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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए कल विजयादशमी से लागू, भारतीय निर्यात पर जीरो ड्यूटी, 20 अरब डॉलर निवेश का रास्ता साफ.   घर बैठे मिलेगी खाद-बीज और योजनाओं की जानकारी, किसानों के लिए शुरू हुआ \'एग्री वेलफेयर पोर्टल\'.   विजयादशमी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को दी बधाई.   आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित विधायी घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण.   पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन सेशेल्स से रवाना, समुद्री सहयोग को और प्रगाढ़ किया.   MY भारत- विकसित भारत के निर्माण के लिए रचनात्मक युवा शक्ति तैयार करने का बड़ा प्लेटफॉर्म है- शिवराज .   एमपी के स्कूलों से 8.66 लाख बच्चे गायब, 6.1 प्रतिशत गिरा नामांकन, कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब.   दो गैंग के 16 बदमाश पकड़े, 87 लाख की ज्वेलरी और नकदी बरामद.   सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सिंहस्थ-2028 की समीक्षा, बोले- श्रद्धालुओं को न हो परेशानी.   विजयादशमी पर प्रदेश में मनाया जाएगा \'गृह प्रवेश दिवस\', 10 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ.   ग्वालियर हादसे में परिजनों को खोने वाले परिवारों को मुख्यमंत्री ने बंधाया ढांढस, दोषियों होगा सख्त एक्शन.   50 से अधिक घी के ब्रांड असुरक्षित, दुकानों से हटेगा स्टॉक, बड़े ब्रांड शामिल.   जशपुर में 5.45 करोड़ से बन रहा महादेवमुड़ा एनीकट, 150 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा से किसानों को राहत.   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, महतारी वंदन योजना को बताया नारी सशक्तिकरण की मिसाल.   पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देकर महिला उद्यमिता को नई दिशा देने की पहल.   ग्रामीणों के बीच बैठे डिप्टी सीएम, तीन गांवों में 1.55 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात.   उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ग्राम लोहझरी में ग्रामीणों के बीच बैठकर किया सीधा संवाद.   प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान.  

देश की खबरें

  नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर विजयादशमी से लागू हो रहा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने वर्चुअल बैठक में इसकी घोषणा की। गोयल ने कहा कि मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह भारत-न्यूजीलैंड की विजयी साझेदारी है। न्यूजीलैंड के बाजार में 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच से एमएसएमई, कारीगर, किसान और महिला उद्यमियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। टॉड मैक्ले ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के संबंधों में बड़ा मोड़ है। यह 1.4 अरब उपभोक्ताओं वाले भारत के बाजार का दरवाजा खोलेगा। मुख्य बिंदु जो नई खबर में जुड़े हैं पहली खेप को हरी झंडी: समझौता लागू होने के दिन भारत से न्यूजीलैंड के लिए पहली बार जेसीबी मशीन के निर्यात को हरी झंडी दिखाई गई। इसके साथ ही कृषि, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग, खेल का सामान, जूते और चमड़ा सेक्टर के उत्पादों की भी पहली खेप भेजी जाएगी। जीरो ड्यूटी का दायरा: न्यूजीलैंड ने भारतीय निर्यात को कवर करने वाली सभी टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी खत्म कर दी है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, केमिकल, फार्मा, कृषि और प्रोसेस्ड फूड को सीधा लाभ होगा। सर्विस सेक्टर में बड़ी छूट: न्यूजीलैंड ने अपने किसी भी एफटीए में अब तक का सबसे बेहतर सेवा प्रस्ताव भारत को दिया है। 118 सेक्टर में बाजार पहुंच और 139 सब सेक्टर में एमएफएन प्रतिबद्धता दी है। पहली बार आयुर्वेद, योग और आयुष प्रणालियों को शामिल किया गया है। औषधि और मेडिकल उपकरण के लिए नियम सरल किए गए हैं। कृषि उत्पादकता साझेदारी: यह समझौते का प्रमुख हिस्सा है। सेब, कीवी और शहद के लिए एक्शन प्लान बने हैं। नागालैंड के फुत्सेरो और उत्तराखंड के माग्रा में कीवी के सेंटर की पहचान हो चुकी है। हिमाचल और उत्तराखंड में सेब और उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल में शहद के सेंटर प्रस्तावित हैं। हिमाचल, नागालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अरुणाचल के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे। किसानों की सुरक्षा: डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और प्रमुख कृषि जिंसों को रियायत से बाहर रखा गया है। मजबूत रूल्स ऑफ ओरिजिन और एंटी-सर्कुलेशन प्रावधान से फर्जी निर्यात पर रोक लगेगी। भौगोलिक संकेतक को संरक्षण: न्यूजीलैंड ने भारतीय जीआई उत्पादों के पंजीकरण में मदद का वादा किया है ताकि ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को सुरक्षा मिले। 20 अरब डॉलर निवेश और व्यापार लक्ष्य: न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर निवेश सुगम बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। वार्ता 16 मार्च 2025 को शुरू होकर 22 दिसंबर 2025 को पूरी हुई थी और 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी 35 हजार करोड़ रुपये करने का रोडमैप बनाया है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 19 October 2026

देश की खबरें

नई दिल्ली। प्रेस और मीडिया के कुछ वर्गों में ऐसी खबरें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित वर्ष 2003 के विधायी घटनाक्रमों पर टिप्पणियाँ/विचार व्यक्त किए गए हैं। यह दोहराया जाता है कि केंद्रीय बजट, 2003 पर चर्चा तथा आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 पर संसदीय बहस के दौरान सरकार की हिस्सेदारी में कमी को सीमित करने के उद्देश्य से एक संशोधन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अंततः उसे अस्वीकार कर दिया गया और वह अधिनियमित कानून का हिस्सा नहीं बना। इस मामले की बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में जाँच की गई, जिसका निर्णय 17 दिसंबर, 2018 को सुनाया गया। रिट याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने अपने निर्णय के पैरा 41 और 42 में निम्नलिखित निर्णय दिया: “इस न्यायालय का मत है कि लगभग 15 वर्ष पूर्व विधायी कार्यवाही से संबंधित एक बहस के दौरान सदन के समक्ष दिए गए वक्तव्य, केंद्र सरकार को आईडीबीआई लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने से नहीं रोकेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बहस के बाद संसद द्वारा अधिनियमित कानून में उस संशोधन को शामिल नहीं किया गया था, जिसे प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया था। सदन के समक्ष दिए गए वक्तव्य संसद द्वारा अधिनियमित कानून का स्थान नहीं ले सकते और न ही उसे निष्प्रभावी कर सकते हैं। निस्संदेह, संसद इस बात से अवगत थी कि प्रस्तावित परंतुक को शामिल न करने के क्या निहितार्थ होंगे। उक्त संदर्भ में वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) के सिद्धांत पूरी तरह से लागू नहीं होते। यह स्वीकार करना संभव नहीं है कि संसद में दिए गए वक्तव्य कर्मचारियों के प्रति किए गए किसी आश्वासन के समान थे और कर्मचारियों ने उस आश्वासन के आधार पर अपने हितों के प्रतिकूल कार्य किया। सदन के समक्ष दिए गए वक्तव्य एक कानून (आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003) के अधिनियमन के संदर्भ में थे और उक्त अधिनियम की व्याख्या विधियों की व्याख्या के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप ही की जानी चाहिए।” पैरा 42: “आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003 की भाषा में कोई अस्पष्टता नहीं है और उक्त अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान निहितार्थ के आधार पर पढ़े जाने की कोई गुंजाइश नहीं है, जो सरकार को आईडीबीआई लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने या उससे अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह समाप्त करने से रोकता हो।” उपर्युक्त निर्णय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) के सिद्धांत पर विशेष रूप से विचार किया गया है, जिसका सहारा सरकार के हिस्सेदारी में कमी करने के निर्णय को चुनौती देने के लिए लिया गया था। इस सिद्धांत का उपयोग सरकार को आईडीबीआई लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने या उससे अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह समाप्त करने से रोकने के लिए नहीं किया जा सकता था।आईडीबीआई बैंक के रूपांतरण और रणनीतिक विनिवेश के संबंध में सरकार की नीति को संसद में लगातार प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट भाषणों में दोहराया गया था: केंद्रीय बजट 2016-17 — तत्कालीन माननीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली के भाषण (पैरा 93) में कहा गया था: “हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनना होगा। बैंक बोर्ड ब्यूरो को 2016-17 के दौरान कार्यान्वित किया जाएगा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समेकन के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा। आईडीबीआई बैंक के रूपांतरण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। सरकार इसे आगे बढ़ाएगी और अपनी हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से कम करने के विकल्प पर भी विचार करेगी।” केंद्रीय बजट 2021-22 — तत्कालीन माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के भाषण (पैरा 84) में कहा गया था:  “कोविड-19 के बावजूद, हमने रणनीतिक विनिवेश की दिशा में काम जारी रखा है। बीपीसीएल, एयर इंडिया, भारतीय नौवहन निगम, भारतीय कंटेनर निगम, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस और नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड सहित कई संस्थाओं से संबंधित लेन-देन 2021-22 में पूरे किए जाएंगे। आईडीबीआई बैंक के अलावा, हम वर्ष 2021-22 में दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव करते हैं। इसके लिए विधायी संशोधनों की आवश्यकता होगी और मैं इसी सत्र में संशोधन प्रस्तुत करने का प्रस्ताव करती हूँ।” आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 का विधायी इतिहास, माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायिक निर्णय और लगातार प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट भाषण सामूहिक रूप से आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश के संबंध में सरकार की नीति के विकास को दर्शाते हैं। दिनांक 17 दिसंबर, 2018 का निर्णय स्पष्ट करता है कि संसदीय बहसों के दौरान दिए गए वक्तव्यों के आधार पर वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) के सिद्धांत का सहारा लेकर आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने की सरकार की शक्ति को सीमित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने आगे यह भी कहा कि अधिनियमित कानून में आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में सरकार की हिस्सेदारी कम करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।

Madhya Bharat Madhya Bharat 18 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल। प्रदेश में पहली से 12वीं तक के सरकारी और निजी स्कूलों में इस साल नामांकन में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पिछले साल के मुकाबले 8 लाख 66 हजार 608 विद्यार्थी कम हुए हैं। कांग्रेस ने इसे शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सत्र 2025-26 में 1 करोड़ 42 लाख 31 हजार 833 बच्चों का नामांकन था, जो सत्र 2026-27 में 13 अक्टूबर तक घटकर 1 करोड़ 33 लाख 65 हजार 225 रह गया।भोपाल में ही 20 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन घटा है। मऊगंज, अलीराजपुर, अशोकनगर, शिवपुरी और गुना में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं।पटवारी ने कहा कि सरकार बताए कि बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। आर्थिक तंगी, स्कूलों से दूरी या आंकड़ों में गड़बड़ी में से असली वजह क्या है। सरकार जिलेवार सत्यापन कराए और ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने की योजना बनाए।

Madhya Bharat Madhya Bharat 19 October 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भोपाल।  मध्यप्रदेश सरकार इस विजयादशमी पर्व को प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों के लिए यादगार बनाने जा रही है। कल 20 अक्टूबर को विजयादशमी के शुभ अवसर पर संपूर्ण मध्यप्रदेश के समस्त नगरीय निकायों में 'गृह प्रवेश दिवस' मनाया जाएगा। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए अब तक 10 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर उनके अपने घर के सपने को साकार किया है। सरकार का मानना है कि पक्का आवास केवल भौतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का आधार है। *कल होगा वैदिक परंपरा से गृह प्रवेश प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत स्वीकृत ऐसे हितग्राही, जिनके आवास पूर्ण हो चुके हैं, वे कल विजयादशमी पर अपने नवनिर्मित और पूर्णतः सुसज्जित आवासों में परिवार सहित वैदिक परंपरा के अनुसार गृह प्रवेश करेंगे। राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को इस अभियान के तहत सभी पूर्ण आवासों में गृह प्रवेश सुनिश्चित करने और आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह अवसर हितग्राही परिवारों के लिए अविस्मरणीय और मंगलकारी बन सके।

Madhya Bharat Madhya Bharat 19 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे का निर्माण तेजी से चल रहा है। कांसाबेल क्षेत्र में 5 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना से लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में जल संरक्षण और किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करना है। एनीकट के जरिए बरसात के पानी को रोककर खेती में उपयोग किया जाएगा। इससे समय पर सिंचाई संभव होगी और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। एनीकट के साथ काजवे के निर्माण से स्थानीय लोगों को आवागमन में भी सुविधा होगी। 150 हेक्टेयर में सिंचाई, फसल विविधीकरण को बढ़ावा परियोजना पूरी होने पर कांसाबेल के किसानों को परंपरागत फसलों के साथ अन्य लाभकारी फसलों की खेती का अवसर मिलेगा। छोटे और सीमांत किसानों को उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। फसल विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ने से आय में सुधार की उम्मीद है। जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार एनीकट से वर्षा जल का संचयन होगा जिससे आसपास के क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा और जल स्तर में सुधार होगा। यह व्यवस्था कृषि के साथ ग्रामीणों की अन्य जल जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक होगी।विभाग के अनुसार निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा करने के लिए तेजी लाई गई है। जशपुर में सिंचाई अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।परियोजना में तेजी आने से क्षेत्र के किसानों में उत्साह है। किसानों का कहना है कि पानी की उपलब्धता बेहतर होने से खेती से जुड़ी समस्याएं कम होंगी।

Madhya Bharat Madhya Bharat 19 October 2026

छतीसगढ़ की खबरें

   रायपुर। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अपने सहज अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों की समस्याएं और मांगें सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके निराकरण के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को सुनने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने से जनसमस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को आवास का लाभ दिलाने के लिए सर्वे सूची के अनुसार आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।’बस्तर में विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर’। उप मुख्यमंत्री कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सारंगपुर कला, कारेसरा और मड़मड़ा में कुल 1 करोड़ 55 लाख 67 हजार रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण का भूमिपूजन कर ग्रामीणों को विकास की सौगात दी। इसमें ग्राम सारंगपुर कला में 47.85 लाख रुपए, कारेसरा में 59.63 लाख रुपए और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए की लागत से गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा। इन निर्माण कार्यों से तीनों गांवों में सड़क सुविधा बेहतर होगी और ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा भी की। ’गुणवत्ता से समझौता नहीं, टिकाऊ सड़क निर्माण पर जोर’       उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अधिकारियों को गौरव पथ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कें ऐसी बननी चाहिए, जो लंबे समय तक चलें और ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा दें। निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्राम बंदौरा की सड़क का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क की खराब स्थिति की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल उसे उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे। अगले ही दिन सड़क उखाड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि गांव की सड़कों का उपयोग ग्रामीण ही करते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने और किसी भी कमी की जानकारी देने में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य श्री मनीराम साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जनपद अध्यक्ष   रामकिंकर वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।       उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें सफलता मिली है। बस्तर में पेड़ों की कटाई और बड़ी खनन परियोजनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि इन विषयों पर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। 

Madhya Bharat Madhya Bharat 18 October 2026

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