प्रस्तावित 'सीड बिल' पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसान संगठनों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार हर नीति किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। 1966 का पुराना कानून अब समय के अनुकूल नहीं'; 70% बीज मौजूदा एक्ट के दायरे से बाहर, नकली बीजों पर नकेल कसना जरूरी है। बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू (विभिन्न घटक), अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन, सोसाइटी फॉर इंडिपेंडेंट फार्मर्स एसोसिएशन (SIFA), कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज, राजस्थान व बिहार की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु का व्यवसाइगल संघम, झारखंड का प्रगतिशील कृषि मंच तथा केरल के कोट्टायम का कृषक संगठन सहित कई राज्यों के जमीनी किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे। शिवराज ने कहा 1966 का पुराना कानून अब समय के अनुकूल नहीं, जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा कि आप सब जानते हैं कि हमारा जो बीज अधिनियम है, वो 1966 में बना हुआ था और बीज नियंत्रण आदेश 83 में आया, लेकिन समय के साथ-साथ जब भी हम विकास करते हैं, तो कुछ समस्याएं सामने आती रहती हैं। अभी खऱाब बीज का उत्तरदायित्व स्थापित करने की व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली या खराब बीज बाजार में पहुंच जाते हैं। बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान किसानों की तरफ से यह सुझाव और मांग आई थी कि सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट 1966 में बने थे, और तब से लेकर अब तक परिस्थितियों में बहुत परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि नया सीड एक्ट आए और पेस्टिसाइड एक्ट भी नया आए, क्योंकि एक बड़ी समस्या घटिया बीज, घटिया पेस्टिसाइड की पहचान भी है। उन्होंने बताया कि 2025 के नवंबर-दिसंबर में बीज बिल पर सुझाव मांगे गए थे, जिन पर लगभग 18,000 सुझाव किसानों और किसान संगठनों से आए थे। उन्होंने कहा कि अभी हमने एक विचार-विमर्श भी किया, यह सिलसिला फिर प्रारंभ किया, क्योंकि जो कदम उठेगा, वो बहुत सोच-समझ के, गहराई में जाकर ही उठाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि आज लगभग 20 किसान संगठनों ने अपने सुझाव दिए, सुझाव लेने का क्रम अभी जारी रहेगा। शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कोई भी किसान संगठन हो, या किसान हो इंडिविजुअल भी, कोई भी सुझाव देना चाहे, उन सबके सुझावों का स्वागत है। उन पर संपूर्णता से और गहराई से विचार करके, हमारे किसानों के हित में, फिर एक्ट के लिए कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विचार-विमर्श की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। इसमें कोई डेडलाइन अभी तय नहीं कर रहे हैं। किसान, किसान संगठन, बाकी सुझाव देंगे, तो उन पर विचार और करेंगे, उसके बाद फिर आगे बढ़ेंगे। 70% बीज मौजूदा एक्ट के दायरे से बाहर, नकली बीजों पर नकेल कसना जरूरी- बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने चिंता व्यक्त की कि आज 70% बीज मौजूदा बीज अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। बीज की व्यवस्था भिन्न है और राज्यों की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। सजा के प्रावधान भी बहुत प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए एक नया सीड बिल लाना चाहिए, जिसकी अभी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट पर पब्लिक कंसल्टेशन के लिए सुझाव मांगे गए थे, जिन पर लगभग 18,000 सुझाव किसानों और किसान संगठनों से आए थे। कानून से किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसान अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों का उपयोग, आपस में आदान-प्रदान और विक्रय स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा, हालांकि यदि कोई किसान अपनी किस्म को पंजीकृत करवाना चाहे तो उसके लिए स्वेच्छा से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों को किसी भी तरह के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। किसान अगर बीज को उत्पादित करता है, किसी कंपनी के लिए भी करता है, या अपने पर्सनल यूज़ के लिए करता है, या गाँव में बाँटने के लिए करता है, तो उसको डिजिटल से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। शिवराज सिंह ने महामंथन देश के कृषि क्षेत्र को नकली बीजों के दंश से पूरी तरह मुक्त कराने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून किसानों के हितों को केंद्र में रखकर बनाया जा रहा है, और इसमें किसी भी तरह की कमी नहीं रहेगी। किसान सर्वोपरि, अन्य स्टेकहोल्डर्स से भी होगी चर्चा- किसानों के अलावा अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा के बारे में पूछे जाने पर शिवराज सिंह ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की जा रही है, जिनमें फार्मर प्रमुख हैं। खेती का आधार किसान है।