12वें BRICS संसदीय मंच के समापन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संबोधन
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर।* 12वें BRICS संसदीय मंच के समापन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पिछले दो दिनों में हुई सार्थक चर्चा BRICS की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि हमारे विचार, मत और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता साझा है। बिरला ने सभी सदस्य और भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व संघर्ष, अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है, ऐसे में संवाद, विश्वास और सहयोग का महत्व बढ़ गया है। भारत का मानना है कि समस्याओं का समाधान संघर्ष नहीं, संवाद में है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे विश्व के लिए काम करना चाहिए जहां हर देश की संप्रभुता का सम्मान हो, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हो और विकास के अवसर सबको समान मिलें। वैश्विक शांति का अर्थ सबके लिए सुरक्षा, सम्मान, न्याय और बेहतर भविष्य है। बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में संसद जनता की आशाओं का केंद्र है। यह सिर्फ कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि संवाद, सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास की संस्था है। संसदों को बदलते समय के साथ अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनना होगा। उन्होंने Artificial Intelligence और डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे संसदीय कार्य प्रणाली प्रभावी होगी और सांसदों की दक्षता बढ़ेगी, लेकिन AI का उपयोग नैतिकता, पारदर्शिता और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर होना चाहिए। बिरला ने बताया कि मंच पर Joint Declaration पर सहमति बनी है। इसमें UN चार्टर, राष्ट्रों की संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा और UN द्वारा नामित आतंकियों व संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि BRICS की विविधता में सहयोग की अपार संभावना है और इसका लाभ Global South तक पहुंचना चाहिए। उद्देश्य किसी के खिलाफ नहीं, सबको साथ लेकर चलने का होना चाहिए। अंत में उन्होंने 2027 में BRICS की अध्यक्षता लेने वाले चीन को शुभकामनाएं दीं और कहा कि नई दिल्ली से संदेश स्पष्ट है - संवाद निरंतर रहे, विश्वास मजबूत हो और सहयोग ठोस परिणामों में बदले।

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