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देश की खबरें

TMC के 20 बागी सांसदों को स्पीकर का नोटिस, 7 दिन में जवाब मांगा TMC के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इन सभी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। यह मामला तृणमूल कांग्रेस की ओर से दलबदल कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग से जुड़ा है। TMC महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद इन सांसदों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया है। विवाद उस समय और गहरा गया, जब इन 20 सांसदों ने TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का दावा किया। साथ ही उन्होंने लोकसभा में अलग समूह के तौर पर मान्यता देने की मांग भी की। TMC ने इसका विरोध करते हुए संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि अगर सांसद पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी के साथ जाते हैं, तो उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसी आधार पर अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर के सामने अलग-अलग याचिकाएं भी दाखिल की थीं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। 25 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि लोकसभा स्पीकर की ओर से इन सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है और उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। अब इन सांसदों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। जवाब मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर मामले की आगे की प्रक्रिया तय करेंगे। अगर दलबदल के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सांसदों की सदस्यता पर बड़ा फैसला हो सकता है और इसका असर TMC के लोकसभा में संख्याबल पर भी पड़ सकता है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 26 August 2026

देश की खबरें

  भाग–1 : मातृत्व—सृष्टि का शाश्वत सत्य और भारतीय जीवन-दर्शन का आधार शैफाली गुप्ता विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित\"युगानुकूल मातृत्व\"विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक वैचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारतीय संस्कृति के मूल स्वर—मातृत्व—का पुनर्स्मरण थी। सभागार में देशभर से आए संत, विद्वान, शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, नीति-निर्माता तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित थीं। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालकपूजनीय श्री मोहन भागवत जीअपने सहज, संतुलित और गहन चिंतन के साथ उपस्थित थे। पूरा सभागार एकाग्र होकर उनके प्रत्येक शब्द को आत्मसात कर रहा था। उन्हीं श्रोताओं के बीच बैठकर मुझे भी इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह कोई सामान्य व्याख्यान नहीं था। यह भारतीय जीवन-दर्शन की उस मूल चेतना का उद्घोष था, जिसने हजारों वर्षों से इस सभ्यता को दिशा दी है। आधुनिकता, तकनीक, बदलते पारिवारिक ढाँचे और वैश्विक चुनौतियों के बीच भागवत जी ने जिस स्पष्टता से मातृत्व की सनातन अवधारणा को प्रस्तुत किया, वह केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। उनके उद्बोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश था—\"मातृत्व चर्चा का विषय नहीं, जीवन का शाश्वत सत्य है।\" आज जब परिवार, विवाह, संस्कार और संबंधों पर निरंतर बहस हो रही है, तब यह वाक्य हमें उस मूल सत्य की ओर लौटाता है जिसे किसी तर्क की आवश्यकता नहीं होती। जैसे सूर्य का प्रकाश सिद्ध करने के लिए प्रमाण नहीं चाहिए, वैसे ही मातृत्व की महिमा किसी बहस की मोहताज नहीं। सृष्टि के प्रारंभ से लेकर आज तक जीवन की प्रत्येक धारा मातृत्व के माध्यम से ही प्रवाहित हुई है। भारतीय संस्कृति ने मातृत्व को केवल जैविक प्रक्रिया नहीं माना। यहाँ मातृत्व सृजन है, संरक्षण है, संवर्धन है, करुणा है, त्याग है और सबसे बढ़कर संस्कार है। यही कारण है कि हमारी परंपरा ने केवल जन्म देने वाली स्त्री को ही माता नहीं कहा, बल्कि पृथ्वी कोमातृभूमि, भाषा कोमातृभाषा, गंगा कोगंगा माता, गौ कोगौमाताऔर संपूर्ण प्रकृति कोजगज्जननीका स्वरूप माना। यह दृष्टि बताती है कि जहाँ संरक्षण है, वहाँ मातृत्व है; जहाँ पोषण है, वहाँ मातृत्व है; जहाँ जीवन को आगे बढ़ाने की शक्ति है, वहीं माता का वास्तविक स्वरूप है। भागवत जी ने कहा कि सृष्टि का निर्माण, संवर्धन और पोषण मातृत्व के बिना संभव नहीं। प्रत्येक जीव की उत्पत्ति माता से होती है। प्रकृति स्वयं मातृत्व की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वह बिना किसी अपेक्षा के देती है, पोषित करती है और संतुलन बनाए रखती है। यदि मातृत्व न हो, तो केवल जन्म नहीं रुकेगा, बल्कि संवेदनाओं की पूरी परंपरा समाप्त हो जाएगी। माता : मनुष्य की प्रथम गुरु मनुष्य और अन्य जीवों में सबसे बड़ा अंतर विचार करने की क्षमता है। पशुओं में जन्म होता है, उनका व्यवहार मुख्यतः प्रकृति द्वारा संचालित होता है, किंतु मनुष्य केवल जन्म से मनुष्य नहीं बनता। उसे संस्कारों की आवश्यकता होती है, शिक्षा की आवश्यकता होती है और जीवन-दृष्टि की आवश्यकता होती है। यहीं से माता की भूमिका आरंभ होती है। बालक जब संसार में आता है, तब उसका पहला विद्यालय उसकी माँ की गोद होती है। भाषा का पहला शब्द, स्नेह का पहला अनुभव, अनुशासन का पहला संस्कार, करुणा की पहली अनुभूति और विश्वास का पहला आधार—सब कुछ माता से प्राप्त होता है। विद्यालय ज्ञान दे सकता है, विश्वविद्यालय कौशल विकसित कर सकता है, किंतु मनुष्य का चरित्र घर में ही बनता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने माता को\"प्रथम गुरु\"कहा है। माता केवल यह नहीं सिखाती कि कैसे बोलना है; वह यह भी सिखाती है कि कब मौन रहना है। वह केवल चलना नहीं सिखाती; वह यह भी सिखाती है कि किस दिशा में चलना है। वह केवल सफलता की प्रेरणा नहीं देती; वह यह भी सिखाती है कि सफलता से पहले मनुष्यता आवश्यक है। यही मातृत्व की सबसे बड़ी शक्ति है। जीवनभर का भावनात्मक आश्रय भागवत जी का एक अत्यंत मार्मिक विचार था कि मनुष्य को जीवन के प्रत्येक चरण में भावनात्मक सहारे की आवश्यकता होती है और वह सबसे अधिक माता के पास मिलता है। बालक गिरता है तो माँ की गोद में रोता है। युवक संघर्ष करता है तो सबसे पहले माँ को याद करता है। जीवन की सफलताएँ हों या असफलताएँ, मन की पीड़ा हो या प्रसन्नता—एक स्थान ऐसा रहता है जहाँ व्यक्ति बिना किसी औपचारिकता के स्वयं को व्यक्त कर सकता है। वह स्थान माँ का हृदय है। संसार के अनेक संबंध परिस्थितियों के अनुसार बदल जाते हैं। मित्र बदलते हैं, परिचय बदलते हैं, सामाजिक दायरे बदलते हैं, किंतु माँ का स्नेह जीवनभर एक समान रहता है। यही मातृत्व की सबसे बड़ी विशिष्टता है। समाज का भविष्य मातृत्व पर निर्भर है आज विज्ञान अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक और वैश्विक संचार ने दुनिया को बदल दिया है। परंतु एक प्रश्न आज भी उतना ही प्रासंगिक है—आने वाली पीढ़ी को मनुष्य कौन बनाएगा? तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन संस्कार नहीं। मोबाइल सूचना दे सकता है, लेकिन संवेदना नहीं। विद्यालय शिक्षा दे सकता है, लेकिन चरित्र नहीं। चरित्र निर्माण की यह प्रक्रिया मातृत्व से प्रारंभ होती है। यदि माता केवल पालन-पोषण तक सीमित हो जाए और संस्कार का दायित्व समाज किसी संस्था पर छोड़ दे, तो आने वाली पीढ़ी ज्ञानवान तो हो सकती है, किंतु विवेकवान नहीं। यही कारण है कि भागवत जी ने स्पष्ट कहा कि समाज का भविष्य मातृत्व पर निर्भर करता है। एक संस्कारित माता केवल अपने बच्चे का नहीं, बल्कि आने वाले समाज का निर्माण करती है। इतिहास इस सत्य का प्रमाण है। यदि छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व में राष्ट्रभक्ति और साहस दिखाई देता है तो उसके पीछे माँ जीजाबाई हैं। यदि स्वामी विवेकानंद विश्ववंदनीय बने तो उसके पीछे उनकी माता भुवनेश्वरी देवी के संस्कार हैं। यदि महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चले तो उनकी माता पुतलीबाई की धार्मिकता और अनुशासन उसका आधार बने। महान व्यक्तित्व संयोग से नहीं बनते; उनके पीछे किसी माँ का मौन तप अवश्य होता है। भारतीय जीवन-दृष्टि : हम सब एक ही चेतना के अंग हैं अपने उद्बोधन में भागवत जी ने भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांत—एकात्मता—को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत किया। भारतीय संस्कृति कहती है कि यह संसार केवल व्यक्तियों का समूह नहीं है। हम सब एक ही चेतना के विविध रूप हैं। बाहर से भले हम अलग दिखाई दें, भीतर से हम एक ही विराट अस्तित्व के अंग हैं। यही कारण है कि भारतीय चिंतन अधिकार से पहले कर्तव्य की बात करता है। यदि परिवार में प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने अधिकारों की माँग करेगा, तो परिवार टूट जाएगा। यदि समाज केवल अधिकारों पर चलेगा, तो संघर्ष बढ़ेगा। लेकिन यदि प्रत्येक व्यक्ति अपना कर्तव्य निभाएगा, तो दूसरों के अधिकार स्वतः सुरक्षित हो जाएँगे। यही भारतीय जीवन-दर्शन का मूल है। धर्म का अर्थ भी यही है—वह व्यवस्था जो समाज की धारणा करे, जो सबको जोड़कर रखे, जो व्यक्ति को स्वयं से ऊपर उठाकर समष्टि के हित में सोचने की प्रेरणा दे। इसीलिए भारतीय संस्कृति में मातृत्व केवल निजी संबंध नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। माता अपने परिवार का निर्माण करती है, परिवार समाज का निर्माण करता है और समाज राष्ट्र का निर्माण करता है। यही वह विचार है जो \"युगानुकूल मातृत्व\" को केवल महिला विमर्श नहीं रहने देता, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बना देता है।

Patrakar Shafali Gupta Shafali Gupta 24 August 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बीजेपी के दो वरिष्ठ नेताओं की मुलाकात ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के भोपाल स्थित आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर अकेले में बातचीत हुई। मुलाकात के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दरअसल, दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद से ही प्रदेश बीजेपी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। पार्टी स्तर पर चुनाव परिणाम की समीक्षा और हार के कारणों को लेकर मंथन का दौर भी चला। इसी बीच नरोत्तम मिश्रा लगातार राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे माहौल में कैबिनेट मंत्री एंदल सिंह कंसाना का उनके आवास पर पहुंचना सियासी नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से इसे सामान्य और सौजन्य मुलाकात ही बताया गया है। मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ बीजेपी नेता और मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री एंदल सिंह कंसाना उनके भोपाल स्थित आवास पर सौजन्य भेंट के लिए पहुंचे। इस दौरान दोनों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। नरोत्तम मिश्रा ने कंसाना को अपना परम मित्र बताया। फिलहाल मुलाकात को लेकर कोई राजनीतिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों नेताओं की इस मुलाकात ने भोपाल के सियासी गलियारों में चर्चाओं को जरूर बढ़ा दिया है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 26 August 2026

मध्यप्रदेश की खबरें

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, संसद के मौजूदा सत्र के बाद नई टीम का ऐलान किया जा सकता है। संगठन में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने के साथ राज्यों और अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। नई टीम में कुछ केंद्रीय मंत्रियों को भी संगठन की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है। मध्यप्रदेश से करीब 7 नेताओं के नाम राष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने की दौड़ में बताए जा रहे हैं। इनमें पहली बार विधायक बने दो नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी की नई टीम में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता देने के साथ विभिन्न राज्यों और जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर है। हालांकि, अंतिम नामों पर फैसला पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही होगा।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 17 August 2026

छतीसगढ़ की खबरें

  TET नियम में राहत और वरिष्ठता से पदोन्नति की मांग   बिलासपुर में मंगलवार को शिक्षक साझा मंच के बैनर तले जिलेभर के सैकड़ों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे। शिक्षकों ने नेहरू चौक से रैली शुरू की और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। यहां शिक्षकों ने पदोन्नति प्रक्रिया में TET की अनिवार्यता को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर और एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।   शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति के लिए TET को अनिवार्य करने से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। उन्होंने मांग की कि पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को वर्ष 2028 तक शिथिल किया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि केंद्र सरकार ने TET उत्तीर्ण करने के लिए 2028 तक का समय दिया है, इसलिए तब तक पदोन्नति प्रक्रिया में भी राहत दी जानी चाहिए। इसके साथ ही शिक्षकों ने पदोन्नति का आधार वरिष्ठता यानी ज्येष्ठता रखने और SC-ST वर्ग के शिक्षकों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ देने की मांग की है।   शिक्षक संगठनों ने कार्यरत शिक्षकों के लिए जल्द विभागीय TET परीक्षा आयोजित कराने की मांग भी रखी। इसके अलावा वेतन विसंगति दूर करने और मोदी की गारंटी से जुड़े प्रावधानों को लागू करने सहित कुल पांच सूत्रीय मांगें ज्ञापन में शामिल हैं। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। फिलहाल प्रदर्शन के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जा सकता है।

Madhya Bharat Madhya Bharat 26 August 2026

छतीसगढ़ की खबरें

रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में रेडियो डायग्नोसिस विभाग की DSA मशीन पिछले साल नवंबर से बंद है। मशीन की निर्धारित लाइफ पूरी होने के बाद इसे दोबारा चालू नहीं किया जा सका। इस मशीन से ब्रेन और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कम चीरा लगाकर इलाज किया जाता था। मशीन बंद होने से हर महीने करीब 75 से 80 मरीज प्रभावित हो रहे हैं। फिलहाल जरूरी मामलों का उपचार कैथलैब में किया जा रहा है, जबकि कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। यह मशीन वर्ष 2009 में करीब 3.95 करोड़ रुपए की लागत से लगाई गई थी। इसमें चिलर खराब होने के बाद सप्लायर कंपनी ने मेंटेनेंस से इनकार कर दिया, क्योंकि मशीन की लाइफ पूरी हो चुकी थी और कंपनी इसे करीब दो साल पहले ही कंडम घोषित कर चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन ने नई DSA मशीन खरीदने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा है, लेकिन अभी बजट मिलने और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। नई मशीन लगने से गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

Patrakar Priyanshi Chaturvedi Priyanshi Chaturvedi 17 August 2026

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