन की पीड़ा हो या प्रसन्नता—एक स्थान ऐसा रहता है जहाँ व्यक्ति बिना किसी औपचारिकता के स्वयं को व्यक्त कर सकता है। वह स्थान माँ का हृदय है। संसार के अनेक संबंध परिस्थितियों के अनुसार बदल जाते हैं। मित्र बदलते हैं, परिचय बदलते हैं, सामाजिक दायरे बदलते हैं, किंतु माँ का स्नेह जीवनभर एक समान रहता है। यही मातृत्व की सबसे बड़ी विशिष्टता है। समाज का भविष्य मातृत्व पर निर्भर है आज विज्ञान अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक और वैश्विक संचार ने दुनिया को बदल दिया है। परंतु एक प्रश्न आज भी उतना ही प्रासंगिक है—आने वाली पीढ़ी को मनुष्य कौन बनाएगा? तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन संस्कार नहीं। मोबाइल सूचना दे सकता है, लेकिन संवेदना नहीं। विद्यालय शिक्षा दे सकता है, लेकिन चरित्र नहीं। चरित्र निर्माण की यह प्रक्रिया मातृत्व से प्रारंभ होती है। यदि माता केवल पालन-पोषण तक सीमित हो जाए और संस्कार का दायित्व समाज किसी संस्था पर छोड़ दे, तो आने वाली पीढ़ी ज्ञानवान तो हो सकती है, किंतु विवेकवान नहीं। यही कारण है कि भागवत जी ने स्पष्ट कहा कि समाज का भविष्य मातृत्व पर निर्भर करता है। एक संस्कारित माता केवल अपने बच्चे का नहीं, बल्कि आने वाले समाज का निर्माण करती है। इतिहास इस सत्य का प्रमाण है। यदि छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति और साहस दिखाई देता है तो उसके पीछे माँ जीजाबाई हैं। यदि स्वामी विवेकानंद विश्ववंदनीय बने तो उसके पीछे उनकी माता भुवनेश्वरी देवी के संस्कार हैं। यदि महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले तो उनकी माता पुतलीबाई की धार्मिकता और अनुशासन उसका आधार बने। महान व्यक्तित्व संयोग से नहीं बनते; उनके पीछे किसी माँ का मौन तप अवश्य होता है। भारतीय जीवन-दृष्टि : हम सब एक ही चेतना के अंग हैं अपने उद्बोधन में भागवत जी ने भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांत—एकात्मता—को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किया। भारतीय संस्कृति कहती है कि यह संसार केवल व्यक्तियों का समूह नहीं है। हम सब एक ही चेतना के विविध रूप हैं। बाहर से भले हम अलग दिखाई दें, भीतर से हम एक ही विराट अस्तित्व के अंग हैं। यही कारण है कि भारतीय चिंतन अधिकार से पहले कर्तव्य की बात करता है। यदि परिवार में प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने अधिकारों की माँग करेगा, तो परिवार टूट जाएगा। यदि समाज केवल अधिकारों पर चलेगा, तो संघर्ष बढ़ेगा। लेकिन यदि प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाएगा, तो दूसरों के अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाएँगे। यही भारतीय जीवन-दर्शन का मूल है। धर्म का अर्थ भी यही है—वह व्यवस्था जो समाज की धारणा करे, जो सबको जोड़कर रखे, जो व्यक्ति को स्वयं से ऊपर उठाकर समष्टि के हित में सोचने की प्रेरणा दे। इसीलिए भारतीय संस्कृति में मातृत्व केवल निजी संबंध नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। माता अपने परिवार का निर्माण करती है, परिवार समाज का निर्माण करता है और समाज राष्ट्र का निर्माण करता है। यही वह विचार है जो \"युगानुकूल मातृत्व\" को केवल महिला विमर्श नहीं रहने देता, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बना देता है।

Patrakar Shafali Gupta Shafali Gupta 24 August 2026

देश की खबरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक कमजोर किया जा चुका है, लेकिन माओवादी विचारधारा से प्रभावित लोगों से अभी भी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान कर उन्हें समाज से अलग-थलग करना होगा और देश के युवाओं को विकसित भारत के निर्माण के लिए एकजुट करना होगा। पीएम ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने दशकों तक देश के बड़े हिस्से को हिंसा की चपेट में रखा और लाखों युवाओं के सपनों को नुकसान पहुंचाया। पीएम मोदी ने नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि नागरिकों की सुरक्षा करते हुए 3,500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया गया था और आज इसकी ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने देश को खून से सराबोर किया और कई परिवारों से उनके बेटे छीन लिए। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए युवाओं को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 15 August 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सावन सोमवार और नागपंचमी के महासंयोग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अब तक करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। वहीं, साल में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और करीब चार लाख लोगों ने दर्शन किए। भारी भीड़ के चलते हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग में श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग घंटों तक भीड़ में फंसे रहे और श्रद्धालुओं ने करीब 4 घंटे लाइन में इंतजार करने की बात कही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार व्यवस्था संभालती रहीं।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 17 August 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में ध्वजारोहण कर मध्यप्रदेश के विकास का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने और युवाओं के लिए हर साल एक लाख रोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा, रोजगार, निवेश और कौशल विकास के साथ मिशन GYANII पर भी फोकस करेगी। कार्यक्रम में पुलिस बैंड समेत 22 टुकड़ियों ने परेड में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और आंतरिक सुरक्षा में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री ने किसानों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिंचित खेती अब रोजगार का बड़ा साधन बन रही है और युवाओं को उद्यानिकी व आधुनिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। प्रदेश में संतरा, केला, अंगूर, सीताफल, सब्जियों और मसालों के साथ ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है और प्रदेश में दूध का दैनिक संकलन करीब 12 लाख लीटर तक पहुंच गया है।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 15 August 2026

छतीसगढ़ की खबरें

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के खिलाफ अब छात्र भी खुलकर आवाज उठा रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने में रायगढ़, महासमुंद, बालोद, धमतरी और कोंडागांव समेत कई जिलों में विद्यार्थियों ने तालाबंदी, घेराव और मार्च कर अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कहीं जर्जर स्कूल भवन के कारण पंचायत भवन में पढ़ाई हो रही है, तो कहीं शिक्षकों की कमी से विषयवार कक्षाएं प्रभावित हैं। प्रदेश में 1800 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। शिक्षकों की कमी के साथ स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 5500 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि करीब 7260 स्कूलों में छात्रों के लिए शौचालय उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण नई पीढ़ी अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हुई है। छात्रों का विरोध केवल अनुशासन का मुद्दा मानने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 17 August 2026

छतीसगढ़ की खबरें

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को 10% आरक्षण देने की घोषणा की। साथ ही राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपए के AI मिशन को मंजूरी देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव को DSP बनाने का भी ऐलान किया। समारोह में BSF, CRPF, ITBP, CISF और SSB समेत 17 टुकड़ियों ने परेड में हिस्सा लेकर सलामी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं, खिलाड़ियों और तकनीक के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। ज्ञानेश्वरी यादव को पुलिस सेवा में नियुक्ति देने का फैसला खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, अग्निवीरों के लिए पुलिस भर्ती में आरक्षण से सैन्य सेवा पूरी करने वाले युवाओं को राज्य पुलिस में अवसर मिलने की उम्मीद है। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विकास योजनाओं और सरकार की प्राथमिकताओं के साथ शिक्षक भर्ती से जुड़े ऐलान भी किए। दुर्ग में डिप्टी सीएम अरुण साव ने ध्वजारोहण कर समारोह में हिस्सा लिया।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 15 August 2026

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